This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
| 1. |
1937 का अधिनियम किस उद्देश्य से बना था? |
|
Answer» हिन्दू जी के विधवा होने पर मृत्त पति की सम्पत्ति में अधिकार प्रदान करने की दृष्टि से वर्ष 1997 में यह अधिनियम पारित किया गया है। |
|
| 2. |
दहेज़ निरोधक अधिनियम कब पारित हुआ? |
|
Answer» दहेज निरोधक अधिनियम 1961 में पारित किया गया। इस नियम के अनुसार दहेज लेना और देना दण्डनीय अपराध है। |
|
| 3. |
निम्नलिखित में से किस अधिनियम के द्वारा सपिण्ड बहिर्विवाह को। मान्यता प्रदान की गई है।(a) धनियम, 1955(b) अधिनियम, 1955(c) अधिनियम, 1954(d) अधिनियम, 1961 |
|
Answer» (b) अधिनियम, 1955 |
|
| 4. |
हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1966 किसलिए पारित किया गया था? |
|
Answer» स्त्रियों को पुरुष के समान अधिकार प्रदान करने की दृष्टि से हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 पारित किया गया। |
|
| 5. |
किस अधिनियम में हिन्दु विवाह-विच्छेद की व्यवस्था है? |
|
Answer» सामाजिक एवं कानूनी रूप से पति-पत्नी के विवाह सम्बन्धों को समाप्ति ही विवाह-विच्छेद कहलाता है। हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 में विवाह-विच्छेद की व्यस्था की गई है। |
|
| 6. |
विवाह-विचकुंद क्या है? विवाह किन परिस्थितियों में रद्द किया ज्ञा सकता हैं? |
|
Answer» सामाजिक एवं कानूनी रूप से पति-पत्नी के विवाह सम्बन्धों की समाप्ति हो विवाह-विच्छेद कहलाती है। विवाह विच्छेद पति-पत्नी के वैवाहिक एवं पारिवारिक जीवन में असामंजस्य एवं आसप्ता का सूचक है। इसका अर्थ यह है कि जिन उद्देश्यों को लेकर विवाह किया गया वे पूर्ण नहीं हुए हैं। यह एक दुःखद घटना है, विश्वास को समाप्त है, प्रतिज्ञा एवं मोह भंग की रियत है। यद्यपि भारत के विभिन्न प्रान्तों; जैसे- महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात एवं केरल में तक के सम्बन्धित अधिनियम बनते रहे, किन्तु सम्पूर्ण भारत के सन्दर्भ में 1951 में विशेष विवाह अधिनियम तथा 1955 में हिन्दू विवाह अधिनियम’ तलाक की व्यवस्था है। विवाह रद्द होना विमांकित इशाओं में विवाह होने पर भी इसे रद्द किया जा सकता है। ⦁ विवाह के समय दोनों पक्षों में से किसी एक का भी जीवन-साधी जीवित हो और उससे तलाक नहीं हुआ हो। ⦁ विवाह के समय एक पक्ष नपुंसक हो। ⦁ विशाह के समय कोई भी एक प जड़-बुद्धि य पागल हो। ⦁ विवाह के एक वर्ष के अन्दर यह प्रमाणित हो जाए कि प्राय अपवा उसके संरक्षक की स्यीकृति बलपूर्वक या कपट से ली गई यौ। ⦁ विवाह के एक वर्ष के भीतर यह प्रामाणित हो जाए कि विवाह के समय पानी किसी अन्य पुरुष गर्भवती दी और प्रार्थी इस बात से अनभिज्ञ था। |
|
| 7. |
विवाह का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके उद्देश्य एवं विशेषताओं पर प्रकाश डालिये। |
|
Answer» विवाह का अर्थ एवं परिभाषाएँ विवाह का शाब्दिक अर्थ है ‘उह’ अर्थात् वधू को वर के घर ले जाना। विवाह दो विषमलिगों का पारिवारिक जीवन में प्रवेश करने की सामाजिक, धार्मिक एवं कानूनी स्वीकृति हैं। लूसी मेयर ने विवाह को परिभाषित करते हुए लिखा है कि “शियडू स्त्री-पुरुष का ऐसा योग है, जिससे स्त्री से जन्मो सन्तान वैध मानी जाती है।” इस परिभाषा में विवाह को स्त्री व पुरुष के ऐसे सम्बन्धो के रूप में स्वीकार किया गया है, जो सन्तानों को जन्म देते हैं, उन्हें वैध घोधित करते है तथा इसके फलस्वरूप माता-पिता एवं बच्चों को समाज में कुछ अधिकार एवं प्रस्थितियाँ प्राप्त होती हैं। बोगार्स के अनुसार, “विवाह स्त्री और पुरुष के पारिवारिक जीवन में प्रवेश करने की संस्था है।” मजूमदार एवं मदान ने लिखा है कि, “विवाह में कानूनी या धार्मिक आयोजन के रूप में उन सामाजिक स्वीकृतियों का समावेश होता है, जो विषमतगयों की यौन-क्रिया और उससे सम्बन्धित सामाजिक-आर्थिक सम्बन्धों में सम्मिलित होने का अधिकार प्रदान करते हैं।” विवाह के उददेश्य मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा सामाजिक संस्थाएँ, व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक इत्यादि पक्षों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निवाहन करती हैं। लिहू का उद्देश्य केवल यौन सन्तुष्टि ही नहीं होगा, वरना कभी-कभी तो यह केवल सामाजिक-सांस्कृतिक एवं आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हो किया जाता है। विवाह की प्रारम्भिक विशेषताएँ विवाह की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिति हैं। ⦁ विवाह दो