This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूदा एक-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें। |
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Answer» उक्त कथन से हम पूर्णत: सहमत हैं। इस विचार की पुष्टि निम्नलिखित बिन्दुओं में स्पष्ट होती है- (1) विकासशील देश भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाएँ विकसित होती हुई अर्थव्यवस्थाएँ हैं। ये नयी अर्थव्यवस्था उदारीकरण, वैश्वीकरण तथा मुक्त व्यापार नीति की समर्थक हैं। ये अमेरिका और अन्य बहुराष्ट्रीय नियम समर्थक कम्पनियाँ स्थापित और संचालन करने वाले राष्ट्रों को आकर्षित करने के लिए अन्य सुविधाएँ प्रदान करके अपने देश के आर्थिक विकास की गति को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। |
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किस तरह यूरोपीय देशों ने युद्ध के बाद की अपनी परेशानियाँ सुलझाईं? संक्षेप में उन कदमों की चर्चा कीजिए जिनसे होते हुए यूरोपीय संघ की स्थापना हुई? |
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Answer» जब द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हुआ तब यूरोप के नेता यूरोप की समस्याओं को लेकर काफी परेशान रहे। द्वितीय विश्वयुद्ध ने उन अनेक मान्यताओं और व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया जिसके आधार पर यूरोपीय देशों के आपसी सम्बन्ध बने थे। सन् 1945 तक यूरोपीय देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था की बर्बादी तो झेली ही, उन मान्यताओं और व्यवस्थाओं को ध्वस्त होते हुए भी देख लिया जिन पर यूरोप खड़ा था। यूरोपीय देशों की कठिनाइयों को सुलझाने के लिए निम्नलिखित प्रयास किए गए- 1. यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना एवं अमेरिका द्वारा सहयोग–अमेरिका ने यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए अभूतपूर्व सहायता की। इसे मार्शल योजना के नाम से जाना जाता है। अमेरिका ने ‘नाटो’ के तहत एक सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को जन्म दिया। मार्शल योजना के तहत ही सन् 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना की गयी जिसके माध्यम से पश्चिमी यूरोप के देशों को आर्थिक मदद की गयी। यह एक ऐसा मंच बन गया जिसके माध्यम से पश्चिमी यूरोप के देशों ने व्यापार और आर्थिक मामलों में एक-दूसरे की सहायता शुरू की। |
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ओपेन डोर (मुक्त द्वार) की नीति किसके द्वारा और कब अपनाई गई थी? इस नीति का चीन पर क्या प्रभाव (असर) पड़ा? |
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Answer» चीनी नेता देंग श्याओपेंग ने सन् 1978 में ओपेन डोर (मुक्त द्वार) की नीति चलाई जिसका देश पर बहुत ही अच्छा प्रभाव पड़ा। इस नीति के कारण चीन ने अद्भुत प्रगति की तथा वह आगामी वर्षों में विश्व की एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा। |
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माओ युग के पश्चात् चीन द्वारा कौन-कौन सी नई आर्थिक नीतियाँ अपनायी गईं? इन नीतियों को अपनाए जाने के कारणों एवं लाभकारी परिणामों का विस्तार से वर्णन कीजिए। |
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Answer» माओ युग के पश्चात् चीन द्वारा अपनायी गई नई आर्थिक नीतियाँ चीनी नेतृत्व ने 1970 के दशक में आर्थिक संकट से उबरने के लिए कुछ बड़े नीतिगत निर्णय लिए; जिनका विवरण निम्नलिखित है- 1. संयुक्त राज्य अमेरिका से सम्बन्ध स्थापित करना-चीन ने अपने राजनीतिक एवं आर्थिक एकान्तवास को समाप्त करने के लिए सन् 1972 में संयुक्त राज्य अमेरिका से सम्बन्ध स्थापित किए। माओ के पश्चात् नई आर्थिक नीतियाँ अपनाने के कारण सन् 1949 में माओ के नेतृत्व में हुई साम्यवादी क्रान्ति के बाद से चीन पर्याप्त आर्थिक विकास नहीं कर पा रहा था जिसके निम्न कारण थे- ⦁ चीनी अर्थव्यवस्था की विकास दर-5 से 6 प्रतिशत के मध्य थी, लेकिन जनसंख्या में 2 से 3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि इस विकास दर की प्रभावशीलता को कम कर रही थी तथा बढ़ती जनसंख्या विकास से वंचित होती जा रही थी। नई आर्थिक नीतियों के लाभकारी परिणाम ⦁ कृषि उत्पादों एवं ग्रामीण आय में वृद्धि-चीन ने सन् 1982 में कृषि के निजीकरण के बाद कृषि उत्पादों एवं ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बचतों में वृद्धि हुई जिससे ग्रामीण उद्योगों में तीव्र गति से वृद्धि हुई। |
