This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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ऑगबर्न द्वारा दिए गए संस्कृति के दो प्रकारों को लिखिए। |
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Answer» ⦁ प्रौद्योगिकीय विलम्बना, |
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संस्कृति एवं सभ्यता के चार अन्तर बताइए। |
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Answer» संस्कृति एवं सभ्यता के चार अन्तर निम्नलिखित हैं 1. सभ्यता की माप सरल है, पर संस्कृति की नहीं – क्योंकि सभ्यता का सम्बन्ध भौतिक वस्तुओं की उपयोगिता से है। संस्कृति की माप सम्भव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक समाज में अपनी मूल्य-व्यवस्था होती है तथा मूल्यों में भिन्नता का कोई सर्वमान्य पैमाना नहीं जिसके आधार पर संस्कृति को मापा जा सके। 2. सभ्यता सदैव आगे बढ़ती है, किन्तु संस्कृति नहीं – सभ्यता उन्नतिशील होती हैं और वह एक दिशा में निरन्तर प्रगति करती है, जब तक उसके मार्ग में बाधा न आये। संस्कृति के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती। उदाहरणार्थ-हम यह नहीं कह सकते कि कालिदास के नाटक आज के नाटकों से अच्छे हैं या बुरे। 3. सभ्यता साधन है, जब कि संस्कृति साध्य – संस्कृति से मानव को सन्तुष्टि प्राप्त होती है। संस्कृति को प्राप्त करना अपने आप में एक उद्देश्य, एक साध्य है। इस संस्कृति और साध्य को अपनाने के लिए, सभ्यता का साधने के रूप में प्रयोग किया जाता है। उदाहरणार्थ-संगीत का आनन्द प्राप्त करने के लिए विभिन्न उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। 4. सभ्यता बाह्य है, जब कि संस्कृति आन्तरिक – सभ्यता का सम्बन्ध जीवन की भौतिक वस्तुओं से है, जिनका अस्तित्व मूर्त रूप में मानव अस्तित्व के बाहर है। संस्कृति का सम्बन्ध मानव के आन्तरिक गुणों से है, उसके विचारों, विश्वासों, मूल्यों, भावनाओं एवं आदर्शो से है। |
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सभ्यता के विकास के लिए आदर्श जलवायु’ की कल्पना किसने की है? |
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Answer» सभ्यता के विकास के लिए आदर्श जलवायु की कल्पना टॉयनबी ने की है। |
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सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिए। |
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Answer» ⦁ सभ्यता संस्कृति के विकास का उच्च व जटिल स्तर है। |
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संस्कृति की विशेषता है? (क) संस्कृति मनुष्य द्वारा निर्मित होती है।(ख) संस्कृति एक लिखित व्यवहार है।(ग) संस्कृति अनुसूचित नहीं होती है।(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» क) संस्कृति मनुष्य द्वारा निर्मित होती है |
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सांस्कृतिक पर्यावरण का समाजीकरण की प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है? |
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Answer» समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा एक व्यक्ति सामाजिक प्राणी बनता है, वह अपने समाज की संस्कृति को आत्मसात् करता है और अपने व्यक्तित्व का विकास करता है। परिवार, क्रीड़ासमूह, पड़ोस, नातेदारी-समूह, जाति एवं द्वितीयक समूहों के सम्पर्क से व्यक्ति का समाजीकरण होता है। वह अपने समाज के धर्म, रीति-रिवाजों, प्रथाओं, परम्पराओं आदि को ग्रहण करता है, जो कि सांस्कृतिक पर्यावरण के ही अंग हैं। हम समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा ही भाषा का प्रयोग करना सीखते हैं, किस शब्द का क्या अर्थ होगा, यह संस्कृति ही तय करती है। व्यक्ति में मानवीय गुणों का विकास भी समाजीकरण के द्वारा ही होता है। समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा हम किन बातों को सीखेंगे, यह हमारे सांस्कृतिक पर्यावरण पर ही निर्भर है।। |
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“हम जो भी सोचते हैं, करते हैं और रखते हैं वही हमारी संस्कृति है।” स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» संस्कृति की सर्वोत्तम परिभाषा रॉबर्ट बीरस्टीड द्वारा दी गयी है। इनके अनुसार, संस्कृति एक जटिल सम्पूर्णता है जिसमें वे सभी विशेषताएँ सम्मिलित हैं जिन पर हम विचार करते हैं (we think), कार्य करते हैं (we do) और समाज के सदस्य होने के नाते उन्हें अपने पास रखते हैं (we have)।’ इस परिभाषा में संस्कृति के भौतिक और अभौतिक दोनों पक्षों को सम्मिलित किया गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि संस्कृति जैविकीय विरासत से सम्बन्धित न होकर सामाजिक विरासत का परिणाम है। |
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सांस्कृतिक पर्यावरण किसे कहते हैं ? |
