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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

इस चित्र से कौन – सी भावना प्रकट होती है?आपको समाज सेवा करना कैसा लगता है?मदर तेरेसा के जीवन से क्या प्रेरणा मिलती है?

Answer»
  1. यह चित्र मानवता की प्रतिमूर्ति मदर तेरेसा का है | इस चित्र से सेवा प्रवृत्ति, सहनशीलता, निस्वार्थ भावना, लक्ष्य साधना में निश्चल रहने की भावना प्रकट होती है। भगवान की प्रार्थना करने की अपेक्षा दुखितों के दुःख दूर करने की भावना प्रकट होती है।
  2. समाज माने मानव संघ है। मानव सेवा ही माधव सेवा है। समाज सेवा महान और पवित्र है। ऐसे समाज की सेवा करना मुझे बहुत अच्छा और सुखदायक लगता है।
  3. मदर तेरेसा दयामयी, मानवता की प्रतिमूर्ति हैं। उनका जीवन आदर्शों से भरा हुआ है। ऐसे उनके जीवन से आपन्न लोगों का दुःख दूर करने और उनकी सेवा करने में जुटजाने की प्रेरणा मिलती है।
2.

आपको यह संसार कैसा लगता है?

Answer»

मैं ने सुन लिया है कि यह संसार तो सारहीन और अशाश्वत है। लेकिन मैं तो विश्वास, प्रेम, धैर्य से सुख की आशा में ही रहती हूँ | निराश न होते हुए आशावान होकर जीवन बिताते रहने के कारण हमें यह संसार सुखदायी ही लगता है।

3.

‘प्रसन्न व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता’ इस पर अपने विचार बताइए ।

Answer»

मानव जीवन में सुख और दुःख दोनों रहते हैं। अपने अच्छे गुण और दूसरों से मिल जुलकर रहने से मानव प्रसन्न रह सकता है। निर्मल हृदय, परोपकार भावना, सुख पहुँचाना, अन्याय न करना, निस्वार्थ भावना आदि गुणों से मानव प्रसन्न रह सकता है। प्रसन्न व्यक्ति सुख-दुःख दोनों को समान दृष्टि से देखता है। दुःख के बिना सुख मिलता ही नहीं है। इस तत्व को समझकर सुखी जीवन बितानेवाला ही महान होता है। वह कभी दुःखी नहीं होता।

4.

विश्वास, प्रेम और साहस का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। इस पर अपने विचार लिखिए।

Answer»

विश्वास :
विश्वास से हमारा जीवन सफल बनता है। हर एक आदमी को अपने पर, बंधु – बांधवों पर मित्रों पर अवश्य विश्वास रखना चाहिए। विश्वास के बिना हम निश्चिंता से जीवित नहीं रह सकते। हर काम पर हमें ज़रूर विश्वास रहना चाहिए । विश्वास हमें जीवन में आगे बढ़ाता है। अविश्वास तो हमारे जीवन का रोकडा है।

प्रेम :
हमारे जीवन में और एक आवश्यक अंश या अंग प्रेम ही है। प्रेम के बिना भी हम जीवित नहीं रह सकते। हर एक को अपने ऊपर, अपने रिजनों के ऊपर, अपने परिवार के ऊपर, अपने पुत्र तथा पत्नी आदि के ऊपर प्रेम अवश्य रहता है। प्रेम के बिना जीवन असार तथा सून लगता है। प्रेम के सहारे हम कुछ कर सकते हैं। प्रेम के बिना कुछ नहीं कर सकते । प्रेम जीवन देता है। प्रेम दूसरों को जिलाता है।

साहस :
हमारे जीवन में और एक आवश्यक अंश साहस है। यह जीवन में महत्वपूर्ण स्थान पाता है। साहस हमें आगे बढ़ाता है। साहसवाला हर एक काम पूरा करके विजय पाता है। साहस के बिना हम कुछ नहीं कर सकते। साहस के सहारे ही हम हर क्षेत्र में जीत पा सकेंगे। इसीलिए कहा गया है कि साहस और धैर्य ही लक्ष्मी है।

5.

जीवन में हँसते – बोलते रहना क्यों ज़रूरी है?

