This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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पूर्व-मध्यकाल किस काल को कहते हैं? |
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Answer» भक्तिकाल को पूर्व-मध्यकाल कहते हैं। |
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वीरगाथा काल के काव्य की सामान्य विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» वीरगाथा काल हिन्दी साहित्य का आरम्भिक काल है। प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं के पश्चात् अब हिन्दी उत्तर भारत में सर्वसाधारण के व्यवहार की भाषा हो गयी थी । वीरगाथा काल का आरम्भ 10वीं शताब्दी ईसवी से माना जाता है। इस समय उत्तर भारत में राजपूत राजाओं के बहुत से छोटे-छोटे राज्य थे। इन राज्यों में प्रभुत्व के लिए परस्पर युद्ध हुआ करते थे। मुसलमानों के आक्रमण भी आरम्भ हो गये थे। इस समय की काव्य रचनाओं में भी युद्धों के अनेक वर्णन हैं। काव्य-ग्रन्थों में वीररस को प्रधानता मिलती है। इसी कारण इस काल को वीरगाथा काल कहा गया है। वीरगाथा काल के काव्य की सामान्य विशेषताएँ – 1. इस काल का काव्य राज्याश्रय में लिखा गया। कवि राज-दरबार में राजा के आश्रय में रहता था और युद्ध के समय राजा और उसकी सेना को प्रोत्साहित करने के लिए वीर रस की रचना करता था। वह सेना के साथ युद्ध भूमि में भी उपस्थित रहता था। शांति के समय वह राजकुमारियों के सौन्दर्य का वर्णन करके राजा का मनोरंजन भी करता था। ये कवि चारण (भाट) होते थे। इसी कारण इस काल को चारण-काल भी कहा गया है। 2. इस काल के कवियों ने प्रबन्धात्मक काव्य की रचना की। काव्य रचनाएँ प्रायः आश्रय देनेवाले शासक की जीवन गाथाएँ होती थीं, जिनमें शासक द्वारा किये गये युद्धों का वर्णन और राजकुमारियों के अपहरण की कथाएँ होती थीं। इस काल का काव्य प्रशंसात्मक काव्य था। कुछ गाथाएँ ऐसी भी लिखी गयीं जिनको वीरगीतों के रूप में गाया जाता था। इस काल के काव्य-ग्रन्थों को ‘रासो’ कहा गया है। 3. इस काल के काव्य में वीर रस की प्रधानता रही। वीर के साथ रौद्र, भयानक और वीभत्स रस के प्रसंग भी मिलते हैं। गाथाओं में श्रृंगार भी प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। कवियों से राजकुमारियों का नख-शिख वर्णन सुनकर उनके अपहरण के लिए अभियान होते थे और स्वयंवर-स्थल युद्ध-स्थल में बदल जाते थे। 4. इस काल के काव्य में अलंकारों का भी प्रचुर मात्रा में प्रयोग मिलता है। क्रवि अलंकार का प्रयोग केवल चमत्कारप्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपने भावों को प्रभावोत्पादक एवं उनकी अभिव्यक्ति को सुन्दर और स्पष्ट बनाने के लिए करते थे। इस काल के काव्य में विशेष रूप से उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक, अतिशयोक्ति, यमक, श्लेष, संदेह आदि अलंकारों का प्रयोग मिलता है। 5. वीरगाथा काल का काव्य कवित्त, छप्पय, दूहा, भुजंगप्रयात तथा वीर छंदों में लिखा गया। इस काल के कवियों की छंद-योजना की विशेषता यह रही कि छंद वर्म्य-वस्तु के अनुकूल लिखे जाते थे। 6. वीरगाथा काल का काव्य वर्णन-प्रधान था। इसमें युद्धों के अनेक सजीव वर्णन मिलते हैं। युद्ध-वर्णन के साथ सेनाप्रयाण, अस्त्र-शस्त्र, युद्ध-भूमि, आखेट, राजमहल, राजदरबार आदि के भी प्रभावशाली वर्णन हैं राजकुमारियों का नख-शिखवर्णन परम्परागत शैली में किया गया है। कहीं-कहीं पर ऋतु वर्णन और प्रकृति-सौंदर्य का वर्णन भी प्रभावशाली शैली में किया गया है। 7. वीरगाथा काल से सम्बन्धित काव्य विशेषत: डिंगल भाषा में लिखा गया। यह हिन्दी का राजस्थानी रूप है। अपभ्रंश के शब्द इसमें प्रचुरता में मिलते हैं। यह भाषा वीररस के काव्य के लिए उपयुक्त है। 8. वीरगाथा काल के काव्य से ही हम समझ पाते हैं कि आरम्भ में हिन्दी भाषा का क्या रूप था। इस काव्य से हमें 10वीं से 12वीं । शताब्दी ईसवी में घटित होनेवाली अनेक ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी होती है। |
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किस काल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग कहा जाता है? |
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Answer» भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग कहा जाता है। |
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वीरगीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रन्थ कौन-सा है? |
