This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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गुरदास नंगल में सिक्खों ने मुगलों के विरुद्ध कहां शरण ली? |
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Answer» दुनीचंद की हवेली में। |
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बंदा सिंह बहादुर की शहीदी कब हुई?(A) 1761 ई० में(B) 1716 ई० में(C) 1750 ई० में(D) 1756 ई० में |
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Answer» सही विकल्प है (B) 1716 ई० में |
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सहों के युद्ध के क्या कारण थे? |
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Answer» जालन्धर दोआबे के सिक्खों ने वहां के फ़ौजदार शम्स खां के विरुद्ध शस्त्र उठा लिए। |
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बंदा सिंह बहादुर को उसके 200 साथियों सहित कब गिरफ्तार किया गया? |
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Answer» 7 दिसम्बर, 1715 को। |
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बंदा सिंह बहादुर की शहीदी कब हुई? |
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Answer» 19 जून, 1716 को। |
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जहांदार शाह के बाद मुग़ल सम्राट् कौन बना? |
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Answer» जहांदार शाह के बाद मुग़ल सम्राट् फरुख़सीयर बना। |
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बहादुर शाह के बाद मुग़ल राजगद्दी पर कौन बैठा? |
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Answer» बहादुर शाह के बाद मुग़ल राजगद्दी पर जहांदार शाह बैठा। |
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गुरदास नंगल के युद्ध में सिक्ख क्यों हारे? |
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Answer» गुरदास नंगल के युद्ध में सिक्ख खाद्य सामग्री समाप्त हो जाने के कारण हारे। |
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नवाब कपूर सिंह ने सिक्खों को 1734 ई० में किन दो दलों में बांटा? |
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Answer» 1734 ई० में नवाब कपूर सिंह ने सिक्खों को दो दलों में बांट दिया-‘बुड्ढा दल’ तथा ‘तरुण दल’। |
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मुग़ल सम्राट् बहादुर शाह की मृत्यु कब हुई? |
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Answer» 18 फरवरी, 1712 को। |
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बंदा सिंह बहादुर की शहीदी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। |
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Answer» गुरदास नंगल के युद्ध में बंदा सिंह बहादुर तथा उसके सभी साथियों को बन्दी बना लिया गया था। उन्हें पहले लाहौर और फिर दिल्ली ले जाया गया। दिल्ली के बाजारों में उनका जुलूस निकाला गया और उनका अपमान किया गया। बाद में बंदा सिंह बहादुर तथा उसके 740 साथियों को इस्लाम धर्म स्वीकार करने को कहा गया। उनके इन्कार करने पर बंदा सिंह बहादुर के सभी साथियों की हत्या कर दी गई। अन्त में 19 जून, 1716 ई० में मुग़ल सरकार ने बंदा सिंह बहादुर के वध का भी फरमान जारी कर दिया। उनके वध से पहले उन पर अनेक अत्याचार किए गए। उनकी आंखों के सामने उनके शिशु पुत्र के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। लोहे की गर्म सलाखों से बंदा सिंह बहादुर का मांस नोचा गया। इस प्रकार बंदा सिंह बहादुर शहीदी को प्राप्त हुआ। |