Answer»

मानव जीवन में सुख – दुःख दोनों रहते हैं। हर मानव सुखमय जीवन ही बिताना चाहता है। हँसते रहनेवाले का दिल स्वच्छ और शांत रहता है। हँसते बोलनेवाले के सभी मित्र बनते हैं। सबसे हँसते प्रेम पूर्वक बरताव करने से मानव सुखी बन सकता है। चाहे कितना भी कष्ट का सामना करना पडे दिल को तसल्ली पहुँचाने हँसते रहना और हँसते बोलना है। यही एक उत्तम साधन है। जीवन सुखमय बनाने हमें सदा हँसते हुए बोलना चाहिए | इससे मानसिक शांति मिलती है।

6.

‘मेरा जीवन’ को “आत्मकथा” के रूप में  लिखिए।

Answer»

मेरा जीवन :

मैं ने हँसना सीखा है। मैं रोना नहीं जानती है | मेरे जीवन में हर क्षण सोना बरसा करता है। “पीडा कैसी होती है”? – इसे मैं अब तक जान न पाई हूँ। मेरे हँस-हँस जीवन में चिंता क्रीडा कैसी करती है?

मैं इस जग के बारे में असार सुनती हूँ। लेकिन यह जग मुझे सुख – सार दिखाता है। सदा मेरे आँखों के सामने सुख का सागर ही लहराता है। मेरे जीवन में उत्साह और उमंग सदा (निरंतर) रहते हैं। मेरे मतवाले मन में उल्लास और विजय हँसते रहते हैं।

मेरे जीवन को प्रतिक्षण आशा से आलोकित करती रहती हूँ। हमेशा मुझे सुख भरे सुनहरे बादल घेरे रहते हैं। मेरे जीवन का साथी हैं – विश्वास, प्रमे और साहस।

7.

‘मेरा जीवन’ कविता का सारांश अपने शब्दों में  लिखिए।(या)सुभद्राकुमारी चौहान जी ‘मेरा जीवन’ कविता के माध्यम से हमें कौन – सी प्रेरणा देना चाहती है? अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

“मेरा जीवन” नामक कविता की कवयित्री हैं श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान | इस कविता में आप लक्ष्य की राह में खुशहाल, सुखी जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा देती हैं ।

सुभद्रा कुमारी चौहान जी कहती हैं कि मैं ने हँसना सीखा है । मैं रोना नहीं जानती । मैं ने अपने जीवन में पल-पल पर सोने को बरसते देखा है । मुझे आज तक यह पता नहीं कि पीडा कैसी होती है?

मैं ने इस जग के बारे में सुना कि यह जग असार है । लेकिन मुझे सुख-सार दिखाता है । मेरी आँखों के सामने सुख सागर लहराता है | मेरे जीवन में उत्साह, उमंग निरंतर रहते हैं | मेरे मतवाले मन में उल्लास और विजय हँसते रहते हैं ।

मेरे जीवन को आशा प्रतिक्षण आलोकित करती है | मेरी असफलता के धन स्वर्ण सूत्र से वलयित है। मुझे हमेशा सुख भरे सुनहरे बादल घेरे रहते हैं | मेरे जीवन के साथी विश्वास, प्रेम और साहस ही हैं।

8.

खुशहाल जीवन की क्या विशेषता होती है?

Answer»

मानव जीवन सुख-दुःख का मिश्रण है। हर एक मानव खुशहाल जीवन ही बिताना चाहता है। मानव को स्वस्थ, निडर, साहसी, निर्लोभ, सहृदयी, कार्यशील होकर योग्य काम करते रहने से ही खुशी मिलती है। उसका जीवन शुखहाल होता है। दूसरों को सुख पहुँचाते स्वयं खुश रहना, खुशहाल जीवन की मुख्य विशेषता है। अपने चारों ओर के लोगों और प्राणियों की भलाई करते, धर्म परायण होकर, कर्तव्यों का पालन करते हुए सुखमय जीवन बिताना ही खुशहाल जीवन की विशेषता है।

9.

अपने जीवन को खुशहाल कैसे बनाया जा सकता है?

Answer»

मैं अपने जीवन को सदा हँसते हुए साहस, प्यार, विश्वास, आदि अच्छे गुणों से बाधाओं और कष्टों की परवाह न करते धीरज के साथ जीवन के प्रति आशा से रहते खुशहाल बनाता हूँ।

10.

