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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

वर्ष 2014 में नोर्वे का मानवविकास अंक कितना था ?(A) 0.915(B) 0.944(C) 0.995(D) 0.990

Answer»

सही विकल्प है (B) 0.944

2.

सामान्य इच्छा (General will) के सिद्धान्त के प्रतिपादक का नाम बताइए।

Answer»

सामान्य इच्छा (General will) के सिद्धान्त के प्रतिपादक का नाम रूसो

3.

वृद्धि एवं विकास में से किसका मापन कठिन है और क्यों ?

Answer»

वृद्धि और विकास में से विकास को मापना कठिन है । क्योंकि विकास में सामाजिक परिवर्तन का समावेश किया जाता है । जिसे सरलता से माप नहीं सकते हैं ।

4.

मानवविकास अंक की दृष्टि से विश्व में भारत का स्थान कौन-सा है ?

Answer»

मानवविकास की दृष्टि से विश्व में भारत का स्थान 130 वाँ हैं ।

5.

भारत में वर्तमान में वृद्धि हो रही है अथवा विकास हो रहा है अथवा दोनों हो रहे हैं । कारण सहित उत्तर दीजिए ।

Answer»

आर्थिक विकास से सम्बन्धित भारत के सम्बन्ध में निम्नलिखित निष्कर्ष हैं :

(1) भारत में वर्तमान में वृद्धि हो रही है : किसी भी देश की वृद्धि अर्थात् उस देश के उत्पादन के कुल साधनों में वृद्धि । उस देश की राष्ट्रीय आय प्रतिव्यक्ति आय भी वृद्धि बढ़ रही हो तो ऐसा कह सकते हैं कि उस देश की वृद्धि हो रही है । भारत की राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि में हुयी है । जैसे भारत की प्रतिव्यक्ति आय 5497 डॉलर है । इसके साथ ही भारत की राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर वर्ष 2014 में 7.3 प्रतिशत है । जो नोर्वे 2.2 प्रतिशत अमेरिका 2.4 प्रतिशत, श्रीलंका 4.5 प्रतिशत से अधिक है । जो भारत की वृद्धिदर का निर्देशक है ।

(2) भारत में विकास हो रहा है : भारत में वर्तमान समय में वृद्धि हो रही है । इसके साथ-साथ साक्षरता में वृद्धि हो रही है । स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है । जीवनस्तर में सुधार हो रहा है । इन सबके लिए विकास जवाबदार है । विकास के लिए राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर के साथ-साथ प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धि दर भी बढ़े यह जरूरी है । भारत की प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर 6.7 प्रतिशत जो नोर्वे 1.1 प्रतिशत, अमेरिका 1.6 प्रतिशत, श्रीलंका 3.5 प्रतिशत से अधिक है । जो भारत में विकास तीव्रता से हो रहा है । इसका निर्देश दे रहा है ।

(3) आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास दोनों हो रहे हैं : आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं परंतु . पूरक है । एक कारण है तो दूसरा परिणाम । इसलिए भारत में राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर वृद्धि को दर्शाती है । तो प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर विकास को । इसलिए हम कह सकते हैं । कि भारत में आर्थिक वृद्धि, आर्थिक विकास दोनों ही हो रहे हैं ।

6.

वृद्धि की मर्यादाएँ बताइए ।

Answer»

आर्थिक वृद्धि की मर्यादाएँ निम्नानुसार हैं :

  1. आर्थिक वृद्धि में मात्रा परिमाणात्मक परिवर्तन को ही ध्यान में लिया जाता है ।
  2. आर्थिक वृद्धि में राष्ट्रीय आय और प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होती है, परंतु संस्थाकीय और मनोवैज्ञानिक व्यवहार स्थिर रहते हैं ।
  3. आर्थिक वृद्धि का ख्याल मर्यादित है, इसमें मात्र उत्पादन में होनेवाली वृद्धि और वृद्धि के प्रमाण को दर्शाता है ।
  4. लोगों के कल्याण और उसमें होनेवाले परिवर्तन को जानने के लिए आर्थिक वृद्धि का ख्याल अधिक उपयोगी नहीं है ।
7.

प्रतिव्यक्ति आय के निर्देशक की मर्यादाएँ बताइए ।

Answer»

प्रतिव्यक्ति आय से लोगों के जीवनस्तर को मापा जा सकता है । इसलिए राष्ट्रीय आय की अपेक्षा प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक
विकास का उचित निर्देशक है । परंतु प्रतिव्यक्ति आय में भी निम्नलिखित मर्यादाएँ देखने को मिलती हैं :

  • राष्ट्रीय आय की गणना प्रतिवर्ष की जाती है परंतु जनगणना 10 वर्ष के बाद होती है । अर्थात् शेष वर्षों में जनसंख्या का अंदाज लगाया जाता है । इसलिए प्रतिव्यक्ति आय का सही ख्याल नहीं आता है ।
  • राष्ट्रीय आय की तरह ही प्रतिव्यक्ति आय की गणना चालू भाव या स्थिर भाव पर गणना इस कठिनाई के कारण भी प्रतिव्यक्ति आय का सही ख्याल नहीं आता है ।
  • प्रतिव्यक्ति आय मात्र औसत आय दर्शाती है । यदि प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि हो परंतु उसका वितरण असमान हो तो आर्थिक विकास नहीं माना जाता है ।
  • विश्व देश के अलग-अलग चलन होते हैं । इसलिए प्रतिव्यक्ति आय अलग-अलग चलनों में होती है । प्रथम उसे डॉलर में परिवर्तित किया जाता है । अलग-अलग देश अपने विनिमय दर पर अनेक नियंत्रण रखते हैं । इसलिए सही ख्याल नहीं आता । परिणाम स्वरूप प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर अलग-अलग देशों की तुलना नहीं कर सकते हैं ।
8.

चीन का मानवविकास अंक कितना था ?(A) 0.915(B) 0.944(C) 0.727(D) 0.609

Answer»

सही विकल्प है (C) 0.727

9.

मांग में वृद्धि होने के कारण हुई भाववृद्धि को कैसी मुद्रास्फीति कहते हैं ?(A) मांग प्रेरित(B) खर्च प्रेरित(C) वेतन प्रेरित(D) लाभप्रेरित

Answer»

सही विकल्प है (A) मांग प्रेरित

10.