विषमलिनियों का सम्बन्ध है। ⦁ विवाह एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। ⦁ इसके माध्यम से किया सम्बन्धों का नियमन करता है। ⦁ बच्चों का पालन पोषण एवं समाजीकरण उपयुक्त तरीके से होता है। ⦁ विवाड़ में परिवार एवं समाज में अधिक सहयोग मिलता है। ⦁ विवाह मानसिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसके साप ही सामाजिक सुरक्षा भौ सम्भव हो पाती है। ⦁ विवाह द्वारा संस्कृति का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तान्तरण सूत्र हो पाता है। ⦁ वैद्य सन्तानोत्पत्ति प्राप्त करने का माध्यम है। ⦁ माता-पिता एवं बच्चों में नवीन अधिकारों, दायित्वों एवं भूमिकाओं को जन्म देना भी विवाह की विशेषता है। ⦁ यह पार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक उद्देश्यों की पूर्ति करता है। वेटरमार्क ने विवाह को एक सामाजिक संस्था के अतिरिक्त एक आर्थिक संस्था भी मना है। |
|
| 8. |
विवाह-विच्छेद किसे कहते हैं? विवाह-विच्छेद के लाभ और हानियों का वर्णन कीजिए। का विवाह विच्छंद से कौन-कौन से लाभ होते हैं? |
|
Answer» विवाह-विच्छेद विवाह-विच्छेद से लाभ विवाह-विच्छेद में निम्नलिखित लाभ होते हैं। ⦁ समानता का अधिकार वर्तमान में स्त्री-पुरुषों को सभी क्षेत्रों में समान अधिकार प्रदान किए गए हैं, ऐसी स्थिति में विवाह-विच्छेद का अधिकार केवल पुरुषों को ही नही वरन् स्त्रियों को भी प्राप्त होना चाहिए। उन्हें भी असाधारण परिस्थितियों में अपने पति को त्यागने का अधिकार होना चाहिए। ⦁ पारिवारिक संगठन को सुदृढ़ बनाने के लिए वर्तमान में एकाकी परिवारों में पति के दुराचारी होने या वैवाहिक दायित्व न निभाने पर पत्नी व बच्चों को कोई अन्य सहारा नहीं होता। ऐसी दशा में स्त्री व बच्चों की रक्षा के लिए एवं परिवार को सुसंगठिा बनाने के लिए विशिष्ट परिस्पितियों में विवाह विच्छेद की स्पोति दी उनी चाहिए। ⦁ स्त्रियों की दशा सुधारने के लिए स्त्रियों को विवाह-विच्छेद का अश्किार मिलने पर उनकी पारिवारिक एवं सामवक प्रतिष्ठा में वृद्धि होंगी, साथ ही पुरुषों की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। ⦁ वैवाहिक समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए हिन्दू विवाह से सम्बन्धित समस्याओं जैसे—बाल-विवाह, अनमेल विवाह, दहेज, विधवा विवाह निषेध आदि से छुटकारा पाने के लिए विवाह-विच्छेद का अधिकार स्त्री-पुरुषों को समान रूप से दिया जाना चाहिए। ⦁ सामाजिक जीव को सन्तुलित बनाने के लिए स्त्रियों को विवाह के क्षेत्र में पुरुषों के समन अधिकार देने से समाज व्यवस्था में असन्तुलन पैदा होगा। इस स्थिति में बचने के लिए एवं मानवीय दृष्टिकोण से भी स्त्रियों को विवाह- विछंद का अधिकार प्राप्त होना चाहिए। ⦁ परम्परा व संस्कृति को संरक्षण स्त्रियों को तलाक का अधिकार देने से भारत को प्राचीन परम्परा व संस्कृति को संरक्षण मि। वैदिक . कल और उसके काफी समय बाद तक दोनों पक्षों को तलाक देने के अधिकार थे। मध्य गुग में इन अधिकारों का रोक लगायी गई। इस प्रकार तलाक से हमारी भारतीय परम्परा व संस्कृति को कोई खतरा नहीं होगा, बल्कि इससे तो उनका क्षण ही होग ⦁ स्त्रियों को तलाक का अधिकार देने से हिन्दू विवाह पर लगाया जाने वाला यह आरोप कि त एक तर अधध। पों के प में है, भिट जाएगा। यह दोनों पक्षों को समान रूप से सुदृढ़ बनाएगा। विवाह-विच्छेद से हानियाँ विवाह विच्छेद से निम्नलिखित हानियाँ होती हैं। ⦁ पारिवारिक विघटन की समस्या तलाक से पारिवारिक विघटन व सामाजिक विपटन भी होता है। ⦁ स्त्रियों के भरण-पोषण की समस्या तलाक होने पर स्त्रियाँ बेसहारा, बेघर हो जाती है, उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई आर अनैतिक स्थिति का भी सामान करना पड़ जाता है। ⦁ बच्चों की समस्या तलाक के कारण बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उनके लालन पालन, शिक्षा दीक्षा की समस्या पैदा हो जाती है। माता-पिता के अभाव में उनके व्यक्तित्व का भी समुचित विकास नहीं हो पाता। ⦁ तलाक की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन विवाह-विदद से तलाक की प्रवृत्ति बढ़ती है, इससे जीवन में ठहराव नहीं आता और समाज में अनतिका बड़ती है। तलाक से पुनर्बाह में भी वृद्धि होती है। ⦁ तलाक के प्रभाव में मंगामक किट पैदा होता हैं नशा पति-पत्नी को आएँ टूट जाती है। उनमें हौन भावना पैदा होती है। |
|
| 9. |
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात विवाह से सम्बन्धित अधिनियमों का उल्लेख कीजिए। |
|
