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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

The number of primary and secondary hydroxyl groups in ribose are :A. 1, 3B. 2, 3C. 3, 1D. 3, 2

Answer» Correct Answer - A
2.

A polymer used in paints is :A. NomexB. ThiokolC. SaranD. Glyptal

Answer» Correct Answer - D
3.

The half-life period of zero order reaction A `to` product is given by :A. `([A]_(0))/(k)`B. `(0.693)/(k)`C. `([A]_(0))/(2k)`D. `(2[A]_(0))/(k)`

Answer» Correct Answer - C
4.

An antifertility drug is :A. NovestrolB. HistamineC. VeranalD. Equanil

Answer» Correct Answer - A
5.

Propene on oxidation with diborane in presence of alkaline hydrogen peroxide gives :A. propan-1-olB. propan-2-olC. allyl alcoholD. propan-1, 2-diol

Answer» Correct Answer - A
6.

Define : (a) Enthalpy of atomization (b) Enthalpy of vaporization

Answer» (a) Enthalpy of atomization : The enthalpy change accompanying the dissociation of all the molecules in one mole of a gas phase substance into gaseous atom is called enthalpy of atomization. It is denoted by `Delta_("ato")H`.
(b) Enthalpy of vaporization : The enthalpy change that accompanies the vaporization of one mole of liquid without changing its temperature at constant pressure is called enthalpy of vaporization. It is denoted by `Delta_("vap")H`.
7.

22.22 gram of urea was dissolved in 300 grams of water. Calculate the number of moles of urea and molality of the urea solution. (Given : Molar mass of urea = 60 gram `mol^(-1)`)

Answer» Given, Mass of urea = 22.22 gram
Mass of water = 300 gram
`therefore` No. of mole of urea `= ("Mass of urea")/("Molar mass of urea")`
`=(22.22)/(60)=0.370` moles
Molality (m) = `("Mole of urea")/("Mass of water")xx1000`
`=(0.370)/(300)xx1000`
Molality (m) = 1.23 moles `kg^(-1)` .
8.

All the rest of her children, she said, are on the nuclear blacklist of the dead, all the rest, unless the whole world understands- that peace is a woman. A thousand candles then lit in her starry eyes, and I saw angels bearing a moonlit message : Peace is indeed a pregnant woman Peace is a mother. What message does the poet give through this poem?

Answer» The poet wants to say that we should avoid wars. Rather, we should go for peace and happiness.
9.

But even in a poverty-free world where every man and woman would earn enough to take care to themselves and their family, there would still be situations of temporary poverty due to a sudden catastrophe or misfortune, a bankruptcy or business downturn leading to failure, or some personal disease or disaster. A poverty-free wold might see a whole group of families, locations, or even regions devastated by some shared disasters, such as floods, fires, cyclones, riots, earthquakes or other disasters. But such temporary problems could be taken care of by the market mechanism through insurance and other self-paying programmes, assisted of course by social-consciousness-driven enterprises. There would always remain differences in lifestyle between people at the bottom of society and those at the top income levels. Yet that difference would be the difference between the middle-class and luxury class, just as on trains in Europe today you have only first class and second-class carriages, whereas in nineteenth century there were third-class and even fourth-class carriages- sometimes with no windows and just hay strewn on the floor. Can we really create a poverty-free world? A world without third-class or fourth-class citizens a world without a hungry, illiterate, barefoot under-class ? What can we do to help the poor in our society?

Answer» In the order to help the poor in our society, we should create some organisations to collect funds for them. We can also arrange some events, so that the money collected could be used for the poor people.
10.

उपर्युक्त परिच्छेद का एक - तिहाई (१/३ ) शब्दों में सार लिखिए तथा उसे उचित शीर्षक दीजिए ।

Answer» स्वार्थ और अन्याय की प्रतिस्पर्धा के सिधान्तो पर अनेक देशो की राजनीती चलती है किन्तु प्रेम धर्म सहानुभूति, सहायता मैत्री निर्भयता आदि गुणों से मनुष्य का विकास करता है मित्र के सबल होने से हम भी सशक्त माने जाएँगे निर्बल होने पर हम कमजोर माने जाएँगे ।
11.

