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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

कवि द्धारिका प्रासाद माहेश्वरी सूरज सा _______ चाहते है।1. दमकना2. हसना3. दौडना4. भागना

Answer»

Correct Answer is :1. दमकना

2.

रिक्त स्थानों की पूर्ती करो :1) कवि शशि से _________ लेना चाहते है2) कवि पर्वत से_______ लेना चाहते है।

Answer»

1) कवि शशि से शितलता लेना चाहते है
2) कवि पर्वत से दृढता लेना चाहते है।

3.

नारियल को झट से छीनकर बाबू भाई से नारियलवाले ने क्या कहा ?

Answer»

नारियल को झट से नारियल छीनकर बाबूभाई से नारियलवाले ने कहा कि, माफ करो काका। एक रुपया या फिर कुछ नहीं।

4.

नाववाले से बाबू भाई ने नारियल को पच्चीस पैसे में देने के लिए किस तरह आग्रह किया ?

Answer»

नाववाले से बाबूभाई ने नारियल को पच्चीस पैसे में देने के लिए हुसतरह आग्रह किया। कि पचास पैसे ज्यादा है, मैं सिर्फ पच्चीस पैसे दूंगा। इतनी दूर से पैदल आया हूँ, थक भी गया हूँ। मेरी मेहनत बेकार हो गई।

5.

बाबू भाई मन-ही-मन क्या सोचने लगे ?

Answer»

बाबू भाई मन ही मन सोचने लगे कि आखिर पचास पैसे तो पूरे पचास पैसे है। वैसे भी मेरी टाँगों में अभी भी दम है।

6.

प्रथम पाँच पंक्तियाँ कंठस्थ करो:सूरज –चंदा – झलमल – तारों – मेरी -

Answer»

सूरज – सा दमकूँ मै
चंदा – स चमकूँ मै
झलमल – झलमल उज्जवल
तारों – सा दमकूँ मै
मेरी अभिलाषा है

7.

कवि द्धारिका प्रासाद माहेश्वरी फूलों सा _______ चाहते है।1. महकना2. बहना3. उमडना4. उतरना – चढना

Answer»

Correct Answer is : 1. महकना

8.

सीखो।1. फूल 2. सूरज 3. विहग 4. कोयल 5. चंदा

Answer»

1. फूल – महकता है
2. सूरज – दमकता है
3. विहग – चहकता है
4. कोयल – कुहकता है
5. चंदा – चमकता है

9.

कवि द्धारिका प्रासाद माहेश्वरी कोयल सा _______ चाहते है।1. गाना2. बोलना3. कुहकना4. उडना

Answer»

Correct Answer is : 3. कुहकना

10.

वर्तनी शुद्ध करो :1. अभिलषा 2. फुल3. सुरज 4. परवत 5. नब

Answer»

1. अभिलषा – अभिलाषा
2. फुल – फूल
3. सुरज – सूरज
4. परवत – पर्वत
5. नब – नभ

11.

कुमार कहाँ रहता है?

Answer» कुमार मदकरि मार्ग चित्रदुर्ग मे रहता है।
12.

प्रतीक किस मार्ग पर रहता है ?

Answer»

प्रतीक कुवेम्पु मार्ग पर रहता है

13.

चामुंडी पहाड कहाँ है ?

Answer»

चामुंडी पहाड मैसूर मे है।

14.

कुमार ने प्रतीक को क्या सलाह दी?

Answer»

कुमार ने प्रतीक को तुम भी अपने साथ मैसूर जाने का सलाह दी।

15.

किसने किसको पत्र लिखा?

Answer»

कुमार ने प्रतीक को पत्र लिखा।

16.

UNO का सचिवालय कहाँ पर है ?(A) हेग(B) वाशिंग्टन(C) लंडन(D) न्यूयॉर्क

Answer»

(D) न्यूयॉर्क

17.

बहु वचन रुप लिखिए :प) बच्चा फ) कपड़ा ब) किताब भ) रास्ता म) नदी 

Answer»

प) बच्चा – बच्चें
फ) कपड़ा – कपड़े
ब) किताब – किताबें
भ) रास्ता – रास्तें
म) नदी – नदियाँ

18.

कुमार किसके साथ मैसूर गया था और उसने वहाँ क्या – क्या देखा?

Answer»

कुमार अपने माता – पिता के साथ मैसूर गय था। वहाँ उसने चामुंडी पहाड, चिडियाघर, राजमहल बृंदावन आदी को देखा।

19.