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Answer» वीरगीत काव्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य ग्रन्थ आल्हाखण्ड (परमाल रासो) है। |
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भक्तिकाल को हिन्दी काव्य का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है? |
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Answer» भक्तिकाल में भाव, भाषा एवं शिल्प की दृष्टि से हिन्दी-साहित्य का उत्कर्ष हुआ। भावपक्ष तथा कलापक्ष के उत्कृष्ट रूप के कारण ही भक्तिकाल को हिन्दी-साहित्य का स्वर्णयुग कहते हैं। इस समय कबीर, जायसी, सूर तथा तुलसी जैसे रससिद्ध कवियों की दिव्य वाणी उनके अन्त:करण से निकलकर देश के कोने-कोने में फैली थी। यही सार्वभौम और सार्वकालिक साहित्य भक्तिकाल की अनुपम देन है। |
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वीरगीत की दो रचनाओं के नाम बताइए। |
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Answer» वीरगीत की दो रचनाएँ हैं-
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वीरगाथा काल के प्रथम कवि का नाम लिखिए। |
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Answer» वीरगाथा काल के प्रथम कवि का नाम चन्दबरदाई है। |
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आदिकाल की कविता का मुख्य विषय क्या रहा? |
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Answer» आदिकाल की कविता का मुख्य विषय आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा एवं वीर रस से पूर्ण गाथाओं का वर्णन था। |
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भक्तिकाल का परिचय अपने शब्दों में लिखिए। |
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Answer» हिन्दी साहित्य के इतिहास के द्वितीय चरण मध्यकाल के दो उपखण्ड किये गये हैं-पूर्व- मध्यकाल और उत्तरमध्यकाल। पूर्व-मध्यकाल को ही ‘भक्तिकाल’ के नाम से जाना जाता है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इसका समय 1375 ई० से 1700 ई० तक माना है। इस समय तक भारत में मुस्लिम शासन स्थापित हो चुका था। मुसलमानों के अत्याचारों से पीड़ित हिन्दुओं ने ईश्वर-भक्ति की शरण ली। अब कविता राजदरबार की वस्तु न होकर ईश्वरीय भक्ति का माध्यम बन गयी। भक्ति-भावना से ओत-प्रोत रचनाओं की प्रचुरता के कारण इस काल को भक्तिकाल कहा जाता है। |
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प्रश्नसूचक चिह्न किसे कहते हैं? |
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Answer» जिन वाक्यों में प्रश्न पूछे जाते है, उन प्रश्नात्मक वाक्यों के अंत में जो चिहन लगाया जाता है, उसे प्रश्नसूचक चिहन कहते हैं। इसके अलावा संदेहात्मक अथवा व्यंग्यात्मक वाक्यों में जिस शब्द पर संदेह व्यक्त किया जाता है, वहाँ भी जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे प्रश्नवाचक चिह्न कहते हैं। |
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वीरगाथा काल को चारणकाल क्यों कहा जाता है? |
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Answer» इस युग में चारण कवियों द्वारा राजाओं की प्रशंसा में बहुतायत रचनाएँ की गयीं इसीलिए इसे चारणकाल भी कहते हैं। |
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उद्धरण चिह्न किसे कहते हैं ? |
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Answer» जब किसी वाक्यांश अथवा शब्द को किसी ग्रंथ से उद्धरित करके जैसे-का-तैसा लिखा जाता है, तब उद्धरण चिह्न का प्रयोग किया जाता है। वाक्यांश को दोहरे उद्धरण चिह्न से शुरू करके दोहरे उद्धरण चिह्न से पूर्ण किया जाता है। |
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आदिकाल को वीरगाथा काल क्यों कहा जाता है? |
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Answer» हिन्दी पद्य-साहित्य का प्रथम काल वीरगाथा काल कहलाता है। इसे चारणकाल, अपभ्रंशकाल, सन्धिकाल, आविर्भावकाल आदि नामों से भी सम्बोधित किया जाता है। इस युग में देश छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। राजा आपस में लड़ते थे। मुसलमानों का आक्रमण भी प्रारम्भ हो गया था। इस युग में वीरों और योद्धाओं में वीर रस का संचार करना ही काव्य का मुख्य उद्देश्य रह गया था । अतः वीर रस से पूर्ण गाथाओं का वर्णन किया जाता था इसीलिए इस काल को वीरगाथा काल कहा जाता है। यह सर्वथा उपयुक्त नाम है। |
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कोष्ठक किसे कहते हैं ? |