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गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी को शहीद करने वाला जल्लाद कौन था? |
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Answer» सैय्यद जलालुद्दीन। |
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हुक्मनामे में गुरु (गोबिन्द सिंह) जी ने पंजाब के सिक्खों को क्या आदेश दिए? |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर उनका राजनीतिक नेता होगा तथा वे मुग़लों के विरुद्ध धर्मयुद्ध में बंदे का साथ दें। |
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सहारनपुर का नाम ‘भाग नगर’ किसने रखा था? |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर ने। |
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सबसे पहली मिसल कौन-सी थी? उसका वर्णन करो। |
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Answer» सबसे पहली मिसल फैज़लपुरिया मिसल थी। इसका संस्थापक नवाब कपूर सिंह था। उसने सबसे पहले अमृतसर के निकट फैजलपुर नामक गांव पर अधिकार किया और इसका नाम ‘सिंहपुर’ रखा। इसलिए इस मिसल को ‘सिंहपुरिया मिसल’ भी कहते हैं। 1753 ई० में नवाब कपूर सिंह की मृत्यु हो गई और उसका भतीजा खुशहाल सिंह इस मिसल का नेता बना। उसके काल में सिक्खों का प्रभुत्व काफ़ी बढ़ गया और सिंहपुरिया मिसल का अधिकार क्षेत्र दूर-दूर तक फैल गया। 1795 ई० में उसके पुत्र बुद्ध सिंह ने इस मिसल की बागडोर सम्भाली। वह अपने पिता के समान वीर तथा योग्य न था। 1819 ई० में महाराजा रणजीत सिंह ने इस मिसल को अपने राज्य में मिला लिया। |
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गुरु गोबिन्द सिंह साहिब के दो छोटे साहिबजादों को दीवार में कहां चिनवाया गया था? |
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Answer» गुरु गोबिन्द सिंह साहिब के दो छोटे साहिबजादों को दीवार में सरहिन्द में चिनवाया गया था। |
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बंदा सिंह बहादुर की सिक्ख सेना को पहली बड़ी हार का सामना कब और कहां करना पड़ा? |
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Answer» अक्तूबर 1710 में अमीनाबाद में। |
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गुरदास नंगल के युद्ध का वर्णन करो। |
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Answer» मुग़ल बंदा सिंह बहादुर की निरन्तर विजयों से आग-बबूला हो उठे थे। अत: 1715 ई० में एक विशाल मुग़ल सेना ने बंदा सिंह बहादुर पर आक्रमण कर दिया। इस सेना का नेतृत्व अब्दुस्समद खां कर रहा था। सिक्खों ने इस सेना का वीरता से सामना किया, परन्तु उन्हें गुरदास नंगल (गुरदासपुर से 6 कि० मी० दूर पश्चिम में) की ओर हटना पड़ा। वहां उन्होंने बंदा सिंह बहादुर सहित दुनीचन्द की हवेली में शरण ली। शत्रु को दूर रखने के लिए उन्होंने हवेली के चारों ओर खाई खोद कर उसमें पानी भर दिया। अप्रैल, 1715 ई० में मुग़ल सेना ने भाई दुनी चन्द की हवेली को घेर लिया। सिक्ख बड़े साहस और वीरता से मुग़लों का सामना करते रहे। आठ मास के लम्बे युद्ध के कारण उनकी खाद्य सामग्री समाप्त हो गई। विवश होकर उन्हें पराजय स्वीकार करनी पड़ी। बंदा सिंह बहादुर तथा उसके 200 साथी बन्दी बना लिए गए। |
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पंजाब में एक सिक्ख राज्य की स्थापना में बंदा सिंह बहादुर की असफलता का एक प्रमुख कारण बताएं। |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर अपने साधु स्वभाव को छोड़ कर राजसी ठाठ-बाठ से रहने लगा था। |
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दुनीचन्द की हवेली में बंदा सिंह बहादुर का साथ किसने छोड़ा? |