अन्य लिंग रुप लिखिए :क) माता ख) लड़का ग) गाय घ) देव ए) स्त्री

Answer»

क) माता – पिता
ख) लड़का – लड़की
ग) गाय – बैल
घ) देव – देवी
ए) स्त्री – पुरुष

20.

कुमार मैसूर कब गया था?

Answer»

कुमार मैसूर को छुट्ठियों मे गया था।

21.

मैसूर कैसा नगर है?

Answer»

मैसूर सुंदर नगर है 

22.

महामंत्री की सहायता करने के लिए कौन-कौन होते है ?

Answer»

महामंत्री की सहायता करने के लिए मंत्री व्यवस्थापक, सहायक, अनुवादक और विशेषज्ञों का समावेश किया जाता है ।

23.

तुम दुध पिओगे। आप दुध पियेंगे

Answer»

तुम मिठाई खओगे। आप मिठाई खयेंगे

24.

मैंने फल खाया। हमने फल खाया

Answer»

मैंने नीबू खरीदा। हमने नीबू खरीदा।

25.

मैसूर के बारे में पाँच वाक्य लिखिए :

Answer»

मैसूर सुंदर नगर हैं। इसे सांस्कृतिक नगर भी कहते हैं। यह एतिहासिक प्रसिद्धस्थान भी है। और दर्शनीय सथान भी। मैसूर नगर में देखने लायक बहुत सारे जगह हैं। 

जैसे – राजमहल, चिडियाघर,चामुण्डि पहाड़ ललित महल, वृन्दावन

26.

सचिवालय किसे कहते हैं ?

Answer»

संयुक्त राष्ट्र के महामंत्री के कार्यालय को सचिवालय कहते हैं ।

27.

बोल ऊठी बिटिया कविता का सारांश लिखिए ।

Answer»

“सुभद्राकुमारी चौहान” शैराव के विविध चित्र बहुत सहज शैली में व्यक्त करनेवाली कवियित्री हैं। इस कविता में बिटिया की बोली का और मिट्टी खाने के प्रसंग का वर्णन है। माँ- बेटी का मधुर वात्सल्य का चित्रण इस में निहित है।

कवियित्री कहती है कि – “मैं बचपन को बुला रही थी, तब मेरी बिटिया बोल उठी।” तब मेरी कुटिया (घर) नंदनवन जैसी आनंद से भर गयी।

मेरी बेटी मुझे,”माँ आओ” कहकर बुला रही थी। वह मि ी खाकर, हाथ में भी लाभी थी। और मुझे उस मिी को दिखाने लगी। – उस्की आँखों के कुतुहल छलक रही थी। उसका अंग आनंद से पुलकित हो रहा था। मुँह पर लालिमा और विजय गर्व से वह झलक रही।।

मैंने सहज रुप से बेटी से पूछा – “यह क्या लायी “? बोल उठी वह माँ खाओ”। तब मेरा हृदय खुशी से प्रकुलित ही उठी और कहने लगी तुम्ही खाओ।

28.

उदाहरण के अनुसार तुकांत शब्द चुनकर लिखो :उदाहरण : बाल – चाल1. जान 2. उठाया 3. आते 4. भेड 5. सच्चे 

Answer»

1. जान – पान
2. उठाया – गिराया
3. आते – जाते
4. भेड– पेड
5. सच्चे – बच्चे

29.

विलोम शब्दों का मिलन करो :1.    वरदान 2.    सुख 3.    बलवान 4.    धनी 5.    जीवन 6.    सुबह 7.    इतना 8.    पवित्र 

Answer»

1.    वरदान – आभिशाप

2.    सुख – दुःख

3.    बलवान – बलहीन

4.    धनी – निर्धन

5.    जीवन – मरण

6.    सुबह – शाम

7.    इतना – उतना

8.    पवित्र – अपवित्र

30.

विलोम शब्द लिखिए :1.   दिन2.   मीठा3.   छोटी4.   बहुत5.   सही6.   अच्छा7.   दूर8.   जवाब9.   सामने10.  पसंद11.  खरीदन

Answer»

1.   दिन x रात

2.   मीठा x कड़वा

3.   छोटी x बड़ी

4.   बहुत x कम

5.   सही x गलत

6.   अच्छा x बूरा

7.   दूर x पास

8.   जवाब x सवाल

9.   सामने x पीछे

10.  पसंद x नापसंद

11.  खरीदना x बेचना

31.

बिटिया क्या कहकर बुला रही थी?

Answer»

बिटिया माँ कहकर बुला रही थी .

32.

डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम की साहित्यिक सेवाओं का उल्लेख कीजिए।याडॉ० ए०पी०जे० का साहित्यिक परिचय दीजिए एवं प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए।याडॉ० ए०पी०जे० का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए।

Answer»

जीवन-परिचय–डॉ० ए०पी० जे० अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् में एक मुसलमान परिवार में हुआ। उनके पिता जैनुलअबिदीन एक नाविक थे और उनकी माता अशिअम्मा एक गृहणी थीं, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा। अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए बालक कलाम स्कूल के बाद समाचार-पत्र वितरण का कार्य करते थे। अपने स्कूल के दिनों में कलाम पढ़ाई-लिखाई में सामान्य थे, पर नयी चीज सीखने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उनके अन्दर सीखने की भूख थी और वो पढ़ाई पर घंटों ध्यान देते थे। उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई रामनाथपुरम स्वार्ज मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की और उसके बाद तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने सन् 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक किया। वर्ष 1960 में कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद कलाम ने रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक के तौर पर भर्ती हुए। कलाम ने अपने कैरियर की शुरुआत भारतीय सेना के लिए एक छोटे हेलीकॉप्टर का डिजाइन बनाकर किया।

वर्ष 1969 में उनका स्थानान्तरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) में हुआ। यहाँ वो भारत के सैटेलाइट लांच ह्वीकल परियोजना के निदेशक के तौर पर नियुक्त किये गये थे। इसरो में शामिल होना कलाम के कैरियर का सबसे अहम मोड़ था और जब उन्होंने सैटेलाइट लांच ह्रीकल परियोजना पर कार्य आरम्भ किया तब उन्हें लगा जैसे वो वही कार्य कर रहे हैं जिसमें उनका मन लगता है।

1963-64 के दौरान उन्होंने अमेरिका के अन्तरिक्ष संगठन नासा की भी यात्रा की। परमाणु वैज्ञानिक राजा रमन्ना, जिनके देख-रेख में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया, ने कलाम को वर्ष 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण देखने के लिए भी बुलाया था। भारत सरकार ने महत्त्वाकांक्षी ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का प्रारम्भ डॉ० कलाम के देख-रेख में किया। वह इस परियोजना के मुख्य कार्यकारी थे। इस परियोजना ने देश को अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें दी हैं। जुलाई, 1992 से लेकर दिसम्बर, 1999 तक डॉ० कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सचिव थे। भारत ने पहला दूसरा परमाणु परीक्षण इसी दौरान किया था। इसमें एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आर० चिदम्बरम के साथ डॉ० कलाम इस परियोजना के समन्वयक थे। इस दौरान मिले मीडिया कवरेज ने उन्हें देश का सबसे बड़ा परमाणु वैज्ञानिक बना दिया।

एक रक्षा वैज्ञानिक के तौर पर उनकी उपलब्धियों और प्रसिद्धि के मद्देनजर एन०डी०ए० की गठबंधन सरकार ने उन्हें वर्ष 2002 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया तथा 25 जुलाई, 2002 को उन्होंने भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। डॉ० कलाम देश के ऐसे तीसरे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारतरत्न से नवाजा जा चुका था।

कलाम हमेशा से देश के युवाओं और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के बारे में बातें करते थे। इसी सम्बन्ध में उन्होंने देश के युवाओं के लिए “ह्वाइट कैन आई गिव’ पहल की शुरुआत भी की जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार का सफाया है। देश के युवाओं में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 2 बार (2003 और 2004) ‘एम०टी०वी० यूथ आइकॉन ऑप द इयर अवार्ड’ के लिए मनोनीत भी किया गया था। शिक्षण के अलावा डॉ० कलाम ने कई पुस्तकें भी लिखीं जिनमें प्रमुख हैं–‘इंडिया 2020 : अ विजन फॉर द न्यू मिलेनियम, ‘विंग्स ऑफ फायर : ऐन ऑटोबायोग्राफी’, ‘इग्नाइटेड माइंड्स : अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’, ‘मिशन इंडिया’, ‘इंडोमिटेबल स्पिरिट’ आदि।

देश और समाज के लिए किये गये उनके कार्यों के लिए डॉ० कलाम को अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। लगभग 40 विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद की डॉक्टरेट की उपाधि दी और भारत सरकार ने उन्हें पदम्भूषण, पदविभूषण और भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से अलंकृत किया। 26 जुलाई, 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिलाँग, में अध्यापन कार्य के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद करोड़ों लोगों के प्रिय और चहेते डॉ० अब्दुल कलाम परलोक सिधार गये।

33.

बाबू भाई ने किन-किन-से मदद माँगी ?