Answer» स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् विवाह से सम्बन्धित प्राणु अधिनियम निम्नलिखित हैं। 1. विशेष विवाह अधिनियम, 1951 (Special Marrian Act, 1964) किसी भी धर्म को मानने वालों को पास्पर मिह को स्वीकृति देने के लिए 1872 ई. में विशेष विवाह अधिनयम पारित किया गया। 1921 में इस अधिनियम को संशोधित कर विभिन शनियों के बीच होने वाले विवाह को वैध घोषित किया गया।1951 के इस अधिनियम द्वारा विभिन्न धर्मों एवं जातियों के रोगों को परस्पर विवाह की स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इस अधिनियम में एक-विया की व्यवस्था है तथा 21 वर्ष से कम आयु के लड़के व 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह उनके माता-पिता अशा संरक्षकों की स्वीकृति से होगा। 2. हिन्दू विवाह अधिनियम, 1965 (Hindu Marriage Act. 1955) 18 मई, 1965 से अम्मू और कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में निवास करने वाले भो, जिनमें जैन, बौद्ध, सिक्छ । सम्मिलित है, हिन्दू विवाह अधिनियम लागू कर दिया गया। इस अधिनियम के द्वारा विवाह से सम्बन्धित पूर्व में पास किए गए सभी अधिनियम रद्द कर दिए गए और सभी हिंदुओं पर एकसमान कानून सगू किया गया। इस अधिनियम में हिंदू विवाह की प्रचलित विभिन्न विधियों को मान्यता प्रदान की गई है, साथ ही सभी जातियों के स्त्री-पुरुषों को विवाह एवं तलाक के अधिकार प्रदान किए गए। है। इसकी प्रमुख विशेषताओं पर इस अध्याय में पूर्व में विचार किया जा चुका है। 3. हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Butteesaian Act, 191sti) 1837 के हिन्दू स्त्रियों को सम्पत्ति पर अधिकार अधिनयम में विधवा को अपने मत पति की सम्पत्ति में समेत अधिकार प्रदा था तथा भिरा र दायभाग ही सम्पत्ति में। उत्तराधिकार के भिन्न-भिन्न नियम । सम्पत्ति अधिकार को बाधाओं को समाप्त करने और स्त्रियों को पुरुष के समान अधिकार प्रदान करने की दृष्टि से हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 पारित किया गया। 4. हिन्दू नाबालिग तथा संरक्षकता अधिनियम, 1956 (The Hindu Minority and Guardianship Act, 1956) अधिनियम के पूर्व नाबालिग बच्चे के पिता की मृत्यु होने पर संरक्षक बनने का अधिकार केवल पितृ पक्ष के लोगों को हो सम्पत्ति का दुरुपयोग होने पर भी मा छ नहीं कर सकती थी। इस अधिनियम ने इस कमी को दूर कर दिया हैं। 5. हिन्दू दत्तक ग्रहण ओर भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (Hindu Adaptation and Maintenance Act, 1956) अधिनियम में गोद ने । त्रों का उनके आश्रितों के भरण पोषण के बारे में विस्तार से व्यवस्था की गई है। 6. स्त्रियों व कन्याओं का अनतिक व्यापार निरोधक अधिनियम, 1956 (Suppression of Immoral Trafic in Women and Girls Act, 1958) वेश्यावृति और अनैतिक व्यवहार को रोकने की दृष्टि से भारत सरकार ने 1955 में यह अधिनियम पारित किया। इस अधिनियम को मुख्य विशेषतई निम्न प्रकार हैं। ⦁ वेश्यावृत्ति एक दण्डनीय अपराध हैं। इस अधिनियम के अनुसार, “कोई भी स्त्री जो घन या वस्तु के बदले यौन सम्बन्ध के लिए अपना शरीर अर्पत करती है, वेश्या’ हैं तथा अपने शरीर को इस प्रकार यौनसम्बन्ध के लिए अर्पण करना ‘वेश्यागृति’ है।” ⦁ वेश्यालयों में रहने वाला व्यक्ति (सन्तान को छोड़कर) यदि यह 18 वर्ष से अधिक का है और वेश्या की आय पर आश्रित रहता है तो उसे दो वर्ष का कारावास अथवा एक हजार रुपये तक का दण्ड़ दिया जा सकता है। ⦁ वेश्यालय चलाने वाले व्यक्ति को 1 से 15 वर्ष तक का कारावास तथा दो हजार रुपये तक का जुर्माना आदि दड़ दिया जा सकता है। 7. दहेज निरोधक अधिनियम, 1961 (Lowry Prohibition Act, 1961) हिन्दू समाज में दहेज की भीषण समस्या का समाधान करने के लिए मई, 1961 में ‘दहेज निरोधक अधिनियम’ पारित किया गया। इसकी प्रमुख विशेषताओं पर सो अध्याय में पूर्व में विचार किया जा चुका है। 1956 में दहेज निरोधक अधिनियम, 1961 में संशोधन कर इसे और कठोर बनाया गया है। |
|
| 10. |
विवाह का शाब्दिक अर्थ है।(a) वधू को घर के घर ले जाना(b) वर को बापू के घर से जाना(c) ‘a’ और दोनों(d) इनमें से कोई नहीं |
|
Answer» (a) वधू को वर के घर से जाना |
|
| 11. |
व्यक्तित्व को परिवार तथा वातावरण वैसे प्रभावित करता है? विवेचना कीजिए। अथवामनुष्य के व्यक्तित्व पर वातावरण किस प्रकार प्रभाव डालता है? अथवाऊध बालक के व्यक्तित्व के विकास में आनुवंशिकता तथा पर्यावरण का क्या महत्त्व है? अथवाबालक के यक्तित्व को प्रभावित करने वाले तत्व वौन-कौन अथवा व्यक्तित्व निर्माण में किन कारकों का योगदान होता है? |
