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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

 2014 में HDI के कितने देशों के आंक प्रस्तुत किया गया ?

Answer»

2014 में HDI के 188 देशों के आंक प्रकाशित हुये हैं ।

2.

राज्य से सम्बन्धित मनु व कौटिल्य के सप्तांग सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।याआचार्य मनु द्वारा प्रतिपादित साप्तांग सिद्धान्त के अनुसार राज्य के किन्हीं दो अंगों के नाम लिखिए।

Answer»

भारत की प्राचीन राजनीतिक विचारधारा के अन्तर्गत मनु और कौटिल्य दो जाज्वल्यमान क्षेत्र हैं तथा इन दोनों की विचारधारा एक-दूसरे के बहुत अधिक समान है। मनुस्मृति (जिसे कि हिन्दू विधि की सम्पूर्ण व्यवस्था की आधारशिला माना जाता है।) के अन्तर्गत राज्य के सावयव स्वरूप (Organic form) की चर्चा की गई है; अर्थात् इसके राज्य की कल्पना जीवित जाग्रत शरीर के रूप में की गई है तथा राज्य को सप्तांगी माना गया है। मनुस्मृति के अनुसार, राज्य के सात । 

अंग इस प्रकार हैं—(1) स्वामी (राजा), (2) मन्त्री, (3) पुर, (4) राष्ट्र, (5) कोष, (6) दण्ड तथा (7) मित्र। 

मनुस्मृति में चारों दिशाओं में व्याप्त एक विशाल राज्य का चित्र खींचा गया है जिसके आधार पर सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है, अथवा यह सम्भावना की जा सकती है। कि इस ग्रन्थ की रचना के समय एक सुविशाल प्रदेश को राजनीतिक एकता प्राप्त हो चुकी थी। आचार्य कौटिल्य ने भी अपने ग्रन्थ ‘अर्थशास्त्र में राज्य के सप्तांग सिद्धान्त का वर्णन किया है। इस प्रकार कौटिल्य के अनुसार भी राज्य का निर्माण सप्त अंगों अथवा तत्त्वों से मिलकर हुआ है।
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि राज्य की संरचना, प्रकार्यों एवं प्रकृति का अध्ययन एवं विश्लेषण करने के उद्देश्य से मनु एवं कौटिल्य दोनों ने राज्य की तुलना मानव शरीर से की है; अर्थात् उसे एक जीवित शरीर के रूप में निरूपित किया है तथा उसके सात अंग बताये हैं। 

राज्य के इन सात अंगों का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-
1. स्वामी – मनु और कौटिल्य दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य के समस्त अंगों में सबसे महत्त्वपूर्ण अंग स्वामी अथवा राजा है, परन्तु उसे निरंकुश व स्वेच्छाचारी नहीं, अपितु धर्म के अधीन माना गया है।
2. मन्त्री अथवा आमात्य – राजा की सहायता एवं उसे परामर्श देने के लिए मन्त्रिपरिषद् की व्यवस्था पर बल दिया गया है।
3. पुर अथवा दुर्ग – यह कहा गया है कि सैन्य शक्ति का प्रयोग पुर अथवा दुर्ग से ही भली भॉति सम्भव है। यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का प्रतीक है। जिसका दुर्ग सुदृढ़ होता है उस राज्य को परास्त करना सरल नहीं है।
4. जनपद – जनपद में जनता तथा भूमि के भागों को सम्मिलित किया गया है।
5. कोष – राज्य की शक्ति एवं उसकी सुदृढ़ता के लिए एक धन-धान्य से पूर्ण राजकोष होना चाहिए तथा उसकी क्षमता इतनी होनी चाहिए कि वह आपातकाल में राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके।
6. दण्ड अथवा सेना – राज्य की सुरक्षा के लिए दण्ड अथवा सेना का विशिष्ट महत्त्व होता है। सुरक्षा एवं आक्रामक-नीति दोनों को अपनाने के लिए एक प्रशिक्षित, अनुशासित, राष्ट्रभक्त तथा निष्ठावान सेना होनी चाहिए।
7. मित्रराष्ट्र की शक्ति के लिए उसके मित्र – राष्ट्रों की संख्या अधिकाधिक होनी चाहिए। | इस प्रकार हम देखते हैं कि मनु तथा कौटिल्य की विचारधारा एक-दूसरे के बहुत-कुछ समान है तथा दोनों ने सप्तांग सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है।

3.

समाजवाद के दो समर्थकों के नाम लिखिए।

Answer»

⦁    कार्ल माक्र्स तथा
⦁    जयप्रकाश नारायण।

4.

आर्थिक विकास के लक्षणों की विस्तृत चर्चा कीजिए ।

Answer»

आर्थिक विकास एक गुणात्मक प्रक्रिया है । उसे जानना कठिन हैं । इसलिए आर्थिक विकास को जानने के लिए उसके निम्नलिखित लक्षणों की चर्चा करेंगे ।

(1) आर्थिक विकास यह निरंतर चलनेवाली प्रक्रिया हैं : आर्थिक, विकास एक निरंतर एक निश्चित दिशा में नियत क्रम में धीमी परंतु मजबूत प्रक्रिया है । किसी भी देश में विकास की प्रक्रिया शुरू करना सरल है परंतु उसे बनाये रखना कठिन है । सामान्य रूप से विकास की प्रक्रिया आरम्भ में तेज होती है और समय के बाद धीमी पड़ जाती है ।

(2) परिमाणात्मक और गुणात्मक परिवर्तन होता है : आर्थिक विकास में उत्पादन में वृद्धि यह परिमाणात्मक परिवर्तन है । और संशोधनों द्वारा वस्तु की गुणवत्ता में सुधार जैसे गुणात्मक परिवर्तन भी होते हैं । इस प्रकार आर्थिक विकास परिमाणात्मक और गुणात्मक परिवर्तन है ।

(3) मांग में परिवर्तन : विकास होने से लोगों की आय बढ़ती है । जिससे रूचि बदलती है परिणाम स्वरूप मांग भी परिवर्तित होती है । विकास के आरम्भ के सोपान में प्राथमिक वस्तु की माँग बढ़ती है । उसके बाद मौज-शौख की और सुख-समृद्धि की वस्तुओं की मांग में वृद्धि होती है ।