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Answer» सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत धर्म, नैतिकता, प्रथाएँ, लोकाचार, कानून, व्यवहारप्रतिमान, समस्त भौतिक और अभौतिक वस्तुएँ; जैसे—रेल, मकान, सड़क आदि आते हैं, जिन्हें मनुष्य अपने अनुभवों एवं सामाजिक सम्पर्क के कारण सीखता है और उनके अनुरूप अपने को ढालने का प्रयास करता है। |
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| 117109. |
भौगोलिक तथा सांस्कृतिक पर्यावरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» भौगोलिक़ पर्यावरणा से अभिप्राय प्राकृतिक पर्यावरण से है, जब कि सांस्कृतिक पर्यावरण मानव या समाज द्वारा निर्मित पर्यावरण है। दोनों में पर्याप्त अन्तर हैं, जो इस प्रकार हैं ⦁ भौगोलिक पर्यावरण का सम्बन्ध प्रकृति से है; अत: यह मानव से स्वतन्त्र है, जब कि सांस्कृतिक पर्यावरण, मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण है। |
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संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। |
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Answer» संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ संस्कृति की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं 1. सीखा हुआ व्यवहार – व्यक्ति समाज की प्रक्रिया में कुछ-न-कुछ सीखता ही रहता है। ये सीखे हुए अनुभव, विचार-प्रतिमान आदि की संस्कृति के तत्त्व होते हैं। इसलिए संस्कृति को सीखा हुआ व्यवहार कहा जाता है। 2. संगठित प्रतिमा – संस्कृति में सीखे हुए आचरण संगठित प्रतिमानों के रूप में होते हैं। संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति के आचरणों या इकाइयों में एक व्यवस्था और सम्बन्ध होता है। किसी भी मनुष्य का आचरण उसके पृथक्-पृथक् आचरणों की सूची नहीं होती। 3. हस्तान्तरण की विशेषता – संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित हो जाती है। संस्कृति का अस्तित्व हस्तान्तरण के कारण ही स्थायी बना रहता है। हस्तान्तरण की यह प्रक्रिया निरन्तर होती रहती है। समाजीकरण की प्रक्रिया संस्कृति के हस्तान्तरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 4. पार्थिव तथा अपार्थिव दोनों तत्त्वों का विद्यमान रहना – संस्कृति के अंतर्गत दो प्रकार के तत्त्व आते हैं—एक पार्थिव व दूसरा अपार्थिव। ये दोनों ही तत्त्व संस्कृति का निर्माण करते हैं। अपार्थिव स्वरूप को हम आचरण या क्रिया कह सकते हैं; अर्थात् जिन्हें छुआ या देखा न जा सके या जिनका कोई स्वरूप ही नहीं है; जैसे–बोलना, गाना, अभिवादन करना आदि। जिन पार्थिव या साकार वस्तुओं का मनुष्य सृजन करता है वे पार्थिव तत्त्वों के अन्तर्गत आती हैं; जैसे-रेडियो, मोटर साइकिल, टेलीविजन, सिनेमा आदि। 5. परिवर्तनशीलता – संस्कृति सदा परिवर्तनशील है। इसमें परिवर्तन होते रहते हैं, चाहे वे परिवर्तन धीरे-धीरे हों या आकस्मिक रूप में। वास्तव में संस्कृति मनुष्य की विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति की विधियों का नाम है। चूंकि समाज में परिस्थितियाँ सदा एक-सी नहीं रहती हैं, इसलिए आवश्यकताओं की पूर्ति की विधियों में भी परिवर्तन करना पड़ता है। 6. आदर्शात्मक – संस्कृति में सामाजिक विचार, व्यवहार प्रतिमान आदर्श रूप में होते हैं। इनके अनुसार कार्य करना सुसंस्कृत होने का प्रतीक माना जाता है। सभी मनुष्य संस्कृति के आदर्श प्रतिमानों के अनुसार अपने जीवन को बनाने का प्रयास करते हैं। 7. सामाजिकता का गुण – संस्कृति का जन्म समाज में तथा समाज के सदस्यों द्वारा होता है। मानव समाज के बाहर संस्कृति की रक्षा नहीं की जा सकती है। दूसरी ओर पशु-समाज में किसी प्रकार की संस्कृति नहीं पाई जाती है। 8. भिन्नता – प्रत्येक समाज की संस्कृति भिन्न होती है; अर्थात् प्रत्येक समाज की अपनी पृथक् प्रथाएँ, परम्पराएँ, धर्म, विश्वास, कला का ज्ञान आदि होते हैं। संस्कृति में भिन्नता के कारण ही विभिन्न समाजों में रहने वाले लोगों का रहन-सहन भिन्न होता है। |
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“मानव पहले प्रकृति का दास था, परन्तु अब स्वामी बनता जा रहा है।” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए। |