|
Answer» बालक के व्यक्तित्व निर्माण में आनुवंशिकता एवं पर्यावरण को प्रमुख योगदान होता है। आनुवंशिकता के अन्तर्गत वे समस्त कारक निहित होते हैं, जो बालक को अपने माता-पिता तथा पूर्वजों से प्राप्त होते हैं। बालक के शारीरिक गुण तथा अन्य विभिन्न जन्मजात गुण आनुशिकता से ही निघांरित होते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि बालक के व्यक्तित्व के विकास में आनुवंशिकता का विशेष महत्व होता है। पर्यावरण में आशय उन् समस्त बाहरी कारकों से है, जो जम के उपरान्त बालक के जीवन को प्रभावित करते हैं। ये कारण भी अनेक है तथा इनका बालक के ग्यक्तित्व के त्रिकास में अत्यधिक योगदान होता है। उत्तम पर्यावरण बालक के विकास में सहायक तथा प्रतिकूल पर्यावरण आधिक होता है। व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक ऐसे अनेक कारक है, जो जातक के व्यक्तित्व निर्माण में प्रभाव डालते हैं। बालक के व्यक्तित्व पर प्रभाव टालने वाले तत्व निम्नलिखित हैं। 1. शारीरिक बनावट का प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तित्व पर उसके। आकार का प्रभाव जाने कारक पड़ता है। यह देखा जाता है कि गोल मटोल आदमो हास्यप्रिय, आरामपसन्द एवं सामाजिक होते हैं, जबकि दुबले-पतले। माता-पिता का प्रमा आदमी संयमी होते हैं। व्यक्ति। अपर आ सकतात ज भाव के शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान। आर्थिक स्तेि का प्रमा में रखते हुए। अन्य व्यक्ति। भी उसके प्रति अपने व्यवहार प्रतिमान का निर्धारण करते हैं। भव्य एवं आकर्षक शारीरिक गठन वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान क व्यवहार किया जाता है। 2. अन्त:स्रावी ग्रन्थियाँ ये प्रन्थियों अपना रस रक्त में छोड़ देती हैं एवं रक्त इसे सम्पूर्ण शरीर में ले जाता है। यदि ये प्रन्थियाँ पर्याप्त मात्रा में रक्त को अपना रस देना बन्द कर दें, तो शरीर, बुद्धि एवं भाव में परिवर्तन हो आता है। यदि पीयूष ग्रन्थि आदि अपना काम मन्द गति से करती है, तो व्यक्ति की। लम्बाई नहीं बढ़ती तथा वह बौना हो जाता है, यदि ये अन्य तीव्र गति से कार्य करती हैं, तो व्यक्ति या लम्या हो जाता है। 3. स्नायविक संगठन निरीक्षण द्वारा यह देखा गया है कि यदि जल्यावस्था में क्ति के मस्तिष्क को किसी प्रकार का आघात लगता है, तो उसके व्यक्तित्व में विभिन्न प्रकार के परिवर्तन आ जाते है। इसके साथ-साथ विशिष्ट प्रकार के स्नायविक संगठन का भी व्यक्तित्व पर उल्लेखनीय प्रभाव 4. माता-पिता का प्रभाव माता-पिता का भय बच्चों पर बहुत अधिक पड़ता है, जो माता-पिता कठोर स्वभाव के होते हैं एवं अपने बच्चों को अधिक प्यार नहीं करते, ऐसे बच्चों में अन्तर्मुखी प्रवृत्ति बढ़ जाती हैं। वे एकान्त में रहने लगते हैं तथा हमेशा कल्पनाशील रहते हैं, जो माता-पिता अपने बच्चों को अधिक प्यार करते हैं, उन बच्चों में आत्मनिर्भरता के गुणों का अभाव पाया जाता है, वे बच्चे परावलम्बी हो जाते हैं। इस प्रकार उपरोक्त दोनों प्रकार के बच्चों का व्यक्तित्व स्वाभाविक तथा सामान्य नहीं होता है। अत: माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के प्रति किए गए आचरण में प्यार एवं नियन्त्रण का सन्तुलन बना रहे। 5. बालक के जन्म-क्रम का प्रभाव परिवार में बच्चा जब तक इकलौता रहता है, तो उसके अधिकार को छीनने वाला कोई नहीं होता और न कोई उसकी सुख-सुविधाओं में हिस्सा में आता है, इसलिए यह निर्दी हो जाता है। इससे भिन्न परिवार में सबसे छोटा बच्चा, बों परिवार में सभी का स्नेह प्राप्त करता है एवं उत्तरदायित्वों से मुक्त होता है, हमेशा सहायता के लिए दूसरे की और ही देखता है। 6. क्रीड़ा-समूह का व्यक्तित्व पर प्रभाव जब बच्चा चलने-फिरने योग्य हो आता है, तो वह अन्य बच्चों के साथ मिलता-जुलता है। खेलकूद के लिए बच्चों का एक क्लौड़ा समूह बन जाता है। में अपना अपना कार्य बाँट लेते हैं। कार्यों के आधार पर ही व्यक्तित्व का विकास होता हैं। 7. आर्थिक स्थिति का प्रमाण परिवार की आर्थिक स्क्यिति व्यक्तित्व विकास को प्रभवित करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। सामान्य रूप से यह देखा गया है। कि जे बालक आर्थिक अभाओं में पलते हैं, वे प्रायः अपराधी प्रवृत्ति के बन् आते हैं, जयके सम्पन्न परिवारों के बालकों का विकास सुचारु रूप से होता है। |
|
| 12. |
टिप्पणी लिखिएबच्चो के विकास में खेल का महत्व। |
|