(4) श्रम की गतिशीलता में वृद्धि : आर्थिक विकास की प्रक्रिया में साक्षरता में वृद्धि होती है । परिणाम स्वरूप श्रम की गतिशीलता में वृद्धि होती है ।

(5) पूँजी सर्जन में वृद्धि : आर्थिक विकास होने से लोगों की आय में वृद्धि होती है । परिणाम स्वरूप वस्तु की मांग में वृद्धि होती है । जिससे नये साहस आगे आते हैं । परिणाम स्वरुप, पूँजी सर्जन और पूँजीनिवेश में वृद्धि होती है ।

(6) टेक्नोलोजी में परिवर्तन होता है : आर्थिक विकास की प्रक्रिया में अग्नि और पानी पर आधारित टेक्नोलोजी के स्थान पर कोयला और लोहे पर आधारित टेक्नोलोजी अपनाने से विकास दर तीव्र बनती है ।

(7) विकास की प्रक्रिया स्वयंभू : आर्थिक विकास की प्रक्रिया के आरम्भ के सोपान में गति तीव्र होती है । लेकिन एक समय के बाद आर्थिक विकास की प्रक्रिया स्वयंभू होती है ।

5.

आर्थिक विकास के निर्देशक के रूप में राष्ट्रीय आय की चर्चा कीजिए ।

Answer»

आर्थिक विकास के निर्देशक चार हैं :

  1. राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर
  2. प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर
  3. जीवन की भौतिक गुणवत्ता में सुधार
  4. मानवविकास अंक

अब इनमें से राष्ट्रीय आय निर्देशक की चर्चा करेंगे ।

राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर : किसी भी देश का आर्थिक विकास उस देश की राष्ट्रीय आय पर निर्भर करता है । यदि राष्ट्रीय आय में वृद्धि हो रही हो तो उस देश का आर्थिक विकास हो रहा है । राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर अधिक तो आर्थिक विकास अधिक वृद्धिदर कम तो आर्थिक विकास कम यदि राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर स्थिर तो आर्थिक विकास भी स्थिर हो जाता है । इस मापदंड में राष्ट्रीय आय में मात्र मुद्राकीय आय नहीं परंतु वास्तविक आय को ध्यान में लिया जाता है । तथा राष्ट्रीय आय की गणना बाज़ार कीमत पर नहीं परंतु स्थिर भाव पर की जाती है ।

चीन और भारत की राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर 7.3% है । जो नोर्वे 2.2%, अमेरिका 2.4%, श्रीलंका 4.5% और पाकिस्तान 4.7% से अधिक है । इसलिए भारत विश्व के तीव्र गति से विकास करनेवाला अर्थतंत्र गिना जाता है । परंतु हमें यहाँ यह नहीं भूलना चाहिए कि नोर्वे और अमेरिका का पहले ही आर्थिक विकास अधिक हो चुका है । इसलिए वृद्धिदर नीची है । क्योंकि . एक बार वृद्धि होने के बाद धीमी हो जाती है ।

6.

राज्य के कार्यों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है ? 

Answer»

⦁    आवश्यक या अनिवार्य कार्य,
⦁    ऐच्छिक कार्य।

7.

POLI और HDI की तुलना कीजिए और दोनों में कौन-सा निर्देशक श्रेष्ठ है ? क्यों ?

Answer»

PQLI – (Physical Quality Life Index) जीवन की भौतिक गुणवत्ता में शिक्षा, अपेक्षित औसत आयु तथा बालमृत्युदर का समावेश किया जाता है ।

साक्षरता : जीवन की भौतिक गुणवत्ता का महत्त्वपूर्ण मापदंड है । साक्षरता में वृद्धि व्यक्ति के कल्याण में वृद्धि को दर्शाती । है । व्यक्ति की कुशलता और देश के विकास के लिए आवश्यक है ।

अपेक्षित आयु : यह सामाजिक परिस्थिति और सुख-समृद्धि का प्रतिबिम्ब है । अपेक्षित आयु में वृद्धि अच्छे स्वास्थ्य का निर्देशक है ।

बालमृत्युदर : बालमृत्युदर भी सामाजिक परिस्थिति और सुख-समृद्धि का प्रतिबिम्ब है । बालमृत्युदर में कभी स्वच्छ पानी, घर का पर्यावरण, महिलाओं की स्थिति आदि को दर्शाती है ।

इन तीनों के आधार पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मौरिस डेविस ने POLI अंक की रचना की जिसका मूल्य 0 से 100 के बीच होता है । इसके आधार पर उसके लोगों की भौतिक स्थिति को जाना जा सकता है । दो देश या दो राज्यों की तुलना कर सकते हैं ।

PQLI की कुछ मर्यादाएँ हैं : जैसे –

  1. इसमें माग, शिक्षा, बालमृत्यु दर और अपेक्षित औसत आयु का ही समावेश होता है । अर्थात् अन्य बातों की अवहेलना करते हैं ।
  2. PQLI अंक औसत अंक है । इसलिए इसके आधार पर सही निर्णय नहीं ले सकते हैं ।
  3. वर्तमान PQLI अंक अधिक हो तो दूसरे देशों से श्रेष्ठ है ऐसा सामान्यीकरण नहीं कर सकते हैं ।
  4. तीनों मापदण्डों को समान महत्त्व दिया जाता है जो अयोग्य हैं । क्योंकि तीनों का मानवजीवन में एकसमान महत्त्व नहीं होता है ।

HDI – Human Development Index (मानवविकास अंक) :

PQLI की मर्यादाओं को देखकर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने मानवविकास अंक (HDI) नया निर्देशक प्रस्तुत किया । जिसमें तीन बातों का समावेश होता है ।

(1) अपेक्षित औसत आयु : इसमें देश की जनसंख्या की जन्म के समय अपेक्षित औसत आयु कितनी है । इसका ध्यान रखा है । औसत आयु के आधार पर उस देश का स्वास्थ्य जान सकते हैं ।

(2) साक्षरता : साक्षरता में बालक (15 वर्ष से कम) और प्रौढ़ (15 वर्ष से अधिक) कितनी साक्षरता है । इसके आधार पर उस देश की साक्षरता को जान सकते हैं ।