Answer»

बाबूभाई ने माली से, ऊँट सवार से और घुडसवार से मदद माँगी।

34.

विलासिता की सामग्रियों से बाज़ार भरा पड़ा है, जो आपको लुभाने की जी तोड़ कोशिश में निरंतर लगी रहती हैं । दैनिक जीवन में काम आनेवाली वस्तुओं को ही लीजिए । टूथ-पेस्ट चाहिए ? यह दाँतों को मोती जैसा चमकीला बनाता है, यह मुँह की दुर्गंध हटाता है । यह मसूड़ों को मजबूत करता है और यह ‘पूर्ण सुरक्षा’ देता है । वह सब करके जो तीन-चार पेस्ट अलग-अलग करते हैं, किसी पेस्ट का ‘मैजिक’ फ़ार्मूला है । कोई बबूल या नीम के गुणों से भरपूर है, कोई ऋषि-मुनियों द्वारा स्वीकृत तथा मान्य वनस्पति और खनिज तत्त्वों के मिश्रण से बना है । जो चाहे चुन लीजिए । यदि पेस्ट अच्छा है तो ब्रुश भी अच्छा होना चाहिए । आकार, रंग, बनावट, पहुँच और सफ़ाई की क्षमता में अलग-अलग, एक से बढ़कर एक । मुँह की दुर्गध से बचने के लिए माउथ वाश भी चाहिए ।1. आज का बाजार किन चीजों से भरा है ? ये किनको लुभाती हैं ?2. उपभोक्ताबाद ने हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया है ?3. टूथपेस्ट के विज्ञापनों का क्या आधार है ?4. ‘दुर्गध’ और ‘मजबूत’ शब्द का विलोम शब्द लिखिए ।

Answer»

1. आज का बाजार विलासिता की सामग्रियों से भरा पड़ा है, वे हमें अर्थात् ग्राहकों को विज्ञापनों से लुभाने की कोशिश में लगी । रहती हैं।

2. उपभोक्तावाद ने हमारे जीवन को अत्यन्त गहराई से प्रभावित किया है । जो वस्तुएँ विज्ञापनों में दिखाई जाती हैं, हम उन्हें खरीदकर लाते हैं और उसका उपभोग करते हैं । भले ही उन वस्तुओं की गुणवत्ता ठीक न हो ।

3. टूथपेस्ट के विज्ञापनों में कई तरह के आधार हैं । कोई टूथपेस्ट दाँतों को चमकीला बनाता है, तो कोई मुँह की दुर्गध मिटाता है, कोई मसूड़ों को मजबूत करता है, कोई बबूल या नीम के गुणों से भरपूर है ।

4. दुर्गध × सुगंध
मजबूत × कमजोर

साबुन ही देखिए । एक में हलकी खुशबू है, दूसरे में तेज़ । एक दिनभर आपके शरीर को तरोताजा रखता है, दूसरा पसीना । रोकता है, तीसरा जर्स से आपकी रक्षा करता है । यह लीजिए सिने स्टार्स के सौंदर्य का रहस्य, उनका मनपसंद साबुन । सच्चाई का अर्थ समझना चाहते हैं, यह लीजिए । शरीर को पवित्र रखना चाहते हैं, यह लीजिए शुद्ध गंगाजल में बनी साबुन ।

35.

कुछ पुरानी चीजों के पक्ष में कविता में कवि ने किन चीजों के मद्देनजर अपनी बात कही है ?

Answer»

‘पुरानी चीजों के पक्ष में’ कविता में कवि ने उन चीजों के मद्देनजर अपनी बात कही है, जो पुरानी होकर भी हर वक्त काम आती रहती हैं।

36.

बाबू भाई ने मुफ्त में नारियल किससे माँगा ?

Answer»

बाबूभाई ने मुफ्त में नारियल माली से माँगा।

37.

कितने पैसे बचाने की सोच में बाबू भाई में फुर्ती आ गयी ?

Answer»

पच्चीस पैसे बचाने के ख्याल से ही उनमें कुर्ती आ गई।

38.

मुखिया को मुख के समान होना चाहिए। कैसे ?

Answer»

मुख या मुँह खाने पीने का काम अकेला करता है, लेकिन उसके खाने पीने के द्वारा वह शरीर को सारे अंगों का पालन-पोषण करता है। इसी तरह मुखिया को मुख के समान विवेकवान होना चाहिए। वह काम अपनी तरह से करें लेकिन उसका फल सभी में बाँटे। इस प्रकार मुखिया को मुख के समान होना चाहिए।

39.

होलोकास्ट किसे कहा गया ?