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चीन ने ‘खुले द्वार की नीति’ कब और क्यों अपनाई? |
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Answer» सन् 1978 में चीन के तत्कालीन नेता देंग श्याओपेंग ने चीन में आर्थिक सुधारों एवं खुले द्वार की नीति की घोषणा की। चीन ने विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता प्राप्त करने के लिए तथा बाधामूलक अर्थव्यवस्था को अपनाने के लिए यह नीति अपनाई। |
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खाद्य सुरक्षा में किसे शामिल किया जा सकता है? |
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Answer» खाद्य सुरक्षा में निम्नलिखित शामिल हैं ⦁ खाद्य की उपलब्धता यहाँ पर सभी के लिए भोजन उपलब्ध होना चाहिए। ⦁ खाद्य की अधिकता-सभी व्यक्तियों के पास खाद्य (भोजन) होना चाहिए। यह सभी तक पहुँचना चाहिए। ⦁ खाद्य की प्राप्ति-सभी व्यक्तियों के पास पर्याप्त, सुरक्षित एवं पोषण खाद्य खरीदने के लिए पर्याप्त क्रय शक्ति होनी चाहिए। |
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» सरकार द्वारा विनियमित बिन्दु पर आवश्यक वस्तुओं के वितरण को सार्वजनिक वितरण प्रणाली कहते हैं। हमारे देश में लगभग 4,60,000 राशन एवं उचित कीमत की दुकानें हैं जो सम्पूर्ण देश में फैली हुई हैं। मिट्टी का तेल, गन्ना, कोयला आदि भी सरकारी उचित कीमत की दुकानों के द्वारा बेची जाती है। उपभोक्ता सहकारी समितियाँ (co-operatives) भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ऐजेंट के रूप में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन सहकारी समितियों द्वारा विनियमित कपड़े एवं अन्य वस्तुएँ बेची जाती हैं। कभी-कभी व्यापारिक एजेंसी द्वारा राशन कार्ड के आधार पर वनस्पति तेल भी बेचा जाता है। सुपर बाज़ार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एजेंसी के रूप में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दिल्ली में विभिन्न गतिशील मोटर वाहन (vans) को भी दिल्ली प्रशासन एवं सुपर बाजार द्वारा प्रारम्भ किया गया है। जिससे शहर के प्रत्येक हिस्से में आवश्यक वस्तुओं का प्रवाह किया जा सके। दिल्ली दृध योजना एवं मदर डेयरी भी दूध की आपूर्ति उचित दर (fair price) पर करती है। जनजातियों के क्षेत्रों (tribal areas) में भी विशेष सहायता योजना (special subsidied scheme) के अन्तर्गत अनाज को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है। |
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अनाज प्रबन्ध का वर्णन कीजिए। |
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Answer» द्वितीय (II) विश्व युद्ध के दौरान अनाज की कमी को पूरा करने के लिए इसे प्रारम्भ किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध से अनाज प्रबंध निरंतर उसी एवं अन्य रूप में चल रहा है। अनाज प्रबंध के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं- (क) सार्वजनिक वितरण प्रणाली का रख-रखाव। (ख) अनाज के अतिरिक्त भंडार का रख-रखाव। (ग) सरकारी एजेंसी द्वारा बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त खाद्यान्नों की सार्वजनिक वितरण के रूप में प्राप्ति करना एवं उसका भंडार बनाना। (घ) अनाज के प्रबंध में आवश्यक एवं न्यायोचित प्रतिबन्ध लगाना। (ङ) निजी व्यापार का नियमन जिससे खाद्यान्नों की जमाखोरी एवं उनमें सट्टेबाज़ी रोकी जा सकें। (च) जब कभी आवश्यक हो, तो घरेलू उत्पादन की सहायता के लिए विदेशों से खाद्यान्न का आयात करना। |
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महाराष्ट्र के ‘एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस’ की खाद्य सुरक्षा में भूमिका का वर्णन कीजिए। |
