This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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द्वितीयक समूह में किस प्रकार के सम्बन्धों की प्रधानता पायी जाती है ? |
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Answer» द्वितीयक समूह में औपचारिक सम्बन्धों की प्रधानता पायी जाती है। |
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द्वितीयक समूह की परिभाषा दो उपयुक्त उदाहरणों के साथ दीजिए। याद्वितीयक समूह के दो उदाहरण दीजिए। |
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Answer» परिभाषा-वे समूह जो आकार में बड़े होते हैं, जिसके सदस्यों में घनिष्ठता का अभाव होता है, जिनमें अवैयक्तिक सम्बन्ध पाए जाते हैं तथा औपचारिक सम्बन्धों के कारण हम की भावना का प्रायः अभाव होता है, द्वितीयक समूह कहलाते हैं उदाहरण-महाविद्यालय, श्रमिक संघ, राष्ट्र, नगर व व्यावसायिक संघ आदि। |
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निम्नलिखित में से कौन समाजवादी चिन्तक नहीं है?(क) जयप्रकाश नारायण(ख) आचार्य नरेन्द्र देव(ग) राममनोहर लोहिया(घ) डॉ० बी०आर० अम्बेडकर |
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Answer» सही विकल्प है (घ) डॉ० बी०आर० अम्बेडकर |
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प्राथमिक समूहों को प्राथमिक क्यों कहा जाता है ? इनके तीन उदाहरण दीजिए।याप्राथमिक समूह के दो उदाहरण दीजिए। |
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Answer» कूले ने प्राथमिक समूहों को समय एवं महत्त्व की दृष्टि से प्राथमिक माना है। समय की दृष्टि से सर्वप्रथम बच्चा प्राथमिक समूहों; जैसे–परिवार, पड़ोस एवं मित्र-मण्डली के सम्पर्क में आता है। अन्य समूहों का सदस्य तो वह बाद में बनता है। चूंकि प्राथमिक समूह का व्यक्तित्व के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है, इसलिए महत्त्व की दृष्टि से भी ये प्राथमिक हैं। कूले लिखते हैं, “वैसे तो वे अनेक अर्थों में प्राथमिक हैं, किन्तु मुख्यतः इस कारण से कि वे व्यक्तियों की सामाजिक प्रकृति एवं आदर्शों के निर्माण में मौलिक हैं।” समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा प्राथमिक समूह ही बच्चे को सर्वप्रथम संस्कृति, प्रथाओं, रीति-रिवाजों, आदर्शो, मूल्यों आदि का ज्ञान कराते हैं और उसे सामाजिक आदर्शों के अनुरूप ढालने एवं आचरण करने में योग देते हैं। प्राथमिक समूह ही बच्चे में विभिन्न परिस्थितियों से अनुकूलन करने की क्षमता पैदा करते हैं जिससे कि वह अपने जीवन में आने वाली विभिन्न कठिनाइयों एवं संकटों का मुकाबला कर सके। प्राथमिक समूह ही व्यक्ति में आत्म-नियन्त्रण की भावना पैदा करते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्राथमिक समूह महत्त्व, समाजीकरण, व्यक्तित्व-निर्माण, सामाजिक नियन्त्रण, मौलिकता एवं प्राचीनता आदि की दृष्टि से प्राथमिक हैं। चार्ल्स कूले परिवार, क्रीड़ा-समूह और पड़ोस को प्राथमिक समूह मानते है। |
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कौटिल्य के अनुसार, राज्य के कितने अंग होते हैं ? (क) चार(ख) पाँच(ग) छः(घ) सात |
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Answer» सही विकल्प है (घ) सात |
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‘अर्थशास्त्र’ का लेखक कौन है ?(क) मनु(ख) शुक्राचार्य(ग) कौटिल्य(घ) भीष्म |
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Answer» सही विकल्प है (ग) कौटिल्य |
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द्वितीयक समूह की उपयोगिता की विवेचना कीजिए। |
