This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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‘कविता के पंख लगा उड़ने’ से कवि को क्या आशय है? |
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Answer» चिड़िया उड़ने के लिए अपने पंखों का सहारा लेती है। कवि अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए कल्पना की सहायता लेता है। वह कविता में अपने भावों को व्यक्त करता है। चिड़िया अपने भौतिक पंखों की सहायता से केवल सीमित दूरी तक उड़ान भर सकती है, किन्तु कवि कल्पना के पंखों के सहारे तो ब्रह्माण्ड में उड़ान भरा करता है। |
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कवि पर तमाशबीनों की वाह-वाही का क्या प्रभाव पड़ रहा था? |
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Answer» कवि वाह-वाह करने वालों से प्रभावित होकर भाषा को और अधिक आडम्बरपूर्ण बनाए जा रहा था। |
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टेढ़ी हँस जाने का आशय क्या है? |
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Answer» टेढ़ी हँस जाने का आशय है बात को क्लिष्ट या आडम्बरपूर्ण भाषा द्वारा व्यक्त करना कवि को कठिन हो गया। |
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पेंच को खोलने तथा कसने का क्या तात्पर्य है ? |
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Answer» पेंच के उदाहरण द्वारा कवि ने कथ्य (बात) और भाषा के परस्पर सम्बन्ध पर प्रकाश डाला है। अच्छी कविता के लिए आवश्यक है कि सही बात के लिए सही शब्दों का चुनाव किया जाए। बात को जब बलपूर्वक अनुपयुक्त भाषा द्वारा कहने की कोशिश की जाती है तो बात बिगड़ जाती है। पेंच को कसने और ढीला करने का आशय है बात पर भाषा को बलपूर्वक थोपना। |
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कील की तरह ठोंकने का आशय क्या है? |
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Answer» भाव को जबरदस्ती कठिन भाषा द्वारा व्यक्त किए जाने की चेष्टा करना। |
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कविता के बहाने’ शीर्षक कविता का प्रतिपाद्य/कथ्य/उद्देश्य क्या है? |
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Answer» इस कविता में कविता के भविष्य पर विचार किया गया है। कवि ने चिड़िया, फूल और बच्चों के उदाहरण देकर कहा है। कि कविता की उड़ान असीम होती है। उसकी गंध कभी समाप्त नहीं होती। वह बच्चों के खेल की तरह सबको सदा आनन्ददायक होती है। अत: कविता पर कोई संकट नहीं आ सकता। कवि काव्य-प्रेमियों को कविता के सुखद भविष्य के बारे में आश्वस्त करना चाहता है। |
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| 7. |
“सहूलियत से बरतना” का अर्थ है –(क) बहुत सावधानी से प्रयोग करना(ख) सुविधानुसार प्रयोग में लाना(ग) धैर्य और सरलता से काम में लाना(घ) अधिक महत्व न देना |
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Answer» (ग) धैर्य और सरलता से काम में लाना |
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कवि के हृदय के भावों ने उस पर क्या व्यंग्य किया? |
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Answer» भावों ने व्यंग्यपूर्वक कहा कि उसे ‘बात’ को सहज-सरल भाषा में व्यक्त कर पाने की तमीज इतनी काव्य-रचना करने पर भी नहीं आई थी। |
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“करतब’ शब्द में है –(अ) प्रशंसा(ब) निन्दा(स) व्यंग्य(द) उपेक्षा |
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Answer» “करतब’ शब्द में है व्यंग्य। |
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| 10. |
‘बात और भी पेचीदा होती चली गई–से कवि का तात्पर्य क्या है? |
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Answer» कवि कविता में सरल मनोभावों को व्यक्त करना चाहता था किन्तु अस्वाभाविक क्लिष्ट भाषा के कारण उसे सफलता नहीं मिल रही थी। वह भाषा को संशोधित करता तो वह और अधिक दुरूह हो जाती थी। इसके साथ ही उसका कथ्य (बात) भी अस्पष्ट और प्रभावहीन हो जाता था। |
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| 11. |
पेंच को कील की तरह ठोंकने का क्या परिणाम हुआ? |