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Answer» इस संस्था ने महाराष्ट्र के विभिन्न भागों में अनाज बैंकों की स्थापना के लिए गैर-सरकारी संगठनों के नेटवर्क की सहायता की। यह संस्था गैर-सरकारी संगठनों के लिए खाद्य सुरक्षा के विषय में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम का संचालन करती है। |
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कुछ पोषक भोजन कार्यक्रमों को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» ⦁ दोपहर के भोजन की योजना-यह वर्ष 1962-63 में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य 6 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन प्रदान करना है। वर्ष 1983 तक इसने 18 लाख बच्चों को इस कार्यक्रम में शामिल किया। ⦁ विशेष पोषण योजना-यह वर्ष 1970-71 में प्रारम्भ किया गया। इसका लक्ष्य 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रोटीन युक्त 300 कैलोरी प्रदान करना है और गर्भवती को वर्ष में 300 दिन 500 कैलोरी प्रोटीन के साथ प्रदान करना है। वर्ष 1983 तक इस कार्यक्रम में 9 लाख लोग शामिल थे। इस कार्यक्रम में पौष्टिक एवं शक्तिवर्धक खाद्य का उत्पादन भी शामिल है। ⦁ विशेष पौष्टिक भोजन कार्यक्रम-वर्ष 1960 में विशेष पौष्टिकता की कमी को दूर करने के लिए निम्न विशेष पौष्टिक भोजन कार्यक्रम जारी किए गए। ⦁ व्यवहारिक संतुलित पौष्टिक आहार योजना-यह वर्ष 1960 में दो राज्यों में प्रारम्भ हुआ। वर्ष 1973 तक यह सभी राज्यों में फैल गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संतुलित आहार, सुरक्षित खाद्य का उपभोग एवं पकाने की उचित तकनीकी के विचार को फैलाना था। |
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अन्त्योदय अन्न योजना से आप क्या समझते हैं? टिप्पणी करें। |
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Answer» अन्त्योदय अन्न योजना दिसम्बर, 2000 में शुरू की गई थी। इस योजना के अन्तर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आने वाले निर्धनता रेखा से नीचे के परिवारों में से एक करोड़ लोगों की पहचान की गई। सम्बन्धित राज्य के ग्रामीण विकास विभागों ने गरीबी रेखा से नीचे के गरीब परिवारों को सर्वेक्षण के द्वारा चुना। 2 रुपये प्रति किलोग्राम गेहूँ और 3 रुपये प्रति किलोग्राम की अत्यधिक आर्थिक सहायता प्राप्त दर पर प्रत्येक परिवार को 25 किलोग्राम अनाज उपलब्ध कराया गया। अनाज की यह मात्रा अप्रैल 2002 में 25 किलोग्राम से बढ़ा कर 35 किलोग्राम कर दी गई। जून 2003 और अगस्त 2004 में इसमें 50-50 लाख अतिरिक्त बी.पी.एल. परिवार दो बार जोड़े गए। इससे इस योजना में आने वाले परिवारों की संख्या 2 करोड़ हो गई। |
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खाद्य और खाद्य से सम्बन्धित वस्तुओं को उपलब्ध कराने में सहकारी समितियों और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» ⦁ गुजरात में दूध तथा दुग्ध उत्पादों में अमूल एक और सफल सहकारी समिति का उदाहरण है। इसने देश में श्वेत क्रान्ति ला दी है। ⦁ भारत में सहकारी समितियों के कई उदाहरण हैं जो समाज के विभिन्न वर्गों की खाद्य सुरक्षा के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। ⦁ भारत में गैर-सरकारी संगठन की खाद्य सुरक्षा के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। ⦁ इसी तरह, महाराष्ट्र में एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस (ए.डी.एस.) ने विभिन्न क्षेत्रों में अनाज बैंकों की स्थापना के लिए गैर-सरकारी संगठनों के नेटवर्क में सहायता की है। ⦁ ए.डी.एस. गैर-सरकारी संगठनों के लिए खाद्य सुरक्षा के विषय में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित करती है। ⦁ अनाज बैंक अब धीरे-धीरे महाराष्ट्र के विभिन्न भागों में खुलते जा रहे हैं। ⦁ अनाज बैंकों की स्थापना, गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से उन्हें फैलाने और खाद्य सुरक्षा पर सरकार की नीति को प्रभावित करने में ए.डी.एस. की कोशिश रंग ला रही है। ⦁ ए.डी.एस. अनाज बैंक कार्यक्रम को एक सफल और नए प्रकार के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के रूप में स्वीकृति मिली। हैं। ⦁ भारत में विशेषकर देश के दक्षिणी और पश्चिमी भागों में सहकारी समितियाँ भी खाद्य सुरक्षा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ⦁ सहकारी समितियाँ निर्धन लोगों को खाद्यान्न की बिक्री के लिए कम कीमत वाली दुकानें खोलती हैं। ⦁ दिल्ली में मदर डेयरी उपभोक्ताओं को दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित नियंत्रित दरों पर दूध और सब्जियाँ उपलब्ध कराने में तेजी से प्रगति कर रही है। |
