This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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बच्चों के खेल की मानवता को क्या देन है? |
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Answer» बच्चों के खेल मानवों को उदार दृष्टिकोण अपनाने और सभी प्रकार के भेद-भाव को त्यागने की प्रेरणा देते हैं। |
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बिना मुरझाए महकने का क्या अर्थ है? |
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Answer» कवि तो सदाबहार फूल के समान है, जो कभी न तो मुरझाए और न ही उसकी सुगन्ध समाप्त हो। |
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| 3. |
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।हार कर मैंने उसे कील की तरहउसी जगह ठोंक दिया।ऊपर से ठीक-ठाकपर अन्दर सेन तो उसमें कसाव थान ताकत!बात ने, जो एक शरारती बच्चे की तरहमुझसे खेल रही थी,मुझे पसीना पोंछते देखकर पूछा”क्या तुमने भाषा को।सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा?” |
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Answer» कठिन-शब्दार्थ-हार कर = कोई अन्य उपाय न होने पर। कील की तरह = बेढंगे रूप में, बलपूर्वक। ठोंक दिया = क्लिष्ट भाषा में ही प्रकाशित कर दिया। ऊपर से = देखने-सुनने में, बाहरी रूप में। ठीक-ठाक = सही लगना। कसाब = मजबूत पकड़। ताकत = प्रभावशीलता। शरारती = चंचल, तंग करने वाला। खेलना = मजाक बनाना, हँसी उड़ाना। पसीना पोंछना = घबराना, निराश हो जाना। सहूलियत से = सुविधापूर्वक, सरल भाव से। बरतना = काम में लेना। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि कुँवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी पर’ से लिया गया है। इस अंश में कवि कहना चाहता है कि भाव को जोर-जबरदस्ती से कठिन भाषा में ठोंक देने से वह प्रभावहीन हो जाता है। सरल भाषा में भी मार्मिक भाव प्रकाशित किए जा सकते हैं। व्याख्या-कवि कहता है कि जब वह चमत्कारपूर्ण भाषा का प्रयोग करके भी अपने सरल मनोभावों को व्यक्त नहीं कर पाया तो निराश होकर उसने भावों को उसी क्लिष्ट भाषा में बलपूर्वक भर दिया। उसका यह कार्य ऐसा ही था जैसे कि कोई पेंच की चूड़ी मर जाने पर उसे कील की तरह हथौड़े से ठोंक दे। इससे वह पेंच ऊपर से तो ठीक लगता है परन्तु अन्दर से उसकी पकड़ में मजबूती तथा कसाव नहीं होता। ठीक इसी प्रकार क्लिष्ट भावहीन भाषा में व्यक्त मनोभावों में सौन्दर्य, आकर्षण तथा पाठक को प्रभावित करने की शक्ति नहीं होती। अपनी असफलता पर कवि निराश था और बेचैन होकर बार-बार पसीना पोंछ रहा था। यह देखकर उसके मन के भाव किसी शरारती बच्चे की तरह उसे छेड़ने लगे। उन्होंने कवि से पूछा कि क्या वह अभी तक सरल भावों की व्यंजना के लिए सरल, सुबोध भाषा का प्रयोग नहीं सीख पाया है? सरल भाषा अभी तक के प्रयोग से भी श्रेष्ठतम भाव व्यक्त किए जा सकते हैं।। विशेष- |
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| 4. |
काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना।मैं पेंच को खोलने के बजायेउसे बेतरह कसता चला जा रहा थाक्योंकि इसे करतब पर मुझेसाफ़ सुनाई दे रही थीतमाशबीनों की शाबासी और वाह वाह।।आखिरकार वही हुआ जिसको मुझे डर थाजोर जबरदस्ती सेबात की चूड़ी मर गई।और वह भाषा में बेकार घूमने लगी! |
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Answer» कठिन-शब्दार्थ-मुश्किल = कठिनाई, मूल समस्या। खोलने के बजाय = स्पष्ट बनाने के बजाय। बेतरह = बिना सोचे-समझे, गलत ढंग से। कसता = और अस्पष्ट बनाता। करतब = दिखावट, तमाशा। तमाशबीन = तमाशा देखने वाले लोग। शाबासी = प्रोत्साहन। वाह-वाह = प्रशंसा। आखिरकार = अंत में। जोर-जबरदस्ती से = भाषा की अनावश्यक सजावट, क्लिष्टता। चूड़ी = पेंच के चक्कर, बात का मूल प्रभाव। मर गई = बेकार हो गई, बात प्रभावहीन हो गई। बेकार घूमने लगी = भाषा से पीछे रह गई, बेअसर हो गई। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि कुंवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी पर’ से लिया गया है। इस अंश में कवि क्लिस्ट शब्दों की कविता में अनुपयोगिता बता रहा है- व्याख्या-कवि कहता है कि उसने सीधी-सादी बात को व्यक्त करने के लिए आकर्षक और कठिन भाषा का प्रयोग करने की भूल की। इससे कविता में निहित भाव अस्पष्ट हो गया। कवि ने इस कठिन समस्या पर धैर्यपूर्वक सोच-विचार नहीं किया। बजाय इसके कि वह’बात’ पर भाषा के कसाब को ढीला करता, उसे सरल बनाता; वह उसे और अधिक कसता जा रहा था। कवि के इस प्रयास पर तमाशा देखने वाले लोग उसकी प्रशंसा और वाह-वाही कर रहे थे। इस शाबाशी से भ्रमित होकर कवि भाषा के पेंच को और कसता जा रहा था। परिणाम यह हुआ कि कथन उसी प्रकार निष्प्रभावी हो गया जिस प्रकार पेंच को जबरदस्ती कसने पर उसकी चूड़ी मर जाती है और वह कसने के स्थान पर बेकार ही घूमने लगता है।। विशेष- |
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| 5. |
“कविता एक उड़ान ………….. चिड़िया क्या जाने?” ‘कविता के बहाने’ कविता के इस अंश में कवि ने क्या बताना चाहा है? |
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Answer» कवि इस काव्यांश द्वारा बताना चाहता है कि चिड़िया और कविता दोनों ही उड़ान भरती हैं किन्तु चिड़िया की उड़ान कुछ दूर तक होती है। उसकी उड़ान की सीमा है। कविता की उड़ान असीम होती है। भला कविता की घर-घर और देशान्तरों में उड़ान की तुलना चिड़िया की उड़ान से नहीं की जा सकती है। कवितारूपी पंखों को लगाकर जब कवि उंड़ता है तो उसकी कल्पना घरों और देशों की सीमा लाँधती हुई सारे ब्रह्माण्ड को नापने लगती है। वह देश (दूरी) की नहीं काल (समय) की सीमाओं में बँधकर नहीं रहती। बेचारी चिड़िया भला कविता की इस उड़ान को कैसे समझ सकती है। कवि का कहना यही है कि इस यांत्रिकता के युग में भी कविता अपनी इसी विशेषता से जीवित रहेगी और प्रासंगिक भी बनी रहेगी। |
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| 6. |
‘कविता के बहाने’ कविता का संक्षिप्त सारांश लिखिए। |
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Answer» ‘कविता के बहाने’ कुँवर नारायण के ‘इन दिनों’ नामक काव्य संग्रह से ली गई है। इस कविता के माध्यम से कवि ने काव्य प्रेमियों को आश्वस्त करना चाहा है कि भौतिकवादी विचारधारा के इस युग में भी कविता के अस्तित्व पर कोई संकट नहीं है। कवि ने ‘चिड़िया की उड़ान’ तथा ‘फूल के खिलने’ से कविता के व्यापक प्रभाव तथा उसके चिरजीवी आनंद की ओर संकेत दिया है। बच्चों के खेल’ द्वारा कवि संदेश देना चाहता है कि बच्चों के खेल की तरह कविता भी लोगों को परस्पर मिलाने का काम करती है। वह घरों और देशों की सीमाओं में बँध कर नहीं रहती। |
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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।कविता एक उड़ान है चिड़िया के बहानेकविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जानेबाहर भीतर इस घर उस घर कविता केपंख लगा उड़ने के माने चिड़िया क्या जाने? |
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Answer» कठिन-शब्दार्थ-उड़ान = उड़ना, कल्पना। बहाने = प्रतीक बनाकर। कविता की उड़ान = कविता की असीम पहुँच या प्रभाव। क्या जाने = क्या समझ सकती है। बाहर-भीतर = थोड़ी दूर तक। इस घर उस घर = एक घर से दूसरे घर तक। कविता के पंख = कवि की कल्पनाएँ। माने = अर्थ।। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि कुँवर नारायण की कविता ‘कविता के बहाने’ से लिया गया है। इस अंश में चिड़िया के बहाने से कविता की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया है। व्याख्या-कवि कहता है कि कविता कवि के विचारों तथा भावनाओं की कल्पना के पंखों की सहायता से भरी गई उड़ान है। जिस प्रकार चिड़िया पंखों के सहारे उड़ती है, उसी प्रकार कवि भी कल्पना के सहारे कविता में अपने मनोभावों को प्रकट करता है। कवि की कल्पना असीम और अनन्त होती है। उस पर देश और काल का कोई बन्धन नहीं होता। वह अपनी कल्पना के सहारे सम्पूर्ण धरती पर ही नहीं, असीम आकाश में भी उड़ता है। चिड़िया अपने पंखों से उड़ती तो है परन्तु उसकी उड़ान की एक सीमा है। वह एक घर से दूसरे घर के बाहर और भीतर तक ही उड़ती है। कविता जब कल्पना के पंखों से उड़ती है उसमें बाहर-भीतर की कोई सीमा नहीं होती। कविता की इस असीमित विस्तार वाली उड़ान की तुलना चिड़िया की उड़ान से नहीं की जा सकती। विशेष- |