पशुओं में मूल्यसंग्रह का प्रश्न क्यों कठिन बना ?

Answer»

पशु बीमार हो, मृत्यु हो, दीर्घकालीन समय तक पशुओं में मूल्य संग्रह का प्रश्न विकट बना ।

11.

कौन-सा मूल्य तुलनात्मक अध्ययन को सरल बनाता है ?

Answer»

मुद्रा का मूल्य तुलनात्मक अध्ययन को सरल बनाता है ।

12.

रोबर्ट्स के द्वारा दी गयी मुद्रा की परिभाषा लिखो ।

Answer»

रोबर्ट्स के अनुसार ‘वस्तुओं और सेवाओं’ के बदले में जो सर्वस्वीकृत है वह मुद्रा है ।

13.

मनुष्य की आवश्यकताएँ(A) सीमित होती है ।(B) मर्यादित होती हैं ।(C) तटस्थ होती है ।(D) अमर्यादित होती हैं ।

Answer»

सही विकल्प है (D) अमर्यादित होती हैं ।

14.

आर्थिक-सामाजिक विकास होने के साथ मनुष्य की आवश्यकताएँ बढी और अर्थतंत्र सरलता में से ……………….(A) सरल बना(B) जटिल बना(C) विस्तृत बना(D) सीमित बना

Answer»

सही विकल्प है (B) जटिल बना

15.

शिक्षक को ज्ञान के बदले में क्या मिलता था ?(A) अनाज(B) मुद्रा(C) सम्मान(D) विद्यार्थी

Answer»

सही विकल्प है (A) अनाज

16.

GDI का पूरा नाम लिखिए ।

Answer»

GDI = Gender Development Index.

17.

मुद्रास्फीति के अन्य कारणों की चर्चा कीजिए ।

Answer»

मुद्रास्फीति के मूल में दो कारण ही जवाबदार हैं :

(i) मांग में वृद्धि और
(ii) खर्च में वृद्धि ।

परंतु इनके अतिरिक्त भाववृद्धि के लिए अन्य परिबल भी जवाबदार हैं जिनकी चर्चा नीचे करेंगे :

(1) करनीति : सरकार की टेक्सनीति में परिवर्तन हो, विशेष सरकार वस्तुओं और सेवाओं पर ऊँची दर से टेक्स बढ़ाये तब वस्तु का उत्पादन खर्च और कीमत में वृद्धि होती है । इस प्रकार ऊँची कर दर मुद्रास्फीति के लिए जवाबदार बन सकती है ।

(2) आयाती वस्तुओं की कीमत में वृद्धि : भारत में बहुत सारी वस्तुओं का आयात होता है । और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कीमत बढ़ने से मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।
जैसे : भारत में पेट्रोलियम उत्पादन में 70% पूर्ति आयात द्वारा होती है । अब यदि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़े तो पेट्रोल-डीज़ल के भाव भी बढ़ते हैं । और पेट्रोल-डीज़ल यह ऐसी वस्तु है कि उसकी कीमत बढ़ने से अन्य अनेक वस्तुओं के भाव बढ़ते हैं।

(3) अभाव : जब कच्चा माल, बिजली या उत्पादन के लिए आवश्यक किसी भी बात की कमी खड़ी हो तब कीमत में वृद्धि होती है । उत्पादन प्रक्रिया में सम्मलित कोई भी घटना व्यापक और दीर्घकालीन कमी मुद्रास्फीति के लिये जवाबदार है ।

18.

खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति किसे कहते हैं ? उसके कारणों को संक्षिप्त में समझाइए ।

Answer»

खर्च में वृद्धि के कारण सर्जित मुद्रास्फीति को खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं ।
खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति में विभिन्न खर्चों का समावेश होता है । कीमत को प्रभावित करनेवाले तत्त्वों में मांग के साथ पूर्ति भी जवाबदार होती है । पूर्तिलक्षी अर्थशास्त्र के समर्थक मानते हैं कि उत्पादन खर्च में वृद्धि हो तो भी वस्तुओं की कीमत में वृद्धि होती है । उत्पादन खर्च में निम्नलिखित खर्च का समावेश होता है –

  1. कच्चे माल की कीमत में वृद्धि
  2. बिजली की दर में वृद्धि
  3. पानी की दर में वृद्धि
  4. श्रमिको के वेतन में वृद्धि
  5. परिवहन खर्च में वृद्धि
    इन सभी वर्गों के कारण वस्तु और सेवाओं की कीमत में वृद्धि होती है जिससे मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।
19.

मुद्रास्फीति का अर्थ बताकर उसके कारणों की चर्चा कीजिए ।

Answer»

सामान्य रूप से भाववृद्धि अर्थात् मुद्रास्फीति : मुद्रास्फीति एक आर्थिक समस्या है और मौद्रिक घटना है । सामान्य प्रजा वस्तुओं की कीमत वृद्धि को मुद्रास्फीति मानती है । परंतु अर्थशास्त्र में मुद्रास्फीति का अर्थ निम्नानुसार है :
लर्नर के अनुसार : ‘वस्तु की पूर्ति की अपेक्षा मांग अधिक हो तो इस स्थिति को मुद्रास्फीति कहते हैं ।’
मिल्टन फिडमेन के अनुसार : ‘मुद्रास्फीति एक मौद्रिक घटना है जिसमें स्थिर और चालू गति से भाव सतत बढ़ते रहते हैं ।’
डॉ. पिगु के अनुसार : ‘वास्तविक आय की अपेक्षा मुद्राकीय आय अधिक तेजी से बढ़े तो उसे मुद्रास्फीति कहते हैं ।’
मुद्रास्फीति में मुद्रा की क्रयशक्ति सतत घटती है । और अर्थतंत्र पर प्रतिकूल असर डालती है ।

मुद्रास्फीति के कारण निम्नानुसार हैं :

(1) मांग में वृद्धि : अर्थतंत्र में मांग बढ़ने से सर्जित मुद्रास्फीति को मांग प्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं । वस्तु की मांग में वृद्धि हो . और वस्तु की पूर्ति में वृद्धि न हो तब वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है । जिसके लिए मांग जवाबदार मानी जाती है । वस्तु की मांग में वृद्धि के निम्नलिखित कारण :

