Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

काव्य में वर्णित प्राकृतिक सौन्दर्य को लिखिए।

Answer»

काव्य में प्राकृतिक सौंदर्य का सुंदर वर्णन किया गया है। चिड़ियाँ विशाल आकाश में उन्मुक्त होकर उड़ रही हैं। सुनहली धूप में भ्रमर फूलों पर मंडरा रहे हैं। हरी-भरी पहाड़ियों की ढलान पर नन्हे-नन्हे सुंदर फूल हवा के झोंकों के साथ झूम रहे हैं।

2.

बालक को किससे सावधान रहना चाहिए?

Answer»

बालक को चाटुकारों से सावधान रहना चाहिए।

3.

बालक को किस पर पूर्ण विश्वास बनाये रखना चाहिए ?

Answer»

बालक को अपने ख्याल और अपनी सूझ-बूझ पर पूर्ण विश्वास बनाए रखना चाहिए।

4.

बालक को पाठशाला से क्या सबक लेना चाहिए ?

Answer»

बालक को पाठशाला से भलों के साथ भला और बुरों के साथ टेढ़ा बनने का सबक लेना चाहिए।

5.

दूसरों के साथ बालक को कैसा व्यवहार करना चाहिए ?

Answer»

बालक अच्छे के साथ अच्छा व्यवहार करें और टेढ़ों को सबक सिखाए।

6.

सत्य और न्याय के लिए क्या करना चाहिए ?(क) मर मिट जाना चाहिए(ख) भागना चाहिए(ग) छिप जाना चाहिए(घ) संघर्ष करना चाहिए

Answer»

सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करना चाहिए।

7.

किसको झुकाना सबसे आसान होता है ?(क) नेता(ख) गुंडा(ग) शिक्षक(घ) मित्र

Answer»

गुंडे को झुकाना सबसे आसान होता है।

8.

मेहनत से कमाया हुआ एक पैसा किससे ज्यादा मूल्यवान है ?

Answer»

मेहनत से कमाया हुआ एक पैसा मुफ्त में मिले हंडे से अधिक मूल्यवान है।

9.

जीत की खुशी किसके साथ मनानी चाहिए ?(क) मित्र के साथ(ख) रिश्तेदारों के साथ(ग) स्वयं के साथ(घ) पड़ोसी के साथ

Answer»

जीत की खुशी स्वयं के साथ मनानी चाहिए।

10.

आपको पत्र का कौन-सा अंश अच्छा लगा ? क्यों ?

Answer»

मुझे पत्र का अंतिम अंश अच्छा लगा। इस अंश में लिंकन शिक्षक से कहते हैं कि वह उनके पुत्र के प्रति केवल ममता का व्यवहार न करें। उनका कर्तव्य उसे एक आदर्श मनुष्य बनाना है। इस कर्तव्य की पूर्ति शिष्य को लाड़ प्यार करने से नहीं, बल्कि उसके प्रति आवश्यक सख्ती बरतने से होगी। उन्हें उसे आग में तपाकर सोने की तरह निखारना है। इसके लिए उन्हें उसे सख्ती की आग में तपाना होगा। यदि वे आत्मविश्वासपूर्वक धीरज से काम लेंगे तो ही वे उसे एक आदर्श मनुष्य बनाने में समर्थ होंगे। इस प्रकार मेरी दृष्टि से पत्र का अंतिम अंश अत्यंत उद्देश्यपूर्ण और सार्थक है।

11.

अब्राहम लिंकन क्यों चाहते हैं कि उनका पत्र पुस्तकों के भण्डार को जाने?

Answer»

अब्राहम लिंकन अपने पुत्र को एक आदर्श मनुष्य के रूप में देखना चाहते थे। वे जानते थे कि एक शिक्षक कितना भी पड़ाए वह अपूर्ण ही रहेगा। पुस्तकें ज्ञान का भंडार हैं। विविध विषयों की जानकारी पुस्तकों से ही मिल सकती है। ज्ञान और जानकारी की पूर्णता पुस्तकों से ही मिलनी संभव है। मानसिक क्षमता और प्रतिभा का विकास पुस्तकों के अध्ययन से ही हो सकता है। इसलिए अब्राहम लिंकन चाहते हैं कि उनका पुत्र पुस्तकों के भंडार को जाने।

12.

लिंकन अपने पुत्र के अन्दर कौन-कौन से गण विकसित करना चाहते थे ?

