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मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली,दरवाज़े-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली,पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।भावार्थ : कवि कहते हैं कि आकाश में बादल घिर आए हैं। बादलों को देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई शहरी मेहमान सजधजकर आए हैं। बादलों के आने से पहले उनकी अगवानी करती हुई पुरवाई हवा चल पड़ी है। हवा मस्ती से नाचती-गाती आ रही है। उसके नाच-गाने के आकर्षण से गलियों के खिड़की-दरवाजे खुलने लगते हैं। लोग मेघ रूपी शहरी मेहमान को देखना चाहते हैं।1. मेघ गाँव में किस प्रकार आए हैं ?2. ‘बयार’ को किस रूप में चित्रित किया गया है ?3. मेघ के आगमन से गाँव का वातावरण कैसा हो गया है ?4. गाँव में मेघ का स्वागत किस तरह किया जाता है, क्यों ?5. ‘मेघ आए बन-उन के सँवर के’ में कौन-सा अलंकार है ?

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1. मेघ गाँव में शहरी मेहमान की तरह सज-धजकर आए हैं।

2. बयार (हया) को मेघ रूपी मेहमानों की अगवानी करते हुए चित्रित किया गया है। हवा मेहमान के आगे-आगे नाचती-गाती चल रही है। उसके नाच-गान से लोगों को पता चल जाता है कि पाहुन आ रहे हैं।

3. मेघ के आगमन से गाँव के वातावरण में उल्लासमय हो गया है। लोग मेघरुपी मेहमान को देखने के लिए बड़ी तेजी से खिड़की दरवाजे खोल रहे हैं।

4. गाँव में मेघ का स्वागत पाहुन (दामाद) की तरह किया जाता है। गाँव की कृषि वर्षा पर आधारित है। कृषि कार्य वर्षा होने पर ही आरंभ होता है इसीलिए किसानों को मेहमान के आने जैसी खुशी बादलों के आने पर होती है।

5. ‘मेघ आए बन-उन के सँवर के’ यहाँ बादलों को मानव की तरह बनते-सँवरते दिखाया गया है इसलिए मानवीकरण अलंकार है।



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