नीचे दी गयीं पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए।हँस-हँस जीवन में कैसे करती है चिंता क्रीडा?मेरी आँखों के आगे सुख का सागर लहराता ।सुख भरे सुनहरे बादल रहते हैं मुझको घेरे ।विश्वास, प्रेम, साहस जीवन के साथी मेरे।।

Answer»
  1. जिसका जीवन हँसी-हँसी से गुज़रता है उनके जीवन में चिंता की क्रीडा नहीं होती ।
  2. कवइत्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी के जीवन में जीवन सुख सार जैसा है | इसलिए उनकी आँखों के आगे सुख का सागर ही लहराता है ।
  3. कवइत्री सुभद्रा कुमारी चौहानजी के सुख भरे जीवन में हमेशा सुनहरे बादल घेरे रहते हैं ।
  4. सुभद्रा कुमारी चौहान जी के सुखमय जीवन में विश्वास, प्रेम, साहस आदि जीवन के साथी हैं ।
11.

कवयित्री ने जीवन में हँसने को क्यों महत्व दिया है?

Answer»

कवयित्री मानव जीवन का महत्व खूब जानने वाली हैं । अपना जीवन सुखमय बना लेने आवश्यक विषय सीख लिये हैं। वे हैं – बाधाओं को हँसते सहना, संसार और सब लोगों को सुख पहुँचाने वाले समझना। उत्साह, उमंग के साथ हर पल बिताना, आशावान होकर असफलताओं से दुःखी न होते, विश्वास, प्रेम, साहस आदि गुणों से जीवन सुखमय बना लेना आदि। इस तरह उसने अपना जीवन सुखदायी बना लिया है।

12.

नीचे दिया गया पद्यांश पढ़कर इसका भाव अपने शब्दों में लिखिए ।बार-बार आती है मुझको,मधुर याद बचपन तेरी।गया ले गया जीवन की,सबसे मस्त खुशी मेरी ॥

Answer»

यह पद्यांश कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता “मेरा बचपन” का पद्य है। कवयित्री अपने मधुरमय बचपन को याद करती कहती है।

हे बचपन ! मुझे तुम्हारी याद बार – बार आती है। क्योंकि बचपन मेरा सुखदायी और भुला देनेवाला नहीं। खेलते-कूदते, बाधा के बिना, खुशी से मैं ने अपना बचपन बिताया। बचपन के दिन जीवन में फिर कभी नहीं आते । अब मैं बड़ी हो गयी हूँ। इससे मेरे जीवन की मस्त खुशी मुझसे दूर हो गयी है।

13.

सुभद्रा कुमारी जी को यह संसार कैसा लगता है?

Answer»

सुभद्रा कुमारी जी ने सुन लिया है कि यह संसार तो सारहीन और अशाश्वत है। लेकिन कवइत्री तो विश्वास, प्रेम, धैर्य से सुख की आशा में हि रहती हैं। निराशा न होते हुए आशावान होकर जीवन बिताने रहने के कारण कवइत्री को यह संसार सुखदायी ही लगता हैं।

14.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए ।जग है असार सुनती हूँ मुझको सुख – सार दिखाता।मेरी आँखों के आगे सुख का सागर लहराता।उत्साह उमंग निरंतर रहते मेरे जीवन मेंउल्लास विजय का हँसता मेरे मतवाले मन से।1. कवयित्री ने जग के बारे में क्या सुना ?2. सुख का सागर कहाँ लहराता है?3. कवयित्री के जीवन में निरंतर क्या रहता है?4. “विजय’ का विलोम शब्द क्या है?5. उपर्युक्त कविता के कवयित्री का नाम क्या है?

Answer»
  1. कवयित्री ने जग के बारे में यह सुना था कि जग असार है।
  2. कवयित्री के आँखों के आगे सुख का सागर लहराता है।
  3. कवयित्री की जीवन में निरंतर उत्साह, उमंग रहता है।
  4. विजय × अपजय
  5. ज. उपर्युक्त कविता की कवयित्री का नाम है “सुभद्रा कुमारी चौहान।
15.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।आशा आलोकित करती मेरे जीवन को प्रतिक्षणहै स्वर्णसूत्र से वलयित मेरी असफलता के धन।सुख भरे सुनहरे बादल रहते हैं मुझको घेरे।विश्वास, प्रेम, साहस जीवन के साथी मेरे।1. कवयित्री के जीवन को प्रतिक्षण क्या आलोकित करती है?2. असफलता किस सूत्र से वलयित है?3. कवयित्री किनको अपने जीवन के साथी कहती है?4. ‘बादल’ इस शब्द का पर्यायवाची शब्द क्या है?5. यह पद्यांश किस कविता पाठ से दिया गया है?