(3) जीवनस्तर : जीवनस्तर को उस देश की जनता को शुद्ध पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य, बालमृत्युदर, प्रतिव्यक्ति दैनिक प्राप्त कैलरी प्राप्त होती है । उसे जान सकते हैं । जीवनस्तर को जानने के लिए उस देश की प्रतिव्यक्ति आय को ध्यान में रखकर अमेरिकन डॉलर में परिवर्तित करके अर्थात् समखरीद शक्ति के आधार पर जीवनस्तर मापा जाता है ।

इन तीनों के आधार पर मानव विकास अंक की रचना की जाती है । जिसका मूल्य 0 से 1 होता है ।

निष्कर्ष : PQLI और HDI में से HDI आर्थिक विकास का अद्यतन और अधिक श्रेष्ठ निर्देशक है । क्योंकि मानवविकास अंक की रचना में POLI के घटकों का भी समावेश होता है । तथा अन्य बातों का भी समावेश होता है । तथा मानवविकास अंक के आधार पर अलग-अलग देशों की तुलना भी सरलता से कर सकते हैं ।

8.

आर्थिक विकास के निर्देशकों को संक्षिप्त में समझाइए ।

Answer»

आर्थिक विकास के निर्देशक चार हैं :
(1) राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर
(2) प्रति व्यक्ति आय की वृद्धिदर
(3) जीवन की भौतिक गुणवत्ता और अंक
(4) मानवविकास अंक में वृद्धि

(1) राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर : जिस देश की राष्ट्रीय आय में दीर्घकालीन समय तक वृद्धि हो रही हो तो उस देश का आर्थिक विकास हो रहा है । ऐसा मानेंगे । राष्ट्रीय आय की वृद्धि आर्थिक विकास में वृद्धि, राष्ट्रीय आय में कमी तो आर्थिक विकास नीचा यदि राष्ट्रीय आय स्थिर तो आर्थिक विकास स्थिर है । राष्ट्रीय आय भी बाज़ार भाव पर नहीं स्थिर भाव पर की जाती है।

भारत की राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर 7.3% हैं जो नोर्वे और अमेरिका से अधिक है । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भारत विश्व में शीघ्रता से विकसित होनेवाला अर्थतंत्र हैं ।

(2) प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर : राष्ट्रीय आय की अपेक्षा प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक विकास का उचित निर्देश है । क्योंकि प्रतिव्यक्ति आय में जनसंख्या को भी ध्यान में लिया जाता है । राष्ट्रीय आय की तरह ही प्रतिव्यक्ति आय अधिक तो आर्थिक विकास अधिक कम तो नीची विकासदर स्थिर तो आर्थिक विकास भी स्थिर माना जाता है ।
भारत की प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर 6.0% है । जो नोर्वे (1.1%), अमेरिका (1.6%) से अधिक है जो आर्थिक विकास को सूचित करती है ।

(3) जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक : जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक में तीन बातें :
(1) साक्षरता (2) अपेक्षित औसत आयु और (3) बालमृत्युदर इन निर्देशकों के आधार पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्रीने जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक (PQLI) की रचना की जिसका मूल्य 0 से 100 होता है ।

(4) मानवविकास अंक में वृद्धि : उपर के निर्देशकों की मर्यादाओं को देखकर 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), HDI अंक आर्थिक विकास का नया निर्देशक प्रस्तुत किया । मानवविकास अंक की रचना में तीन बातों का समावेश होता है । (1) अपेक्षित औसत आयु (2) साक्षरता (3) अच्छा जीवनस्तर ।

इन निर्देशकों के आधार पर मानवविकास अंक की रचना की जाती है । जिसका मूल्य 0 से 1 होता है । इस अंक के आधार पर कौन-सा देश श्रेष्ठ है और कौन-सा देश कनिष्ठ है । ऐसा ख्याल आता है ।

9.

समाजवाद क्या है? यह किन सिद्धान्तों पर आधारित है? किन्हीं तीन सिद्धान्तों को विस्तार से समझाइए। यासमाजवाद के मूल सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए। यासमाजवाद के किन्हीं चार सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

समाजवादी विचारधारा की उत्पत्ति व्यक्तिवाद की प्रतिक्रिया के रूप में हुई और वर्तमान समय में यह विचारधारा बहुत अधिक लोकप्रिय है। समाजवाद का अंग्रेजी पर्यायवाची ‘Socialism’, *Socius’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ समाज और जैसा कि शब्द व्युत्पत्ति से ही स्पष्ट है। समाजवाद व्यक्तिवाद के विरुद्ध समाज के महत्त्व पर आधारित है। समाजवाद का आधारभूत उद्देश्य समानता की स्थापना करना है और इस समानता की स्थापना के लिए स्वतन्त्र प्रतियोगिता का अन्त किया जाना चाहिए। उत्पादन के साधनों पर सम्पूर्ण समाज का अधिकार होना चाहिए और उत्पादन व्यवस्था का संचालन किसी एक वर्ग के लाभ को दृष्टि में रखकर नहीं, वरन् सभी वर्गों के सामूहिक हित को दृष्टि में रखकर किया जाना चाहिए। समाजवाद की परिभाषा करते हुए रॉबर्ट ब्लैकफोर्ड ने कहा है कि समाजवाद के अनुसार भूमि तथा उत्पादन के अन्य साधन सबकी सम्पत्ति रहें और उनका प्रयोग तथा संचालन जनता द्वारा जनता के लिए ही हो।” इसी प्रकार फ्रेड बेमेल ने कहा है। कि “समाजवाद का अर्थ है व्यक्तिगत हित को सामाजिक हित के अधीन रखना।”
समाजवाद के अनुसार राज्य का कार्यक्षेत्र – राज्य के कार्यक्षेत्र के सम्बन्ध में समाजवाद का मत व्यक्तिवाद के नितान्त विपरीत है। इस विचारधारा के अनुसार राज्य के द्वारा वे सभी कार्य किये जाने चाहिए, जो व्यक्ति और समाज की उन्नति के लिए आवश्यक हों और क्योंकि व्यक्ति एवं समाज की उन्नति के लिए किये जाने वाले कार्यों की कोई सीमा नहीं है। अतः यह कहा जा सकता है कि सामाजिक जीवन के प्रायः सभी कार्य राज्य के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत आ जाते हैं।
साधारणतया यह कहा जा सकता है कि समाजवादी विचारधारा के अनुसार राज्य को आन्तरिक एवं बाहरी सुरक्षा-व्यवस्था के साथ-साथ सार्वजनिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य का प्रबन्ध करना चाहिए। सभी व्यक्तियों के लिए स्वस्थ मनोरंजन का प्रबन्ध एवं अपाहिज और बूढ़े व्यक्तियों की सहायता की व्यवस्था करनी चाहिए।
समाजवाद व्यक्तिवादी विचारधारा और पूँजीवादी व्यवस्था के विरुद्ध एक सशक्त विचारधारी और आन्दोलन है। यह समानता को अपना आदर्श मानकर चलता है और राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में अधिकाधिक समानता स्थापित करना चाहता है।