(i) मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि : मुद्रास्फीति एक मुद्राकीय घटना है । देश में मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि होने से लोगों की आय में वृद्धि होती है । परिणाम स्वरूप वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ती है । दूसरी ओर वस्तु और सेवा की आपूर्ति स्थिर रहती है । जिससे उनकी कीमत घटती है, जिसे मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।

(ii) सरकार के. सार्वजनिक खर्च में वृद्धि : भारत जैसे विकासशील देशों में सरकार आर्थिक विकास की प्रक्रिया में जुड़ती है । आंतरिक ढाँचे के निर्माण, आवश्यक आधारभूत सेवाएँ उपलब्ध करवाना या रोजगारी सर्जन के लिए सरकार सार्वजनिक खर्च करती है । जिससे देश में मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि होती है । लोगों की आय में वृद्धि होती है, मांग में वृद्धि होने से कीमत में वृद्धि होती है । यदि सरकार देश में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन की अपेक्षा बड़े पैमाने पर मुद्रा आपूर्ति अर्थतंत्र में करे, सार्वजनिक खर्च करे तो मुद्रास्फीति अधिक गति से बढ़ती है ।

(iii) जनसंख्या में वृद्धि : भारत में औसत जनसंख्या वृद्धिदर 2 प्रतिशत है । जिसके कारण मांग में वृद्धि का दबाव खड़ा हुआ है । निरंतर जनसंख्या वृद्धि के कारण दैनिक उपभोग की वस्तुओं की मांग में वृद्धि होती है, और बढ़ती हुयी जनसंख्या की मांग यदि पूरी नहीं हो तब भावस्तर बढ़ता है । जनसंख्या स्थिर हो परंतु उसी आय बढ़े तो भी मांग में वृद्धि होती है परिणाम स्वरूप मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है ।

(2) खर्च में वृद्धि : खर्च में वृद्धि के कारण सर्जित मुद्रास्फीति को खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं । खर्च प्रेरित मुद्रास्फीति में विभिन्न वर्गों का समावेश होता है । कीमत को प्रभावित करनेवाले तत्त्वों में मांग के साथ पूर्ति भी जवाबदार होती है । पूर्तिलक्षी अर्थशास्त्र के समर्थक मानते हैं कि उत्पादन खर्च में वृद्धि हो तो भी वस्तुओं की कीमत में वृद्धि होती है ।

उत्पादन खर्च में निम्नलिखित खर्च का समावेश होता है :

कच्चे माल की कीमत में वृद्धि
बिजली की दर में वृद्धि
पानी की दर में वृद्धि
श्रमिकों के वेतन में वृद्धि
परिवहन खर्च में वृद्धि

इन सभी वर्गों के कारण वस्तु और सेवाओं की कीमत में वृद्धि होती है जिससे मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।

(3) अन्य कारण : मुद्रास्फीति के मूल में दो कारण ही जवाबदार है ।
(i) मांग में वृद्धि और (ii) खर्च में वृद्धि । परंतु इनके अतिरिक्त भाववृद्धि के लिए अन्य परिबल भी जवाबदार हैं जिनकी चर्चा नीचे करेंगे :

(i) करनीति : सरकार की टेक्सनीति में परिवर्तन हो, विशेष सरकार वस्तुओं और सेवाओं पर ऊँची दर से टेक्स बढ़ाये तब वस्तु का उत्पादन खर्च और कीमत में वृद्धि होती है । इस प्रकार ऊँची कर दर मुद्रास्फीति के लिए जवाबदार बन सकती ।

(ii) आयाती वस्तुओं की कीमत में वृद्धि : भारत में बहुत सारी वस्तुओं का आयात होता है । और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कीमत बढ़ने से मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।
जैसे : भारत में पेट्रोलियम उत्पादन में 70% पूर्ति आयात द्वारा होती है । अब यदि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़े तो पेट्रोल-डीज़ल के भाव भी बढ़ते हैं । और पेट्रोल-डीज़ल यह ऐसी वस्तु है कि उसकी कीमत बढ़ने से अन्य अनेक वस्तुओं के भाव बढ़ते हैं ।

(iii) अभाव : जब कच्चा माल, बिजली या उत्पादन के लिए आवश्यक किसी भी बात की कमी खड़ी हो तब कीमत में वृद्धि होती है । उत्पादन प्रक्रिया में सम्मलित कोई भी घटना व्यापक और दीर्घकालीन कमी मुद्रास्फीति के लिये जवाबदार है ।

20.

वस्तु विनिमय प्रथा का अर्थ देकर वस्तुविनिमय प्रथा की मर्यादाओं को समझाइए ।

Answer»

मुद्रा की अनुपस्थिति में एक वस्तु या दूसरी वस्तु के साथ विनिमय या अदलाबदली को वस्तुविनिमय प्रथा कहते हैं । प्राचीन समय में इसे अदला-बदली प्रथा (Barter System) कहते हैं । वस्तु विनिमय की प्रथा की मर्यादाएँ निम्नलिखित थी जिसके कारण मुद्रा विनिमय प्रथा अस्तित्व में आयी ।

(1) आवश्यकताओं के परस्पर सामंजस्य का अभाव : सट्टा पद्धति अथवा वस्तुविनिमय प्रथा में दो व्यक्तियों के बीच विनिमय तभी संभव हो पाता है जब दोनों व्यक्तियों को उसकी आवश्यकता हो । दो में से किसी एक व्यक्ति को यदि इसकी आवश्यकता न हो तो द्विपक्षीय (परस्पर) समझौता नहीं हो पाता एवं वस्तुविनिमय प्रथा का भंग होता है जिसे एक उदाहरण से समझें :
A व्यक्ति के पास गेहूँ है और बदले में उसे कपड़ा चाहिए ।
B व्यक्ति के पास कपड़ा है परंतु उसे कुर्सी चाहिए ।
C व्यक्ति के पास कुर्सी है किन्तु उसे घड़ा चाहिए ।
D व्यक्ति के पास घड़ा है परंतु उसे गेहूँ चाहिए ।

