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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

गंगी के हाथ से रस्सी छूट गई। रस्सी के साथ घडा धड़ाम से पानी में गिरा और कई क्षण तक पानी में हिलकोरें की आवाजें सुनाई देती रही। ठाकुर ‘कौन है, कौन है?’ पुकारते हुए कुएँ की तरफ आ रहे थे और गंगी जगत से कूदकर भागी जा रही थी। घर पहुँचकर देखा कि जोखू लोटा मुँह से लगाए वही मैला – गंदा पानी पी रहा है।‘गिरा’ क्रिया के स्थान पर कोष्ठक के किस रूप रखकर सही वाक्य बना सकता हैं?

Answer»

घड़ा धड़ाम से पानी में गिरा। उः घड़ा धड़ाम से पानी में गिरेगा।

2.

तुम लड़की हो तुम्हें क्यों पढ़ना है?’ कविता का आशय लिखें।

Answer»

यह कविता वार्तालाप की शैली में लिखी गई है। इसमें बाप और बेटी के बीच बातचीत हो रही है। बाप बेटी से पूछता है कि तुझे क्यों पढ़ना है? पढ़ने को बेटे काफ़ी है। बेटी कहती है कि वह लड़की है इसलिए पढ़ना चाहती है। हमारे समाज में आज भी ऐसे लोग हैं जो लड़कियों को स्कूल नहीं भेजते। तभी तो लड़की कहती है कि उसके पढ़ने की मनाही है तभी वह पढना चाहती है। लड़की के कई सपने है जिन्हें वह साकार करना चाहती है, वह कुछ कर दिखाना चाहती है, वह अपने मूल्य को बनाया रखना चाहती है, वह अपने पाँव पर खड़ी रहना चाहती है। वह शिक्षा के दवारा अपने मन के डर को दूर करना चाहती है। लड़कियों पर होनेवाले कई तरह के ज़ोर ज़ोर जुल्मों से बचने के लिए भी वह पढ़ना चाहती है। आज का ज़माना अनपढ़ का नहीं है, इसलिए भी वह पढ़ना चाहती है।

3.

गंगी का विद्रोही दिल रिवाज़ी पाबंदियों और मज़बूरियों पर चोटें करने लगा।’ -यहाँ प्रस्तुत रिवाज़ी पाबंदी और मज़बूरी क्या-क्या हैं?

Answer»

जाति के नाम पर समाज में बड़ा अलगाव था। निम्न कहे जानेवाले लोगों से छुआ पानी पीना, भोजन खाना, कुएँ से पानी भरना, रास्ते में उनसे मिलना आदि बातों में पाबंदी थी। निम्न वर्ग के लोग ये सब सहकर जीने को विवश थे। उच्च वर्ग के लोगों के हितानुसार अपनी ज़िंदगी की प्राथमिकताओं को तय करने के लिए भी वे विवश थे।

4.

गंगी के हाथ से रस्सी छूट गई। रस्सी के साथ घडा धड़ाम से पानी में गिरा और कई क्षण तक पानी में हिलकोरें की आवाजें सुनाई देती रही। ठाकुर ‘कौन है, कौन है?’ पुकारते हुए कुएँ की तरफ आ रहे थे और गंगी जगत से कूदकर भागी जा रही थी। घर पहुँचकर देखा कि जोखू लोटा मुँह से लगाए वही मैला – गंदा पानी पी रहा है।मान लें, भागी आई गंगी ने देखा कि जोखू लोटे का गंदा पानी पी रहा हैं। इस प्रसंग पर दोनों के बीच का संभावित वार्तालप लिखें।

Answer»

गंगी : अरे यह आप क्या कर रहे हैं?

जोखू : आ गयी! घडे भर पानी मिला?

गंगी : नहीं 

जोखू : मैं ने पहले ही बताया है न? मुझे मालूम था कि नहीं मिलेगा।

गंगी : कुएँ के पास कोई नहीं था। इसलिए सीधे वहाँ पहुँची। 

पर जोखू : क्या हुआ?