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Answer» विनोद सिंह तथा उसके साथियों ने। |
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बंदा सिंह बहादुर दक्षिण से पंजाब की तरफ क्यों आया? |
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Answer» मुगलों के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करने के लिए। |
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माधोदास (बंदा सिंह बहादुर) के साथ गुरु गोबिन्द सिंह जी की मुलाकात कहां हुई थी? |
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Answer» माधोदास (बंदा सिंह बहादुर) के साथ गुरु गोबिन्द सिंह जी की मुलाकात नंदेड़ में हुई थी। |
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बंदा सिंह बहादुर की गंगा-यमुना के इलाके में लड़ी गई लड़ाइयों का वर्णन करो। |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर की विजयों से जन साधारण में उत्साह की लहर दौड़ गई। लोगों को विश्वास हो गया कि बंदा ही उन्हें मुग़लों के अत्याचारों से मुक्ति दिला सकता है। बस फिर क्या था। देखते ही देखते बहुत-से हिन्दू तथा मुसलमान सिक्ख बनने लगे। उनारसा गाँव के निवासी भी सिक्ख बन गए। जलालाबाद का फ़ौजदार जलाल खां इसे सहन न कर सका। उसने वहाँ के बहुत-से सिक्खों को कैद कर लिया। उन सिक्खों को छुड़ाने के लिए बंदा सिंह बहादुर अपने सैनिकों को लेकर उनारसा की ओर चल पड़ा। 1. सहारनपुर पर आक्रमण- यमुना नदी को पार करके सिक्खों ने पहले सहारनपुर पर आक्रमण किया। वहाँ का फ़ौजदार अली हामिद खान दिल्ली की ओर भाग गया। उसके कर्मचारियों ने सिक्खों का सामना किया, परन्तु वे परास्त हुए। नगर के अधिकतर भाग पर सिक्खों का अधिकार हो गया। उन्होंने सहारनपुर का नाम बदल कर भाग नगर’ रख दिया। 2. बेहात की लड़ाई- सहारनपुर से बंदा सिंह बहादुर ने बेहात की ओर कूच किया। वहाँ के पीरज़ादे हिन्दुओं पर अत्याचार कर रहे थे। वे खुले तौर पर बाज़ारों तथा गलियों में गौ हत्या करते थे। बंदा सिंह बहादुर ने अनेक पीरज़ादों को मौत के घाट उतार दिया। कहते हैं कि उनमें से केवल एक पीरज़ादा ही जीवित बच सका जोकि बुलंद शहर गया हुआ था। 3. अम्बेता पर आक्रमण- बेहात के उपरान्त बंदा सिंह बहादुर ने अम्बेता पर आक्रमण किया। वहाँ के पठान बड़े धनी थे। उन्होंने सिक्खों का कोई विरोध न किया। सिक्खों को वहाँ से बहुत-सा धन मिला। 4. नानौता पर आक्रमण- 21 जुलाई, 1710 ई० को सिक्खों ने नानौता पर आक्रमण किया। वहाँ के शेखज़ादे तीर चलाने में बड़े निपुण थे। वे सिक्खों के सामने डट गए। नानौता की गलियों तथा बाजारों में घमासान युद्ध हुआ। लगभग 300 शेखज़ादे युद्ध में मारे गए और सिक्खों को विजय प्राप्त हुई। 5. उनारसा पर आक्रमण- यहाँ से बंदा सिंह बहादुर ने अपने मुख्य शत्रु अर्थात् उनारसा के जलाल खां की ओर ध्यान दिया। अपने दूत द्वारा उसने जलाल खां के पास एक पत्र भेजा। उसने लिखा कि वह कैदी सिक्खों को छोड़ दे तथा उसकी अधीनता स्वीकार कर ले। परन्तु जलाल खां ने बंदा सिंह बहादुर की इस मांग को ठुकरा दिया। उसने दूत का निरादर भी किया। परिणामस्वरूप बंदा सिंह बहादुर ने उनारसा पर भयंकर धावा बोल दिया। एक घमासान युद्ध हुआ जिसमें सिक्खों को विजय प्राप्त हुई। इस युद्ध में जलाल खां के दो भतीजे जमाल खां तथा पीर खां भी मारे गए। |