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Answer» व्यक्तित्व के विकास और सामाजिक अनुकूलन के क्षेत्र में द्वितीयक समूहों के महत्त्व को अग्रलिखित रूप से समझा जा सकता है 1. विशेषीकरण को प्रोत्साहन-वर्तमान युग श्रम-विभाजन और विशेषीकरण को सबसे अधिक महत्त्व देता है। विशेषीकरण की योजना व्यक्ति को द्वितीयक समूहों से ही प्राप्त होती है, क्योंकि द्वितीयक समूहों की प्रकृति अपने आप में विशेषीकृत होती है। उदाहरण के लिए, एक प्राथमिक समूह अपने किसी सदस्य को एक कुशल नेता, डॉक्टर, प्रोफेसर अथवा अभिनेता नहीं बना सकता। व्यक्ति को ये स्थितियाँ केवल द्वितीयक समूह ही प्रदान कर सकते हैं। 2. सामाजिक परिवर्तन द्वारा प्रगति-द्वितीयक समूह व्यक्ति को भविष्य के प्रति आशावान बनाकर परिवर्तन को प्रोत्साहन देते हैं। वास्तविकता यह है कि हमारे समाज में आज यदि प्रथाओं, परम्पराओं, रूढ़ियों और अन्धविश्वासों का प्रभाव कुछ कम हो सका है तो इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि द्वितीयक समूहों ने हमें नये व्यवहारों को ग्रहण करने की प्रेरणा दी है। 3. जागरूकता में वृद्धि-द्वितीयक समूह परम्परा पर आधारित न होकर विवेक और तर्क को अधिक महत्त्व देते हैं। इस कारण इन समूहों में रहकर व्यक्ति का दृष्टिकोण अधिक तार्किक बन जाता है। आज द्वितीयक समूहों के प्रभाव से ही अनेक उपनिवेशवादी समाजों को अपनी दमनकारी नीति को छोड़ना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, स्त्रियों की वर्तमान उन्नति और श्रमिक वर्ग को प्राप्त होने वाले अधिकार भी द्वितीयक समूहों के कारण ही सम्भव हो सके हैं। 4. आवश्यकताओं की पूर्ति-औद्योगीकरण के युग में व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति केवल द्वितीयक समूह में रहकर ही सम्भव है। वर्तमान युग में कार्य करना आवश्यक हो गया है। उदाहरण के लिए, शिक्षा प्राप्त करना, किसी कारखाने या कार्यालय में नौकरी करना, राजनीतिक संगठनों से सम्बन्ध बनाये रखना, अनेक कल्याण संगठनों में रहकर कार्य करना, स्थानीय अथवा राष्ट्रीय मामलों में रुचि लेना आदि व्यक्ति की प्रमुख आवश्यकताएँ हैं। इन सभी आवश्यकताओं को केवल द्वितीयक समूह ही पूरा करते हैं। 5. श्रम को प्रोत्साहन-द्वितीयक समूहों ने श्रम को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में स्वीकार करके सामाजिक प्रगति में विशेष योगदान दिया है। द्वितीयक समूह व्यक्ति को श्रम का वास्तविक पुरस्कार देकर उसे अधिक-से-अधिक काम करने की प्रेरणा देते हैं। इससे व्यक्ति का जीवन कर्मठ बनता है। |
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आर्थर स्लेशिंगर तथा गार्नर ने कल्याणकारी राज्य की क्या परिभाषा दी है? |
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Answer» आर्थर स्लेशिंगर के शब्दों में, “कल्याणकारी राज्य वह व्यवस्था है जिसके अन्तर्गत शासन अपने समस्त नागरिकों हेतु रोजगार, आय, चिकित्सा, शिक्षा, सहायता, सामाजिक सुरक्षा एवं आवास के कुछ स्तर स्थापित करने हेतु तैयार रहता है।” |
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आधुनिक राज्य के चार प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» आधुनिक राज्य के चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं- ⦁ शान्ति एवं व्यवस्था की स्थापना, |
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व्यक्तिवाद की चार विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» व्यक्तिवादी सिद्धान्त की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं- ⦁ व्यक्तिवाद राज्य को एक आवश्यक बुराई मानता है। |
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व्यक्ति सामाजिक संबंधों का निर्माण कब करते हैं ? |
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Answer» जब दो या दो से अधिक व्यक्ति अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं, परस्पर अन्त:क्रिया करते हैं, एक-दूसरे को अर्थपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं एवं एक-दूसरे से प्रभावित होते हैं तो वे सामाजिक संबंधों का निर्माण करते हैं। |
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राज्य के कार्यों के सम्बन्ध में व्यक्तिवादी दृष्टिकोण का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। याराज्य के कार्यों का व्यक्तिवादी सिद्धान्त क्या है? इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।याव्यक्तिवाद से आप क्या समझते हैं ? इसके गुण एवं दोषों की विवेचना कीजिए।या“राज्य एक आवश्यक बुराई है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने विचारों के पक्ष में तीन तर्क दीजिए। याव्यक्तिवाद की विशेषताएँ बतलाइए तथा समाजवाद से इसका अन्तर स्पष्ट कीजिए।