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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

भक्तिन पाठ के अधार पर भक्तिन का चरित्र – चित्रण कीजिए।

Answer»

‘भक्तिन’ लेखिका की सेविका है। लेखिका ने उसके जीवन-संघर्ष का वर्णन किया है। उसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं?

  1. व्यक्तित्व-भक्तिन अधेड़ उम्र की महिला है। उसका कद छोटा व शरीर दुबला-पतला है। उसके होंठ पतले हैं तथा आँखें छोटी हैं।
  2. परिश्रमी-भक्तिन कर्मठ महिला है। ससुराल में वह बहुत मेहनत करती है। वह घर, खेत, पशुओं आदि का सारा कार्य अकेले करती है। लेखिका के घर में भी वह उसके सारे कामकाज को पूरी कर्मठता से करती है। वह लेखिका के हर कार्य में सहायता करती है।
  3. स्वाभिमानिनी-भक्तिन बेहद स्वाभिमानिनी है। पिता की मृत्यु पर विमाता के कठोर व्यवहार से उसने मायके जाना छोड़ दिया। पति की मृत्यु के बाद उसने किसी का पल्ला नहीं थामा तथा स्वयं मेहनत करके घर चलाया। जमींदार द्वारा अपमानित किए जाने पर वह गाँव छोड़कर शहर आ गई।
  4. महान सेविका-भक्तिन में सच्चे सेवक के सभी गुण हैं। लेखिका ने उसे हनुमान जी से स्पद्र्धा करने वाली बताया है। वह छाया की तरह लेखिका के साथ रहती है तथा उसका गुणगान करती है। वह उसके साथ जेल जाने के लिए भी तैयार है। वह युद्ध, यात्रा आदि में हर समय उसके साथ रहना चाहती है।
व्यक्तित्व-भक्तिन अधेड़ उम्र की महिला है। उसका कद छोटा व शरीर दुबला-पतला है। उसके होंठ पतले हैं तथा आँखें छोटी हैं। परिश्रमी-भक्तिन कर्मठ महिला है। ससुराल में वह बहुत मेहनत करती है। वह घर, खेत, पशुओं आदि का सारा कार्य अकेले करती है। लेखिका के घर में भी वह उसके सारे कामकाज को पूरी कर्मठता से करती है। वह लेखिका के हर कार्य में सहायता करती है। स्वाभिमानिनी-भक्तिन बेहद स्वाभिमानिनी है। पिता की मृत्यु पर विमाता के कठोर व्यवहार से उसने मायके जाना छोड़ दिया। पति की मृत्यु के बाद उसने किसी का पल्ला नहीं थामा तथा स्वयं मेहनत करके घर चलाया। जमींदार द्वारा अपमानित किए जाने पर वह गाँव छोड़कर शहर आ गई। महान सेविका-भक्तिन में सच्चे सेवक के सभी गुण हैं। लेखिका ने उसे हनुमान जी से स्पद्र्धा करने वाली बताया है। वह छाया की तरह लेखिका के साथ रहती है तथा उसका गुणगान करती है। वह उसके साथ जेल जाने के लिए भी तैयार है। वह युद्ध, यात्रा आदि में हर समय उसके साथ रहना चाहती है।
2.

अपने छोटे भाई को कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर बधाई देते हुए पत्र लिखिए ।

Answer»

203 , शिवाजी पार्क
सिटी  लाइट
सुरत -395007

दिनांक - 5 जून  2016

प्रिय  अनुज
शुभाशीष  , तुम्हारा पत्र  मिला । पढकर  समाचार  ज्ञात हुआ  ।यह  जानकर  खुशी हुई कि  तुम  परीक्षा में  प्रथम स्थान प्राप्त  किए  हो ।यह  सब  तुम्हारे  परिश्रम  का  फल है ।  इसके  लिए  तुम्हें  बहुत  बहुत बधाईयाँ ।साथ ही  मुझे  तुमसे  यह उम्मीद  है कि  तुम  इसी तरह  आगे भी  सफलता  प्राप्त  करते  रहोगे । तुमने  पूरे परिवार  का सम्मान  बढाया है ।
मम्मी  - पापा  एवं  दादा  - दादी  की ओर से  आशीर्वाद ।

तुम्हारी  अग्रजा
शिवांगी  अग्रवाल

3.

‘उत्तर’ शब्द का सही समानार्थक शब्द हैअ) प्रश्नआ) दक्षिणइ) पूर्वोत्तरई) जवाब

Answer»

Correct Answer is : ई) जवाब

4.

अपना प्रमाण पत्र अंक पत्र देने के लिए प्रार्थना करते हुए, अपनी पाठशाला के प्रधान अध्यापकजी के नाम पर एक पत्र लिखिए ।

Answer»

ता: 25-05-2017
स्थल : चिंतामणि

प्रेषक

मानसी एस. आर
दसवीं कक्षा बी विभाग
चिंतामणि प्रौदशाला
चिंतामणि – 563125

सेवा में,

प्रधानाध्यापकजी
चिंतामणि प्रौढ़शाला
चिंतामणि – 563125

मान्यवर, विषय : प्रमाण पत्र और अंकपत्र देने के लिए प्रार्थना-पत्र सविनय निवेदन है कि मैं दसवऔं कक्षा वार्षिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी के रूप में उत्तीर्ण हो चुका है। मैं अगले सप्ताह के अंदर कॉलेज में प्रवेश लेना चाहता हूँ। इसलिए कृपा करके जल्द-से-जल्द आदेश देकर मेरा प्रमाण पत्र और अंक पत्र दिला दीजिए।
धन्यवाद सहित,

आपकी आज्ञाकारी छात्रा
मानसी एस. आर

अभिभावक का हस्ताक्षर

5.

अपने जन्म दिवस के अवसर पर घर बुलाते हुए अपने मित्र के नाम पर एक पत्र लिखिए ।

Answer»

ता: 25-05-2017
स्थल : सिड्लघट्टा

प्रिय मित्र चंद्रशेखर एम.एस.
नमस्कार,
मैं यहाँ कुशल हूँ। तुम्हारे कुशल के बारे में पत्र के द्वारा समझाइए। यहाँ पर मेरी पढ़ाई अच्छी तरह से चल रही है। यह पत्र लिखने का कारण यह है कि पिछले वर्ष की तरह मेरा जन्म दिवस इस वर्ष भी ता. 20-3-1986 को घर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इसलिए आप माता-पिता के अनुमति लेकर एक दिन पहले घर ज़रूर आ जाना। यहाँ के सभी मित्र अच्छे हैं। हम सब एक जगह पर मिलने के बाद बैठकर मीठी-मीठी बातें भी करेंगे। घर में अपने माता-पिता को मेरा सादर प्रणाम कहना। मैं तुम्हारे पत्र का इंतज़ार में रहूंगा।

तुम्हारा प्रिय मित्र,
मूर्ति एम.एन.

6.

दिया गया संकेत बिंदुओ के आधार पर 12-15 वाक्यों में निबंध लिखिए।इंटरनेट का महत्व

Answer»

इंटरनेट अनगिनत कंप्यूटरों के कई अंतर्जालों का एक दूसरे से संबंध स्थापित करने का जाल है। आज इनमान के लिए खान-पान जितना ज़रूरी है, इंटरनेट भी इतना ही आवश्यक हो गया है। इंटरनेट द्वारा घर बैठे-बैठे खरीदारी कर सकते हैं। कोई भी बिल भर सकते हैं । इससे दुकान जाने और लाइन में घंटों तक खड़े रहने का समय बच सकता है।
इंटरनेट बैंकिंग द्वारा दुनिया की किसी भी जगह पर जितनी भी रकन भेजी जा सकती है।

इंटरनेट की वजह से पैरसी, बैंकिंग फ्रारें, हैकिंग (सूचना/खबरों की चोरी) आदि बढ़ रही हैं । मुक्त वेब साइट, चैटिंग आदि से युवा पीढ़ी ही नहीं बच्चे भी इंटरनेट की कबंध बाँहों के पाश में फंसे हुए हैं। इससे वक्त का दुरुपयोग होता है और बच्चे अनुपयुक्त और अनावश्यक जानकारी हासिल कर रहे हैं। इसलिए आप लोगों को इंटरनेट से सचेत रहना चाहिए।

वैज्ञानिक आविष्कारों ने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया है । इंटरनेट ने मानव की जीवनशैली और उसकी सोच से क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। आज इंटरनेट के बिना संचार व सूचना दोनों क्षेत्र कमजोर हो जाते हैं। इंटरनेट ने पूरी दुनिया को एक जगह ला खड़ा कर दिया है । जीवन के हर क्षेत्र में इंटरनेट का बहुत बड़ा योगदान है। इंटरनेट वरदान है तो अभिशाप भी है।

7.

निम्नलिखित विषय के बारे में पत्र लिखिए।अपने किसी यात्रा वृत्तांत का वर्णन करने हुए पिता के नाम एक पत्र लिखिए।

Answer»

पूज्य पिताजी
सप्रेम नमस्ते।

– मैं कुशल हूँ। मैं समझती है कि आप लोग भी भावान की कुछ से सकुशल हो।

दादा जी हम अपनी पाठशाला की ओर से श्रीरंगपट्नम्, मैसूर, कृष्णराज सागर आदि इतिहास प्रसिद्ध प्रेक्षणिय स्थलों को देखने गए थे।

हम श्रीरंगपट्नम् में श्रीरंगनाथजी का मंदिर, जुम्मा मसिद दरिया दौलत भाग, संगम आदि देखकर पुलकित होगए। मैसूर में राजमहल, जू, चामुण्डिमाता का मंदिर देखकर, हम शाम के समय में कृष्णराजसागर देखते रात नौ बज तक कहाँ के रंगीन उध्यान को देखकर वापस लौटे।

मैं यहाँ अच्छा सा पढ़ाई कर रही है। परीक्षा के बाद घर आऊंगी। माता जी को मेरा प्रणम।
आपका आशीर्वाद के उत्तर की निरीक्षा में

आपकी प्यारी पुत्री
राधा

प्रेषक,
राधा
दसवी कक्षा, ‘ए विभाग
कमल नेहरु हाईस्कूल
कृण्णराजपुरम्, बेंगलूर

सेवा में
रामचन्द्रनाथा
२५, मातनिलय
मारनहल्ली
कोलार जिल्ला

8.

