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1.

भारत में परमाणु शक्ति के उत्पादन का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए(क) उत्पादन केन्द्र तथा (ख) महत्त्व।याभारत के किन्हीं पाँच परमाणु ऊर्जा केन्द्रों का वर्णन कीजिए।याभारत में परमाणु ऊर्जा केन्द्र कहाँ-कहाँ स्थापित हैं ?

Answer»

() उत्पादन केन्द्र – भारत में प्रथम परमाणु रिएक्टर अप्सरा 4 अगस्त, 1956 ई० को कार्यान्वित कर लिया गया था। दूसरा रिएक्टर कनाडा-भारत रिएक्टर नाम से जून, 1959 ई० से कार्य करने लगा था। इसकी उत्पादन क्षमता 40 मेगावाट शक्ति की थी। ध्रुव नामक एक अन्य रिएक्टर 100 मेगावाट की उत्पादन क्षमता को अगस्त, 1985 ई० में पूर्ण कर लिया गया था। भारत में परमाणु शक्ति विद्युत उत्पादन में निम्नलिखित राज्यों का महत्त्वपूर्ण योगदान है

1. महाराष्ट्र – सन् 1960 ई० में मुम्बई के निकट तारापुर नामक स्थान पर एक परमाणु शक्ति-गृह स्थापित किया गया। यहाँ 2 X 160 मेगावाट क्षमता के विद्युत शक्ति-गृह स्थापित हैं।

2. राजस्थान – इस राज्य में कोटा में रावतभाटा स्थान पर एक रिएक्टर की दो इकाइयाँ 440 मेगावाट शक्ति की लगायी गयी हैं। इनमें यूरेनियम तथा हल्के जल का उपयोग किया जाता है।

3. तमिलनाडु – तमिलनाडु राज्य में चेन्नई के निकट कलपक्कम नामक स्थान पर एक परमाणु केन्द्र स्थापित किया गया है। इसमें दो इकाइयाँ हैं, जिनकी उत्पादन क्षमता 470 मेगावाट है।

4. उत्तर प्रदेश – इस राज्य में बुलन्दशहर जिले के नरौरा नामक स्थान पर 470 मेगावाट क्षमता के दो रिएक्टर लगाये गये हैं।

5. एक अन्य रिएक्टर के निर्माण का कार्य गुजरात में काकरापारा में किया गया। इसकी उत्पादन क्षमता 470 मेगावाट शक्ति की है, जिसमें दो रिएक्टरों ने कार्य प्रारम्भ कर दिया है। इसके अतिरिक्त कर्नाटक में कैगा स्थान पर 470 मेगावाट क्षमता का परमाणु शक्ति-गृह स्थापित किया गया है। वर्तमान समय में देश में कुल 14 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल उत्पादन-क्षमता 2,720 मेगावाट है।

(ख) महत्त्व – भारत में उत्तमकोटि के कोयले और खनिज तेल की कमी है। अत: परमाणु शक्ति द्वारा इस कमी को पूरा किया जा सकता है। परमाणु शक्ति एक आदर्श विकल्प है, जिसका उत्पादन प्रदूषण की समस्या भी पैदा नहीं करता है। भारत कुछ परमाणु-खनिजों में धनी है। बिहार के सिंहभूम और राजस्थान के कुछ भागों में यूरेनियम की खाने हैं। केरल के तट पर पाया जाने वाला मोनोजाइट बालू, परमाणु ऊर्जा का साधन है। भारत में परमाणु विद्युत उत्पादन की प्रतिशत वृद्धि सन्तोषप्रद है। देश की कुल विद्युत उत्पादनक्षमता में अभी नाभिकीय ऊर्जा का अंश मात्र 3% है, परन्तु इसकी भावी सम्भावनाएँ बहुत अधिक हैं। कुल विद्युत उत्पादन संयन्त्रों में नाभिकीय संयन्त्रों का हिस्सा 4% है। परमाणु ऊर्जा केन्द्र ऐसे स्थानों पर भी सरलता से स्थापित किये जा सकते हैं, जहाँ शक्ति के दूसरे संसाधन या तो हैं ही नहीं या उनकी अत्यधिक कमी है। भारत परमाणु ऊर्जा के शान्तिपूर्ण उपयोगों; जैसे—चिकित्सा और कृषि के लिए। प्रतिबद्ध है।

2.