या“राज्य एक अनिवार्य बुराई है।” इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» व्यक्तिवादी सिद्धान्त बेन्थम के शब्दों में, “व्यक्ति के हित को समझे बिना समुदाय के हित की कल्पना करना कोरी बकवास है।” स्पेन्सर के शब्दों में, “विधानमण्डलों के अँगूठा टेक, अशिक्षित तथा अनुभवहीन सदस्यों ने अतीत में अनेक भयंकर भूलें करके समाज को हानि पहुँचाई है। अतः भविष्य में उन पर कोई विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। व्यक्तिवादी मत के अनुसार राज्य का कार्यक्षेत्र व्यक्तिवाद की विशेषताएँ व्यक्तिवाद के पक्ष में तर्क (गुण) व्यक्तिवादी सिद्धान्त की आलोचना (दोष) व्यक्तिवाद और समाजवाद में अन्तर उद्योगों के प्रति दृष्टिकोण |
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“समाज सामाजिक संबंधों का जाल है।” यह कथन किस विद्वान का है? |
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Answer» यह कथन मैकाइवर तथा पेज का है। |
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“समाजशास्त्र अन्य सामाजिक विज्ञानों की न तो दासी है और न ही मालकिन है, बल्कि यह उनकी बहन है।” यह कथन किस विद्वान का है? |
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Answer» यह कथन बांर्स एवं बेकर का है। |
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सामाजिक विज्ञानों की अध्ययन सामग्री क्या है तथा उनमें पारस्परिक संबंध क्यों है ? |
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Answer» सामाजिक विज्ञानों में मानवीय क्रियाओं, समाज और सामाजिक घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। विभिन्न सामाजिक विज्ञानों में से प्रत्येक के द्वारा सामाजिक जीवन के किसी-न-किसी पहलू का अध्ययन किये जाने के कारण उन सभी में पारस्परिक सम्बन्धों का होना स्वाभाविक है। |
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“समाज एक प्रकार की चेतना है।” यह कथन किस विद्वान का है? |
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Answer» यह कथन गिडिंग्स का है। |
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किस विद्वान ने वर्गविहीन समाज की कल्पना की है? |
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Answer» ‘वर्गविहीन समाज’ की कल्पना कार्ल मार्क्स ने की है। |
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समूहों के दो प्रकार क्या हैं? |
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Answer» ⦁ अन्तः समूह तथा |
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सकारात्मक एवं नकारात्मक समूह की अवधारणा किसने प्रतिपादित की थी ? |
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Answer» सकारात्मक एवं नकारात्मक समूह की अवधारणा न्यू कॉम्ब ने प्रतिपादित की थी। |
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समूह के लिए आवश्यक है(क) दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना।(ख) दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सामाजिक चेतना का होना(ग) अधिक व्यक्तियों का एकत्र होना(घ) व्यक्तियों के बीच संचारविहीनता का होना |
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Answer» (क) दो या दो से अधिक व्यक्तियों का होना |
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समाजवाद के पक्ष में दो तर्क दीजिए। |
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Answer» ⦁ यह न्याय पर आधारित है तथा |
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राज्य के समाजवादी सिद्धान्त के पक्ष में दो तर्क दीजिए। |
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Answer» ⦁ समाजवाद श्रमिकों एवं गरीबों के शोषण का विरोध करता है तथा |
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समाजवाद के अनुसार राज्य का कार्यक्षेत्र बताइए।यासमाजवादी राज्य के कार्यों का परीक्षण कीजिए। |
