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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

प्रकृति के मनोहर दृश्य देखकर कवि को किसकी याद आती है?

Answer»

प्रकृति के मनोहर दृश्य देखकर कवि को जग के सिरजनहार ईश्वर की याद आती है।

2.

ईश्वर की याद कब आती है?

Answer»

चिड़ियाँ सुबह जल्दी उठकर खुशी के गीत गाती हैं। कलियों की खुशबू चारों ओर फैलती है। बरसात में बूंदें गिरती हैं और बिजली चमकती है। मैदानों, वनों और बागों में हरियाली छा जाती है तथा ठंडी हवा मस्ती में चलती है। इन सभी अवसरों पर ईश्वर की याद आती है।

3.

हरियाली कहाँ-कहाँ लहराती है?

Answer»

हरियाली मैदानों, वनों और बागों में लहराती है।

4.

सुबह खुशबू की लहरें क्या करती हैं?

Answer»

सुबह खुशबू की लहरें फूलों से बाहर आकर दौड़ लगाती हैं।

5.

हल्दी-घाटी और सिंह-गढ़ से कवि का क्या तात्पर्य है?

Answer»

मुगल सम्राट अकबर अनेक राजपूत राजाओं को अपने अधीन करना चाहता था, परन्तु सफल नहीं हुआ। महाराणा प्रताप अपनी स्वाधीनता गवाने के लिए तैयार नहीं हुए। अंत में हल्दी-घाटी के मैदान में अकबर और राणा प्रताप की सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ। इसी प्रकार सिंहगढ़ भी मुसलमान शासक के अधीन था। उस पर अधिकार करने के लिए शिवाजी महाराज के वीर सरदार तानाजी ने उस पर आक्रमण किया। कड़ी टक्कर के बाद सिंहगढ़ हाथ में आ गया, पर अद्भुत वीरता दिखाते हुए तानाजी मालसुरे शहीद हो गए। कवयित्री कहना चाहती है कि हल्दी-घाटी और सिंहगढ़ के संघर्ष बताते हैं कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए।

6.

निम्नलिखित वाक्यों में से रेखांकित शब्दों का विशेषण पहचानिए :एक प्याला टूट गया।सूखी पत्तियाँ झर जाती हैं।तुम्हारा अनुभव अभी कच्चा हैं।

Answer»
  1. एक – संख्यावाचक विशेषण
  2. सूखी – गुणवाचक विशेषण
  3. कच्चा – गुणवाचक विशेषण
7.

मदिरा के घडों और मधु-प्यालों से किसकी ममता होती है?

Answer»

मदिरा के घड़ों और मधु-प्यालों से कच्चे पीनेवालों की ममता होती है।

8.

कवि सच्चे ‘मधु से जला हुआ’का प्रयोग किसके लिए करता है?

Answer»

कवि के अनुसार मधुपटों एवं मधु-प्यालों से कच्चे पीनेवालों की ममता होती है। जब कि सच्चे पीनेवालों की आसक्ति मधु (मदिरा) में होती है। कवि ‘मधु से जला हआ’ शब्द का प्रयोग सच्चे पीनेवालों के लिए करते हैं।

9.

हल्दी-घाटी और सिंहगढ़ किनकी ज्वलंत स्मृतियों को जाग्रत करते हैं?

Answer»

हल्दी-घाटी और सिंहगढ़ महाराणा प्रताप और तानाजी मालसुरे की ज्वलंत स्मृतियों को जाग्रत करते हैं।

10.

कविता का सरल अर्थ :(1) जो बीत गई …….. सो बात गई।(2) जीवन में वह था ……….. सो बात गई।(3) जीवन में मधु …. सो बात गई।(4) मृदु मिट्टी के ………. सो बात गई।

Answer»

(1) जो बीत गई …….. सो बात गई।

जो तुम पर बीती है, वह आई-गई बात हो गई है। वह बात हमेशा के लिए समाप्त हो गई है। (ऐसा मानकर उसे भूल जाना ही अच्छा है।) माना कि तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा था, जो तारे की भाँति चमक रहा था और तुम भी उसे बहुत चाहते थे। तारे की तरह चमकता हुआ वह व्यक्ति तारे की तरह ही डूब गया (गुजर गया) तो डूब जाने दो। जो दुनिया से चला गया, उस पर शोक मत करो।

जरा आकाश के चेहरे को तो देखो। अब तक उसके जाने कितने प्रिय तारे टूट चुके हैं। जो तारे टूट गए, वे फिर आकाश से कभी नहीं मिल पाए। परंतु क्या आकाश कभी अपने उन टूटे हुए तारों पर शोक मनाता है? (जिस तरह आकाश अपने उन बिछड़े हुए तारों को भूल जाता है, उसी तरह तुम भी अपने प्रिय व्यक्ति के विछोह को भूल जाओ) क्योंकि जो बात बीत गई, वह हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

(2) जीवन में वह था ……….. सो बात गई।

माना कि तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा था, जो तुम्हें फूल की तरह प्रिय लगता था और तुम उस पर हमेशा न्योछावर होते थे – तुम उसकी प्रसन्नता में ही अपनी प्रसन्नता मानते थे। तुम्हारे जीवन का वह प्रिय फूल सूख गया, तो सूख जाने दो।

जरा मधुवन (बगीचे) के (मजबूत) सौने को तो देखो। अब तक मधुवन की जाने कितनी कलियाँ सूख चुकी हैं और जाने कितनी लताएँ मुरझा चुकी हैं। न ये सूखी कलियां फिर खिल सकी और न वे मुरझाई लताएं फिर हरी हो सकीं। पर क्या मधुवन अपने सूखे फूलों के लिए कभी विलाप करता है? जो बात बौत गई, वह बीत गई। उसे याद करके दुःखी होने से कोई लाभ नहीं।

(3) जीवन में मधु …. सो बात गई।

माना तुम्हारे जीवन में मदिरा का एक ऐसा प्याला था, जिस पर तुमने अपना तन-मन न्योछावर कर दिया था। अर्थात् वह तुम्हारे जीवन का एक अंग बन गया था। तुम्हारा वह मनपसंद प्याला टूट गया, तो टूट जाने दो।