Answer» खेल का बच्चों के सर्वांगीण विकास में बहुत योगदान है, क्योंकि खेलने से बच्चों के शरीर के सभी अगों का सही प्रकार से विकास होता है। इसके अतिरिक्त खेलते समय बच्चे में स्वस्थ प्रतिस्पर्ला कसा, टीम भावना, सहयोग, त्याग, हार के समय भी मुस्कुराना, अनुशासन आदि गुणों का विकास होता है। परिणामत: बच्चे का उत्तम प्रकार का समाजौकाण होता है। जहाँ तक संवेगात्मक गुणों के विकास का प्रश्न हैं, खेलने से अच्चे का तनाव दूर होता है। एवं उसमें संवेगात्मक स्थिरता आती हैं। इस प्रकार कह सकते हैं कि बच्चों के विकास में खेल का अत्यन्त महत्व है। |
|
| 13. |
“बाल्यावस्था अच्छी आदतों के निर्माण की उत्तम अवस्था है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। |
|
Answer» बाल्यावस्था सामान्यतः 2 से 12 वर्ष तक मानी जाती है। इस अवस्था को अच्छी आदतों के निर्माण की उत्तम अवस्था माना जाता है, क्योकि इस अवस्था में बालक के व्यक्तित्व के सभी घरों का विकास स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होने लगता हैं। इस कथन की विवेचना निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत की जा सकती है 1. शारीरिक विकास बाल्यावस्था के दौरान बालकों को शारीरिक क्षमता बढ़ जाती है। वे कार्यों को स्वतन्त्र रूप से कर सकते हैं, लक्ष्यों का निर्धारण कर सकते है तथा यह को अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। इस अवस्था में बालक शौच एवं नींद जैसी प्राथमिक क्रियाओं पर नियंत्रण करना सीखता है। नियमित रूप से मल त्याग को आदत एवं समय पर सोना व जागना ऐसौ आदतें हैं, जो बाल्यावस्था में निरन्तर अभ्यास करने से जीवनभर के लिए स्थायी हो जाती हैं। इस अवस्था में बालक पेशीय कौशलों में भी प्रमुख उपलब्धियाँ प्राप्त करता है। इस अवस्था में हाथ, भुजा एवं शरीर में सभी, आँख को गति के साथ समन्वित होते हैं। यालक तेज दौड़ने, उतने, कूदने आदि में सक्षम रहता है। अत: इस अवस्था में बालक में अपने शरीर को चुस्त दुरत रखने एवं नियमित मायाम करने की आदत हाली जा सकती है। 2. मानसिक विकास सामान्यतः 7 से 11 वर्ष की आयु में बच्चे में किसी वस्तु की विभिन्न विशेषताओं का ध्यान देने की क्षमता किसित होती है। यह क्षमता बच्चे की इस बात को समझने में सहायक होती है कि चीजों को देखने या समझने के भिन्न-भिन्न तरीके होते हैं, इसके परिणामस्वरूप बच्चे दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करते हैं। चिन्तन अधिक सचीला हो गता है और समस्या समाधान करते समय बच्चे विकल्पों के बारे में सोच सकते हैं। स्पतः इस अवस्था में माता-पिता एवं शिक्षक बच्चों में अच्छी आदतों का विकास करने में अपिक सफल होते हैं, क्योंकि वे बच्चों के समक्ष तार्किक उदाहरण प्रस्तुत कर उन्हें अच्छी आदतों के लाभ का ज्ञान करा सकते हैं, जिससे बच्चा स्वयं उन आदतों का अनुकरण करने की ओर उन्मुख होता है। 3. सामाजिक-सांवेगिक विकास बच्चे में विकसित हो रहे स्वतन्त्रता के बोध के कारण वह कार्यों को अपने तरीके से करता है। बच्चे की इन स्वरित क्रियाओं के प्रति माता-पिता जिस प्रकार में प्रक्रिया करते हैं वह पहलाक्ति बोध या अपराध बोध को विकसित करता है। उदाहरणत: यदि उन्हें यह अनुभव कराया जाता है कि उनके प्रश्न अनुपयोगी हैं तथा उनके द्वारा खेले गए खेल मूर्खतापूर्ण हैं, तो सम्भव है कि बच्चों में स्वय के प्रति दोष भावना विकसित हो। अतः बच्चों में कुछ नया रचनात्मक करने की एवं पहल करने की आदत का विकास, उनके कार्यों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया से हो मारा है। 4. नैतिक विकास इस अवस्था में बालक माता-पिता अथवा समाज के नियमों के आधार पर अपने नैतिक र्को को विकसित करता है। बच्चे इन नियमों को स्वयं के नियमों के रूप में स्वीकृत करते हैं। दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए इन नियमों को आत्मसात् कर लिया जाता है। बच्चे इन नियमों को ऐसे सुनिश्चित दिशा-निर्देश के रूप में देखते हैं, जिनका अनुसरण किया जाना चाहिए। |
|
| 14. |
निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता? (a) जल(b) काँच(c) प्लास्टिक(d) मिट्टी |
|
Answer» (d) मिट्टी |
|
| 15. |
किसी शब्दकोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस |
|
Answer» (c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस |
|
| 16. |
अच्छे व्यक्तित्व की क्या-क्या विशेषताएँ हैं? |
|