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“बात सीधी थी पर” नामक कविता में कवि को पसीना क्यों आ गया? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» ‘पसीना पोंछना’ एक मुहावरा है जिसका अर्थ होता है निरंतर प्रयत्न करने पर भी सफलता न मिलने पर घबराहट होना । ऐसा तभी होता है जब कि कोई व्यक्ति जबरन किसी परिणाम को पाने की चेष्टा करता है। कवि ने भी यही किया था। बात और भाषा में सामंजस्य न बिठा पाने पर उसने बात को भाषा में बलपूर्वक ढूंस दिया। ऊपर से तो उसे लगा कि बात बन गई परन्तु वास्तव में ऐसा था नहीं। किसी पेंच की चूड़ियाँ जब ठोक-पीट करने से बेकार हो जाती हैं तो वह वस्तु को मजबूती से कसने में असमर्थ हो जाता है। यही हालत उस समय कवि के प्रयत्न की हो रही थी। अपना हर प्रयास बेकार होते देख कवि अंदर ही अंदर बेचैन हो उठा और उसके माथे पर घबराहट से पसीना आ गया और झेंप मिटाने को वह अपना पसीना पोंछने लगा। |
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“कविता एक खेल है…… बच्चा ही जाने।” पंक्ति का भावार्थ लिखिए। |
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Answer» इस कथन के द्वारा कवि बताना चाहता है कि कविता भी बच्चों के खेल की भाँति एक प्रकार का खेल ही है। बच्चे खेलते समय एक घर से दूसरे घर में बिना किसी झिझक और अपने-पराये का भेद किए खेलने जाते रहते हैं। उनके मन में कोई भेद-भाव नहीं होता। वे अपनी सुंदर क्रीड़ाओं से घरों को परस्पर जोड़ने का काम किया करते हैं। इस प्रकार, बच्चे मानवीय एकता के संदेशवाहक होते हैं। इसी प्रकार, कवि कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं और कल्पनाओं से खेला करता है। उसकी कविता भी घर-घर में पहुँचती है और लोगों को आनंदित करती है। कविता का प्रभाव देश और काल की सीमाओं से परे होता है। कविता एक देश से दूसरे देश को जोड़ती है। कविता इस विश्वव्यापी प्रभाव की आनंद वे ही उठा पाते हैं, जो बच्चों के समान पक्षपातरहित और सरल हृदय हुआ करते हैं। |
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‘पेंच’ प्रतीक है –(क) कवि का(ख) बात का(ग) भाषा का(घ) भाषा और बात की। |
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Answer» ‘पेंच’ प्रतीक है बात का |
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भाषा के चक्कर में सीधी-सी बात टेढ़ी हो जाती है। समझाइए। |
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Answer» जब कवि कविता के बाहरी रूप अर्थात् शिल्प पर अधिक बल देता है, तो कविता का सीधा-सादा कथ्य भी सहज रूप में पाठकों तक नहीं पहुँच पाता। भाषा की साज-सज्जा के चक्कर में कविता की आत्मा-बात-अनकही रह जाती है। कवि ने यही किया। वह अपनी बात या मनोभाव को अत्यन्त प्रभावशाली भाषा में प्रकट करने के चक्कर में फंस गया। भाषा के सुधार और बदलाव पर उसने जितना जोर दिया बात उतनी अस्पष्ट होती गई। भाषा को ही महत्व देने वाले लोगों के उकसाने में आकर स्थिति कवि के नियंत्रण से बाहर हो गई । अधीर होकर, बिना सोचे-समझे उसने बात को भाषा में बलपूर्वक स्थापित करने की कोशिश की और वह अपने उद्देश्य में विफल हो गया। |
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| 12. |
‘बाहर भीतर इस घर उस घर’ इस पंक्ति का प्रयोग कवि ने चिड़िया की उड़ान, फूल की सुगन्ध और बच्चों के खेल तीनों के साथ किया है। इन तीनों सन्दर्भो में इस पंक्ति का भाव क्या है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» तीनों ही सन्दर्भो में इस पंक्ति का अर्थ थोड़ा भिन्न है। चिड़िया की उड़ान और फूलों की गंध कुछ घरों तक ही सीमित रहती है लेकिन बच्चों के खेल घर-घर तक व्याप्त होते हैं। कवि की कल्पना की उड़ान की कोई सीमा नहीं होती। एक सुन्दर कविता सारे संसार में सराही जाती है। |