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मौसमी भुखमरी और दीर्घकालिक भुखमरी में भेद कीजिए। |
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Answer» दीर्घकालिक भुखमरी यह मात्रा एवं/या गुणवत्ता के आधार पर अपर्याप्त आहार ग्रहण करने के कारण होती है। गरीब लोग अपनी अत्यन्त निम्न आय और जीवित रहने के लिए खाद्य पदार्थ खरीदने में अक्षमता के कारण दीर्घकालिक भुखमरी से ग्रस्त होते हैं। मौसमी भुखमरी-यह फसल उपजाने और काटने के चक्र से सम्बन्धित हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि क्रियाओं की मौसमी प्रकृति के कारण तथा नगरीय क्षेत्रों में अनियमित श्रम के कारण होती है। जैसे—बरसात के मौसम में अनियमित निर्माण के कारण श्रमिक को कम काम रहता है। |
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अकाल के लिए उत्तरदायी कारणों को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» अकाल के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं- ⦁ युद्ध एवं जान बूझकर राजनीतिक हस्तक्षेप भी अकाल को कारण हो सकता है-इन दिनों क्षेत्रों में विनाशकारी युद्ध एवं कुछ राजनैतिक मतभेद अकाल की स्थिति पैदा करते हैं। ⦁ नागरिक उथल-पुथल (अशान्ति) और भोजन वितरण प्रणाली की दुर्व्यवस्था-समूहों के मध्य टकराव एवं मुठभेड़ कभी-कभी खाद्य वितरण प्रणाली को तोड़ देते हैं और अकाल को बढ़ावा देते हैं। ⦁ अधिक खाद्य कमी-अकाल की प्रधान विशेषता खाद्य की अधिक कमी होना है। खाद्य (भोजन) अनुपलब्ध है। चाहे यह उपलब्ध हो लेकिन इसके मूल्य के अधिक होने के कारण यह सामान्य लोगों की पहुँच तक नहीं होता। ⦁ फसल की असफलता या स्थिति में परिवर्तन जैसे सूखा-हार्वेस्ट के बाढ़, सूखा एवं प्राकृतिक आपदाओं के कारण निरन्तर असफल होने के परिणामस्वरूप खाद्य स्तर में कमी होती है और यह आकाल की स्थिति लाता है। ⦁ विनाश चाहे प्राकृतिक या मानव निर्मित किसी भी प्रकार का विनाश चाहे प्राकृतिक हो या मानव द्वारा निर्मित आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचाता है और अकाल को पैदा करता है। |
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स्वतन्त्रता से पूर्व अकाल के पड़ने के कोई दो कारण बताइए। |
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Answer» अकाल के लिए उत्तरदायी कारण निम्नलिखित हैं ⦁ खाद्य की अधिक कमी, |
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अकाल को परिभाषित कीजिए। |
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Answer» अकाल उस परिस्थिति को कहते हैं जिसमें किसी क्षेत्र या देश की जनसंख्या का बड़ा भाग अल्प भोजन और कुपोषण से ग्रस्त होता है, जिसके कारण भुखमरी, जीवन का साधारण अंग बन जाती है। |
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अकाल के विपक्ष में तीन आधुनिक हथियारों को बताइए। |
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Answer» अकाल के विरुद्ध आधुनिक हथियार ⦁ नाइट्रोजन उर्वरकों का उपयोग |
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सोमालिया में अकाल का क्या कारण है? |
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Answer» सोमालिया (अफ्रीकी देश) में अकाल-नागरिक अशान्ति का परिणाम है। देश में खाद्य वितरण प्रणाली पूरी तरह टूट गयी है। |
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भारत में कौन-से राज्य खाद्य असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हैं? |
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Answer» भारत में ओडिशा, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र आदि राज्य खाद्य असुरक्षा से ग्रस्त हैं। |