गंगी : दो लौडियाँ पानी भरने आई। उनके चले जाने तक वृक्ष की छाया में जा खडी हुई।

जोखू : उन्होने तुझे देखा क्या? 

गंगी : वे चले जाने के बाद कुएँ के जगह मैं पहूँची।

ठाकुर दरवाज़ा बंद करने के बाद पानी भरा और घड़े को पकड़कर जगत पर रखा। तब ठाकुर का दरवाज़ा खुल गया।

जोख : त ने क्या किया?

गंगी : भय से हाथ से रस्सी छूट गयी। रस्सी के साथ घडा धड़ाम से पानी में गिरा। पानी में हिलकोरे की आवाज सुनकर ठाकुर कौन है – कौन है पुकारते आये।”

जोखू : फिर!

गंगी : तब मैं जगत से कूदकर भागी। 

जोखू : हमें शुद्ध पानी पीने का अवकाश नहीं।

5.

ब्राह्मण देवता आशीर्वाद देंगे, ठाकूर लाठी मारेंगे, साहूजी एक के पाँच लेंगे। गरीबों का दर्द कौन समझता है?’ -जोखू के इस कथन का मतलब क्या है?

Answer»

समाज में गरीब लोग सभी प्रकार के शोषण के शिकार है। चाहे ब्राह्मण हो, ठाकुर हो, साहुकार हो सब गरीबों को लुटा रहे हैं। गरीबों के दुख-दर्द को समझनेवाले कोई नहीं है। कोई सहायता देनेवाले भी नहीं हैं। ये सारी बातें जोखू के कथन से स्पष्ट होती हैं।

6.

गंगी के हाथ से रस्सी छूट गई। रस्सी के साथ घडा धड़ाम से पानी में गिरा और कई क्षण तक पानी में हिलकोरें की आवाजें सुनाई देती रही। ठाकुर ‘कौन है, कौन है?’ पुकारते हुए कुएँ की तरफ आ रहे थे और गंगी जगत से कूदकर भागी जा रही थी। घर पहुँचकर देखा कि जोखू लोटा मुँह से लगाए वही मैला – गंदा पानी पी रहा है।संबंध पहचानें, सही मिलान करें।उसने गला मज़बूत किया ।कि हम ऊँचे हैं, हम ऊँचे।गली-गली चिल्लाते नहीतो उसमें बू बिलकुल न थी।किसीके लिए रोक नहीं |और घड़ा कएँ में डाल दिया।कल वह पानी लाई।सिर्फ यह बदनसीब नहीं भर सकते।

Answer»
उसने गला मज़बूत किया ।और घड़ा कुएँ में डाल दिया।
गली-गली चिल्लाते नहीकि हम ऊँचे हैं, हम ऊँचे।
किसीके लिए रोक नहीं |सिर्फ यह बदनसीब नहीं भर सकते। 
कल वह पानी लाई।तो उसमें बू बिलकुल न थी।

7.

कविता के शिल्प-पक्ष पर लेखक के क्या-क्या निरीक्षण है?

Answer»

लेखक कहते हैं कि इस कविता में शिल्प की बारीक कारीगरी हम देख सकते हैं। इसमें ‘जानना’ किसी लोकगीत की स्थाई की तरह बार-बार आता है। इस कविता में गीतात्मकता बोध बहुत मिलता है।

8.

जैसे-तैसे पूजा-पाठ के बाद कार्ड हाथ में आया तो गुठली का मूंह उतर गया। वह ताऊजी के पास जाकर बोली, देखिए भइया मेरा नाम कार्ड में छपवाना भूल गया? ताऊजी बोले, “भूला नहीं है रे… अपने घर की छोरियों के नाम कार्ड पर नहीं छपते।” गुठली, “पर उनमें भइया के छोटे-से बेटे का भी नाम है जो अभी बोल भी नहीं सकता तो मेरा.यहाँ ‘मुँह उतर गया’ – का मतलब क्या हैं? (उदास हो गई, खुश हो गई, नाराज़ होई)

Answer»

उदास हो गई ।

9.