Answer»
  1. कवयित्री के जीवन को प्रतिक्षण आशा आलोकित करती है।
  2. असफलता स्वर्णसूत्र से वलयित है।
  3. कवइत्री विश्वास, प्रेम, साहस आदि को अपने जीवन के साथी कहती है।
  4. मेघ
  5. यह पद्यांश मेरा जीवन कविता पाठ से दिया गया है।
16.

निम्न लिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।मैं ने हँसना सीखा है, मैं नहीं जानती रोना।बरसा करता पल – पल पर मेरे जीवन में सोना।मैं अब तक जान न पाई कैसी होती है पीड़ा।हँस – हँस जीवन में कैसे करती हैं चिंता क्रीड़ा।आशा आलोकित करती मेरे जीवन को प्रतिक्षण|है स्वर्णसूत्र से वलयित मेरी असफलता के धन।सुख भरे सुनहरे बादल रहते हैं मुझको घेरे।विश्वास, प्रेम, साहस जीवन के साथी मेरे।प्रश्न :1. किसके जीवन में आशा आलोकित करती है?2. मैं ने हँसना सीखा है’ – यहाँ “मैं ने” कौन है?3. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर क्या बरसा करता है?4. यह पद्यांश किस पाठ से दिया गया है?5. प्रेम – शब्द का पर्याय लिखिए।

Answer»
  1. कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी के जीवन में आशा आलोकित करती है।
  2. मैं ने हँसना सीखा है। यहाँ “मैं ने” सुभद्रा कुमारी चौहान (कवयित्री) जी है।
  3. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर सोना बरसा करता है।
  4. ये पद्यांश “मेरा जीवन” नामक पद्य पाठ से दिये गये हैं।
  5. प्रेम शब्द का पर्याय है – प्यार / मोहब्बत
17.

कवयित्री ने जीवन का साथी किसे बताया है और क्यों?

Answer»

मानव जीवन अति मूल्यवान है। सच्चा मानव दुःखों की परवाह न करते सुख की आशा में ही जीवन बिताता है। इसलिए कवयित्री विश्वास, प्रेम, साहस, उत्साह, उल्लास आदि महान गुणों से रहती थी। उन्होंने तो आशा को ही अपना साथी बना लिया । क्योंकि जीवन तो आशा से ही गुज़ारा जाता है।

18.

निम्न लिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।सच है विपत्ति जब आती हैकायर को ही दहलाती है,सूरमा नहीं विचलित होतेक्षण एक नहीं धीरज खोते।विघ्नों को गले लगाते हैं,काँटों में राह बनाते हैं।प्रश्न :1. विपत्ति इन्हें दहलाती हैA) साहसीB) कायरC) स्त्रीD) इन सबको2. कौन विचलित नहीं होते ?A) सूरमाB) कायरC) दानवD) जानवर3. ये विघ्नों को गले लगते हैंA) कायरB) सूरमाC) दानवD) राक्षस4. धीरज वाले कहाँ राह बनाते हैं?A) पत्थरों मेंB) पहाडों मेंC) काँटों मेंD) सागरों में5. इस पद्य में क्या रखने के लिए कहा गया है?A) कायरताB) धीरजC) संपत्तिD) विपत्ति

Answer»
  1. B) कायर
  2. A) सूरमा
  3. B) सूरमा
  4. C) काँटों में
  5. B) धीरज
19.

निम्न लिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।वही पशु – प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।प्रश्न :1. इससे कभी न डरना चाहिए।A) जन्म सेB) मृत्यु सेC) युद्ध सेD) हार से2. जो मनुष्य के लिए मरता है, वही ……. है।A) जानवरB) मनुष्यC) देवताD) राक्षस3. आप आप ही चरना कैसी प्रवृत्ति है?A) मनुष्यB) राक्षसC) देवD) पशु4. इस पद्यांश में इसके बारे में बनाया गया हैA) मनुष्यताB) राक्षसत्वC) देवत्वD) अपकार करने5. हमें ऐसा मरना हैA) सभी भूल जाने के जैसेB) सभी याद करने के जैसेC) सभी संतोष में रहने के जैसेD) ये सब सही

Answer»
  1. B) मृत्यु से
  2. B) मनुष्य
  3. D) पशु
  4. A) मनुष्यता
  5. B) सभी याद करने के जैसे
20.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।मैं ने हँसना सीखा है, मैं नहीं जानती रोना।बरसा करता पल पल पर, मेरे जीवन में सोना।मैं अब तक जान न पाई कैसी होती है पीड़ा।हँस हँस जीवन में कैसे करती हैं चिंता क्रीड़ा।प्रश्न :1. उपर्युक्त पद्यांश की कवयित्री कौन है?2. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर क्या बरसा करता है?3. कवयित्री क्या नहीं जानती है?4. कवयित्री ने क्या सीखा है?5. उपर्युक्त पद्यांश किस पाठ से लिया गया है?