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कृषि विकास के लिए भारत सरकार द्वारा किये गए प्रयासों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भारत सरकार द्वारा कृषि की उन्नति के लिए निम्नलिखित प्रमुख कदम उठाए गए हैं —
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अनुसूचित जनजातियों से आप क्या समझते हैं? भारत की अनुसूचित जनजातियों की प्रमुख समस्याओं की विवेचना कीजिए। याभारत में जनजातियों की प्रमुख समस्याओं की विवेचना कीजिए। उनकी दशा में सुधार लाने के लिए दो उपाय लिखिए। याभारत में जनजातियों की प्रमुख समस्याओं की विवेचना कीजिए तथा उनके समाधान हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए। |
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Answer» आदिवासी अथवा जनजाति का अर्थ ⦁ गिलिन एवं गिलिन के अनुसार, “स्थानीय आदिवासियों के किसी भी ऐसे संग्रह को हम जनजाति कहते हैं, जो एक सामान्य क्षेत्र में निवास करता हो, एक सामान्य भाषा बोलता हो तथा सामान्य संस्कृति के अनुसार व्यवहार करता हो।” जनजातियों अथवा आदिवासियों की प्रमुख समस्याएँ (1) सामाजिक समस्याएँ उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि आदिवासी अनेक प्रकार की समस्याओं से ग्रसित हैं। स्वतन्त्रता- प्राप्ति के 70 वर्षों के पश्चात् भी इनकी समस्याओं का कोई ठोस हल नहीं निकाला जा सका है। वर्तमान समय में भी ये अनेक प्रकार के शोषण, अत्याचार तथा उत्पीड़न के शिकार हैं। |
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जनजातियों के हितार्थ कार्य करने वाली तीन प्रमुख संस्थाओं के नाम बताइए। |
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Answer» ⦁ रामकृष्ण मिशन |
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भारत में अनुसूचित जनजातियों की चार समस्याओं का वर्णन कीजिए। याभारत में अनुसूचित जनजातियों की कोई दो समस्याएँ तथा उनके समाधान के निवारण हेतु सुझाव भी दीजिए। याअनुसूचित जातियों के आरक्षण के दो आधार बताइए। याभारत में आदिवासियों की दो मुख्य समस्याएँ लिखिए तथा उनके समाधान के उपाय भी बताइए। |
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Answer» जनजातियों की दो प्रमुख समस्याएँ तथा सुझाव निम्नलिखित हैं – 1. आर्थिक शोषण – आधुनिक समय में जनजाति के लोगों को जमींदारों, व्यापारियों, साहूकारों, सरकारी कर्मचारियों के सम्पर्क में आना पड़ता है। वनों की कटाई की जा चुकी है। शहरीकरण ने इन पर सीधा प्रभाव डाला है। सभी लोग इनका आर्थिक शोषण करते रहे हैं। इनकी पैदावार को कम दामों में खरीदा जाता है। इन्हें मजदूरी भी सही प्राप्त नहीं हो पाती है। आर्थिक शोषण से बचाव के लिए कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए तथा जनजातीय लोगों को न्यूनतम मजदूरी हर हालत में दिलाई जानी चाहिए। श्रम संघों का विकास अनिवार्य रूप से होना चाहिए। |
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भारत में जनजातियों की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। याअनुसूचित जनजातियों की विशेषताएँ लिखिए।याभारत में निवास करने वाली जनजातियों के चार प्रमुख लक्षण बताइए। |
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Answer» जनजाति के लक्षण (विशेषताएँ) ⦁ सामान्य भू-भाग – एक जनजाति एक निश्चित भू-भाग में ही निवास करती है। |
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अनुसूचित जनजाति की किन्हीं दो समस्याओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ अशिक्षा तथा निरक्षरता की समस्या तथा |
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अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के चार कारण बताइए। |
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Answer» भारतीय जनजातियों में व्याप्त समस्याओं में से चार मूल कारण निम्नवत् हैं 1. निर्धनता, अज्ञानता तथा विकास से वंचित रहना – जनजातीय लोगों की निर्धनता और अज्ञानता के कारण समाज के सम्पन्न वर्ग, व्यापारी वर्ग, नौकरशाह और राजनीतिज्ञ उनका मनमाना शोषण करते हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारों ने जनजातियों के विकास के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की है, लेकिन इस धनराशि का उपयोग उनके विकास कार्यों के लिए नहीं किया जाता। अज्ञानता ने जनजातियों में विभिन्न अन्धविश्वासों को जन्म दिया तथा इसका लाभ उठाकर समाज के अन्य वर्गों ने उनका शोषण किया। |