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Answer» कील की तरह ठोंकने से पेंच ऊपर से तो ठीक-ठाक लगने लगा, लेकिन भीतर उसका कसाव और ताकत दोनों नष्ट हो गईं। |
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| 12. |
‘बात सी थी पर’ कविता द्वारा कवि क्या कहना चाहता है? |
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Answer» ‘बात सीधी सी थी पर कविता द्वारा कवि कहना चाहता है कि सरल बात को कहने के लिए कवि को आडम्बरपूर्ण भाषा से बचना चाहिए। |
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| 13. |
‘बात की चूड़ी मर गई’ में कवि ने क्या व्यंजित किया है? |
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Answer» ‘बात की चूड़ी मर गई’ में कवि के कथनं के प्रभावहीन होने की व्यंजना है। बात की तुलना पेंच से की गयी है। बात को अस्वाभाविक भाषा में व्यक्त करने के प्रयास में वह प्रभावशून्य हो गई और कवि का कथन पाठकों की समझ से बाहर हो गया। |
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| 14. |
बाहर से कसाब तथा ताकत किसमें नहीं थी तथा क्यों? |
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Answer» सरल बात दिखावटी भाषा में बलपूर्वक व्यक्त की गई थी। उससे कवि का कथन मर्मस्पर्शी तथा प्रभावशाली नहीं बन पड़ा था। लकड़ी में हथौड़े से कील की तरह बलपूर्वक ठोंके गए पेंच की तरह कवि का कथन भी मनोभावों की प्रकट करने में समर्थ नहीं था। |
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| 15. |
कवि ने बात को महत्व न देकर भाषा को महत्व दिया। ऐसा उसने क्यों किया होगा? अनुमान के आधार पर बताइए। |
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Answer» कवि को लगा होगा कि भाषा को चमत्कारपूर्ण बनाने से उसकी कविता की अधिक प्रशंसा होगी। पाठकों की वाहवाही पाने के चक्कर में उसने भावों को बलात् भाषा में बिठाने की कोशिश की। कवि ने इस बात का संकेत भी “इस….. शाबाशी और वाह-वाह।” पंक्तियों में स्वयं किया है। अतः यहाँ किसी प्रकार के अनुमान की आवश्यकता ही नहीं है। |
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| 16. |
अपनी असफलता पर कवि की क्या दशा हुई ? |
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Answer» कवि के समस्त प्रयास निरर्थक सिद्ध हुए। वह वांछित भावों को अपनी कविता में प्रकट न कर सका। भाषा की क्लिष्टता ने भावाभिव्यक्ति को भी दुरूह बना दिया। इससे वह निराश हो उठा। उसके माथे पर पसीने की बूंदें प्रकट हो उठीं। वह परेशान होकर बार-बार पसीना पोंछने लगा। |
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| 17. |
“बात सीधी थी पर…………….. पेचीदा होती चली गई।” इस काव्यांश में कवि ने बात के पेचीदा हो जाने का क्या कारण बताया है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कवि एक सीधी सी बात कहना चाहता था पर वह बात को भारी-भरकम बनाने के चक्कर में पड़ गया। वह चाहता था कि उसका कथन बड़े प्रभावशाली रूप में सामने आए। परन्तु इस बेतुके प्रयास में उसकी ‘बात’ भाषा के दिखावे के कारण अस्पष्ट रह गई। उसने बात को स्पष्ट करने के लिए भाषा पर तरह-तरह के प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिया। उसकी शब्दावली को आगे-पीछे किया। शब्दों को तोड़ा-मरोड़ा, उन्हें इधर से उधर रख कर देखा। असल में कवि चाह रहा था कि या तो बात इस तरह स्पष्ट हो जाए या फिर वह भाषा के दबाव से बाहर आ जाए। लेकिन हुआ उल्टा। जितना-जितना कवि ने भाषा में बदलाव लाने की चेष्टा की बात’ उतनी ही अस्पष्ट होती चली गई। कवि के कहने का आशय यह है कि सीधी-सादी बात को सीधे-सादे शब्दों के द्वारा कहा जाना ही ठीक रहता है। जब कोई शब्दों के आडम्बर का प्रयोग करता है तो वह अपना आशय सही रूप में दूसरों तक नहीं पहुँचा पाता है। |
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| 18. |
‘बात सीधी थी पर’ का प्रतिपाद्य/कथ्य/उद्देश्य क्या है? |
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Answer» कविता में भावों के अनुरूप सरल भाषा का प्रयोग ही उचित होता है। यह बताना ही कविता का प्रतिपाद्य है। कवि का संदेश है कि सरल भावों तथा विचारों को व्यक्त करने के लिए सरल भाषा ही उपयुक्त होती है। लोगों की प्रशंसा पाने के लालच में तथा पांडित्य-प्रदर्शन के इरादे से भाषा को दुरूह बनाना ठीक नहीं है। ऐसा करने से कथन का प्रभाव नष्ट हो जाता है तथा पाठक और श्रोता को काव्य के रस का स्वाद नहीं मिलता। |