Answer»
  1. उपर्युक्त पद्यांश की कवयित्री हैं “श्रीमति सुभद्राकुमारी चौहाना”
  2. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर सोना बरसा करता है।
  3. कवयित्री पीडा कैसी होती है – इसे नहीं जानती।
  4. कवयित्री हँसना सीखा है।
  5. उपर्युक्त पद्यांश ‘मेरा जीवन’ नामक पाठ से लिया गया है।

21.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।मैं ने हँसना सीखा है, मैं नहीं जानती रोना।बरसा करता पल – पल पर मेरे जीवन में सोना।मैं अब तक जान न पाई कैसी होती है पीड़ा।हँस – हँस जीवन में कैसे करती हैं चिंता क्रीड़ा॥प्रश्न :1. कवयित्री अब तक क्या जान न पाई?2. हँस – हँस जीवन में कौन-सी क्रीडा नहीं होती?3. ‘पल’ शब्द का पर्यायवाची शब्द क्या है?4. हँस शब्द का विलोम शब्द क्या है?5. उपर्युक्त पद्यांश किस पाठ से लिया गया है?

Answer»
  1. कवयित्री अब तक यह जान न पाई कि “पीडा कैसी होती है?”
  2. हँस – हँस जीवन में चिंता क्रीडा नहीं होती।
  3. ‘पल’ शब्द का पर्याय शब्द है -“क्षण”|
  4. हँस – शब्द का विलोम शब्द है – ” रोना”|
  5. उपर्युक्त पद्यांश ‘मेरा जीवन’ पाठ से लिया गया है।
22.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।जग है असार सुनती हूँ मुझको सुख – सार दखाता।मेरी आँखों के आगे सुख का सागर लहराता।उत्साह उमंग निरंतर रहते मेरे जीवन में ।उल्लास विजय का हँसता मेरे मतवाले मन से।1. जग के बारे में कवयित्री क्या सुनती है?2 कवयित्री के जीवन में निरंतर क्या – क्या रहते हैं?3. कवयित्री के मतवाले मन से क्या हँसता है?4. कवयित्री को जग कैसा दिखाता है?5. इस पद्य की कवयित्री कौन है?

Answer»
  1. जग के बारे में कवयित्री यह सुनती है कि यह जग असार है।
  2. कवयित्री के जीवन में निरंतर उत्साह और उमंग रहते हैं।
  3. उल्लास विजय का हँसता है।
  4. कवयित्री को जग सुख सार जैसा दिखाता है।
  5. इस पद्य की कवयित्री श्रीमति सुभद्रा कुमारी चौहान है।
23.

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।आशा आलोकित करती मेरे जीवन को प्रतिक्षण।है स्वर्णसूत्र से वलयित मेरी असफलता के धन।सुख भरे सुनहरे बादल रहते हैं मुझको घेरे।विश्वास, प्रेम, साहस जीवन के साथी मेरे।1. कवयित्री के जीवन को प्रतिक्षण क्या अलोकित करती है?2 कवयित्री को कैसे बादल घेर कर रहते हैं?3. कवयित्री के साथी कौन है?4. कवयित्री की असफलता के धन किस सूत्र में वलयित है?5. इस पद्यांश की कवयित्री कौन है?

Answer»
  1. कवयित्री के जीवन को आशा आलोकित करती है।
  2. कवयित्री को सुनहरे बादल घेरकर रहते हैं।
  3. विश्वास, प्रेम, साहस आदि कवयित्री के साथी हैं।
  4. कवयित्री की असफलता के धन स्वर्ण सूत्र से वलयित है।
  5. इस पद्यांश की कवयित्री है “श्रीमति सुभद्रा कुमारी चौहान”।
24.