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भारत की अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए कोई चार सुझाव बताइए। |
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Answer» अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इन्हें संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ इनकी समस्याओं के समाधान हेतु निम्नलिखित उपाय भी किए गए हैं। ⦁ लोकसभा तथा राज्य विधानमण्डलों में इनके लिए स्थानों के आरक्षण की व्यवस्था की गई है। |
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जनजातियों की समस्याओं के समाधान हेतु किये गये संवैधानिक प्रावधानों का विवरण दीजिए। |
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Answer» जनजातियों की समस्याओं के समाधान हेतु निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 335 के अनुसार, सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी नौकरियों में देश की जनजातियों के लिए स्थान सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया है। अनुच्छेद 325 में कहा गया है कि किसी को भी धर्म, प्रजाति, जाति एवं लिंग के आधार पर मताधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। आदिवासियों के जन-प्रतिनिधियों के लिए लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में अनुच्छेद 330 व 332 के अनुसार स्थान सुरक्षित कर दिये गये हैं। इन आरक्षित स्थानों पर जनजातियों एवं अनुसूचित जातियों के अतिरिक्त अन्य कोई चुनाव नहीं लड़ सकता। अनुच्छेद 338 में राष्ट्रपति द्वारा इनके लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति की व्यवस्था की गयी है। अनुच्छेद 342 व 344 में राज्यपालों को भारतीयों के सन्दर्भ में विशेष अधिकार प्रदान किये गये हैं। इसी प्रकार संविधान के अनुच्छेद 47 में राज्य का यह दायित्व माना गया है कि वह जनजातियों की शिक्षा की उन्नति और आर्थिक हितों की सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान दे। इसी प्रकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में असम के अतिरिक्त ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में जनजातियों के कल्याण हेतु पृथक् मन्त्रालय स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह से अनुच्छेद 224 (2) के अन्तर्गत असम की जनजातियों के लिए जिला और प्रादेशिक परिषदें स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। |
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कलाम जी के बचपन के बारे में आप क्या जानते हैं? |
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Answer» कलाम जी बचपन में बहुत गरीब परिवार से थे। वे तमिलनाडु के रामेश्वरम की गलियों में समाचार पत्र बेचते थे। वे निर्धन थे। बचपन में उन्हें शिक्षा के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ा। |
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बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए कलाम जी ने क्या उपाय बताए? |
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Answer» बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए कलाम जी ने लोगों को साक्षर बनाने को कहा है। उनका कहना है कि हमें महिलाओं की साक्षरता पर विशेष बल देना चाहिए। हम देखते हैं कि जिन क्षेत्रों में महिला साक्षरता अधिक है वहाँ जनसंख्या वृद्धि दर कम है। वे कहते हैं कि प्रत्येक छात्र को कम से कम पाँच महिलाओं को शिक्षित करना चाहिए। साथ ही आप उन्हें समाज की उन प्रमुख समस्याओं के बारे में भी बतायें, जिनसे आजकल की महिलाओं को संकट का सामना करना पड़ रहा है। |
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कलाम जी सदगुण संपन्न हैं। आप उनमें से किस गण का पालन करना चाहते हैं? |