जरा मदिरालय (शराबखाने) का प्रांगण तो देखो। वहाँ जाने कितने प्याले हिल जाते हैं और गिरकर टूटकर नष्ट हो जाते हैं। जो प्याले गिरकर टूट जाते हैं, क्या वे फिर उठकर वापस आते हैं? पर क्या मदिरालय को उन टूटे हुए प्यालों के लिए कभी पश्चाताप होता है? जो बात बीत गई, वह बीत गई। उसे याद करके दुःखी होने से कोई लाभ नहीं।

(4) मृदु मिट्टी के ………. सो बात गई।

मदिरा रखने के घड़े मिट्टी के बने होते हैं। इसलिए ये बहुत नाजुक होते हैं और अकसर फूट जाया करते हैं। यही हाल (मधु) प्यालों का __ भी है। इनका भी जीवन बहुत छोटा होता है। ये भी अकसर टूट जाया करते हैं। फिर भी मदिरालय के अंदर मदिरा इन घड़ों में ही रखी जाती है और लोगों को मदिरा प्यालों में ही दी जाती है।

जो लोग नशे के अभ्यस्त हैं, वे मदिरा का सेवन करते ही रहते हैं। जो व्यक्ति मदिरा के घड़ों और प्यालों के टूटने के बारे में सोचता है और उनसे उसका लगाव होता है, वह कच्चा (नौसिखिया) पियक्कड़ हैं। जो सच्चे अर्थों में मदिरा का सेवन करनेवाला होता है, वह मदिरा के घड़ों और प्यालों के टूटने पर रोता-चिल्लाता नहीं है। जो बात बीत गई, वह बीत गई। वह हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

11.

अग्निकुंड सिकुड़कर क्या बन गया?(क) रेडियम(ख) युरेनियम(ग) पृथ्वी(घ) कुछ भी नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) पृथ्वी

12.

लघु जीवन लेकर आये हैं, ..(क) वह टूट गया तो टूट गया(ख) प्याले टूटा ही करते हैं(ग) वह कच्चा पीनेवाला है(घ) कब रोता है चिल्लाता है

Answer»

सही विकल्प है (ख) प्याले टूटा ही करते हैं

13.

कलियाँ और वल्लरियाँ किसका हिस्सा हैं ?

Answer»

कलियाँ और वल्लरियाँ मधुवन का हिस्सा हैं।

14.

तारों के टूटने पर अम्बर क्या नहीं करता?

Answer»

तारों के टूटने पर अम्बर शोक नहीं मनाता।

15.

घर कहाँ बने हुए हैं?

Answer»

घर नदियों के किनारे बने हुए हैं।

16.

कवि को इसकी क्यों चिंता है कि घर नदियों के किनारे बने हैं?

Answer»

नदियों में अकसर बाढ़ आया करती है। बाढ़ के समय नदी का रूप विकराल हो जाता है। वे अपने साथ घर, पेड़, फसलें, पशु आदि सब बहा ले जाती हैं। नदियों के किनारे बने घरों के बारे में लेखक को इसलिए चिता है कि वे बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो जाएंगे।

17.

आदमी को झुनझुना कहने का क्या तात्पर्य है?

Answer»

किसी व्यक्ति की राय को महत्त्व या उसे अपनी बात को कहने का मौका न देना, उस पर अपना निर्णय थोपना और उसका अपने ढंग से उपयोग करना आदमी को झुनझुना बना देना होता है। आदमी को झुनझुना कहने का यही तात्पर्य है।

18.

चीड़ वन में आँधियों की बात करने से क्या होगा?

Answer»

चीड़ के पेड़ों के तने बहुत ही नाजुक होते हैं। वे तेज हवा के झोंकों से भी टूटकर गिर सकते हैं। यदि चीड़ वन में ऑधियाँ आएंगी, तो वन में चीड़ के सारे वृक्ष धराशायी हो जाएंगे।

19.

कवि ने क्या समझाने के लिए आकाश का उदाहरण दिया है?

Answer»

कवि कहता है कि जरा आकाश के चेहरे को तो देखो। : अब तक उसके न जाने कितने प्रिय तारे टूट चुके हैं। जो तारे टूट गए वे फिर कभी आकाश को नहीं मिल पाए। परंतु क्या आकाश कभी अपने टूटे तारों पर शोक मनाता है इस उदाहरण से कवि समझाता है कि जिस तरह आकाश उन बिछुड़े हुए तारों को भूल जाता है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने प्रिय व्यक्ति के विछोह को भूल जाना चाहिए, क्योंकि जो बात बीत गई, वह सदा के लिए समाप्त हो गई। उसे याद करना व्यर्थ है।

20.

हमसफर क्या कर रहे हैं?(क) ऊँघे हुए हैं(ख) गज़ल सुना रहे हैं।(ग) तड़प रहे हैं(घ) बाजा बजा रहे हैं।

Answer»

सही विकल्प है (क) ऊँघे हुए हैं

21.

मुरझाई कली पर मधुवन की क्या प्रतिक्रिया होगी?

Answer»

मुरझाई कली कभी खिल नहीं सकती। मधुवन यह बात अच्छी तरह जानता है। इसलिए वह मुरझाई कली के लिए कभी विलाप नहीं करेगा।

22.

सितारे के रूपक से कवि क्या समझाना चाहता है?

Answer»

कवि ने अपने सितारे रूपी प्रिय व्यक्ति की तुलना आकाश के तारों से की है। वे इससे यह समझाना चाहते हैं कि मनुष्य और तारों की गति एक-सी है। जिस प्रकार तारे टूटकर नष्ट हो जाते हैं और फिर कभी नहीं मिलते, उसी प्रकार मनुष्य का भी जब अंत हो जाता है, तो वह लौटकर नहीं आता।

23.

स्टैण्डरटन पहुंचने पर गांधीजी ने कैसा अनुभव किया?

Answer»

चार्ल्सटाउन से स्टैण्डरटन तक की गांधीजी की यात्रा बड़ी कष्टदायक रही! गोरे मुखिया ने उन्हें बहुत परेशान किया। उसने उनका अपमान किया, पिटाई की और पहुंचने पर उन्हें मजा चखाने की धमकी देता रहा। बेचारे गांधीजी को उससे बहुत डर लगता रहा। उन्हें लगा कि वे मकाम पर जिंदा पहँच पाएंगे कि नहीं। रात हुई और सिकरम स्टैण्डरटन पहुंची। वहाँ गांधीजी ने कई भारतीयों को देखा, तब उन्हें तसल्ली हुई। उन्हें तब और तसल्ली हुई जब उन लोगों ने कहा कि वे उन्हें ईसा सेठ की दुकान पर ले जाएंगे। इस प्रकार स्टैण्डरटन पहुंचने पर गांधीजी ने राहत की सांस ली।

24.