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बहादुर शाह ने बंदा बहादुर के विरुद्ध जो युद्ध लड़े, उनका वर्णन करो। |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर ने पंजाब के मुग़ल शासकों में हड़कंप मचा रखा था। जब यह समाचार मुग़ल सम्राट बहादुरशाह तक पहुंचा, तो वह क्रोधित हो उठा। उसने अपना सारा ध्यान पंजाब पर केन्द्रित कर दिया । 27 जून, 1710 ई० को वह अजमेर से पंजाब की ओर चल पड़ा। उसने दिल्ली तथा अवध के सूबेदारों तथा मुरादाबाद तथा इलाहाबाद के निज़ामों तथा फ़ौजदारों को आदेश दिया कि वे अपनी-अपनी सेनाओं सहित पंजाब में पहुंचे। 1. अमीनाबाद की लड़ाई- बंदा सिंह बहादुर की शक्ति को कुचलने के लिए बहादुर शाह ने सर्वप्रथम फिरोज़ खान मेवाती तथा महावत खान के अधीन सिक्खों के विरुद्ध एक विशाल सेना भेजी। इस सेना का सामना बिनोद सिंह तथा राम सिंह ने 26 अक्तूबर, 1710 ई० को अमीनाबाद (बनेसर तथा तरावड़ी के बीच) में किया । उन्होंने महावत खान को एक बार तो पीछे धकेल दिया, परन्तु शत्रु की संख्या बहुत अधिक होने के कारण सिक्खों को अन्त में पराजय का मुंह देखना पड़ा। 2. सढौरा की लड़ाई- जब बंदा सिंह बहादुर को सिक्खों की पराजय का समाचार मिला तो उसने अपने सैनिकों सहित शत्रु पर चढ़ाई कर दी। उस समय मुग़लों की विशाल सेना सढौरा में पड़ाव डाले हुए थी। 4 दिसम्बर, 1710 ई० को शत्र की सेना किसी उचित ठिकाने की खोज में निकली। अवसर का लाभ उठाकर सिक्खों ने उस पर धावा बोल दिया। उन्होंने शत्रु को बहुत क्षति पहुंचाई, परन्तु शाम को बहुत बड़ी संख्या में शाही सेना शत्रु की सेना से आ मिली। अतः सिक्खों ने लड़ाई छोड़ कर ‘लोहगढ़’ में शरण ली।। 3. लोहगढ़ का युद्ध- अब बहादुर शाह ने स्वयं बंदा सिंह बहादुर के विरुद्ध कार्यवाही करने का निर्णय किया। उसने सिक्खों की शक्ति का पता लगाने के लिए वज़ीर मुनीम खान को किले की ओर बढ़ने का आदेश दिया। परन्तु उसने 10 दिसम्बर,1710 ई० को लोहगढ़ के किले पर आक्रमण कर दिया। उसे देखकर अन्य मुगल सरदारों ने भी किले पर धावा बोल दिया। सिक्खों ने शत्रु का डट कर सामना किया, परन्तु किले में खाद्य-सामग्री की कमी के कारण सिक्खों को काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंत में बंदा सिंह बहादुर अपने सिक्खों सहित नाहन की पहाड़ियों की ओर निकल गया। ___ 11 दिसम्बर, 1710 ई० को मुनीम खान ने फिर से किले पर धावा बोल दिया और किले पर अधिकार कर लिया। अत: बहादुर शाह ने बंदा सिंह बहादुर का पीछा करने के लिए हमीद खान को नाहन की ओर भेजा। वह स्वयं सढौरा, बडौली, रोपड़, होशियारपुर, कलानौर आदि स्थानों से होता हुआ लाहौर जा पहुँचा। 4. पहाड़ी प्रदेश में बंदा सिंह बहादुर की गतिविधियां- पहाड़ों में जाकर बंदा सिंह बहादुर ने सिक्खों के नाम हुक्मनामा भेजे। थोड़े समय में ही एक बड़ी संख्या में सिक्ख कीरतपुर में एकत्रित हो गए।
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बंदा सिंह बहादुर ने किस स्थान के किले को ‘लोहगढ़’ का नाम दिया? |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर ने मुखलिसपुर स्थान के किले को ‘लोहगढ़’ का नाम दिया। |
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बंदा सिंह बहादुर की प्रारम्भिक विजयों का वर्णन करो। |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर अपने युग का महान् सेनानायक था। गुरु साहिब का आदेश पाकर वह दिल्ली पहुंचा। उसने मालवा, दोआबा तथा माझा के सिक्खों के नाम गुरु गोबिन्द सिह जी के हुक्मनामे भेजे। शीघ्र ही हज़ारों की संख्या में सिक्ख उसके नेतृत्व में इकट्ठे हो गए। सेना का संगठन करने के पश्चात् बंदा सिंह बहादुर बड़े उत्साह से अत्याचारी मुग़लों के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करने के लिए पंजाब की ओर चल पड़ा।यहां से उसका विजय अभियान आरम्भ हुआ। 1. सोनीपत पर आक्रमण- बंदा सिंह बहादुर ने सबसे पहले सोनीपत पर आक्रमण किया। उस समय उसके साथ केवल 500 सिक्ख ही थे। परन्तु वहाँ का फ़ौजदार सिक्खों की वीरता के बारे में सुन कर अपने सैनिकों सहित शहर छोड़ कर भाग गया। 