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मेघों के लिए ‘बन-उन के, सँवर के आने की बात क्यों कही गई है ?

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मेघ एक वर्ष बाद आते हैं। उनकी प्रतीक्षा उसी तरह की जाती है जिस तरह मेहमान (दामाद) के आने की प्रतीक्षा की जाती है। मेहमान जब भी आते हैं तो वे सज-सँवर कर आते हैं। काले-कजरारे मेघ जब उमड़ते घुमड़ते हुए आते हैं तो बड़े सुंदर लगते हैं। बिजली की चमक-दमक और इंद्रधनुष का रंग उन्हें और भी सुंदर बना देता है इसीलिए कवि ने मेघों के लिए ‘बनठन के, सँवर के आने की बात कही है।



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