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Answer» किसी पद का अर्थ स्पष्ट करने तथा संवाद में पात्रों की मानसिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोष्ठकों का प्रयोग किया जाता है। क्रम सूचक अंकों एवं अक्षरों के साथ भी कोष्ठक का प्रयोग होता है। जैसे – काशी (वाराणसी) हिन्दुओं का पवित्र तीर्थस्थान है। (नेपथ्य में शोर होता है।) |
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अर्ध विराम किसे कहते हैं ? |
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Answer» लिखते समय वाक्य में अल्पविराम से कहीं अधिक देर रुकना होता है, तो इसका प्रयोग किया जाता है। यह वाक्य को पृथकपृथक खंडों में विभाजित करता है। जैसे- तुमने उसे पकड़ लिया; लेकिन वह भाग निकला। |
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पूर्ण विराम किसे कहते हैं ? |
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Answer» पूर्णविराम का अर्थ है पूरा विश्राम। पूर्णविराम एक खड़ी पाई (।) होता है। जब किसी बात का एक अंश पूरा होता है, तो उसे पूरा वाक्य कहते हैं। तब पूर्णविराम लगाया जाता है। वाक्य के इसी सूचकांक को पूर्णविराम कहते हैं। जैसे-बिल्ली रास्ता काट गई। |
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अन्विति संबंधी अशुद्धियाँ बताइए। |
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Answer» वाक्य में प्रयुक्त पदों की परस्पर संगति स्थापित करना ही अन्विति है। इसके कई रूप होते हैं। अन्विति संबंधी कुछ अशुद्धियाँ निम्नलिखित हैं : 1. घोड़ा दौड़ते है। (अशुद्ध) 2. तुम, श्याम और मैं घूमने जाऊंगा। (अशुद्ध) 3. बालिकाओं ने कहा, वह घूमने जा रही हैं। (अशुद्ध) |
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द्विरुक्ति संबंधी अशुद्धियाँ बताइए। |
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Answer» एक ही अर्थवाले दो शब्दों का प्रयोग ‘द्विरुक्त’ कहा जाता है। इसका प्रयोग अशुद्ध माना जाता है। 1. कामपाल सबसे श्रेष्ठतम छात्र है। (अशुद्ध) 2. वह विलाप करते हुए रोने लगा। (अशुद्ध) 3. वह समय का अच्छा सदुपयोग करता है। (अशुद्ध) |
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कारक संबंधी अशुद्धियाँ बताइए। |
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Answer» वाक्य में कारक संबंधी अशुद्धियाँ देखी जाती हैं। यहाँ कारक संबंधी कुछ अशुद्धियाँ दी जा रही हैं : 1. मैंने नहीं जाना है। (अशुद्ध) 2. बच्चों ने नहीं सोया। (अशुद्ध) 3. प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने को कदम उठाया। (अशुद्ध) 4. हाथी की एक सूंड होती है। (अशुद्ध) |
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लिंग संबंधी अशुद्धियाँ बताइए। |
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Answer» क्रिया का लिंग कर्ता के अनुसार होता है। यहाँ लिंग संबंधी कुछ अशुद्धियाँ दी जा रही हैं। 1. उसने मीठी दही खाई। (अशुद्ध) 2. लड़कों ने मैच देखी। (अशुद्ध) 3. उसका छाती फूल गया। (अशुद्ध) 4. वह विद्वान महिला है। (अशुद्ध) 5. उसने करवट बदला। (अशुद्ध) |
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वचन संबंधी अशुद्धियाँ लिखिए। |
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Answer» वचन संबंधी कुछ अशुद्धियां निम्नलिखित हैं। 1. तीन घटना घटित हुई। (अशुद्ध) 2. लड़कियों ने कहा कि वह कमरे में बैठेंगी। (अशुद्ध) 3. उसका प्राण निकल गया। (अशुद्ध) |
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पदक्रम संबंधी अशुद्धियाँ बताइए। |
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Answer» वाक्य में पहले कर्ता, फिर कर्म और बाद में क्रिया लिखी जाती है। इसे पदक्रम कहते हैं। पदक्रम संबंधी कुछ अशुद्धियां निम्नलिखित हैं: 1. चल रहा है धीरे-धीरे वह। (अशुद्ध) 2. खा रहा है वह खाना। (अशुद्ध) 3. हमें शुद्ध गाय का दूध चाहिए। (अशुद्ध) 4. उनकी हिन्दी मातृभाषा नहीं थी। (अशुद्ध) |
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संयुक्त वाक्य किसे कहते हैं? |
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Answer» संयुक्त वाक्य, रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकारों में से एक है। जिस वाक्य में साधारण तथा मिश्र वाक्यों का अव्ययों के माध्यम से मेल होता हो, वहाँ संयुक्त वाक्य होता है। इसमें एक से अधिक उपवाक्य होते हैं। जैसे – ‘जैसे ही तुम गए, वह छत से कूदा और उसके पैर में चोट लग गई तभी मैं उसे लेकर अस्पताल गया।’ |
