This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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बहुदलीय प्रणाली की प्रमुख (चार) विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» बहुदलीय प्रणाली की प्रमुख (चार) विशेषताएँ निम्नवत् हैं- ⦁ मतदाताओं को अधिक स्वतन्त्रता – जहाँ दलों की संख्या अधिक होती है, वहाँ मतदाताओं को स्वाभाविक रूप से चयन की अधिक स्वतन्त्रता प्राप्त रहती है, क्योंकि वे कई दलों में से अपने ही समान विचार रखने वाले किसी दल का समर्थन कर सकते हैं। |
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राजनीतिक दलों से आप क्या समझते हैं? लोकतन्त्र में इनका क्या महत्त्व है? यालोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की क्या उपयोगिता है? क्या अधिक राजनीतिक दल होने से लोकतन्त्र अधिक सुदृढ़ हो सकता है। दो तर्क देकर समझाइए।याराजनीतिक दल से आप क्या समझते हैं? प्रजातन्त्रात्मक प्रणाली में राजनीतिक दलों के महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए। यालोकतन्त्र (प्रजातन्त्र) में राजनीतिक दलों का महत्त्व संक्षेप में बताइए। |
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Answer» राजनीतिक दल का अर्थ प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का महत्त्व राजनीतिक दलों के महत्त्व के सम्बन्ध में मैकाइवर ने ठीक ही कहा है, “बिना दलीय संगठन के किसी सिद्धान्त का एक होकर प्रकाशन नहीं हो सकता, किसी भी नीति का क्रमबद्ध विकास नहीं हो सकता, संसदीय चुनावों की वैधानिक व्यवस्था नहीं हो सकती और न ऐसी मान्य संस्थाओं की ही व्यवस्था हो सकती है, जिनके द्वारा कोई भी दल शक्ति प्राप्त करता है।” साधारणतया एक देश के विधान या कानून में राजनीतिक दलों का उल्लेख नहीं होता है, किन्तु व्यवहार में इन राजनीतिक दलों का अस्तित्व भी उतना ही आवश्यक और उपयोगी होता है जितना कि विधान या कानून। अमेरिकी संविधान-निर्माता किसी भी रूप में अपने देश में राजनीतिक दलों को पनपने नहीं देना चाहते थे, लेकिन संविधान को कार्यरूप प्राप्त होते ही दलीय संगठन अमेरिकी राजनीतिक जीवन की एक प्रमुख विशेषता बन गये और वर्तमान समय में राजनीतिक दलों की कार्य-व्यवस्था का अध्ययन किये बिना अमेरिकी शासन-व्यवस्था के यथार्थ रूप का ज्ञान प्राप्त करना नितान्त असम्भव ही है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है। कि आधुनिक राजनीतिक जीवन के लिए दलीय संगठनों का बड़ा महत्त्व है और इनके बिना लोकतन्त्र की सफलता सम्भव ही नहीं है। बर्क के शब्दों में, “दल प्रणाली, चाहे वह पूर्णरूप से भले के लिए या बुरे के लिए, प्रजातन्त्रात्मक शासन-व्यवस्था के लिए अनिवार्य है। इसी प्रकार लॉर्ड ब्राइस लिखते हैं कि, “राजनीतिक दल अनिवार्य है। कोई स्वतन्त्र देश उसके बिना नहीं रह सका है। कोई भी यह नहीं बता सका है कि प्रतिनिधि सरकार किस प्रकार उसके बिना चलायी जा सकती है।” |
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एकदलीय प्रणाली पर टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» एकदलीय प्रणाली इस एकदलीय प्रणाली को कभी तो संविधान से ही मान्यता प्राप्त होती है, जैसे कि पूर्व सोवियत संघ और अन्य साम्यवादी राज्यों के संविधानों में साम्यवादी दल का उल्लेख करते हुए अन्य दलों के संगठन का निषेध कर दिया गया था। अनेक बार ऐसा होता है कि संविधान के द्वारा तो अन्य राजनीतिक दलों का निषेध नहीं किया जाता, लेकिन शासक दल संविधानेतर (Extraconstitutional) उपायों से अन्य राजनीतिक दलों का दमन कर शासन शक्ति पर एकाधिकार स्थापित कर लेता है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी राज्य में एक से अधिक राजनीतिक दल हों, लेकिन राजनीतिक प्रभाव की दृष्टि से अन्य राजनीतिक दलों की स्थिति नगण्य हो अर्थात् वैसी ही हो जैसी स्थिति द्विदलीय प्रणाली वाले राज्यों में दो के अतिरिक्त अन्य राजनीतिक दलों की होती है, तो इसे एकदलीय प्रणाली वाला राज्य ही कहा जाएगी। एकदलीय प्रणाली को सामान्यतया सर्वाधिकारवादी और जनहित-विरोधी समझा जाता है, किन्तु सदैव ही ऐसा होना