Answer» श्रेष्ठ व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ प्रेत तितत्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं। ⦁ सुदुङ मानसिक स्वास्थ्य समस्छ मन, एक अच्छे व्यक्तित्व की अभिन्न विशेषता है। स्वस्थ मन से आशय व्यक्ति की बुद्धि सामान्य होने, सदैव प्रसन्नचित रहने एवं समुचित मानसिक शक्तियों से सम्पन्न रहने से है। ⦁ उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए अवश्यक है कि शारीरिक गठन आयु एवं लिंग आदि के समानुपाती हो तथा शरीर स्वस्थ एवं रोगमुक्त हो। ⦁ सामाजिकता व्यक्ति समाज के साथ जितना अच्छा समायोजन करने की | रियत में होता है, उन्ह ही उसका अक्व श्रेष्ठ माना जाता है। ⦁ संवेगात्मक सन्तुलन संवेगात्मक रूप से सन्तुलित होने का अभिप्राय है। कि व्यक्ति न तो अति संवेगी हो और न ही सग शून्य हो। श्रेष्ठ किवि के लिए संवेगों का विकास सन्तुलित रूप से होना आवश्यक हैं। ⦁ अच्छे लक्ष्य श्रेष्ठ व्यमित्व के लिए साक्ष्य सदैव अच्छ, स्वस्थ एवं व्यावहारिक होने चाहिए। ⦁ चरित्रवान व्यक्तित्व चारित्रिक गुणों; जैसे-झूठ न बोलना, धोखा । देना, कोरी न करना, बेईमानी न करना आदि से सम्पन्न व्यक्ति का व्यक्तित्व उत्तम माना जाता है। ⦁ सन्तोषी एवं महत्वाकांक्षी श्रेष्ठ व्यक्तित्व के लिए सन्तोष एवं महत्वाकांक्षा के बीच सन्तुलन स्थपित होना आवश्यक है। व्यक्ति को निरन्तर प्रगति को और प्रयत्नशील रहना चाहिए, किन्तु अपने प्रयत्नों में असफल होने पर भी उसे दुःख, चिन्ता या भग्नाशी का शिकार नहीं होना चाहिए। |
|
| 17. |
परिवार में बालक के व्यक्तित्व पर सर्वाधिक प्रभाव किसका पड़ता है। |
|
Answer» परिवार में बालक के व्यक्तित्व पर सर्वाधिक प्रभाव माता-पिता का पड़ता है। इसके अतिरिका यासक के अक्तित्व के विकास पर तावरण का भी प्रभव पड़ता है। |
|
| 18. |
व्यक्तित्व के विकास की विभिन्न अवस्था लिखिए। |
|
Answer» व्यक्तित्व के विकास को मात्र चार अवस्थाएँ हैं । ⦁ शैशवावस्था |
|
| 19. |
बालक के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक कौन-कौन से हैं? |
|
Answer» बालक के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले दो मुख्य कारक निम्न हैं। ⦁ वंशानुक्रम ⦁ पयावरण |
|
| 20. |
श्रेष्ठ व्यक्तित्व की चार मुख्य विशेषताओं को बताएँ। सन्तुलित व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए। |
|
Answer» सन्तुलित एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं। ⦁ उत्तम मानसिक स्वास्थ्य ⦁ उत्म शारीरिक स्वास्थ्य ⦁ संवेगात्मक सन्तुलन ⦁ सामाजिकता ⦁ उतम चरित्र ⦁ महत्ता के साथ-साथ सन्तोष हो |
|
| 21. |
व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक है।a) परिवार का प्रभाव(b) स्कूल का प्रभाव(c) माता-पिता का प्रभाव(d) ये सभी |
|
Answer» सही विकल्प है (d) ये सभी |
|
| 22. |
बाल्यावस्था मानी जाती हैं(a) 1 से 6 वर्ष(b) 6 से 12 वर्ष(c) 13 से 18 वर्ष(d) इनमें से कोई नहीं |
|
Answer» (b) 6 से 12 वर्ष |
|
| 23. |
व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान कैसे करेंगे?(a) व्यक्ति याविक गुण(b) व्यक्ति के बाम गुण(c) व्यक्ति के आन्तरिक एवं बाह्न गुण(d) उपरीका में से कोई नहीं |
|
Answer» (c) व्यक्ति के आन्तरिक एवं बाह्न गुण |
|
| 24. |
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन 1 है। इसका क्या अर्थ है? |
|
Answer» समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन 1 है इसका अर्थ यह है कि बिंब का आकार प्रतिबिंब के आकार के बराबर है और बिंब से समान दुरी पर प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बना है | इसका धनात्मक चिन्ह यह बताता है कि प्रतिबिंब आभासी और सीधा है | |
|
| 25. |
व्यक्तित्व का अर्थ बताते हुए परिभाषित कीजिए। |
|
Answer» व्यसा की आतरिक एवं बाह्य विशेषताओं का समन्वित एवं संगठित रूप ही व्यक्तित्व है। आँपोर्ट के अनुसार, “कात के अन्दा न मनोदैहिक गुणों का त्यात्मक संगठन है, जो परिवेश के प्रति होने वाली अपुर्व अभियोजना का निर्णय |
|
| 26. |
आनुवंशिकता से आप क्या समझते हैं? |
|
Answer» आनुवंशिकता से आशय आनुवंशिक बालकों के किच के निर्माण एवं विकास को प्रभावित करती है। आनुवंशिकता का अग्रेजी शब्द हेरेरैडिटी (Heredity) होता है। तैटिन भाषण से निर्मित इस शब्द का आशय उस पूँजी से है, जो बच्चों को माता-पिता से उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त होती है अर्थात् आनुवंशिकता का अर्थ व्यक्तियों में पढ़ी-दर-पीढ़ी संधारित होने वाले शारीरिक, बौद्धिक तथा अन्य व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों से है। इस मान्यता के अनुसार बरु मा सन्तान के विभिन्न गुण एवं लक्षण अपने माता-पिता के समान होते हैं। उदाहरणस्वरूप गोरे माता-पिता की सतान अधिकांशतः गोरी ही होती है। इस प्रकार हम कह सो हैं कि प्रजनन की प्रक्रिया के माध्यम से संचारित होने ने जैविकोय एवं अन्य गुणों से आनुशक माना जाता है। आनुवंशिकता के यह जीन्स होते है। आनुबंशिक के ही परिणामस्वरूप विभिन्न पीढ़ियों में समानता होती हैं। |