निम्नलिखित अपठित गद्य खंड को ध्यान से पढ़िए और उस पर आकलन हेतु पांच ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर मात्रा एक - एक वाक्य में हो । स्वार्थ और अन्याय की प्रतिस्पर्धा आज सर्वव्यापी हो गई है इसी सिद्धांत पर अनेक देशो की राजनीति चलती है सच्चा सुधार तो प्रेम - धर्म और पड़ोसी-धर्म में ही है हमें श्रद्धा - पूर्वक अपने अंदर इसी पड़ोसी - धर्म का विकास करना चाहिए । जी सज्जनता दिखलाते हो उनके साथ मैत्री और जो दुर्जन बन गए हो उनके साथ असहयोग करना, यही प्रेम-धर्म का नियम है प्रेम - धर्म सहानुभूति रखता है सहायता देता है , परन्तु दीं बनकर सहायता की अपेक्षा नहीं करता । प्रेम - धर्म निर्भय होता है इसलिए वह अमर्यादित है । हम जिससे प्रेम करते है यदि उसकी शक्ति बढ़ती है तो हमें भय नहीं होता । हमारा मित्र जितना निर्बल होगा उतने ही हम कमजोर माने जाएँगे ।

Answer» (१) अनेक देशो की राजनीति कौन से सिद्धांत पर चलती है ?
(२) प्रेम धर्म की विशेषताएँ क्या है ?
(३) प्रेम धर्म के अमर्यादित होने का क्या कारण है ?
(४) प्रेम धर्म का नियम क्या है ?
(५) हम कमजोर कब माने जाएंगे ?
12.

निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए : नर्स कहीं चला गई था ।

Answer» नर्स कहीं चली गई थी ।
13.

निम्नलिखित विषयो पर निबंध लिखिए एक घायल सैनिक की आत्मकथा

Answer» एक घायल सैनिक की आत्मकथा
दादी की बिमारी के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती पड़ा बगल के कमरे में जोर से कराहटों की आवाज सुनाई दी । मैंने देखा तो एक नौजवान घायल अवस्था में दर्द की मारे कराह रहा था । मैंने हमदर्दी जताई तो वह अपनी जुबान से अपनी कहानी बयान करने लगा । मुझे पता चला कि वह कोई आम ,नौजवान नहीं था, बल्कि अपने देश के लिए सीमा पर दुश्मनो से मुकाबला करते समय बुरी तरह से घायल हुआ जवान था । वह कहने लगा, ' मैं एक घायल सैनिक हूँ । अपने देश की सुरक्षा करते समय मुझे गोली लगी और में घायल हो गया । जैसे - जैसे अन्य जवान मुझे छावनी में लेकर आए, लेकिन मुझे गर्व है कि मैं देश के कुछ काम तो आ पाया हूँ । हमारे देश के दुश्मन देश पर आक्रमण कर रहे थे मैंने अपनी जान की परवाह न करते हुए उनसे मुकाबला किया । कई दुश्मन सैनिको को मैंने घायल किया और उनसे मुकाबला लिया । कई दुश्मन सैनिको को मैंने घायल किया और कुछ को मार भी डाला । उनसे लड़ते हुए अगर मैं मर भी जाता तो भी मुझे कोई गम नहीं था बल्कि फक्र होता कि मेरी जान के लिए समर्पित हो गई
मैंने बचपन में ही सैनिक बनने की ठान ली थी, मुझे भी उन स्वांतत्र्य वीरो की तरह बनना था जिन्होंने देश की आन-बान-शान के लिए अपने आपको न्योछावर किया । कई कठिनाइयों से गुजरकर जख्मो को झेलकर देश को आजादी दिला दीं ।
जब मैं सैनिक बन गया तब मेरा परिवार थोड़ा भावुक हो गया, किन्तु उन्हें मुझ पर फक्र भी था, लेकिन वे यह भी चाहते थे कि मैं अपने देश की सेवा करूँ, देश की सुरक्षा करूँ । मेरे परिवार के लिए अपने खुद के बेटे से बढ़कर देश के अन्य सपूतो और उनके परिवारों की रक्षा अधिकतम मायने रखती है । वैसे मेरे लिए मेरा देश ही मेरा परिवार है और उनकी रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है । उसकी खातिर अगर मुझे अपने प्राणो की बलि भी चढ़ानी पड़े तो मेरे लिए वह सौभाग्य की बात होगी ।
मेरे घायल होने से मेरा शारीरिक दर्द बाद गया है । शायद कई दिनों के लिए मुझे दुश्मनो से लड़ाई करना मुमकिन भी न हो मगर मैं उम्मीद करता हूँ कि में जल्द ही ठीक हो जाऊं और देश की सीमा पर दुश्मनो के सामने फिर से सीना तान के खड़ा रहूँ । घायल होने पर मेरे जख्म या उनकी निशानियाँ मुझे मेरा फर्ज निभाने का हौसला और भी बढ़ाती है मेरी हिम्मत और मानसिक ताकत को और भी बुलंद करती है ।
इसके पहले भी मेरी ऐसी स्थिति रही है । मैं एक घायल शेर की तरह देश के दुश्मनो के लिए और भी खतरनाक हो चुका हूँ मेरा घायल होना मेरी कमजोरी न समझी जाए । मैं इसी देश की मिटटी का बना हूँ । मैं पहाड़ हूँ मैं पत्थर हूँ मैं किनारो से जूझती - टकराती, हुई एक लहार हूँ । मेरा घायल होना मेरी हार नहीं ।
बस सरकार से मेरी एक गुजारिश रहेगी कि मुश्किलों के समय में अगर मैं अपने परिवार को संभालने में नाकामयाब रहा तो सरकार मेरे परिवार कि जिम्मेदाई उठाए ।
अब मेरी कोशिश और जिद यही रहेगी कि जब मैं जल्द ही ठीक होकर वापस सीमा पर दुश्मनो से मुकाबला करने लौटूँ तो पहले से भी अधिक दुश्मनो को मार गिराऊं और अपने देश के तिरंगे को फक्र से लहराता हुआ देखूँ ।
घायल सैनिक की बुलंद जुबानी सुनकर मेरे तो रौंगटे खड़े हो गए और मेरी हिम्मत भी बाद गई ऐसे देशभक्त सैनिको के परिवारों के लिए करने की अब मैंने ठान ली है । ये मेरा भी देश के लिए एक छोटा सा योगदान रहेगा ।
14.

