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लंबे बेंटवाले हँसुये को लेकर वह घर से इस उद्देश्य से निकला था कि अपने खेतों के किनारे उग आई काँटेदार झाड़ियों को काट-छाँटकर साफ़ कर आएगा । बूढ़े वंशीधर जी के बूते का अब यह सब काम नहीं रहा । यही क्या, जन्म भर जिस पुरोहिताई के बूते पर उन्होंने घर-संसार चलाया था, वह भी अब वैसे कहाँ कर पाते हैं । यजमान लोग उनकी निष्ठा और संयम के कारण ही उन पर श्रद्धा रखते हैं ।मोहन घर से किस उद्देश्य के लिए निकला ?वंशीधर ने कौन-सा कार्य करके घर-संसार चलाया था ?यजमान किस पर श्रद्धा रखते हैं ? तथा क्यों ? |
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