This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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निबंध (मेरा प्रिय कवि ) |
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Answer» वि राज्य के संरक्षक होता हैं । वे मानव जाति के प्रथम शिक्षक हैं । यह कथन पूरी तरह राष्ट्र कवि रामधारी सिंह ‘ दिनकर ’ पर खरा उतरता है । आदिकाल से लेकर आज तक हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में अनेक कवि हुए हैं । कोई किसी से कम नहीं । सूरदास यदि सूर्य समान है तो गोस्वामी तुलसीदास चन्द्र समान है ।किसी ने कबीर की प्रशंसा की है तो किसी ने जायसी की । पर जहाँ तक मेरा व्यक्तिगत प्रश्न है, मेरे लिए राष्ट्रवादी कविवर रामधारी सिंह ‘ दिनकर ’ से बढ़कर अन्य किसी कवि का कोई विशेष महत्त्व नहीं है । इसका एकमात्र कारण मेरी दृष्टि में यह कहकर अवरेखित किया जा सकता है कि राष्ट्रीय यौवन और पुरुषार्थ का गायन करने वाला उन जैसा दूसरा कोई कवि न तो आज तक कोई हुआ है और न ही निकट भविष्य में होने की कोई सम्भावना ही है ।एक आलोचक के अनुसार उदात्त मानवीय पौरुष, भारतीय यौवन एवं राष्ट्रीय जन- भावनाओं के अमर गायक राष्ट्रकवि ‘ दिनकर ‘ ही हैं । अपनी ओजस्विता के कारण दिनकर राष्ट्रधारा के कवियों में सर्वाधिक लोकप्रिय व्यक्तित्व लेकर उभरे । जो भी हो, मेरे इस प्रिय कवि का जन्म बिहार के मुंगेर जिले में स्थित सिमरिया नामक छोटे से गाँव में हुआ था ।हिन्दी, अंग्रेजी के साथ-साथ दिनकर ने संस्कृत, उर्दू, बंगला आदि भाषाओं का भी व्यापक अध्ययन किया । भारतीय युवकों की हर प्रकार की चेतनाओं का अपनी कविता में प्रतिनिधित्व करते हुए इन्हें सहज ही देखा-परखा जा सकता है ।जहाँ तक विभिन्न प्रकार के प्रभावों का प्रश्न है, उर्दू के इकबाल, बंगला के रवीन्द्र, अंग्रेजी के मिल्टन, कीट्स और शैली का इन पर विशेष प्रभाव माना जाता है । पहले क्रान्तिकारी, फिर गाँधीवाद और दार्शनिक बन गए, पर क्रान्ति की भावना ने मेरे इस कवि का साथ आरम्भ से अन्त तक कभी नहीं छोड़ा । तभी तो अपने आप को इन्होंने ‘ एक बुरा गाँधीवादी हूँ ‘ ऐसा कहा है ।मेरा यह प्रिय कवि गाँधी हो जाने के बाद भी ईंट का जवाब पत्थर से देने पर ही विश्वास करता रहा । एक थप्पड़ खाने के बाद दूसरा गाल आगे कर देने वाली गाँधीवादी नीतियों पर मेरे इस प्रिय कवि को कतई विश्वास न था । |
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मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरे के दोषों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल दूसरों पर-छिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को मनुष्य अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उनके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी आत्मविस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में भी पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं, अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है। अपनी वास्तविकता, अपनी क्षुद्रता उसे इतना क्षुब्ध करती है कि वह उसे भूलाकर दूसरों के दोषों को ढूंढकर ही अपना दुख हल्का करना चाहता है। विवेकशील ज्ञानी पुरुष अपने बारे में इस वास्तविकता से मुख मोड़ने के स्थान पर आत्मनिरीक्षण को ही श्रेयस्कर समझते है। इस आत्मनिरीक्षण के कठिन रास्ते पर चलकर ही मनुष्य अपनी दुष्प्रवृत्तियों को पहचान कर उनसे मुक्ति प्राप्त कर सकता है। मनीषियों की गंभीर वाणी इसी कारण सदैव अपने दोषों को ढूंढने का ही उपदेश देती है। किंतु इस व्यवहार में वे ज्ञानी व्यक्ति ही आते हैं, जो अपने विषय में कटु सत्यों का सामना करने को तत्पर रहते हैं। संत कबीर के एक दोहे में इसी तथ्य का निरुपण बडे सरल शब्दों में किया गया है- "बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय जो मन दे आपणा, मुझ-सा बुरा न कोय" (क) मनुष्य की दृष्टि दूसरों के दोषों पर क्यों टिकी रहती है और वह कैसा जीवन बिताना चाहता है? (ख) कौन-सी प्रक्रिया मनुष्य के लिए कष्टकारी है? इसका कारण क्या है? (ग) विवेकशील व्यक्ति क्या अच्छा मानते हैं और क्यों? (घ) प्रस्तत गद्यांश के लिए उचित शीर्षक लिखिए। |
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Answer» (क) मनुष्य की दृष्टि दूसरों के दोषों पर क्यों टिकी रहती है और वह कैसा जीवन बिताना चाहता है? उतर : 1मनुष्य पैदा होने के बाद से ही अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लग जाता है | वह कभी भी संतुष्ट नहीं होता | वह ओरों पर दोष निकलता है , और अपनी कमियों और दोषों को नहीं देखता | अपने आप को सबसे सही सोचने वाला जीवन व्यतीत करना चाहता है | (ख) कौन-सी प्रक्रिया मनुष्य के लिए कष्टकारी है? इसका कारण क्या है? उतर : अपनी खुद की कमियों और दोषों को पहचानना की प्रक्रिया मनुष्य के लिए कष्टदारी होती है | अपनी कमियां अपने आप को दुखी करती है , इसलिए वह ओरों में कमियां निकाल कर खुद शान्ति से रहना चाहता है | (ग) विवेकशील व्यक्ति क्या अच्छा मानते हैं और क्यों? उतर : विवेकशील व्यक्ति हमेशा समझदारी से काम करता है | वह किसी से भी कोई इर्ष्या नहीं करता | वह अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ता है | अपने अपने दोषों को देखकर अपन दुह कम कर्ण चाहता है | (घ) प्रस्तत गद्यांश के लिए उचित शीर्षक लिखिए। उतर : प्रस्तत गद्यांश के लिए उचित शीर्षक असंतुष्ट मनुष्य | |
