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धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है और क्यों ?

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ब्राह्मण शिल्पकारों के टोले में उठते-बैठते नहीं थे । किसी काम से अगर वे उनके यहाँ जाते तो भी वे बैठते नहीं थे, खड़े-खड़े ही बात करते थे । अगर कोई उन्हें बैठने के लिए कहे तो भी उनकी मर्यादा के विरुद्ध था । जब मोहन धनराम की दुकान पर काफी देर तक बैठता है तभी धनराम अपने काम में सफल नहीं हो पा रहा था ।

यह देखकर मोहन धनराम के हाथ से हथौड़ा लेकर लोहे पर नपी-तुली चौटें मारता है और धौंकनी फूंकते हुए भट्ठी में लोहे को गरम करके उसे ठोक-पीटकर गोल रूप में परिवर्तित कर देता है । मोहन ब्राह्मण होते हुए भी निम्न जाति का काम कर रहा था यह देखकर धनराम को आश्चर्य होता है।



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