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Answer» (क) यह वाक्य मोहन के पिता वंशीधर ने बिरादरी के संपन्न युवक रमेश से कहा। (ख) वंशीधर जब मोहन की पढ़ाई की चिंता रमेश के सामने व्यक्त करते है तब रमेश वंशीधर को सुझाव देते है कि वे मोहन को उसके साथ ही लखनऊ भेज दें ताकि वहाँ अच्छी तरह पढ़-लिख सकेगा। (ग) बिरादरी के लोग ही एक-दूसरे की मदद करते है। यह कथन रमेश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भी कहा गया। (घ) नहीं, यह आशय कहानी में पूरा नहीं हो पाया है। क्योंकि रमेश पर जो भरोसा वंशीधर ने किया था वह भरोसा रमेश तोड़ देते है। लखनऊ ले जाकर वे मोहन को नौकर की तरह काम करवाते है। रमेश तथा उसके परिवार ने तेजस्वी एवं मेधावी मोहन का भविष्य चौपट कर दिया, आखिर अंत में उसे बेरोजगार बनाकर घर वापस भेज देते हैं।
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