Answer»

लिंकन चाहते थे कि उनका पुत्र परिश्रमी बने। वह अपने बल पर जीना सीखे। वह ईया-द्वेष से दूर रहे। वह निर्भय बने। उसे पुस्तकें पढ़ने में रुचि हो। वह सत्य और न्याय के लिए लड़े। वह अपने बुद्धि-बल से धन कमाए और मुफ्त से मिलनेवाले धन की आशा न करे। वह भलों के साथ भला व्यवहार करे और टेढ़ों को सबक सिखाए। ‘ इस प्रकार लिंकन अपने पुत्र को वे सारे गुण सिखाना चाहते थे, जिनसे वह एक आदर्श नागरिक बने।

13.

लिंकन अपने पुत्र को कैसा बनाना चाहते थे ?

Answer»

लिकन अपने पुत्र को एक निर्भय और सत्यनिष्ठ इंसान बनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि उनका पुत्र पसीना बहाकर धन कमाना सीखे। वह हार को झेलना सीखे और जीतने पर उसकी खुशी में फुला न समाए। वह किसी से ईष्या-द्वेष न करे और हर्ष में भी संयम रखे। वह गुंडों से डरने के बदले उन्हें झुकाने की कला सीखे। वह प्रकृति के सौंदर्य और ऐश्वर्य का प्रेमी बने। उसमें इतना आत्मविश्वास हो कि वह दूसरों की बातों में न आए। वह उस व्यक्ति जैसा बने जो दु:ख में भी हंसता है और दूसरों की बातों में आकर अपना मार्ग कभी न छोड़े। लिकन अपने पुत्र को वीर, धैर्यवान, स्वावलंबी, न्यायप्रिय व्यक्ति बनाना चाहते थे।

14.

अब्राहम लिंकन ने यह पत्र किसको लिखा था ?(क) अपने पुत्र को(ख) अपने शिक्षक को(ग) पुत्र के शिक्षक को(घ) अपने मित्र को

Answer»

अब्राहम लिकन ने यह पत्र पुत्र के शिक्षक को लिखा था।

15.

लिंकन का पुत्र कभी न कभी क्या देखेगा?

Answer»

न्यायप्रियता और सत्यनिष्ठा मनुष्य के उत्तम गुण कहे गए हैं, पर सभी मनुष्यों में ये गुण नहीं होते। लिंकन का पुत्र कभी-न-कभी इस बात को देखेगा।

16.

अब्राहम लिंकन ने यह पत्र किसको ध्यान में रखकर लिखा होगा, अपने पुत्र या उसके शिक्षक को, तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।

Answer»

अब्राहम लिंकन ने यह पत्र, पुत्र के शिक्षक को ध्यान में रखकर लिखा होगा। पत्र में लेखक ने शिक्षक को उसके कर्तव्यों की याद दिलाई है। शिक्षक के सामने वे बातें रखी गई हैं जिन्हें ध्यान में रखकर बालक को शिक्षा देनी है। उसे बालक में उन गुणों को निखारना है जिनका संकेत पिता ने पत्र में किया है। शिक्षक को बालक के पिता की उन इच्छाओं को पूरा करना है जो उसने पत्र में व्यक्त की हैं। इस प्रकार पत्र लिखते समय शिक्षक ही लिंकन के ध्यान में रहा होगा।

17.

बालक को किसे ग्रहण करना चाहिए?

Answer»

बालक को दूसरों की बातों को सत्य की छलनी में छानकर बचे हुए विशुद्ध को ग्रहण करना चाहिए।

18.

लिंकन का पुत्र क्या कभी न बेचे?

Answer»

लिंकन का पुत्र अपना हृदय और अपनी आत्मा कभी न बेचे।

19.

एक आदमी ने माता का मतलब धरती बताया, क्योंकि…(क) वह सैनिक था।(ख) उसकी माता मर चुकी थी।(ग) वह किसान था।(घ) वह नेता था।

Answer»

एक आदमी ने माता का मतलब धरती बताया, क्योंकि वह किसान था।

20.

लेखक को अचानक रुकना पड़ा क्योंकि…(क) आगे जाने का रास्ता बंद था।(ख) सड़क पर बड़ा गड्ढा था।(ग) सड़क पर आदमी और औरतों की भीड़ थी।(घ) बीच रास्ते में शेर बैठा था।

Answer»

लेखक को अचानक रुकना पड़ा, क्योंकि सड़क पर आदमी और औरतों की भीड़ थी।

21.

जाद लोग पूरी ताकत से नारे लगाते थे क्योंकि…(क) इससे उन्हें खुशी मिलती थी।(ख) वे अपने मालिक को खुश करना चाहते थे।(ग) उसके बदले में उनको पैसे मिलते थे।(घ) वे नेहरूजी को खुश करना चाहते थे।

Answer»

जाद लोग पूरी ताकत से नारे लगाते थे, क्योंकि इससे उन्हें खुशी मिलती थी।

22.

