1.

कहानी के उस प्रसंग का उल्लेख करें, जिसमें किताबों की विद्या और घन चलाने की विद्या का जिक्र आया है।

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धनराम अपनी मंदबुद्धि या डर के कारण तेरह का पहाड़ा सुना नहीं सका, तब मास्टर त्रिलोक सिंह बेत का उपयोग करने की बजाय जबान की चाबुक लगाते हुए कहते हैं कि ‘तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे ! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें ?’ अर्थात् उनके पिता में विद्या का ताप लगाने का सामर्थ्य नहीं थी ।

इसीलिए बचपन में ही अपने पुत्र धनराम को धौंकनी फूंकने और सान लगाने के काम में लगा दिया था और धनराम धीरे-धीरे हथौड़े से लेकर घन चलाने की विद्या सिखने लगा । उपर्युक्त प्रसंग में किताबों की विद्या और घन चलाने की विद्या का जिक्र आया है।



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