2. भूणा (कैथल) के शाही खज़ाने की लूट- सोनीपत से बंदा सिंह बहादुर कैथल के पास पहुँचा। उसे पता चला कि कुछ मुग़ल सैनिक भूमिकर इकट्ठा करके भूना गांव में ठहरे हुए हैं। अत: बंदा सिंह बहादुर ने भूना पर धावा बोल दिया। कैथल के फ़ौजदार ने उसका सामना किया, परन्तु पराजित हुआ। बंदा बहादुर ने मुग़लों से सारा धन छीन लिया। 3. समाना की विजय- भूणा के पश्चात् बंदा सिंह बहादुर समाना की ओर बढ़ा। गुरु तेग़ बहादुर जी को शहीद करने वाला जल्लाद सय्यद जलालुद्दीन वहीं का रहने वाला था। सरहिन्द में गुरु गोबिन्द सिंह जी के छोटे साहिबजादों (जोरावर सिंह तथा फतेह सिंह) को शहीद करने वाले जल्लाद शासल बेग तथा बाशल बेग भी समाना के ही थे। उन्हें दण्ड देने के लिए 26 नवम्बर,1709 ई० को बंदा सिंह बहादुर ने समाना पर आक्रमण कर दिया। लगभग 10,000 मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया गया। सय्यद जलालुद्दीन, शासल बेग तथा बाशल बेग के परिवारों का सफाया कर दिया गया। 4. घुड़ाम की विजय- लगभग एक सप्ताह पश्चात् बंदा सिंह बहादुर ने घुड़ाम पर धावा बोल दिया। वहां के पठानों ने सिक्खों का विरोध किया, परन्तु अन्त में उन्हें भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। घुड़ाम से भी सिक्खों को बहुतसा धन मिला। 5. कपूरी पर आक्रमण- घुड़ाम के बाद बंदा सिंह बहादुर कपूरी पहुँचा। वहाँ का शासक कतमऊद्दीन हिन्दुओं पर बहुत अत्याचार करता था। बंदा सिंह बहादुर ने उसे पराजित करके मौत के घाट उतार दिया। उसकी हवेली को जला कर राख कर दिया गया। 6. सढौरा की विजय- सढौरे का शासक उसमान खान भी हिन्दुओं पर अत्याचार करता था। भंगानी के युद्ध में गुरु जी की सहायता करने के कारण उसने पीर बुद्ध शाह को कत्ल करवा दिया था। इन अत्याचारों का बदला लेने के लिए बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा पर आक्रमण किया और उसमान खान को पराजित करके शहर को खूब लूटा । 7. मुखलिसपुर की जीत- अब बंदा सिंह बहादुर ने मुखलिसपुर पर धावा बोला और बहुत ही आसानी से वहां अधिकार जमा लिया। वहां के किले का नाम बदल कर लोहगढ़’ रख दिया । बाद में यही नगर बंदा सिंह बहादुर की राजधानी बना। 8. चप्पड़-चिड़ी की लड़ाई तथा सरहिन्द की जीत- बंदा सिंह बहादुर का वास्तविक निशाना सरहिन्द था। यहाँ के सूबेदार वज़ीर खान ने गुरु गोबिन्द सिंह जी को जीवन भर तंग किया था। इसके अतिरिक्त उसने गुरु साहिब के दो छोटे साहिबजादों को सरहिन्द में ही दीवार में चिनवा दिया था। इसका बदला लेने के लिए बंदा ने सरहिंद पर आक्रमण कर दिया। सरहिन्द से लगभग 16 किलोमीटर पूर्व में चप्पड़-चिड़ी के स्थान पर 22 मई, 1710 ई० को दोनों सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ। सिक्ख बड़े उत्साह से लड़े और उन्होंने वज़ीर खान को मौत के घाट उतार दिया। उसकी लाश को एक पेड़ पर टांग दिया गया। सुच्चानंद जिसने सिक्खों पर अत्याचार करवाये थे, की नाक में नकेल डाल कर नगर में उसका जुलूस निकाला गया। सिक्ख सैनिकों ने शहर में भारी लूट-मार की। 9. सहारनपुर तथा जलालाबाद पर आक्रमण- इसी समय बंदा सिंह बहादुर को पता चला कि जलालाबाद का गवर्नर जलाल खां अपनी हिन्दू प्रजा पर घोर अत्याचार कर रहा है। अतः वह जलालाबाद की ओर बढ़ा। मार्ग में उसने सहारनपुर पर विजय प्राप्त की। परन्तु उसे जलालाबाद को विजय किए बिना ही वापस लौटना पड़ा। 10. जालन्धर दोआब पर अधिकार- बंदा सिंह बहादुर की विजयों से उत्साहित होकर जालंधर दोआब के सिक्खों ने वहां के फ़ौजदार शम्स खां के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और बंदा सिंह बहादुर को सहायता के लिए बुलाया। शम्स खां ने एक विशाल सेना सिक्खों के विरुद्ध भेजी। राहों के स्थान पर दोनों सेनाओं में एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें सिक्ख विजयी रहे। 11. अमृतसर, बटाला, कलानौर तथा पठानकोट पर अधिकार- बंदा सिंह बहादुर की सफलता से उत्साहित होकर लगभग आठ हज़ार सिक्खों ने मुसलमान शासकों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। शीघ्र ही उन्होंने अमृतसर, बटाला, कलानौर तथा पठानकोट को अपने अधिकार में ले लिया। कुछ समय पश्चात् लाहौर भी उनके अधिकार में आ गया। |