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Answer» कलाम जी में अनेक गुण हैं, जैसे- सादगी, ईमानदारी, अध्यवसायी, मेहनती इत्यादि। मैं उनकी तरह ईमानदार बनना चाहूँगा। ईमानदारी इंसान को बहुत आगे ले जाती है। ईमानदार इंसान समाज के विकास में सहायक होता है। ईमानदारी का पालन करने से इसका प्रसार होता है। इससे समाज स्वस्थ बनता है। इसके माध्यम से हम और समाज दोनों सुखी रह सकते हैं। |
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बाल मज़दूरी दूर करने के लिए अपनी ओर से कुछ सुझाव दीजिए। |
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Answer» बाल मजदूरी कराना एक अपराध है। इसे रोकने के लिए कानून को और कड़ा बनाना पड़ेगा। किंतु बालक अपनी घर की परेशानी के कारण मज़दूरी करने जाते हैं। यदि हम भारत से गरीबी को मिटा दें तो बाल मजदूरी अपने आप समाप्त हो जाएगी। बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रहने-खाने की व्यवस्था मुफ्त होनी चाहिए। जो बच्चे ऐसे आवासीय पाठशालाओं में पढ़ते हैं उनके माता-पिता को भी प्रोत्साहन स्वरूप धन या आवश्यक सामग्री मिलनी चाहिए। बाल मज़दूरी रोकने के लिए पोस्टर आदि लगाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। |
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भील जनजाति प्रमुख रूप से कौन-से राज्य में पायी जाती है?(क) राजस्थान में(ख) मध्य प्रदेश में(ग) बिहार में(घ) असम में |
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Answer» सही विकल्प है (क) राजस्थान में |
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जनजाति से क्या अभिप्राय है? |
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Answer» भारत के दुर्गम स्थानों व जंगलों में निवास करने वाले विभिन्न आदिवासी समूहों को ही जनजाति कहा जाता है। |
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जनजाति के पाँच प्रमुख लक्षण (विशेषताएँ) क्या हैं? याजनजातियों की कोई दो विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» ⦁ सामान्य भू-भाग |
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टेसी थॉमस के जीवन से हमें क्या संदेश मिलता है? |
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Answer» टेसी थॉमस के जीवन से हमें ये – संदेश मिलते हैं।
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‘टेसी थॉमस को मिजाइल वुमेन या अग्निपुत्री क्यों कहते हैं? |
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Answer» टेसी थॉमस एक महिला वैज्ञानिक हैं। रक्षा अनुसंधान और विज्ञान को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। मगर टेसी जी ने अपने मेहनत लगन और दृढ़ निश्चय से इस क्षेत्र में मेहनत की। निरंतर श्रम से वो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ) के अग्नि-5 कार्यक्रम की निदेशक बनीं। उन्होंने देश के किसी मिज़ाइल प्रॉजेक्ट की पहली महिला प्रमुख बनने का गौरव प्राप्त किया। इसलिए उन्हें मिजाइल वुमेन कहते हैं। |
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टेसी थॉमस का जीवन हमें किस तरह प्रेरित करता है? |
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Answer» भारत की “प्रथम मिज़ाइल वुमन” और अग्निपुत्री नाम से विख्यात हैं टेसी थॉमस। उनका आदर्शमय जीवन सबके लिए प्रेरणादायक रहा है। कठोर परिश्रम, लगन, लक्ष्य प्राप्ति तक चैन न लेने का महान आशय आदि उनको इतनी ख्यातिवान बना चुके हैं। उनका सफल जीवन ही पढाई में श्रद्धा, मेहनत, मनपसंद विषय में जी – जान लगा देने की सूचना, सफलता प्राप्त करने तक कमर – कसकर तैयारी करने की हमें प्रेरणा देता है। |
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पहली पंचवर्षीय योजना कब आरम्भ हुई थी?(क) 1951 ई० में(ख) 1952 ई० में(ग) 1953 ई० में(घ) 1954 ई० में |
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Answer» (क) 1951 ई० में |
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12वीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल है(क) 2007-12,(ख) 2009-14(ग) 2012-17(घ) 2017-2022 |
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Answer» सही जवाब है (ग) 2012-17 |