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‘क्या तुमने भाषा को सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा’-इस कथन में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» इस कथन द्वारा कवि उन साहित्यकारों पर व्यंग्य कर रहा है जो सीधी-सच्ची बात को कहने के लिए चमत्कारपूर्ण भाषा का सहारा लेते हैं तथा अपने इस प्रयास द्वारा भावों के सौन्दर्य को क्षति पहुँचाते हैं। कवि कहना चाहता है कि अच्छी कविता का गुण सरलता ही होता है। अतः भाषा के चक्कर में उसे हानि नहीं पहुँचानी चाहिए। |
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‘बात को कील की तरह ठोंकना’ से कवि का क्या अभिप्राय है ? इससे कथ्य पर क्या प्रभाव पड़ा? |
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Answer» ‘बात को कील की तरह ठोंकना’ से कवि का अभिप्राय अपनी बात को अनुपयुक्त भाषा में बलपूर्वक व्यक्त करने से है। पेंच को लकड़ी में हथौड़े से कील की तरह ठोंकने से उसकी पकड़ में कसावट नहीं आती। कवि ने भावों को अनुपयुक्त क्लिष्ट भाषा में प्रकट करने की जोर-जबरदस्ती की तो कविता का मर्म ही नष्ट हो गया। कविता में प्रकट भाव पाठकों की समझ से बाहर हो गए। |
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“कविता एक खेल है …………. बच्चा ही जाने।” इस काव्यांश में कवि कविता को बच्चों के खेल के समान कैसे सिद्ध किया है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» इस काव्यांश में कवि ने कविता को बच्चों के खेल के समान बताया है। बच्चों के खेलने का अंदाज कविता के खेल की तरह ही है। बच्चे जब खेलने निकलते हैं तो वे इस पर ध्यान ही नहीं देते कि वे किस घर से किस घर में खेलने जा रहे हैं। बच्चों के मन में अपना-तेरा का भाव नहीं होता। इसी प्रकार जब कवि की कल्पना के सहारे कविता खेलने निकलती है तो वह भी बिना किसी भेद-भाव के घरों और देशों की सीमा में बँध कर नहीं रहती। कविता मुक्त भाव से सभी को अपना आनन्द लुटाया करती है। कविता किसी देश के कवि की हो वह सभी देशों में आदर और प्रेम पाया करती है। |
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‘बात के भाषा में बेकार घूमने’ से कवि का क्या आशय है? |
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Answer» आशय यह है कि क्लिष्ट तथा बनावटी भाषा में व्यक्त होने के कारण कविता प्रभावहीन हो गई। श्रोता तथा पाठक उसे समझ नहीं सके। कवि का प्रयास भी असफल हो गया। दुरूह भाषा में भावाभिव्यक्ति असंभव हो गई। |
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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।बात सीधी थी पर एक बारभाषा के चक्कर मेंजरा टेढ़ी हँस गई।उसे पाने की कोशिश मेंभाषा को उलटा-पलटातोड़ा मरोड़ा।घुमाया फिरायाकि बात या तो बने।या फिर भाषा से बाहर आएलेकिन इससे भाषा के साथ-साथबात और भी पेचीदा होती चली गई। |
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Answer» कठिन-शब्दार्थ-बात = कथ्य, संदेश। सीधी = सरल। चक्कर = उलझन, इच्छा। टेढ़ी फंस गई = उलझ गई, अस्पष्ट होती गई। . उसे पाने = बात को स्पष्ट करने। उलट-पलटी = बदला। तोड़ा-मरोड़ा = नए-नए ढंग से कहना चाहा। घुमाया-फिराया = बदल-बदल कर देखा। बने = स्पष्ट हो जाय। बाहर आए = भाषा की क्लिष्टता से मुक्त हो जाए। पेचीदा = पेंच के समान घुमावदार, अस्पष्ट। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि कुंवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी पर’ से लिया गया है। कवि इस अंश में उन रचनाकारों पर मधुर व्यंग्य कर रहा है, जो अपनी कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए क्लिष्ट भाषा का प्रयोग किया करते हैं। व्याख्या-कवि कहता है कि वह जो बात पाठकों तक पहुँचाना चाहता था वह बिल्कुल सीधी और सरल थी परन्तु वह उसे प्रभावपूर्ण भाषा में व्यक्त करना चाहता था। भाषा को आकर्षक बनाने पर अधिक ध्यान देने के कारण कथ्य की सरलता ही नष्ट हो गई। वह अस्पष्ट होती चली गई। कवि ने बात की सरलता को नष्ट होने से बचाने के लिए भाषा में संशोधन किया, शब्दों को बदला और वाक्य रचना में फेर-बदल किया। उसने प्रयास किया कि बात की सरलता बनी रहे तथा भाषा की क्लिष्टता और दिखावटी स्वरूप से छुटकारा मिले परन्तु इससे बात व भाषा और अधिक उलझती चली गई। विशेष- |
