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निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ?धूल, पेड़, नदी, लता,...
1.
निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ?धूल, पेड़, नदी, लता, ताल
Answer»
शब्द – प्रतीक
धूल – स्वी
पेड़ – नगरवासी
नदी – गाँव की विवाहिता स्वी
लता – मेघ की प्रतीक्षा करती नायिका
ताल – घर का सदस्य
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मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली,दरवाज़े-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली,पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।भावार्थ : कवि कहते हैं कि आकाश में बादल घिर आए हैं। बादलों को देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई शहरी मेहमान सजधजकर आए हैं। बादलों के आने से पहले उनकी अगवानी करती हुई पुरवाई हवा चल पड़ी है। हवा मस्ती से नाचती-गाती आ रही है। उसके नाच-गाने के आकर्षण से गलियों के खिड़की-दरवाजे खुलने लगते हैं। लोग मेघ रूपी शहरी मेहमान को देखना चाहते हैं।1. मेघ गाँव में किस प्रकार आए हैं ?2. ‘बयार’ को किस रूप में चित्रित किया गया है ?3. मेघ के आगमन से गाँव का वातावरण कैसा हो गया है ?4. गाँव में मेघ का स्वागत किस तरह किया जाता है, क्यों ?5. ‘मेघ आए बन-उन के सँवर के’ में कौन-सा अलंकार है ?
क्षितिज अटारी गहराई दामिनि दमकी,‘क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की’,बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके।मेघ आए बड़े बन-उन के सँवर के।भावार्थ : बादलों को घिरते देखकर कवि कहते हैं कि क्षितिजरूपी अटारी बादलों से ढंक चुकी है और बिजली चमकने लगी है। अब तक जो अशंका थी कि बादल नहीं बरसेंगे, वह भ्रम टूट चुका है। अटारी पर खड़ी नायिका के मन का भी भ्रम टूट गया है। मेहमान अटारी पर आ गया है मानो उसके अंदर बिजली दौड़ गई है। वह मन ही मन क्षमा माँगने लगती है। उसके मन के भावों को समझते ही मेहमान की आँखों से खुशी के आँसू बरसने लगते हैं, अर्थात् वर्षा होने लगी। इस तरह बादल सज-धजकर गाँव आए हैं।1. मेघ आने से क्षितिज रूपी अटारी पर क्या परिवर्तन हुआ ?2. बादलों के क्षितिज पर छाने से पहले क्या भम बना हुआ था ?3. ‘मिलन के अश्रु ढरके’ का क्या आशय है ?4. काव्यांश में कौन-कौन से मुहावरे हैं ?
बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की,‘बरस बाद सुधि लीन्हीं’ –बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की,हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।मेघ आए बड़े बन-उन के सँवर के।भावार्थ : कवि कहते हैं कि जिस प्रकार मेहमान के आने पर घर के बड़े उनका स्वागत करते हैं, उसी तरह बादल रूपी मेहमान के आने पर बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया। साल भर के इंतजार के बाद बादलरूपी पति को देखकर लता रूपी पत्नी व्याकुल हो उठी। दरवाजे के पीछे छिपकर बोली कि तुम्हें पूरे एक वर्ष बाद मेरी याद आई है। तालाब मेघ के आने की खुशी में उमड़ आया है और परात में पानी भर लाया, जिससे मेहमान के पैर धो सके। इस तरह, मेघ बन-ठनकर, सज-धजकर आए हैं।1. मेघ के आने पर बूढ़े पीपल ने क्या किया ?2. व्याकुल लता ने मेघ से क्या शिकायत की और क्यों ?3. तालाब ने अपनी खुशी कैसे व्यक्त की ?4. लता ने भारतीय मर्यादा का पालन किस तरह किया ?5. ‘पानी परात भर के’ में कौन-सा अलंकार है ?
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए,आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए,बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, यूंघट सरके।मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।भावार्थ : कवि कहते हैं कि मेहमान के रूप में आए बादल को जिस प्रकार लोग झुककर प्रणाम करते हैं और फिर गर्दन उचकाकर देखते हैं उसी तरह बादल के आने पर पेड़ हया के कारण झुकते हैं और फिर डोलने लगते हैं।धीरे-धीरे हवा आँधी का रूप ले लेती है और धूल उड़ने लगती है। जिसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे कोई लड़की किसी अपरिचित को देखकर घघरा उठाए भागी जा रही है। बादलों का आना नदी के लिए भी खुशी की बात है, वह भी ठिठककर बादलों को यूँ देखने लगी जैसे कोई स्त्री तिरछी नजर से मेहमान को देखती है। ऐसा वह लज्जा के कारण अपना यूँघट उठाकर कर रही है।1. पेड़ गरदन उचकाते हुए क्यों झुकने लगे ?2. ‘धूल’ को किस रूप में चित्रित किया गया है ?3. आँधी और नदी पर बादलों के आने का क्या प्रभाव पड़ा ?4. बादलों के आने से प्रकृति में क्या परिवर्तन आए ?5. उपर्युक्त काव्य पंक्तियों में किसका-किसका मानवीकरण किया गया है ?
निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ?धूल, पेड़, नदी, लता, ताल
भाव स्पष्ट कीजिए –क. क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम कीख. बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, पूँघट सरके।
कवि ने पीपल को ही बड़ा बुजुर्ग क्यों कहा है ? पता लगाइए।
मेघों के लिए ‘बन-उन के, सँवर के आने की बात क्यों कही गई है ?
कविता में आए मानवीकरण तथा रूपक अलंकार के उदाहरण खोजकर लिखिए।
मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए ?
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