आवश्यक नहीं है और उद्देश्य की दृष्टि से भी एकदलीय प्रणाली के विभिन्न रूप हो सकते हैं। हिटलर और मुसोलिनी की एकदलीय प्रणाली का उद्देश्य सत्ता हस्तगत , करना और उस पर अपना अधिकार बनाये रखना ही था, लेकिन टर्की में मुस्तफा कमालपाशा की एकदलीय पद्धति निश्चय ही जन हितैषी थी। वर्तमान समय में मेक्सिको, मैडागास्कर आदि राज्यों की एकदलीय व्यवस्था को इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। कमालपाशा का टर्की, मेक्सिको या मैडागास्कर अपवाद हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतया एकदलीय व्यवस्था को लोकतन्त्र के अनुकूल नहीं समझा जा सकता है। |
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लोकतन्त्र में राजनीतिक दल क्यों आवश्यक हैं? दो कारण दीजिए। या राजनीतिक दल की दो विशेषताएँ बताइए। यालोकतन्त्र की सफलता एवं शासन की स्वेच्छाचारिता पर अंकुश के लिए राजनीतिक दल आवश्यक हैं।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। यालोकतन्त्र में राजनीतिक दलों की दो भूमिकाओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» राजनीतिक दल-प्रणाली के समर्थकों ने राजनीतिक दलों के निम्नलिखित दो प्रमुख गुण बताये हैं- 1. लोकतन्त्र हेतु अनिवार्य – आधुनिक समय में अधिकांश देशों में प्रतिनिध्यात्मक प्रजातन्त्रीय शासन-व्यवस्था प्रचलित है, जिसमें जनता अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन करती है। निर्वाचन राजनीतिक दलों के आधार पर होते हैं। निर्वाचन में जो दल बहुमत में आता है वह सरकार का निर्माण और संचालन करता है तथा अन्य दल विरोधी दल के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दलों का अस्तित्व लोकतन्त्रीय शासन-प्रणाली के लिए अनिवार्य है। लीकॉक ने कहा है, “दलबन्दी ही एकमात्र ऐसी चीज है जो लोकतन्त्र को सम्भव बनाती है।” |
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लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों के दो कार्य लिखिए। |
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Answer» ⦁ जनता में राजनीतिक चेतना उत्पन्न करना तथा |
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“राजनीतिक दल लोकतन्त्र के प्राण हैं।” इस कथन के प्रकाश में राजनीतिक दलों के दो कार्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» “राजनीतिक दल लोकतन्त्र के प्राण हैं।” इस कथन के प्रकाश में राजनीतिक दलों के दो कार्य निम्नवत् हैं- 1. सरकार का निर्माण – निर्वाचन के बाद राजनीतिक दलों के द्वारा ही सरकार का निर्माण किया जाता है। अध्यक्षात्मक शासन-व्यवस्था में राष्ट्रपति अपने विचारों से सहमत व्यक्तियों की मन्त्रिपरिषद् का निर्माण कर शासन का संचालन करता है। संसदात्मक शासन में जिस राजनीतिक दल को व्यवस्थापिका में बहुमत प्राप्त हो, उसके नेता द्वारा मन्त्रिपरिषद् का निर्माण करते हुए शासन का संचालन किया जाता है। राजनीतिक दलों के अभाव में तो व्यवस्थापिका के सदस्यों द्वारा अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग” का स्वरूप अपनाया जा सकता है, जिसके कारण सरकार का निर्माण और संचालन सम्भव ही नहीं होगा। |
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दलीय पद्धति के कोई दो गुण लिखिए। |
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Answer» ⦁ जनमत का निर्माण तथा |
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भारत के चार प्रमुख राजनीतिक दलों के नाम लिखिए।याअपने देश के दो राष्ट्रीय दलों के नाम लिखिए। |
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Answer» ⦁ भारतीय जनता पार्टी, |
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राजनीतिक दलों के दो उद्देश्य लिखिए। |
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Answer» ⦁ शासन पर वैधानिक रूप से अपना प्रभुत्व स्थापित करना। |
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एकदलीय पद्धति के दो अवगुण लिखिए। |
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Answer» ⦁ वैयक्तिक स्वतन्त्रता का अभाव। |