‘भारतमाता कोई सुन्दर बेबस नारी नहीं हैं !’ इस वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।

Answer»

प्रायः कुछ चित्रों, कैलेन्डरों आदि में भारतमाता को एक महिला के रूप में दिखाया जाता है। जब देश पराधीन था, तब भारतमाता को एक बेबस नारी के रूप में दिखाया जाता था। वास्तव में भारतमाता तो हमारे देश की वह विशाल जनता है जो हजारों गाँवों और शहरों में रहती है। देश के करोड़ों गरीब किसान और मजदूर भारतमाता के रूप हैं। इनके सुख-दुःख, इनकी गरीबी-अमीरी भारतमाता के सुख-दुःख और गरीबी-अमीरी को दर्शाते हैं। इनके जीवन की दशा ही भारतमाता का स्वरूप है।

23.

‘भारतमाता की जय!’ का नारा हमें किसकी सेवा करने की प्रेरणा देता हैं ?

Answer»

‘भारतमाता’ का अर्थ वे सभी लोग हैं, जो इस विशाल देश में रहते हैं। इनमें वे करोड़ों किसान हैं जिनके जीवन में एक जैसी समस्याएं हैं। गांवों में रहनेवाले इन लोगों का जीवन तरह-तरह की मुश्किलों और आफतों से भरा हुआ है। वे गरीबी के बोझ से दबे जा रहे हैं। ‘भारतमाता की जय’ का नारा हमें इन देशवासियों की सेवा करने की प्रेरणा देता है।

24.

लोगों को हार्दिक प्रसन्नता कब हुई ?

Answer»

नेहरूजी ने जाटों की भीड़ को समझाया कि ‘भारतमाता की जय’ बोलकर हम उन सबकी जय बोलते हैं, जो भारत में रहते हैं। यह जय उन सबकी जय है, जो इस देश के गांवों और शहरों में बसते हैं। इस प्रकार नेहरूजी के समझाने पर लोगों को हार्दिक प्रसन्नता हुई।

25.

भारत कहाँ से कहाँ तक फैला है ?

Answer»

भारत उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पश्चिम में गुजरात से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक फैला है। इसमें पंजाब, बंगाल, मुंबई, चेन्नई (मद्रास) आदि सब शामिल हैं।

26.

लोग एक दूसरे का मुँह क्यों ताकने लगे ?

Answer»

नेहरूजी ने जाट मों और औरतों से पूछा कि ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारतमाता की जय’ के नारे किसलिए हैं? वे लोग नेहरूजी के इन प्रश्नों का मतलब समझ नहीं पाए। इसलिए वे एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे।

27.

लेखक ने कौन-सा पेचीदा सवाल किया ?

Answer»

नेहरूजी बाहर आकर जाट मर्दी और औरतों के बीच बैठ गए, तो लोगों ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारतमाता की जय के नारे लगाए। इस पर नेहरूजी ने उनसे पूछा कि बताइए यह ‘माता’ कौन है, जिसको आपने प्रणाम किया है और जिसकी जय के नारे लगाए हैं? लोगों के लिए यह पेचीदा सवाल था।

28.

नेहरू जी जाट मर्दो और औरतों के बीच में क्यों गये ?

Answer»

जाट औरत-मर्द बीच सड़क पर बैठे हुए दोपहर से नेहरूजी के आने का इंतजार कर रहे थे। रात को नेहरूजी का काफिला वहाँ पहुंचा, तो वे आगे बढ़कर उनके पास आए। नेहरूजी को लगा उन लोगों से थोड़ी-बहुत बातचीत किए बिना आगे बढ़ना मुमकिन नहीं है। इसलिए वे गाड़ी से बाहर आए और जाट मर्दो और औरतों के बीच उनसे बातें करने के लिए उनके बीच बैठ गए।

29.

निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दें… लगभग सभी नए सामाजिक आन्दोलन नयी समस्याओं; जैसे-पर्यावरण का विनाश, महिलाओं की बदहाली, आदिवासी संस्कृति का नाश और मानवाधिकारों का उल्लंघन….. के समाधान को रेखांकित करते हुए उभरे। इनमें से कोई भी अपने आप में समाज व्यवस्था के मूलगामी बदलाव के सवाल से नहीं जुड़ा था। इस अर्थ में ये आन्दोलन अतीत की क्रान्तिकारी विचारधाराओं से एकदम अलग हैं। लेकिन, ये आन्दोलन बड़ी बुरी तरह बिखरे हुए हैं और यही इनकी कमजोरी है….. सामाजिक आन्दोलनों का एक बड़ा दायरा ऐसी चीजों की चपेट में है कि वह एक ठोस तथा एकजुट जन आन्दोलन का रूप नहीं ले पाता और न ही वंचितों और गरीबों के लिए प्रासंगिक हो जाता है। ये आन्दोलन बिखरे-बिखरे हैं, प्रतिक्रिया के तत्त्वों से भरे हैं, अनियत हैं और बुनियादी सामाजिक बदलाव के लिए इनके पास कोई फ्रेमवर्क नहीं है। ‘इस’ या ‘उस’ के विरोध (पश्चिम-विरोधी, पूँजीवाद-विरोधी, ‘विकास’-विरोधी, आदि) में चलने के कारण इनमें कोई संगति आती हो अथवा दबे-कुचले लोगों और हाशिए के समुदायों के लिए ये प्रासंगिक हो पाते हों-ऐसी बात नहीं। – रजनी कोठारी(क) नए सामाजिक आन्दोलन और क्रान्तिकारी विचारधाराओं में क्या अन्तर है?(ख) लेखक के अनुसार सामाजिक आन्दोलनों की सीमाएँ क्या-क्या हैं?(ग) यदि सामाजिक आन्दोलन विशिष्ट मुद्दों को उठाते हैं तो आप उन्हें ‘बिखरा’ हुआ कहेंगे या मानेंगे कि वे अपने मुद्दे पर कहीं ज्यादा केन्द्रित हैं। अपने उत्तर की पुष्टि में तर्क दीजिए।

Answer»

(क) सामाजिक आन्दोलन समाज से जुड़े हुए मामलों अथवा समस्याओं को उठाते हैं; जैसे-जाति भेदभाव, रंग भेदभाव, लिंग भेदभाव के विरोध में चलाए जाने वाले सामाजिक आन्दोलन। इसी प्रकार ताड़ी विरोधी आन्दोलन, सभी को शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता के लिए चलाए जाने वाले आन्दोलन आदि।
जबकि क्रान्तिकारी विचारधारा के लोग तुरन्त सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में बदलाव लाना चाहते हैं। वे लक्ष्यों को ज्यादा महत्त्व देते हैं, तरीकों को नहीं। मार्क्सवादी-लेनिनवादी या नक्सलवादी आन्दोलन को क्रान्तिकारी विचारधारा के आन्दोलन मानते हैं।
(ख) सामाजिक आन्दोलन बिखरे हुए हैं तथा इसमें एकजुटता का अभाव पाया जाता है। सामाजिक आन्दोलनों के पास सामाजिक बदलाव में लिए कोई ढाँचागत योजना नहीं है।
(ग) सामाजिक आन्दोलनों द्वारा उठाए गए विशिष्ट मुद्दों के कारण यह कहा जा सकता है कि ये आन्दोलन अपने मुद्दों पर अधिक केन्द्रित हैं।

30.

भोले-भाले चेहरों पर प्रकाश की रेखा दिखाई दी, क्योंकि…(क) उन्हें पार्टी में शामिल किया गया था।(ख) उनकी जमीन वापस मिल गयी थी।(ग) नेताजी उनकी तारीफ कर रहे थे।(घ) यह ज्ञान उनके लिए विचित्र था।

Answer»

भोले-भाले चेहरों पर प्रकाश की रेखा दिखाई दी, क्योंकि यह ज्ञान उनके लिए विचित्र था।

31.

लेखक तेजी से दिल्ली क्यों पहुँचना चाहते थे ?

Answer»

लेखक तेजी से दिल्ली पहुंचना चाहते थे, क्योंकि वहाँ पहुंचकर उन्हें गाड़ी पकड़नी थी।

32.

हम भारतमाता की जय बोलते हैं. तो किसकी जय बोलते हैं ?

Answer»

हम भारतमाता की जय बोलते हैं तो उन सबकी जय बोलते हैं, जो भारत में रहते हैं।

33.

महादेश हिन्दुस्तान सबके लिए क्या है ?

Answer»

महादेश हिंदुस्तान सबके लिए ‘भारतमाता’ है।

34.

नारा लगाकर किसान किसमें डर पैदा करते थे ?

Answer»

नारा लगाकर किसान अपने प्रतिद्वन्द्रियों में डर पैदा करते थे।

35.

है तो यह बड़ी शानदार बात! लेकिन कोई मुझे बताए कि हम जो यहाँ राजनीति का इतिहास पढ़ रहे हैं, उससे यह बात कैसे जुड़ती है?