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प्रश्नवाचक वाक्य किसे कहते हैं? |
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Answer» प्रश्नवाचक वाक्य, अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेदों में से एक है। इस प्रकार के वाक्य में किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति से कुछ प्रश्न किया जाता है। इसे प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे – हरीश को आखिर क्या हो गया? अथवा क्या विद्यालय में आज अवकाश है? |
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मिश्र वाक्य किसे कहते हैं ? |
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Answer» मिश्र वाक्यरचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकारों में से एक है। जिस वाक्य में कोई अन्य उपवाक्य अथवा अंग वाक्य मिला हो, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। जैसे- मैं जानता हूँ कि वह अभी आया है। इस वाक्य में ‘मैं जानता हूँ’ साधारण वाक्य हैं तथा ‘वह अभी आया’ अंग वाक्य या उपवाक्य है। इस प्रकार दोनों के योग से बना यह वाक्य मिश्र वाक्य कहलाता है। मिश्र वाक्य में संज्ञा उपवाक्य, विशेषण उपवाक्य या क्रिया विशेषण उपवाक्य होते हैं। |
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निषेधवाचक वाक्य किसे कहते हैं ? |
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Answer» जिस वाक्य में क्रिया के न करने या न होने का कथन होता है, उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे- मैं गांव नहीं जाऊँगा। |
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विधेय किसे कहते हैं ? |
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Answer» वाक्य के उस खंड को, जिसमें उद्देश्य के विषय में प्रकाश पड़ता है, विधेय कहते हैं। जैसे- ‘मोहन दौड़ता है’ वाक्य में ‘दौड़ता है’ विधेय है। |
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उद्देश्य किसे कहते हैं ? |
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Answer» वाक्य के उस खंड को, जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उद्देश्य कहते हैं। जैसे – मोहन दौड़ता है वाक्य में ‘मोहन’ उद्देश्य है। |
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निम्नलिखित वाक्यों में सरल वाक्य है(क) सत्य बोलो और प्रगति प्राप्त करो(ख) सत्य बोलने वाले की सदा विजय होती है।(ग) जो सत्य बोलते हैं उनकी सदा जय होती है।(घ) कभी असत्य मत बोलो क्योंकि सत्य बोलना श्रेष्ठ है। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) सत्य बोलने वाले की सदा विजय होती है। |
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अब से ऐसी बात नहीं होगी’ में क्रिया-विशेषण है(क) ऐसी(ख) अब से(ग) नहीं(घ) ऐसी बात |
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Answer» सही विकल्प है (घ) ऐसी बात |
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कौन-से वाक्य में गुणवाचक विशेषण का प्रयोग किया गया है?(क) मेरे पास एक काला कुत्ता है(ख) बाज़ार से तीन किलो घी ले आओ |(ग) उसने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया(घ) वह लड़का कहाँ चला गया |
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Answer» सही विकल्प है (क) मेरे पास एक काला कुत्ता है। |
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कौन-से विकल्प में सभी सर्वनाम अनिश्चयवाचक हैं?(क) कुछ, किसी का, किन का, मैं(ख) किसी ने, किसे, क्या, हम ।(ग) किन्हीं ने, कोई, कुछ, जो(घ) कोई, कुछ, किसी की, किन्हीं की |
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Answer» सही विकल्प है (घ) कोई, कुछ, किसी की, किन्हीं की |
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कौन-से विकल्प में सभी शब्द भाववाचक संज्ञाएँ हैं?(क) अमीरी, दोस्ती, संस्कार, इंसानियत(ख) नारीत्व, दोस्त, बूढ़ा, यौवन(ग) युवक, गुरु, शठ, नेतृत्व(घ) वक्ता, स्वत्व, प्रयोग, सर्दी |
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Answer» सही विकल्प है (क) अमीरी, दोस्ती, संस्कार, इंसानियत |
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तद्भव शब्द क्या होते हैं? |