अत: वस्तुविनिमय प्रथा में A व्यक्ति सीधा कपड़ा नहीं ले सकता क्योंकि B के पास कपड़ा तो है, परंतु उसे गेहूँ नहीं कुर्सी चाहिए । अत: A व्यक्ति को कपड़ा प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा । यही परिस्थिति C और D की है । इसी के स्थान पर यदि द्रव्य होता तो A व्यक्ति गेहूँ बाज़ार में बेचकर द्रव्य (मुद्रा) प्राप्त करता एवं इस मुद्रा की मदद से बाज़ार में से कपड़ा सरलता से खरीद सकता ।
परिणाम स्वरूप कह सकते हैं कि वस्तुविनिमय प्रथा में द्विपक्षीय साम्राज्य बैठाने में कठिनाई होती है ।

(2) मूल्य के संग्रह की कठिनाई : वस्तुविनिमय प्रथा में व्यक्ति को मूल्य संग्रह में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था । यहाँ ध्यान रहे मूल्य अर्थात् विनिमय मूल्य । वस्तुविनिमय पद्धति में लेन-देन वस्तु के रूप में होती है । एवं कई वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिनका लम्बे समय तक संग्रह नहीं किया जा सकता । उदाहरणार्थ वस्तुविनिमय प्रथा में अनाज दूध, घी, सागसब्जी, फल इत्यादि को लंबे समय तक संग्रहित नहीं किया जा सकता । इन चीजों को यदि लंबे समय तक संग्रहित किया जाए तो वे सड़ जाती है । अथवा खराब हो जाती हैं, जिससे उनका मूल्य भी नष्ट हो जाता है । इसी प्रकार गाय, भैंस, हाथी, ऊँट इत्यादि की अदला-बदली सरलता से नहीं की जा सकती । इन चीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है ।

(3) मूल्य के मापदंड का प्रश्न : श्रम विभाजन और विशिष्टीकरण के बाद औद्योगिक आर्थिक जगत में वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य मापने का प्रश्न भी खूब महत्त्वपूर्ण बना । गेहूँ के बदले में चाबल का विनिमय करने तक तो ठीक था । परंतु अब गेहूँ के स्थान पर अनेक वस्तुएँ आ गयी जिनका विनिमय दर याद रखना, निश्चित करना कठिन था । एक मन गेहूँ बराबर दो मन चाबल, एक मन गेहूँ बराबर दस मीटर कपड़ा, एक मन गेहूँ किलो घी तो किलो घी बराबर कितना कपड़ा ? और कितने चाबल ? यह निश्चित करना और उसी के अनुसार व्यापार करना कठिन बना । इसलिए एक सर्व-सामान्य मापदण्ड की आवश्यकता पड़ी ।

(4) विभाजन की कठिनाई : वस्तुविनिमय प्रथा में लेन-देन अथवा विनिमय के दौरान कई बार विभाजन की समस्या सामने आती है। कुछ वस्तुएँ ऐसी होती है जिनका छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन आसानी से किया जा सकता है । गेहूँ, अन्य प्रकार के अनाज, कपड़ा, . तेल आदि वस्तुओं का छोटी-छोटी इकाईयों में विभाजन संभव है । परंतु मकान, स्कूटर, मोटर साइकिल, गाय, भैंस, बकरी आदि को छोटी-छोटी इकाईयों में विभाजित नहीं किया जा सकता । परिणामस्वरूप विनिमय की प्रक्रिया में कठिनाई आती है ।
उदा. – 10 किग्रा गेहूँ और आधा बैल ? 25 किग्रा बाज़री के बराबर आधी साईकल ? इस प्रकार की कई समस्याएँ हमारे सामने आती है । अतः कहा जा सकता है कि कई वस्तुओं की अविभाज्यता के कारण विनिमय में कठिनाई आती है ।

(5) दीर्घकाल के लेन-देन में कठिनाई : वस्तुविनिमय प्रथा में दीर्घकालीन लेन-देन में कठिनाई आती है । मान लीजिए कोई व्यक्ति खेती करने के लिए किसी अन्य किसान के यहाँ से बैल ले जाता है और इन बैलों को वह पाँच साल बाद लौटाता है । ऐसी स्थिति में जिस किसान ने बैल खेती के लिए दूसरे किसान को दिए थे उसे नुकसान सहना पड़ता है । क्योंकि पाँच साल बाद उन्हीं बैलों की कार्यक्षमता उम्र अधिक हो जाने के समय कम हो जाती है । इसी प्रकार कोई व्यक्ति A किसी व्यक्ति B के पास 5 किग्रा लहसुन ले जाता है और उसे एक वर्ष के बाद लौटाता है तो संभव है कि जब उसने लहसुन माँगे थे तब लहसुन की कमी के कारण उसकी कीमत अधिक हो और जब लौटाए तब लहसुन की उपलब्धता के कारण लहसुन की कीमत कम हो । इस प्रकार ऐसी स्थिति में देनेवाले को नुकसान एवं लेनेवाले व्यक्ति को फायदा होता है । इस प्रकार वस्तुविनिमय पद्धति में . लंबी अवधि में लेनदार पूर्व देनदार को कठिनाई का सामना करना पड़ता है ।

(6) मुआवजा चुकाने का प्रश्न : वस्तुविनिमय प्रथा में डॉक्टर, वकील, नर्स, शिक्षक, धोबी, नाई, आदि की सेवाओं के मूल्य निर्धारण की विकट समस्या सामने आती है । डॉक्टर को ऑपरेशन के बदले में कितना मुआवजा दिया जाए, शिक्षक को ज्ञान देने के बदले में कितना मुआवजा दिया जाए आदि कई प्रश्न वस्तुविनिमय प्रथा में सामने आते हैं जिसका हल आसानी से नहीं निकाला जा सकता ।

संक्षेप में वस्तुविनिमय प्रथा की उपरोक्त कमियों के कारण वस्तुविनिमय प्रथा लंबे अरसे तक नहीं चल सकी एवं वैकल्पिक व्यवस्था का आरंभ हुआ ।

21.

सामान्य रूप से,भाववृद्धि अर्थात् …………………….(A) महँगाई(B) मुद्रादर(C) मुद्रास्फीति(D) मुद्राकीय

Answer»

सही विकल्प है (C) मुद्रास्फीति

22.

मुद्रा का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य क्या है ?(A) संतोष का है ।(B) विनिमय का है ।(C) विक्रय का है ।(D) क्रय का है ।

Answer»

सही विकल्प है (B) विनिमय का है ।

23.

खर्च में वृद्धि होने के कारण भाववृद्धि किस प्रकार की मुद्रास्फीति है ?(A) खर्च प्रेरित(B) मांग प्रेरित(C) वेतन प्रेरित(D) लाभ प्रेरित

Answer»

सही विकल्प है (A) खर्च प्रेरित

24.