समाजवाद के सिद्धान्त
समाजवाद के प्रमुख सिद्धान्तों का अध्ययन निम्नलिखित रूपों में किया जा सकता है-
1. समाजवाद समाज की आंगिक एकता पर बल देता है- समाजवाद का आधारभूत विचार यह है कि व्यक्ति कोई एक अकेला प्राणी नहीं है, वरन् यह समाज के दूसरे व्यक्तियों से उसी प्रकार सम्बन्धित है, जिस प्रकार शरीर के विभिन्न अंग परस्पर सम्बन्धित होते हैं।
2. समाजवाद प्रतियोगिता के स्थान पर सहयोग को प्रतिष्ठित करता है- समाजवाद का विचार यह है कि पूँजीवादी व्यवस्था में प्रचलित प्रतियोगिता से धनिक वर्ग को ही लाभ होता, है और श्रमिक वर्ग को हानि। प्रतियोगिता के कारण प्रत्येक व्यवसायी अपनी वस्तुओं को इतनी सस्ती बेचना चाहता है कि उसकी श्रेष्ठता बिल्कुल नष्ट हो जाती है; अतः समाजवाद जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रतियोगिता के स्थान पर सहयोग को प्रतिष्ठित करना चाहता है।
3. समाजवाद का ध्येय समानता है- समाजवाद वर्तमान सामाजिक व्यवस्था में विद्यमान असमानता का अत्यन्त विरोधी है और यह नवीन समाज का निर्माण ऐसे सिद्धान्तों के आधार पर करना चाहता है कि उसमें वर्तमान समय में विद्यमान गम्भीर असमानता कम-से-कम हो जाए। योग्यता के अन्तर को तो समाजवादी भी स्वीकार करते हैं और वे यह भी मानते हैं कि पूर्ण समानता अनुचित, अनावश्यक और असम्भव है, किन्तु साथ ही उनका लक्ष्य एक ऐसे वातावरण का निर्माण करना है जिसमें प्रत्येक को उन्नति के समान अवसर प्राप्त हो सकें।
4. समाजवाद का उद्देश्य पूँजीवाद का अन्त है- समाजवाद व्यक्तिवादी विचारधारा तथा पूँजीवादी व्यवस्था के विरोध पर आधारित है। समाजवाद के अनुसार पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में कुछ लोग बहुत अधिक अमीर और कुछ लोग बहुत अधिक गरीब हो जाते हैं और इस प्रकार की आर्थिक विषमता से राष्ट्र की प्रगति रुक जाती है। पूँजीवादी व्यवस्था उपभोग और उत्पादन की दृष्टि से दोषपूर्ण है और इसमें कला तथा प्रतिभा का भी पतन हो जाता है। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था आन्तरिक और अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अशान्ति को जन्म देने वाली भी होती है। इस प्रकार समाजवाद के अनुसार वर्तमान समय की पूँजीवादी व्यवस्था दोषपूर्ण, जर्जर, अन्यायी व शोषक है और सम्पूर्ण समाज के हित में इस अर्थव्यवस्था का अन्त कर दिया जाना ही उचित है।
5. समाजवाद एक प्रजातान्त्रिक विचारधारा है- समाजवाद के सम्बन्ध में प्रमुख बात यह है। कि यह एक प्रजातान्त्रिक विचारधारा है। अनेक बार समाजवाद को साम्यवाद का पर्यायवाची मान लिया जाता है, जो नितान्त भ्रमपूर्ण है। पूँजीवाद के विरोध में परस्पर सहमत होते हुए भी समाजवाद और साम्यवाद परस्पर नितान्त विरोधी विचारधाराएँ हैं। इबन्सटीन (Ebenstein) के शब्दों में, “ये (समाजवाद और साम्यवाद) विचार और जीवन के दो नितान्त विरोधी ढंग हैं, उतने ही विरोधी जितने कि उदारवाद और सर्वाधिकारवाद।” इन दोनों विचारधाराओं में प्रमुख भेद साधनों के सम्बन्ध में है। साम्यवाद हिंसक साधनों को अपनाने के पक्ष में है, किन्तु समाजवाद का विचार है कि वांछित परिवर्तन प्रजातन्त्रात्मक और संवैधानिक साधनों से ही लाया जाना चाहिए। समाजवाद प्रजातन्त्रवादी विचार है और साम्यवाद सर्वाधिकारवादी।
6. समाजवाद उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व के पक्ष में है- पूँजीवादी व्यवस्था का घोर विरोधी होने के कारण समाजवाद भूमि और उद्योगों पर व्यक्तिगत स्वामित्व के अन्त की माँग करता है और उत्पादन के समस्त साधनों पर सामाजिक स्वामित्व स्थापित करना चाहता है। समाजवादियों के अनुसार, “वैयक्तिक उद्योग वैयक्तिक लूटमार है और व्यक्तिगत सम्पत्ति को सामाजिक अथवा सामूहिक सम्पत्ति का रूप देना ही उचित है।
7. समाजवाद व्यक्ति की अपेक्षा समाज को प्राथमिकता देता है- समाजवाद का विचार है कि सम्पूर्ण समाज का सामूहिक हित अकेले व्यक्ति के हित से अधिक मूल्यवान है और आवश्यकता पड़ने पर समष्टि के हित में व्यक्ति के हित का बलिदान किया जा सकता है। इस सम्बन्ध में समाजवादियों का विचार है कि सामूहिक हित में व्यक्तिगत हित निहित होता है और सामूहिक हित की साधना से व्यक्तिगत हित की साधना अपने आप ही हो जाती है।
8. समाजवाद राज्य को एक सकारात्मक गुण मानता है- समाजवाद व्यक्तिवाद के इस कथन को अस्वीकार करता है कि राज्य एक आवश्यक दुर्गुण हैं और इसके विपरीत राज्य को एक ऐसी कल्याणकारी संस्था मानता है जिसका जन्म ही नागरिकों के जीवन को सभ्य और सुखी बनाने के लिए होता है। अधिकांश समाजवादी इतिहास से उदाहरण देते हुए कहते हैं कि राज्य संस्था चिरकाल से मानव-जाति की सेवा करती चली आ रही है और यदि इसने कहीं बल का प्रयोग किया भी है तो सामूहिक हित के लिए ही। इस प्रकार साधारणतया समाजवादी राज्य को एक जनहितकारी संस्था मानते हैं।
9. समाजवाद राज्य को अधिकाधिक कार्य सौंपना चाहता है- समाजवादी राज्य को एक कल्याणकारी संस्था मानते हैं और व्यक्ति को अधिकाधिक स्वतन्त्रता प्रदान करने के लिए राज्य के कार्यक्षेत्र को व्यापक करना चाहते हैं। समाजवाद के अनुसार, व्यक्तिवादी पुलिस राज्य समाज की पूरी-पूरी भलाई नहीं कर सकता और इस पुलिस राज्य में 99 प्रतिशत जनता पूँजीवादी शोषण से पिसकर अपने प्राण दे देगी। ऐसी स्थिति में गरीबों और मजदूरों के हित में राज्य के द्वारा आर्थिक क्षेत्र से सम्बन्धित अधिक-से-अधिक कार्य किये जाने चाहिए।

