Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

मियौं नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है ?

Answer»

मियाँ नसीरुद्दीन छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं । उन्हें ‘बाकरखानी – शीरमाल – ताफ़तान – बेसनी – खमीरी – रूमाली – गाव – दीदा – गाजेबान – तुनकी’ आदि प्रकार की रोटियाँ बनाने की कला आती है । यह उनका खानदानी पेशा है । यह कला उन्होंने अपने पिता से सीखी थी। उनकी रोटियाँ तुनकी पापड़ से भी ज्यादा महीन होती हैं।

मियाँ नसीरुद्दीन अपने शागिर्दो का भी खूब ध्यान रखते हैं । वे उन्हें समय पर उचित वेतन भी देते हैं। इसी प्रकार, मियाँ नसीरुद्दीन के रोटियाँ बनाने की कला तथा उनके पेशे के प्रति समर्पण देखकर लेखिका बहुत प्रसन्न होती है । इसलिए उन्हें नानबाइयों का मसीहा कहा जाता है।

2.

मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगी ?

Answer»

इस पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन की जो बातें अच्छी लगी, वो निम्नांकित हैं :

अपने पेशे के प्रति समर्पण। मियाँ नसीरुद्दीन नान बनाने के लिए मशहूर हैं । वे अपने इस पेशे को कला समझाकर मन लगाकर सीखते हैं । लेखिका से भी बातें करते हुए भी वे अपने काम पर से ध्यान नहीं हटाते हैं। उनमें आत्मविश्वास का गुण गजब का था। ये छप्पन तरह की रोटियाँ बनाने में कुशल थे।

अपने यहाँ काम करनेवाले सिखाऊ शागिर्दो का शोषण नहीं करते थे। काम भी सिखाते थे और उन्हें पैसे भी देते थे । वे तालीम की तालीम को महत्त्व देते थे अर्थात् हुनर सीखने के बाद उसे अच्छी तरह से विकसित भी करना । वे अपने साथ काम करनेवालों का सम्मान करते हैं।

3.

‘मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देखकर यह मज़मून न छेड़ने का फैसला किया’ – इसके पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए।

Answer»

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के खानदान और उनसे संबंधित सभी जानकारी प्राप्त करना चाहती थी । लेकिन मियाँ लेखिका के सवालों से ऊब चुके थे । उन्हें लगता था कि पत्रकार लोग निठल्ले होते हैं । बादशाहवाले प्रसंग में लेखिका के यह पूछने पर कि उन्होंने बादशाह को कौन-सा पकवान बना कर खिलाया था ? मियाँ ने बातचीत को टाल दिया । उनकी आवाज में रुखाई आ गई।

लेखिका ने जब यह पूछा कि कौन से बादशाह के यहाँ काम करते थे ? तो मियाँ खीझ उठे । उन्होंने अपने कारीगर को आवाज़ लगाई और बोले – ‘अरे ओ बब्बन मियाँ, भट्टी सुलगा लो तो काम से निबटें ।’ लेखिका उनके बेटे-बेटियों के बारे में पूछना चाहती थीं लेकिन मियाँ के चेहरे में आये भाव से उन्हें समझ में आ गया कि अगर वो इससे ज्यादा कुछ ओर पूडेंगी तो शायद वो उन्हें जाने के लिए कह देंगे । इसीलिए उन्होंने इस मज़मून को न छेड़ना ही उचित समझा।

4.

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं ?

Answer»

लेखिका एक दिन दुपहर के समय जामा मस्जिद के आड़े पड़े मटियामहल के गढ़ेया मुहल्ले की ओर निकल गई । उन्होंने एक निहायत मामूली अँधेरी-सी दुकान पर पटापट आटे का ढेर सनते देख्न रुक गईं । उन्होंने सोचा, सेवइयों की तैयारी हो रही होगी, पर पूछने पर मालूम हुआ कि वह तो खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान है । लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास उनके हुनर को जानने के लिए गई थीं । उन्होंने मियाँ के बारे में बहुत कुछ सुना था । एक पत्रकार होने के नाते वह उनकी कला के बारे में जानकारी प्राप्त करके उन्हें प्रकाशित करना चाहती थीं।

5.

बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियों नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी ?

Answer»

मियाँ नसीरुद्दीन ने जब लेखिका को अपने बुजर्गों के किस्सों को सुनाया कि किस तरह मियाँ नसीरुद्दीन के बुजुर्ग बादशाह के यहाँ नानबाई का काम करते थे और बादशाह सलामत उनके हुनर को सराहते थे तब लेखिका ने बादशाह का नाम पूछा। मियाँ नसीरुद्दीन ने सारे किस्से बुजुर्गों के मुँह से सुने थे।

सच्चाई यह थी कि उन्होंने कभी किसी बादशाह के यहाँ काम किया ही नहीं था । तभी तो वो लेखिका के पूछने पर बता नहीं सके कि उन्होंने बादशाह के यहाँ कौन-सा पकवान बनाया था । इसलिए बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी कम होने लगी।

6.

‘तालीम की तालीम ही बड़ी चीज होती है’ – यहाँ लेखिका ने ‘तालीम’ शब्द का दो बार प्रयोग किया है? क्या आप दूसरी बार आए ‘तालीम’ शब्द की जगह कोई अन्य शब्द रख सकते हैं? लिखिए।

Answer»

‘तालीम की तालीम ही बड़ी चीज होती है’ इस वाक्य में पहली बार आए ‘तालीम’ शब्द का अर्थ है शिक्षा (प्रशिक्षण) तथा दूसरी बार आए ‘तालीम’ शब्द का अर्थ है आचरण करना, तद्नुसार व्यवहार में लाना । उपरोक्त वाक्य को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है – ‘तालीम का अनुकरण ही बड़ी चीज़ होती है ।’

7.