वे एक-दूसरे के बहुत नज़दीक रहकर, बल्कि कहना चाहिए बिलकुल सटकर बीरबहूटियाँ खोजते थे। उन्हें देखने केलिए वे बारिश की गंध भरी भूरी ज़मीन पर बैठ जाया करते थे। “बेला, देखो इस बीरबहूटी का रंग तुम्हारे रिबन के जैसा लाल हैं।” साहिल ने कहा। “तुमने कुछ सुना बेला?”“हाँ, सुना। पहली घंटी लग गई हैं।” “लेकिन मुझे पैन में स्याही भी भरवानी है, दुकान से।”सही क्रिया रूप चुनकर वाक्य की पूर्ति करके लिखें। साहिल पैन में स्याहि …….।क) भरवाएंगे। ख) भरवाएगा। ग) भरवाएगी। घ) भरवाएँगा।

Answer»

साहिल पैन में स्याही भरवाएगा।

10.

वे एक-दूसरे के बहुत नज़दीक रहकर, बल्कि कहना चाहिए बिलकुल सटकर बीरबहूटियाँ खोजते थे। उन्हें देखने केलिए वे बारिश की गंध भरी भूरी ज़मीन पर बैठ जाया करते थे। “बेला, देखो इस बीरबहूटी का रंग तुम्हारे रिबन के जैसा लाल हैं।” साहिल ने कहा। “तुमने कुछ सुना बेला?”“हाँ, सुना। पहली घंटी लग गई हैं।” “लेकिन मुझे पैन में स्याही भी भरवानी है, दुकान से।”साहिल और बेला बडे दोस्त हैं। इसकी सूचना देनेवाला एक वाक्य इस अंश से चुनकर लिखें।

Answer»

“बेला, देखो इस बीरबहूटी का रंग तुम्हारे रिबन के जैसा लाल हैं।”

11.

‘गणित का माटसाब सुरेंदर जी का पीरियड खेल घंटी के बाद आता था। बच्चे उनसे काँपते थे।’ -बच्चों के डर का कारण क्या है?

Answer»

खेल घंटी के बाद के पीरियड में सुरेंदर जी कॉपी जाँचते थे। ज़रा-सी गलती पर बच्चों को इधर उधर फेंक देते थे या झापड़ मारते थे।

12.

जानना’ शब्द की लेखक की व्याख्या से आप कहाँ तक सहमत हैं?

Answer»

लेखक का कहना सही है। अकसर हम दूसरों को उनके नाम, पता, उम्र, ओहदे, जाति आदि के द्वारा जानते हैं। लेकिन असल में किसी को जानना है तो उसके जीवन के असलियत को जानना है। उसका दुख, निराशा, असहायता और कठिनाइयों को जाने बिना ‘जानना’ कभी पूरा नहीं होता।

13.

अभिमन्यु किसका प्रतीक है?

Answer»

अधर्म का विरोधी।

14.

“वहाँ उसके और ममी के बीच में बहुत सारी चीजें आ जाती हैं। वह बंटी की अपनी दुनिया थी।…..” इस हालत में बंटी की चिंताएँ क्याक्या हो सकती हैं? लिखें।

Answer»

बंटी की चिंताएँ माँ मुझे यहाँ क्यों ले आती हैं? यह जगह मुझे बिलकुल अपरिचित है। यहाँ मेरा दम घुटता है। माँ तो यहाँ आकर माँ नहीं रह जाती हैं। उसका प्रिंसिपलवाला यह चेहरा मुझे बिलकुल पसंद नहीं आता। यहाँ माँ व्यस्त हीव्यस्त हैं। अपने लिए कुछ समय निकाल नहीं पातीं।तीं मैं अपनी माँ को चाहता हूँ। किसी प्रिंसिपल को नहीं।

15.