इस प्रकार, समाजवाद व्यक्तिवाद के विरुद्ध एक ऐसी प्रतिक्रिया है जिसके द्वारा वैयक्तिक हित के स्थान पर सामूहिक हित और प्रतियोगिता के स्थान पर सहयोग को प्रतिष्ठित करके, उत्पादन के साधनों पर सामाजिक नियन्त्रण के आधार पर आर्थिक समानता स्थापित कराने का प्रयत्न किया जाता है।

10.

समाजवाद के दो गुणों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

समाजवाद की विचारधारा की उत्पत्ति व्यक्तिवाद की प्रतिक्रिया के रूप में हुई और वर्तमान समय में यह विचारधारा बहुत अधिक लोकप्रिय है। इसके दो गुण निम्नवत् हैं-

1. समाजवाद भ्रातृत्व तथा समाज-सेवा भाव को बढ़ाता है- समाजवादी राज्य समानता पर आधारित होगा। यह राज्य सामूहिक हानि-लाभ के विचार को ध्यान में रखते हुए भ्रातृत्व की ओर अग्रसर होगा। व्यक्तियों पर समाजवादी व्यवस्था को अपनाने का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ेगा और इस बात की आशा की जा सकती है कि समाजवादी व्यवस्था में उनकी प्रवृत्ति व्यक्तिगत स्वार्थों की तुष्टि के स्थान पर सामूहिक हितों की साधना ही हो जाएगी।

2. समाजवाद एक न्यायपूर्ण तथा जनतान्त्रिक विचारधारा है- राजनीतिक क्षेत्र में समाजवाद जनतन्त्र के प्रति विश्वास व्यक्त करता है, क्योंकि राजतन्त्रीय या कुलीनतन्त्रीय व्यवस्था में अनिवार्य रूप से विद्यमान भेद समाजवाद को मान्य नहीं हैं। इसके अतिरिक्त समाजवाद उत्पादन पर ‘सामूहिक स्वामित्व’ और उसकी सामूहिक व्यवस्था का समर्थक है, जो पूर्णतया प्रजातान्त्रिक तथा न्यायोचित विचार है। वास्तव में प्रजातन्त्र और समाजवाद परस्पर पूरक हैं जिनमें से एक राजनीतिक समानता का प्रतिपादन करता है तो दूसरा आर्थिक समानता का। लैडलर के शब्दों में, “प्रजातान्त्रिक आदर्श का आर्थिक पक्ष वास्तव में समाजवाद ही है।”

11.

राज्य के दो अनिवार्य कार्य लिखिए।

Answer»

⦁    आन्तरिक शान्ति और व्यवस्था को बनाये रखना तथा
⦁    देश की बाह्य आक्रमणों से रक्षा करना।

12.

आर्थिक विकास के निर्देशक के रूप में प्रतिव्यक्ति आय की मर्यादा को विस्तार से समझाइए ।

Answer»

राष्ट्रीय आय की अपेक्षा प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक विकास का उचित निर्देशक है परंतु संपूर्ण नहीं ।

इसलिए प्रतिव्यक्ति आय की मर्यादाएँ निम्नानुसार हैं :

(1) मात्र अनुमान : देश की राष्ट्रीय आय की गणना प्रति वर्ष की जाती हैं । परंतु जनगणना प्रति 10 वर्षों के बाद अर्थात् शेष वर्षों में मात्र प्रतिव्यक्ति आय का अनुमान लगाया जाता है । इसलिए वास्तविक और सही प्रतिव्यक्ति आय ज्ञात नहीं होती है ।

(2) प्रतिव्यक्ति आय की गणना कठिन : राष्ट्रीय आय की तरह ही प्रतिव्यक्ति आय की गणना कठिन है । प्रतिव्यक्ति आय की गणना चालू भाव पर करना या स्थिर भाव पर करना इस कठिनायी के कारण प्रतिव्यक्ति आय की सही स्थिति को नहीं जान सकते हैं ।

(3) प्रतिव्यक्ति आय मात्र औसत है : प्रतिव्यक्ति आय देश की कुल राष्ट्रीय आय में कुल जनसंख्या का भाग देने पर प्राप्त अंक होता है । इसलिए प्रतिव्यक्ति आय मात्र औसत स्थिति को दर्शाता है । औसत के आधार पर किसी भी देश की सही स्थिति को नहीं जान सकते हैं । साथ ही प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धि के साथ-साथ उसका वितरण असमान हो तो उसका लाभ देश की सभी जनसंख्या को नहीं मिलता है । इसलिए विकास नहीं माना जाता है । यह प्रतिव्यक्ति आय की एक मर्यादा है ।