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Answer» राज्य के कार्यक्षेत्र का निर्धारण करने की दृष्टि से समाजवादी सिद्धान्त व्यक्तिवादी सिद्धान्त के ठीक विपरीत है। व्यक्तिवाद जहाँ राज्य के सीमित कार्यक्षेत्र पर बल देता है वहीं समाजवाद राज्य के उन समस्त कार्यों को सम्पादित करने को कहता है, जिनसे समाज की उन्नति सम्भव है। इसके अतिरिक्त समाजवाद की मान्यता है कि राज्य को उत्पत्ति एवं वितरण के साधनों पर नियन्त्रण रखकर स्वयं ही सार्वजनिक हित के कार्यों का सम्पादन करना चाहिए। अतः कहा जा सकता है कि समाजवाद के अनुसार प्रायः सामाजिक जीवन के समस्त कार्य राज्य के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत आ जाते हैं। इस सम्बन्ध में गार्नर का यह कथन उचित ही है, “राज्य मानव विकास की सर्वोच्च संस्था है। उसका कार्यक्षेत्र व्यापक है। वह व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक एवं नैतिक सभी क्षेत्रों के हितों की अभिवृद्धि करती है।” |
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कौन-सी संकल्पना गुणात्मक है ?(A) राष्ट्रीय आय की वृद्धि दर(B) प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धि दर(C) आर्थिक वृद्धि(D) आर्थिक विकास |
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Answer» सही विकल्प है (D) आर्थिक विकास |
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माइकल टोडेरो के अनुसार आर्थिक विकास क्या है ? |
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Answer» माइकल टोडेरो के अनुसार – ‘आर्थिक विकास यह बहुपरिमाणीय प्रक्रिया है ।’ |
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लोकतान्त्रिक समाजवाद की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।यापण्डित जवाहरलाल नेहरू के लोकतान्त्रिक समाजवाद पर एक लेख लिखिए। |
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Answer» ‘लोकतन्त्रवाद’ और ‘समाजवाद’ के संयोग से जिस उदार समाजवाद की रचना हुई उसे ही लोकतान्त्रिक समाजवाद (Democratic Socialism) कहा जाता है। आज के युग में जबकि पश्चिमी पूँजीवादी लोकतन्त्र चीनी उग्र साम्यवाद से लोगों की आस्था समाप्त होती जा रही है, लोकतान्त्रिक समाजवाद दक्षिण और वाम दोनों ही विचारों को सामंजस्य करते हुए एक मध्यममार्गी समाजवाद का रूप ले रहा है। फ्रांस, इंग्लैण्ड, इटली और अब भारत में भी इसी प्रकार के समाजवाद का रूप विभिन्न राजनीतिक दलों के माध्यम से अभिव्यक्त हो रहा है। भारत में लोकतान्त्रिक समाजवाद ने पण्डित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अपना रास्ता तय किया। कांग्रेस द्वारा समाजवादी व्यवस्था को अपना लक्ष्य घोषित कराने में नेहरू जी की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रही है। पण्डित नेहरू का लोकतान्त्रिक समाजवाद भारत में लोकतान्त्रिक समाजवाद |
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व्यक्तिवाद और समाजवाद का अन्तर समझाइए। उद्योगों के निजीकरण की प्रवृत्ति इन दोनों में से किसकी अवधारणा के प्रतिकूल है? कारण का भी उल्लेख कीजिए। |
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Answer» व्यक्तिवाद और समाजवाद का अन्तर उद्योगों के प्रति दृष्टिकोण |
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समाजवादी राज्य की अवधारणा का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यासमाजवादी राज्य के कार्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। |
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Answer» समाजवाद की आलोचना |
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समाजवाद के दो दोष लिखिए। |
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Answer» ⦁ सरकार की शक्ति में अधिक वृद्धि तथा |
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राज्य के कार्यों से सम्बन्धित कौटिल्य के विचारों का विवेचन (उल्लेख) कीजिए। याआचार्य कौटिल्य द्वारा प्रतिपादित राज्य की अवधारण बताइए। कौटिल्य द्वारा प्रतिपादित राज्य सम्बन्धी सप्तांग सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।याकौटिल्य के राजनीतिक विचारों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» कौटिल्य ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रन्थ ‘अर्थशास्त्र में राज्य के कार्यों और राजा के कर्तव्यों का विस्तार से उल्लेख किया है। कौटिल्य प्रजा के सुख को सर्वोपरि मानते हैं। यह उनकी विचारधारा का मूल आधार है। उन्होंने लिखा है- 1. अनुबन्धवाद – कौटिल्य के अनुसार, मनुष्यों ने राजा की आज्ञाओं के पालन की जो प्रतिज्ञा की उसके बदले में राजा ने अपनी प्रजा के धन-जन की रक्षा का वचन दिया था। इसीलिए राजा प्रजा के जन-धन को हानि पहुँचाने वाला कोई कार्य नहीं कर सकता। कौटिल्य का मत है कि राजा की स्थिति वेतन-भोगी सैनिकों के समान ही होती है, अर्थात् राजा राजकोष से निश्चित वेतन ले सकता है। उसे मनमाने ढंग से राज्य की सम्पत्ति को व्यय करने का अधिकार नहीं था। |