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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।कविता एक खेल है बच्चों के बहानेबाहर भीतरयह घर, वह घरसब घर एक कर देने के मानेबच्चा ही जाने। |
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Answer» कठिन-शब्दार्थ-एक कर देना = भेद-भाव मिटा देना। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि कुँवर नारायण की कविता ‘कविता के बहाने’ से लिया गया है। कवि कविता की तुलना बच्चों के खेल से कर रही है। व्याख्या-कवि कहता है कि कविता बच्चों के खेल के समान है। बच्चे घर के बाहर तथा अन्दर एक घर से दूसरे घर तक बेरोक-टोक खेलते हैं। वे अपने खेल द्वारा सभी घरों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। खेल द्वारा सभी भेदभावों को मिटाकर सच्ची एकता पैदा करने की क्षमता बच्चों में ही होती है। कविता भी बच्चों के खेल की तरह ही है। कवि अनेक भावों और विचारों की कल्पना करके उनके साथ खेलता है। उसकी कविता का प्रभाव सभी श्रोताओं तथा पाठकों पर होता है। कविता का आनन्द देश-काल की सीमाओं में नहीं बँधता। सच्ची कविता सभी कालों में तथा सभी देशों में लोगों को प्रभावित करती है। दूरियाँ मिटाकर संसार में वास्तविक एकता कविता ही ला सकती है। विशेष- |
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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।कविता एक खिलना है फूलों के बहानेकविता का खिलना भला फूल क्या जाने!बाहर भीतर इस घर, उस घर बिनामुरझाए महकने के माने फूल क्या जाने? |
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Answer» कठिन-शब्दार्थ- खिलना = फूल का खिलना, कविता का आनंदमय प्रभाव। बाहर, भीतर = सीमित स्थान में, (कविता के पक्ष में), सर्वत्र। इस घर, उस घर = अपने देश में और विदेशों में। बिना मुरझाए = सदा एक जैसा आनंद देते हुए। महकना = (फूल के पक्ष में) सुगंध बिखेरना (कविता के पक्ष में) आनंदित करना, प्रभावित करना। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत.काव्याशं हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि कुँवर नारायण की कविता ‘कविता के बहाने से लिया गया है। कवि कविता की तुलना फूल और उसकी सुगंधि से कर रहा है– व्याख्या-कविता और फूल दोनों ही खिलते हैं, आनंददायक प्रभाव व्यक्त करते हैं, किन्तु कविता के खिलने की तुलना फूल के खिलने से नहीं की जा सकती। फूल जब खिलता है तो उसकी सुगन्ध उसके निकटवर्ती स्थान तक ही फैलती है। कविता के सरस प्रभाव की कोई सीमा नहीं है। कविता का रसात्मक आनन्द समस्त विश्व को सुख देता है। कुछ दिनों के बाद फूल मुरझा जाता है और उसकी सुगन्ध भी नष्ट हो जाती है, किन्तु कविता की सरसता अनन्त काल तक सम्पूर्ण संसार को आनन्द का अनुभव कराती रहती है। विशेष- |
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‘बात सीधी सी थी पर कविता के विषय पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» इस कविता में कवि ने बताया है कि सीधे-सरल विषय या भाव को सीधी-सरल भाषा के द्वारा ही व्यक्त किया जाना चाहिए। सही भाषा ही कविता की लोकप्रियता का आधार होती है। कवि ने एक बार अपनी सीधी-सी बात कहने के लिए भाषा की सजावट पर अधिक ध्यान दिया। इससे कवि की बात की सहजता समाप्त हो गई। तक कवि ने भाषा को तोड़ा-मरोड़ा, उसमें बदलाव किया। अंत में स्थिति ऐसी आ गई कि कवि उल्टे प्रयत्नों से उसकी बात की सुगमता ही समाप्त हो गई। तभी उसे यह समझ में आया कि सीधी-सी बात को सीधी-सरल भाषा द्वारा ही व्यक्त किया जाना चाहिए। |
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'कविता के बहाने’ कविता का वर्य विषय क्या है? |
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Answer» ‘कविता के बहाने’ कविता के वर्णन का विषय है-कविता का सुरक्षित भविष्य। कवि ने इस आशंका को निर्मूल बताया। है कि भौतिकवादी दृष्टि से बढ़ने से कविता की उपेक्षा हो जाएगी। |
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