निम्नलिखित पद्यांशों को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नो के उत्तर लिखिए : ' जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोय तू फूल । तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल ।।' प्रस्तुत दोहा किस संत कवि का है ?

Answer» प्रस्तुत दोहा संत कवि कबीर का है ।
15.

निम्नलिखित पद्यांशों को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नो के उत्तर लिखिए : मेरी हर देश की जय हो स्वार्थभाव का क्षण - क्षण क्षय हो , जल - जलकर जीवन दूँ जग को, ltbr gt बस इतना सम्मान चाहिए । किसका क्षय होना चाहिए ?

Answer» स्वार्थी प्रवृत्ति का क्षय होना चाहिए ।
16.

सनिम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए : यानी बुआ का चरित्र - चित्रण कीजिए ।

Answer» सयानी बुआ समय की बेहद पाबन्द महिला है उनके परिवार का सारा कामकाज बया की बनाई गई समय - सारिणी के अनुसार होता है । बुआ अपने परिवार के सदस्यों से बड़ी कठोरता के साथ उस समय - सारिणी का पालन करवाती है उनका व्यक्तित्व पूरे परिवार पर हावी है उनके खिलाफ बोलने की किसी को हिम्मत नहीं पड़ती सायानी बुआ जितनी समय की पाबन्द है उतनी ही कुशल अपनी वस्तुओ का उपयोग करने और उनको संभालकर व्यवस्थित रूप से रखने में है उनकी गृहस्थी जमे पंद्रह वर्ष हो चुके है पर उनके घर का साज - सामान देखकर लगता है जैसे सब कुछ कल का ही हो। अपनी किसी भी चीज का टूट जाना उनसे बरदाश्त नहीं होता । तोड़ - फोड़ से उन्हें सख्त नफ़रत है एक बार नौकर से सुराही टूट गई थी तो उन्होंने उसे इस कसूर पर बहुत पीटा था । बुआ जी को अपने घर की व्यवस्था और साज-सजावट पर गर्व है वे मानती है कि उनके बिना घर को इतना व्यवस्थित कोई नहीं रख सकता । जो बेटी उनके भय से उनके सामने कुछ बोल नहीं सकती उसकी बीमारी उन्हें व्याकुल कर देती है । उन्हें दुःख है कि उसकी देखभाल के लिए वे उसके साथ पहाड़ पर नहीं जा सकती । तीन दिन तक उसका समाचार न मिलने पर वे बेहाल हो जाती है । पत्र मिलने पर अन्नू के चल बसने की गलतफहमी से वे फुट - फूटकर रो पड़ती है । अतः में अन्नू के सकुशल होने की बात जानने पर वे खिलखिलाकर हँस पड़ती है । इस ख़ुशी में वे कीमती प्याले के टूट जाने की भी परवाह नहीं करती है । सचमुच सयानी बुआ उस नारियल फल के समान है, जो ऊपर से कठोर, भीतर से कोमल होता है ।
17.

निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नो के उत्तर लिखिए : ' सांभा - साहब कल रात यह भेड़िया धने जंगलो में पेड़ काटता पाया गया । आपके हुक्म से लोग हजारो पेड़ लगा रहे है लेकिन यह पापी उन पेड़ो को काटकर बेच देता है ।' किसके हुक्म में लोग हजारो पेड़ लगा रहे है ?

Answer» सरपंच गबरुसिहं के हुक्म से लोग हजारो पेड़ लगा रहे है ।
18.

निम्नलिखित पद्यांशों को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नो के उत्तर लिखिए : मेरी हर देश की जय हो स्वार्थभाव का क्षण - क्षण क्षय हो , जल - जलकर जीवन दूँ जग को, ltbr gt बस इतना सम्मान चाहिए । किस तरह का सम्मान चाहिए ?

Answer» जल-जलाकर संसार को अपना अपना जीवन देने का अवसर पाने का सम्मान चाहिए ।
19.

निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए : चित्रगुप्त की परेशानियों को रेखांकित कीजिए ।

Answer» लेखक अस्पताल में थे और चित्रगुप्त उनके प्राण लेने आए थे । तब उनसे प्रार्थना की गई कि वे शनिवार को आएं तो उचित होगा । चित्रगुप्त ने वह प्रार्थना स्वीकार ली और शनिवार को वे आए । इस बार अस्पताल में मुंशी ने उन्हें अस्पताल का न्य नियम बताते हुए कहा कि अस्पताल में कोई भी चीज अथवा मरीज के प्राण ले जाने के लिए उन्हें बड़े बाबू के दफ्तर से एक फ़ार्म लेकर भरना पडेगा । स्वतंत्रता के पहले तक चित्रगुप्त को ऐसे किसी फ़ार्म भरने के चक्कर में नहीं फसना पड़ता था । यह फ़ार्म पाने में चित्रगुप्त को पूरा एक दिन लग गया । अब मुसीबत यह थी कि उस फ़ार्म की आठ प्रतियाँ सही-सही भरनी थी । फार्म पाने की अपेक्षा यह काम अधिक कष्टदायक था, क्योकि इसमें मरने वाले का नाम, उसका पेशा, हुलिया, बल्दियत, ऊंचाई, चौड़ाई और वजन की जानकारी ईमानदारी से दर्ज करनी थी । फार्म भरने के बाद चित्रगुप्त उसे बड़े बाबू के पास ले गए । वहाँ फिर एक मुसीबत कड़ी हो गई । बड़े बाबू ने उन्हें फ़ार्म पर किसी ऐसे संभ्रात व्यक्ति का काउंटरसाइन करवाने के लिए कहा, जो उन्हें भली -भांति जनता हो । यह सुनकर चित्रगुप्त घबरा गए और कई घंटो तक घूमते रहे, पर उन्हें फ़ार्म पर काउंटरसाइन करने वाला कोई व्यक्ति नहीं मिला । आखिरकार, उन पर दया खाकर लेखक ने ही अपना काउंटरसाइन कर दिया । इसके बाद फार्म पर बीस रुपए की रसीदी टिकट लगाने की समस्या आई सब डाकखाने बंद हो चुके थे । टिकट कहीं से मिलने की संभावना नहीं थी और चित्रगुप्त का दौर रविवार तक ही था अंत में बड़े बाबू की सलाह से उनकी समस्या हल हो गई । इस प्रकार, लेखक के प्राण लेने के लिए आए हुए चित्रगुप्त को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा ।
20.

निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर नीचे दिए प्रश्नो के उत्तर लिखिए : ' सांभा - साहब कल रात यह भेड़िया धने जंगलो में पेड़ काटता पाया गया । आपके हुक्म से लोग हजारो पेड़ लगा रहे है लेकिन यह पापी उन पेड़ो को काटकर बेच देता है ।' पेड़ क्यों काटे जाते है ?

Answer» पेड़ो की लकड़ी बेचने के लिए पेड़ काटे जाते है ।
21.

निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए : रहीम ने प्रेम की गली को साँकरी क्यों कहा है ?