Answer»

हिटलर की नीतियों के कारण द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत तक असंख्य युरोपीय यहूदियों ने जीवन खोया, जिसे होलोकास्ट के रूप में जाना जाता है ।

40.

बिटिया क्या खाकर आयी थी?

Answer»

बिटिया मिट्टी खाकर आयी थी

41.

वह दूध बेचती थी। वे दूध बेचती थी

Answer»

वह चित्र बनाती हूँ। वे चित्र बनती थी

42.

मेइजी के बाद जापान की साम्राज्यवादी नीति को किसने आगे बढ़ाया ?

Answer»

सम्राट मेइजी के बाद जापान की गद्दी पर सन् 1936 बैठे शहनशाह हीरो हीटो ने साम्राज्यवादी नीति को आगे बढ़ाया ।

43.

दिए गए गद्यांशों को पढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।मैं खासतौर से युवा छात्रों से ही क्यों मिलता हूँ? इस सवाल का जवाब तलाशते हुए मैं अपने छात्र जीवन के दिनों के बारे में सोचने लगा। रामेश्वरम् के द्वीप से बाहर निकलकर यह कितनी लम्बी यात्रा रही। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो विश्वास नहीं होता। आखिर वह क्या था जिसके कारण यह सम्भव हो सका? महत्त्वाकांक्षा? कई बातें मेरे दिमाग में आती हैं। मेरा ख्याल है कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि मैंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपना मूल्य आँका। बुनियादी बात जो आपको समझनी चाहिए वह यह है कि आप जीवन की अच्छी चीजों को पाने का हक रखते हैं, उनका जो ईश्वर की दी हुई हैं। जब तक हमारे विद्यार्थियों और युवाओं को यह भरोसा नहीं होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं तब तक वे जिम्मेदार और ज्ञानवान् नागरिक भी कैसे बन सकेंगे।(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम खासतौर से किससे मिलते थे?(iv) डॉ० अब्दुल कलाम की कामयाबी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात क्या रही?(v) व्यक्ति किन चीजों को पाने का हक रखता है?

Answer»

(i) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘गद्य-गरिमा’ में संकलित’डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम’ के तेजस्वी मन से “हम और हमारा आदर्श” का सम्पादित अंश है।
अथवा
पाठ का नाम–
 हम और हमारा आदर्श।
लेखक का नाम-डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या–अनेकानेक उपलब्धियों एवं प्रसिद्धियों के धनी डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम ने प्रस्तुत अंश के माध्यम से भारतीय युवाओं को यह बताना चाहा है कि जब तक उन्हें यह विश्वास नहीं होगा कि वे देश के नागरिक बनने की सम्पूर्ण योग्यता स्वयं में रखते हैं तब तक वे एक | जिम्मेदार और ज्ञानवान नागरिक नहीं बन सकते अर्थात् जब तक व्यक्ति को अपनी कीमत का आकलन नहीं होगा तब तक वह महत्त्वपूर्ण कार्य नहीं कर सकता।

(iii) डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम खासतौर से देश के युवा छात्रों से मिलते थे।

(iv) डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम की कामयाबी के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपने मूल्य का आकलन किया।

(v) व्यक्ति उन सभी अच्छी चीजों को पाने का हक रखता है जो ईश्वर की दी हुई हैं।

44.

दिए गए गद्यांशों को पढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।मैं यह नहीं मानता की समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भाग करते हुए जीवन बिता रहा हूं लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अंतत: हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं। आप अपने आस-पास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी। अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्माण्ड आपके अनंत तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे।(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) लेखक किनको एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता?(iv) डॉ० कलाम संवृद्धि की कद्र क्यों करते हैं?(v) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने छात्रों को क्या संदेश दिया है?

Answer»

(i) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘गद्य-गरिमा’ में संकलित ‘डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम’ के तेजस्वी मन से “हम और हमारा आदर्श” का सम्पादित अंश है।।
अथवा
पाठ का नाम-
 हम और हमारा आदर्श।
लेखक का नाम-डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से अब्दुल कलाम जी समृद्धि की कद्र करते हुए कहते हैं कि व्यक्ति को कामयाब होने के लिए वह सभी हरसम्भव प्रयास करने चाहिए जो वह कर सकता है। किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए अर्थात् काम करते हुए उससे ऊबकर उसे बीच में नहीं छोड़ देना चाहिए। इसके लिए प्रकृति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए वे कहते हैं कि यदि आप अपने आस-पास देखें तो आपको ऐसे प्रकृति के बहुत-से उदाहरण मिल जाएँगे जो कि पूर्ण होते दिखेंगे यानी प्रकृति अपने किसी भी काम को अधूरे मन से नहीं करती। आप किसी फूलों के बाग में ही पहुँच जाइए; वहाँ मौसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी, क्योंकि मौसम ने अपने काम को अधूरा नहीं छोड़ा। या फिर आप अपने ऊपर की ओर ही देखें तो आपको यह ब्रह्माण्ड इस तरह विस्तृत दिखाई देगा जिसका कोई अन्त नहीं है, जहाँ तक आप सोच भी नहीं सकते अर्थात् यह नभ भी हमें विस्तृत होने का यानी पूर्णता का सन्देश देता है।