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समाजवाद की कोई दो मान्यताएँ बताइए। |
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Answer» ⦁ व्यक्ति की अपेक्षा समाज को प्राथमिकता तथा |
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आज ऐशिया आफ्रिका और …………………………. के देश आर्थिक विकास के लिए सक्रिय बने हैं ।(A) रशिया(B) युरोप(C) अन्टार्कटिका(D) लेटिन अमेरिका |
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Answer» सही विकल्प है (D) लेटिन अमेरिका |
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आर्थिक विकास के निर्देशक के रूप में जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक में सुधार के बारे में चर्चा कीजिए । |
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Answer» आर्थिक विकास के निर्देशक के रूप में राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में मर्यादा देखी गयी तब जीवन की भौतिक गुणवत्ता में सुधार को नया निर्देशक स्वीकार किया गया । जीवन की भौतिक गुणवत्ता में तीन बातों का समावेश किया जाता है : (1) शिक्षा का प्रमाण : सामान्य रूप से साक्षरता अर्थात् देश में शिक्षा प्राप्त करनेवाली जनसंख्या के देश में कितनी जनसंख्या प्रतिशत में साक्षर है इसके आधार पर शिक्षा का प्रभाव जान सकते हैं । (2) अपेक्षित औसत आयु : बालक जन्म के समय से कितने वर्ष की आयु जियेगा उसकी अपेक्षा को अपेक्षित औसत आयु कहते है । (3) बाल मृत्युदर : एक वर्ष में प्रति हजार बालकों में से एक वर्ष की आयु से पूर्व मृत्यु पाने बालको की संख्या को बालमृत्युदर कहते हैं । जीवन के भौतिक गुणवत्ता अंक की रचना : इन तीनों मापदण्डों के आधार पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने जीवन के भौतिक गुणवत्ता अंक की रचना की । जिसका मूल्य 0 से 100 के बीच होता है । |
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आर्थिक विकास के कारण लोगों की ………………………… में परिवर्तन आता है ।(A) पूर्ति(B) जत्था(C) माँग(D) सीमांत आय |
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Answer» सही विकल्प है (C) माँग |
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देश की आर्थिक विकास में वृद्धि होने से …………………….(A) कृषि क्षेत्र का हिस्सा घटता है ।(B) कृषि क्षेत्र का हिस्सा बढ़ता है ।(C) औद्योगिक क्षेत्र का योगदान घटता है ।(D) सेवा क्षेत्र का योगदान घटता है । |
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Answer» सही विकल्प है (A) कृषि क्षेत्र का हिस्सा घटता है । |
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HDI में किस वर्ष में सुधार किया गया ?(A) 2009(B) 2011(C) 2008(D) 2010 |
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Answer» सही विकल्प है (D) 2010 |
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जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक का मूल्य कितना होता है ?(A) 0 से 1 के बीच(B) 0 से 100 के बीच(C) शून्य(D) 100 |
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Answer» सही विकल्प है (B) 0 से 100 के बीच |
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मानवविकास अंक किसने प्रस्तुत किया ?(A) UNDP(B) UNO(C) U.S.(D) U.K. |
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Answer» सही विकल्प है (A) UNDP |
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वर्ष 2014 में मानवविकास अंक की गणना में कितने देशों का समावेश किया गया था ?(A) 100(B) 150(C) 188(D) 200 |
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Answer» सही विकल्प है (C) 188 |
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2014 में मानवविकास अंक की दृष्टि से अंतिम क्रम पर कौन-सा देश था ? |