गोरे मुखिया ने गांधीजी की पिटाई क्यों की?

Answer»

गांधीजी कोचवान की बगल में बैठकर एक बार अपमान सह चुके थे। लेकिन जब गोरे मुखिया ने पटिए पर रखे मैले-से बोरे पर उन्हें बैठने के लिए कहा तो यह अपमान सहन करने के लिए वे राजी न हुए। उनके इनकार को गोरा मुखिया सह नहीं सका। क्रोधित होकर वह गांधीजी पर तमाचों की वर्षा करने लगा। गोरा मुखिया उनकी बांह पकड़कर उन्हें नीचे उतारने लगा, पर गांधीजी ने सिकरम के सींखचों को कसकर पकड़े रखा। इसलिए वह उन्हें न उतार सका, परंतु उन्हें मारता रहा और गालियाँ देता रहा। इस प्रकार अपना आदेश न मानने पर गोरे मुखिया ने गांधीजी की पिटाई की।

25.

गांधीजी ने सिकरम कम्पनी के एजेन्ट को चिट्ठी क्यों लिखी? उसका क्या उत्तर प्राप्त हुआ?

Answer»

अपमान के चूंट पीते हुए गांधीजी स्टैण्डरटन से जोहनिसबर्ग पहुंच गए। उन्होंने सिकरम कंपनी के एजेंट के नाम पत्र लिखा। उसमें उन्होंने उस गोरे की शिकायत की जिसने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। कंपनीवालों से गांधीजी ने सुबह की अपनी यात्रा के लिए सिकरम में अंदर की जगह देने का आग्रह किया। उत्तर में एजेंट ने गांधीजी को आश्वस्त किया कि कल वह गोरा नहीं रहेगा। कल स्टैण्डरटन से बड़ी सिकरम आएगी। उसमें उन्हें यात्रियों के साथ सिकरम में अंदर जगह मिलेगी। इस प्रकार एजेंट से गांधीजी को अनुकूल उत्तर प्राप्त हुआ।

26.

गोरे मुखिया और गांधीजी के बीच झगड़ा क्यों हुआ?

Answer»

दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को ‘कुली’ माना जाता था। गांधीजी भी भारतीय थे। वे सिकरम में गोरे यात्रियों के साथ बैठे थे। गोरा मुखिया इसे सहन न कर सका। वह गांधीजी की बैठक (सीट) पर बैठ गया और उसने गांधीजी की कोचवान की बगलवाली बैठक पर बिठा दिया, जहाँ वास्तव में उसे बैठना चाहिए था। गांधीजी ने उस अपमान को सहन कर लिया।

बाद में उसकी इच्छा वहाँ बैठने की हुई जहाँ उसने गांधीजी को बिठाया था। उसने एक मैला-सा बोरा पैर रखने के पटिए पर बिछा दिया और गांधीजी से कहा कि वे अपनी बैठक से उठ जाएं और उस बौरे पर बैठ जाएँ। गांधीजी इस अपमान को बरदाश्त न कर सके। इसी बात पर गोरे मुखिया से उनका झगड़ा हुआ।

27.

सिकरम का टिकट रद्द होने का रहस्य क्या था?

Answer»

गांधीजी के पास सिकरम का टिकट था। इसके अलावा अब्दुल्ला सेठ ने सिकरमवाले के नाम तार भी कर दिया था। सिकरम में सिकरम कंपनी का गोरा मुखिया भी था। उसने गांधीजी से कहा कि उनका टिकट तो रह हो गया है। गांधीजी ने उसे बताया कि उनका टिकट सही है, पर गोरे मुखिया के मन में तो कुछ और ही था। उसकी दृष्टि में तो गांधीजी ‘कुली’ थे। वह नहीं चाहता था कि वे गोरे यात्रियों के साथ बैठें। इसलिए उसने जानबूझकर गांधीजी के टिकट को रद्द हो गया बताया। इस प्रकार गांधीजी का सिकरम का टिकट रद्द होने का रहस्य गोरों के बीच एक भारतीय के बैठने की असहनशीलता थी।

28.

हिन्दुस्तानी भाइयों ने गांधीजी से क्या कहा?

Answer»

गोरे मुखिया ने स्टैण्डरटन पहुंचने पर गांधीजी को मजा चखाने की धमकी दी थी। रात को गांधीजी स्टैण्डरटन पहुँचे, तो वहाँ कई हिन्दुस्तानियों को देखकर उन्हें तसल्ली हुई। हिन्दुस्तानी भाइयों ने गांधीजी से कहा, “हम आपको ईसा सेठ की दुकान पर ले जाने के लिए ही खड़े हैं। हमें दादा अब्दुल्ला का तार मिला है।”

29.

गोरे अफसर ने गांधीजी के साथ दुर्व्यवहार क्यों किया?

Answer»

गोरे अफसर ने सिकरम में बैठे गांधीजी को पैर रखने के पटिये पर मैला-सा कपड़ा बिछाकर बैठने को कहा। गांधीजी ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया, इसलिए गोरे अफसर ने गांधीजी के साथ दुर्व्यवहार किया।

30.

सिकरम पारडीकोप पहुँची तो गोरे मुखिया ने गांधीजी से क्या कहा?

Answer»

चाल्सटाउन से जोहनिसबर्ग की यात्रा में गोरे मुखिया ने गांधीजी को सिकरम में कोचवान की बगल की बैठक पर बिठा दिया था। सिकरम जब पारडीकोप पहुंची, तो उसने सिकरम में पैर रखने के पटिये पर मैला-सा बोरा बिछाकर गांधीजी से कहा, “सामी, तू यहाँ बैठ। मुझे कोचवान के पास बैठना है।”

31.

सहयात्रियों ने गांधीजी का पक्ष लेते हुए क्या कहा?

Answer»

गोरे मुखिया ने गांधीजी को अपने पैरों के पास बैठाना चाहा, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इस पर गोरा गांधीजी को मारने और गालियां देने लगा। यह देखकर सहयात्रियों ने गांधीजी का पक्ष लेते हुए कहा, “अरे भाई, उस बेचारे को वहाँ बैठा रहने दो। उसे नाहक मारो मत। वहाँ नहीं तो, उसे हमारे पास अंदर बैठने दो।”

32.