चक्की रही उदास और चूल्हा रोया’ -से कवि का क्या तात्पर्य है?

Answer» इससे कवि यह बताना चाहते हैं कि घर में खाद्य वस्तुओं का बिलकुल अभाव है। कई दिनों इन दोनों का कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है।
16.

अभिमन्यु को क्यों दुस्साहसी कहा गया है?

Answer»

अभिमन्यु समस्या को अच्छी तरह न समझकर साहसी बन जाता है।

17.

बादल को देखकर घड़े को नहीं ढुलाना चाहिए।’ दुकानदार ने ऐसा क्यों कहा?

Answer»

साहिल ने स्याही भरवाने का निश्चय किया। तो उसने कलम की बची हुई स्याही ज़मीन पर छिड़क दी। दुकान पहुँचने पर वहाँ स्याही नहीं थी। तब दुकानदार ने ऐसा कहा। कहने का मतलब है- किसी बात पर केवल अंदाज़ा लेकर काम करना ठीक नहीं है। असलियत को पहले पहचानना चाहिए।

18.

कानी कुतिया कहाँ सोई हुई थी? क्यों?

Answer»

कांनी कुतिया उदास रही चक्की के पास सोई हुई थी। क्योंकि क्यों उसे कहीं भी खाने को कुछ मिलने की संभावना नहीं थी।

19.

यहाँ मैं का प्रयोग किस केलिए किया गया है?

Answer»

उपेक्षित मानव या लघुमानव

20.

लघुमानव का दुस्साहस क्या हो सकता है?

Answer»

लघुमानव भविष्य के बारे में न समझकर अधर्म का विरोध करते हैं।

21.

जब वह उसके पास आकर बैठी उससे नज़र नहीं मिला पाई।’ क्यों?

Answer»

बेला साहिल को बहुत प्यार करती थी। उसके सामने वह लज्जित होना नहीं चाहती थी। लेकिन माटसाब का व्यवहार साहिल की उपस्थिति में था। इससे उसे बहुत दुख हुआ। इसलिए बेला साहिल से नज़र नहीं मिला पाई।

22.

इन बच्चों को अपने चारों ओर खेलते देखकर गांधीजी की मूर्ति ऐसी दिखाई पड़ती जैसे और समय से कुछ अधिक मुस्करा रही हो।” इसका मतलब क्या है?

Answer»

बच्चे हमेशा बच्चे ही हैं। उन्हें हमेशा खुश रहना चाहिए। उनकी खुशी देखनेवालों को भी खुश रखती है। यहाँ गांधीजी की मूर्ति तक बच्चों की खुशी देखकर मुस्करा रही है।

23.

यह बारिश से पहले की बारिश का एक दिन था। कहानी के प्रसंग में यह कैसे सार्थक होता है?

Answer»

यहाँ बारिश एक प्रतीक है। उसी प्रकार बादल भी। बेला और साहिल का दुख बादल के समान छाया हुआ है। साहिल की आँखों से पानी बरस रहा है। यहाँ कथाकार ने प्रकृति की रोनी सूरत और बच्चों की रोनी सूरत दोनों को दर्शाया है।

24.

कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद’ – कविता के संदर्भ में पंक्ति का विश्लेषण करें।

Answer»

कवि अकाल के बाद की स्थिति को सामने लाते हैं। अकाल की भयावह स्थिति से बेचारा कौआ भी हतबुद्धि था। लेकिन झूठझू -मूठ की आशा जगते ही वह प्रबुद्ध होकर पंख खुजलाने लगा। कविता का दूसरा अंश, निम्नवर्गीय समाज की जिजीविषा और उसकी संघर्षशील प्रवृत्ति को सामने लाता है। यह बड़ी बात है कि भारतीय समाज का यह हिस्सा अत्यंत धैर्य से भरा है। वह अकाल में बेघर होता है, न जाने किन-किन कैंप-खंडहरों में शरण लेता है, फिर अपने नीड़ में लौटता है और फिर से उसका चूल्हा जलता है। यह कविता भारतीय समाज में परिवार के उस गठन को भी सामने लाती है जिसमें मनुष्य के साथ ही पशु-पक्षियों का भी बसेरा होता है।

25.

कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त ये पंक्तियाँ किस हालत की ओर इशारा करती हैं?

Answer»

घर में कई दिनों से खाने की चीजें नहीं हैं। जहाँ खाना नहीं होगा वहाँ दीप जलाने के लिए तेल की भी संभावना नहीं।हीं तो वहाँ छोटे कीड़ों का होना असंभव है। इससे छिपकली परेशान है। इसलिए वे कीड़ों को तलाशते हुए दीवार पर घूम रहे हैं। घर में कोई खाद्य वस्तु नहीं है। इससे चूहे भी हार गए हैं।

26.

चर्चा करें कविता में कई दिनों तक और कई दिनों के बाद दूहराने का तात्पर्य क्या हो सकता ह

Answer»

आचार्य नागार्जुन की कविता है ‘अकाल और उसके बाद।’ कविता की पहली चार पंक्तियों में कई दिनों तक’ की पुनरावृत्ति अभाव की निरंतरता को अंकित करती है। कविता में दूसरे खंड की चार पंक्तियों में कई दिनों के बाद ‘तक’ और ‘बाद’ के बीच एक लंबे अंतराल को व्यंजित करती ह

27.

टूटा पहिया’ कविता पर टिप्पणी लिखें।

Answer»

लघु न दीजिए डाल…

डॉ. धर्मवीर भारती हिंदी की प्रयोगवादी काव्य धारा के नए कवियों में अग्रणी थे। ‘टूटा पहिया’ भारती जी की एक छोटी कविता है। यह रचना भारती जी के ‘सात गीत वर्ष’ से चुनी गई है। टूटा पहिया लघु और उपेक्षित मानव का प्रतीक है, जिसे बेकार समझकर फेंक दिया गया है। नया कवि उसकी संभावनाओं को पहचानता है और उसकी क्षमताओं का मूल्यांकन करता है।

इसमें ‘मैं’ सर्वनाम का प्रयोग है। टूटा पहिया कहता है कि मैं टूटा हुआ हूँ। लेकिन मुझे मत फेंको। कौन जाने कि इस दुरूह चक्रव्यूह में अभिमन्यु जैसे कोई साहसी वी घिर जाए और बड़ेबड़े महारथी उस साहसी वीर की निहत्थी आवाज़ को कुचल देना चाहे।

जब सारा संसार उस साहसी मनुष्य की अकेली आवाज़ को दबाना चाहेगा, तब मैं रथ का टूटा हुआ पहिया उसके हाथों में लगकर शत्रुओं के ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ। मुझे टूटा हुआ मानकर फेंको मत। क्योंकिक्यों इतिहास की सामूहिक गति जब झूठी झू पड़ जाएगी तो शायद टूटा पहिया ही अकेले का आश्रय बनेगा।

टूटा पहिया’ एक प्रतीकात्मक रचना है। इस प्रतीक को कवि ने महाभारत के कथानक से लिया है। अभिमन्यु अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में अकेले ही प्रवेश किया। कौरवसेना के महारथियों ने उसे घेर कर उसके सब शस्त्रास्त्र नष्ट कर डाले। उसने रथ के टूटे पहिए को अस्त्र बनाकर शत्रुओं का सामना किया। कवि ने इसी घटना के आधार पर यह प्रतीकर ग्रहण किया है।

समाज जब न्याय और सत्य के रास्ते से हटकर असत्य के मार्ग पर बढ़ना चाहेगा, तब उसका विरोध करनेवाला व्यक्ति अभिमन्यु के समान अपने को चक्रव्यूह में घिरा पाएगा। उस समय उसके लिए लघु और निस्सार समझे जानेवाला कोई आदमी सहायक बनेगा। टूटा पहिया जैसा लघु मानव की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, यही इस कविता का संदेश है।

28.