|
| 27. |
वंशानुक्म किस रूप में व्यक्तित्व को प्रभावित करता है?(a) लिंग निर्धारण(b) शारीरिक विशेषताएँ(c) शैक्षिक प्रतिभा(d) ये सभी |
|
Answer» सही विकल्प है (d) ये सभी |
|
| 28. |
स्वास्थ्य शिक्षा में सम्मिलित हैं(a) पर्यावरण(b) शारीरिक स्वास्थ्य(c) सामाजिक स्वास्थ्य(d) ये सभी |
|
Answer» सही विकल्प है (d) ये सभी |
|
| 29. |
लोगों को स्वास्थ्य के सभी पहलुओं से अवगत करना कहलाती हैa) जन शिक्षा(b) स्वास्थ्य शिक्षा(c) भौतिक शिक्षा(d) इनमें से कोई नहीं |
|
Answer» (b) स्वास्थ्य शिक्षा| |
|
| 30. |
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए किन नियमों का पालन करना चाहिए? |
|
Answer» व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ परिवेश के साथ प्रतिदिन स्नान, शरीर के वस्त्रों की सफाई, दाँतों, आखों की सफाई तथा नाखूनों आदि को काटना चाहिए |
|
| 31. |
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र क्या है? |
|
Answer» यह स्वास्थ्य केन्द्र ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य सम्बन्धी नियमों की जानकारी देने, रोगों से बचाव, स्वच्छता, शिशु की देखभाल तथा गर्भवती स्त्रियों को पोषण से सम्बन्धी जानकारी प्रदान करते हैं। यह केन्द्र निःशुल्क होते हैं। |
|
| 32. |
स्वास्थ्य शिक्षा का मुख्य उद्देश्य क्या है? |
|
Answer» लोगों के स्वास्थ्य को उत्तम बनाना एवं स्वास्थ्य नियमों से अवगत कराना। स्वास्थ्य शिक्षा मुख्य उद्देश्य है। इसके तहत, राज्य, जिलों व अन्य स्तरों पर स्वास्थ्य शिक्षा इकाइयों की संगठनात्मक व्यवस्था और प्रचालन हेतु दिशा-निर्देश प्रदान किया जाता है। |
|
| 33. |
स्वास्थ्य शिक्षा को विकसित करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य ब्यूरो द्वारा कौन-कौन से उद्देश्य बताए गए हैं? |
|
Answer» देश में स्वास्थ्य शिक्षा को विकसित करने और बढ़ावा देने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य ब्यूरो ने निम्नलिखित उद्देश्य बताए हैं। ⦁ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय की योजनाओं, कार्यक्रमों और उपलब्धियों की व्याख्या करना। ⦁ स्वास्थ्य व्यवहार, स्वास्थ्य शिक्षा प्रक्रियाओं और साधनों के लिए सन्दर्शिका तैयार करना और शोध आयोजित करना। ⦁ विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं और कार्यक्रमों से सम्बन्धित स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री को तैयार करके टाइप कराकर वितरित करना।। ⦁ प्रमुख स्वास्थ्य और समुदाय कल्याण कर्मियों को स्वास्थ्य शिक्षा और शोध की विधियों में प्रशिक्षित करना, प्रशिक्षण के लिए प्रभावशाली विधि और प्रशिक्षण के साधन विकसित करना। ⦁ विद्यालय के छात्रों हेतु स्वास्थ्य शिक्षा के लिए विद्यालयों और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की सहायता करना। ⦁ राज्य, जिला और अन्य स्तरों पर स्वास्थ्य शिक्षा इकाइयों की संगठनात्मक व्यवस्था और प्रचालन हेतु दिशा निर्देश प्रदान करना। ⦁ स्वास्थ्य शिक्षा कार्य में लगी आधिकारिक और गैर-आधिकारिक एजेन्सियों को तकनीकी सहायता प्रदान करना और उनके कार्यक्रमों को समन्वित करना। |
|
| 34. |
भोजन से प्राप्त होने वाली शक्ति का कितने प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट से मिलना चाहिए? |
|
Answer» 50% से 60% तक |
|
| 35. |
कण – कण का अधिकारी कौन है? |
Answer»
|
|
| 36. |
श्रम के बल पर हम क्या – क्या हासिल कर सकते हैं? |
|
Answer» मानव जीवन में श्रम का ही महत्व अधिक है। श्रम से ही हम इच्छित फल प्राप्त कर सकते हैं। भाग्य की |
|
| 37. |
नर समाज का भाग्य क्या है? |
|
Answer» श्रम करने का महान गुण और भुजबल ही नर समाज का भाग्य है। नर समाज का भाग्य श्रम और भुजबल है। |
|
| 38. |
सूचना पढ़िए। उसके अनुसार कीजिए।i) अधिकार – अधिकारी, भाग्य – भाग्यवान (अंतर बताइए)।ii) यद्यपि – पर्यावरण (संधि विच्छेद कीजिए)।iii) अंम – जल, नभ – तल, भुजबल (समास पहचानिए)।iv) एक मनुज संचित करता है, अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा, भाग्यवाद के छल से। (पद परिचय दीजिए)।v) जिसने श्रम – जल दिया उसे पीछे मत रह जाने दो। (कारक पहचानिए)। |
|
Answer» i).