Answer»

सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों में जन आन्दोलनों की शानदार उपलब्धि रही है। चिपको आन्दोलन में उत्तराखण्ड के एक गाँव के स्त्री एवं पुरुषों ने पर्यावरण की सुरक्षा और जंगलों की कटाई का विरोध करने के लिए एक अनूठा प्रयास किया, जिसमें इन लोगों ने पेड़ों को अपनी बाँह में भर लिया ताकि उनको काटने से बचाया जा सके। इस आन्दोलन को व्यापक सफलता प्राप्त हुई।
जन आन्दोलनों का राजनीति से सम्बन्ध का पुराना इतिहास रहा है। जन आन्दोलन कभी राजनीतिक तो कभी सामाजिक आन्दोलन का रूप ले सकते हैं और अकसर यह दोनों ही रूपों में नजर आते हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन को ही लें तो यह मुख्य रूप से राजनीतिक आन्दोलन था लेकिन औपनिवेशक काल में सामाजिक-आर्थिक मसलों पर भी विचार मन्थन चला जिससे अनेक स्वतन्त्र सामाजिक आन्दोलनों का जन्म हुआ; जैसे-जाति प्रथा विरोधी आन्दोलन, किसान सभा आन्दोलन और मजदूर संगठनों के आन्दोलन। इन आन्दोलनों ने सामाजिक संघर्षों के कुछ अन्दरूनी मुद्दे उठाए।
ऐसे ही कुछ आन्दोलन आजादी के बाद के दौर में भी चलते रहे। मुम्बई, कोलकाता और कानपुर जैसे बड़े शहरों के औद्योगिक मजदूरों के बीच मजदूर संगठनों के आन्दोलनों का बड़ा जोर था। सभी बड़ी पार्टियों ने इस तबके के मजदूरों को लामबन्द करने के लिए अपने-अपने मजदूर संगठन बनाए।

36.

गैर-राजनीतिक संगठन? मैं यह बात कुछ समझा नहीं। आखिर, पार्टी के बिना राजनीति कैसे की जा सकती है?

Answer»

सामान्यत: गैर-राजनीतिक संगठन ऐसे संगठन हैं जो दलगत राजनीति से दूर स्थानीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़े हुए होते हैं तथा सक्रिय राजनीति में भाग लेने की अपेक्षा एक दबाव समूह की तरह कार्य करते हैं।
औपनिवेशिक दौर में सामाजिक-आर्थिक मसलों पर भी विचार मन्थन चला जिससे अनेक स्वतन्त्र सामाजिक आन्दोलनों का जन्म हुआ; जैसे-जाति प्रथा विरोधी आन्दोलन, किसान सभा आन्दोलन और मजदूर संगठनों के आन्दोलन। ये आन्दोलन 20वीं सदी के प्रारम्भ में अस्तित्व में आए। मुम्बई, कोलकाता और कानपुर जैसे औद्योगिक शहरों में मजदूर संगठनों के आन्दोलनों का जोर था। इनका मुख्य जोर आर्थिक अन्याय और असमानता के मसले पर रहा। ये सभी गैर-राजनीतिक संगठन थे और इन्होंने अपनी माँगें मनवाने के लिए आन्दोलनों का सहारा लिया।
यद्यपि ऐसे गैर-राजनीतिक संगठनों ने औपचारिक रूप से चुनावों में भाग तो नहीं लिया लेकिन राजनीतिक दलों से इनका सम्बन्ध नजदीकी रहा। इन आन्दोलनों में सम्मिलित हुए कई व्यक्ति और संगठन राजनीतिक दलों में भी सक्रिय हुए।

37.

अगर तुम्हें मोबाइल फोन पर अपने मित्र को एस.एम.एस. द्वारा बधाई संदेश भेजना है, तो क्या लिखोगे?

Answer»

मेरे प्यारे रामू, आंतर विद्यालयीन वक्तृत्व स्पर्धा में प्रथम आने पर ढेर सारी बधाइयाँ। अपनी ओर से मैं टाइटन घड़ी भेज रहा हूँ।

अब तो पार्टी में ही मिलेंगे। अभिनंदन।

तुम्हारा ही,

निखिल।

38.