बढ़ती हुयी जनसंख्या …………………………… का दबाव खड़ा करती है ।(A) पूर्ति वृद्धि(B) बाज़ार में वृद्धि(C) ग्राहक वृद्धि(D) मांग वृद्धि

Answer»

सही विकल्प है (D) मांग वृद्धि

25.

खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति किसे कहते हैं ?

Answer»

खर्च में वृद्धि होने के कारण उत्पन्न होनेवाली मुद्रास्फीति को खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं ।

26.

मुद्रास्फीति अर्थात् क्या ?

Answer»

सामान्य रूप से भाववृद्धि अर्थात् मुद्रास्फीति ।

27.

मिल्टन फिडमेन के अनुसार मुद्रास्फीति क्या है ?

Answer»

मिल्टन फिडमेन के अनुसार ‘मुद्रास्फीति एक वितिय घटना है जिसमें स्थिर और चालू गति से भाव सतत बढ़ते रहते हैं ।’

28.

प्रो. पिगु के अनुसार मुद्रास्फीति अर्थात् क्या ?

Answer»

प्रो. पिगु के अनुसार ‘वास्तविक आय की अपेक्षा मुद्राकीय आय अधिक तीव्रता से बढ़े तो उसे मुद्रास्फीति कहते हैं ।’

29.

किसके कारण वस्तु विनिमय प्रथा मर्यादावाली बनी ?

Answer»

औद्योगिकरण, शहरीकरण और श्रमविभाजन तथा विशिष्टीकरण के कारण वस्तु विनिमय प्रथा मर्यादावाली बनी ।

30.

लर्नर के अनुसार मुद्रास्फीति अर्थात् क्या ?

Answer»

लर्नर के अनुसार ‘वस्तु की पूर्ति की अपेक्षा उसकी माँग अधिक प्रमाण हो तो उस स्थिति को मुद्रास्फीति कहते हैं ।’

31.

वस्तु विनिमय प्रथा में विनिमय को सरल बनाने के लिए किसका उपयोग शुरू हुआ ?

Answer»

वस्तु विनिमय प्रथा में विनिमय को सरल बनाने के लिए पशु का उपयोग शुरू हुआ ।

32.

प्राचीन समय में वस्तु विनिमय पद्धति क्यों प्रभावशाली थी ?

Answer»

प्राचीन समय में ग्राम समाज व्यवस्था थी, कृषि पर परस्पर व्यवहार तथा सीमित आवश्यकताओंवाला सादा जीवन था । इसलिए वस्तु विनिमय पद्धति प्रभावशाली थी ।

33.

वस्तु या सेवा में मूल्यसंग्रह की क्या समस्या है ?

Answer»

वस्तु या सेवा में मूल्य संग्रह को बनाये रखना कार्य कठिन है । गैंहू का उत्पादन करते जूते या कपड़ा तथा अन्य आवश्यकताओं को पूरा करता है । परंतु उत्पादन अधिक हो तो गेंहू को किस प्रकार संभालकर रखा जाय । भविष्य में वस्तु के बिगड़ने का भी डर होता है । इसलिए मूल्य कम हो जाता है । अर्थात् मूल्य संग्रह की समस्या खड़ी होती है

34.

मुद्रा का उद्भव और विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।

Answer»

वस्तु विनिमय प्रथा जब अमल में थी तब मूल्य संग्रह और विनिमय को सरल बनाने के लिए पशुओं को सर्वसामान्य माध्यम के रूप उपयोग किया ।

  1. भारत में पशुओं में भी विशेष गाय को धन के रूप में माना गया ।
  2. कृषि प्रधान भारत में अनाज का उपयोग के बाद बचे हुए अनाज से पशुओं को खरीदा जाता था ।
  3. आवश्यकता पड़ने पर पशुओं को बेचकर अनाज पुनः खरीद लेते थे ।
  4. इस प्रकार अनाज बेचकर पशु खरीदता और पशुओं के द्वारा अन्य आवश्यकताएँ पूरी करते थे । इस प्रकार गाय, भैंस, घोड़ा जैसा पशु विनिमय का माध्यम और संग्राहक बने ।
  5. पशु बीमार हों, मृत्यु हों, दीर्घकालीन समय उसी स्वरूप में भी मूल्य संग्रह संभव नहीं था । एक सीमा के बाद पशु संग्रह भी कठिन बना । स्थानांतरण का कार्य कठिन बना ।
  6. पशु विनिमय की मर्यादा के कारण इनके स्थान पर कीमती पत्थरों का उपयोग होने लगा ।
  7. राजाशाही युग आने पर सिक्के शुरु हुये और राजधानी तथा शहरों में सिक्कों का विनिमय के रूप में उपयोग होने लगा ।
  8. सिक्कों का विनिमय के रूप में उपयोग सीमित विस्तारों में होता था ।
  9. लोकतंत्र का उद्भव तथा औद्योगीकरण आधुनिक द्रव्य या मुद्रा के स्वरूप के लिए प्रेरक बना ।
  10. केन्द्रीय सत्ता के समर्थन से प्रकाशित मुद्रा को सर्वस्वीकृति मिली ।
  11. विनिमय के माध्यम रूप में मुद्रा को मान्यता मिली ।
  12. मूल्य के संग्रह में भी आधुनिक मुद्रा अधिक सफल रही ।
  13. बैंकिंग व्यवसाय के विकास से मूल्य संग्रह तथा स्थानांतरण शीघ्र और सरल बना ।
35.

‘अधिक मात्रा में मुद्रा कम वस्तु को पकड़ने को दोड़े तब मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।’ विधान समझाइए ।

Answer»

मुद्रास्फीति एक मुद्राकीय घटना है । देश में जब मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि होने से देश के नागरिकों की मुद्राकीय आय बढ़ती है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की मांग में वृद्धि होती है । मुद्रा आपूर्ति के प्रमाण में वस्तु और सेवा की आपूर्ति में वृद्धि नहीं होती है, लगभग स्थिर रहती है । मांग अधिक और पूर्ति के कारण वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में वृद्धि होती है । मुद्राकीय अर्थतंत्र में वस्तुओं और सेवाओं की अपेक्षा मुद्रा का प्रभाव बढ़ने से मुद्रास्फीति सर्जित होती है । इसलिए मेचलेप कहते हैं कि ‘अधिक मात्रा में मुद्रा कम वस्तुओं को पकड़ने के लिए दौड़े तब मुद्रास्फीति सर्जित होती है ।’

36.