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बजीर खां कहां का सूबेदार था? उसका बंदा सिंह बहादुर के साथ किस स्थान पर युद्ध हुआ? |
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Answer» बज़ीर खां सरहिन्द का सुबेदार था। चप्पड़-चिड़ी में। |
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बंदा सिंह बहादुर को पंजाब में किसने भेजा था? |
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Answer» गुरु गोबिन्द सिंह जी ने। |
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बंदा सिंह बहादुर की तरफ से भूणा गांव पर आक्रमण करने का क्या कारण था? |
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Answer» अपनी सैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन प्राप्त करने के लिए। |
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समाना पर बंदा सिंह बहादुर ने आक्रमण क्यों किया? |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर ने सिक्ख गुरुओं पर अत्याचार करने वाले जल्लादों को दण्ड देने के लिए समाना पर आक्रमण किया। |
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बंदा सिंह बहादुर तथा गुरु गोबिंद सिंह जी की मुलाकात का वर्णन करो। |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर का आरम्भिक नाम माधोदास था। वह एक बैरागी था। 1708 ई० में गुरु गोबिन्द सिंह जी मुग़ल सम्राट् बहादुरशाह के साथ दक्षिण में गए। वहां माधोदास उनके सम्पर्क में आया। गुरु जी के आकर्षक व्यक्तित्व ने उसे इतना अधिक प्रभावित किया कि वह शीघ्र ही उनका शिष्य बन गया। गुरु जी ने उसे सिक्ख बनाया और उसे पंजाब में ‘सिक्खों’ का नेतृत्व करने के लिए भेजा। पंजाब में वह ‘बंदा सिंह बहादुर’ के नाम से विख्यात हुआ। |
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चप्पड़-चिड़ी तथा सरहिन्द की लड़ाई का वर्णन करो। |
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Answer» सरहिन्द के सूबेदार वज़ीर खान ने गुरु गोबिन्द सिंह जी को जीवन भर तंग किया था। इसके अतिरिक्त उसने गुरु साहिब के दो साहिबजादों को सरहिन्द में ही दीवार में चिनवा दिया था। इसलिए बंदा सिंह बहादुर इसका बदला लेना चाहता था। जैसे ही वह सरहिन्द की ओर बढ़ा, हजारों लोग उसके झण्डे तले एकत्रित हो गए। सरहिन्द के कर्मचारी, सुच्चा नंद का भतीजा भी 1,000 सैनिकों के साथ बंदा की सेना से जा मिला। परन्तु बाद में उसने धोखा दिया। दूसरी ओर वज़ीर खान के पास लगभग 20,000 सैनिक थे। सरहिन्द से लगभग 16 किलोमीटर पूर्व में चप्पड़चिड़ी के स्थान पर 22 मई, 1710 ई० को दोनों सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ। वज़ीर खान को मौत के घाट उतार दिया गया। शत्रु के सैनिक बड़ी संख्या में सिक्खों की तलवारों के शिकार हुए। वज़ीर खान की लाश को एक पेड़ पर टांग दिया गया, । सुच्चा नंद जिसने सिक्खों पर अत्याचार करवाये थे, की नाक में नकेल डाल कर नगर में उसका जुलूस निकाला गया। |
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बंदा सिंह बहादुर ने किस स्थान को अपनी राजधानी बनाया? |
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Answer» मुखलिसपुर को। |
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बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा पर क्यों आक्रमण किया? |