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कविता तथा बच्चों के खेल में क्या समानता है?अथवा“कविता एक खेल है बच्चों के बहाने” ‘कविता के बहाने’ पाठ से कविता और बच्चे मानव-समाज को क्या संदेश देते हैं? |
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Answer» बच्चे खेलते समय किसी विशेष घर तक ही सीमित नहीं रहते। वे घर-घर जाते और खेलते-कूदते हैं। वे समाज में समानता तथा एकता की स्थापना करते हैं। कविता भी शब्दों का खेल है। कवि सभी वर्गों के भावों, विचारों, सुख-दुख इत्यादि का निष्पक्ष होकर अपनी कविता में चित्रण करता है। इस प्रकार बच्चे तथा कविता दोनों मानव-एकता का सन्देश देते हैं। |
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कवि की जोर भाषा को चमत्कारपूर्ण तथा दुरूह बनाने पर क्यों था ?अथवा‘तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह’ का क्या परिणाम हुआ? |
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Answer» कवि ने भाषा को दुरूह तथा चमत्कारपूर्ण बनाया। इसका कारण यह था कि उसके पाठक तथा श्रोता उसे ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। श्रोता उसको शाबाशी देते थे तथा वाह-वाह करते थे। उनके द्वारा प्रोत्साहन पाकर कवि बार-बार पांडित्य-प्रदर्शन के लिए प्रेरित होता था तथा भाषा को क्लिष्ट बनाता जाता था जिससे बात का मर्म प्रकट न हो सका। |
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कवि ने चिड़िया, फूल और बच्चों का उदाहरण देकर कविता की श्रेष्ठता दिखाई है। क्या आप ऐसे और उदाहरण दे सकते हैं? यदि हाँ, तो ऐसे दो उदाहरण दीजिए। |
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Answer» ऐसे दो उदाहरण (i) सूरज और (ii) पवन हैं। सूरज बिना भेदभाव के सब पर प्रकाश बरसाता है। पूरे संसार के प्राणी उसका लाभ उठाते हैं। इसी प्रकार पवने भी किसी एक स्थान पर सीमित नहीं रहती। वह सभी की साँसों को जीवन का वरदान बाँटती है। किन्तु कविता से मिलने वाला आनन्द आत्मिक है और सूरज तथा पवन से प्राप्त आनन्द शारीरिक है। |
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कवि ने हार मानकर क्या किया? |
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Answer» कवि ने पेंच को लकड़ी में कील की तरह ठोंक दिया। |
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‘चूड़ी मर जाने का आशय क्या है? |
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Answer» आशय है कि जैसे चूड़ी बेकार हो जाने पर पेंच का कसाब और मजबूती जाती रहती है, उसी प्रकार भाषा पर बल देने से कविता का संदेश प्रभावहीन हो जाता है। |
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कवि को किस बात का डर था? |
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Answer» कवि डर रहा था कि भाषा को प्रभावी बनाने के चक्कर में कहीं उसकी बात’ प्रभावहीन न हो जाय। |
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'तमाशबीनों’ से कवि ने किनकी ओर संकेत किया है? |
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Answer» कवि ने इस शब्द द्वारा उन लोगों पर व्यंग्य किया है, जो कविता के कथ्य पर मर्म की अपेक्षा भाषा की सजावट को अधिक महत्व देते हैं। |
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चिड़िया की उड़ान और कविता की उड़ान में क्या मुख्य अंतर है? |
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Answer» चिड़िया की उड़ान का क्षेत्र सीमित होता है, जबकि कविता की उड़ान देश या काल के बंधन से मुक्त होती है। |
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चिड़िया क्या नहीं जान सकती है? |
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Answer» चिड़िया कविता की सीमारहित उड़ान को नहीं जान सकती है। |
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कवि का कौन-सा डर सच प्रमाणित हुआ ? |