गांधीजी को सिकरम में कहाँ बैठाया गया?(क) यात्रियों के पास(ख) गोरे के पैरों में(ग) कोचवान की बगल में(घ) सबके पीछे

Answer»

सही विकल्प है (ग) कोचवान की बगल में

33.

अब्दुल्ला सेठ ने किसे तार किया था?

Answer»

अब्दुल्ला सेठ ने चार्ल्सटाउन के पते पर सिकरमवाले को तार किया था।

34.

गांधीजी ने किसे अन्याय माना?

Answer»

सिकरम में गांधीजी की बैठक अंदर थी, पर जब सिकरम कंपनी का गोरा मुखिया उनकी बैठक पर अंदर बैठा और उसने गांधीजी को कोचवान की बगल में बैठा दिया, तो गांधीजी ने इसे अन्याय माना।

35.

गोरा अंगुली दिखाकर क्या बड़बड़ाता था?

Answer»

गोरा अंगली दिखाकर बड़बडाता था-“याद रख, स्टैण्डरटन पहुंचने दे, फिर तुझे मज़ा चखाऊँगा।”

36.

गांधीजी को क्या देखकर तसल्ली हुई?

Answer»

गांधीजी सिकरम से रात को जब स्टैण्डरटन पहुंचे, तो वहाँ उन्हें कई हिन्दुस्तानी चेहरे दिखाई दिए। यह देखकर उन्हें तसल्ली हुई।

37.

चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग कैसे पहँचा जाता था?

Answer»

चाल्सटाउन से जोहनिसबर्ग जाने के लिए घोड़ों की सिकरम पकड़नी पड़ती थी। बीच में एक रात स्टैण्डरटन में रुकना पड़ता था। इस तरह सिकरम से चार्ल्सटाउन से जोहनिसबर्ग पहुंचा जाता था।

38.

सिकरम किससे चलती थी?(क) बैलों से(ख) घोड़ों से(ग) ऊँटों से(घ) गुलामों से

Answer»

सही विकल्प है (ख) घोड़ों से

39.

जोहनिसबर्ग पहुँचने के लिए एक रात कहाँ रुकना पड़ता था?

Answer»

जोहनिसबर्ग पहुँचने के लिए एक रात स्टैण्डरटन में रुकना पड़ता था।

40.

संयुक्त परिवार टूटने के क्या कारण है? अथवाभारतीय समाज में संयुक्त परिवार के निरन्तर विघटन के कारणों को स्पष्ट कीजिए। अथवा“संयुक्त परिवार का भविष्य उज्ज्वल नहीं है।” क्यों? 

Answer»

संयुक्त परिवार के विघटन के कारण औद्योगीकरणा के इस युग में संयुक्त परिवार व्यक्किा एवं समाज को माँगों को पूर्ण रूप से मनुष्ट नहीं कर पा रहा है, इसलिए क्रमशः संयुक्त परिवार का या तो विघटन ही होता जा रहा है या फिर इसके स्वरूप में अत्यधिक परिवर्तन स्वीकार किए जा रहे हैं। संयुक्त परिवार के विघटन के निम्नलिखित कारण हैं।

1. औद्योगीकरण एवं नगरीकरण संयुका परिवार के विपरन् का प्रभाव औद्योगीकरण एवं नगरीकरन की प्रक्रियाओं में छोरीकरण एवं नगरीकरण व के कारण गाय के लोगों का प्रभाव में नगरों की ओर प्रवसन की शरदत्य पति का प्रभाव प्रवृत्ति में है। अव आमसवम एवं आत्मत्याग की कमी गांव के लोग नए रोजगार एवं प्रभात व्यावसायिक अवसरों के लिए उनमा वृद्धि का प्रय नगरों की ओर आकर्षित हुए नए कानूनों का प्रव हैं।
इन लोगों ने गांव के संयुक्त परिवार से आकर नगरों में अपने लिए मकान बना लिए हैं। तथा व्यवसाय भी खोना लिए हैं, परिणामस्वरूप संयुक्त परिवारों में अब पहले जैसी बात नहीं ह गई है। अनेक व्यक्ति अपने पारिवारिक व्यवसाय को छोड़कर अन्य व्यवसायों को अपने लगे हैं। अत: क्षेत्रीय गतिशीलता में वृद्धि हुई है, इसमें संयुक्त परिवार का विघटन स्वाभाविक हो जाता है।

2. पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव भारतीय संस्कृति के अनुसार, संयुक्त परिवारों में परिवार के सदस्यों के कर्तव्यों पर विशेष बल दिया जाता था, परन्तु वर्तमान स्थिति ठीक इसके विपरीत है। पश्चिमी सभ्यता एवं संस्कृति के प्रभाव से अब लोगों का झुकाव करियों की ओर न होकर अष्किारों की ओर है। पाश्चात्य दृष्टिकोण व्यक्तवादी है। अत: इस दृष्टिकोण के प्रबल होने की स्थिति में संयुक्त परिवार का महत्व घट रहा है।

3. आत्मसंयम एवं आत्मत्याग की कमी वर्तमान समय में लोगों में आत्मसंयम एवं आत्मत्याग । भाषा में कमी आई है या उनका एकदम से लोग ही होता चला जा रहा है। दूसरी ओर लोगों के निजी स्वार्थ एवं भौतिहाद तथा गतिवादिता की भावनाएं बड़ती जा रही है। इस कारण थोड़ी-सी परेशानी का संकट का अनुभव करते हैं। अब लोग संयुक्त परियार को छोड़कर एकाकी परिवार बसाने को तत्पर हो जाते हैं।

4. स्त्री-शिक्षा का प्रभाव आज की शिक्षित स्त्री अपने चारों और के ताबरण की जानकारी रखती है। वह संयुक्त परिसर के घुटन भरे जीवन को, जिसमें से कर्ता के निरंकुश शासन में रहना पड़ता है, अपने अधिकारों का हनन समझती हैं। ऐसी स्थिति में सभी आधुनिक वातावरण की चाह में संयुक्त परिशा की अपेक्षा एकाकी परिवार को अधिक पसन्द करती है।