(4) तुलना में कठिनायी : विश्व देशों की प्रतिव्यक्ति आय उनके चलन में होती है । और प्रत्येक देश का चलन अलग-अलग होता है । इसलिए उसे प्रथम अमेरिकन डॉलर में परिवर्तित करके तुलना कर सकते हैं । अलग-अलग देशों की विदेशी मुद्रा की विनिमय दर पर अनेक प्रकार के नियंत्रण होते हैं । इसलिए सही विनिमय दर ज्ञात नहीं कर सकते हैं । इसलिए सही तुलना नहीं हो सकती है ।

(5) आय का असमान वितरण : प्रतिव्यक्ति आय जितनी आय देश के सभी नागरिकों को प्राप्त नहीं होती है । प्रतिव्यक्ति आय का निर्देशक जितना निर्देश करता है उससे अधिक छिपाता है । इसलिए सही में निर्देशक नहीं है ।

13.

‘आर्थिक विकास का ख्याल व्यापक है ।’ समझाइए ।

Answer»

आर्थिक विकास आर्थिक वृद्धि की अपेक्षा अधिक व्यापक है । आर्थिक विकास एक प्रक्रिया है, निरंतर चलनेवाली प्रक्रिया है आर्थिक सुख-समृद्धि प्राप्त करने का साधन है । इसलिए आर्थिक विकास इतना व्यापक है, कि जिसमें आर्थिक वृद्धि आर्थिक सुख-समृद्धि और आर्थिक प्रगति समा जाती है ।

14.

समाजवाद तथा लोक-कल्याणकारी राज्यों में दो अन्तर लिखिए। 

Answer»

समाजवाद एवं लोक-कल्याणकारी राज्यों में प्रमुख रूप से निम्नलिखित दो अन्तर हैं-

1. लोक-कल्याणकारी राज्य प्रमुख रूप से आर्थिक सुरक्षा के विचार पर आधारित है। आर्थिक सुरक्षा से तात्पर्य सभी व्यक्तियों को रोजगार, न्यूनतम जीवन-स्तर की गारण्टी एवं अधिकतम आर्थिक समानता से है।
समाजवादी राज्य आर्थिक समानता पर बल देता है यद्यपि समानता का यह विचार प्राकृतिक विधान और प्राकृतिक व्यवस्था के विरुद्ध है। समाजवाद का आर्थिक समानता का विचार पूँजीवाद के अन्त में निहित है।
2. समाजवाद राज्य को अधिकाधिक कार्य सौंपना चाहता है। समाजवाद राज्य के कार्यक्षेत्र को व्यापक करना चाहते हैं। इसके विपरीत कल्याणकारी राज्य को वे सभी जनहितकारी कार्य सौंपना चाहते हैं जिनके करने से व्यक्ति की स्वतन्त्रता नष्ट नहीं होती। लोक-कल्याणकारी राज्य नागरिक स्वतन्त्रताओं के हिमायती हैं।

15.

राज्य के कार्यो सम्बन्धी किन्हीं दो सिद्धान्तों के नाम बताइए।

Answer»

⦁    समाजवाद तथा
⦁    व्यक्तिवाद।

16.

राज्य के दो ऐच्छिक कार्य बताइए।

Answer»

⦁    शिक्षा का प्रबन्ध करना तथा
⦁    उद्योग-धन्धों और व्यापार का विकास करना।

17.

“राज्य एक आवश्यक बुराई है।” राज्य के बारे में यह विचारधारा किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है?

Answer»

“राज्य एक आवश्यक बुराई है।” राज्य के बारे में यह विचारधारा व्यक्तिवाद से सम्बन्धित है।

18.

व्यक्तिवाद के दो गुण लिखिए।

Answer»

⦁    व्यक्ति को प्रमुखता तथा
⦁    राज्य के कार्यों पर नियन्त्रण।

19.

‘आर्थिक विकास का ख्याल विकासशील देशों से जुड़ा हुआ है ।’ चर्चा कीजिए ।

Answer»

एशिया, अफ्रीका और लेटिन अमेरिका के विकासशील देश अपनी बेकारी, गरीबी, असमानता, भुखमरी जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए आर्थिक विकास पर अधिक भार देते हैं । आर्थिक वृद्धि में मात्र कुल उत्पादन में ही वृद्धि होती है । जीवन स्तर में सुधार अनिवार्य नहीं है । इसलिए विकासशील देशों में कुल उत्पादन की वृद्धि के साथ देश के लोगों के जीवनस्तर में सुधार हो यह जरूरी है । इसलिए आर्थिक विकास का ख्याल विकासशील देशों से जुड़ा हुआ है ।

20.

आर्थिक विकास का प्रश्न किन देशों के साथ जुड़ा हुआ है ?(A) विकसित देश(B) विकासशील देश(C) पूँजीवादी देश(D) साम्यवादी देश

Answer»

सही विकल्प है (B) विकासशील देश

21.

विश्व के देशों का आज मुख्य उद्देश्य क्या है ?

Answer»

विश्व के देशों का आज मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास करना है ।

22.

आर्थिक वृद्धि का प्रश्न मुख्य रूप से किन राष्ट्रों के साथ जुड़ा हुआ है ?(A) विकसित देश(B) विकासशील देश(C) पिछड़े देश(D) तीसरे विश्व के देश

Answer»

सही विकल्प है (A) विकसित देश

23.

सेनिटेशन की सुविधा किस में सुधार सूचित करती है ?

Answer»

सेनिटेशन की सुविधा जीवनस्तर में सुधार का सूचित करती है । सेनिटेशन एक सामाजिक परिवर्तन है । स्वच्छता के लिए मात्र परिमाणात्मक परिवर्तन नहीं सामाजिक परिवर्तन भी आवश्यक है । इसलिए सेनिटेशन एक गुणात्मक परिवर्तन है । अर्थात् आर्थिक विकास को सूचित करता है ।

24.

 बालमृत्यु दर अर्थात् क्या ?

Answer»

प्रति हजार बालकों पर जीवित जन्मे हुये बालकों में से एक वर्ष का आयुष्य पूर्ण होने से पहले मृत्यु पानेवाले बालकों की संख्या को बालमृत्यु दर कहते हैं ।

25.