(iii) लेखक संवृद्धि और अध्यात्म को एक-दूसरे का विरोधी नहीं मानता।

(iv) डॉ० कलाम सम्वृद्धि की कद्र इसलिए करते हैं, क्योकि संवृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अन्तत: हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है।

(v) प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से लेखक ने छात्रों को प्रगति करने के लिए किसी भी कार्य को पूर्ण करके ही चैन लेने का सन्देश दिया है।

45.

दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिएलज्जाशीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आये ।होने देना विकृत-वसना तो न तू सुन्दरी को ।।जो थोड़ी भी श्रमित वह हो गोद ले श्रान्ति खोना ।होंठों की औ कमल-मुख की म्लानतायें मिटाना ।।कोई क्लान्ता कृषक-ललना खेत में जो दिखावे ।धीरे-धीरे परस उसकी क्लान्तियों को मिटाना ।।जाता कोई जलद यदि हो व्योम में तो उसे ला।छाया द्वारा सुखित करना, तप्त भूतांगना को ।।(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) राधा पवन-दूतिका से राह में पथिकों के साथ कैसा व्यवहार करने को कहती हैं?(iv) राधा ने पवन-दूतिका को पथिक कृषक-स्त्री के ऊपर किसके द्वारा छाया करने को कहा(v) ‘कृषक ललना’ शब्द में कौन-सा समास होगा?

Answer»

(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।
अथवा
शीर्षक नाम-
 पवन-दूतिका।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध’।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-हे पवन ! यदि तुझे मार्ग में कोई लाजवन्ती स्त्री दिखाई पड़े तो इतने वेग से न बहना कि उसके वस्त्र उड़कर अस्त-व्यस्त हो जाएँ और उसका शरीर उघड़ जाए। यदि वह थोड़ी-सी भी थकी दिखाई दे तो उसे गोद में लेकर अर्थात् उसे चारों ओर से घेरकर उसकी थकान मिटा देना, जिससे कि (थकान के कारण) उसके सूखे होंठ और मुरझाया हुआ कमल-सदृश मुख प्रफुल्लित हो उठे।

(iii) राधा पवन-दूतिका से राह में पथिकों के साथ परोपकार का व्यवहार करने को कहती हैं।

(iv) राधा ने पवन-दूतिका को थकित कृषक-स्त्री के ऊपर मेघ द्वारा छाया करने को कहा है।

(v) ‘कृषक-ललना’ शब्द में ‘तत्पुरुष समास’ होगा।

46.

अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ के जीवन एवं उनकी रचनाओं पर प्रकाश डालिए। याअयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए। 

Answer»

जीवन-परिचय-श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ आधुनिक हिन्दी खड़ी बोली के प्रथम महाकवि थे। इन्होंने काव्य के क्षेत्र में भाव और भाषा दोनों दृष्टियों से नये-नये प्रयोग किये और युगानुरूप नवीन आदर्शों की प्रतिष्ठा की। हरिऔध का जन्म संवत् 1922 वि० (सन् 1865 ई०) में ग्राम निजामाबाद (जिला आजमगढ़) के एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित भोलासिंह और माता का नाम रुक्मिणी देवी था। भोलासिंह के बड़े भाई पं० ब्रह्मसिंह ज्योतिष के अच्छे विद्वान् थे। हरिऔध जी की प्रारम्भिक शिक्षा इन्हीं की देख-रेख में हुई। मिडिल परीक्षा पास करने के पश्चात् ये काशी के क्वींस कॉलेज में पढ़ने के लिए भेजे गये, किन्तु अस्वस्थता के कारण पढ़ न सके। इन्होंने घर पर ही अंग्रेजी और उर्दू का अध्ययन किया। संवत् 1939 वि० (सन् 1882 ई०) में इनका विवाह हुआ। विवाह के पश्चात् इन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, इसलिए सर्वप्रथम इन्होंने निजामाबाद के तहसीली स्कूल में लगभग तीन वर्ष तक अध्यापन-कार्य किया। तदुपरान्त ये कानूनगो हो गये और उत्तरोत्तर उन्नति कर सदर कानूनगो के पद पर पहुँच गये। संवत् 1966 वि० (सन् 1909 ई०) में सरकारी नौकरी से अवकाश प्राप्त कर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अवैतनिक अध्यापक हो गये। सन् 1941 ई० तक वे इसी पद पर रहे। इसके पश्चात् अवकाश ग्रहण कर आजमगढ़ को अपना निवासस्थान बनाया और वहीं रहकर साहित्य-सेवा में अपना जीवन लगा दिया। यहीं संवत् 2002 (सन् 1945 ई० ) में इनका स्वर्गवास हो गया।