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Skit on independence day in hindi..urgent plzzzz |
| Answer» TION:WELL SEARCH on Google you will GET the BEST skit | |
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उलझी meaning in English |
| Answer» CONFUSED.................... | |
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Leaving organs me kiske through energy milti hai |
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Answer» onal foods like FRUIT, LEAFY VEGETABLES, PULSES, etc. |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए − 'ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई' −इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है? nimnalikhit prashn kaa uttar deejie − 'aikai aṣir peev kaa, paḍhxai su pnḍait hoii' −is pnkti dvaaraa kavi kyaa kahanaa chaahataa hai? साखी |
| Answer» WER is attched in the GIVE PIC : HOPE it HELPS you ..... | |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए − दीपक दिखाई देने पर अँधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। nimnalikhit prashn kaa uttar deejie − deepak dikhaa_ii dene par andhiyaaraa kaise miṭ jaataa hai? Saakhee ke sndarbh men spaṣṭ keejie. साखी |
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Answer» dikhaai Dana par andhiyaaraa kayuki DEEPAK sa UJALA HO JATA ha isliya andhiyaaraa MIT jata ha........ |
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए − सीधे धरातल पर दरार पड़ने का विचार और इस दरार का गहरे-चौड़े हिम-विदर में बदल जाने का मात्र खयाल ही बहुत डरावना था। इससे भी ज़्यादा भयानक इस बात की जानकारी थी कि हमारे संपूर्ण प्रयास के दौरान हिमपात लगभग एक दर्जन आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा। nimnalikhit kaa aashay spaṣṭ keejie − seedhe dharaatal par daraar padne kaa vichaar aur is daraar kaa gahare-chaude him-vidar men badal jaane kaa maatr khayaal hee bahut ḍaaraavanaa thaa. Isase bhee zayaadaa bhayaanak is baat kee jaanakaaree thee ki hamaare snpoorṇa prayaas ke dauraan himapaat lagabhag ek darjan aarohiyon aur kuliyon ko pratidin chhootaa rahegaa. बचेंद्री पाल |
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Answer» इन पंक्तियों में हिमपात से उत्पन्न होने वाले खतरे का वर्णन किया है | हिमपात से कई बार धरातल में दरार पद जाती है | यह दरार बर्फ़ की गहरी- चौड़ी दरार में बदल जाती है| गुफाओं में बदल जाती थीं, जिस में मनुष्य की मृत्यु हो सकती थी |इस दीवार को पार करके चढ़ाई करने के बारे में सोच कर ही डर लगता है | यह बहुत ही डरावना ख्याल था | इससे भी अधिक भय इस बात का था की अभियान के समय यह हिमपात लगभग रोज़ आता रहेगा तो दर्जन आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा। |
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रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए। raidaas ke in padon kaa kendreey bhaav apane shabdon men likhie. रैदास |
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Answer» पहला पद – रैदास के पहले पद का केंद्रीय भाव यह है कि वह उनके प्रभु के अलग-अलग भक्त बन कर अपनी भक्ति व्यक्त की है | वह अपने ईश्वर की भक्ति में इस तरह डूबे की उन्हें प्रभु से अलग नहीं किया जाता है | वह अपने प्रभु से अलग होने का सोच भी नहीं सकते | दूसरा पद – रैदास के दूसरे पद का केंद्रीय भाव यह है कि उनके प्रभु सब के लिए एक सम्मान रखने वाले है | वह किसी को छोटा-बड़ा , ऊँचा-नीचा , गरीब-अमीर नहीं मानते उनके लिए सब एक बराबर है | वह अब पर दीन-दुखियों पर अपनी दया-दृष्टि बनाए रखते हैं। |
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तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ़ में क्या कहा? tenajing ne lekhikaa kee taareepha men kyaa kahaa? बचेंद्री पाल |