5. जनसंख्या वृद्धि का प्रभाव जनसङ्ख्या में वृद्धि न केवल संयुक्त परिवारों के लिए ही भयानक परिणाम पैदा करने वाली है, अपितु कभी-कभी सम्पूर्ण समाज के लिए भी ऐसी समस्या बन जाती है, जिसका समाधान खोजना कठिन हो जाता हैं। 

संयुक्त परिवार का भविष्य

उपरोक्त कारणों के विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि संयुका परिवार को अवधारणा वर्तमान आधुनिक युग में संक्रमण के दौर से गुजर रही है। संयुक्त परिवार की मूलभूत विशेषताओं; जैसे–सामूहिक, सांस्कृतिक निरन्तरता आदि को आधुनिक युग की संकल्पनाएँ प्रभावित कर रही हैं। 
अत: संयुक्त परिवारों में विपटन की सम्भावनाएँ दृष्टिगोचर हो रही हैं। समकालीन सामाजिक संरचना में संयुक्त परिवार छिन-भिन्न होकर एकाकी परिशों का रूप ले रहे हैं। यद्यपि संयुक्त परिवार के भविष्य के विषय में दो विचारधाराएँ सामने आती हैं ।

⦁    प्रथम विचारधारा संयुक्त परिवार के उज्ज्वल भविष्य के प्रति आशान्वित हैं। इसके समर्थक के, एम, कपाडिया है। उनके अनुसार, संयुक्त परिवार ने अभी तक जिस कमय समय को पार किया है, उसका भविष्य पुरा नहीं है। इसके अतिरिक्त हिन्दू मनोवृत्तियाँ आज भी संयुक्त परिवार के पक्ष में हैं।

⦁    दूसरी विचारधारा संयुक्त परिवार के भविष्य को अन्धकारमय मानती है। इस विचारधारा के समक्षक कोलण्ड़ा के अनुसार अधिकांश भारत में संयुक्त परिवारों की संख्या प्रतिदिन कम होती जा रही है अर्घात् उनका विघटन हो निष्कर्ष जो भी हो, इतना तो हम कह सकते हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में संयुक्त परियार के स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है।

41.

“परिवार समाजीकरण की प्रथम पाठशाला है” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

समाजीकरण की प्रक्रिया बहुत जटिल प्रक्रिया है, जो बालक के विकास को प्रभावित करती है जिसका वर्णन निम्न प्रकार से हैं। परिवार का योगदान समाजीकरण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है, वहीं से बालक सर्वप्रथम समाजीकरण आरम्भ करता है। इसी कारण से परिवार को बालक की सपशम पाठशाला’ कहा गया है। परिवार हो वो गह है जहाँ में शतक आदर्श नागरिकता का पाठ सीखा है। चालक के समाजीकरण को प्रभावित करने वाले तत्व निम्नलिखित है।

1. माँ की भूमिका चालक का परिवार में सबसे घनिष्ठ सम्बन्। माँ से होता हैं। माँ उसे दूध पिलाती है और उसकी देखभाल भी करती है और यदि म बालक को देखभाल अच्छे से न करती तो उसका प्रभाव यह होता है कि चालक का। समाजीकरण उचित प्रकार से नहीं होता।

2. अधिक लाड़-प्यार बालक को परिवार द्वारा आवश्यकता से अधिक प्रेम करने प्रकार का कार्य न करने देने पा, आम कारण से उनका समाजीकरण रुक जाता है या ठक ढंग से नहीं हो पाता है, जिसके परिणामस्वरुप बालक बिगड़ जाता है।

3. माता-पिता का आपसी सम्बन्धी बालक के साम्राज्ञीकरण में माता-पिता का विशेष महत्व होता है। जिन परिवार में मात-पिता के आपको सम्बन्धी अन् होते हैं उन परिवार का समाजीकरण उचित ढंग से होता है। इसके विपरीत विन परिवार में माता-पिता आपस में झगड़ते हैं उन परिवार के बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे उनका सामाजीकरण विकृत हो जाता है, क्योंकि आपसी लड़ाई-झगड़े के कारण माता-पिता बच्चों पर अधिक ध्यान नहीं दे

4. माता-पिता के बच्चे के साथ सम्बन्ध माता-पिता जय बन्यों को उचित स्नेह देते हैं तो उनमें अहें सामाजिक गुण पैदा हो जाते है और यदि बच्चों को माता-पिता का उचित प्यार और सुरक्षा नहीं मिलती है, तो उनका सामाजिक विकास अच्छे ढंग से नहीं होता। वे पूर्ण रूप से माता-पिता पर निर्भर हो जाते हैं। इसके विपरीत यदि बच्चों को कम स्नेह या प्यार मिलता है, तो उनमें बदला देने की भावना विकसित हो जाती है। इस कारण से बालक कई यर बात-अपराधी भी बन जाते हैं।

5. बच्चों का अन्य सम्बन्धियों के साथ सम्बन्ध बों के परिवार के सम्बन्धियों का भी बच्चे के अपर गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे—वर का दादा-दादी, चाचा-चाची, मौसा मी तथा अन्य परिवार सगे सम्बन्धियों के साथ सम्बन्ध कैसा है? ये भी बालक के समानीकरण में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

6. परिवार की आर्थिक स्थिति यह भी देखा गया है कि यदि पारिवारिक आर्थिक स्थिति ठीक न हो तो ये भी बालक के समाजीकरण में बाधा पहुंचाती है, क्योंकि बालक के पालन पोषण में बच्चों को वे सभी आर्थिक सुख-सुविधाएँ नहीं मिल पाती, जो एक अच्छे परिमार के बच्चों को मिलती हैं। अत: इनसे बालक में सहनशीलता, परिश्रम करने वाले गुण विकसि होते हैं।

7. परिवार की बनावट परिवार दो प्रकार के होते हैं।

⦁    एकाकी परिवार

⦁    संयुक्त परिवार

42.