शक्ति के प्राचीन संसाधन’कोयले के संरक्षण के लिए क्या उपाय अपनाये जाने चाहिए?

Answer»

ऊर्जा के संसाधनों में कोयला अत्यन्त पुराना संसाधन है। सैकड़ों वर्षों से कोयले का उपयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा रहा है, जबकि विश्व में इसके भण्डार सीमित हैं। अत: इसके संरक्षण के . लिए निम्नलिखित उपाय अपनाये जाने चाहिए

  • कोयले की खानों में आग लगने, खान की छत गिरने अथवा खान में पानी भरने से कोयले के भण्डारों को भारी हानि पहुँचती है। अत: खनन-तकनीकी में सुधार कर इन हानियों को रोका जा सकता है।
  • कोयले से ताप व ऊर्जा प्राप्त करने की तकनीकी को भी अधिक विकसित करके इसका संरक्षण किया जा सकता है।
  • कभी-कभी कोयले की खानों में गैसें भरने के कारण विस्फोट हो जाते हैं। यदि इन विस्फोटों से खानों को बचाने के उपाय विकसित किये जाएँ तो कोयले के भण्डार सुरक्षित रहेंगे।
  • जल-विद्युत कभी न समाप्त होने वाला ऊर्जा संसाधन है। अतः इसका उपयोग बढ़ाकर कोयले का उपयोग सीमित किया जाए। उदाहरण के लिए पहले रेलें कोयले व डीजल से ही चलती थीं, किन्तु अब अनेक मार्गों पर जल-विद्युत से रेनें चलायी जाती हैं।
  • ईंधन के रूप में भी कोयले का प्रयोग घटाकर उसके स्थान पर सौर ऊर्जा, प्राकृतिक गैस तथा गोबर गैस का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
  • कोयले की खुदाई करते समय ऐसा प्रयास करना चाहिए कि चूरा कम-से-कम हो। कोयले के चूरे को भी उपयोग में लाना चाहिए।
  • खदानों में कोयला स्तम्भों के रूप में पर्याप्त मात्रा में छोड़ दिया जाता है। खदानों से कोयले की अधिकाधिक मात्रा का खनन कर लेना चाहिए।
  • कोयले की दहन-भट्टियाँ खुली नहीं होनी चाहिए तथा उनकी चिमनियाँ ऊँची होनी चाहिए। कोयले से तापीय ऊर्जा प्राप्त करने की तकनीकी को भी अधिक उन्नत करके कोयले का संरक्षण किया जा सकता है।
3.

भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास का विवरण दीजिए।

Answer»

भारत में परमाणु ऊर्जा के प्रणेता डॉ० होमी जहाँगीर भाभा थे। सन् 1948 ई० में देश में परमाणु ऊर्जा आयोग का गठन किया गया। सन् 1954 ई० में ट्रॉम्बे (महाराष्ट्र) में भाभा परमाणु शोध संस्थान की स्थापना की गयी।

भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास के तीन चरण हैं

  • प्रथम चरण (1948-56 ई०) में ‘अप्सरा’ नामक रियेक्टर की स्थापना की गयी।
  • द्वितीय चरण (1956-66 ई०) में अनेक तकनीकी सुविधाएँ विकसित की गयीं।
  • तृतीय चरण (1966 ई० के बाद) में देश में विविध स्थलों पर परमाणु शक्ति केन्द्र स्थापित किये गये।