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Answer» ्न “एवरेस्ट - मेरी शिखर यात्रा” पाठ से लिया गया है, जिसकी लेखिका ‘बछेंद्री पाल’ हैं।तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ में उससे कहा कि कि वह एक पक्की पर्वतीय लड़की है। उसे अर्थात लेखिका कोअपने पहले प्रयास में ही एवरेस्ट के शिखर पर पहुँच जाना चाहिये।लेखिका को कठिन रोमांचक कार्य करना पसंद था। हालांकि एवरेस्ट लेखिका का पहला पर्वतीय अभियान था, लेकिन लेखिका को ऐसा लगता था कि पर्वतीय स्थानों के बारे में जानकारी उसे बुहत पहले से हो।तेनजिंग द्वारा लेखिका को प्रोत्साहित करने से लेखिका को बहुत हौसला और खुशी मिली। |
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए − एवरेस्ट जैसे महान अभियान में खतरों को और कभी-कभी तो मृत्यु भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करनी चाहिए। nimnalikhit kaa aashay spaṣṭ keejie − evaresṭ jaise mahaan abhiyaan men khataron ko aur kabhee-kabhee to mrityu bhee aadamee ko sahaj bhaav se sveekaar karanee chaahie. बचेंद्री पाल |
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Answer» abhi HAMEIN address chadte Hue Khatron ka AUR MRITYU ka bhi Shyam na karna CHAHIYE |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए − हिमस्खलन से कितने लोगों की मृत्यु हुई और कितने घायल हुए? nimnalikhit prashn kaa uttar ek-do pnktiyon men deejie − himaskhalan se kitane logon kee mrityu huii aur kitane ghaayal hue? बचेंद्री पाल |
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Answer» Heya mate PLZ tell the CHAPTER NHI to koi ANSWER nhi de payega... |
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लेखक ने इस पाठ में धूल चूमना, धूल माथे पर लगाना, धूल होना जैसे प्रयोग किए हैं। धूल से संबंधित अन्य पाँच प्रयोग और बताइए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए। lekhak ne is paaṭh men dhool choomanaa, dhool maathe par lagaanaa, dhool honaa jaise prayog kie hain. Dhool se snbndhit any paanch prayog aur bataa_ie tathaa unhen vaakyon men prayog keejie. रामविलास शर्मा |
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Answer» इस पाठ में धूल चूमना, धूल माथे पर लगाना, धूल होना जैसे प्रयोग किए हैं। धूल से संबंधित अन्य पाँच प्रयोग और बताइए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए। Answer:1. धूल चटाना – फुटबाल मैच में हमारे स्कूल ने दूसरे स्कूल के खिलाडियों को धूल चटा दी | 2. धूल फाँकना − वह ऑफिस में सारा दिन धूल फाँकता रहा । 3. धूल उड़ाना – मोहन का जब परीक्षा का परिणाम आया , उसकी सारी मेहनत की कमाई धूल में उड़ गई। 4. धूल में मिलना – स्कूल में हो रहे हस्त कला मेले में एक आँधी के झोंके से सब धूल में मिल गया। 5. धूल धुसरित − धूल धुसरित बच्चे सुंदर लगते है। |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए − कविता को विडंबना मानते हुए लेखक ने क्या कहा है? nimnalikhit prashn kaa uttar (50-60 shabdon men) likhie − kavitaa ko viḍanbanaa maanate hue lekhak ne kyaa kahaa hai? रामविलास शर्मा |
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Answer» विचार है की गोधूलि पर अनेक कवियों ने कविताएं लिखी है परंतु वे इस धूलि को सजीवता से चित्रित नहीं कर पाए, जो कि शाम के वक्त गाऐं चराकर लौटते समय ग्वालों और गायों के पैर से उठकर पूरे वातावरण में फैल जाती हैं। ज्यादातर कवि शहरों के रहने वाले हैं। शहरों में धूल-धक्कड़ तो होता है परंतु गांव की गोधूलि नहीं होती। इसलिए वे अपनी कविताओं में गांव की गोधूलि का सजीव चित्रण नहीं कर पाए। अर्थ यह है कि कवियों ने उन्हें जिसे देखा नहीं, अनुभव नहीं किया , भोगा नहीं उसी को अपनी कविताओं में उतार दिया। इसमें कविता अपने सजीव रूप से से परे हो गई है इसी को लेखक ने कविता की विडंबना माना है।आशा है कि यह उत्तर आपकी मदद करेगा।।। |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए − श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन किस प्रकार है। nimnalikhit prashn kaa uttar (25-30 shabdon men) likhie − shraddhaa, bhakti, sneh kee vynjanaa ke lie dhool sarvottam saadhan kis prakaar hai. रामविलास शर्मा |
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Answer» ,भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन इस प्रकार है लोग कहते हैं की धूल के समान नीच (तुझ ) कोई नहीं है, जबकि सती धूल को माथे से लगाकर उसके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करती है। वीर योद्धा धूल को आंखों से लगाकर उसके प्रति अपनी श्रद्धा जताते हैं तथा युलिसिस ने विदेश से लौटने के बाद अपने देश के प्रति अपना स्नेह प्रकट करने के लिए इथाका की धूलि को चुमा था। |
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए − 'धन्य-धन्य वे हैं नर मैले जो करत गात कनिया लगाय धूरि ऐसे लरिकान की' − लेखक इन पंक्तियों द्वारा क्या कहना चाहता है? nimnalikhit kaa aashay spaṣṭ keejie − 'dhany-dhany ve hain nar maile jo karat gaat kaniyaa lagaay dhoori aise larikaan kee' − lekhak in pnktiyon dvaaraa kyaa kahanaa chaahataa hai? रामविलास शर्मा |