अधिक प्रतिव्यक्ति आय क्या सूचित करती है ?

Answer»

अधिक प्रतिव्यक्ति आय जीवनस्तर में सुधार को सूचित करती है ।

26.

आर्थिक विकास, आर्थिक वृद्धि का ……………………..(A) कारण है ।(B) परिणाम है ।(C) साधन है ।(D) साध्य है ।

Answer»

सही विकल्प है (B) परिणाम है ।

27.

आर्थिक वृद्धि में राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होने पर भी क्या स्थिर रहता है ?

Answer»

आर्थिक वृद्धि में राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होने पर भी संस्थाकीय और मनोवैज्ञानिक ख्याल स्थिर रहते हैं ।

28.

सायमन क्रूझनेट के अनुसार आर्थिक वृद्धि किसे कहते हैं ?

Answer»

सायमन क्रूझनेट के अनुसार ‘प्रजा को अधिक से अधिक वैविध्यपूर्ण आर्थिक चीजवस्तुओं की आपूर्ति पूर्ण करने की देश की शक्ति में दीर्घकालीन समय तक होनेवाली वृद्धि आर्थिक वृद्धि है ।

29.

 श्रीमति उर्सला हिक्स के अनुसार आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास में मुख्य अंतर क्या है ?

Answer»

श्रीमति उर्सला हिक्स के अनुसार विकासशील देशों के आर्थिक प्रश्नों का निवारण यह आर्थिक विकास है और विकसित देशों के प्रश्नों का निवारण आर्थिक वृद्धि है ।

30.

मानवविकास आंक का महत्तम मूल्य कितना होता है ?

Answer»

मानवविकास आंक का महत्तम मूल्य एक (1) होता है ।

31.

 मानवविकास आंक में किन-किन बातों का समावेश होता है ? उसे समझाइए ।

Answer»

आर्थिक विकास के रूप में जब अन्य निर्देशक टीकापात्र बने तब 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा मानवविकास आंक (HDI – Human Development Index) नया निर्देशक प्रस्तुत किया गया । इसमें आर्थिक मापदण्डों के साथ-साथ बिनआर्थिक मापदण्डों को भी शामिल किया गया है । 1990 से HDI को मापने के लिए जो न्यूनतम और महत्तम मूल्यों का उपयोग होता था । उसमें 2010 में सुधार किया गया ।

मानवविकास अंक (HDI) में निम्नलिखित तीन बातों को ध्यान में लिया जाता है :

(1) अपेक्षित औसत आयु : जन्म के समय जनसंख्या का अपेक्षित आयु कितनी है । इसके आधार पर अंक दिया जाता है । यदि 50 वर्ष से कम है तो स्वास्थ्य से वंचित है यदि आयु अधिक है तो स्वास्थ्य अच्छा माना जाता है ।

(2) शिक्षण : साक्षरता को जानने के लिए दो बातों को ध्यान में रखा जाता है ।
(A) 15 वर्ष से कम बालक कितनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं ।
(B) 15 वर्ष से अधिक प्रौढ़ कितनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं ।
मानवविकास अंक लिए (A) स्कूलिंग के औसत वर्ष और (B) स्कूलिंग के अपेक्षित वर्षों में देश की स्कूली स्तर कितने वर्ष अपेक्षित हैं । उसमें से बालक स्कूल में कितने वर्ष व्यतीत करता है । उसका अंक ज्ञात किया जाता है ।

(3) जीवनस्तर : किसी देश की जनसंख्या का जीवनस्तर जानने के लिए उस देश के लोगों को प्राप्त होनेवाली सुविधाएँ जिनमें शुद्ध पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, बालमृत्युदर, प्रतिव्यक्ति प्राप्त दैनिक कैलरी, बालमृत्युदर का प्रमाण आदि का समावेश किया जाता है ।

जीवनस्तर को जानने के लिए उस देश की प्रतिव्यक्ति आय का उपयोग करते हैं । उस देश की प्रतिव्यक्ति आय की गणना अमेरिकन डॉलर में करते हैं जिसे समखरीदशक्ति (PPP) कहते हैं ।

इन तीनों निर्देशकों के आधार पर मानव विकास अंक की रचना की जाती है । जिसका मूल्य 0 से 1 होता है । इसके आधार पर कौन-सा देश श्रेष्ठ है और कौन-सा देश घनिष्ठ है । इसका ख्याल आता है ।

जैसे : 2014 में नोर्वे 0.944 अंको के साथ 188 देशों में प्रथम स्थान पर था । नाइजेरिया 0.348 अंक के साथ अंतिम क्रम पर था । भारत 0.609 अंक के साथ विश्व में 130 वें स्थान पर था । इस प्रकार भारत मध्यम मानव विकासवाले राष्ट्रों में शामिल हैं ।

32.

 मानवविकास आंक में किन परिबलों को समाविष्ट कर लिया गया है ?

Answer»

मानवविकास आंक में अपेक्षित औसत आयुष्य, साक्षरता और जीवनस्तर को समाविष्ट किया गया है ।

33.

मानवविकास आंक का मूल्य कितना होता है ?(A) शून्य(B) एक(C) शून्य से एक के बीच(D) 100

Answer»

सही विकल्प है (C) शून्य से एक के बीच

34.

2014 में मानवविकास आंक की दृष्टि से विश्व में प्रथम स्थान पर देश था ।(A) जापान(B) नोर्वे(C) अमेरिका(D) भारत

Answer»

सही विकल्प है (B) नोर्वे

35.

वर्ष 2014 में अमेरिका की प्रतिव्यक्ति आय कितने डॉलर थी ?(A) 80442(B) 52947(C) 64992(D) 12547

Answer»

सही विकल्प है (B) 52947

36.

भारत में जनसंख्या की गणना कितने वर्ष के बाद होती है ?(A) 5 वर्ष(B) 10 वर्ष(C) 15 वर्ष(D) 20 वर्ष

Answer»

सही विकल्प है (B) 10 वर्ष

37.

श्रीलंका की प्रतिव्यक्ति आय अमेरिकन डॉलर में कितनी थी ?(A) 9779(B) 7799(C) 7997(D) 9991

Answer»

सही विकल्प है (A) 9779

38.