दिया गया संकेत बिंदुओं के आधार पर 12-15 वाक्यों में निबंध लिखिए।जनसंख्या की समस्या

Answer»

जनसंख्या की समस्या

  • जनसंख्या का अर्थ
  • जनसंख्या वृद्धि के कारण
  • जनसंख्या नियंत्रण
  • उपसंहार। जनसंख्या की समस्या

तात्पर्य : जनसंख्या की समस्या सामान्य रूप से विश्व की समस्या है। प्रति तीन सेकेंड में दो बच्चे जन्म लेते हैं। जनसंख्या वृद्धि के कारण : विज्ञान की उन्नति के साथ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की सुविधाओं में अन्ति हुई है। फलतः जन्म लेने वाले शिशुओं की मृत्यु दर में कमी हुई है तथा औसत आयु में वृद्धि हुई है, यानी आजकल एक भारतवासी पहले की अपेक्षा अधिक समय तक जीवित रहता है।

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार बच्चे भगवान की देन है। अतएव परिवार नियोजन जैसे उपायों को सामान्यतः अच्छी नज़र से देखा जाता है। यह भी एक दृष्टिकोण हैं कि अधिक बच्चे होने से काम करने के लिए तथा परिवार की रक्षा करने के लिए अधिक हाथ उपलब्ध होते हैं ।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने में सबसे अधिक बाधक तत्व हैं – अशिक्षा, | अन्धविश्वास तथा रूढ़िवादिता । इसके अतिरिक्त भारतीय लोग सन्तान को ईश्वरीय देन समझते हैं तथा सन्तान को भाग्य के साथ जोड देते हैं।

नियंत्रण : हम सबका यह कर्तव्य है कि इस समस्या के निराकरण में पूरा योगदान दे। हमारी सरकार तथा सामाजिक संस्थाओं को चाहिए कि सभओं, गोष्टियों, समाचार माध्यमों, संचर| माध्यमों एवं रेडियों दूरदर्शन द्वारा छोटे परिवार से होनेवाले फायदों का प्रचार-प्रसार करें । कहने का तात्पर्य यह है कि परिवार को सीमित रखने की मानसिकता का प्रचार हर स्तर पर किया जाए जिससे जनसंख्या-नियंत्रण को जीवन का एक अवश्यक अंग मान लिया जाये।

उपसंहार : हमारे देश के विकास में जनसंख्या की वद्धि एक बड़ी बाध है। यातायत, शिक्षा, रोजगार, आदि विविध क्षेत्रों में जनसंख्या की वृद्धि सिर दर्द बन गई है। देश का प्रत्येक नागरिक इस समस्या का हल करने में सहायक हो।

9.

निम्नलिखित विषय के बारे में पत्र लिखिए। शक्षक प्रवास के लिए पिता से 2,000 रूपये मांगते हुए एक पत्र लिखिए।. 

Answer»

स्थल : बेंगलूर – 56
दिनांक : 20.01.2018

सेवा में,
मंजुनाथ एन. आर
सोमवार पेटे
बेलगाँव – 03

पूज्य पिताजी,
सादर प्रणाम।
में वहाँ सकुशल हूँ। आशा है कि आप भी सकुशल होंगे। मेरी पढ़ाई अच्छी तरह चल रही है। इस साल हमारे विद्यालय में शैक्षणिक पर्यटन का आयोजन किया गया है । उसमें मैं भी भाग लेना चाहता हूँ। इसलिए आप मुझे इसकी अनुमति देते हुए रु.2,000 भेजने की कृपा करें।

आपका प्रिय पुत्र
निहार

दसवी कक्षा
सरकारी हाईस्कूल
बेंगलूर – 5

10.

निम्नलिखित विषय के बारे में पत्र लिखिए। अपने भाई की शादी का कारण देते हुए प्रधानाध्यापक के नाम छुट्टी पत्र लिखिए

Answer»

प्रेषक,
शंकर
दसवी कक्षा ए विभाग
प्रज्वल प्रौढ़शाला,
बेंगलूरू – ९१

सेवा में,
प्रधान अद्यापकजी,
बेंगलूर प्रौढ़शाला
प्रज्वल प्रौढ़शाला,
बेंगलूरू- ९१

मान्यवर,
विषय : चार दिन की छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र।

सविनय निवेदन है कि, मेरा भाई की शादी का कारण गाँव जाने के लिए चार दिनो तक शाला मे उपस्थित नही रह पहुंगा। इसलिए आज से 13.02.2018से लेकर 16.02.2018 तक कुल मिलाकर चार दिन की छुट्टी देने के लिए कृपा कीजिए।
धन्यवाद सहित,

आपका आज्ञाकारी विधार्थी
शंकर
दसवीं कक्षा ‘ए’ विभाग

11.

Write a letter to the General Manager of Jindal Power Limited, Madakaripura, Chitradurga, requesting permission to visit the wind power generation plant.

Answer»

Student Council Member

Govt. High School

Koppa

16 February 2019

General Manager

Jindal Power Limited

Madakaripura Chitradurga

Dear Sir,

Experiential education is the best form of learning. That is why we, the students of X Standard of Government High School, Koppa would like to visit your power plant to get a first hand knowledge of how the power of the wind is used to generate electricity.

Our batch has a strength of 48 and all of us would like to visit the plant on Monday, 3rd of March, 2019 at 9:00 a.m. We will remain grateful to you if you could grant us permission. We will be accompanied by our class teacher. All of us will be in our school uniform and we will carry our School Identity Card.

We are told that a tour around the plant and an explanation of the work done would take a piinimum of three hours. So we have planned to be at the plant till 12:30 p.m. Hope this will not inconvenience the work at the plant.

I once again request you to grant us permission to visit the plant. Please let us know if there is any formality to be fulfilled before the visit.

Yours faithfully,

Samrudh

12.

अपने मित्र को पत्र लिखकर आपने ग्रीष्मकाल की छुट्टियाँ कैसे बितायीं इसके संबन्ध में बताइए।

Answer»

भीमवरम,
दि. x x x x x

प्रिय मित्र मोहन,

मैं यहाँ कुशल हूँ। गर्मी की छुट्टियाँ मैं ने कैसे बितायीं? अब तुम को बता रहा हूँ।

परीक्षाओं के बाद मैं ने विजयवाडे में ही एक सप्ताह तक आराम किया। गुंटूर और एलूरु में हमारे रिश्तेदार हैं। उनके यहाँ मैं ने दस दिन बिताये। मेरे भाई हैदराबाद में सचिवालय में काम करते हैं। मैं उनके यहाँ गया। बाकी छुट्टियाँ मैं ने वहीं बितायीं। हैदराबाद एक बडा नगर है। वह शिक्षा, संस्कृति तथा वाणिज्य का बडा केंद्र है। यहाँ अनेक विश्वविद्यालय हैं। मैं ने सालारजंग म्यूज़ियम्, बिरला मंदिर, नेहरू जुआलाजिकल पार्क, गोलकोंडा किला आदि देखें।

यहाँ मैं ने बडे आनंद के साथ समय बिताया। इसे मैं कभी नहीं भूल सकता। तुमने छुट्टियाँ कैसे बितायीं? तुरंत पत्र लिखो।

तुम्हारा प्रिय मित्र,
x x x x

पता :
यन. मोहन राव,
एन. अप्पाराव का पुत्र,
ट्राक्टर मेकानिक,
सत्तेनपल्लि।

13.

तुम्हारी साइकिल की चोरी हुई है। दारोगा साहब के नाम पत्र लिखिए।

Answer»

विजयवाडा,
दि. x x x x x

प्रेषक :
न. x x x x,
जि.प.उ. पाठशाला,
विजयवाड़ा – 520 004.
सेवा में,
श्रीमान दारोगा साहब,
वन टउन पुलिस स्टेशन,
विजयवाड़ा – 520 001.
प्रिय महाशय,

मेरा निवदेन है कि मैं कल शाम हिमालय होटल के सामने अपनी साइकिल रखकर चाय पीने अंदर गया। उसे ताला लगाना भूल गया। मैं चाय पीकर बाहर आया। लेकिन वहाँ साइकिल नहीं दिखाई पड़ी। मैंने वहाँ के लोगों से सइकिल के बारे में पुछताछ की । लेकिन साइकिल का पता नहीं चला | मेरी साइकिल ‘अम्बर’ की है। उसका रंग काला है। उसका नंबर – 345861 है । वह बिलकुल नयी सी लगती है। उसमें मिल्लर लाईट लगा है। अतः उसका पता लगाकर उसे दिलवाने की कृपा कीजिए।

आपका विश्वसनीय,
नं. x x x x.

पता :
दारोगा साहब,
वन टउन पुलिस स्टेशन,
विजयवाड़ा – 520 001.

14.

' क्यों ना मैं मोटर वालों के यहां पैदा हुआ' इस वाक्य में है

Answer»

व्यंग्य शक्ति

15.

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:प्रायः अधिकांश लोग दूसरों के जीवन का अनुसरण करते हैं, इसी में उनको सुख मिलता है। अपनी ताकत को न पहचानकर दूसरों के पीछे निरुद्देश्य चलना केवल अंधानुकरण है। सड़क के किनारे पड़े सूखे पत्ते कमज़ोर और निर्जीव होने पर भी स्वयं को सबके समान गतिशील समझते हैं। दूसरों के बल पर जीने वाले, दूसरों की नीति की नकल करने वाले कभी प्रगति नहीं कर सकते। वास्तविक प्रगति के लिए मनुष्य को समय के साथ निज-बल से आगे बढ़ना चाहिए। निज-बल ही सर्वोपरि है, जो मनुष्य को जीवन की ऊँचाइयों तक पहुंचाता है।1.   दूसरों को प्रायः सुख कैसे मिलता है?2.   अंधानुकरण से क्या तात्पर्य है?3.   सड़क के किनारे पड़े पत्ते कैसे हैं?4.   मनुष्य जीवन में ऊँचाइयों तक कैसे पहुंच सकता है

Answer»

1.   प्रायः अधिकांश लोग दूसरों के जीवन का अनुसरण करते हैं, इसी में उनको सुख मिलता है।

2.   अपनी ताकत को न पहचानकर दूसरों के पीछे निरुद्देश्य चलना केवल अंधानुकरण है।

3.   सड़क के किनारे पड़े सूखे पत्ते कमजोर और निर्जीव होने पर भी स्वयं को सबके समान गतिशील समझते हैं।

4.   वास्तविक प्रगति के लिए मनुष्य को समय के साथ निज-बल से आगे बढ़ना चाहिए। निज-बल ही सर्वोपरि है, जो मनुष्य को जीवन की ऊँचाइयों तक पहुंचाता है।

16.