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Answer» भौगोलिक निश्चयवादी मानव के खान-पान, वेश-भूषा, मकान, व्यवहार, धर्म, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं आदि पर भौगोलिक प्रभाव को प्रमुख मानते हैं। वे मानव को प्रकृति के हाथों में खिलौना मात्र ही समझते हैं। भौगोलिक निश्चयवादियों की बात कुछ समय पहले तक उचित मानी जा सकती थी, जब मानव ने आज जितनी प्रगति, विकास और आविष्कार नहीं किये थे और उसका सम्पूर्ण जीवन प्रकृति पर निर्भर था, उससे ही नियन्त्रित व निर्देशित होता था। शिकारी अवस्था से कृषि अवस्था तक मानव की प्रकृति की दासता अधिक थी, किन्तु आज के वैज्ञानिक युग में मानव ने प्रकृति पर विजय पायी है। विज्ञान के सहारे ही मानव ने चन्द्रमा पर विजय की है, समुद्रों का मंथन किया है, आकाश में उड़ा है। अब दलदल, पहाड़ और रेगिस्तान उसके मार्ग में बाधा नहीं रहे। मानव ने अपने प्रयत्नों से रेगिस्तानों व टुण्ड्रा प्रदेशों को रहने योग्य एवं हरे-भरे खेतों में बदल दिया है। कृत्रिम वर्षा की जाने लगी है। मौसम के प्रभाव से बचने के लिए वातानुकूलित कमरे बनने लगे हैं। प्रत्येक क्षेत्र में आज मानव प्रकृति की दासता से मुक्त होता जा रहा है और नवीन आविष्कारों, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान के सहारे प्रकृति के रहस्यों को ज्ञात कर उन्हें अपनी इच्छानुसार प्रयोग में ला रहा है। |
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चेतनात्मक (भौतिक) संस्कृति की चार विशेषताएँ लिखिए। |
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Answer» चेतनात्मक (भौतिक) संस्कृति की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं ⦁ भौतिक संस्कृति मूर्त होती है। |
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सभ्यता सदैव आगे बढ़ती है, किन्तु संस्कृति नहीं। कैसे ? |
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Answer» सभ्यता सदैव आगे बढ़ती है, किन्तु संस्कृति नहीं; इसका प्रमुख कारण यह है कि सभ्यता उन्नतिशील है, वह निरन्तर प्रगति करती रहती है। आविष्कारों एवं खोजों के कारण उसमें समय-समय पर नवीन तत्त्व जुड़ते जाते हैं, किन्तु संस्कृति के बारे में यह बात नहीं कही जा सकती। वैदिककालीन साहित्य, मनोरंजन, नैतिक आदर्श, प्रथाएँ, धर्म, कला, चित्रकारी आदि को आज के युग से कम या अधिक श्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि संस्कृति की प्रगति की कोई दिशा निर्धारित नहीं होती है। |
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चेतनात्मक संस्कृति किस समाजशास्त्री की अवधारणा है ? |
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Answer» चेतनात्मक संस्कृति सोरोकिन की अवधारणा है। |
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भौतिक संस्कृति की विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए। |
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Answer» भौतिक संस्कृति की विशेषताओं को हम संक्षेप में इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं ⦁ भौतिक संस्कृति मूर्त होती है। |
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भौगोलिक पर्यावरण का धर्म तथा मानव-व्यवहार पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।याभौगोलिक पर्यावरण के चार प्रभावों का उल्लेख कीजिए। भौगोलिक पर्यावरण के दो अप्रत्यक्ष प्रभाव लिखिए। याभौगोलिक पर्यावरण के अप्रत्यक्ष प्रभावों का वर्णन कीजिए।याभौगोलिक पर्यावरण के मानव व्यवहार पर दो प्रभाव बताइए। |
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Answer» भौगोलिक पर्यावरण के चार प्रभाव निम्नलिखित हैं 1. धर्म पर प्रभाव – धर्म प्रत्येक समाज का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। भौगोलिक निश्चयवादी इस बात पर बल देते हैं कि भौगोलिक पर्यावरण अथवा प्राकृतिक शक्तियाँ धर्म के विकास को प्रभावित करती हैं। मैक्स मूलर ने धर्म की उत्पत्ति का सिद्धान्त ही प्राकृतिक शक्तियों के भय से उनकी पूजा करने के रूप में प्रतिपादित किया है। जिन देशों में प्राकृतिक प्रकोप अधिक हैं, वहाँ पर धर्म का विकास तथा धर्म पर आस्था रखने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है। एशिया की मानसूनी जलवायु के कारण ही यहाँ के लोग भाग्यवादी बने हैं। कृषिप्रधान देशों में इन्द्र की पूजा होना सामान्य बात है। वृक्ष, गंगा और गाय भारतीयों के लिए उपयोगी हैं; अतः ये सब पूजनीय हैं। 2. मानव-व्यवहार पर प्रभाव – भूगोलविदों का मत है कि मानवीय व्यवहारों, कार्यक्षमता, मानसिक योग्यता, आत्महत्या, अपराध एवं जन्म-दर और मृत्यु-दर पर जलवायु, तापक्रम एवं आर्द्रता आदि भौगोलिक कारकों का प्रभाव पड़ता है। लकेसन के अनुसार, “अपराध ऋतुओं के हिसाब में परिवर्तित होते हैं। सर्दियों में सम्पत्ति सम्बन्धी अपराध अधिक होते हैं और गर्मियों में व्यक्ति सम्बन्धी’’; उदाहरणार्थ-उपजाऊ भूमि, अनुकूल वर्षा तथा ठण्डे मौसम वाले क्षेत्रों में अपराध कम होते हैं। उनकी कार्यक्षमता भी अपेक्षाकृत अधिक होती है। 3. आर्थिक जीवन पर प्रभाव – किसी देश या समाज के आर्थिक क्षेत्र का निर्धारण वहाँ की भौगोलिक दशाओं से होता है। यदि किसी देश में उपजाऊ मैदान अधिक हैं, तो वहाँ का आर्थिक ढाँचा कृषि पर निर्भर होगा। यदि किसी देश में खनिज पदार्थों की अधिकता है, तो उस देश की आर्थिक उन्नति करने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं। इसी प्रकार यदि भौगोलिक पर्यावरण ने उस देश को कच्चा माल और शक्ति के साधन प्रदान किये हैं, तो उस देश का आर्थिक संगठन उद्योगों पर आधारित होता है। 