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Answer» कवि को डर लग रहा था कि उसकी कविता लोगों की समझ से बाहर न हो जाय। भाव स्पष्ट न होने से लोग उसे समझ न सकेंगे और उसे पढ़ना ही छोड़ देंगे। अन्त में कवि का यह डर सत्य सिद्ध हुआ। भाषा को चमत्कारपूर्ण बनाने के चक्कर में कथन की सरलता ही नष्ट हो गई और भावों की सही व्यंजना नहीं हो सकी। |
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‘करतब’ शब्द का क्या अर्थ है? ‘करतब’ शब्द को प्रयोग करने का क्या कारण है? |
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Answer» करतब’ शब्द का प्रयोग कवि ने सरल बात को क्लिष्ट तथा दिखावटी भाषा में प्रकट करने के अपने प्रयास के लिए किया है। ‘करतब’ शब्द में अपने इस चमत्कार प्रदर्शन के प्रयास पर तीखा व्यंग्य किया गया है। |
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सीधी बात टेढ़ी क्यों हँस गई? |
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Answer» भाषा को अत्यधिक प्रभावशाली बनाने के चक्कर में भाषा टेढ़ी फंस गई। |
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कवि ने चिड़िया के बहाने कविता को क्या बताया है? |
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Answer» कवि ने चिड़िया के बहाने कविता को एक उड़ान बताया है। |
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कुंवर नारायण हिन्दी कविता के किस स्वरूप से जुड़े हुए हैं? |
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Answer» कुंवर नारायण हिन्दी कविता में नई कविता’ नामक स्वरूप से जुड़े हैं। |
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‘बात जो एक शरारती बच्चे की तरह मुझसे खेल रही थी’- में अलंकार है –(क) उपमा(ख) रूपक(ग) उत्प्रेक्षा(घ) श्लेष। |
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Answer» ‘बात जो एक शरारती बच्चे की तरह मुझसे खेल रही थी’-में अलंकार है उपमा। |
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कविता के बिना मुरझाए महकने का अर्थ है –(क) कभी पुराना न होना(ख) फूल की तरह सुगंध देना(ग) देश-काल से परे रहकर रसात्मक बने रहना(घ) कभी न मुरझाना। |
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Answer» (ग) देश-काल से परे रहकर रसात्मक बने रहना |
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कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने-का अभिप्राय क्या है? |
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Answer» इस कथन का अभिप्राय है कि चिड़िया की उड़ान सीमित क्षेत्र तक ही होती है, जबकि कविता का प्रभाव विश्वव्यापी होता है। |
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‘कविता के बहाने’ कविता में व्यक्त की गई है –(क) चिड़िया की उड़ान(ख) फूल का खिलना(ग) बच्चे को खेलना(घ) कविता की सम्भावना। |
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Answer» (ख) फूल का खिलना |
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बिना मुरझाए कौन महकता है तथा क्यों? |
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Answer» फूलों के खिलने के बहाने कवि ने कविता के अंदर की चिरंतनता को प्रमाणित किया है। फूल खिलता अवश्य है, किन्तु समय के साथ वह मुरझा जाता है। उसका सुंदर रूप तथा सुगंध समय की दया पर आश्रित होता है। उसके खिलने की उम्र बहुत छोटी होती है। इसके विपरीत कविता ऐसा फूल है, जिसका आकर्षण युगों तक बना रहता है। इसकी महक दूर-दूर तक फैलती है। इसका कारण यही है कि फूल एक क्षणिक प्राकृतिक घटना है और कविता मानव हृदय की चिरंतन भावधारा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती जाती है। कभी मुरझाती नहीं। |
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‘कविता के बहाने’ शीर्षक कविता का उद्देश्य क्या है? |