अपने मित्र को पोंगल की छुट्टियों में आने का आमंत्रण देते हुए पत्र लिखिए।

Answer»

चेन्नई,
दि. x x x x x

प्रिय मित्र,

मैं यहाँ कुशल हूँ। आशा करता हूँ कि तुम भी वहाँ कुशल हो। अगले हफ्ते से हमारी पोंगल की छुट्टियाँ शुरू हो जायेंगी। मैं इस पत्र के द्वारा मुख्य रूप से तुम्हें आमंत्रित कर रहा हूँ। हमारे नगर में पोंगल का उत्सव बडे धूमधाम से मनाया जायेगा। यहाँ विशेष मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। यहाँ नहीं हमारे नगर में देखने लायक स्थान अनेक हैं। इसलिए तुम ज़रूर आना।

तुम्हारे माँ – बाप से मेरे प्रणाम कहो। तुम्हारे भाई को मेरे आशीर्वाद कहना । तेरे आगमन की प्रतीक्षा करता हूँ।

तुम्हारा प्रिय मित्र,
x x x x x

पता :
आर. सुरेश कुमार,
दसवीं कक्षा ‘डी’,
नलन्दा विद्यालय,
एन. आर. पेटा, गूडूरु।

17.

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानव है। मानव की जिज्ञासावृत्ति उसे पशुओं से भिन्न करती है। प्रकृति के रहस्यों को खोजने, उन्हें उपयोग में लाकर जीवन को सुखमय बनाने और ज्ञान विस्तार के मूल में उसकी जिज्ञासा ही है। अपनी जिज्ञासा से उसे यह लाभ मिलता है। मानव में एक विशेष गुण और है, वह है – सौंदर्यानुभूति। मानव सृष्टि के समस्त चराचरों में अपने इसी गुण से अच्छी और खराब वस्तुओं में भेद कर सकता है। अपने इस विवेक से ही मनुष्य ने ललित कलाओं का विकास भी किया है।1.   मानव पशुओं से कैसे भिन्न है?2.   जिज्ञासा से मानव को क्या लाभ है?3.   मानव का विशेष गुण क्या है?4.   अपने विवेक से मानव क्या कर सका है

Answer»

1.   मानव की जिज्ञासावृत्ति उसे पशुओं से भिन्न करती है।

2.   प्रकृति के रहस्यों को खोजने, उन्हें उपयोग में लाकर जीवन को सुखी बनाने और ज्ञान विस्तार करने के मूल में जिज्ञासा ही है। जिज्ञासा से मनुष्य को यह लाभ मिलता है।

3.   मानव का विशेष गुण सौन्दर्यानुभूति है।

4.   मानव ने अपने विवेक से ललित कलाओं का विकास किया है।

18.

अपने पिताजी को पत्र लिखकर पंद्रह सौ रुपये मँगवाइए।

Answer»

अनंतपूर,
दि. x x x x x

पूज्य पिताजी,
प्रणाम,

मैं यहाँ कुशल हूँ। आशा है कि वहाँ आप सब कुशल हैं। मैं अच्छी तरह पढ़ रहा हूँ।

अगले सप्ताह हमारी कक्षा के सभी विद्यार्थी तिरुपति की यात्रा करनेवाले हैं। हमारे दो अध्यापक भी हमारे साथ आ रहे हैं । हम बालाजी के दर्शन करने के बाद मद्रास भी जाना चाहते हैं। मैं भी आपकी अनुमति पाकर उनके साथ जाना चाहता हूँ। इसलिए ₹ 1500 एम.ओ. करने की कृपा कीजिए। माताजी को मेरे प्रणाम कहिए।

आपका प्रिय पुत्र,
नं. xxx

पता :
जी.रामप्रसाद जी,
डो.नं. 9 – 1 -84,
उरवकोंडा, अनंतपूर ज़िला।

19.

अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें आनेवाली परीक्षा की तैयारी के विषय में उससे सलाह माँगिए।

Answer»

130, सुल्तानपेट
बेंगलूरू – 45
दिनांक: 5 मार्च, 2019

प्रिय मित्र अभिनव
उम्मीद है तुम सकुशल होओगे। कई दिन से तुम्हारा पत्र नहीं आया है। शायद तुम वार्षिक परीक्षा की तैयारी में व्यस्त हो। गतवर्ष भी तुमने 96 प्रतिशत अंक लेकर विद्यालय में नया कीर्तिमान बनाया था। उम्मीद है इस बार भी ऐसी ही खुश खबरी मिलेगी। मेरी भी परीक्षाएँ होने वाली है।

मैं भी चाहता हूँ कि तुम्हारी तरह अंक लेकर उत्तीर्ण होऊँ। इसलिए चाहता हूँ कि तुम मेरा मार्गदर्शन करो। मुझे परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ ऐसे सुझाव दो ताकि मैं भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो सकूँ। मुझे किस तरह पढ़ाई करनी चाहिए एवं समय-सारणी किस तरह से बनानी चाहिए इसका सलाह दो।

तुम्हारे पत्र का इंतजार रहेगा।

तुम्हारा मित्र
आनंद

सेवा में,
अभिनव,
189, बी.एम्. रोड
हासन – 573 201.

20.

अपने पिताजी को पत्र लिखकर उन्हें विद्यालय के वार्षिक उत्सव पर आमंत्रित कीजिए।

Answer»

छात्रावास
सरकारी पीयू कॉलेज
चित्रदुर्गा
दिनांक: 5 मार्च, 2019

परम पूज्य पिताजी
सादर प्रणाम।

आपको विदित हो कि मैं यहाँ सानंद हूँ। मेरे सभी सहपाठी परिश्रमी एवं अध्ययनशील हैं। मुझे सबका सहज स्नेह प्राप्त है। यहाँ अनेक पठन-पाठन संबंधी प्रतियोगिताएँ होती रहती हैं। मैं उनमें उत्साह से भाग लेता हूँ। मुझे आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि 18 मार्च को होनेवाले कॉलेज के वार्षिक उत्सव में मुझे सम्मानित किया जाएगा। मैंने ढेर सारी प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते हैं। मैं चाहता हूँ कि आप हमारे कॉलेज के इस वार्षिक उत्सव में उपस्थित रहकर मेरा हौसला बढ़ाये। मैं आपका ट्रेन टिकिट भेज रहा हूँ।

आप सबकी बहुत याद आती है। पूजनीय माता जी को मेरा प्रणाम कहना।

आपका स्नेहाकांक्षी
राहुल

सेवा में,
केशव प्रभु
33, स्टेशन रोड़,
बल्लारी – 583 101.

21.

तुम अपने साथियों के साथ उल्लास यात्रा पर जाना चाहते हो। अपने पिताजी को पत्र लिखकर पाँच सौ रुपये मँगाओ और अनुमति माँगो।

Answer»

विजयवाडा,
दि. xxxxx

पूज्य पिताजी,
सादर प्रणाम,

मैं यहाँ कुशल हूँ। आशा है कि वहाँ आप कुशल हैं। मैं अच्छी तरह पढ़ रहा हूँ।

अगले सप्ताह हमारी कक्षा के सभी विद्यार्थी तिरुपति की विहार यात्रा करनेवाले हैं। हमारे दो अध्यापक भी साथ आ रहे हैं। हम बालाजी के दर्शन करने के बाद मद्रास भी जाना चाहते हैं। मैं भी आपकी अनुमति पाकर उनके साथ जाना चाहता हूँ। इसलिए पाँच सौ रुपये एम.ओ. करने की कृपा कीजिए। माताजी को मेरे प्रणाम। जल्दी अनुमति प्रदान करें।

आपका प्रिय पुत्र,
xxxxx

पता:
ए. रामाराव,
डो. नं. 9-1 – 132,
जगन्नाथपुरम,
काकिनाडा, पू.गो. जिला

22.

ईष्र्या का एक पक्ष, सचमुच ही लाभदायक हो सकता है, जिसके अधीन हर आदमी, हर जाति और हर दल अपने को अपने प्रतिद्वन्द्वी का समकक्ष बनाना चाहता है, किन्तु यह तभी सम्भव है, जब कि ईर्ष्या से जो प्रेरणा आती हो, वह रचनात्मक हो। अक्सर तो ऐसा ही होता है कि ईर्ष्यालु व्यक्ति यह महसूस करता है कि कोई चीज है, जो उसके भीतर नहीं है, कोई वस्तु है, जो दूसरों के पास है, किन्तु वह यह नहीं समझ पाता कि इस वस्तु को प्राप्त कैसे करना चाहिए और गुस्से में आकर वह अपने किसी पड़ोसी मित्र या समकालीन व्यक्ति को अपने से श्रेष्ठ मानकर उससे जलने लगता है, जबकि ये लोग भी अपने आपसे शायद वैसे ही असन्तुष्ट हों।(अ) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।(ब) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।(स)⦁    ईष्र्यालु व्यक्ति लोगों से क्यों ईष्र्या करने लगता है ?⦁    ईष्र्या का लाभदायक पक्ष क्या है और यह कैसे सम्भव है ?⦁    प्रस्तुत गद्यांश में लेखक द्वारा बताये गये ईष्र्या की उत्पत्ति के कारण को स्पष्ट कीजिए।[ पक्ष = पहलू। समकक्ष = समान। समकालीन = अपने समय के।]

Answer»