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Answer» जो शब्द मूल रूप से संस्कृत के होते हैं, किन्तु किंचित रूप परिवर्तन के साथ हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहा जाता है। |
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हिंदी का शब्द भंडार किस तरह निर्मित है? |
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Answer» हिन्दी भाषा संस्कृत के शब्दों पर आधारित है। इसमें अधिकांश शब्द संस्कृत भाषा से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं। कुछ शब्द पालि, प्राकृत और अपभ्रंश से लिए गए हैं। इसके अतिरिक्त हिन्दी भाषा में देशज, विदेशज तथा अनुकरणवाचक अनेक शब्दों को समाहित किया गया है। इस प्रकार विभिन्न माध्यमों से आए शब्दों से हिन्दी का शब्द-भंडार निर्मित है। |
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देशज शब्द किन शब्दों को कहा जाता है? |
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Answer» जिन शब्दों की व्युत्पत्ति का कुछ भी पता नहीं चलता और जो बहुत समय से भाषा में प्रयुक्त होते रहे हैं, ऐसे शब्दों को देशज शब्द कहते हैं। प्रायः ऐसे शब्दों का उद्गम जन-प्रांगण से होता रहता है जिनका निश्चित स्रोत ज्ञात नहीं हो पाता। व्यवहत भाषा के क्षेत्र में पैदा होने से इन्हें देशज कहा जाता है। |
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जो अव्यय शब्द वाक्य में किसी शब्द के बाद लगकर उसके अर्थ पर विशेष प्रकार का बल देते हैं, उन्हें कहते हैं-(क)निपात(ख) क्रिया-विशेषण(ग) संबंधबोधक(घ) समुच्चयबोधक |
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Answer» सही विकल्प है (क) निपात |
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क्रिया-विशेषण की उचित परिभाषा है-(क) वे संज्ञा शब्द जो विशेषण प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।(ख) वे सर्वनाम शब्द जो विशेषण की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।(ग) वे अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।(घ) वे सम्बन्ध बोधक शब्द जो विशेषण की विशेषता प्रकट करते हैं क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) वे अविकारी शब्द जो क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। |
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वाच्य को परिभाषित किया जा सकता है-(क) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता स्वयं कार्य न करके दूसरे से काम करवाता है, उसे वाच्य कहते हैं।(ख) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता दूसरे से कार्य न करवाकर स्वयं कार्य करता है, उसे वाच्य कहते हैं।(ग) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं।(घ) दो या दो से अधिक धातुओं के योग से बनी क्रियाओं को वाच्य कहते हैं। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव, उसे वाच्य कहते हैं। |
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Simplify:f' (x) = \(\lim\limits_{h\to0} \frac{tan(x+h) - tan x}{h}\) |
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Answer» f'(x) = \(\lim\limits_{h\to0} \frac {tan (x + h)- tan\, x}{h}\) \(\lim\limits_{h\to0} \frac {tan\,x + tan\,h}{\frac{1-tan\,x\, tan\,- tanx} {h}}\) (∴ tan (x + h) = \(\frac {tan\,x + tan\,h}{1-tan\,x\, tan\,h} \)) = \(\lim\limits_{h\to0} \frac {tan\,x+tan\,h-tan\,x+ tan^2x\,tan\,h}{h}\) = \(\lim\limits_{h\to0} \frac {tan\,h (1+tan^2x)}{h}\) = \(\lim\limits_{h\to0} \frac {tan\,h }{h} \)x (1 + tan2x) = 1 + tan2x (∴\(\lim\limits_{h\to0} \frac {tan\,h }{h} \)= 1) = Sec2x (∴1 + tan2x = sec2x) |
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ajjubhai0012.ANMOL.V |
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Answer» pro player hai questions hi answers hai |
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राष्ट्र का विशेषण है(क) राष्ट्रीय(ख) राष्ट्र(ग) राष्ट्रिकता(घ) राष्ट्रपन। |
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Answer» सही विकल्प है (क) राष्ट्रीय |
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हृदय का विशेषण है,(क) हृदयी(ख) हार्दिय(ग) हार्दिक(घ) हार्दित। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) हार्दिक |