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Answer» यहाँ लेखक इन पंक्तियों में बता रहे हैं की वह नर धन्य है और धन्यवाद के पात्र हैं जो धुल भरे शिशुओं को गोद में उठाकर गले से लगा लेते हैं । बच्चों के साथ उनका शरीर भी धूल से मैला हो जाता है। लेकिन वह नर धूल को मैल नहीं मानते। इस पंक्ति में ‘ऐसे लरिकान’ से यह अर्थ निकलता है कि यह बच्चे जो गरीब है इसलिए धूल से लिपटे है। धूल को पवित्र और प्राकृतिक श्रृंगार का साधन मानते हैं। यह नर खुद को भाग्यशाली मानते है की हमें इन बच्चों को गोद में उठाने का अफसर मिला | |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए − ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कौन-कौन से सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है? nimnalikhit prashn kaa uttar (50-60 shabdon men) likhie − graameeṇa parivesh men prakriti dhool ke kaun-kaun se sundar chitr prastut karatee hai? रामविलास शर्मा |
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Answer» ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के निम्नलिखित सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है जो इस प्रकार से है : संध्या के समय जब गोपालक गायें चराकर गांव में लौटते हैं, तो उनके और उनकी गायों के चलने से पैदा हुई धूल वातावरण में ऐसे भर जाती है कि शाम के समय को गोधूलि का नाम दिया गया है। गांव की अमराइयों के पीछे डूबते होते हुए सूर्य की किरणें धूलि पर पड़ती है तो धूल भी सोने के रंग जैसी हो जाती है। सूर्य के छिपने के बाद जब गांव की कच्ची सड़क से कोई बैलगाड़ी निकल जाती है तो उसके पीछे उड़ने वाली धूल रूई के बादल के समान दिखाई देती है और चांदनी रात में मेले जाने वाली बैलगाड़ियों के पीछे उड़ने वाली धूल चांदनी जैसी लगती है। |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए − धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती? nimnalikhit prashn kaa uttar (25-30 shabdon men) likhie − dhool ke binaa kisee shishu kee kalpanaa kyon naheen kee jaa sakatee? रामविलास शर्मा |
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Answer» is will HELP you......... |
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए − फूल के ऊपर जो रेणु उसका श्रृंगार बनती है, वही धूल शिशु के मुँह पर उसकी सहज पार्थिवता को निखार देती है। nimnalikhit kaa aashay spaṣṭ keejie − fool ke oopar jo reṇau usakaa shrringaar banatee hai, vahee dhool shishu ke munh par usakee sahaj paarthivataa ko nikhaar detee hai. रामविलास शर्मा |
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Answer» प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारे पाठ्यपुस्तक 'स्पर्श' से ली गयी हैं जिसके लेखक रामविलास शर्मा जी हैं। इस कथन का आशय यह है कि जिस तरह फूल के ऊपर धूल आ जाने से वह उसकी सज्जों सज्जा को बढाती है उसी प्रकार शिशु के मुख पर धूल उसकी सुंदरता को ओर भी निखार देती है। |
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अच्छी पढाई के लिए कैसी सेहत होनी चाहिए ? जानकारी चार से पांच में लिखें। |
| Answer» ACCHI padhai KE liye acchi set honi chahie acchi sehat ke aur ACCHE padhne ke liye Hame Hamara dimag Padhne Mein HI Lagana chahi aur acchi sehat rakhne ke liye Hari sabjiya JYADA khae acchi sad rakhne ke liye Din Mein Din Mein 5 litre Pani Pina chahiye aur do glass doodh Pina chahiye | |
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Can anyone helps me in the 13th question |
| Answer» TION:ACCORDING to the REMAINDER theorem3x×1=03x=1x=⅓sox³-5x²-x-5value of x=⅓⅓³-5×⅓²-⅓-51/27-5×1/9-⅓-51/27-5/9-14/3-140/27 | |
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बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था। और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं।इससे लोगों की किस मानसिकता का पता चलता है हैं? |
| Answer» BEXPLANATION:(ख) इससे लोगों की इस मानसिकता का पता चलता है कि वे घोर स्वार्थी किस्म के हैं। वे संवेदनाहीन हैं। उन्हें पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति का दुख नजर नहीं आता। उन्हें तो सिर्फ अपना स्वार्थ दिखाई देता है। यह संसार उपयोगितावादी है। | |
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Upadhi Shabd ko Anya Vachan Roop |
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Answer» Upadhiya for BAHUVACHAN..... |
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हरिरस से कवि का अभिप्राय है |