(अ) प्रस्तुत गद्यावतरण हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी’ के ‘गद्य-खण्ड में संकलित एवं श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखित ‘ईष्र्या, तू न गयी मेरे मन से’ नामक मनोवैज्ञानिक निबन्ध से उद्धृत है। अथवा अग्रवत् लिखिए पाठ का नाम-ईष्र्या, तू न गयी मेरे मन से। लेखक का नाम-श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’।

(ब) प्रथम रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक का कथन है कि ईष्र्या का भाव अनेक दृष्टियों से हानिकारक तो है, परन्तु इसका एक लाभदायक पहलू भी है। वह लाभदायक पहलू यह है कि प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक जाति अथवा प्रत्येक दल में  अपने प्रतिद्वन्द्वी को देखकर यह विचार उत्पन्न होता है। कि वह भी अपने प्रतिद्वन्द्वी के समान बने और उसे इसके लिए जो भी प्रयास अपेक्षित हों, उन प्रयासों की ओर प्रवृत्त हो। परन्तु यह तब तक सम्भव नहीं हो सकता, जब तक ईर्ष्या से प्राप्त होने वाली प्रेरणा ध्वंसात्मक होने के स्थान पर रचनात्मक हो।

द्वितीय रेखांकित अंश की व्याख्या-लेखक श्री दिनकर जी का कहना है कि प्राय: ऐसा ही देखने में आता है कि किसी प्रतिद्वन्द्वी को देखकर व्यक्ति अपनी योग्यता, गुण, कौशल अथवा साधनों की वृद्धि अथवा विकास करने के स्थान पर दूसरों में ही उनके अभावों की कामना करने लगता है। उसे ईष्र्यावश दूसरे की समर्थता और अपनी असमर्थता की ही अनुभूति होती रहती है। उसे यह बोध ही नहीं हो पाता कि वह दूसरों की समृद्धि से ईष्र्या करने के स्थान पर अपने अभावों की पूर्ति किस प्रकार करे। अपनी अभावावस्था पर दु:खी और क्रोधित होकर तथा किसी भी व्यक्ति को अपने से अधिक उत्तम मानकर, वह उससे ईष्र्या करने लग जाता है, जबकि सम्भव है कि जिस व्यक्ति से वह ईर्ष्या कर रहा है, वह भी अपने किसी अभाव के कारण स्वयं से सन्तुष्ट न हो।

(स)
⦁    ईर्ष्यालु व्यक्ति लोगों से इसलिए ईर्ष्या करने लगता है कि क्योंकि वह यह नहीं समझ पाता कि जो वस्तु दूसरों के पास है और उसके पास नहीं है, वह उसे किस प्रकार प्राप्त कर सकता है।
⦁    ईर्ष्या का एक लाभदायक पक्ष यह है कि प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक जाति में अपने प्रतिद्वन्द्वी को देखकर यह विचार उत्पन्न होता है कि वह भी अपने प्रतिद्वन्द्वी के समान बने और इसके लिए अपेक्षित प्रयासों की ओर प्रवृत्त हो।
⦁    जब कोई वस्तु किसी के पास नहीं होती और वह यह नहीं समझ पाता कि इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है तो वह उस व्यक्ति को अपने से श्रेष्ठ समझकर उससे ईष्र्या करने लगता है।

23.

‘तुम चन्दन हम पानी’ कृति के लेखक का नाम लिखिए।

Answer»

‘तुम चन्दन हम पानी’ कृति के लेखक का नाम सन्त रैदास है।

24.

मीराबाई ने किसके लिए सारा जग छोड़ा?

Answer»

मीराबाई ने श्री कृष्ण (गिरिधर गोपाल) के लिए सारा जग छोड़ा।

25.

सीता जी कुटिया को क्या समझती है?

Answer»

सीता जी कुटिया को राजभवन समझती हैं ।

26.

निम्नलिखित के लिग परिवर्तन कीजिए :1) हाथी 2) बालक 3) तनय 4) मनोहारी 5) स्वामी 6) जुलाहा 7) बेटा 8) पापी 9) मोर –10) धनवान 11) संयोजक 12) दाता 13) हंस 14) पति 15) पुत्रवान 16) तनुज 17) नर 18) गोप 19) हिरन 20) गुड्डा 

Answer»

1) हाथी – हथिनी

2) बालक – बालिका

3) तनय – तनया

4) मनोहारी – मनोहारिणी

5) स्वामी – स्वामिननी

6) जुलाहा – जुलाहिन

7) बेटा – बेटी/बिटिया

8) पापी – पापिनी

9) मोर – मोरनी

10) धनवान – धनवती

11) संयोजक – संयोजिका

12) दाता – दात्री

13) हंस – हंसिनी

14) पति – पत्नी

15) पुत्रवान – पुत्रवती

16) तनुज – तनुजा

17) नर – नारी

18) गोप – गोपी

19) हिरन – हिरनी

20) गुड्डा – क्षत्राणी

27.

निम्नलिखित के लिग परिवर्तन कीजिए :1) चूहा 2) क्षत्रिय 3) बाल4) जोगी 5) राजपूत 6) तेली 7) भतीजा 8) कहार 9) देवर 10) साँप 11) मुर्गा 12) भाट 13) यशस्वी 14) पुरुष 15) विद्वान 16) दास 17) अध्यापक 18) प्रबन्धकर्ता 19) राक्षस 20) ठाकुर 

Answer»

1) चूहा – चुहिया

2) क्षत्रिय – क्षत्रिणी

3) बाल – बालाजोगिन

4) जोगी – जोगीन

5) राजपूत – राजपुतानी

6) तेली – तेलिन

7) भतीजा – भतीजी

8) कहार – कहारिन

9) देवर – देवरानी

10) साँप – साँपिन

11) मुर्गा – मुर्गी

12) भाट – भाटनी/भाटिन

13) यशस्वी – यशस्विनी

14) पुरुष – स्त्री

15) विद्वान – विदुषी

16) दास – दासी

17) अध्यापक – अध्यापिका

18) प्रबन्धकर्ता – प्रबन्धकर्ती

19) राक्षस – राक्षसी

20) ठाकुर – ठकुराइन

28.

निम्नलिखित के लिंग परिवर्तन कीजिए:1) भिखारी 2) आदमी 3) पिता 4) नौकर 5) सचिव6) छात्र 7) श्रीमान 8) साहब 9) लड़का 10) माता 11) बकरा 12) श्याम 13) गायक 14) पुजारी 15) उपदेशक 16) साधु 17) महाराजा 18) विधवा 19) बूढ़ा 20) मालिक 

Answer»

1) भिखारी – भिखारिन.

2) आदमी – औरत

3) पिता – माता

4) नौकर – नौकरानी

5) सचिव – महिला सचिव (सचिवा)

6) छात्र – छात्र

7) श्रीमान – श्रीमती

8) साहब – साहिबा

9) लड़का – लड़की

10) माता – पिता

11) बकरा – बकरी

12) श्याम – श्यामा

13) गायक – गायिका

14) पुजारी – पुजारिन

15) उपदेशक – उपदेशिका

16) साधु – साध्वी

17) महाराजा – महारानी

18) विधवा – विधुर

19) बूढ़ा – बूढ़ी

20) मालिक – मालकिन

29.

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :1) जिसके पास कोई नाथ न हो 2) जिसको कोई शत्रु न हो 3) जो कुछ न करता हो 4) जिसके समान कोई दूसरा न हो 5) जिसका कोई अंत न हो 6) जिसकी कल्पना न की जा सके 7) रात में चलने वाला 8) जिसे करना आवश्यक है 9) दूसरे देश से मंगाया जाना 10) साथ चलने वाले/वाली 11) जिसकी आँखे मछली जैसी हो 12) जो सेना में काम करता हो 13) जिसके पास विशेष ज्ञान हो 14) जिसके पास बल न हो 15) जो प्रिय बोलनेवाली स्त्री हो 16) आँखों के आगे होनेवाला 17) जो बात कही न जा सके 18) जिसका वर्णन न किया जा सके 19) जो अनुकरण करने योग्य हो 20) जिसका जन्म न हो सके 

Answer»

1) जिसके पास कोई नाथ न हो – अनाथ

2) जिसको कोई शत्रु न हो – अजातशत्रु

3) जो कुछ न करता हो – अकर्मण्य

4) जिसके समान कोई दूसरा न हो – अनुपम

5) जिसका कोई अंत न हो – अनंत

6) जिसकी कल्पना न की जा सके – अकल्पनीय

7) रात में चलने वाला – निशाचर

8) जिसे करना आवश्यक है – अनिवार्य

9) दूसरे देश से मंगाया जाना – आयात

10) साथ चलने वाले/वाली – सहयात्री

11) जिसकी आँखे मछली जैसी हो – मीनाक्षी

12) जो सेना में काम करता हो – सैनिक

13) जिसके पास विशेष ज्ञान हो – विशेषज्ञ

14) जिसके पास बल न हो – बलहीन

15) जो प्रिय बोलनेवाली स्त्री हो – प्रियंवदा

16) आँखों के आगे होनेवाला – प्रत्यक्ष

17) जो बात कही न जा सके – अकथनीय

18) जिसका वर्णन न किया जा सके – अवर्णनीय

19) जो अनुकरण करने योग्य हो – अनुकरणीय

20) जिसका जन्म न हो सके – अजन्मा

30.

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :1) जिसका आदि न हो 2) बिना सोचे समझे किया गया विश्वास 3) ईश्वर में विश्वास रखने वाला 4) उपकार को मानने वाला 5) रोगी का इलाज करने वाला 6) नीति जानने वाला 7) आँखों के सामने होने वाला 8) नीचे लिखा हुआ 9) जल में रहने वाला 10) जानने की इच्छा रखने वाला 11) प्रतिदिन होने वाला 12) जो जन्म से अंधा हो 13) जिसका कोई आधार न हो 14) जो पुत्र गोद लिया हो15) जिसमें दया हो 16) जो दान करता हो 17) छात्रों के रहने का स्थान 18) घूमने फिरने वाला 19) बड़ा भाई 20) कम खानेवाला 

Answer»

1) जिसका आदि न हो – अनादि

2) बिना सोचे समझे किया गया विश्वास – अंधविश्वास

3) ईश्वर में विश्वास रखने वाला – आस्तिक

4) उपकार को मानने वाला – कृतज्ञ

5) रोगी का इलाज करने वाला – चिकित्सक/वैद्य

6) नीति जानने वाला – नीतिज्ञ

7) आँखों के सामने होने वाला – प्रत्यक्ष

8) नीचे लिखा हुआ – निम्नलिखित

9) जल में रहने वाला – जलचर

10) जानने की इच्छा रखने वाला – जिज्ञासु

11) प्रतिदिन होने वाला – दैनिक

12) जो जन्म से अंधा हो – जन्मान्ध

13) जिसका कोई आधार न हो – निराधार

14) जो पुत्र गोद लिया हो – दत्तक

15) जिसमें दया हो – दयालु

16) जो दान करता हो – दानी

17) छात्रों के रहने का स्थान – छात्रावास

18) घूमने फिरने वाला – घुमक्कड़ (घुमंतु).