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नगर का विशेषण है(क) नागर(ख) नागरिक(ग) नागर्कि(घ) नागार्कयी। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) नागरिक |
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निम्नलिखित में से किसी एक शब्द का विशेषण लिखिए1. बाहर, पंजाब।2. दिन, धन।3. बुद्धि, शहर। |
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Answer» 1. बाहर = बाहरी 2. दिन = दैनिक 3. बुद्धि = बुद्धिमान |
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विशेषण किसे कहते हैं? |
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Answer» जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता व्यक्त होती है, उन्हें विशेषण कहते हैं; जैसेभोली राधा चतुर कृष्ण की बातों में आ गई। इस वाक्य में भोली राधा का तथा चतुर कृष्ण का विशेषण है। |
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निम्न परिच्छेद पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए :मनुष्य को जीने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती हैं। वायु, जल तथा खुराक। इनके बिना मानव जी नहीं सकता। इनके साथ-साथ तन्दुरुस्ती के लिए व्यायाम की भी आवश्यकता होती है। इनके अलावा मनुष्य के जीवन में मनोरंजन का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।1. मनुष्य को जीने के लिए कितनी चीजों की आवश्यकता होती है?2. मानव किन-किनके बिना जी नहीं सकता?3. तन्दुरुस्ती के लिए किसकी आवश्यकता होती है?4. जीवन में किसका स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण होता है? |
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Answer» 1. मनुष्य को जीने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता है। 2. मानव वायु, जल तथा खुराक के बिना जी नहीं सकता। 3. तंदुरुस्ती के लिए व्यायाम की आवश्यकता होती है। 4. जीवन में मनोरंजन का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है। |
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मूल रूप से कौन-से शब्द विशेषण हैं? |
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Answer» मूल रूप से विशेषण शब्द अच्छा, कोमल, बुरा, लाल, पीला, विद्वान, पुराना, कठोर, नया, निपुण, मज़बूत आदि हैं। |
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गद्यांश को पढ़कर निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखिए :प्रत्येक स्वतंत्र देश का अपना राष्ट्रीय झंडा होता है। देश के सभी निवासी अपने झंडे का गौरव बनाये रखना अपना कर्तव्य समझते हैं। वे उसके नीचे उन्नति के पथ पर बढ़ते है, उसे अपने देश तथा राष्ट्र की महानता का प्रतीक समझते हैं और उसके गौरव की रक्षा के लिए हँसते हुए अपने प्राण तक न्योछावर कर देते हैं।1. प्रत्येक स्वतंत्र देश का क्या होता है?2. देश के निवासी किसे अपना कर्तव्य समझते हैं?3. वे झंडे को क्या समझते हैं?4. झंडे के गौरव की रक्षा के लिए क्या करना हैं? |
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Answer» 1. प्रत्येक स्वतंत्र देश का अपना राष्ट्रीय झंडा होता है। 2. देश के निवासी अपने झंड़े का गौरव बनाये रखना अपना कर्तव्य समझते हैं। 3. वे झंडे को राष्ट्र की महानता का प्रतीक समझते हैं। 4. हमें झंडे के गौरव की रक्षा के लिए हँसते हुए अपने प्राण तक न्योछावर करना हैं |
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गद्यांश को पढ़कर निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखिए :एक समुद्री डाकू था। उसे बड़ा घमंड था कि वह समुद्र के सभी मार्गों की जानकारी रखता है। समुद्र में एक चट्टान पर खतरे की सूचना देने के लिए एक झंडी गड़ी थी। डाकू ने उसे उखाड़ कर फेंक दिया। उसने सोचा कि इससे दूसरों को हानि होगी। मगर एक दिन खुद उसका अपना जहाज़ तेज गति से आकर पानी में छिपी उस चट्टान से टकरा कर चूर-चूर हो गया। डाकू अपनी करनी पर पछताता हुआ डूबकर मर गया। सच है, जैस करनी वैसी भरनी।1. खतरे को सूचित करने के लिए क्या किया गया था?2. डाकू ने क्या किया?3. जहाज़ चट्टान से क्यों टकराया?4. परिणाम क्या हुआ? |
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Answer» 1. खतरे को सूचित करने के लिए एक चट्टान पर एक झंडी गड़ी थी। 2. डाकू ने झंडी उखाडकर फेंक दिया। 3. झंडी नहीं होने से डाकू को चट्टान का पता न चला। जहाज चट्टान से टकरा गया। 4. जहाज के साथ साथ डाकू भी डूबकर मर गया। |
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