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Answer» सढौरा के अत्याचारी शासक उसमान खान को दण्ड देने के लिए। |
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बंदा सिंह बहादुर ने चप्पड़-चिड़ी तथा सरहिन्द पर क्यों आक्रमण किए? |
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Answer» सरहिन्द के अत्याचारी सूबेदार वज़ीर खान को दण्ड देने के लिए। |
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वजीर खां और बंदा सिंह बहादुर का युद्ध किस स्थान पर हुआ?(A) चप्पड़-चिड़ी(B) सरहिन्द(C) सढौरा(D) समाना |
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Answer» सही विकल्प है (A) चप्पड़-चिड़ी |
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बंदा सिंह बहादुर ने सढौरा में किस शासक को हराया था? |
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Answer» उसमान खां को। |
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बंदा सिंह बहादुर की समाना की विजय पर एक नोट लिखिए। |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर ने 26 नवम्बर, 1709 ई० को समाना पर आक्रमण किया। इसका कारण यह था कि गुरु गोबिन्द सिंह जी के दो साहिबजादों को शहीद करने वाले जल्लाद समाना के थे। समाना की गलियों में कई घण्टों तक लड़ाई होती रही। सिक्खों ने लगभग 10,000 मुसलमानों को मौत के घाट उतार दिया और नगर के कई सुन्दर भवनों को नष्ट कर दिया। हत्यारे जल्लाद परिवारों का सफाया कर दिया गया। इस विजय से बंदा सिंह बहादुर को बहुत-सा धन भी प्राप्त हुआ। |
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बंजर भूमि का क्या अर्थ है? |
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Answer» बंजर भूमि वह भूमि है जिसका इस समय उपयोग नहीं हो रहा। |
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निम्नलिखित वाक्यों में से समुच्यबोधक छांटकर अलग कीजिए :(क) तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे।(ख) माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया।(ग) वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे।(घ) उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था जो किसी गहरी तपस्या से जनमती है।(ड) पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था लेकिन वो स्मृति में अक्सर डूब जाते। |
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Answer» (क) और (ख) कि (ग) तो (घ) जो (ङ) लेकिन। |
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आपके विचार से फादर बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा? |
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Answer» मेरे विचार से फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के विषय में जानते होंगे। वे यह भी जानते होंगे कि भारत सहृदय देश है, यहाँ अतिथियों का सम्मान किया जाता है। वहाँ सहदय जनों के बीच रहकर वहां की संस्कृति से अधिक परिचित हुआ जा सकता है। वहाँ रहकर अपने जीवन-उद्देश्यों को साकार किया जा सकता है। भारत के प्रति प्रेम, हिन्दी भाषा के प्रति प्रेम होने के कारण ही संन्यासी बनने के बाद उन्होंने भारत आने का फैसला लिया होगा। |
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‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि- रेम्सचैपल ।’ इस पंक्ति में फादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएं अभिव्यक्त होती हैं ? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं ? |