19) बड़ा भाई – अग्रज

20) कम खानेवाला – अल्पाहारी

31.

निम्नलिखित के लिंग परिवर्तन कीजिए:1) युवक 2) चौधरी 3) बलवान 4) भाई 5) संपादक 6) श्याम

Answer»

1) युवक – युवती

2) चौधरी – चौधरानी

3) बलवान – बलवती

4) भाई – बहन

5) संपादक – संपादिका

6) श्याम – श्यामा

32.

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :1) जिसे जीता न जा सके 2) हित चाहने वाला 3) जो साथ पढ़ता हो 4) सदा सत्य बोलने वाला 5) अच्छे चरित्र वाला 6) मांस खाने वाला 7) जिसमें दया न हो 8) जो धर्म का काम करे 9) बच्चों के लिए उपयोगी 10) जिसका रूप अच्छा न हो 11) जो छिपाने योग्य हो 12) जो परिचित न हो 13) जो दिखाई न दे 14) आलोचना करने वाला 15) जिसकी तुलना न की जा सके 16) रास्ता दिखाने वाला 17) आकाश में विचरने वाला 19) जिसका विश्वास न किया जा सके 20) कम जानने वाला 

Answer»

1) जिसे जीता न जा सके – अजेय

2) हित चाहने वाला – हितैषी

3) जो साथ पढ़ता हो – सहपाठी

4) सदा सत्य बोलने वाला – सत्यवादी

5) अच्छे चरित्र वाला – चरित्रवान

6) मांस खाने वाला – मांसाहारी

7) जिसमें दया न हो – निर्दयी

8) जो धर्म का काम करे – धार्मिक

9) बच्चों के लिए उपयोगी – बालोपयोगी

10) जिसका रूप अच्छा न हो – कुरूप

11) जो छिपाने योग्य हो – गोपनीय

12) जो परिचित न हो – अपरिचित

13) जो दिखाई न दे – अदृश्य

14) आलोचना करने वाला – आलोचक

15) जिसकी तुलना न की जा सके – अतुलनीय

16) रास्ता दिखाने वाला – मार्गदर्शक

17) आकाश में विचरने वाला – नभचर

19) जिसका विश्वास न किया जा सके – अविश्वसनीय

20) कम जानने वाला – अल्पज्ञ

33.

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :1) जो ईश्वर पर विश्वास न करता हो 2) दूर की चीजों को देखने वाला 3) जो कम खर्च करता हो 4) जहाँ पहुँचा न जा सके 5) जिसका भाग्य अच्छा न हो 6) अचानक होने वाली घटना 7) जिसकी बहुत अधिक चर्चा हो 8) दर्शनशास्त्र को जानने वाला 9) निरीक्षण करने वाला 10) फल खाकर ही रहने वाला 11) राजा से विद्रोह करने वाला 12) सहन करने की शक्ति वाला 13) साफ़ – साफ़ कहने वाला 14) जो लोगों में प्रिय हो 15) दूसरे के काम में हाथ डालना 16) संकट से ग्रस्त 17) जो सरलता से प्राप्त हो 18) जो क्षमा के योग्य न हो 

Answer»

1) जो ईश्वर पर विश्वास न करता हो – नास्तिक

2) दूर की चीजों को देखने वाला – दूरदर्शी

3) जो कम खर्च करता हो – मितव्ययी

4) जहाँ पहुँचा न जा सके – अगम्य

5) जिसका भाग्य अच्छा न हो – दुर्भाग्यशाली

6) अचानक होने वाली घटना – अकस्मात

7) जिसकी बहुत अधिक चर्चा हो – बहुचर्चित

8) दर्शनशास्त्र को जानने वाला – दार्शनिक

9) निरीक्षण करने वाला – निरीक्षक

10) फल खाकर ही रहने वाला – फलाहारी

11) राजा से विद्रोह करने वाला – राजद्रोही

12) सहन करने की शक्ति वाला – सहनशील

13) साफ़ – साफ़ कहने वाला – स्पष्टवक्ता

14) जो लोगों में प्रिय हो – लोकप्रिय

15) दूसरे के काम में हाथ डालना – हस्तक्षेप

16) संकट से ग्रस्त – संकटग्रस्त

17) जो सरलता से प्राप्त हो – सुलभ

18) जो क्षमा के योग्य न हो – अक्षम्य

34.

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :1) जो कानून के विरुद्ध हो 2) चारों वेदों को जानने वाला 3) जो जाना पहचाना हो 4) जो न करने योग्य हो 5) काम से जी चुराने वाला 6) उपजाऊ भूमि 7) जो किसी का पक्ष न ले 8) जिसका कोई अर्थ न हो 9) जिसे पढ़ा जा सके 10) सौतेली माँ11) जिसमें शक्ति न हो 12) कम खाने वाला 13) जिसका मन अन्यत्र हो 14) जो कम बोलता हो 15) माँस खाने वाला 16) आकाश को छूने वाला17) जो कुछ न करता हो 18) जिसके पास कोई ज्ञान न हो 19) जो किसी से डरता न हो। 20) जो कभी न मरता हो 

Answer»

1) जो कानून के विरुद्ध हो – गैरकानूनी

2) चारों वेदों को जानने वाला – चतुर्वेदी

3) जो जाना पहचाना हो – परिचित

4) जो न करने योग्य हो – अकरणीय

5) काम से जी चुराने वाला – कामचोर

6) उपजाऊ भूमि – उर्वर

7) जो किसी का पक्ष न ले – तटस्थ

8) जिसका कोई अर्थ न हो – निरर्थक

9) जिसे पढ़ा जा सके – पठनीय

10) सौतेली माँ – विमाता

11) जिसमें शक्ति न हो – अशक्त

12) कम खाने वाला – अल्पभोजी/मिताहारी

13) जिसका मन अन्यत्र हो – अन्यमनस्क

14) जो कम बोलता हो – मितभाषी

15) माँस खाने वाला – मांसाहारी

16) आकाश को छूने वाला – आकाशचुंबी

17) जो कुछ न करता हो – अकर्मण्य

18) जिसके पास कोई ज्ञान न हो – अज्ञानी

19) जो किसी से डरता न हो। – निडर

20) जो कभी न मरता हो – अमर

35.

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए :1) जो दूसरों से ईर्ष्या रखता हो 2) सदा रहनेवाला 3) दूसरों का भला करने वाला 4) जो शरण में आया हो 5) छोटा भाई 6) हाथ से लिखा हुआ 7) हिंसा करने वाला 8) जहाँ पहुँचना कठिन हो 9) जो क्षमा करने योग्य हो 10) प्रशंसा करने योग्य 11) बुरे चरित्र वाला12) अवसर के अनुसार बदल जाने वाला 13) जो सबसे आगे रहता हो 14) जिसकी कोई उपमा न हो15) आज्ञा पालन करने वाला 16) जो देखने योग्य हो 17) संध्या और रात्रि के बीच का समय 18) जहाँ कोई न रहता हो 19) जो अभी – अभी पैदा हुआ हो 20) दूसरे के सहारे पर रहने वाला 

Answer»

1) जो दूसरों से ईर्ष्या रखता हो – ईर्ष्यालु

2) सदा रहनेवाला – सदैव

3) दूसरों का भला करने वाला – परोपकारी

4) जो शरण में आया हो – शरणार्थी

5) छोटा भाई – अनुज

6) हाथ से लिखा हुआ – हस्तलिखित

7) हिंसा करने वाला – हिंसक

8) जहाँ पहुँचना कठिन हो – दुर्गम

9) जो क्षमा करने योग्य हो – क्षम्य

10) प्रशंसा करने योग्य – प्रशंसनीय

11) बुरे चरित्र वाला – दुष्चरित्र

12) अवसर के अनुसार बदल जाने वाला – अवसरवादी

13) जो सबसे आगे रहता हो – अग्रगामी/अग्रगण्य/अग्रणी

14) जिसकी कोई उपमा न हो – अनुपम

15) आज्ञा पालन करने वाला – आज्ञापालक/आज्ञाकारी

16) जो देखने योग्य हो – दर्शनीय

17) संध्या और रात्रि के बीच का समय – गोधूलि

18) जहाँ कोई न रहता हो – निर्जन

19) जो अभी – अभी पैदा हुआ हो – नवजात

20) दूसरे के सहारे पर रहने वाला – परावलंबी/परजीवी

36.

रोबोट कहानी का सारांश अँग्रेजी में लिखें।

Answer»

ROBOT Summary in English:

Dr. Pradeep Mukhopadhay ‘Alok’ The writer has given a message that machine cannot replace humans and humans
will not lose their proting given a mess will not lose their ‘work.
Sadhoram was working with Saksena family since many years. One day he met with an accident falling from a moving bus. He was hospitalised. Saksena family was big. With the hospitalisation of Sadhorm all the members of the family faced difficulty. Dhiraj Saksena wanted to mitigate the difficulty of the family members and hence contacted the ‘Robotonics Corporation’ for help.

In the year 2030, Various robots were engaged in cleaning activities in Robotonics corporation: The Robots were given artificial intelligence and some of them had human qualities also.

A Robot is the corner offered Saksena help and enquired about his requirement. Saksena wanted an intelligent Robot for household work his own personal work etc. Saksena hired an intelligent Robot for work.

Robonil, an intelligent Robot started working in Saksena household and all the members of the family were very happy as Robonil did all the household work and also assisted Saksena.