4. सामाजिक संगठन पर प्रभाव – कुछ लोगों का कहना है कि सामाजिक संगठनों का स्वरूप भौगोलिक दशाओं से निर्धारित होता है। जंगली प्रदेशों में कुटुम्ब बड़े होते हैं, क्योंकि लोगों को जंगली जानवरों से अपनी रक्षा सामूहिक रूप से करनी पड़ती है और उदर-पूर्ति के लिए भी मिलकर कार्य करना पड़ता है। नगरों में परिवार छोटे होते हैं, क्योंकि स्त्री-पुरुष अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति परिवार के बिना भी कर लेते हैं और इसलिए तलाकों की संख्या भी वहाँ अधिक होती है। रेगिस्तानों और घास के मैदानों में लोगों को अपने जानवरों को लेकर घूमना-फिरना पड़ता है, इसलिए उनके जीवन में स्थायित्व नहीं आ पाता। इसके विपरीत, खेती और उद्योग-धन्धे वाले क्षेत्रों के परिवारों में अधिक स्थायित्व होता है और उनके सामाजिक संगठनों में स्थिरता होती है। |
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संस्कृति के भौतिक पक्ष को क्या कहा गया है ? |
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Answer» संस्कृति के भौतिक पक्ष को सांस्कृतिक पर्यावरण कहा गया है। |
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भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति की अवधारणा किस समाजशास्त्री की है ? |
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Answer» भौतिक एवं अभौतिक संस्कृति की अवधारणा अमेरिकन समाजशास्त्री ऑगबर्न की है। |
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भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति के दो-दो उदाहरण दीजिए। यासंस्कृति के दो प्रकार कौन-कौन से हैं? यासंस्कृति के प्रकार लिखिए। |
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Answer» अमेरिकन समाजशास्त्री ऑगबर्न ने संस्कृति को भौतिक और अभौतिक दो भागों में बाँटा है। उनके इस वर्गीकरण को अन्य वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है। भौतिक संस्कृति के दो उदाहरण – भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत मानव द्वारा निर्मित सभी भौतिक एवं मूर्त वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है जिन्हें हम देख सकते हैं, छू सकते हैं और इन्द्रियों द्वारा महसूस कर सकते हैं। भौतिक संस्कृति के दो उदाहरण हैं-मशीनें तथा परिवहन के साधन। अभौतिक संस्कृति के दो उदाहरण – अभौतिक संस्कृति के अन्तर्गत उन सभी सामाजिक तथ्यों को सम्मिलित किया जाता है जो अमूर्त हैं; जिनकी कोई माप-तोल, आकार व रंग-रूप नहीं होता, वरन् जिन्हें हम महसूस कर सकते हैं। अभौतिक संस्कृति के दो उदाहरण हैं-आदर्श नियम तथा विचार। |
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संस्कृति की परिभाषा दीजिए। भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।याभौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अन्तर बताइए। याभौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में चार अन्तर लिखिए। |
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Answer» संस्कृति का अर्थ मनुष्य ने आदिकाल से प्राकृतिक बाधाओं को दूर करने के लिए व अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक समाधानों की खोज की है। इन खोजे गए उपायों को मनुष्य ने आगे आने वाली पीढ़ी को ही हस्तान्तरित किया। प्रत्येक पीढ़ी ने अपने पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान और कला का और अधिक विकास किया है। दूसरे शब्दों में, प्रत्येक पीढ़ी ने अपने पूर्वजों के ज्ञान को संचित किया है। और इसे ज्ञान के आधार पर नवीन ज्ञान और अनुभव का भी अर्जन किया है। इस प्रकार के ज्ञान व अनुभव के अन्तर्गत यन्त्र, प्रविधियाँ, प्रथाएँ, विचार और मूल्य आदि आते हैं। ये मूर्त और अमूर्त वस्तुएँ संयुक्त रूप से संस्कृति’ कहलाती है। इस प्रकार, वर्तमान पीढ़ी ने अपने पूर्वजों तथा स्वयं के प्रयासों से जो अनुभव व व्यवहार सीखी है, वही संस्कृति है। संस्कृति की परिभाषा प्रमुख विद्वानों ने संस्कृति को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया है। 1. हॉबल के अनुसार “संस्कृति सम्बन्धित सीखे हुए व्यवहार प्रतिमानों का सम्पूर्ण योग है जो कि एक समाज के सदस्यों की विशेषताओं को बतलाता है और जो इसलिए प्राणिशास्त्रीय विरासत का परिणाम नहीं होता।” 2. ई०एस० बोगार्डस के अनुसार “संस्कृति किसी समूह के कार्य करने में सोचने की समस्त विधियाँ हैं।” 3. मैकाइवर तथा पेज के अनुसार “संस्कृति हमारे दैनिक व्यवहार में कला, साहित्य, धर्म, मनोरंजन और आनन्द में पाए जाने वाले रहन-सहन और विचार के ढंगों में हमारी प्रकृति . की अभिव्यक्ति है।” 4. हर्सकोविट्स के अनुसार ‘‘संस्कृति पर्यावरण का मानव निर्मित भाग है।” 5. मैलिनोव्स्की के अनुसार ‘संस्कृति प्राप्त आवश्यकताओं की एक व्यवस्था और उद्देश्यात्मक क्रियाओं को संगठित व्यवस्था है।” 