साहित्यिक सेवाएँ–हरिऔध जी द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि थे। इन्होंने खड़ी बोली को नया रूप प्रदान किया तथा प्राचीन कथानकों में नवीन उद्भावनाएँ समाहित कीं। भाषा की विविधता के साथ-साथ इन्होंने हिन्दी छन्दों में भी नवीन छन्द-पद्धति की उद्भावना की। इनके काव्य में वात्सल्य रस एवं विप्रलम्भ श्रृंगार का जगमगाता रूप झलकता है।

रचनाएँ–हरिऔध जी ने गद्य-पद्य दोनों में ही सफलतापूर्वक रचना की है। इनके द्वारा रचे गये काव्यों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है—(1) प्रियप्रवास, (2) वैदेही-वनवास, (3) रस-कलश, (4) चौखे-चौपदे और चुभते-चौपदे, (5) इनके अतिरिक्त हरिऔध जी के अन्य काव्य-ग्रन्थ इस प्रकार हैं-(i) रुक्मिणीपरिणय, (ii) प्रद्युम्न-विजय, (iii) बोलचाल, (iv) पद्य-प्रसून, (v) पारिजात, (vi) ऋतु-मुकुर, (vii) काव्योपवन, (viii) प्रेम-पुष्पोपहार, (ix) प्रेम-प्रपंच, (४) प्रेमाम्बु-प्रस्रवण, (xi) प्रेमाम्बु-वारिधि। (6) इनके प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं- (i) ठेठ हिन्दी का ठाठ, (ii) अधखिला फूल, (iii) प्रेमकान्ता।

साहित्य में स्थान-नि:संकोच हम यह कह सकते हैं कि हरिऔध जी की काव्य-प्रतिभा विविधरूपिणी है। वे अपनी रचनाओं में कहीं रीतिकालीन हैं तो कहीं भारतेन्दुकालीन, कहीं द्विवेदीकालीन हैं तो कहीं नवयुगकालीन। इनके इन समस्त रूपों में इनका द्विवेदीकालीन रूप ही प्रमुख है। भाव और भाषा दोनों ही क्षेत्रों में इन्होंने नये-नये प्रयोग किये और आधुनिक युगानुरूप नवीन उद्भावनाएँ भी दीं। निश्चय ही ये हिन्दी के गौरव हैं।

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दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिएबैठी खिन्ना यक दिवस वे गेह में थीं अकेली ।आके आँसू दृग-युगल में थे धरा को भिगोते ।।आई धीरे इस सदन में पुष्प-सद्गंध को ले ।प्रात: वाली सुपवन इसी काल वातायनों से ।।संतापों को विपुल बढ़ता देख के दु:खिता हो ।धीरे बोली स-दुःख उससे श्रीमति राधिका यों ।।प्यारी प्रात: पवन इतना क्यों मुझे है सताती ।क्या तू भी है कलुषित हुई काल की क्रूरता से ।।(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) घर में दुःखी होकर एक दिन अकेले कौन बैठा था?(iv) फूलों की सुगंध से युक्त होकर राधा के घर में किसने प्रवेश किया?(v) राधा ने प्रातःकालीन वायु से दुःखित होकर क्या कहा?

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(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धृत है।।
अथवा
शीर्षक नाम-
 पवन-दूतिका।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या–प्रात:कालीन सुखद वायु पुष्यों की सुगंध लेकर धीरे से खिड़कियों के रास्ते उस घर में प्रविष्ट हुई। जो राधा घर में बहुत दु:खी होकर अकेली बैठी थीं। वायु संयोग में सुखद लगती थी, वही अब वियोग में दु:ख बढ़ाने वाली सिद्ध हुई. अत: उस वायु के कारण अपनी व्यथा को और बढ़ता देखकर राधा बहुत दु:खित होकर उससे बोली कि हे प्यारी प्रभातकालीन वायु! तू मुझे इतना क्यों सता रही है? क्या तू भी मेरे भाग्य की कठोरता से प्रभावित होकर दूषित हो गयी है अर्थात् समय या भाग्य तो मेरे विपरीत है ही, पर क्या तू भी उससे प्रभावित होकर मेरा दु:ख बढ़ाने पर तुली है, जब कि सामान्यत: तू लोगों को सुख देने वाली मानी जाती है?’