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Answer» स से कवि का अभिप्राय है।►‘हरि रस’ से कवि का अभिप्राय भगवान की महिमा का बखान करते हुए, जिस रस की अनुभूति हो, वही ‘हरिरस’ है। कवि राम नाम की महिमा का बखान करते हुए कहता है कि भगवान के नाम से बढ़कर कोई दूसरी साधना नहीं जो भगवान के स्मरण, भजन कीर्तन में परम आनंद प्राप्त करता है, वह परम आनंद ही ‘हरिरस’ कहलाता है। भगवान के नाम का स्मरण करते हुए, कीर्तन करते हुए, हरिकीर्तन में रम जाना और परमानंद की अनुभूति करना हरिरस है। इस रस का पान करने से जीवात्मा धन्य हो जाती है☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼☼ |
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नाखून बड़ाना और उन्हें काटना कैसे मनुष्य की सहजात वृतिया हैं - क्लास 10 थ question |
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Answer» tion:nakhun badhane Se manushya Ki SEHAT KHARAB HOTI Hai Kyunki Jab Ham nakhun badhate hain to Ankita Pal Jaate Hain aur Unki taanon se bimar ho Jate Hain aur nakhun katne ka MATLAB manushya ki sehat achhi REHTI hai Rakhenge sakta hai |
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आज देश में हिन्दी को जो स्थान प्राप्त है उसकी समीक्षा करें। |
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Answer» में हिन्दी का स्थान हिंदी भाषा देश भर बोले जानी वाका भाषा बन गई है | हिंदी भाषा नही अपना अलग स्थान बना लिया है | हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।भारत के केवल कुछ दक्षिण भारतीय राज्य हैं जहां हिंदी कम लोकप्रिय है नहीं तो भारत के हर कोने में हिंदी जानने समझने वाले लोग मिल जाएंगे।हिंदी आज विश्व में सबसे तेजी से उभरने वाली भाषा है। इंटरनेट पर भी हिंदी बहुत तेजी से छा रही है और अब हिंदी में लगभग 100% सामग्री उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त हिंदी फिल्मों और गाने ने भी हिंदी के विकास में बड़ा योगदान दिया है। हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी इंटरनेट पर भी अब पूरी तरह छा गई है और हिंदी के हर समाचार पत्र की वेबसाइट इंटरनेट पर मौजूद है। हिंदी के हर समाचार चैनल की भी वेबसाइट हिंदी पर मौजूद है। हिंदी पर आज के समय में सैकड़ों ब्लॉग लिखे जाते हैं। हिंदी के हजारों वेब पोर्टल हैं।प्रिंट माध्यम में देखें तो हिंदी के समाचार पत्रों की प्रसार संख्या पूरे भारत में सबसे ज्यादा है। हिंदी भारत के लगभग 49% लोगों द्वारा बोली जाती है और पूरे विश्व में लगभग 80 करोड़ लोगों द्वारा हिंदी बोल व समझ ली जाती है। संख्या की दृष्टि से नजर डालें तो हिंदी पूरे विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। |
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What are the four objectives of media |
| Answer» HEY mate here is ur Answer #bonjour A media objective is a CLEAR, succinct statement of a goal. It tells what the media plan should ACCOMPLISH in very specific, often measurable terms. The RATIONALE supports the media objective with marketing facts – it tells why the objective makes sense. It is a common courtesy to the reader to label each objective.... ========================♥️ Hope it helps you to get the right answer Mark as brainliest Follow me friendz...... HAPPY SUNDAY -_- | |
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A poem on morning in Hindi |
| Answer» TION:सुबह की धूप / कौशल किशोरहम पड़े रहते हैंनींद की चादर के नीचेसुविधाओं को तह किएऔर बाहरसुबह की धूप हमारा इंतज़ार करती हैखिड़की-रोशनदानों पर दस्तक देती हुईसब कुछ जानते-समझते हुए भीहम बेख़बर रहते हैंसुबह की इस धूप सेजो हर सुराख से पहुँच रहीअपनी चमकीली किरणों के साथअंधकार को भेदती हुईयह उतरती हैपहाड़ की सबसे ऊँची चोटी परफिसलती हुईघास पर पड़ी ओस की बूँदों मेंमेतियों की तरह चमकती हैपेड़ की फुनगियों से झूला झूलती हैनहाती है समुद्र की लहरों मेंचिड़ियों की तरह चहचहाती हैस्कूल के बच्चों की तरहघर से बाहर निकलती हैकितनी नटखट है यह धूपसुबह-ही-सुबहहमारी नींदहमारी दुनिया में हस्तक्षेप करती हैडायरी की तरह खोल देती हैएक पूरा सफ़ेद दिनइसी तरह जगाती हैहम-जैसे सोये आदमी कोउसे ज़िन्दगी की मुहिम मेंशामिल करती है हर रोज़ ।HOPE IT HELPS YOU!!! | |
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ब्रह्मयज्ञ से क्या अभिप्राय है? : |
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Answer» can you PLEASE send me this in ENGLISH LANGUAGE and i will be give you answer |
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Mitti ki Mahima please give the meaning......from the book Vitaan Hindi Pathmala.....If student of class 6 C of Ryan international School district raipur...I am srestha saha |