6. बीरस्टीड के अनुसार “संस्कृति वह सम्पूर्ण जटिलता है, जिसमें वे सभी वस्तुएँ सम्मिलित हैं जिन पर हम विचार करते हैं, कार्य करते हैं और समाज का सदस्य होने के नाते अपने पास रखते हैं।” संस्कृति के प्रकार टायलर के अनुसार संस्कृति एक जटिल समग्रता है, जिसमें ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता, कानून, प्रथा तथा ऐसी ही अन्य किसी भी योग्यता और आदत का समावेश रहता है, जिन्हें मनुष्य समाज का सदस्य होने के नाते अर्जित करता है। ऑगबर्न ने संस्कृति को दो भागों में विभाजित किया है। (क) भौतिक संस्कृति मनुष्यों ने अपनी आवश्यकताओं के कारण अनेक आविष्कारों को जन्म दिया है। ये आविष्कार हमारी संस्कृति के भौतिक तत्त्व माने जाते हैं। इस प्रकार भौतिक संस्कृति उन आविष्कारों का नाम है जिनको मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं के कारण जन्म दिया है। यह भौतिक संस्कृति मानव जीवन है। बाह्य रूप से सम्बन्धित है भौतिक संस्कृति को ही सभ्यता कहा जाता है। मोटर, रेलगाड़ी, हवाईजहाज, मेज-कुर्सी, बिजली का पंखा आदि सभी भतिक तत्त्व; भौतिक संस्कृति अथवा सभ्यता के ही प्रतीक हैं। संस्कृति के भौतिक पक्ष को मैथ्यू आरनोल्ड, अल्फ्रेड वेबर तथा मैकाइवर और पेज ने सभ्यता कहा है। भौतिक संस्कृति अथवा सभ्यता को परिभाषित करते हुए मैकाइवर तथा पेज ने लिखा है कि “मनुष्य ने अपने जीवन की दशाओं पर नियन्त्रण करने के प्रयत्न में जिस सम्पूर्ण कला विन्यास की रचना की है, उसे सभ्यता कहते हैं।” क्लाइव बेल के अनुसार-“सभ्यता मूल्यों के ज्ञान के आधार पर स्वीकृत किया गया तर्क और तर्क के आधार पर कठोर एवं भेदनशील बनाया गया मूल्यों का ज्ञान है।” (ख) अभौतिक संस्कृति मानव जीवन को संगठित करने के लिए मनुष्य ने अनेक रीतिरिवाजों, प्रथाओं, रूढ़ियों आदि को जन्म दिया है। ये सभी तत्त्व मनुष्य की अभौतिक संस्कृति के रूप हैं। ये तत्त्व अमूर्त तत्त्वों का योग है, जो नियमों, उपनियमों, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों आदि के रूप में मानव व्यवहार को नियन्त्रित करते हैं। इस प्रकार संस्कृति के अन्तर्गत वे सभी चीजें सम्मिलित की जा सकती हैं, जो व्यक्ति की आन्तरिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। दूसरे शब्दों में, संस्कृति में वे भी पदार्थ सम्मिलित किए जा सकते हैं, जो मनुष्य के व्यवहारों को प्रभावित करते हैं। टायलर ने लिखा है कि “संस्कृति मिश्रित-पूर्ण व्यवस्था है, जिसमें समस्त ज्ञान, विश्वास, कला, नैतिकता के सिद्धान्त, विधि-विधान, प्रथाएँ एवं अन्य समस्त योग्यताएँ सम्मिलित हैं तथा जिन्हें व्यक्ति समाज का सदस्य होने के नाते प्राप्त करता है।” भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में अन्तर भौतिक तथा अभौतिक संस्कृति में निम्नलिखित प्रमुख भेद या अन्तर पाए जाते हैं ⦁ भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत मनुष्य द्वारा निर्मित वे सभी वस्तुएँ आ जाती हैं, जिनका उनकी उपयोगिता द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जबकि अभौतिक संस्कृति का सम्बन्ध मूल्यों, विचारों व ज्ञान से है। |
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भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत किन वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है ? |
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Answer» भौतिक संस्कृति के अन्तर्गत मानव द्वारा निर्मित सभी भौतिक एवं मूर्त वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है, जिन्हें हम देख सकते हैं, छू सकते हैं और इन्द्रियों द्वारा महसूस कर सकते हैं। |
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मैकाइवर और पेज ने मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण को क्या संज्ञा दी है ? |
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Answer» मैकाइवर और पेज ने मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण को सम्पूर्ण सामाजिक विरासत’ की संज्ञा दी है। |
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भौतिक संस्कृति का गुण होता है।(क) स्थिरता(ख) अमूर्तता(ग) परिवर्तनशीलता(घ) जटिलता |
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Answer» (ग) परिवर्तनशीलता |
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निम्नलिखित नामों में कौन भौगोलिकविद् नहीं है ?(क) मॉण्टेस्क्यू(ख) मैकाइवर(ग) हंटिंग्टन(घ) एच०टी० बकल |
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Answer» सही विकल्प है (ख) मैकाइवर |
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पता कीजिए कि आपके परिवार में रोजाना कितना पानी इस्तेमाल किया जाता है। यह जानने का प्रयास कीजिए कि विभिन्न आय समूहों के परिवारों में तुलनात्मक रूप से कितना पानी इस्तेमाल होता है। विभिन्न परिवार पानी के लिए कितना समय और पैसा खर्च करते हैं? परिवार में पानी भरने का काम कौन करता है? सरकार विभिन्न वर्ग के लोगों के लिए कितना पानी मुहैया करवाती है? |