Robonil ‘used to take the dog for walk in the evenings and met another Robot named Robodeep, who was working in the neighbourhood.

One day Robodeep informed Robonil the shay of Sadhoram, who was hospitalised Robodeep also informed Robonil that Saksena family was planning to remove Sadhoram from his employment. Robonil felt guilty and very bad as it was against the principles of Robotice that any human he coming Jobless became of Robots, they diocussed among themselves and come to a conclusion.

Next day both the Robots Robonil and Robodeep went to Robotonics corporation and narrated the entire happenings to Robojeeth, the owner of ti withdraw the services of Robots so that Sadhoram’s Job could be saved. But Robojeeth did not agree as he would lose business and lose profit. Both the Robots when disappointed and returned to their employers.

Robonil was very sad and worried about sadhoram’s losing Saksena gave a scientific strong and asked Robonil to type in the computer the story mentioned that a person was seriously ill and hence replaced by a Robot. Even after recovery, he was not taken back and the services of a Robot continued. The Robot contracted the Robot Association and arranged to give a call for strike. Due to the threat of strike the worker was reemployed. After reading the story Robonil was excited. Now he knew what to do to help Sadhoram.

Next day Robonil and Robodeep approached their Association, briefed them and requested for help. The Robotic Association gave a call for strike accordingly.

37.

गद्यांश को पढ़कर निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखिए :1.   लड़का व्यापारियों के साथ कहाँ जा रहा था?2.   लड़के की माँ ने उसे क्या उपदेश दिया?3.   सरदार क्यों खुश हुआ?4.   लड़के को सच्चाई का क्या फल मिला ?

Answer»

1.   लड़का व्यापारियों के साथ व्यापार करने जा रहा था।

2.   लड़के की माँ ने लड़के को हमेशा सच बोलने का उपदेश दिया।

3.   लड़के की सच्चाई देखकर सरदार खुश हुआ।

4.   उसे सरदार से खूब धन मिला।

38.

यदि सार्वभौमिक समुच्चय `U=(1,2,3,4,5,6,7,8)` तथा `A=(1,2,3,4)` तब `A^(C)` ज्ञात करें?A. `(5,6,7,8)`B. `(5,6,1,2)`C. `(5,6,2,3)`D. `(5,6,3,5)`

Answer» Correct Answer - A
`U=(1,2,3,4,5,6,7,8)`
`A=(1,2,3,4)`
`A^(c)=x epsilon uuu` and `x !inA`
`A^(c)=U-A`
`=(1,2,3,4,5,6,7,8)-(1,2,3,4)`
`=(5,6,7,8)`
39.

यदि एक घड़ी प्रत्येक घंटे उचित बार टन-टन करती है। वह प्रतिदिन कितनी बार टन-टन करेगी?A. 300B. 156C. 68D. 78

Answer» Correct Answer - B
Total number of time it strike
`=2(1+2+……….+12)`
Sum of `n` natural no `=(n(n+1))/2`
`=2((12xx(12+1))/2)=156`
40.

किसी समुच्चय के सभी अवयव इस तरह हैं, कि `n(A)=40,n(B)=26` तथा `n(AuuB)=16` तब `(AuuB)` का मान ज्ञात करें?A. 30B. 40C. 50D. 60

Answer» Correct Answer - C
`n(AuuB)=n(A)+n(B)-n(AnnB)`
`=40+26-16=50`
41.

यदि कोई मशीन `t` घंटे में `k/5` किलो वाट शक्ति खपत करती है। इस प्रकार की 3 मशीनें 10 घंटे में कितनी शक्ति खपत करेंगी?A. `k/t`B. `(6t)/k`C. `(6k)/t`D. `t/k`

Answer» Correct Answer - C
`t` घंटे में मशीन की खपत `K/5`
एक घंटे में मशीन की खपत `K/(5t)`
10 घंटें में मशीन की खपत `k/(5t)xx10`
10 घंटे में 3 तीन मशीनों की खपत `k/(5t)xx10xx3=(6k)/t`
42.

मैं 37 मिनट में एक निश्चित दूरी पैदल तय करता हूं तथा बाइक द्वारा वापस आता हूं। मैं 55 मिनट में दोनों ओर की यात्रा पैदल तय करता हूं। दोनों ओर की यात्रा बाइक द्वारा तय करने में लगा समय ज्ञात करें?A. 30 minutesB. 19 minutesC. 37 minutesD. 20 minutes

Answer» Correct Answer - B
दोनों रास्तों को तय करने में लगा समय
`=55` minutes
एक रास्ते को तय करने में लगा समय
`=55/2=27.5` min
पैदल जाने तथा बाईक से वापस आने में लगा समय `=37` min
एक रास्ते को बाईक से तय करने में लगा समय
दोनो रास्तों को बाईक से तय करने में लगा समय
`=9.5xx2=19` min
43.

प्रधानाध्यापक समस्तपद का विग्रह है प्रधान अध्यापक (हाँ या नहीं में उत्तर दीजिए।)

Answer»

सही उत्तर है नहीं

44.

निबन्ध:महापुरुष की जीवनी

Answer»

प्रस्तावना–प्राचीन काल से लेकर आज तक हमारे देश में अनेक महान् विभूतियों, युगपुरुषों तथा सन्त-महात्माओं ने जन्म लिया। महात्मा गाँधी का जन्म भी यहीं की पवित्र-पावन भूमि पर हुआ था। सत्य और अहिंसा का सहारा लेकर सम्पूर्ण श्व को शान्ति का पाठ पढ़ाने  वाली महान् आत्मा, जिसने प्रेम का महान् आदर्श प्रस्तुत किया, ऐसे महात्मा का नाम सभी भारतीयों द्वारा बड़े आदर से लिया जाता है। भारतवासी उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ या ‘बापू’ कहकर पुकारते हैं। वे अहिंसा के अवतार, सत्य के देवता, अछूतों के प्राणाधार एवं राष्ट्र के पिता थे।

जीवन-परिचय एवं शिक्षा–महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, सन् 1869 ई० को काठियावाड़ के अन्तर्गत पोरबन्दर नामक स्थान के एक सम्भ्रान्त परिवार में हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी था। इनके पिता करमचन्द गाँधी राजकोट रियासत में दीवान थे। इनकी माता पुतलीबाई अत्यन्त धर्मपरायण, पूजा-पाठ में श्रद्धा रखने वाली एक आदर्श महिला थीं।

गाँधीजी की प्रारम्भिक शिक्षा राजकोट में हुई। वे मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करके सन् 1888 ई० में कानून का अध्ययन करने के लिए इंग्लैण्ड चले गये। सन् 1891 ई० में गाँधीजी बैरिस्टर होकर भारत लौटे और बम्बई में वकालत करना आरम्भ किया। ये झूठ से काम लेना पाप समझते थे और गरीबों के मुकदमों की पैरवी नि:शुल्क किया करते थे।

दक्षिण अफ्रीका-गमन—सन् 1893 ई० में एक गुजराती व्यवसायी के मुकदमे की पैरवी करने के लिए गाँधीजी को दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ की सरकार द्वारा भारतीयों के साथ अपमान व भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता था। गाँधीजी को स्वयं नाना प्रकार की अवमाननाएँ सहन करनी पड़ीं।। उन्होंने भारतीयों की राजनीतिक और सामाजिक दशा सुधारने के लिए ‘नैटाल कांग्रेस की स्थापना की और इस भेदभाव के विरुद्ध सत्याग्रह आन्दोलन आरम्भ किया। वहाँ उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा, परन्तु वे अपने दृढ़ संकल्प से अविचलित रहे। बीस वर्ष अफ्रीका में रहकर गाँधीजी भारत लौट आये।।

भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के कर्णधार–भारत लौटने पर गाँधीजी ने पराधीन भारतीयों की दुर्दशा देखी। उन्होंने पराधीन भारत की बेड़ियों को काटने का निश्चय किया और अहमदाबाद के निकट साबरमती के तट पर एक आश्रम की स्थापना की और यहीं रहकर करोड़ों भारतीयों का मार्गदर्शन किया। गाँधीजी ने यहाँ भी अंग्रेजों के विरुद्ध दक्षिण अफ्रीका में आजमाये गये सत्याग्रह और अहिंसा को असहयोग की नयी धार चढ़ाते हुए आजमाया। उनके नेतृत्व से भारतीयों में एक नयी स्फूर्ति आ गयी। उनके एक आह्वान पर लोग सत्याग्रह में भाग लेकर अपने प्राण निछावर करने के लिए स्वतन्त्रता-संग्राम में कूद पड़े

चल पड़े जिधर दो डगमग में, बढ़ गये कोटि पग उसी ओर।
पड़ गयी जिधर भी एक दृष्टि, गड़ गये कोटि दृग उसी ओर ॥

गाँधीजी ने मदनमोहन मालवीय, पं० मोतीलाल नेहरू, चितरंजन दास आदि के सहयोग से राष्ट्रव्यापी आन्दोलन छेड़ दिया। गाँधीजी को कांग्रेस का सभापति बनाया गया। इन्होंने कांग्रेस के सम्मुख खादी-प्रचार, अछूतोद्धार और मुस्लिम एकता की योजना रखी। सन् 1929 ई० में  ‘साइमन कमीशन’ का बहिष्कार किया गया। सन् 1930 ई० में गाँधीजी ने डाण्डी में नमक सत्याग्रह करके ‘नमक-कानून’ को तोड़ा।

तदनन्तरं गाँधीजी कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में ‘गोलमेज कॉन्फ्रेन्स’ में भाग लेने इंग्लैण्ड गये। वहाँ से उनके लौटने पर आन्दोलन ने पुनः जोर पकड़ा। सन् 1942 ई० में गाँधीजी ने अंग्रेजो, भारत छोड़ो’ का नारा लगाया तथा भारतीयों के लिए ‘करो या मरो’ का आह्वान किया। गाँधीजी के आह्वान पर भारतीय लोगों ने प्रशासन-शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में असहयोग प्रारम्भ कर दिया। इससे अंग्रेजों को यह समझ में आने लगा। कि भारत को अब अधिक समय तक गुलाम नहीं रखा जा सकता। अन्ततः उन्होंने भारत का दो भागों में विभाजन करके 15 अगस्त, 1947 ई० को भारत की स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी।