देश का प्रथम परमाणु शक्ति केन्द्र मुम्बई के निकट तारापुर (महाराष्ट्र) में 1969 ई० में स्थापित किया गया। द्वितीय परमाणु शक्ति केन्द्र कोटा के निकट रावतभाटा (राजस्थान) में स्थापित किया गया। तीसरा केन्द्र चेन्नई के निकट कलपक्कम (तमिलनाडु) में और चौथा केन्द्र बुलन्दशहर के निकट नरौरा (उत्तर प्रदेश) में स्थापित किया गया। काकरापारा (गुजरात) तथा कैगा (कर्नाटक) में भी परमाणु शक्ति केन्द्र कार्य कर रहे हैं। वर्तमान समय में देश में कुल चौदह परमाणु ऊर्जा रियेक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल उत्पादन-क्षमता 2,720 मेगावाट है।

4.

गैर-परम्परागत ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? भारत में गैर-परम्परागत ऊर्जा के संसाधनों का वर्णन कीजिए।यागैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का क्या अभिप्राय है? इन स्रोतों के दो महत्त्व लिखिए।याकिन्हीं दो गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।याऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का महत्त्व लिखिए।यागैर-परम्परागत ऊर्जा के दो स्रोत बताइए।

Answer»

गैरपरम्परागत ऊर्जा संसाधन

गैर-परम्परागत स्रोत ऊर्जा के वे स्रोत हैं जिनका प्रयोग बार-बार किया जा सकता है। इसलिए इन्हें नव्यकरणीय या असमापनीय स्रोत भी कहा जाता है।

गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन के स्रोत

ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों अथवा स्रोतों में से प्रमुख का विवरण निम्नलिखित है

1. सौर ऊर्जा यह प्रदूषण मुक्त है। इसमें सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा में बदला जाता है। सौर ऊर्जा का प्रयोग खाना बनाने, पानी गर्म करने, फसल सुखाने व गाँवों में विद्युतीकरण करने में किया जाता है। 31 मार्च, 1998 ई० तक 3.80 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में सौर ऊर्जा उपलब्ध करायी जा चुकी थी। सौर ऊर्जा के उपयोग से प्रति वर्ष 15 करोड़ किलोवाट घण्टे ऊर्जा की बचत हो रही है।

2. पवन ऊर्जा – भारत में पवन ऊर्जा की अनुमानित क्षमता 2 हजार मेगावाट है। ऊर्जा मन्त्रालय की । रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च, 1999 ई० तक देश में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 1,025 मेगावाट थी। पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत का विश्व में चौथा स्थान है। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा एवं तमिलनाडु राज्य इस ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

3. बायो गैस देश में मार्च, 1999 ई० तक 2,850 लाख बायो गैस संयन्त्र स्थापित किये जा चुके थे, जो प्रत्येक वर्ष 410 लाख टन जैविक खाद का निर्माण कर रहे हैं। बायो गैस उत्पादन की तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए कोयम्बटूर, पूसा आदि में प्रशिक्षण केन्द्र खोले गये हैं।

4. भूतापीय ऊर्जा – भूतापीय ऊर्जा प्राकृतिक गर्म पानी के झरने या तालाब से संयन्त्र लगाकर प्राप्त की जाती है। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले के मणिकर्ण नामक स्थान पर भूतापीय ऊर्जा की पायलट परियोजना सफल सिद्ध हुई है।

5. नगरीय तथा औद्योगिक कूड़े-कचरे से ऊर्जा – नगरीय तथा औद्योगिक कूड़ा-कचरा पर्यावरण को दूषित करता है। इससे दिल्ली तथा मुम्बई जैसे महानगरों में ऊर्जा तैयार की जाती है।

6. ज्वारीय ऊर्जा – अनुमान है कि देश में ज्वारीय शक्ति से 8,000 से 9,000 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा सुन्दरवन इसके सम्भावित ऊर्जा क्षेत्र हैं।