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Answer» परिवार के सदस्यों की संख्या तथा उसके निवास स्थान से पानी को व्यय ज्ञात होता है और उसके घर में यदि पेड़-पौधे भी हैं या और कोई अतिरिक्त उपयेाग है तब उसके अनुसार ज्ञात किया जाता है। एक मध्यम आकार का परिवार प्रतिदिन कम-से-कम 150 से 250 लीटर पानी का प्रयोग करता है। यदि पेड़-पौधों को भी पानी देता है तो यह 500 लीटर तक भी हो सकता है। गर्मियों में पानी का अधिक उपयोग होता है, जबकि सर्दियों में कम। कम आय समूह के परिवारों में उच्च समूह के परिवारों की तुलना में पानी कम खर्च होता है। नगरों में पानी भरने के लिए बहुत कम समय देना पड़ता है, जबकि गाँव में इसके लिए एक घंटा तक लग सकता है। यदि कोई व्यक्ति नगर विकास निगम द्वारा बनाई गई कॉलोनी में रहता है तो उसके मकान की श्रेणी (आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग, निम्न वर्ग, मध्यम वर्ग एवं उच्च वर्ग) के अनुरूप पानी का मासिक किराया निर्धारित कर दिया जाता है। ऐसी कालोनियों में पानी की सप्लाई हेतु काफी बड़ी टंकियों का निर्माण भी भवनों के निर्माण के साथ ही कर दिया जाता है। पहले कभी परिवारों को पानी के लिए बहुत कम पैसा व्यय करना पड़ता था, लेकिन अब यह व्यय निरंतर बढ़ता जा रहा है। महानगरों में बड़े भवनों में रहने वाले लोगों को र 300 से भी अधिक का खर्चा प्रतिमाह पानी पर करना पड़ता है। |
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“भौगोलिक पर्यावरण में वे समस्त दशाएँ सम्मिलित हैं जो प्रकृति मनुष्य को प्रदान करती है।” यह कथन किसका है? (क) सोरोकिन(ख) पी० जिसबर्ट(ग) मैकाइवर एवं पेज(घ) एफ०एच० गिडिंग्स। |
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Answer» (ग) मैकाइवर एवं पेज |
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निम्नलिखित में कौन भौगोलिक (प्राकृतिक) पर्यावरण का तत्त्व है ?(क) कृत्रिम वर्षा(ख) पत्थर का मकान(ग) मिट्टी के बर्तन(घ) पेड़-पौधे |
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Answer» सही विकल्प है (घ) पेड़-पौधे |
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सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण होता है।(क) धार्मिक विश्वासों द्वारा(ख) प्राकृतिक दशाओं द्वारा(ग) मनुष्य द्वारा(घ) अलौकिक शक्तियों द्वारा |
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Answer» सही विकल्प है (ग) मनुष्य द्वारा |
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निम्नलिखित में से कौन-सा प्राकृतिक पर्यावरण से सम्बन्धित है ?(क) सड़क के किनारे के पेड़(ख) मकान(ग) खनिज पदार्थ(घ) पुराने मन्दिर |
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Answer» (ग) खनिज पदार्थ |
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क्या आप जानते हैं कि ‘चोरस,-जहाँ उत्तराखंड स्थित कार्बेट नेशनल पार्क के वन्य जीवन की अद्भुत छटा को देखा जा सकता है, कभी वहाँ किसान खेती किया करते थे? |
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Answer» उत्तराखंड में कार्बेट नेशनल पार्क एक प्रमुख आकर्षण का स्थल है जहाँ वन्य जीवन की अद्भुत छटा को देखा जा सकता है। जिस स्थान पर यह पार्क बनाया गया है वहाँ पहले किसान खेती करते थे। इस क्षेत्र के गाँवों को पुनस्र्थापित किया गया ताकि यहाँ वन्य जीवन को अपने प्राकृतिक रूप में देखा जा सके। यह ‘प्राकृतिक रूप से देखी जाने वाली चीज वास्तव में मनुष्य के सांस्कृतिक हस्तक्षेप का उदाहरण है। मनुष्य के सांस्कृतिक हस्तक्षेप के ऐसे अनगिनत अन्य उदाहरण भी हैं। जलरहित विदर्भ क्षेत्र में भारत का पहला हिम गुंबद’ तथा ‘फन एण्ड फूड विलेज’ वाटर एंड एम्युजमेंट पार्क’ आदि उदाहरण लगभग सभी प्रदेशों में देखे जा सकते हैं। वन्य जीवों के संरक्षण तथा लुप्तप्राय होती वन्य जीवों की प्रजातियों को बनाए रखने हेतु सरकार ने अनेक स्थानों का अधिग्रहण किया है। |
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भौगोलिक पर्यावरण किन तत्त्वों से बनता है ?(क) मनुष्य(ख) प्राकृतिक दशाएँ(ग) धार्मिक विश्वास(घ) प्रथाएँ। |
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Answer» (ख) प्राकृतिक दशाएँ |
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हंटिंग्टन किस सम्प्रदाय का समर्थक है?(क) भौगोलिक निर्णायकवाद(ख) तकनीकी निर्णायकवाद(ग) सांस्कृतिक निर्णायकवाद(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (क) भौगोलिक निर्णायकवाद |
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चिपको आन्दोलन किसने चलाया? |
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Answer» सुन्दरलाल बहुगुणा ने। |
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प्रदूषण रोकने में वृक्षारोपण की भूमिका बताइए। |