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Answer» ans respect to your LAND, CULTURE, RELIGION, GENDER, tribe, etc. |
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बैल को कम गधा क्यों कहा जाता है ? |
| Answer» CATEGORIES MAI NAHI AATA | |
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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए | लेकिन गधे का छोटा भाई और भी है ,जो उससे कम ही गधा है और वह है'बैल | "जिस अर्थ में हम गधे का प्रयोग करते हैं कुछ उसी से मिलते -जुलते अर्थ में"बछिया के ताऊ 'का भी प्रयोग करते हैं कुछ लोग बैल को शायद बेवकूफों में सर्वश्रेष्ठकहेंगे मगर हमारा विचार ऐसा नहीं है बैल कभी -कभी मारता भी है ,कभी-कभीअड़ियल बैल देखने में आता है और भी कई रीतियों से अपना असंतोष प्रकट कर देताहै अतएव उसका स्थान गधे से नीचा है।2-बैल को कम गधा क्यों कहा जाता है ? |
| Answer» PURA gadyansh LIKHO adhe se kuch samjh NAHI AA raha he | |
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आज का भारतीय नारी हिंदी निबंध |
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Answer» तीय महिला दिवससमय ने मौलिक रूप से बदल दिया है, और आज की भारतीय महिला अब केवल एक गृहिणी, एक माँ या बेटी के रूप में अपनी पारंपरिक भूमिका में सामंजस्य नहीं रखती है। चाहे वह उच्च शिक्षा हो, या अधिकारों और विशेषाधिकारों के बारे में सामान्य और तेजी से फैलने वाली प्रबुद्धता और पुरुष और महिला के बीच समानता की अवधारणाएं, जो मानव जाति के इस वर्ग के बीच विशिष्ट रूप से उल्लेखनीय जागृति के लिए जिम्मेदार हैं, यह कहना मुश्किल है। शायद दृष्टिकोण में बदलाव और जीवन में बेहतर स्थिति के लिए बढ़ती मांग और राष्ट्रीय जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका एक साथ संचालित सभी प्रासंगिक कारकों का संचयी परिणाम है। आज की अधिक प्रबुद्ध महिलाएँ यह याद करते हुए प्रसन्न होती हैं कि प्राचीन काल में उस महिला को भगवान की सही कारीगरी और स्वर्गदूतों की महिमा के रूप में माना जाता था।लेकिन ठेठ भारतीय महिला, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, भगवान की संपूर्ण कारीगरी का एक नमूना है, आत्म-बलिदान का प्रतीक, मानव रूप में एक परी, शाश्वत आनंद, भक्ति और चिरस्थायी प्रेम और स्नेह का स्रोत। इसके अलावा, अनगिनत महिलाएं, विशेष रूप से वे जो अच्छी तरह से शिक्षित हैं या अन्यथा कुछ प्रकार की नौकरियों के लिए योग्य हैं, रोजगार प्राप्त करने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए उत्सुक हैं आम तौर पर, नौकरी पाने की इच्छा परिवार की आय को पूरक करने के लिए उत्सुकता से प्रेरित होती है। ये कठिन समय है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है।महिलाओं के मामले हैं जो साड़ी, गहने, सौंदर्य प्रसाधन, आदि पर अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए कुछ पैसे कमाने के लिए और मॉडेम महिलाओं की तरह रहने के लिए नौकरी करती हैं। कस्बों और शहरों में भी हर भारतीय महिला तितली या समाज की महिला नहीं है, लेकिन कुछ वास्तव में हैं। उनकी जमात शायद प्राचीन मूल्यों में निरंतर गिरावट, एक समर्पित पत्नी, मां या बेटी के रूप में भारतीय महिला की सदियों पुरानी अवधारणा में बदलाव और आधुनिक शिक्षा के प्रभाव के साथ बढ़ रही है।फिर से, महिलाओं को अद्वितीय परिष्कृत प्रभाव माना जाता है, और उनमें से कई निश्चित रूप से हैं। लेकिन उनमें से काफी संख्या में नहीं हैं। जब एक शहर की महिला, महिलाओं के दायित्व की आधुनिक अवधारणाओं में अधिक विश्वास करती है, आज दुनिया में अपने अधिकारों के बारे में तेजी से जागरूक हो रही है, तो माता-पिता या पति के लिए यह उम्मीद करना व्यर्थ है कि वह खुद को रसोई तक सीमित रखेगी और उसके लिए भाग लेगी। भक्ति और ईमानदारी के साथ परिवार के लिए कर्तव्य। घरेलूता, वास्तव में, हजारों भारतीय महिलाओं का पक्षधर नहीं है; वे "बोरियत" से स्वतंत्रता और स्वतंत्रता चाहते हैं जो वे घर और बच्चों की देखभाल के साथ जोड़ते हैं। क्यों, वे पूछते हैं, कि जब भारतीय संविधान द्वारा लिंगों की समानता की गारंटी दी जाती है, तो क्या उन्हें अपने पति की सेवा करने की उम्मीद की जानी चाहिए? क्यों, तर्क तो चलता है, क्या उन्हें किसी भी तरह से हीन प्राणी माना जाना चाहिए?यह कुछ भी नहीं है कि आधुनिक महिला को ईर्ष्यापूर्ण, झगड़ालू, स्वार्थी और फैशन, ड्रेस और शारीरिक बनावट के प्रति अधिक सचेत माना जाता है। क्या हम आधुनिक महिला को स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि वह इसलिए है कि हमारा समाज भौतिकवादी हो गया है और नैतिक मूल्यों और आचरण के नैतिक मानकों में चौतरफा गिरावट है? क्या पुरुष अपने कर्तव्य के प्रदर्शन में बेहतर हैं? खुद को श्रेष्ठ प्राणी मानने का पुरुषों के लिए क्या औचित्य है? कितने पति, कुछ लोग पूछते हैं, अपनी पत्नी के साथ घरेलू जिम्मेदारियों को साझा करें? क्या हम विभिन्न घोषणाओं को दोषी ठहरा सकते हैं, जैसे कि मेक्सिको की महिलाओं की समानता की घोषणा, 1975, और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा पारित विभिन्न प्रस्तावों समान कार्य के लिए समान वेतन निर्धारित करते हुए? भारत का संविधान यह भी मानता है कि पुरुषों और महिलाओं की स्थिति समान है और रोजगार के किसी भी क्षेत्र में या अधिकारों और विशेषाधिकारों के संबंध में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। |