7. लहर ऊर्जा समुद्री लहरों से देश में 40,000 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा प्राप्त करने की सम्भावना का आकलन किया गया है। केरल में तिरुवनन्तपुरम के निकट विजिंगम स्थान पर 150 मेगावाट क्षमता का संयन्त्र (प्लाण्ट) लगाया गया है।

महत्त्व
ऊर्जा के गैर-परम्परागत संसाधनों का महत्त्व निम्नलिखित कारणों से है–

  • भारत एक उष्ण कटिबन्धीय देश है। यहाँ वर्ष के अधिकांश भाग में उच्च तापमान रहते हैं। अतः सौर ऊर्जा के विकास की अच्छी सम्भावनाएँ विद्यमान हैं। इसका प्रयोग घरों तथा सड़कों पर | प्रकाश-व्यवस्था, पानी गर्म करने, खाना पकाने, फसलें सुखाने आदि में किया जा सकता है।
  • भारत की तटरेखा विस्तृत है। यहाँ ज्वारीय तथा लहर ऊर्जा का विकास सम्भव है। तटीय भागों में इस ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।
  • कृषि उत्पादन अधिक होने से बायो गैस ऊर्जा का विकास सम्भव है। गन्ने की खोई तथा चावल के भूसे | को ऊर्जा-स्रोत के रूप में परिणत किया जा सकता है।
  • सघन एवं जनसंख्या होने के कारण देश में गोबर, मलमूत्र, कूड़े-कचरे आदि की अधिकता है। महानगरों में इसका व्यापक प्रयोग सम्भव है।
5.

खनिज तेल संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है ?याखनिज तेल के संसाधनों के संरक्षण पर टिप्पणी लिखिए।

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खनिज तेल के संरक्षण के उपाय

खनिज तेल के संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं

  • दोहन के ऐसे उपाय तथा तकनीक अपनानी चाहिए, जिससे खनन तथा परिष्करण के दौरान खनिजों की न्यूनतम हानि हो।
  • जहाँ तक हो सके क्षयशील संसाधनों के विकल्पों का प्रयोग करना चाहिए।
  • खनिज तेल और कोयले के विकल्प के रूप में जल-विद्युत तथा परमाणु ऊर्जा का उपयोग करना चाहिए।
  • खनिज तेल के प्रयोग की प्रौद्योगिकी में सुधार कर तेल के प्रयोग करने की ऐसी विधि विकसित की जानी चाहिए, जिससे इसकी प्रयोग-क्षमता बढ़ जाए; अर्थात् उतने ही खनिज तेल की ऊर्जा से वर्तमान की अपेक्षा अधिक कार्य सम्पन्न किये जाएँ।
  • पेट्रोलियम जैसे ऊर्जा के स्रोतों के भण्डारण के उन्नत तरीकों को अपनाकर 15% तक ऊर्जा बचायी जा सकती है। अमेरिका, इंग्लैण्ड, जापान आदि देशों ने इसमें सफलता प्राप्त की है।
  • भूगर्भ से तथा समुद्र तल से खनिज तेल को निकालने के समय होने वाली इसकी बर्बादी को रोका जा सकता है। तेल के शोधन में उन्नत तकनीकी को अपनाकर भी तेल की बरबादी को रोका जा सकता है।
  • तेल के टैंकों तथा तेल की पाइप लाइनों को नियमित रूप से चैक करना चाहिए कि कहीं से तेल रिसाव तो नहीं हो रहा है, क्योकि बूंद-बूंद तेल के रिसाव से भी एक वर्ष में 500 लिटर तेल बरबाद हो जाता है। तेल के विकल्पों की खोज करने के भी प्रयास होने चाहिए। यदि तेल का अभिपूरक प्राप्त हो जाए तो तेल का संरक्षण स्वतः हो जाएगा।
6.