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Answer» वृक्षारोपण और वनों को लगाने से वायुमण्डल में ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड का सन्तुलन नहीं बिगड़ता। आधुनिक वैज्ञानिकों का मत है कि यदि आबादी का 23% वन हों तो वायु-प्रदूषण से हानि नहीं पहुँचती है। वनों का काटा जाना तत्परता से रोका जाना चाहिए। ऐसे कानून बनाये जाने चाहिए जिनसे वनोन्मूलन को दण्डनीय अपराध करार दिया जा सके। |
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प्रदूषण के चार कुप्रभाव बताइए। |
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Answer» ⦁ वायु-प्रदूषण का कुप्रभाव-ओजोन-परत में छेद होने की सम्भावना से सारा विश्व भयाक्रांत हो उठा है। ⦁ जल-प्रदूषण के कुप्रभाव-जल-प्रदूषण से अनेक बीमारियाँ; जैसे-हैजा, पीलिया, पेट में कीड़े, टायफाइड फैलती हैं। ⦁ ध्वनि-प्रदूषण का कुप्रभाव-यह प्रदूषण मानव के कानों के परदों पर, मस्तिष्क और शरीर पर इतना घातक आक्रमण करता है कि विश्व के सारे डॉक्टर और वैज्ञानिक इससे चिन्तित हैं। ⦁ मृदा-प्रदूषण का कुप्रभाव–दूषित मृदा में रोगों के जीवाणु पनपते हैं जिनसे मनुष्यों और अन्य जीवों में रोग फैलते हैं। |
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प्रदूषण नियन्त्रण हेतु चार प्रमुख उपायों की विवेचना कीजिए। |
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Answer» प्रदूषण नियन्त्रण हेतु चार प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं ⦁ पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 के द्वारा केन्द्र और राज्य बोर्डो को पर्यावरण के अतिरिक्त उत्तर :दायित्व सौंपे गये हैं। |
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प्रदूषण से क्या तात्पर्य है ? |
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Answer» जब पर्यावरण में असन्तुलन पैदा हो जाता है और निर्भरता नष्ट हो जाती है, तो उसे प्रदूषण कहते हैं। |
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भारत में पर्यावरण और वन्य जीवन मंत्रालय की स्थापना कब की गई? |
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Answer» भारत में पर्यावरण और वन्य जीवन मंत्रालय की स्थापना 1985 ई० में की गई। |
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‘भौगोलिक निर्णायकवाद’ की संकल्पना को किसने विकसित किया? |
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Answer» ‘भौगोलिक निर्णायकवाद’ की संकल्पना को बकल ने विकसित किया। |
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प्रदूषण के चार प्रकार बताइए। |
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Answer» वैज्ञानिकों ने प्रदूषण के पाँच प्रकार बताये हैं, जिनमें से चार निम्नलिखित हैं 1. वायु-प्रदूषण – वायु जीवन का एक प्रमुख तत्त्व है, जो सभी प्राणियों और वनस्पतियों के जीवन के लिए परम आवश्यक है। वायुमण्डल में हाइड्रो-कार्बनिक गैसों, विषैले धूलकणों तथा कल-कारखानों से निकलने वाले धुएँ के कारण जब वायु में हानिकारक तत्त्व बढ़ जाते हैं तो वायु का प्राकृतिक सन्तुलन बिगड़ जाता है। इसे वायु-प्रदूषण कहते हैं। 2. जल-प्रदूषण – अनेक भौतिक, प्रौद्योगिक तथा मानवीय कारणों से जब जल का रूप प्राकृतिक नहीं रह जाता तथा उसमें गन्दे पदार्थों तथा विषाणुओं का समावेश हो जाता है, उसे जल-प्रदूषण कहते हैं। 3. ध्वनि-प्रदूषण – वातावरण में बहुत तेज और असहनीय आवाज से जो शोर उत्पन्न होता है, वही ध्वनि-प्रदूषण कहलाता है। शोर से उत्पन्न होने वाले इस प्रदूषण ने बड़े शहरों में। विकराल रूप धारण कर लिया है। मृदा-प्रदूषण-मृदा की रचना विभिन्न तरीके के लवण, गैस, खनिज पदार्थ, जल, चट्टानों एवं जीवाश्म आदि के मिश्रण से होती है। इन पदार्थों के अनुपात में जब हानिकारक परिवर्तन होने लगता है, तो उसी दशा को मृदा-प्रदूषण कहा जाता है। इसका मुख्य कारण। कीटनाशक दवाइयों और रासायनिक उर्वरकों का बढ़ता हुआ प्रयोग है। |
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वायु-प्रदूषण के कारणों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» नगरीकरण, औद्योगीकरण एवं अनियन्त्रित भवन-निर्माण, परिवहन के साधन (ऑटोमोबाइल), वनों का बड़ी मात्रा में कटान, रसोईघरों व कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला धुआँ तथा युद्ध, आणविक विस्फोट एवं दहन की क्रियाएँ आदि वायु प्रदूषण के कारण हैं। |
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‘जनसंख्या विस्फोट कैसे प्रदूषक है ? |
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Answer» पर्यावरण प्रदूषण का यदि एक सबसे प्रमुख कारण बताना हो तो नि:सन्देह जनसंख्या विस्फोट को माना जा सकता है। यदि संसार की जनसंख्या इतनी अधिक नहीं हुई होती तो आज प्रदूषण की बात भी नहीं उठती। यह अनुमान किया जाता है कि गत 100 वर्षों में केवल मनुष्य ने ही वायुमण्डल में 36 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी है। यह मात्रा दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। |