संयुक्त परिवार के मुख्य गुणों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

संयुक्त परिवार के गुण

संयुक्त परिवार के गुण निम्नलिखित हैं।

1. बच्चों का उचित पालन-पोषण संयुक्त परिवार में छोटे-बड़े सभी प्रकार के सदस्य राहते हैं। वृद्ध व्यक्तियों को दोटे पत्थों के पालन पोषण का अधिक ध्यान राता है। यदि परिवार के अन्य सदस्य विभिन्न कार्यों में सलान राहते है, तो वृद्ध लोग बच्चों की देखभाल का कार्य संभाल लेते हैं।

2. सुरक्षा की भावना संयुक्त परिवार। के सदस्य आपस में प्रेम ए सहयोग के बयान में हैं, जिसके इति पालन पोषण कारण सभी सदस्य शारीरिक, सुरक्षा की भावना मन्तबज्ञानिक आर्थिक तथा सामाजिक सुरत का अनुभव करते हैं। मामूकता रै भवन विनाशमन में बधों, पण सामाजिक निम्। वृद्धों एवं विधाओं की भा के पारिकि वर्ष में बचाअम-विभाजन समस्या का इल स्वयं परिवार में ही भि अनुभव प्राप्त करने का हो जाता है।

3. मनोरंजन का साधन संयुक्त परिवार में छोटे-बड़े सभी तरह के सदस्य होते हैं। ये सभी सदस्य जब आपस में मैठकर विचार विनिमय तथा हँसी मजाक करते हैं, तो एक प्रकार से सभी लोगों का मनोरंजन होता है।

4. सामूहिकता की भावना संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों के साथ में रहने, आपस में विचार-विमर्श करने, उठने-बैठने इत्यादि कार्यों से उनमें सामूहिक भावना का विकास होता है। इस भन्। से व्यक्ति में सुरक्षा की भाषा तथा धैर्य का विकास होता है। याही सामूहिकता को भावना परिवारवाद को बढ़ावा देती है।

5. सामाजिक नियन्त्रण संयुक्त परिवार में सामाजिक नियन्त्रण का कार्य परिवार के सदस्यों द्वारा ही किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे से पारस्परिक कर्तव्य से बंधे रहते हैं, यही कारण है कि सभी सदस्य एक प्रकार से नियन्त्रित जोधा बताते हैं।

6. पारिवारिक मार्च में अस्रत संयुक्त परिवार में पारिवारिक खर्च भी संयुक्त होता है। पूरे परिवार के लिए आवश्यक वस्तुएँ एक साथ ही खरीदी जाती हैं। एकसाथ काफी मात्रा में पाएं खरीदने पर अपेक्षाकृत गरी मिलती है। इसके अतिरिक्त एकसाथ संयुक्त परिवार बसाकर रहने की स्थिति में बहुत-से खर्च एक ही जगह होते हैं, जबकि एकाकी परिवारों में उतने ही खर्च अलग-अलगजगह होते हैं।

7. म-विभाग संयुक्त परिका के सभी सदस्य कार्य को आपस में बाँटकर करते हैं। संयुक्त परिवार का मुखिया, की या गृहस्वामी परीजा के सभी सदस्यों को उनकी योग्यता एवं क्षमताओं के अनुसार अलग-अलग कार्य सौंपता हैं। विभिन्न अनुभव करने का स्थान संयुक्त परिवार में व्यक्ति विभिन्न ऑक्तचों के सदस्यों के मध्य रहता है। इसके अतिरिका उसे विभिन्न आयु के लोगों के अनुभवों एवं विचारों को जानने का अवसर मिलता है। इस रूप में संयुक्त परिवार व्यक्ति को उसके आगामी जीवन के लिए तैयार करता है।

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संयुक्त परिवार की विशेषताएँ लिखिए। 

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संयुक्त परिवार का तात्पर्य

भारतीय समाज में पारम्परिक रूप से पाए जाने वाले परिवारों को समाजशास्त्रीय भाषा में ‘संयुक्त परिवार’ कहा जाता है। संयुक्त परिवार प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूप से परस्पर सम्बन्धित विभिन्न गीवियों (सामान्य रूप से तीन या उससे अधिक) के सदस्यों का एक प्रामक समूह है, जिसके सदस्य समान्य आम व्यय में योगदान देते हैं। एक धर्म के अनुयायी बनकर सामान्यतः एकसाथ निवास संयुक्त परिवार की विशेषताएँ संयुक्त परिवार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है।

1. परिवार का बड़ा आकार संयुक्तपरिवार में सामान्यतः न या तीन से अधिक जोड़ो के सदस्य एकसाथ रहते फलस्वरूप संयुक्त परिवार का आकार वृहद् होना इसकी आधारभूत है। इस परिवार में सामान्यत: 20 से 25 सदस्य होते हैं।

2. सामान्य निवास स्थान संयुक्त परिवार में तीन या तीन से अधिक कि निरन्तरता पीढ़ी के लोगों का एक घर होता है। यदि कोई सदस्य या परिवार भ्रमण, नौकरी, शिक्षा या अन्य किसी काण से दूर में रहता है, भी उसे उसी सामान्य निवास का सदस्य माना जाता है। इस परिवार के सदस्य एक ही मकान में रहते हैं।

3. निश्चित संरचना भारतीय संयुक्त परिवारों में परिवार के सभी सदस्यों की एक प्रकार से निश्चित संरचना होती है। इस संरचना के अन्तर्गत परिवार के मुनगा या स्। का रान निश्चित होता है। कर्ता को उसकी स्थिति के अनुसार ही अधिकारों का प्रयोग एवं कर्तव्यों का पालन करना पड़ता हैं। दूसरे स्थान पर उसकी स्त्री होती है, तीसरे स्थान पर परिवार के सभी भाई एवं लड़के होते हैं, चौथे स्थान पर परिवार की सभी स्त्रिों आती हैं।

4.धार्मिक आधार संयुक्त परिवार में सभी कार्य पार्मिक विचारों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं; जैसे-कर्मकाण्डों से सम्बन्ध रखने से कार्य, त्यौहारों को मनाना एवं प्रत इत्यादि रखना। सामूहिक पृ-पाठ करना भी संयुक्त परिवार की एक प्रमुख विशेषता है।

5. आर्थिक स्थिरता संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों द्वारा अर्जित धन एक ही कोष में एकत्र होने और सभी सदस्यों के लिए सामान्य रूप से आवश्यकतानुसार व्यय होने के कारण परिवार की आर्थिक स्माित धक दयनीय नहीं होतो, क्योकि कर्ता या गृहपति सयो धक आयु वाला व्यक्ति होता है। अतः यह पैसा सोच-समझकर ही सर्व करता है।

6. सामान्य सम्पत्ति संयुक्त परिवार के अन्तर्गत परिका को सम्पति का व्यक्तिगत उपग या लाभ न होकर परिवार के सभी सदस्यों के लिए उपग एवं लाभ होता है। परिवार की सम्पूर्ण सापशि पर संयुक्त अधिकार होता है।