परम्परागत ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं ? परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के स्रोतों का वर्णन कीजिए।यापरम्परागत ऊर्जा के संसाधन क्या हैं? इनके दो प्रमुख संसाधनों का वर्णन भी कीजिए।

Answer»

परम्परागत ऊर्जा संसाधन

परम्परागत स्रोत ऊर्जा के वे स्रोत हैं, जो प्रयोग के पश्चात् समाप्त हो जाते हैं। इसलिए इन्हें अनव्यकरणीय, समापनीय या क्षयशील स्रोत भी कहा जाता है।

परम्परागत ऊर्जा संसाधन के स्रोत

ऊर्जा के परम्परागत साधनों अथवा स्रोतों में से प्रमुख का विवरण निम्नलिखित है
1. कोयला – भारत विश्व के कोयला उत्पादक देशों में छठा स्थान रखता है। अनुमानतः भारत में 250 अरब टन कोयले के सुरक्षित भण्डार हैं। क्षेत्र–भारत का समस्त कोयला गोण्डवाना क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश) तथा टर्शियरी क्षेत्र (कच्छ, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान) में पाया जाता है।
2. खनिज तेल ( पेट्रोलियम) – आज के भौतिक युग की मुख्य संचालन-शक्ति पेट्रोलियम ही है। क्षेत्र–खनिज तेल के उत्पादन में भारत का विश्व में बारहवाँ स्थान है। यहाँ संसार का केवल 0.5% खनिज तेल ही उत्पन्न किया जाता है। भारत में मुख्य रूप से असोम, गुजरात तथा बॉम्बे-हाई में तेल-क्षेत्र स्थित हैं। वर्तमान समय में भारत में तेल की 18 तेलशोधक इकाइयाँ (रिफाइनरी) कार्यरत,
3. जल-विद्युत शक्ति – भारत में शक्ति के साधनों में जल-विद्युत का विशेष महत्त्व है। यहाँ जल-शक्ति का असीमित भण्डार उपलब्ध है। अनुमान है कि जल-शक्ति के द्वारा भारत में 4 करोड़ किलोवाट से भी अधिक विद्युत शक्ति उत्पन्न की जा सकती है।
क्षेत्र – भारत में जल-विद्युत शक्ति उत्पादक क्षेत्रों का विवरण निम्नलिखित है

  • महाराष्ट्र – यह जल-विद्युत उत्पादन में अग्रणी है। टाटा जलविद्युत (तीन शक्ति-गृह), भिवपुरी, खोपोली, मीरा, कोयना, पूर्णा, वैतरणा, भटनगर-बीड़ आदि मुख्य जल-विद्युत केन्द्र हैं।
  • कर्नाटक – विद्युत शक्ति का उत्पादन सर्वप्रथम इसी राज्य में हुआ था। कावेरी पर शिवसमुद्रम्, शिमला, जोग, तुंगभद्रा, शरावती आदि प्रमुख जल-विद्युत योजनाएँ हैं।
  • तमिलनाडु – पायकारा, कावेरी पर मैटूर, ताम्रपर्णी पर पापानासम्, मोयार, कुण्डा, पेरियार, परम्बिकुलम्, अलियार प्रमुख परियोजनाएँ हैं।
  • पंजाब हिमाचल प्रदेश मण्डी, गंगुछाल, कोटला, भाखड़ा तथा II, बैरासिडल, चमेरा आदि।
  • केरल – पल्लीवासल, सेंगुलम्, शोलयार, पोरिंगलकुथु, नेरियामंगलम्, पोन्नियार, शबरीगिरि, इडुक्की, कट्टियाडी आदि प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ हैं।
  • उत्तर प्रदेश ऊपरी गंग नहर पर ‘गंगा इलेक्ट्रिक ग्रिड’ महत्त्वपूर्ण है, जिसके अन्तर्गत पथरी, मुहम्मदपुर, निरगाजनी, चितौरा, सलावा, भोला, पल्हेड़, सुमेरा आदि स्थानों पर कृत्रिम बाँध बनाकर जल- विद्युत का विकास किया गया है। रिहन्द, माताटीला, यमुना हाइडिल, रामगंगा जल विद्युत परियोजनाएँ भी उल्लेखनीय हैं।
  • जम्मू-कश्मीर – सिन्ध, झेलम, सलाल, चेनानी, दुलहस्री आदि मुख्य जल-विद्युत परियोजनाएँ हैं।