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योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे(क) इन्दिरा गांधी(ख) मोतीलाल नेहरू(ग) राजीव गांधी(घ) जवाहरलाल नेहरू |
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Answer» (घ) जवाहरलाल नेहरू |
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दसवीं पंचवर्षीय योजना कब प्रारम्भ हुई ? |
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Answer» दसवीं पंचवर्षीय योजना सन् 2002 में प्रारम्भ हुई। |
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योजना आयोग का नया नाम क्या है? |
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Answer» सही जवाब है नीति आयोग। |
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महिला साक्षरता की क्या आवश्यकता है? |
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Answer» महिलाएँ परिवार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परिवारों को जोड़कर ही समाज बनता है। |
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भारत सरकार द्वारा किए गए दो समाज कल्याण कार्यों को लिखिए। |
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Answer» (1) समाज कल्याण संस्थाओं की स्थापना तथा |
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नीति आयोग की स्थापना कब हुई? |
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Answer» 1 जनवरी, 2015 को नीति आयोग की स्थापना हुई। |
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टेसी थॉमस को ‘अग्नि-पुत्री’ का उपनाम क्यों दिया गया होगा? |
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Answer» थॉमस रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) के अग्नि कार्यक्रम की निदेशक बनी। उन्होंने देश के किसी मिसाइल प्रॉजेक्ट की पहली महिला प्रमुख बनने का गौरव प्राप्त किया। अग्नि मिज़ाइल के अभियान की सफलता के कारण उसे अग्नि पुत्री का उपनाम दिया गया होगा। |
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भारत में प्रमुख समस्याएँ क्या-क्या हैं? |
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Answer» भारत में अनेक प्रकार की समस्याएँ हैं। जनसंख्या समस्या उसमें प्रमुख है। इस समस्या के साथ अनेक समस्याएँ भी जुड़ी हुई हैं। रोजगार की समस्या का मूल कारण बढ़ती जनसंख्या ही है। अशिक्षा भी भारत की प्रमुख समस्या है। मज़दूरों की हालत भी दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। पर्यावरण में प्रदूषण तेजी से फैलता जा रहा है। पीने के पानी की समस्या भी बढ़ गई है। भ्रष्टाचार भी भारत की प्रमुख समस्याओं में से एक है। इसके कारण हमारा विकास सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। |
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ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के चार उद्देश्य बताइए। |
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Answer» ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के चार प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं ⦁ विकास दर का लक्ष्य 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष प्राप्त करना। |
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स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद भारत में समाज-कल्याण एवं सामाजिक पुनर्निर्माण के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ क्यों बनायी गयीं? |
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Answer» पंचवर्षीय योजनाएँ – प्रत्येक राष्ट्र योजनाबद्ध प्रयत्नों के द्वारा एक निश्चित अवधि में कुछ सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करना, अपनी समस्याओं एवं अभावों से मुक्ति पाना चाहता है। ऐसा करने के लिए वह नियोजन या आयोजन का सहारा लेता है। जार शासन से मुक्त होने के बाद रूस ने अपने देश में सन् 1928 से पंचवर्षीय योजनाएँ आरम्भ कीं और उसे देश के सर्वांगीण विकास में आशातीत सफलता प्राप्त हुई। रूस से प्रेरित होकर भारत में भी पंचवर्षीय योजनाएँ बनायी गयीं। |
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