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राजनीतिक दलों को ‘लोकतन्त्र का प्राण’ तथा ‘शासन का चतुर्थ अंग’ क्यों कहा गया है? |
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Answer» लोकतन्त्र, चाहे उसका स्वरूप कोई भी क्यों न हो, राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति में अकल्पनीय है। इसलिए उसे लोकतन्त्र का प्राण तथा शासन का चतुर्थ अंग कहा गया है। |
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बहुदलीय व्यवस्था के दो दोष लिखिए। |
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Answer» ⦁ राष्ट्रीय हितों की उपेक्षा तथा |
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अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र के लिए आवश्यक है-(क) शिक्षित जनता(ख) राजनीतिक दल(ग) स्वस्थ नागरिक(घ) जनसाधारण का सहयोग |
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Answer» सही विकल्प है (ख) राजनीतिक दल |
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राजनीतिक दल की कोई एक संक्षिप्त परिभाषा दीजिए। |
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Answer» एडमण्ड बर्क के अनुसार, “राजनीतिक दल ऐसे लोगों का समूह होता है, जो किन्हीं ऐसे सिद्धान्तों के आधार पर, जिन पर वे एकमत हों, अपने सामूहिक प्रयत्नों द्वारा जनता के हित में, काम करने के लिए एकता में बँधे होते हैं।” |
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भारत के दो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ अकाली दल पंजाब का क्षेत्रीय दल है तथा |
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दलीय-प्रणाली के कितने रूप प्रचलित हैं? |
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Answer» दलीय प्रणाली के प्रमुखतया तीन रूप प्रचलित हैं- ⦁ एक-दलीय प्रणाली, |
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एकदलीय व्यवस्था वाले किन्हीं दो देशों के नाम लिखिए। |
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Answer» ⦁ चीन तथा |
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डी० एम० के० किस राज्य का महत्त्वपूर्ण दल है?(क) कर्नाटक(ख) केरल(ग) तमिलनाडु(घ) गुजरात |
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Answer» सही विकल्प है (ग) तमिलनाडु |
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शासन-सत्ता पर अंकुश के लिए आवश्यक है-(क) विरोधी दल(ख) सक्षम व्यवस्थापिका(ग) शिक्षित जनता(घ) अधिक संख्या में राजनीतिक दल |
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Answer» सही विकल्प है (क) विरोधी दल |
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राजनीतिक दलों के दो दोष बताइए। |
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Answer» ⦁ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना तथा |
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द्विदलीय व्यवस्था के गुण तथा दोषों पर टिप्पणी लिखिए।याद्विदलीय प्रणाली से क्या आशय है? इस प्रणाली के गुण-दोष बताइए। |
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Answer» द्विदलीय प्रणाली द्विदलीय प्रणाली के लाभ/गुण द्विदलीय प्रणाली के दोष 1. मतदान की स्वतन्त्रता सीमित – द्विदलीय प्रणाली के अन्तर्गत नागरिकों की मतदान की स्वतन्त्रता बहुत अधिक सीमित हो जाती है। उन्हें दो में से एक दल को अपना मत देना ही होता है, चाहे वे दोनों दलों के उम्मीदवारों या दलों की नीतियों से असहमत ही क्यों न हों। मैकाइवर के शब्दों में, “इस पद्धति में मतदाता की पसन्दगी अत्यधिक सीमित हो जाती है। और यह स्वतन्त्र जनमत के निर्माण में भी बाधक होती है। |
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द्विदलीय शासन-प्रणाली कौन-से देश में पाई जाती है?(क) ब्रिटेन(ख) फ्रांस(ग) पाकिस्तान(घ) इटली |
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Answer» सही विकल्प है (क) ब्रिटेन |
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