4. अणु शक्ति या परमाणु बिजली – जिन खनिजों में रेडियोधर्मी तत्त्व पाये जाते हैं, उन्हें ‘परमाणु खनिज’ कहते हैं; जैसे-यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम, रेडियम आदि। इन खनिजों में परमाणुओं तथा अणुओं के विघटन से एक प्रकार का ताप या शक्ति उत्पन्न होती है, जिसे ‘परमाणु शक्ति’ कहा जाता है।
क्षेत्र भारत में अणु शक्ति केन्द्र निम्नलिखित हैं—

  • ट्रॉम्बे अणु शक्ति केन्द्र
  • तारापुर परमाणु शक्ति केन्द्र
  • कोटा परमाणु शक्तिगृह
  • इन्दिरा गांधी अणु शक्ति केन्द्र, कलपक्कम (चेन्नई)
  • नरौरा परमाणु शक्ति केन्द्र
  • काकरापारा परमाणु शक्ति केन्द्र (गुजरात)।
7.

शक्ति के संसाधन के रूप में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस का संक्षिप्त विवरण लिखिए।

Answer»

खनिज तेल (पेट्रोलियम)

शक्ति के संसाधन के रूप में खनिज तेल का अत्यधिक महत्त्व है। कोयले द्वारा उत्पन्न ऊर्जा का प्रयोग केवल कारखानों तथा घरों में सम्भव है, किन्तु चालक शक्ति के रूप में परिवहन के साधनों में खनिज तेल ही अधिक उपयोगी है।

पेट्रोलियम का शाब्दिक अर्थ है-चट्टानी तेल। यह भूगर्भीय चट्टानों से निकाला जाता है। इसकी उत्पत्ति भूगर्भ में दबी हुई वनस्पति तथा जल-जीवों के रासायनिक परिवर्तन के फलस्वरूप हुई है। यह अवसादी शैलों में पाया जाता है। भूगर्भ से निकले कच्चे तेल में अनेक अशुद्धियाँ मिली होती हैं। इन अशुद्धियों का तेलशोधनशालाओं में रासायनिक क्रियाओं द्वारा शोधन किया जाता है। भारत में खनिज तेल के भण्डार सीमित ही हैं। भारत प्रति वर्ष लगभग 30 मिलियन मी टन अशुद्ध खनिज तेल का उत्पादन करता है, जो उसकी कुल आवश्यकता को मात्र 60% पूरा कर पाता है। अतएव भारत को प्रति वर्ष खनिज तेल के आयात पर विदेशी मुद्रा का व्यय करना पड़ता है।

प्राकृतिक गैस

प्राकृतिक गैस के भण्डार सामान्यत: तेल-क्षेत्रों के साथ ही पाये जाते हैं। इस प्रकार गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश तथा ओडिशा के तटों से दूर तेल-क्षेत्रों में भी प्राकृतिक गैस के भण्डार मिले हैं। लेकिन तेल-क्षेत्रों से अलग केवल प्राकृतिक गैस के भण्डार त्रिपुरा और राजस्थान में खोजे गये हैं। इसका प्रयोग कुकिंग गैस के रूप में, उर्वरक उद्योग तथा विद्युत उत्पादन में किया जाता है। 2006-07 में देश में 30792 मिलियन घन मीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन हुआ। ऊर्जा संसाधनों की कमी वाले देशों के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धि एक अमूल्य उपहार है।

8.

परमाणु ऊर्जा में प्रयोग होने वाले खनिजों के नाम लिखिए। भारत में वे कहाँ मिलते हैं?