गाँधीजी की मृत्यु-गाँधीजी की मानवतावादी नीति को मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति समझकर एक भ्रान्त युवक नाथूराम गोडसे ने प्रार्थना को जाते समय 30 जनवरी, 1948 ई० को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। ‘हे राम’ का उच्चारण करता हुआ मानवता का यह पोषक सदा के लिए सो गया।

गाँधीजी का आदर्श व्यक्तित्व-गाँधीजी केवल राजनीतिक नेता ही नहीं थे, वरन् वे समाजसुधारक एवं ग्राम-सुधारक भी थे। उन्होंने समाज में हरिजनों की दयनीय दशा देखकर उनका उद्धार किया। समाज में नारी को सम्मानपूर्ण स्थान दिलाने का भरसक प्रयत्न किया। उनका विश्वास था कि भारत गाँवों में बसा हुआ है और गाँवों की उन्नति से ही देश की उन्नति हो सकती है।

गाँधीजी का व्यक्तित्व महान् था। उनकी ‘कथनी और करनी’ में कोई अन्तर नहीं था। ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ उनके जीवन का मूलमन्त्र था। ‘सत्य और अहिंसा’ उनके दिव्य अस्त्र थे। ‘प्रेम और शान्ति उनका सन्देश था। ‘रामराज्य’ उनका स्वप्न था। ‘पाप से घृणा करो, पापी से नहीं उनके हृदय के उद्गार थे।

वर्तमान समय में गाँधीजी की प्रासंगिकता–आज महापुरुषों को उनकी जयन्ती अथवा पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करना एक औपचारिकता मात्र रह गयी है। गाँधीजी का अनुयायी होने का दम भरने वाले नेता ही आज छल-छद्म, धोखाधड़ी व रिश्वतखोरी जैसे भ्रष्टाचार के मामलों में आकण्ठ डूबे दिखाई दे रहे हैं। गाँधीजी के देश में ही उनका गाँधीवाद नष्ट हो रहा है और लोकतन्त्र लड़खड़ा रहा है।
गाँधीजी ने स्वाधीनता और स्वावलम्बन के लिए विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर उनकी होली जलायी थी और राष्ट्रभाषा हिन्दी के माध्यम से स्वतन्त्रता की लड़ाई लड़ी थी, पर आज बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ, विदेशी भाषा और विदेशी वस्तुओं को कण्ठहार बनाया जा रहा है।  अहिंसा के पुजारी और शान्ति के दूत के ही देश में हिंसा, हत्या, अपहरण और बलात्कार आम हो गये हैं।

उपसंहार-संसार में अनेक महापुरुष हुए हैं, पर वस्तुतः गाँधीजी विश्व के सर्वश्रेष्ठ महापुरुषों में एक थे। यदि ईसा और बुद्ध धर्म-प्रचारक थे, वाशिंगटन तथा लेनिन कुशल राजनीतिज्ञ थे, कबीर और तुलसी जनता को भक्ति-रस में स्नान कराने वाले सन्त थे तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी एक साथ श्रेष्ठ सन्त, राजनीति विशारद, परम धर्मात्मा, समाज-सुधारक और मानवता के पोषक थे। गाँधीजी जैसे महापुरुष अमर होते हैं। तथा स्वार्थ, हिंसा और अनैतिकता के अन्धकार में भटकती मानवता के लिए प्रकाश-स्तम्भ के तुल्य होते हैं।

45.

निबन्ध:छात्र और अनुशासन

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प्रस्तावना विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। देश के प्रत्येक प्रकार का विकास विद्यार्थियों पर ही निर्भर है। विद्यार्थी जाति, समाज और देश का निर्माता होता है; अतः विद्यार्थी का चरित्र उत्तम होना बहुत आवश्यक है। उत्तम चरित्र अनुशासन से ही बनता है। अनुशासन जीवन का प्रमुख  अंग और विद्यार्थी जीवन की आधारशिला है। व्यवस्थित जीवन व्यतीत करने के लिए मात्र विद्यार्थी ही नहीं अपितु प्रत्येक मनुष्य के लिए अनुशासित होना अति आवश्यक है। आज विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता की शिकायत सामान्य-सी बात हो गयी है। इससे शिक्षा-जगत् ही नहीं, अपितु सारा समाज प्रभावित हुआ है।

विद्यार्थी और विद्या-‘विद्यार्थी’ का अर्थ है-‘विद्या का अर्थी’ अर्थात् विद्या प्राप्त करने की कामना करने वाला। विद्या लौकिक या सांसारिक जीवन की सफलता का मूल आधार है, जो गुरु-कृपा से प्राप्त होती है।

संसार में विद्या सर्वाधिक मूल्यवान् वस्तु है, जिस पर मनुष्य के भावी जीवन का सम्पूर्ण विकास तथा सम्पूर्ण नति निर्भर करती है। इसी कारण महाकवि भर्तृहरि विद्या की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि “विद्या ही मनुष्य का श्रेष्ठ स्वरूप है, विद्या भली-भाँति छिपाया हुआ धन है (जिसे दूसरा चुरा नहीं सकता) । विद्या ही सांसारिक भोगों को तथा यश और सुख को देने वाली है, विद्या गुरुओं की भी गुरु है। विद्या ही श्रेष्ठ ५. देवता है। राजदरबार में विद्या ही आदर दिलाती है, धन नहीं। अत: जिसमें विद्या नहीं, वह निरा पशु है। इस अमूल्य विद्यारूपी रत्न को पाने के लिए इसका जो मूल्य चुकाना पड़ता है, वह है तपस्या। इस तपस्या का स्वरूप स्पष्ट करते हुए कवि कहता है

सुखार्थिनः कुतो विद्या, कुतो विद्यार्थिनः सुखम्।
सुखार्थी वा त्यजेद् विद्या, विद्यार्थी वा त्यजेत् सुखम् ॥

अनुशासन का स्वरूप और महत्त्व-‘अनुशासन’ का अर्थ है-बड़ों की आज्ञा (शासन) के पीछे (अनु) चलना। ‘अनुशासन का अर्थ वह मर्यादा है जिनका पालन ही विद्या प्राप्त करने और उसका उपयोग करने के लिए अनिवार्य होता है। अनुशासन का भाव सहज रूप से विकसित किया जाना चाहिए। थोपे जाने पर अथवा बलपूर्वक पालन कराये जाने पर यह लगभग अपना उद्देश्य खो देता है। विद्यार्थियों के प्रति प्रायः सभी को यह शिकायत रहती है कि वे अनुशासनहीन होते जा रहे हैं, किन्तु शिक्षक वर्ग को भी इसका कारण ढूंढ़ना चाहिए कि क्यों विद्यार्थियों की उनमें श्रद्धा विलुप्त होती जा रही है।

अनुशासनहीनता के कारण-वस्तुत: विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता एक दिन में पैदा नहीं हुई है। इसके अनेक कारण हैं, जिन्हें मुख्यत: निम्नलिखित चार वर्गों में बाँटा जा सकता है

(क) पारिवारिक कारण–बालक की पहली पाठशाला उसका परिवार है। माता-पिता के आचरण का बालक पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आज बहुत-से ऐसे परिवार हैं जिनमें माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं या अलग-अलग व्यस्त रहते हैं। इससे बालक उपेक्षित होकर विद्रोही बन जाता है।

(ख) सामाजिक कारण–विद्यार्थी जब समाज में चतुर्दिक् व्याप्त भ्रष्टाचार, घूसखोरी, सिफारिशबाजी,  भाई-भतीजावाद, फैशनपरस्ती, विलासिता और भोगवाद अर्थात् हर स्तर पर व्याप्त अनैतिकता को देखता है तो वह विद्रोह कर उठता है और अध्ययन की उपेक्षा करने लगता है।

(ग) राजनीतिक कारण-छात्र-अनुशासनहीनता का एक बहुत बड़ा कारण दूषित राजनीति है। आज राजनीति जीवन के हर क्षेत्र पर छा गयी है। सारे वातावरण को उसने इतना विषाक्त कर दिया है कि स्वस्थ वातावरण में साँस लेना कठिन हो गया है।

(घ) शैक्षिक कारण—छात्र-अनुशासनहीनता का कदाचित् सबसे प्रमुख कारण यही है। अध्ययन के लिए आवश्यक अध्ययन-सामग्री, भवन एवं अन्यान्य सुविधाओं का अभाव, कर्तव्यपरायण एवं चरित्रवान् शिक्षकों के स्थान पर अयोग्य, अनैतिक और भ्रष्ट अध्यापकों की नियुक्ति, अध्यापकों द्वारा छात्रों की कठिनाइयों की उपेक्षा करके ट्यूशन आदि के चक्कर में लगे रहना या मनमाने ढंग से कक्षाएँ लेना आदि छात्र-अनुशासनहीनता के प्रमुख शैक्षिक कारण हैं।

निवारण के उपाय-यदि शिक्षकों को नियुक्त करते समय सत्यता, योग्यता और ईमानदारी का आकलन अच्छी प्रकार कर लिया जाए तो प्राय: यह समस्या उत्पन्न ही न हो। प्रभावशाली, गरिमामण्डित, विद्वान् और प्रसन्नचित्त शिक्षक के सम्मुख विद्यार्थी सदैव अनुशासनबद्ध रहते हैं। पाठ्यक्रम को अत्यन्त सुव्यवस्थित वे सुनियोजित, रोचक, ज्ञानवर्धक एवं विद्यार्थियों के मानसिक स्तर के अनुरूप होना चाहिए।

छात्र-अनुशासनहीनता के उपर्युक्त कारणों को दूर करके ही हम इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। सबसे पहले वर्तमान शिक्षा-व्यवस्था को इतना व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए कि शिक्षा पूरी करके विद्यार्थी अपनी आजीविका के विषय में पूर्णत: निश्चिन्त हो सके। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी के स्थान पर मातृभाषा हो। शिक्षा सस्ती की जाए और निर्धन किन्तु योग्य छात्रों को नि:शुल्क उपलब्ध करायी जाए। परीक्षा-प्रणाली स्वच्छ हो, जिससे योग्यता का सही और निष्पक्ष मूल्यांकन हो सके।

उपसंहार—छात्रों के समस्त असन्तोषों का जनक अन्याय है। इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से अन्याय को मिटाकर ही देश में सच्ची सुख-शान्ति लायी जा सकती है। छात्र-अनुशासनहीनता का मूल भ्रष्ट राजनीति, समाज, परिवार और दूषित शिक्षा-प्रणाली में निहित है। इनमें सुधार लाकर ही हम विद्यार्थियों में व्याप्त अनुशासनहीनता की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ़ सकते हैं।

46.