डायरी के रूप में लिखिए :अपने जीवन का कोई सुखद अनुभव।

Answer»

सुरत।

17 नवंबर, 2013

आज का दिन तो सचमुच अविस्मरणीय रहा। दीवाली के मेले में जाने के लिए माँ ने बीस रुपए दिए थे। अब इस छोटी-सी रकम में क्या मेले का आनंद लिया जा सकता है? इसमें पाँच रुपए तो बस के किराये के लिए ही थे।

मैं मेले में जाने के लिए निकल ही रहा था कि मेरे मामाजी आ गए। वे बोले, “मेला देखे तो मुझे भी बरसों हो गए। चलो, मैं भी आज मेले का आनंद ले लूँ।”

मैं मामाजी की बाइक पर सवार हुआ और फट-फट करती हुई उनकी बाइक सड़क पर हवा से बातें करने लगी। मेले में हमने खूब आनंद लिया। समोसे खाए, लस्सी पी, गुलाबजामुन का स्वाद लिया। फोटो खिंचवाए, निशानेबाजी में इनाम जीता और चरखी पर बैठे।

हाथी की सवारी का भी आनंद लिया। इतना सब आनंद लेने के बावजूद मेरे बीस रुपये जैसे के तैसे जेब में पड़े रहे। मेले में घूमने का वह सुखद अनुभव शायद ही कभी भूल पाऊँ। इसका श्रेय मामाजी को है।

39.

क्या दलितों की स्थिति इसके बाद से ज्यादा बदल गई है? दलितों पर अत्याचार की घटनाओं के बारे में मैं रोजाना सुनती हूँ। क्या यह आन्दोलन असफल रहा? या, यह पूरे समाज की असफलता है?

Answer»

दलितों की स्थिति में सुधार हेतु सन् 1972 में शिक्षित दलित युवा वर्ग ने महाराष्ट्र में एक आन्दोलन चलाया, जिसे दलित पैंथर्स आन्दोलन के नाम से जाना जाता है। इस आन्दोलन के माध्यम से दलितों की स्थिति सुधारने हेतु अनेक प्रयास किए गए। इस आन्दोलन का उद्देश्य जाति प्रथा को समाप्त करना तथा गरीब किसान, शहरी औद्योगिक मजदूर और दलित सहित सारे वंचित वर्गों का एक संगठन तैयार करना था।
यद्यपि इस आन्दोलन द्वारा शिक्षित युवा वर्ग ने काफी प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हो पायी। भारतीय संविधान में छुआछूत की प्रथा को समाप्त कर दिया गया। इसके बावजूद भी पुराने जमाने में जिन जातियों को अछूत माना गया था, उनके साथ नए दौर में भी सामाजिक भेदभाव तथा हिंसा का बर्ताव कई रूपों में जारी रहा। दलितों की बस्तियाँ मुख्य गाँव से अब भी दूर थीं, दलित महिलाओं के साथ यौन-अत्याचार होते थे। जातिगत प्रतिष्ठा की छोटी-मोटी बात को लेकर दलितों पर सामूहिक जुल्म ढाए जाते थे।

40.

डायरी के रूप में लिखिए :1. किसी एक पूरे दिन के अपने अनुभव का विवरण।2. वार्षिकोत्सव में सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार मिलने का आपका अनुभव।

Answer»

1. अहमदाबाद।

16 अक्तूबर, 2013

कल 16 अक्तूबर थी – नवरात्रि का पहला दिन। एक तरफ मन में उमंग और दूसरी तरफ चिंता थी। उमंग इस बात की थी कि डांडियारास देखने-खेलने को मिलेगा। वाद्यों की मधुर धुनें कानों में रस घोलेंगी। चिंता इस बात की थी कि कुछ ही दिनों में प्रथम सत्र की परीक्षाएँ होनेवाली थीं।

पहला प्रश्नपत्र अंग्रेजी का था। पता नहीं, इस विषय के प्रति मुझे क्यों अरुचि थी। थोड़ी तैयारी की थी, पर बहुत काम बाकी था। चिंता न कर क्या सब कुछ अंबा मैया पर छोड़कर निश्चिंत हो गया?

2.  मुंबई।

12 जनवरी, 2014

हमारे विद्यालय का इस वर्ष का वार्षिकोत्सव मेरे लिए एक सुनहरी यादगार घटना बन गया है। उत्सव में वक्तृत्व स्पर्धा का भी आयोजन था। विषय था “विज्ञान – शाप या वरदान?’

स्पर्धा का अंतिम वक्ता मैं था, लेकिन मुझे प्रथम पुरस्कार मिला। मित्र हैरान थे कि यह बहुत कम बोलनेवाला आज इतना धड़ाधड़ कैसे बोल रहा है। सचमुच, उस समय मेरी वाणी पर सरस्वती विराजमान हो गई थीं। शाम को पिताजी घर लौटे तो बहुत खुश थे।

उन्होंने अदालत में प्रतिवादी के वकील को अपनी दलीलों से परास्त कर दिया था। सचमुच, आज का दिन तो हमारे लिए सरस्वती का दिन ही था।

41.