मुद्रा की मांग और मुद्रा की आपूर्ति की संकल्पना समझाइए । उनके मुख्य घटक कौन-कौन से है ?

Answer»

मुद्रा की माँग : मुद्रा द्वारा लोग अपनी आवश्यक्ताओं की पूर्ति करते है, जिसका उपयोग वे चीजवस्तुओं और सेवाओं की खरीदी के लिए करते हैं । क्योंकि मुद्रा सीधे तौर पर लोगों की कोई आवश्यकता पूरी नहीं करती । जैसे – भूख मिटाने हेतु मुद्रा को खाया नहीं जा सकता एवं प्यास बुझाने हेतु मुद्रा को पिया नहीं जा सकता, फिर भी लोग मुद्रा को हाथ में नकद रूप में रखना पसंद करते है । क्योंकि मुद्रा के द्वारा लोगों की कितनी ही आवश्यकताओं की पूर्ति होती है । महान अर्थशास्त्री कीन्स ने बताया कि मुद्रा की माँग के तीन उद्देश्य हैं :
(1) विनिमय का उद्देश्य
(2) सावधानी का उद्देश्य
(3) सट्टाकीय उद्देश्य

(1) विनिमय का उद्देश्य : यह तो सर्वविदित है, कि लोगों को आय कुछ समय के अंतर से प्राप्त होती है, जबकि खर्च प्रतिदिन करना पड़ता है । इसलिए दो आय प्राप्ति के बीच के समय में विविध खर्चों को पूरा करने के लिए लोगों को अपने पास नकद रूप में मुद्रा को रखना पड़ता है । ठीक इसी प्रकार व्यापारिक संस्थाओं को भी कछ मुद्रा इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नकदी स्वरूप में रखना पड़ता है । ठीक इसी प्रकार व्यापारिक संस्थाओं को भी कुछ मुद्रा इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नकदी स्वरूप में रखना पड़ता है । नकद मुद्रा की उतने अंश तक होनेवाली माँग को विनिमय के उद्देश्य से नकद मुद्रा की माँग कहते हैं ।

(2) सावधानी का उद्देश्य : भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु लोग नकद मुद्रा की माँग करते हैं । उदाहरण स्वरुप – किसी भी प्रकार की दुर्घटना या बीमारी होने पर विविध प्रकार के खर्च जब आकस्मिक रूप में आ जाते है, तो उनकी पूर्ति के लिए लोग मुद्रा को नकद रूप में रखते हैं । व्यापारिक संस्थाएँ भी व्यापार धंधे में आनेवाले आकस्मिक खर्च की पूर्ति करने के उद्देश्य से मुद्रा की माँग करती है । ऐसा नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति या संस्था को भविष्य में ऐसा खर्च करना ही पड़े, परन्तु विकल्प के रूप में मुद्रा उसे एक प्रकार का आश्वासन देती है ।

(3) सट्टाकीय उद्देश्य : कीन्स ने प्रतिभूतियों के संदर्भ में होनेवाली सट्टाकीय हेतु मुद्रा की माँग को प्रस्तुत किया था । सट्टा अर्थात् भविष्य में भावों के अपेक्षित परिवर्तन का लाभ लेने हेतु वर्तमान में प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय । इन प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करके उसमें से लाभ प्राप्त करने हेतु सटोरियें जो मुद्रा नकद रूप में अपने पास रखते है, उसे सट्टाकीय हेतु मुद्रा की माँग कहते हैं । ब्याज की दर और प्रतिभूतियों के भावों के बीच व्यस्त संबंध होता है । ब्याज की दर बढ़ने की अपेक्षा हो तो प्रतिभूतियों के भाव घटेंगे ऐसा अनुमान लोग लगाते है । इसलिए वर्तमान ऊँचे भाव से प्रतिभूतियों को बेचकर लोग नकद मुद्रा अपने पास रखने को प्रेरित होते हैं।

मुद्रा की आपूर्ति :

परम्परागत व्याख्या के अनुसार मुद्रा की आपूर्ति अर्थात् लोगों के पासवाली मुद्रा, चाहे वह उनकी जेब में हो, तिजोरी में हो या . बैंकों में जमाराशि के रूप में हो । लोग इस मुद्रा को अपनी इच्छानुसार खर्च कर सके ऐसा होना चाहिए । इस प्रकार मुद्रा के दो घटक हैं ।

(1) मध्यस्थ बैंक द्वारा और ट्रेजरी द्वारा निर्गमित चलनी नोंटे ।
(2) बैंक में लोगों की चालू जमाराशियाँ जो माँगने पर निकाली जा सकें ।

किसी निश्चित समयावदि में मुद्रा का भंडार जो खर्च किया जा सके, उस रूप में नहीं होता । उदाहरण के तौर पर बैंक की सावधि जमा को मुद्रा की आपूर्ति नहीं कहते । मुद्रा की आपूर्ति की व्याख्या वर्तमान में विस्तृत कर दी गई है और अब बैंकों की चालू जमाराशि के अतिरिक्त अन्य जमाराशि का भी समावेश मुद्रा की आपूर्ति में किया जाता है । मुद्रा आपूर्ति की विस्तृत व्याख्या में जिन आर्थिक सम्पत्तियों का रूपान्तरण मुद्रा में हो सकता हो, उनका समावेश भी कई बार मुद्रा की आपूर्ति में किया जाता है ।

चलनी नोटों को निर्गमित करने का अधिकार अपने देश में सिर्फ रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया को है ।

रिजर्व बैंक द्वारा जो चलनी नोटें निर्गमित की जाती है, वे उसका ऋण और उत्तरदायित्व है । चलनी नोटों में रिजर्व बैंक के . गवर्नर के हस्ताक्षरवाली इस आशय की लिखावट होती है कि उसके सामने उतने ही अंशों की मान्य सम्पत्ति उसके पास होनी चाहिए । इन सम्पत्तियों में स्वर्ण, विदेशी मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियाँ बॉण्ड तथा विनिमय पत्रों का समावेश होता है ।