(iii) एक दिन राधा घर में दु:खी होकर अकेली बैठी हुई थीं।

(iv) फूलों की सुगंध से युक्त होकर राधा के घर प्रात:कालीन सुखद वायु ने प्रवेश किया।

(v) राधा ने प्रात:कालीन वायु से दुःखित होकर कहा कि हे प्रभातकालीन वायु! तू मुझे क्यों सताती है? का तू भी मेरे भाग्य की कठोरता से प्रभावित होकर दूषित हो गई है।

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दिए गए पद्यांशों को फ्ढ़कर उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिएतू देखेगी जलद-तन को जा वहीं तद्गता हो ।होंगे लोने नयन उनके ज्योति-उत्कीर्णकारी ।।मुद्रा होगी वर बदन की मूर्ति-सी सौम्यता की ।सीधे साधे वचन उनके सिक्त होंगे सुधा से ।।नीले फूले कमल दल-सी गात की श्यामता है।पीला प्यारा वसन कटि में पैन्हते हैं फबीला ।।छूटी काली अलके मुख की कान्ति को है बढ़ाती ।सद्वस्त्रों में नवल तन की फूटती-सी प्रभा है ।।(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में राधा पवन-दूतिका को किसकी पहचान बताती हैं?(iv) श्रीकृष्ण के नेत्रों की शोभा कैसी है?(v) श्रीकृष्ण कटि में कैसा वस्त्र धारण करते हैं?

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(i) प्रस्तुत पद महाकवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘प्रियप्रवास’ से हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘काव्यांजलि’ में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक काव्यांश से उद्धत है।
अथवा
शीर्षक नाम- 
पवन-दूतिका।।
कवि का नाम-अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या-राधा कहती हैं कि हे पवन! वहाँ जाकर तू मेघ के समान शोभा वाले श्रीकृष्ण को देखेगी। उनके शरीर की श्यामलता खिले हुए नीलकमल के समान मोहक है। मेरे प्रियतम कृष्ण कटि में आकर्षक पीला वस्त्र धारण करते हैं। उनके मुख पर लटकी हुई काले बालों की लट उनकी शोभा को चार चाँद लगा रही होगी। उनके सुन्दर वस्त्रों से उनके मनोहर शरीर की शोभा अत्यधिक बढ़ रही होगी।

(iii) प्रस्तुत पंक्तियों में राधा पवन-दूतिका को श्रीकृष्ण की पहचान बताती हैं।

(iv) श्रीकृष्ण के सुन्दर नेत्र प्रकाश बिखेरते हैं।

(v) श्रीकृष्ण कटि में पीला वस्त्र धारण करते हैं।

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समाज में मेहनत करने वालों को दिनकर जी ने अग्रस्थान क्यों दिया हैं?

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  • समाज में मेहनत करनेवालों को दिनकर जी ने अग्रस्थान दिया हैं | क्योंकि
  • मेहनत ही सफलता की कुंजी है।
  • मेहनत करनेवाला व्यक्ति कभी नहीं हारता ।
  • जो मेहनत करता है वह हमेशा सफल होता है ।
  • काल्पनिक जगत को साकार रूप देनेवाला मेहनत करने वाला ही है ।
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दिनकर जी के अनुसार ‘काल्पनिक जगत को साकार रूप देनेवाला श्रमिक है’ – स्पष्ट कीजिए।

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  • दिनकर जी के अनुसार ‘काल्पनिक जगत को साकार रूप देनेवाला श्रमिक ही है।
  • यह कथन बहुत सच है | मेहनत ही सफलता की कुंजी है।
  • श्रमिक अपने श्रम के कारण कभी नहीं हारता | श्रमिक हमेशा सफल ही होता रहता है ।
  • कण – कण के पीछे श्रमिक का ही श्रम है । श्रमिक ही कण – कण का अधिकारी है ।
  • श्रमिक अपने श्रम द्वारा काल्पनिक जगत को साकार रूप देता है।
  • श्रमिक भाग्यवाद पर विश्वास नहीं रखता ।
  • नर – समाज का भाग्य श्रम, भुजबल ही है – यह श्रमिक का विश्वास है ।