निबन्ध:डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम

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प्रस्तावना-तमिलनाडु के मध्यमवर्गीय परिवार में डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 ई० को हुआ था। जिनका पूरा नाम-अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अबुल कलाम था। इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था जो मछुआरों को किराये पर नाव देने का काम करते थे। इनको बचपन से ही पायलट बनकर आसमान की अनन्त ऊँचाइयों को छूने का सपना था। अपने इस सपने को साकार करने के लिए इन्होंने अखबार तक बेचा तथा  मुफलिसी में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और संघर्ष करते हुए उच्च शिक्षा हासिल कर पायलट की भर्ती परीक्षा में सम्मिलित हुए। उस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बावजूद उनका चयन नहीं हो सका, क्योंकि उस परीक्षा के द्वारा केवल आठ पायलटों का चयन होना था और सफल अभ्यर्थियों की सूची में उनका नौंवा स्थान था। इस घटना से निराशा होने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी और दृढ़-निश्चय के बल पर उन्होंने सफलता की ऐसी बुलन्दियाँ हासिल कीं, जिनके सामने सामान्य पायलटों की उड़ानें अत्यन्त तुच्छ नजर आती हैं।

शैक्षिक उपलब्धियाँ-उनका व्यक्तित्व एक तपस्वी और कर्मयोगी का रहा। इन्होंने संघर्ष करते हुए प्रारम्भिक शिक्षा रामेश्वरम् के प्राथमिक स्कूल से प्राप्त करने के बाद रामनाथपुरम् के शवट्ज़ हाईस्कूल से मैट्रिकुलेशन किया। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए तिरुचिरापल्ली चले गए। वहाँ के सेन्ट जोसेफ कॉलेज से उन्होंने बी.एस-सी. की उपाधि प्राप्त की। बी. एस-सी. के बाद 1958 ई० में उन्होंने मद्रास इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इन्जीनियरिंग में डिप्लोमा किया।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ० कलाम ने हावरक्राफ्ट परियोजना एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया। इसके बाद 1962 ई० में वे भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन में आए, जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी प्रक्षेपण यान से जुलाई, 1980 ई० में रोहिणी उपग्रह का अन्तरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। 1982 ई० में वे भारतीय रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन में वापस निदेशक के तौर पर आए तथा अपना सारा ध्यान गाइडेड मिसाइल के विकास पर केन्द्रित किया। अग्नि मिसाइल एवं पृथ्वी मिसाइल के सफल परीक्षण का श्रेय भी इन्हीं को जाता है। उस महान व्यक्तित्व ने भारत को अनेक मिसाइलें प्रदान कर इसके सामरिक दृष्टि से इतना सम्पन्न कर दिया कि पूरी दुनिया इन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से जानने लगी।

जीवन की सफलताएँ-जुलाई, 1992 ई० में वे भारतीय रक्षा मन्त्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त हुए। उनकी देखरेख में भारत ने 1998 ई० में पोखरण में दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ। वर्ष 1963-64 के दौरान कलाम ने अमेरिका के अन्तरिक्ष संगठन नाशा की भी यात्रा की। वैज्ञानिक के रूप में कार्य करने के दौरान अलग-अलग प्रणालियों को एकीकृत रूप देना उनकी विशेषता थी। उन्होंने अन्तरिक्ष एवं सामरिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर नए उपकरणों का निर्माण भी किया।

डॉ० कलाम की उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1981 ई० पद्मभूषण और 1990 ई० में पदम् विभूषण से सम्मानित किया। इसके बाद उन्हें विश्वभर के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया। 1997 ई० में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

एक दिन ऐसा भी आया जब उन्होंने भारत के सर्वोच्च पद पर 26 जुलाई, 2002 को ग्यारहवें राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने इस पद को 25 जुलाई, 2007 तक सुशोभित किया। वे राष्ट्रपति भवन को सुशोभित करने वाले प्रथम वैज्ञानिक हैं। राष्ट्रपति के रूप में  अपने कार्यकाल में उन्होंने कई देशों का दौरा किया एवं भारत का शान्ति का सन्देश दुनिया भर को दिया। इस दौरान उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया एवं अपने व्याख्यानों द्वारा देश के नौजवानों का मार्गदर्शन करने एवं उन्हें प्रेरित करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया।

सीमित संसाधनों एवं कठिनाइयों के होते हुए भी उन्होंने भारत को अन्तरिक्ष अनुसन्धान एवं प्रक्षेपास्त्रों के क्षेत्र में एक ऊँचाई प्रदान की। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कलाम जी का व्यक्तिगत जीवन बेहद अनुशासित रहा। वे शाकाहारी थे तथा कुरान एवं भगवद्गीता दोनों का अध्ययन करते थे। संगीत से उनका बेहद लगाव था। कलाम ने तमिल भाषा में कविताएँ भी लिखीं। जिनका अनुवाद विश्व की कई भाषाओं में हो चुका है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई प्रेरणास्पद पुस्तकों की भी रचना की है। भारत 2020 : नई सहस्राब्दी । के लिए एक दृष्टि’, ‘इग्नाइटेड माइण्ट्स : अनलीशिंग द पावर विदिन इण्डिया’, ‘इण्डिया माय ड्रीम’, ‘विंग्स ऑफ फायर’ उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं। उनकी पुस्तकों का कई भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनका मानना है कि भारत तकनीकी क्षेत्र में पिछड़ जाने के कारण ही अपेक्षित उन्नति-शिखर पर नहीं पहुंच पाया है। इसलिए अपनी पुस्तक ‘भारत 2020 : नई सहस्राब्दी के लिए एक दृष्टि’ के द्वारा उन्होंने भारत के विकास-स्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए देशवासियों को एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्रदान किया। यही कारण है कि वे देश की नई पीढ़ी के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं।

प्रेरणा के स्रोत–पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम हमेशा से युवाओं को ऊर्जावान बनाने के लिए उनका हौंसला बढ़ाते रहते थे। युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी कहीं कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें अपनाकर कोई भी छात्र बुलन्दियों को छू सकता है। उनकी कही बातें हमेशा युवाओं का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

कलाम ने कहा था
चलो हम अपना आज कुर्बान करते हैं जिससे हमारे बच्चों को बेहतर कल मिले।.।।
भगवान उन्हीं की मदद करता है जो कड़ी मेहनत करते हैं। यह सिद्धान्त स्पष्ट होना आवश्यक है।
सपने सच हों, इसके लिए सपने देखना जरूरी है।
छात्रों को प्रश्न जरूर पूछना चाहिए, यह छात्र का सर्वोत्तम गुण है।
अगर एक देश को भ्रष्टाचार मुक्त होना है तो मैं यह महसूस करता हूँ कि हमारे समाज में तीन ऐसे लोग हैं जो ऐसा कर सकते हैं, ये हैं-पिता, माता और शिक्षक।
युवाओं के लिए कलाम का विशेष संदेश था—अलग ढंग से सोचने का साहस करो, आविष्कार का साहस करो. अज्ञात पथ पर चलने का साहस करो. असम्भव को खोजने का साहस करो और समस्याओं को जीतो और सफल बनो। ये वे महान गुण हैं जिनकी दिशा में तुम अवश्य काम करो।
हमें हार नहीं माननी चाहिए और समस्याओं को हम पर हावी नहीं होना चाहिए।

उपसंहार-डॉ० कलाम के निधन से समाज को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसे भर पाना नामुमकिन है, परन्तु उनके आदर्शों पर चलकर हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अवश्य दे सकते हैं। ऐसे युगपुरुष, महान वैज्ञानिक, दार्शनिक, कर्मयोगी और खुशहाल भारत के स्वप्नदृष्टा, जिनके व्यक्तित्व से देश की आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेती रहेंगी।

47.

समास के कितने भेद हैं?

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समास के प्रमुख रूप से छह भेद होते हैं-

1. अव्ययीभाव समास
2. तत्पुरुष समास
3. कर्मधारय समास
4. द्विगु समास
5. द्वंद्व समास
6. बहुव्रीहि समास।

48.

राजपुरुष समस्तपद का विग्रह है राजा का पुरुष (सही या गलत में उत्तर दीजिए)

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सही उत्तर है सही

49.

संधि के कितने भेद हैं?

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संधि के तीन भेद हैं-
(i) स्वर संधि
(ii) व्यंजन संधि
(iii) विसर्ग संधि।

(i) स्वर संधि-स्वर से परे स्वर होने पर उनमें जो विकार होता है उसे स्वर संधि कहते हैं; जैसेधर्म + अर्थ = धर्मार्थ, यहां अ और अ मिलकर आ हुआ है। दीर्घ स्वर संधि हुई है।

(ii) व्यंजन संधि-व्यंजन के पास व्यंजन या स्वर होने से व्यंजन में जो विकार होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं; जैसे-जगत् + ईश = जगदीश, जगत् + नाथ = जगन्नाथ, दिक् + गज = दिग्गज, वाक् + ईश = वागीश, वि + सम = विषम, वाक् + मय = वाङ्मय।

(iii) विसर्ग संधि-विसर्ग (:) के पास स्वर या व्यंजन होने से विसर्ग में जो विकार होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं; जैसे-निः + आशा = निराशा, तपः + वन = तपोवन, नमः + ते = नमस्ते, हरिः + चन्द्र = हरिश्चन्द्र, निः + धन = निर्धन।

50.

संधि की परिभाषा दीजिए।

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परिभाषा: दो वर्गों के पास-पास आने से उनमें जो विकार सहित मेल होता है, उसे संधि कहते हैं।