मुद्रा की आपूर्ति के घटकों में परिवर्तन होने से मुद्रा की आपूर्ति में भी परिवर्तन होता है । जब चलनमुद्रा और बैंक मुद्रा के भंडार (जत्थे) में वृद्धि होती है, तब मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि होती है । इन दोनों का प्रमाण प्रत्येक देश में उसके आर्थिक विकास की कक्षा और मुद्रा पद्धति के विकास पर आधारित है ।

विकासशील देशों में सामान्य रूप से मुद्रा की कुल आपूर्ति में चलन मुद्रा का प्रमाण अधिक होता है । जैसे-जैसे अर्थतंत्र विकसित होता है, वैसे-वैसे बैंक में मुद्रा का प्रमाण भी बढ़ता जाता है । भारत में प्रचलित प्रथा के अनुसार चलन के न्यूनत्तम रक्षित कोष के रूप में रु. 200 करोड़ मूल्य का सोना तथा विदेशी मुद्रा होना अनिवार्य है । जिसमें कुछ निश्चित रकम के रूप में स्वर्ण होना आवश्यक है । परन्तु वर्तमान समय में इस प्रथा का विशेष प्रयोजन नहीं है ।

भारत में अगस्त, 2003 में चलन घटक के तौर पर चलनी नोटें रु. 2,84,226 करोड़ थी । वहीं पर जमाराशि के तौर पर बैंक जमाराशि का प्रमाण रु. 15,33,778 करोड़ था । अर्थात् चलन घटक से 5.39 गुना अधिक जमाराशि घटक का प्रमाण था । मुद्रा की आपूर्ति यदि बढ़ जाए तो उससे भाववृद्धि जैसे समस्याएँ उत्पन्न होती है । इसलिए रिजर्व बैंक मुद्रा की आपूर्ति पर नियंत्रण रखता है।

37.

कब भाव बढ़ने पर भी मुद्रास्फीति नहीं है ?

Answer»

यदि अर्थतंत्र में अल्पकालीन समय के लिए कुछ ही सेवा या वस्तु के लिए भाववृद्धि हुयी तो भी मुद्रास्फीति नहीं है ।

38.

उत्पादन में वृद्धि यह किस प्रकार का परिवर्तन है ?

Answer»

उत्पादन में वृद्धि यह परिमाणात्मक परिवर्तन है । परिमाणात्मक परिवर्तन में कुल राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है । वृद्धि के लिए जमीन, पूँजी, श्रम, नियोजनशक्ति की आपूर्ति में वृद्धि होती है ।

39.

जीवनस्तर को किससे माप सकते हैं ?

Answer»

नागरिको को प्राप्त होनेवाली सुविधाएँ जिसमें पानी, बिजली, ड्रेनेज, मकान, परिवहन और संचार, आरोग्य सुविधा, द्रव्य केलरी, प्रोटीन और चर्बी से माप सकते हैं ।

40.

विकास के निर्देशक कौन-से है ? सूचि बनाइए ।

Answer»

निर्देशकों के द्वारा आर्थिक विकास का माप सकते हैं ।
आर्थिक विकास के निर्देशक निम्नानुसार है :

  1. राष्ट्रीय आय की वृद्धि दर
  2. प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धि दर
  3. जीवन की भौतिक गुणवत्ता और अंक में वृद्धि
  4. मानवविकास अंक में वृद्धि
41.

मुद्रा के प्रकार बताइए ।

Answer»

वस्तु विनिमय प्रथा के समय से ही विनिमय के माध्यम या मूल्यसंग्रह के रूप में काम करनेवाले पशु या कीमती पत्थरों का उपयोग किया जाता था । उसके बाद धातु के सिक्को ने काम किया और बाद में कानूनमान्य मुद्रा के रूप में चलनी नोट और सिक्का आये । तथा बैंकिंग सिस्टम के विकास से बैंक-मुद्रा आयी । अब तो क्रेडिट कार्ड या ई-बैंकिंग में मुद्रा ने नया स्वरूप धारण किया ।

संक्षिप्त में मुद्रा के निम्नलिखित प्रकार हैं :

  1. वस्तु मुद्रा
  2. पशु मुद्रा
  3. धातु मुद्रा
  4. कागजी मुद्रा
  5. प्लास्टिक मुद्रा
  6. बैंक मुद्रा । अदृश्य या ई-मनी ।
42.

मुद्रा का मूल्य मापदण्ड के रूप में कार्य बताइए ।

Answer»

वस्तु विनिमय प्रथा में वस्तु का विनिमय मूल्य याद रखना कठिन था । एक मन गैंह बराबर कितना चावल ? कितने मीटर कपड़ा ? कितने किलो घी, कितनी जोड़ी चप्पल ? आदि …..

मुद्रा ने इस कार्य को सरल बना दिया । मुद्रा के कारण कीमत निर्धारण सरल बना । वस्तु और सेवा की कीमत निश्चित होती है । परिणाम स्वरुप मूल्य की गणना सरल बनती है । मुद्रा मूल्य का तुलनात्मक अध्ययन सरल बनाता है ।

43.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।अधिकार खोकर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है,न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है।इस तत्व पर ही कौरवों से पाण्डवों का रण हुआ,जो भव्य भारतवर्ष के कल्पान्त का कारण हुआ।1. महा दुष्कर्म क्या है?A) अधिकार खो कर बैठ रहनाB) अधिकार लेकर बैठ रहनाC) अधिकार देकर बैठ रहनाD) ये सब2. धर्म की बात क्या है?A) युद्ध करनाB) अधिकार खोनाC) न्यायार्थ अपने बंधु को भी दंड देनाD) ये सब3. इस पद्यांश में किस युद्ध के बारे में बताया गया है?A) कौरव – पांडवB ) भारत – पाकC) जर्मनी – चीनD) कुछ कहा नहीं जाता4. किस तत्व पर पांडव – कौरवों का रण हुआ?A) धर्मB) अन्यायC) अधर्मD) इनमें कोई नहीं