हिंदी भाषा की क्या विशेषता है?

Answer»
  • हिंदी संस्कृति, सभ्यता व गरिमा का प्रतीक है।
  • हिंदी करोडों लोगों की जीविका बन चुकी है।
  • हिंदी भाषा से सारे भारत की पहचान अच्छी तरह से कर सकते हैं।
  • हमें भारत के सभी प्रांतों से जुडने के लिए हिंदी भाषा की आवश्यकता होती है।
  • हिंदी सारे भारतीयों को एकता के सूत्र में बाँधती है।
  • हिंदी अपने शाब्दिक अर्थ से भी भारतीय कहलाती है।
42.

सांस्कृतिक दृष्टि से हिंदी का क्या महत्व है?

Answer»

हिंदी केवल एक भाषा का नाम नहीं है। यह भारतीयों की साँसों में बसी भाषा है। यह सबकी संस्कृति, सभ्यता व गरिमा का प्रतीक है। भारत देश की संस्कृति इस भाषा में निहित है। हिन्दी के प्रमुख कवियों ने सांस्कृतिक तथा देश की एकता के लिए भी अपनी रचनाओं में ज़ोर दी।

हिन्दी की सांस्कृतिक समृद्धि के लिए यह एक शुभ लक्षण है। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होगा कि आधुनिक काल में सांस्कृतिक दृष्टि से हिन्दी भाषा का क्रमिक विकास तथा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की उत्तरोत्तर बढ़ती हुई शक्तियाँ वस्तुत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

43.

भारत देश को स्वतंत्र कराने में हिंदी भाषा का क्या योगदान रहा होगा?

Answer»

भारत के अलग – अलग प्रांतों में अलग – अलग भाषाएँ बोली जाती हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में देश को एकता के सूत्र में बाँधने के लिए एक भाषा की आवश्यकता हुई। यह काम हिंदी से ही साध्य हो सका। भारत के सभी प्रांतों से जुड़ने के लिए एक भाषा की आवश्यकता होती हैं जिसे सारे भारत के वासी जानते हैं। वैसी भाषा ही हिंदी है। वह हिंदी भाषा ही उस समय भारतदेश को स्वतंत्र कराने में उनमें एकता दिलायी होगी। सारे भारतीयों को एकता के सूत्र में बाँधी होगी। इस प्रकार भारत देश को स्वतंत्र कराने में हिंदी भाषा का अच्छा योगदान रहा होगा।

44.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा का क्या महत्व है?

Answer»
  • आज हिंदी केवल राष्ट्र भाषा ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में अवतरित हुयी।
  • इसलिए आजकल हिंदी विश्व भाषा है ।
  • आज भारत के अलावा बंग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, भूटान, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिडाड एवं टुबेगो, दक्षिण अफ्रीका, बहरीन, कुवैत, ओमन, कत्तर, सौदी अरब गणराज्य, श्रीलंका, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, मॉरिशस, आस्ट्रेलिया आदि देशों में हिंदी की माँग बढ़ती ही जा रही है।
  • विदेशों में भी हिंदी में रचनाएँ लिखी जा रही हैं।
  • विदेशों में भारतीयों से आपसी व्यवहार के लिए वहाँ के लोग भी हिंदी सीख रहे हैं ।
  • विदेशी हिंदी साहित्यकारों का योगदान भी मिल रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कई संस्थाएँ हिंदी के प्रसार एवं प्रचार में जुटी हुई हैं ।
  • आज विश्व भर में करीब डेढ़ सौ से अधिक विश्वविद्यालय हिंदी संबंधी कोसों का संचालन कर रहे हैं।
  • सारे विश्व में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है ।

इसलिए कह सकते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा का महत्व अधिक है।

45.

हिंदी भाषा से रोजगार की संभावनाएँ अधिक हैं। कैसे ?

Answer»
  • हिंदी भाषी से रोजगार की संभावनाएँ अधिक हैं।
  • बैंक, मीडिया, फिल्म उद्योग आदि क्षेत्रों में हिंदी की उपयोगिता बढ़ रही है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में भी रोजगार संबंधी हिंदी का प्रचार और प्रसार बढ़ रहा है।
46.