ii). यदि + अपि, परि + आवरण iii).
iv). एक – निश्चित संख्यावाचक विशेषण – पुंलिंग, एक वचन, मनुज का विशेष्य और – अव्यय, संयोजक, समुच्चय बोधक शब्द, दो वाक्यों को मिलाता है। v). ने, वह + को = उसे |
|
| 39. |
सबसे पहले सुख पाने का अधिकार किसे है? |
|
Answer» खूब श्रम करनेवाले श्रमिक को ही सब से पहले सुख पाने का अधिकार है। |
|
| 40. |
‘नर समाज का भाग्य एक है, वह श्रम, वह भुजबल है।’ जीवन की सफलता का मार्ग श्रम है। अपने विचार व्यक्त कीजिए।(या)श्रामिक कण – कण का अधिकारी है। अपने विचार व्यक्त कीजिए। |
Answer»
|
|
| 41. |
कम्प्यूटर और सेटेलाईट के युग में आज भी सड़कों पर क्या दौड़ रही है ?(क) साइकिल(ख) मोटरकार(ग) बैलगाड़ी(घ) इनमें से एक भी नहीं |
|
Answer» कम्प्यूटर और सेटेलाइट के युग में आज भी सड़कों पर साइकिल दौड़ रही है। |
|
| 42. |
सड़कों पर आज भी साइकिल क्यों चलाई जाती है ? |
|
Answer» दुनिया में बदलाव आता रहता है, फिर भी कुछ पुरानी चीजें कभी नहीं बदलती। साइकिल बहुत पुरानी सवारी है। इसके बावजूद उसका प्रयोग आज भी हो रहा है। उसकी उपयोगिता कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। उसमें न पेट्रोल का खर्च है, न डीज़ल का और न गैस का। पार्किंग का झंझट भी उसमें नहीं है। इसलिए सब प्रकार से सविधाजनक होने के कारण सड़कों पर आज भी साइकिल चलाई जाती है। |
|
| 43. |
लोगों को हिंसा की बजाय सरल जीवन क्यों पसंद है ? |
|
Answer» हिंसा मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति नहीं है। वह क्षणिक आवेश है। सामान्य रूप से मनुष्य अहिंसक रहता है। समाज में रहने के कारण उसके व्यवहार में अहिंसा की प्रधानता होती है। प्रेम, सहयोग, सहकार, मेल-जोल ये मनुष्य की स्वाभाविक वृत्तियाँ हैं। इन्हीं से जीवन में सुख, शान्ति से रहा जा सकता है। इसलिए लोगों को हिंसा के बजाय सरल जीवन ही पसंद है। |
|
| 44. |
‘बनिस्बत हिंसा के एक सादा सरल जीवन ज्यादा काम आता है लोगों को !’ |
|
Answer» हिंसा समस्या का समाधान नहीं है। हिंसा से कोई भी समस्या सुलझने की अपेक्षा और जटिल हो जाती है। सादा और सरल जीवन प्राचीन सभ्यता की देन है। उसका अस्तित्व सदा रहनेवाला है। उसी से मनुष्य सुख, शांति और चैन से अपना जीवननिर्वाह कर सकता है। |
|
| 45. |
सच और झूठ के बारे में कवि क्या कहते हैं? |
|
Answer» कवि कहते हैं कि सच की महिमा प्राचीन काल से आज तक है। इसी तरह झूठ का प्रयोग भी बहुत पहले से होता आया है। दुनिया के बहुत बदल जाने के बावजूद इनकी उपयोगिता अभी भी बनी हुई है। |
|
| 46. |
किनकी स्मृतियाँ आज भी बनी हुई है? |
|
Answer» नदियों के किनारे बसी हुई प्राचीन सभ्यताओं की स्मृतियाँ आज भी बनी हुई हैं। |
|
| 47. |
बीमार पड़ने पर आज भी क्या काम आता है? |
|
Answer» बीमार पड़ने पर आज भी दादी के घरेलू नुस्खे काम आते हैं। |
|
| 48. |
‘विनम्रता कोई कायरता नहीं ।’ |
|
Answer» विनम्रता मनुष्य के श्रेष्ठ गुणों में से एक है। बड़े-बड़े कार्य विनम्रता से संपन्न हो जाते हैं। विनम्रता के समक्ष क्रूरता को भी झुकना पड़ता है। शर्त यह है कि विनम्र व्यक्ति सबल हो। निर्बल व्यक्ति की विनम्रता से विनम्रता को नहीं मापा जा सकता। सबल व्यक्ति की विनम्रता को कभी कायरता नहीं कहा जा सकता। महात्मा गांधीजी की विनम्रता इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। |
|
| 49. |
कवि राजेश जोशी कौन-सी चीज स्मृतियों में शेष रहने की बात कहते हैं ? |
|
Answer» कवि राजेश जोशी थोड़ी-सी टीस और थोड़ी-सी मिठास स्मृतियों में शेष रहने की बात कहते हैं। |
|
| 50. |
‘दूब’ किसका प्रतीक है ?(क) हत्यारों(ख) संगठितता(ग) विनम्रता(घ) सरलता |
|
Answer» ‘दूब’ विनम्रता का प्रतीक है। |
|