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Full form of NASANational Aeronautical space adventure |
| Answer» EXPLANATION:NATIONAL aeroniti SPACE ACT | |
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वजीर अली किस बात से गवर्नर जनरल से नाराज हो गया? |
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Answer» ्न ‘कारतूस’ पाठ से लिया गया है जिसके लेखक ‘हबीब तनवीर’ हैं।वजीर अली अंग्रेजों को बिल्कुल भी पसंद नही करता था। गवर्नर जनरल ने उससे सत्ता छीन ली और सआदत अली को सत्ता सौंप दी, इस कारण वो गर्वनर जनरल से बेहद नाराज था। इसके अतिरिक्त गर्वनर जनरल ने उसकी इच्छा के विपरीत कलकत्ता बुला लिया जिससे उसकी नाराजगी और बढ़ गयी। |
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टी. वी. पर प्रसारित होने वाले ऐतिहासिक धारावाहिकों की प्रशंसा करते हुए सूचना मंत्रालय को पत्र लिखिए| |
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Answer» सेवा में , निर्देशक, सूचना मंत्रालय, शिमला(हिमाचल प्रदेश) 12-08-2019 विषय : ऐतिहासिक धारावाहिकों की प्रशंसा करते हुए धन्यवाद पत्र | महोदय, सविनय निवेदन मेरा नाम राहुल शर्मा है | मैं शिमला का रहने वाला हूँ | मैं आपको धन्यवाद करना चाहता हूँ , आपने टी. वी. पर प्रसारित होने वाले ऐतिहासिक धारावाहिकों के लिए | आपने जो अच्छे धारावाहिक शुरू किए है , वह वाक्य ही काबिले तारीफ है | इन धारावाहिकों से अच्छी बाते सिखने को मिलती है , जैसे ज्ञान प्रतियोगिता , रामायण , महाभारत , अशोका आदि इससे हमें अपने इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है |आशा करता हूँ आप आगे भी ऐसे हमारा साथ देंगे | धन्यवाद | भवदीय राहुल शर्मा| |
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सपनों के से दिन पाठ के आधार पर आजकल स्कूली शिक्षा प्रणाली में क्या परिवर्तन आए हैं? |
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Answer» सपनों के से दिन पाठ के आधार पर आजकल स्कूली शिक्षा प्रणाली में बहुत सारे परिवर्तन आए है , अब शिक्षक बच्चों को मारते नहीं है , उन्हें प्यार से और अलग-अलग तरीकों से पढ़ते है | बहुत सारे उदाहरण ले कर उन्हें पढ़ते है | अब शिक्षक बच्चों की गलती के पीछे के कारण को बताए और उन्हें अच्छे से समझाए | बच्चों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित करते है |इससे बच्चे में हिम्मत और विश्वास आता जाता है और उसे चीज़ें आसानी से समझ आती है | |
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galtiyo se Sikh Lekar Aaoge badhta Hai Ek Safal vyakti banta hai kya aap Kasam Se sehmat Hai Dar Par Ke Saath Apne vichar likhiye |
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Answer» Ha mai sahmat hu..jab insan galtiya karta h to use sabk bhi sikhna chahiye koi bhi safal AADMI bina galti kiye safal nahi hotajo insan bolta h ki usne kabhi galtiya hi nahi kiya matlab wah KUCH sikha hi nahigaltiyo SE insan sikhta hmark it BRAINLIEST |
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बदलने की क्षमता ही बुद्धिमता का प्रतीक है 500 शब्द निबंध |
| Answer» TION:बदलने और बदलाव लेने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता का माप है | यह बिलकुल सत्य है , समय के साथ अच्छे काम के लिए बदलना बहुत जरूरी है और यही एक समझदारी है | समय के साथ बुत सारी चीज़ें बदल रही है, और बहुत सारे ने आविष्कार हो रहे है | इसलिए सफल होने के लिए हमें भी समय के साथ बदलना चाहिए और नए-नए चीज़ें और बातों को समझना चाहिए | बुद्धिमत्ता यह है कि कोई भी अध्ययन, समझ और सीखने के द्वारा सुधार कर सकता है। बात करें तो हमें अपनी पुरानी सोच को बदलने में ही बुद्धिमत्ता है | जब हम अपनी पुरानी सोच बदलेंगे तभी हम नया सिख पाएंगे | देश आगे बढ़ पाएगा आगे प्रगति होगी |जिन बातों और सोच में बदलने और अच्छा सीखने को न मिले तो हमें वह सोच खत्म कर देनी चाहिए | आज भी समाज मैं बहुत सारी पुरानी बाते है जो लोग मानते है , जैसे लिपियों को स्कूल नहीं जाने देना , उनकी जल्दी शादी करवा देना |भेद-भाव रखना , जाती-वाद , दहेज प्रथा यह सब हमें खत्म करने की जरूरत है | इसी