निम्न लिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।जयमाला ले अपने कर मेंजयदेवी है तुम्हें बुलाती।अमृत पुत्र हो, डर काहे काबढे चलो, तुम बढ़े चलो।मुड – मुड कर मत देखो, मानव !बहु दूर तुम्हे तो चलना है,सोचो अपने मन में हरदमयह हिन्दुस्तान तुम्हारा है।प्रश्न :1. तुम्हें कौन बुलाती है?A) जेष्टादेवीB) लक्ष्मीदेवीC) जयदेवीD) ये सब2. जय देवी के कर में क्या है?A) दीपB) हारC) मोती का हारD) जयमाला3. कितना दूर तुम्हें चलना है?A) कुछ दूरB) बहुदूरC) दो मीलD) योजन4. अपने मन में हर दम क्या सोचना है?A) यह हिन्दुस्तान तुम्हारा है।B) यह पाकिस्तान तुम्हारा है।C) यह रूस तुम्हारा है।D) ये सब5. तुम कैसे पुत्र हो?A) विषB) ज़हरC) वीरD) अमृत

Answer»
  1. C) जयदेवी
  2. D) जयमाला
  3. B) बहुदूर
  4. A) यह हिन्दुस्तान तुम्हारा है।
  5. D) अमृत
25.

निर्देश के अनुसार उत्तर दीजिए।1. सुनहरा बादल सुभद्राकुमारी जी को घेरा रहता है। (बहुवचन रूपी वाक्य पहचानिए)A) सुनहरे बादलों सुभद्राकुमारी जी को घेरी रहते हैं।B) सुनहरे बादल सुभद्राकुमारी जी को घेरे रहते है।C) सुनहरे बादलें सुभद्राकुमारी जी को घेरी रहती है।D) सुनहरी बादल सुभद्राकुमारी जी को घेरी रहती हैं।2. मेरे जीवन को आशा प्रतिक्षण आलोकित करती है। (रेखांकित शब्द का समास पहचानिए)A) तत्पुरुष समासB) द्वंद्व समासC) द्विगु समासD) अव्ययीभाव समास

Answer»
  1. B) सुनहरे बादल सुभद्राकुमारी जी को घेरे रहते है।
  2. D) अव्ययीभाव समास
26.

निम्नलिखित कविता पढ़कर नीचे दिये गये वैकल्पिक प्रश्नों के उत्तर दीजिए।युग युग तक चलती रहे, कठोर कहानीरघुकुल में भी थी एक अभागिन रानीनिज जन्म-जन्म से सुने जीव यह मेराधिक्कार ! उसे था महा स्वार्थ ने घेरा ||प्रश्नः1. युग-युग तक कैसी कहानी चलती रही?A) सरलB) कठोरC) मधुरD) विवेक2. एक अभागिन रानी किस कुल में भी थी?A) रघुकुलB) सूर्यकुलC) चंद्रकुलD) राणा कुल3. कहानी कब तक चलती रही?A) युग युग तकB) युगांत तकC) प्रलय तकD) कल तक4. जन्म शब्द का विलोम शब्द क्या हैं?A) जननB) संस्कारC) मृत्युD) आविष्कार5. इस पद्य में किस कुल का प्रस्ताव था?A) रघुकुलB) यदुकुलC) चंद्रकुलD) देवकुल 

Answer»
  1. B) कठोर
  2. A) रघुकुल
  3. A) युग युग तक
  4. C) मृत्यु
  5. A) रघुकुल
27.

निम्न लिखित कविता पढ़कर नीचे दिये गये वैकल्पिक प्रश्नों के उत्तर दीजिए।मैं बचपन को बुला रही थी।बोल उठी बिटिया मेरीनंदन – वन – सी फूल उठी वहछोटी सी कुटिया मेरी ||‘माँ ओ’ कहकर बुला रही थी।मिट्टी खाकर आई थी,कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ मेंमुझे खिलाने लाई थी।प्रश्न :1. कवयित्री किसको बुला रही थी ?A) माता कोB) बेटी कोC) बचपन कोD) पिता को2. बिटिया की पुकार से कुटिया कैसी फूल उठी?A) वृंदावन सीB) स्वर्ग सीC) मधुवन सीD) नंदनवन सी3. कवयित्री की बिटिया क्या खाकर आयी थी?A) रोटीB) मिट्टीC) खानाD) लड्डू4. कुटिया कैसी थी?A) छोटीB) बडीC) लंबीD) चौडी5. ‘माँ’ शब्द का पर्यायवाची शब्द क्या है?( )A) बेटीB) माताC) बहनD) पुत्री

Answer»
  1. C) बचपन को
  2. D) नंदनवन सी
  3. B) मिट्टी
  4. A) छोटी
  5. B) माता
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