Answer»
  1. A) अधिकार खो कर बैठ रहना
  2. C) न्यायार्थ अपने बंधु को भी दंड देना
  3. A) कौरव – पांडव
  4. A) धर्म
44.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।मनमोहिनी प्रकृति की जो गोद में बसा है।सुख स्वर्ग – सा जहाँ है, वह देश कौन – सा है?जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है,जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन – सा है?बचो अर्चना से, फूलमाला से।1. इस पद्यांश में चर्चित देश क्या है?A) भारतB) अमेरिकाC) इंग्लैंडD) रूस2. प्रकृति कैसी है?A) बीभत्सB) भयानकC) मनमोहिनीD) पतझडवाली3. भारत माँ का चरण निरंतर ये धो रहा हैA) हिमेशB) विध्येषC) रमेशD) रत्नेश4. किनसे बचना है?A) तप – जप सेB) हिंसा – अहिंसा सेC) शांति – अशांति सेD) अर्चना – फूलमाला से5. इस पद्य में प्रयुक्त देश (भारत) का मुकुट क्या है?A) विंध्याचलB) हिमालयC) सात्पुडाD) नीलगिरि

Answer»
  1. A) भारत
  2. C) मनमोहिनी
  3. D) रत्नेश
  4. D) अर्चना – फूलमाला से
  5. B) हिमालय
45.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।साक्षी रहे संसार, करता हूँ प्रतिज्ञा पार्थ मैं,पूरा करूँगा कार्य सब कथनानुसार यथार्थ मैं।जो एक बालक को कपट से मार हँसते हैं अभी,वे शत्रु सत्वर शोक – सागर – मग्न दिखेंगे सभी ।।1. इस पद्य में कौन प्रतिज्ञा करते हैं?A) अभिमन्युB) पार्थC) दुर्योधनD) भीम2. साक्षी कौन रहेगा?A) संसारB) पार्थC) कृष्णD) नकुल3. एक बालक को कपट से मारकर सभी क्या करते हैं?A) रोतेB) सोतेC) हँसतेD) भाग जातेC) हँसते4. वे शत्रु किस सागर को मग्न देखेंगे?A) हँसB) शोकC) क्षीरD) हिंदु महासागर5. ये कथनानुसार यथार्थ कार्य पूरा करना चाहता है ?A) भीमB) कृष्णC) अभिमन्युD) पार्थ

Answer»
  1. B) पार्थ
  2. A) संसार
  3. C) हँसते
  4. B) शोक
  5. D) पार्थ
46.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।सहानुभूति चाहिए, महा विभूति है यही,वसीकृत सदैव है बनी हुई स्वयं मही।विरुद्धवार बुद्ध का दया – प्रवाह में बहा,विनीत लोक वर्ग क्या न सामने झुका रहा?आहा ! वही उदार है परोपकार जो करे,वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे !!1. हमें क्या चाहिए?A) यशB) पढाईC) सहानुभूतिD) वर2. महाविभूति क्या है?A) सहानुभूतिB) यशC) वरD) भोजन3. उदार कौन है?A) परपीडा करने वालाB) परोपकारीC) धन देनेवालाD) यश पानेवाला4. विरुद्धवार किसके दया प्रवाह में बहा ?A) अशोकB) महावीरC) शंकरD) बुद्ध5. निजी मनुष्य इसके लिए मरता हैA) मनुष्यB) पशुC) स्नेहD) मोह

Answer»
  1. C) सहानुभूति
  2. A) सहानुभूति
  3. B) परोपकारी
  4. D) बुद्ध
  5. A) मनुष्य
47.

मुद्रा का नया स्वरूप कौन-सा है ?

Answer»

क्रेडिट कार्ड या ई-बैंकिंग मुद्रा का नया स्वरूप है ।

48.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए। कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं,इंसान को कम पहचानते हैं।ये पूरब है पूरब वाले,हर जान की कीमत जानते हैं।जो जिससे मिला सीखा हमने,गैरों को भी अपनाया हमने।मतलब के लिए अंधे होकर,रोटी को नहीं पूजा हमने।।1. हम किन्हें अपनाया?2. हर जान की कीमत कौन जानते हैं?3. ये पद्य किस पाठ से लिये गये हैं?4. ‘गैर’ शब्द का अर्थ क्या है?5. मतलब के लिए अंधे होकर किन्होंने रोटी नहीं पूजा?

Answer»
  1. हमने गैरों को अपनाया।
  2. भारत देश के लोग हर जान की कीमत जानते हैं।
  3. ये पद्य ‘जिस देश में गंगा बहती है’ नामक पद्य पाठ से लिये गये हैं।
  4. “गैर” शब्द का अर्थ है – “दूसरे लोग”। (पराया)
  5. मतलब के लिए अंधे होकर भारतीयों ने रोटी नहीं पूजा।
49.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।मेहमाँ जो हमारा होता है,वो जान से प्यारा होता है।ज्यादा का नहीं लालच हमको,थोडे में गुज़ारा होता है।।बच्चों के लिए जो धरती माँ,सदियों से सभी कुछ सहती है।हम उस देश के वासी हैं,जिस देश में गंगा बहती है ।।1. जान से भी प्यारा हमें कौन है?2. हम किस देश के वासी हैं?3. बच्चों के लिए सदियों से सब कुछ कौन सहती है?4. थोडे में गुज़ारा किनका होता है?5. हमें कितना लालच नहीं है?

Answer»
  1. मेहमान जो हैं, वे हमें जान से भी प्यारे हैं।
  2. हम भारत देश के वासी हैं।
  3. बच्चों के लिए सदियों से धरती माँ सब कुछ सहती है।
  4. भारतवासियों को थोडे में गुज़ारा होता है।
  5. हमें ज्यादा का लालच नहीं है।
50.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।होठों पे सचाई रहती है,जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है ।हम उस देश के वासी हैं,जिस देश में गंगा बहती है ।।1. भारतीयों के दिलों में क्या रहती है?2. जिस देश में गंगा बहती है उस देशवासियों को क्या कहते हैं?3. भारतीयों के होठों पर क्या रहती है?4. उपर्युक्त पद्यांश किस पद्य पाठ से लिया गया है?5. उपर्युक्त पद्यांश के कवि कौन हैं?

Answer»
  1. भारतीयों के दिलों में सफ़ाई रहती है।
  2. जिस देश में गंगा बहती है, उस देशवासियों को भारतीय कहते हैं।
  3. भारतीयों के होठों पर सचाई रहती है।
  4. उपर्युक्त पद्यांश “जिस देश है” नामक पद्य पाठ (गेय कविता) से लिया गया है।
  5. उपर्युक्त पद्यांश के कवि हैं श्री शैलेंद्र कुमार जी।