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Answer» ‘कविता के बहाने’ कविता में कवि ने आज के यंत्र प्रधान, भौतिकतावादी वातावरण में भी कविता के महत्व और प्रभाव को स्थापित करना चाहा है। यद्यपि कविता में लोगों की रुचि कम हुई है, फिर भी मानवीय मूल्यों के रक्षण और सामाजिक समरसता की दृष्टि से कविता आज भी प्रासंगिक है। चिड़िया की उड़ान, फूलों का खिलना और बच्चों के खेल को प्रतीक बनाकर कवि कविता के असीम प्रभाव को ही सत्यापित किया है। कविता के महत्व को पुनः स्थापित करना ही कवि का लक्ष्य प्रतीत होता है। |
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“सब घर एक कर देने के माने बच्चा ही जाने का क्या अभिप्राय है? |
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Answer» अभिप्राय यह है कि कविता का प्रभाव बच्चों के खेल की तरह भेदभावरहित और एकता का संदेश देने वाला होता है। |
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‘कविता के बहाने’ कविता की तुलना किससे सार्थक मानी गई है (अ) चिड़िया की उड़ान(ब) फूल का खिलना(स) बच्चे का खेलना(द) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» (स) बच्चे का खेलना |
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कविता के खिलने का आशय क्या है? |
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Answer» कविता के खिलने का आशय है-कविता का रसपूर्ण आकर्षण |
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फूलों के बहाने कवि क्या बताना चाहता है? |
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Answer» कवि फूलों के बहाने कविता को भी एक खिलने वाली वस्तु बताना चाहता है। |
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फूल कविता का खिलना क्यों नहीं जान सकता? |
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Answer» फूल एक ही सीमित स्थान पर अपने महक और सुन्दरता से प्रभावित करता है, जबकि कविता घर-घर और देश-देशान्तर तक अपनी सुगन्ध फैलाया करती है। |
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कविता की उड़ान चिड़िया की उड़ान के समान क्यों नहीं है? |
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Answer» कविता की उड़ान चिड़िया की उड़ान की तरह नहीं है। चिड़िया सीमित दूरी तक ही उड़ सकती है किन्तु कविता पर स्थान तथा समय का कोई प्रभाव नहीं होता। प्रत्येक देश-काल में उसका रसास्वादन किया जा सकता है। चिड़िया की सीमित उड़ान से उसकी समानता नहीं हो सकती। |
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फूल कविता की किस विशेषता को नहीं जानता? |
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Answer» जब तक फूल खिलता है उसकी सुगंध उसके आस-पास तक फैल जाती है। मुरझाते ही उसकी सुगंध भी नष्ट हो जाती है। कविता भी खिलती है (विकसित होती है)। कोई भी पाठक किसी भी युग में कविता का आनन्द ले सकता है। फूल यह नहीं जानता कि कविता कभी मुरझाती नहीं (पुरानी नहीं पड़ती) तथा सदैव सरस बनी रहती है। |
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कविता और फूल की महक में क्या अंतर है? |
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Answer» फूल की महक (सुगन्ध) एक सीमित स्थान में ही प्रभाव डालती है, किन्तु कविता का आनन्द घर-घर और देश-देश तक अपना आनन्द बिखेरा करता है। |
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कविता के बहाने’ कविता में किन बहानों के माध्यम से कविता की विशेषताएँ बताई गई हैं ? |
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Answer» इस कविता में चिड़िया की उड़ान, फूल का खिलना तथा बच्चों के खेल आदि बहानों के माध्यम से कविता की विशेषताएँ बताई गई हैं। चिड़िया की उड़ान सीमित होती है लेकिन कवि की कल्पना की उड़ान की कोई सीमा नहीं होती। फूल खिलता है तो कुछ दूर तक और कुछ समय तक ही सुगन्ध फैलाता है लेकिन कविता का आनन्द सभी स्थानों और सभी युगों में व्याप्त हो जाता है। बच्चों को खेल भेदभाव से मुक्त तथा सभी को आनन्दित करने वाला होता है। इसी प्रकार कविता भी बिना किसी भेदभाव के सभी को आनन्दित करती है। |
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‘फूल क्या जाने’- फूल क्या नहीं जानता?अथवाफूल और कविता में क्या असमानता है? |