7. सदस्यों की सुरक्षा ऐसा देखा जाता है कि एकाकी परिवार में कम सदस्य होते हैं। यदि उनमें से कोई सदस्य बीमार हो जाता है अथवा कहीं चला आता है, तो परिवार के कार्यों में बाधा ही हो जाती है परन यदि परिवार संगत है, तो उसके अन्दर हम प्रकार की छोटी छोटी समस्याएं परिवार के कार्यों में कोई विशेष बाधक नहीं होती है।

8. सांस्कृतिक निरन्तरता संयुक्त परिवार में तीन या इससे अधिक पौड़ी के लोग रहते हैं। पुरानी पीढ़ी के लोगों द्वारा नई पीढ़ी के लोगों को सांस्कृतिक परम्पराओं को हस्ताक्षरित किया जाता है। भर के बुजुर्ग यति छोटे बच्चों को कहानियां सुनाकर, अपने धन के उदाहरण देकर, अपने साथियों के व्यवहारों एवं अनुभवों को बताकर इस कार्य को पूरा करते हैं। परिणामस्वरूप नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी के आचार-विचार, प्रथा, परम्पराएँ, धर्म और कर्म, हार इत्यादि को प्रहण काके अपने में आत्मसात् करती है, इससे सांस्कृतिक निरन्तरता बनी रहती हैं।

44.

संयुक्त परिवार के मुख्य दोषों का उल्लेख कीजिए। 

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संयुक्त परिवार के दोष

संयुक्त परिवार के दोष या हानि निम्नलिखित हैं।

⦁    वेग तथा कलह का केन्द्र संयुक्त परिवार कलई एवं द्वेष का केन्द्र होता है। यदि संयुक्त परिवार में कता अपने हित पर ध्यान देना प्रारम्भ कर दे, तब स्थिति और भी बिगड़ जाती है।

⦁    स्त्रियों की सराब स्थिति संयुक्त। परिवार का एक दोष यह भी है कि संयुक्त परिवार के दोष इन परिवारों में स्त्रियों की दशा बहुत निन एवं दयनीय होती है। सुनान पति विशेषकर बधुओं को बहुत अधिक वर्ग या परम करना पता है। अधिक जानोत्पति उनको । एवं मनद के कोप। अकर्मण माने पात्र बनना पड़ता है। संयुक्त परिवार के पापा का व में आ स्वावलम्बन के के भय का वातावरण प्राप्त । हो पाने के कारण स्त्रियाँ भिक रिता सदैव दूसरों पर निर्भर रहती हैं।

⦁    बुद्धि का अनुपयोगः संयुक्त परिवार में सभी सदस्य एक कता की आज्ञानुसार कार्य करते हैं। इस स्थिति में उन्हें अपनी बुद्धि का प्रयोग करने का अवसर प्राप्त नहीं होता, जब कोई व्यक्ति अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं करता, तो उसकी बुद्धि का कुण्ठित हो जाना स्वाभाविक हैं।

⦁    अधिक सन्तानोत्पनि संयुक्त परिवार में जहाँ बाल विवाह को प्रोत्साहन मिलता है एवं विवादी जियारों को वर्चस्व प्राप्त होता है। वहीं पुत्र सनान की कामना को विशेष मात्र प्राप्त होता है। संयुक्त परिवार में परिवार की स्त्रियों भी यह सोचने लगती हैं कि जितने अधिक बच्चे पैदा किए जाएंगे, उतना ही अधिक उनको परिवार की सामान्य सम्पत्ति का भाग पैटधार के समय मिलेगा।

⦁    अकर्मण्य व्यमियों की वृद्धि संयुक्त परिवार में परिवार के सभी सदस्यों के भरण-पोषण का दायित्व पूरी परिवार पर ही होता हैं। इस सुविधा का साथ जताकर का सदस्य अकर्मण्य, आलसी या निकम्मे। आते हैं। ये सदस्य बिना कुछ कार्य किए हैं। खाते-पीते तथा मौज करते हैं, इससे पूरे परिवार का जीवन-स्तर निम हो जाता है। साथ ही इससे आम अर्गन करने वालों में असन्तोष उत्पन्न होता है।

⦁    गोपनीयता का अभाव संयुक्त परिबार में अधिक सदस्य होने के कारण नव-विवाहिती अथवा पति-पत्नी को एकान्त यांनीय स्वतन्त्रता उपलब्ध नहीं हो पाती है। अनेक अवसरों पर यह वचन परिपत्नी के बन्यो में कुण्ठा को जन्म देती है एवं उनके वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती हैं।

⦁    भय का वातावरण संयुक्त परिवारों में पवार के वृद्धजनों के संयों को ही प्रमुखता प्राप्त होती है। उनकी सहमति के बिना किसी नए विचार का अनुपालन परिवार में सम्पन्न नहीं होता है। अत: नई पी के सदस्यों में अपने नए रचनात्मक विचारों को आगे रखने का संकोच सर्द। विद्यमान रहता हैं।

⦁    आर्थिक निर्भरता उल्लेखनीय है कि संयुक्त परिवारों में प्रायः सभी वयस्के सदस्य जीविकोपार्जन में संलग्न राहते हैं, किन्तु परिवार के आय-व्यय का ले-जोखा के परिवार के मुखिया के हाथों में रहता है। फलतः सभी सदस्यों को अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए एक व्यक्ति पर निर्भर रहना पड़ता हे।

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समाज व परिवार को कोर्ट परिवार से क्या लाभ हैं? 