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प्राकृतिक प्रदूषक से क्या अभिप्राय है ? |
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Answer» कुछ प्रदूषक; जैसे-परागकण, कवक, निम्नतर पौधों के बीजाणु, ज्वालामुखी पर्वतों से निकलने वाली गैसें, मार्श गैस, तटीय प्रदेश में नमक के अत्यन्त सूक्ष्म कण आदि प्राकृतिक रूप में वायु में आ मिलते हैं और उसे प्रदूषित कर देते हैं। इन्हें प्राकृतिक प्रदूषक कहते हैं। |
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जल प्रदूषण का एक प्रभाव बताइए। |
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Answer» जल प्रदूषण के प्रभाव से आर्सेनिक कैंसर, टाइफाइड, हैजा एवं पीलिया जैसे रोगों की आशंका बढ़ जाती है। जल प्रदुषण की वजह से हमारे आस पास के जलीय जानवर पर बहुत बड़ा प्रभाव होता है |
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वायु-प्रदूषण निराकरण के कोई चार उपाय बताइए। |
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Answer» वायु प्रदूषण निराकरण के चार उपाय निम्नलिखित हैं| ⦁ परिवहन के साधनों पर धुआँ रहित यनत्र लगाना। |
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प्रदूषक के रूप में कार्बन मोनोक्साइड का वर्णन कीजिए। |
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Answer» मोटरगाड़ियों, औद्योगिक संयन्त्रों, घर के चूल्हों तथा सिगरेट के धुएँ से कार्बन मोनोक्साइड व कार्बन डाइऑक्साइड वायु में मिलती हैं, जो श्वसन की क्रिया में रक्त के हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ऑक्सीजन के उचित संचरण के कार्य को रोक देती हैं। शरीर की सभी कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण, थकान, सिरदर्द, काम करने की अनिच्छा, दृष्टि-संवेदनशीलता में कमी तथा हृदय व रक्त-संचार में शिथिलता आदि विकार उत्पन्न होते हैं। इन गैसों (विशेषकर CO) की अधिकता से मनुष्य की मृत्यु तक हो सकती है। |
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वायु प्रदूषण के दो प्रमुख स्रोत बताइए। |
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Answer» कारखानों से निकलने वाला धुआँ तथा ऑटोमोबाइल से निकलने वाली गैसें वायु प्रदूषण के दो प्रमुख स्रोत हैं। |
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प्रदूषण नियंत्रण हेतु चार प्रमुख उपायों की विवेचना करें। |
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Answer» प्रदूषण नियंत्रण हेतु चार प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं – ⦁ प्रदूषण नियंत्रण हेतु जनता का सहयोग अनिवार्य है। जनता के सहयोग हेतु प्रदूषण-नियंत्रण के लिए शिक्षा का अभियान चलाया जाना चाहिए। जनसंचार माध्यमों द्वारा जनता में पर्यावरणीय सुरक्षा एवं प्रदूषण के प्रति जागरूकता लाने के प्रयास भी किए जाने चाहिए। |
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पारिस्थितिकीय निर्धारणवाद क्या है? |
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Answer» पारिस्थितिकीय निर्धारणवाद वह विचारधारा है जो सभ्यता के विकास की संभावनाओं में पर्यावरण को मूल कारण मानती है। इस विचारधारा के अनुसार पारिस्थितिकी सभी घटनाओं को नियंत्रित करता है। |
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ध्वनि-प्रदूषण क्या है ? इसके प्रकार बताइए। या शोर (ध्वनि) प्रदूषण के बारे में आप क्या जानते हैं? |
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Answer» कम्पन्न करने वाली प्रत्येक वस्तु ध्वनि उत्पन्न करती है और जब ध्वनि की तीव्रता अधिक हो जाती है तो वह कानों को अप्रिय लगने लगती है। इस अप्रिय अथवा उच्च तीव्रता वाली ध्वनि को शोर कहा जाता है। तीखी ध्वनि या आवाज को शोर कहते हैं। ध्वनि की तीव्रता नापने की इकाई डेसीबेल (decibel or dB) है जिसका मान 0 से लेकर 120 तक होता है। डेसीबेल पैमाने पर ‘शून्य’ ध्वनि की तीव्रता का वह स्तर है जहाँ से ध्वनि सुनाई देनी आरम्भ होती है। 85 से 95 डेसीबेल शोर सहने लायक और 120 डेसीबेल या उससे अधिक का शोर असह्य होता है। ध्वनि-प्रदूषण के स्रोत – ध्वनि-प्रदूषण मुख्यत: दो प्रकार के स्रोतों से होता है- 1. प्राकृतिक स्रोत – बिजली की कड़क, बादलों की गड़गड़ाहट, तेज हवाएँ, ऊँचे स्थान से गिरता जल, आँधी, तूफान, ज्वालामुखी का फटना एवं उच्च तीव्रता वाली जल-वर्षा। 2. कृत्रिम स्रोत – ये स्रोत मानवजनित हैं; उदाहरणार्थ-मोटर वाहनों से उत्पन्न होने वाला शोर, वायुयान, रेलगाड़ी तथा उसकी सीटी से होने वाला शोर, लाउडस्पीकर एवं म्यूजिक सिस्टम से होने वाला शोर, टाइपराइटर की खड़खड़ाहट, टेलीफोन की घण्टी आदि से होने वाला शोर। |
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