वर्तमान प्रसंग में महारथी किसका प्रतीक हो सकता है?

Answer»

असत्य या अधर्म का प्रतीक है।

29.

ये प्रसंग देखें i. गंगी क्या जवाब देती, किंतु वह बदबूदार पानी पीने को न दिया।ii. उसने घटा और रस्सी उठा ली और झुककर चलती हुई एक वृक्ष के अंधेरे छाए में जा खड़ी हुई।iii. ठाकुर ‘कौन है, कौन है?’ पुकारते हुए कुएँ की तरफ़ आ रहे थे और गंगी जगत से कूदकर भागी जा रही थी।’iv. इन व्यवहारों से गंगी के कौन-कौन से मनोभाव प्रकट होते हैं?

Answer»
व्यवहारव्यवहार
1. गंगी क्या जवाब देती, किंतु वह बदबूदारपानी पीने को न दिया।1. विवशता में भी पति के स्वास्थ्य को सहीरखने का मनोभाव
2. उसने घटा और रस्सी उठा ली और झुककर चलती हुई एक वृक्ष के अंधेरे छाए में जा खड़ी हुई।2. सामाजिक पाबंदियों को तोडकर पति की ज़रूरत को निभाने का मनोभाव।
3. ठाकुर ‘कौन है, कौन है?’ पुकारते हुए कुएँ की तरफ़ आ रहे थे और गंगी जगत से कूदकर भागी जा रही थी।’3. मन में सामाजिक कुरीतियों के प्रति विद्रोह होने पर भी परिस्थितियों में असहाय होने की भावना।
30.

इतिहासों की सामूहिक गति सहसा झूठी झू पड़ जाने पर क्या जाने सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले! -इन पंक्तियों से कवि क्या बताना चाहते हैं?

Answer»

कवि कहते हैं कि पहिया यदि टूटा है तो भी उसे मत फेंको। यह संसार एक दुरूह चक्रव्यूह है। बड़े-बड़े महारथी असत्यों और अन्यायों की अक्षौहिणी सेनाओं को खड़ा करेंगे। उन महारथियों के कारण इतिहास की गति सहसा झूठी झू पड़ जाती है तो सच्चाई को टूटे पहिए का सहारा लेना पड़ेगा। इसलिए टूटे पहिए की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

31.

बेला का मन बहुत खराब हो गया, माटसाब चाहे मुझे पीट लेते मगर साहिल के सामने नहीं।हीं वह साहिल के सामने खुद को शर्मिदा महसूस कर रही थी क्योंकिक्यों वह जानती थी कि वह साहिल की नज़र में बहुत अच्छी है। जब वह उसके पास आकर बैठी उससे नज़र नहीं मिला पाई।बेला साहिल से नज़र नहीं मिला पाई। क्यों?

Answer»

बेला साहिल के सामने खुद को शर्मिदा महसूस कर रही थी, क्यों कि वह साहिल की नज़र में बहुत अच्छी हैं।

32.

गंगी के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।

Answer»

गंगी : रिवाज़ी पाबंदियों पर विद्रोह की आवाज

गंगी प्रेमचंद की की विख्यात कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’ की पात्र है। वह एक साधारण गृहिणी है। गरीब परिवार की सदस्या है। जाति से निम्न वर्ग की है। वह कई प्रकार की सामाजिक कुरीतियों की शिकार है। पति बीमार है। वह पानी के लिए तरसता है। लेकिन पीने के लिए केवल बदबूदार पानी है। यह पानी पिलाने को गंगी तैयार नहीं है। वह सारी पाबंदियों को तोड़कर, ठाकुर के कुएँ से पानी भर लाने का साहस करती है। रात के अंधेरे में वह पानी लेने जाती है। उसकी चिंताएँ उसके मन के विद्रोह को व्यक्त करी हैं। अंत में वह कुएँ के जगत तक आ जाती है। उस समय उसका मन एक विजेता जैसा अनुभव करता है। लेकिन परिस्थितियाँ उलटती हैं, ठाकुर जग जाते हैं और गंगी को विवश भागना पड़ता है। गंगी एक ही समय परिस्थितियों से विवश औरत, विद्रोह मन रखनेवाली नारी एवं षांत के प्रति प्यार रखनेवाली गृहिणी आदि का प्रतिनिधित्व करती है।

33.