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भारतीय विचारधारा के अनुसार प्राचीनकाल से पारिवारिक संस्था का अत्यधिक महत्त्व रहा है। यह समाज को एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो समाज के स्थायित्व, वृद्धि और अत्रि का प्रमुख आधार है। मैकावर और पेज ने परिवार को समाज की सबसे महत्वपूर्ण संस्था माना। बड़ा परिवार होने पर इसमें कई प्रकार की कठिनाई आप्त रहती है। यहाँ आमदनी कम तथा खर्च अधिक होते हैं। इसके विपरीत छोटा परिवार सौमित आवश्यकताओं वाला होता है तथा इसके सदस्य भी सीमित होते हैं।
इनकी आवश्यकताएँ छोट एवं कम् खर्च वाली होती हैं, क्योंकि इस परिवार की आय भी कम होती हैं। संख्या के सीमित रहने पर एक एक आवश्यकताओं को ठीक से पूर्ण किया जाता है। इस लाह के परिवारों में एक रोती है, जिसका कारण पापा एक-दूसरे के सुख बाँटना, उसे समझना और उसमें हाथ बँटाना शामिल होता है। छोटे परिवारों में जीवन को मूल आवश्यकताएँ रोटी, कपड़ा और मकान की समस्याएँ इतनी ची नहीं होती हैं, जिनमें बड़े परिवारों को। अतः समाव व परिवार की दृष्टि से बड़े परिवार की तुलना में छोटे परिवार श्रेष्ठ है।

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एकाकी परिवार के सम्बन्धों के मनोविज्ञान पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

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एकाकी परिवार में सदस्यों के मनोवैज्ञानिक सम्बन्धों की दृष्टि से निम्नलिखित तथ्य महत्त्वपूर्ण हैं।

1. बच्चों- का मनोवैज्ञानिक सम्वन्य एकाकी परिवार में बच्चे अपनी मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं; जैसे-स्नेह, ममता, सुरक्षा आदि की पूर्ति हेतु पूर्णत: माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। माता-पिता को व्यस्तता अथवा अन्य किसी कारण। इन आवश्यकताओं की पूर्ति न होने पर बच्चों के व्यक्तित्व का उचित विकास नहीं हो पाता है।

2. पति- पत्नी का मनोवैज्ञानिक सम्बन्ध एकाही परिवार में पति-पत्नी को भूमिका गाढ़ी के दो पहिए के समान होती है। अत: जीवन के सुचारु संचालन के लिए इनमें परस्पर सामंजस्य एवं सनसन स्थापित होना अति आवश्यक है। किसी एक में भी सवोच्चता का भाव, परिवार को विटित करने की क्षमता रखता है। आवश्यक है कि पति-पत्नी में परस्पर विश्वास हो, दोनों एक-दूसरे की सुरक्षा एवं प्रतिष्ठा के प्रति संवेदनशील हो और * दोनों एक-दूसरे को भूमिका के महत्व को समझें।

3. माता- पिता एवं पुत्र/पुत्री का मनोवैज्ञानिक सम्बन्ध बाल्यावस्था तक सन्तान माता के संरक्षण में अधिक रहती हैं, किन्तु इसके पश्चात् की। अवस्था में पुत्र, पिता के मार्गदर्शन में स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करता है। पिता भी पुत्र को अपना सहयोगी मानते हैं एवं उसके भावी जीवन को निर्देशित करते हैं। दूसरी ओर पुत्रियां माता के ऑपक नगदक होती है। एवं माता के साथ प्रई, कोमल व ममतापूर्ण सम्बन्ध विकसित करती हैं। पुत्रियों के पराया धन होने की भावना भी माता में उनके प्रति विशेष लगाव उत्पन्न करती है। वस्तुतः माता एवं पुत्री के मध्य मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध एक आदर्श स्थिति को इंगित करते हैं। एकाकी परिवार का अस्तित्व उपरोक्त वर्णित मनोवैज्ञानिक बन्यों की गहन समझ पा निर्भर करता है। इनकी समझ के अभाव में पारिवारिक सम्बन्धों में तनाव ापन होने की सम्भावना चत तो है।

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सास-बहू के सम्बन्ध में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।अशा बहू के सुखद वैवाहिक जीवन में सास की क्या भूमिका है?

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बहू के सुखद वैवक जीवन में सास की भूमिका अत्यन्त निर्णायक होती है, चूंकि पी के घर में आने पर बहू का सर्वाधिक काम मास में ही पड़ता है, इसलिए इन दोनों के शवों में सौहार्द्रता होनी अतिभाश्यक है। चूक सास घर में बड़ी और ज्यादा अनुभव हो है, इसलिए उन्हें बड़ी सूझ बूझ व दायित्वपूर्ण वेग से व्यवहार करना चाहिए तथा बहू को की भी बात समझाते हुए मपुर एवं स्नेहपूर्ण ढंग से व्यवहार करना चाहिए। इससे बहू को नए परिवार में अनुकूलन करने या उलने में मदद मिलती है। दूसरी ओर बहू को सास के प्रति माता का भाव रखना चाहिए, उन्हें आदर-सम्मान तथा स्नेह देना चाहिए, इससे सास बहू के रिश्तों में मधुरता आएगी और बहू का वैवाहिक जीवन सुखद होने के साथ ही परिवार का वातावरण भी शान्तिपूर्ण व खुशहाल होगा, साथ ही सास-बहू के समय अड़े होने से बहू का अपने पति से भी रिता मजबुत होगा।

48.

संयुक्त परिवार में प्राचीन एवं नवीन मूल्यों में संघर्ष की सम्भावना विद्यमान रहती है, स्पष्ट कीजिए।

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संयुक्त परिवार में सामान्यतः तीन अथवा तीन से अधिक पोटो के सदस्य एकसाथ वास करते हैं। ऐसी स्थिति में पीडी-अन्तराल के कारण प्राचीन एवं नवोन मूल्यों में संघर्ष विकसित होना स्वाभाविक परिणाम है। आवश्यक है कि पुरानी एवं नवीन दोनों पीढ़ी के सदस्य परस्पर बातचीत करें एवं आपस के पौड़ी अनाराल को समझने की कोशिश करे।

49.

परिवार का लक्षण है (a) सदस्यों का एक सम्बन्ध से जुड़े होना(b) सदस्यों का एक ही गाँव का होना(c) सदस्यों को आपस में मित्र होना(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

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(a) सदस्यों का एक सम्बन्ध से जुड़े होना

50.

संयुक्त परिवार में स्त्रियों की स्थिति का उल्लेख कीजिए। 

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संयुक्त परिवार में स्त्रियों को दशा बहुत दयनीय होती हैं। इस व्यवस्था में स्त्रियों को अपने व्यक्तित्व के विकास का कोई असर नहीं मिलता तथा उनके जोवन का प्रमुख लक्ष्य सन्तानोत्पति एवं पूरे दिन रसोई में व्यतीत करना हो जाता है, इसमें स्त्रियों को अपनी इच्छाओं का दमन करना पड़ता है। इस प्रकार इस व्यवस्था में उनका जीवन लगभग नौरस हो जाता है।