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Answer» फूल खिलता है तो उसकी सुगंध एक निश्चित समय तथा दूरी तक ही फैलती है। कविता का प्रभाव अनन्त देशकाल तक होता है। फूल की सुगंध के आनन्द की तुलना कविता के रसात्मक आनन्द से नहीं हो सकती। फूल के खिलने पर उसकी सुंदरता का आनन्द सीमित क्षेत्र के लोग ही उठा सकते हैं, किन्तु कविता के सौन्दर्य का आनन्द सारे विश्व को प्रभावित किया करता है। |
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‘करतब’ शब्द से कवि का अभिप्राय क्या है? |
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Answer» ‘करतब’ शब्द द्वारा कवि अपनी मूर्खता पर व्यंग्य कर रहा है। वह समझ रहा था कि वह बिल्कुल सही दिशा में प्रयत्न कर रहा था। |
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पेंच कसते जाने का क्या आशय है? |
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Answer» पेंच कसने का आशय है भाषा को और अधिक कठिन और आकर्षक बनाने का प्रयत्न करना। |
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भाषा को तोड़ने-मरोड़ने और फेर-बदल करने का क्या परिणाम हुआ? |
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Answer» परिणाम यह हुआ कि कविता का मूल भाव और अधिक अस्पष्ट होता चला गया। |
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बात को पाने के लिए कवि ने क्या-क्या प्रयत्न किए? |
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Answer» कवि ने भाषा में संशोधन, आकर्षण वृद्धि और फेर-बदल किया। |
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‘सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना’- के अनुसार वह क्या मुश्किल थी जिसे कवि ने समझने का धैर्य नहीं दिखाया। |
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Answer» कवि सरल बात को प्रकट कर रहा था, जो भाषी के बनावटीपन तथा दुरूहता के कारण संभव नहीं हो रहा है। मुश्किल भाषा के बात के अनुरूप सरल न होने की थी। कवि ने धैर्यपूर्वक इस पर विचार नहीं किया। वह चमत्कारपूर्ण भाषा पर ही जोर देता रहा। |
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बात को पाने की कवि की कोशिश का क्या परिणाम हुआ?अथवा‘बात या तो बने’ से कवि का आशय क्या है? |
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Answer» कवि ने बात की सरलता तथा स्वाभाविकता को बनाए रखने का प्रयत्न किया। इसके लिए उसने भाषा के शब्दों तथा वाक्यों में परिवर्तन किया। वह चाहता था कि ‘या तो बात बने या फिर भाषा से बाहर आए’। किन्तु कवि का प्रयास सफल नहीं हो सका। भाषा की जटिलता और अधिक बढ़ गई तथा उसकी कविता पाठकों की समझ से बाहर हो गई। |
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उसे पाने की कोशिश में भाषा को उलटा-पलटा’। कवि क्या पाना चाहता था? भाषा के उलटने-पलटने से कवि का क्या अभिप्राय है? |
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Answer» कवि अपनी सीधी बात को प्रकट करना चाहता था। जटिले भाषा का प्रयोग करने के कारण कवि भावों को सफलतापूर्वक व्यंजित नहीं कर पा रहा था। इसके लिए उसने भाषा में प्रयुक्त शब्दों को बदला तथा वाक्य-रचना में भी परिवर्तन किया। उसकी सोच थी कि भाषा में हेर-फेर करने से व्यंजना की सरलता प्राप्त हो सकेगी परन्तु कवि का विचार सही नहीं था। |
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बात किस कारण टेढ़ी फैंस गई? |
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Answer» कवि ने सरल बाते को कहने के लिए दुरूह तथा चमत्कारपूर्ण भाषा का प्रयोग किया। वह क्लिष्ट भाषा का प्रयोग करके स्वयं को श्रेष्ठ और विद्वान् कवि प्रदर्शित करना चाहता था। भाव सरल था किन्तु भाषा उसके अनुरूप सरल नहीं थी। इस कारण भाव की सरलता तथा स्वाभाविकता नष्ट हो गई और कविता का मर्म पाठकों की समझ से परे हो गया। |
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