Answer» ईश्वर की प्राप्ति में मनुष्य का अहंकार सबसे बड़ी बाधा है । इसी सन्दर्भ में रहीम कहते है हमारा ह्रदय अत्यंत संकुचित है । उसमे केवल एक के लिए स्थान है । ईश्वर या अहंकार इन दोनों में से सिर्फ एक ही उसमे बीएस सकता है इसलिए जो व्यक्ति ईश्वर को पाना चाहता है उसे सबसे पहले अपने अहंकार का त्याग कर देना चाहिए । ईश्वर और अहं भाव दोनों एक साथ नहीं रह सकते । जब तक व्यक्ति के ह्रदय में अहंकार या अभिमान रहेगा, तब तक उसमे ईश्वर का प्रवेश नहीं हो सकता । इस प्रकार ईश्वर को पाने के सन्दर्भ में रहीम ने ह्रदय को प्रेम की गली कहते हुए उसे साँकरी यानी कि संकुचित कहा है ।
22.

निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए : जीवन में रसायनो का महत्त्व स्पष्ट कीजिए ।

Answer» जिस युग में हम रहते है उसे रसायनो का युग कहते है हमारे पर्यावरण की सारी वस्तुएँ रासायनिक यौगिकों से बनी है और ये यौगिक हमारे जीवन के आधार है । जैसे, पानी, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक रासायनिक है । चाय, दूध लस्सी आदि को मीठा बनाने वाली चीनी (शक्कर) कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का एक रासायनिक मिश्रण है कोयला, तेल, तरह - तरह की औषधिया भी रसायन के ही रूप है । उपयोग में लाए जाने - वाले एंटीबायोटिक्स, एस्प्रीन और पेनिसिलीन भी रसायन है अनाज, सब्जियाँ, फल और मेवे भी रासायनिक पदार्थ है फसलों को सुरक्षित रखने के लिए जिन कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है वे रासायनिक पदार्थ ही है दाल आदि को स्वादिष्ट बनाने वाला नमक भी सोडियम और क्लोरीन के यौगिक से बना हुआ एक रासायनिक पदार्थ है । इस प्रकार हमारा जीवन रसायनो पर पर अवलम्बित है हमारे जीवन की सभी जरूरते रसायन ही पूरी करते है इसलिए हमारे जीवन में रसायन बड़ा ही महत्त्व रखते है ।
23.

निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर दीजिए : सचदेव बाबू के घर का दरवाजा न खुलने पर यदु मिस्त्री ने क्या किया ?

Answer» बरसाती अँधेरी रात में यदु मिस्त्री इंजीनियर सचदेव बाबू से कुछ रुपए उधार लेने की आशा में जब उनके घर के द्वार तक आ पहुंचा तो बड़ी देर तक वह उनका दरवाजा थपथपाता रहा । परिचित लोगो पर भी भरोसा नहीं किया जाए ऐसे शहर के हालात होने के कारण इंजीनियर बाबू ने यदु मिस्त्री की आवाज पहचानने के बावजूद भी उसके लिए दरवाजा खोलने का सहस नहीं किया । देर तक दरवाजा थपथपाने के बाद यदु मिस्त्री को याद आया कि बाहर के गेट से आवाज अंदर नहीं पहुँचती वह गेट फाँदकर बालकनी में मुख्या दरवाजे के पास पहुँच गया । मिस्त्री मजदूर सचदेव बाबू को बड़े साहब, हाकिम यदु इन्ही नामो से उन्हें आवाज लगाने लगा । उसे विश्वास था कि उसकी आवाज पहचानने के बाद सचदेव बाबू दरवाजा जरूर खोल देंगे । फिर भी दरवाजा न खुलने पर उसे लगा कि परिचित आवाज में लूटपाट की घटनाओं के कारण साहब दर गए है । लेकिन अपने प्रति उनके आत्मीय एवं स्नेहपूर्ण व्यवहार को याद करके उसने मन में आने वाली आशंकाओ को झटक दिया उसे अब भी यह विश्वास था कि उसकी आवाज सुनकर सचदेव बाबू दरवाजा खोलेंगे और उसकी मदद करेंगे । इसी आशा और उम्मीद के सहारे, यदु मिस्त्री, सचदेव बाबू के अनेक थपथपाहट के बाद भी दरवाजा न खोलने पर उनके दरवाजे पर आवाज लगाते और थपथपाते हुए डटा हुआ था । उसने अपने प्रयत्न महि छोड़े ।