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Answer» ‘बहुत सुन्दर है मेरी जन्मभूमि’ इस पंक्ति के द्वारा फादर बुल्के का अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम की भावना प्रकट होती है। वे अपनी जन्मभूमि से बेहद प्यार करते थे। तभी उनके मुंह से यह वाक्य निकला । जन्मभूमि की महक ही निराली होती है जिसके खातिर व्यक्ति अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है। मनुष्य कहीं भी रहें, अपनी जन्मभूमि को कभी नहीं भूल सकता । तन-मन-धन से इसकी रक्षा करूंगा। ऐसा कोई कार्य नहीं करूंगा जिससे मेरी जन्मभूमि को अपमानित होना पड़े। मेरी जन्मभूमि ही मेरी आन-बान-शान है। |
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बंदा सिंह बहादुर ने सरहिन्द विजय के बाद वहां का शासक किसे नियुक्त किया? |
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Answer» बंदा सिंह बहादुर ने सरहिन्द विजय के बाद वहां का शासक बाज़ सिंह को नियुक्त किया। |
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वन बाढ़ों पर किस प्रकार नियन्त्रण करते हैं? |
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Answer» वन वर्षा के जल को मृदा के अन्दर रिसने में सहायता करते हैं और धरातल पर जल के प्रवाह को मंद कर देते हैं। |
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वनों की वृद्धि से सूखे की समस्या पर कैसे नियन्त्रण पाया जा सकता है? |
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Answer» वन वर्षा की मात्रा में वृद्धि करते हैं। |
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देश में चावल की खेती का विस्तार से वर्णन कीजिए। |
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Answer» चावल भारत का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न है। भारत के दो-तिहाई लोगों का मुख्य आहार चावल ही है। इसकी उपज के लिए भौगोलिक परिस्थितियां, इसके उत्पादक राज्यों तथा इसके व्यापार का वर्णन इस प्रकार है — भौगोलिक परिस्थितियां-चावल की खेती के लिए निम्नलिखित भौगोलिक परिस्थितियां अनकल रहती हैं —
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लेखक के अनुसार फादर बुल्के को जहरबाद से क्यों नहीं मरना चाहिए ? |
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Answer» फादर बुल्के की रगों में दूसरों के लिए मिठास भरे अमृत के अतिरिक्त कुछ और नहीं था। अर्थात् सारा जीवन उन्होंने दूसरों पर अपना प्यार लुटाया । दूसरों की मदद की। दूसरों के लिए ही जीये । ऐसे व्यक्ति की मौत जहरबाद से नहीं होनी चाहिए थी। |
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साहित्यिक संस्था ‘परिमल’ से फादर बुल्के किस प्रकार जुड़े थे ? |
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Answer» फादर बुल्के ‘परिमल’ साहित्यिक संस्था से जुड़े थे। वे गोष्ठियों में गंभीर बहस करते थे, साहित्यिक रचनाओं पर अपनी बेबाक राय देते थे, अपना सुझाव देते थे। ‘परिमल’ के सदस्यों के साथ हसी-मजाक में निलिप्त रूप से शामिल होते थे। |
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What was to be protected from the sun by putting up a shade over it? |
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Answer» A coffee seedbed was to be protected from the sun by putting up a shade over it. |
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What is nutritional density? |
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Answer» It is the area of land producing food crops and total population of that land which is considered in nutritional density. |
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