मियाँ नसीरुद्दीन के मन में कौन-सा दर्द छिपा है ?

Answer»

मियाँ नसीरुद्दीन को लोगों की बदलती रुचि से दुख है । पहले लोग कला की कद्र करते थे । वे पकानेवाले का सम्मान भी करते थे । अब जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है। कमाने के साथ चलने की होड़ मची है । ऐसे में खानेवाले और पकानेवाले दोनों ही जल्दी में हैं । इस दृष्टिकोण के कारण देश की पुरानी कलाएँ दम तोड़ रही हैं।

8.

‘उतर गए वे ज़माने । और गए वे कद्रदान जो पकाने-खाने की कद्र करना जानते थे। मियाँ अब क्या रखा है…. निकाली तंदूर से – निगली और हज़म ।’ वाक्य में निहित मर्म को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

उपरोक्त पंक्तियों में मियाँ नसीरुद्दीन आज की पीढ़ी पर व्यंग्य कर रहे हैं । पहले के समय में जब मियाँ नसीरुद्दीन के पूर्वज बादशाह के दरबार में नानबाई का काम करते थे तब बादशाह उनके हुनर की कद्र भी करते थे और तारीफ़ भी किया करते थे । आज के समय में ऐसा कुछ भी नहीं रह गया है।

मियाँ नसीरुद्दीन छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं पर उसका क्या मतलब जब लोगों के पास समय ही नहीं रह गया कि ये उस हुनर की सराहना करें । सभी बस, खाने में ही व्यस्त रहते हैं । इसलिए मियाँ नसीरुद्दीन गहरी सोच में डूब जाते हैं और उनके मुँह से यह वाक्य निकलता है कि ‘उतर गए वो जमाने । और गए वे कद्रदान जो पकाने-खाने की कद्र करना जानते थे । मियाँ अब क्या रखा है…… निकाली तंदूर से : निगली और हज़म ।’

9.

पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है ?

Answer»

लेखिका जब मटियामहल के गढ़ेया मुहल्ले की ओर से निकली तब वे खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान पर पहुँची । मियाँ नसीरुद्दीन छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं । लेखिका जब अंधेरी-सी दुकान के अंदर झाँकती हैं तब वह देखती हैं कि मियाँ नसीरुद्दीन चारपाई पर बैठे बीड़ी का मजा ले रहे हैं । मौसमों की मार से पका चेहरा, आँखों में काइयाँ भोलापन और पेशानी पर मँजे हुए कारीगर के तेवर । इस प्रकार लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र पाठ में किया है।

10.

पंचहजारी अंदाज से क्या अभिप्राय है ?

Answer»

पंचहजारी अंदाज का अर्थ बड़े सेनापतियों जैसा अंदाज। मुगलों के समय में पाँच हजार सिपाहियों के अधिकारी को पंचहजारी कहते थे। यह ऊँचा पद होता था। नसीरुद्दीन में भी उस पद की तरह गर्य व अकड़ था।

11.

मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान कहाँ स्थित थी ?

Answer»

मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान जामा मस्जिद के पास मटियामहल के गया मुहल्ले में थी।

12.

“मियाँ, कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो ? यह तो खोडियों की खुराफ़ात है’ – अखबार की भूमिका को देखते हुए इस पर टिप्पणी करें।

Answer»

पत्रकारिता के बारे में मियाँ नसीरुद्दीन के विचार दो प्रकार से समझे जा सकते हैं। पहला पक्ष सकारात्मक अर्थ में समझा जा सकता है, जिसमें अखबार की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । इसमें आविष्कारों और सूचनाओं से जनता को अवगत कराया जाता है और इससे प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है। नये तथ्य और सत्य सामने आते हैं।

लोगों में जागरूकता बढ़ती है। दूसरे पक्ष को नकारात्मक अर्थ में समझा जा सकता है, जिसमें खबरों में बढ़ा-चढ़ाकर लोगों तक पहुँचाया जाता है। सनसनी तथा खलबली फैलानेवाले समाचारों को छापा जाता है। जिसमें उनकी लोकप्रियता बढ़े तथा अच्छी बिक्री हो। मगर कई बार सनसनीखेज समाचारों से समाज में अंधाधुंधी और अराजकता फैल जाती है।

13.

तुनकी क्या है ? उसकी विशेषता बताइए।

Answer»

तुनकी विशेष प्रकार की रोटी है। यह पापड़ से भी अधिक पतली होती है।

14.

मियाँ ने किन-किन खानदानी व्यवसायों का उदाहरण दिया ? क्यों ?

Answer»

मियाँ ने नगीनासाज, आईनासाज, मीनासाज, रफूगर, रंगरेज व तेली-तंबोली व्यवसायों का उदाहरण दिया। उन्होंने लेखिका को समझाया कि इन लोगों के पास नानबाई का ज्ञान नहीं है। खानदानी पेशे को अपने बुजुर्गों से ही सीखा जाता है।

15.

मियाँ किस बात से भड़क उठे ?

Answer»

मियाँ ने बताया कि उनके पूर्वज बादशाह के नानबाई थे तो लेखिका ने उनसे बादशाह का नाम पूछा। इस बात पर वे भड़क उठे।

16.

मियाँ ने नानबाई का काम क्यों किया ?

Answer»

मियाँ ने नानबाई का काम किया, क्योंकि यह उनका खानदानी पेशा था। इनके पिता व दादा मशहूर नानबाई थे। मियाँ ने भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया।

17.

‘बाकरखानी’ किसका प्रकार है ?(a) रोटी(b) बिरयानी(c) पुलाव(d) सब्जी

Answer»

सही विकल्प है (a) रोटी

Previous Next