नीचे दिये गये वाक्य उचित क्रम में लिखिए।1. भारतीय हिंदी शाब्दिक अर्थ भी कहलाती है से अपने2. हिंदी 14 सितंबर मनाते हैं को दिवस3. तरह इस हिंदी अंतर्राष्ट्रीय पर शोभित है स्तर4. स्वास्थ्य ध्यान पूरा रखना का अपने

Answer»

1. हिंदी अपने शाब्दिक अर्थ से भी भारतीय कहलाती है।
2. 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हैं।.
3. इस तरह हिंदी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोभित है।
4. अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना।

47.

अब हिन्दी न केवल भारत की बल्कि विश्व की भाषा बन चुकी है। इस कथन पर अपने विचार बताइए।(या)आज हिंदी भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की भाषा बन चुकी है। अपने विचार स्पष्ट कीजिए।

Answer»
  • आज हिंदी केवल राष्ट्र भाषा ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में अवतरित हुयी।
  • इसलिए आजकल हिंदी विश्व भाषा है ।
  • आज भारत के अलावा बंग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, भूटान, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिडाड एवं टुबेगो, दक्षिण अफ्रीका, बहरीन, कुवैत, ओमन, कतर, सौदी अरब गणराज्य, श्रीलंका, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, मॉरिशस, आस्ट्रेलिया आदि देशों में हिंदी की मांग बढ़ती ही जा रही है।
  • विदेशों में भी हिंदी में रचनाएँ लिखी जा रही हैं।
  • विदेशों में भारतीयों से आपसी व्यवहार के लिए वहाँ के लोग भी हिंदी सीख रहे हैं।
  • विदेशी हिंदी साहित्यकारों का योगदान भी मिल रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कई संस्थाएँ हिंदी के प्रसार एवं प्रचार में जुटी हुई हैं।
  • आज विश्व भर में करीब डेढ़ सौ से अधिक विश्वविद्यालय हिंदी संबंधी कोसों का संचालन कर रहे हैं।
  • सारे विश्व में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिक्स मनाया जाता है।

इसलिए कह सकते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा का महत्व अधिक है। उपर्युक्त इन सभी विषयों से हम कह सकते हैं कि आज हिंदी भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की भाषा बन चुकी है।

48.

‘भारत में अनेकता में एकता का प्रतीक हिंदी है।’ कैसे?

Answer»

भारत देश एक विशाल देश है। इसमें विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाओं के लोग रहते हैं, इस कारण इस देश में विभिन्नता बनी हुयी है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में देश को एकता के सूत्र में लाने एक भाषा की आवश्यकता हुई। यह काम तो हिंदी से ही साध्य हो सका। हिंदी से हम सारे देश की पहचान अच्छी तरह कर सकते हैं। हिंदी को सभी प्रांतों के भारतवासी जानते हैं और समझ सकते हैं। हिंदी अपने शाब्दिक अर्थ से भी भारतीय कहलाती है। हिंदी भारतीयों को जोडनेवाली भाषा बन गयी है। इससे ही भारत देश के वासियों के बीच एकता बनी हुयी है।

यह एक ही भाषा है जो सारे भारतीयों को एक सूत्र में बाँधती है। इसलिए हम कह सकते हैं कि भारत में अनेकता में एकता का प्रतीक हिंदी ही है।

49.

नीचे दिये गये वाक्य रचना की दृष्टि से समझिए।1. मुझे पूरा विश्वास है कि तुम हिंदी से अपना भविष्य बनाओगे।2. जो जानकारी दी गयी है उसे समझिए।3. तुमने पूछा कि हिंदी का क्या महत्व है?

Answer»

1. ये तीन वाक्य मिश्रित वाक्य है।
2. यहाँ सरल वाक्य के साथ उपवाक्य का मेल हुआ है।
3. सरल वाक्य के साथ किसी आश्रित वाक्य का मेल होता उसे मिश्रित वाक्य कहते हैं।

50.

हिंदी भाषा सीखने से क्या – क्या लाभ हैं?

Answer»
  • हिंदी भाषा सीखने से ये लाभ मिलते हैं।
  • हिंदी से हम सारे भारत की पहचान अच्छी तरह से कर सकते हैं।
  • हमें भारत के सभी प्रांतों से यह भाषा जुडाती है।
  • यह भाषा हमें एकता के सूत्र में बाँधती है।।
  • मीडिया, फिल्म उद्योग, बैंक आदि क्षेत्रों में हिंदी की उपयोगिता बढ़ती जा रही है।
  • हिंदी भाषा से कई रोज़गार हमें मिलते हैं।
  • हिंदी से अपने भविष्य का निर्माण करने के लिए कई वेबसाइट सेवा में तत्पर हैं।
  • हम हिंदी भाषा से अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।