Answer»

परमाणु ऊर्जा में प्रयुक्त होने वाले खनिज और जिन राज्यों में वे पाये जाते हैं, उनके नाम हैं

  • यूरेनियम–बिहार और राजस्थान में।
  • थोरियम, बेरिलियम, ग्रेफाइट, मोनोजाइट–केरल की समुद्रतटीय रेत में।
  • चेरोलाइट तथा जिरकोनियम- बिहार में।
9.

डिगबोई किस खनिज से सम्बन्धित है ?

Answer»

डिगबोई खनिज तेल पेट्रोलियम के परिष्करण से सम्बन्धित है।

10.

खनिज तेल को शोधनशालाओं में किन-किन साधनों से भेजा जाता है?

Answer»

खनिज तेल को शोधनशालाओं  में टैंकरों व पाइप लाइनों से भेजा जाता है।

11.

दो शक्ति के संसाधनों के नामों का उल्लेख कीजिए।

Answer»
  • कोयला
  • पेट्रोलियम पदार्थ।
12.

परमाणु खनिज किसे कहते हैं ?

Answer»

जिन खनिजों से परमाणु शक्ति की उत्पत्ति होती है, उन्हें परमाणु खनिज कहते हैं।

13.

‘काला सोना’ और ‘तरल सोना’ किसे कहते हैं ?

Answer»

कोयले क़ो ‘काला सोना और खनिज तेल को ‘तरल सोना’ कहा जाता है।

14.

भारत के खनिज तेल उत्पादन के दो क्षेत्रों का नाम व स्थिति सहित उल्लेख कीजिए।याभारत में पेट्रो-रसायन के किन्हीं दो केन्द्रों के नाम लिखिए।

Answer»

भारत के खनिज तेल उत्पादन के दो क्षेत्रों के नाम हैं

  • बॉम्बे हाई अपतटीय क्षेत्र-मुम्बई से 120 किमी दूर गहरे सागर में स्थित।
  • अंकलेश्वर (गुजरात, नर्मदा नदी पर बड़ौदा से 44 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित)।
15.

भारत की कोई चार तेलशोधनशालाओं के नाम लिखिए।

Answer»

भारत की चार तेलशोधनशालाओं के नाम हैं—

  • ट्रॉम्बे-! (मुम्बई के समीप महाराष्ट्र)
  • विशाखापत्तनम् (आन्ध्र प्रदेश)
  • बरौनी (बिहार) तथा
  • मथुरा (उत्तर प्रदेश)।
16.

जीवाश्म ईंधन का उदाहरण है(क) कोयला(ख) परमाणु खनिज(ग) जल ऊर्जा(घ) भूतापीय ऊर्जा

Answer»

सही विकल्प है (क) कोयला

17.

डिगबोई तेल क्षेत्र किस राज्य में है?(क) त्रिपुरा(ख) असोम(ग) गुजरात(घ) महाराष्ट्र

Answer»

सही विकल्प है (ख) असोम

18.

कोटा परमाणु शक्ति केन्द्र किस प्रदेश में स्थित है?(क) राजस्थान(ख) तमिलनाडु(ग) महाराष्ट्र(घ) गुजरात

Answer»

सही विकल्प है (क) राजस्थान

19.

पवन ऊर्जा का उत्पादन किस राज्य में होता है?(क) गुजरात(ख) हरियाणा(ग) पंजाब(घ) उत्तर प्रदेश

Answer»

सही विकल्प है (क) गुजरात

20.

ऊर्जा का नवीकरण संसाधन है(क) परमाणु ऊर्जा(ख) जल विद्युत(ग) कोयला(घ) पेट्रोलियम

Answer»

सही विकल्प है (ख) जल विद्युत

21.

रानीगंज कोयले की खान किस प्रदेश में है?(क) बिहार में(ख) प० बंगाल में(ग) ओडिशा में(घ) मध्य प्रदेश में

Answer»

सही विकल्प है (ख) प० बंगाल में

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