मनु के अनुसार राज्य के कितने अंग हैं ?(क) 4(ख) 7(ग) 8(घ) 9

Answer»

सही विकल्प है (ग) 8

39.

2014 में विश्व में मानवविकास अंक की दृष्टि से भारत का क्रम कौन-सा था ?(A) 127(B) 128(C) 129(D) 130

Answer»

सही विकल्प है (D) 130

40.

2014 में मानवविकास कि रिपोर्ट के अनुसार भारत की प्रतिव्यक्ति आय कितने डॉलर थी ?(A) 7110(B) 7068(C) 480(D) 5497

Answer»

सही विकल्प है (D) 5497

41.

मानवविकास अंक का महत्तम मूल्य कितना होता है ?(A) 1(B) 100(C) 0 से 1(D) 0 से 100

Answer»

सही विकल्प है (A) 1

42.

मनु के अनुसार राज्य के दो कार्य बताइए।

Answer»

⦁    बाह्य आक्रमण से देश की रक्षा तथा
⦁    असहायों की सहायता करना।

43.

राज्य की सम्प्रभुता को अस्वीकार करने वाले सिद्धान्त का नाम लिखिए।

Answer»

राज्य का व्यक्तिवादी सिद्धान्त।

44.

कौटिल्य के अनुसार राज्य को कौन-से लोकहितकारी कार्य करने चाहिए?

Answer»

कौटिल्य ने राज्य को लोकहित तथा सामाजिक कल्याण के कार्य सौंपे हैं। लोक-कल्याण सम्बन्धी जिन कार्यों को राजा सम्पन्न करता है उनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं|

⦁    जीविकोपार्जन के साधनों का नियमन।
⦁    चिकित्सालयों का निर्माण।
⦁    वृद्ध, असहाय, अनाथ, विधवा, दुःखियों तथा रोगियों की सहायता।
⦁    कृषि, पशुपालन, उद्योग, वाणिज्य इत्यादि का विकास।
⦁    बाँधों का निर्माण, जलमार्ग, जलाशय, स्थलमार्ग एवं बाजार बनाना।
⦁    दुर्भिक्ष के समय जनसाधारण की सहायता।
⦁    पण्डितों का आदर एवं सम्मान।
⦁    ज्ञान के अनुसन्धान कार्य में लगे आश्रमवासियों एवं विद्यार्थियों की रक्षा।
⦁    आवश्यक होने पर धनवानों से अधिक कर वसूलकर गरीबों में वितरित करना।
⦁    जंगलों की रक्षा करना।
⦁    मानव के चारों उद्देश्यों अर्थात् धर्म, काम, मोक्ष एवं अर्थ की सिद्धि में सहायता करना।

45.

2014 में भारत का मानवविकास मूल्य कितना था ?

Answer»

2014 में भारत का मानवविकास अंक का मूल्य 0.609 है ।

46.

2014 में भारत की अपेक्षित औसत आयु कितनी थी ?

Answer»

2014 में भारत की अपेक्षित औसत आयु 68.0 वर्ष है ।

47.

राष्ट्रीय आय की मर्यादा के तीन मुद्दों की चर्चा कीजिए ।

Answer»

राष्ट्रीय आय आर्थिक विकास निर्देशक है । परंतु यह निर्देशक संपूर्ण नहीं है । कुछ मर्यादाएँ देखने को मिलती हैं जो निम्नानुसार है:

(1) राष्ट्रीय आय की गणना में कठिनाई : राष्ट्रीय आय की गणना में अनेक कठिनाइयाँ आती हैं । जैसे – दोहरी गणना, स्व-उपयोग की वस्तुएँ घिसायी जानना कठिन, गैरकानूनी आय, करचोरी, सट्टा पद्धति, निरक्षरता, एक से अधिक व्यवसाय में रुके हुये लोगों के कारण राष्ट्रीय आय और उसकी सही वृद्धिदर का ख्याल नहीं आता इसलिए राष्ट्रीय आय को आर्थिक विकास का उचित मापदंड नहीं कह सकते हैं ।

(2) जनसंख्या की अपेक्षा : राष्ट्रीय आय की गणना के साथ-साथ देश की जनसंख्या को भी ध्यान में लेना चाहिए । क्योंकि राष्ट्रीय आय की वृद्धि के साथ प्रतिव्यक्ति आय भी बढ़नी चाहिए । यदि राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर के साथ जनसंख्या वृद्धि दर भी अधिक हो तो राष्ट्रीय आय में वृद्धि दर होने पर भी आर्थिक विकास का निर्देशक नहीं माना जाता ।

(3) राष्ट्रीय आय की गणना की अलग-अलग पद्धति : अलग-अलग देशों में राष्ट्रीय आय की अलग-अलग पद्धतियों का उपयोग किया जाता है । जैसे – उत्पादन की पद्धति, आय की पद्धति, खर्च की पद्धति प्रमुख हैं । यदि राष्ट्रीय आय की गणना एक पद्धति से करें और उसी की गणना दूसरी पद्धति से करें तो दोनों में अंतर आता है । सभी देशों की राष्ट्रीय आय की गणना अलग-अलग पद्धति से करते हैं परिणाम स्वरुप अन्तर्राष्ट्रीय तुलना का कार्य कठिन होता है ।

48.

मेकलप किसे आर्थिक विकास मानते हैं ? ।

Answer»

मेकलप के अनुसार ‘जनसंख्या स्थिर हो या निरंतर बढ़ रही हो, परंतु उत्पादन के साधनों तथा उत्पादन पद्धति में परिवर्तन उत्पन्न करनेवाली ऐसी प्रक्रिया है, जिसके कारण प्रतिव्यक्ति आय में निरंतर वृद्धि होती, हो और लोगों के जीवनस्तर में सुधार हो रहा हो तो देश का आर्थिक विकास हो रहा है ऐसा कहते हैं ।’

49.

2014 में भरत का मानवविकास अंक मूल्य कितना था ?(A) 0.595(B) 0.609(C) 0.906(D) 0.960

Answer»

सही विकल्प है (C) 0.906

50.

भारत का HDI के वर्गीकरण में मानवविकास के किस ग्रुप में समावेश होता है ?(A) अधिक(B) सबसे अधिक(C) मध्यम(D) निम्न

Answer»

सही विकल्प है (C) मध्यम