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Answer» 2014 में मानवविकास अंक की दृष्टि से अंतिम क्रम पर नाइजीरिया था । |
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मानवविकास अंक के महत्त्व की चर्चा कीजिए । |
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Answer» मानवविकास अंक का महत्त्व निम्नानुसार है :
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मानवविकास अंक (HDI) की मर्यादाओं की चर्चा कीजिए । |
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Answer» मानवविकास अंक की मर्यादाएँ नीचे देख सकते हैं :
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जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक की मर्यादाओं को संक्षिप्त में समझाइए । |
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Answer» जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक मानव की भौतिक सुख-समृद्धि का निर्देशक है । इसलिए उसे आर्थिक विकास का उचित निर्देशक माना गया है । परंतु जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक में भी कुछ मर्यादाएँ हैं जो आर्थिक विकास को निर्देशित नहीं करती हैं, जैसे :
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जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक (PQLI) के महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष की चर्चा कीजिए । |
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Answer» जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक (PQLI – Physical Quality Life Index) के महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निम्नानुसार हैं :
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जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक की रचना किस अर्थशास्त्री ने की ?(A) मोरिस डेविस(B) थोमस माल्वस(C) मार्शल(D) मेकलप |
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Answer» सही विकल्प है (A) मोरिस डेविस |
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2014 में मानवविकास अंक की दृष्टि से विश्व में प्रथम क्रम पर कौन-सा देश था ? |
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Answer» 2014 में मानवविकास अंक की दृष्टि से विश्व में प्रथम क्रम पर नोर्वे था । |
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पाकिस्तान की प्रतिव्यक्ति आय ………………………… ।(A) 6648 डॉलर(B) 6468 डॉलर(C) 4866 डॉलर(D) 580 डॉलर |
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Answer» सही विकल्प है (C) 4866 डॉलर |
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जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक में साक्षरता का प्रमाण, अपेक्षित आयु एवं बालमृत्युदर इन्ही तीन निर्देशकों का समावेश क्यों होता है ? |
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Answer» जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक में साक्षरता, अपेक्षित आयु एवं बालमृत्युदर इन्ही तीन निर्देशकों का ही निम्नलिखित कारणों से समावेश किया जाता है ?
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राष्ट्रीय आय की तुलना में प्रतिव्यक्ति आय का मापदण्ड किस लिए अधिक श्रेष्ठ है ? |
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Answer» राष्ट्रीय आय आर्थिक विकास का उचित निर्देशक हैं । परंतु राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर जनसंख्या वृद्धिदर से कम हुयी तो प्रतिव्यक्ति आय कम हो जाएगी और लोगों के जीवनस्तर पर विपरीत असर पड़ेगा । प्रतिव्यक्ति आय में आय के साथ जनसंख्या को भी ध्यान में लिया जाता है । इसलिए प्रतिव्यक्ति आय के बढ़ने से लोगों के जीवनस्तर में सुधार होगा । इसलिए उचित निर्देशक है । |
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‘समूह मन के सिद्धान्त (Group-mind Theory) के प्रतिपादक कौन हैं ? |
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Answer» समूह मन के सिद्धान्त’ (Group-mind Theory) के प्रतिपादक मैक्डूगल हैं। |
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