पुरानी सोच के कारण हम पीछे है , अगर हम यह सोच बदल देंगे और नया सोच बनाएंगे सब जगह प्रगति होगी | बदलाव जीवन का अनंत क्रम है "। जीवन वस्तुतः परिवर्तनशील ही है और यह परिवर्तन या बदलाव मनुष्य के विकास में साधक बनकर समय-समय पर चुनौती के रुप में आते हैं और कालांतर में पुनः एक नए परिवर्तन द्वारा हो कर समय की धारा में प्रवाहित हो जाते हैं | इस तरह ये क्रम चलता रहता है | मनुष्य के द्वारा इनका स्वीकार एक सधी हुई मानसिकता का प्रतीक और बुद्धिमत्ता तथा प्रगति शील होने का द्योतक है। जैसे हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखते हैं तो पाते हैं कि हमारे अतीत में कई प्रकार के बदलाव आए है | पहले आदि मानव किस प्रकार अपना जीवन व्यतीत करता था , धीरे-धीरे बदलाव के कारण वह बदलता गया और नए आविष्कार करता गया , और अच्छा जीवन व्यतीत करने लग गया | यह इस तथ्य का परिचायक है कि जीवन में जो घटनाएं घट चुकी हैं उन्हीं से सीख कर मनुष्य आगे बढ़ना चाहता है। वह अग्रसर होता है जब वह स्वयं को इन बदलावों में ढाल लेता है |जिस तरह मनुष्य जीवन में एक व्यक्ति शैशव से वृद्धावस्था तक प्रत्येक अवस्था में परिवर्तित होता रहता है यद्यपि वह अधिकतर युवावस्था की ही कामना रखता है किन्तु ये संभव नहीं है | बदलाव या परिवर्तन सृष्टि का नियम है | यह भी उल्लेखनीय है कि विभिन्न अवस्थाओं में मनुष्य की रुचियाँ भिन्न-भिन्न हो जाती है | जो आज वर्तमान है कल अतीत बन जाएगा | प्रत्येक वर्तमान को उसकी बदलती रूपरेखा के साथ सहर्ष मान्यता प्रदान कर स्वीकृति देना तथा अपना लेना सुख - समृद्धि के द्वार खोलकर बुद्धिमत्ता का मापदंड प्रस्तुत करना ही है | मनुष्य को चाहिए कि वह लकीर का फकीर न बन कर वर्तमान में जिए क्योंकि प्रत्येक क्षण बदलता हुआ आगे बढ़ जाता है। | |
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पंडित अलोपीदीन का किस पर अखंड विश्वास था और कयों ? class 11 plzz ans it fast |
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Answer» पंडित अलोपीदीन को लक्ष्मीजी पर अखंड विश्वास था। वह कहा करते थे कि संसार का तो कहना ही क्या, स्वर्ग में भी लक्ष्मी का ही राज्य है। उनका यह कहना यथार्थ ही था। न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं, इन्हें वह जैसे चाहती हैं नचाती हैं। |
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मोबाइल फोन सुविधा या असुविधा प्रस्तावना |
| Answer» TION:आइए विषय से शुरू करें। सबसे पहले मोबाइल क्या है? उम्म सब इसके साथ परिचित हैं। मोबाइल एक ऐसा उपकरण है जो आजकल कई कार्यों को करने के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, हम बड़ी दूरी पर संचार के लिए मोबाइल का उपयोग कर सकते हैं, टेक्स्ट संदेश भेज सकते हैं, गेम खेल सकते हैं, दोस्तों को ऑनलाइन ढूंढ सकते हैं आदि।लेकिन क्या होगा यदि हम हर बार फोन का उपयोग करने में व्यस्त हैं। हमेशा हमारे फोन पर चिपकने के लिए अच्छी बात नहीं है। आजकल हम छात्रों को मोबाइल में जवाब देते समय परीक्षा देते हैं, ड्राइविंग करते समय फोन का उपयोग करने वाले लोग जो हमारे जीवन के लिए खतरनाक हो सकते हैं।इसके अलावा, मोबाइल ने हमारे जीवन को आसानी से लाया है जैसे कि हम यातायात में मारा जाता है, हम किसी को भी हमारी सहायता के लिए बुला सकते हैं। या आपातकाल के किसी भी मामले में, हम उस व्यक्ति को सूचित कर सकते हैं जो मील दूर बैठा है।प्रौद्योगिकी का उपयोग अच्छा है, लेकिन यह एक कुशल तरीके से किया जाना चाहिए। तो यह न तो वरदान और न ही होगा। | |
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Theme of the story eyes are not heretheme of the story eyes are not here |
| Answer» MARK me BRANLIEST as I am SENDING you these PICTURES | |
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८. बगीचे में आते ही सभी बच्चे--------दौड़ने लगे। |
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प .निम्नलिखित गद्गारा के आधार पर सपना कसहा विकल्प चुनकर लिखिए।लेकिन गधे का प्रोटा भाई और भी है जो उससे कम हो गया है और वह है'बैल । 'जिस अर्थ में हम गधे का प्रयोग करते हैं कुछ उसी से मिलते जुलत अर्थ में'बछिया के ताऊ का भी प्रयोग करते हैं कुछ लोग बैल को शायद बेवकूफों में सर्वश्रेष्ठकहेंगे मगर हमारा विचार ऐसा नहीं है बैन कभी -कभी मारता भी है कभी कभीअड़ियल जैल देखने में आता है और भी कई रीतियों से अपना असंतोष प्रकट कर देताहै अतएव उसका स्थान गधे से नीचा है।बैल को कम गधा क्यों कहा जाता है ? -बैल कभी मारता है ,कभी काम के लिए अड़ जात है ऐसा करके वह क्या प्रदर्शित करतक (अपनी शक्तिख (अपनी जिदग (अपना संतोषघ (अपना महत्त्व |
| Answer» APNA mahatva kyunki gadhe ko ek raste par dikha DIYA ye galat ho sab sahi hai usi raste par CHALTA hai lekin BALL apna rasta KHUD dekhta hai aur apna mahatva dekhta hai | |