पैन में कुछ स्याही बची थी, उसे साहिल ने ज़मीन पर छिडक दिया। नई स्याही भरवाने केलिए दोनों दुकान पर पहूँचे।एक पैन स्याही भर दो।” साहिल से पहले ही बेलाने दुकानवाले से कहा।“बेटा स्याही की बोतल अभी – अभी खाली हो गई है। अब तो कल ही मिल पाएगी।”“लेकिन इसने तो पैन में जो स्याही थी उसे भी ज़मीन पर छिड़क दिया।” बेला बोली।“बादल को देखकर घड़े को नहीं ढुलाना चाहिए।” दुकानवाले भैया ने कहा और पूछा “कौन-सी में पढते हो?”“पाँचवीं में।” साहिल ने ऐसे बूरे मन से बताया जैसे पाँचवीं पढ़ना पाप हो।“दोनों?” नों दकानवाले भैया ने कहा।“हाँ दोनों, नों और हम दोनों का सैक्शन भी एक ही है – ए। बेला ने ऐसे खुश होकर बताया जैसे यह कोई बहुत बड़ी बात हो।साहिल और बेला कहाँ गए हैं? क्यों?

Answer»

साहिल और बेला दुकान पर गए। पैन में स्याही भरने केलिए।

34.

चरित्र पर टिप्पणी लिखें।बूढ़े मल्लाह ने एक गज़ल छेड़ दी। उसका गला काफ़ी अच्छा था और सुनाने का अंदाज़ | भी शायराना था। काफ़ी देर चप्पुओं को छोड़े वह झूमझू -झूमकर झू गज़लें सुनाता रहा।दिशाहीन दिशाट के अब्दुल जब्बार का व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली है। ये संकेत पढ़ें और अब्दुल जब्बार के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।1. गरीब 2. परिश्रमी .3. खुशमिज़ाज . 4. सादा जीवन बितानेवाला 5. विनयशील . 6. गज़ल गायक

Answer»

गज़ल गायक – अब्दुलजब्बार

मोहनराकेश का यात्राविवरण ‘दिशाहीन दिशा’ के एक प्रभावशाली व्यक्ति है बूढ़ा मल्लाह श्री अब्दुल जब्बार । भोपाल-ताल की सैर में लेखक और मित्र का उनका परिचय होता है। हमेशा खुशमिज़ाज दिखाई पडनेवाला और सादा जीवन बितानेवाला था। दाढ़ी के ही नहीं छाति के भी बाल सफेद हो चुके थे। सर्दी के मौसम में भि सिर्फ तहमद लगाए आया था। भोपाल-ताल का नाविक अब्दुलजब्बार रात -दिन मेहनत करता रहता है। जब वह चप्पू चलाने लगता तो उसकी मांसपेशियाँ इस तरह हिलती जैसे उनमें फौलाद भरा हो । जब अविनाश गाने का आग्रह प्रकट किया तो बिना हिचक के तीन गज़ले छेड देता है। उसका गला काफ़ी अच्छा था। गज़लों से वह इतना परिचित था कि सुनाने का अंदाज़ भी शायराना था। कभी कभी नाव खोते समय चप्पुओं को छाड़े झूमझू - झूमकर झू गज़लें सुनाता था। असल में जब उसने गज़ले समाप्त की, वातावरण ही बदल गया था। अविनाश के अनुसार गालिब की चीज़ पेश करने को कहता है, तुरंत ही बिना एतराज के विनय के साथ गज़लें गाने लगा। मोटे तौर पर वह खुशमिज़ाज, विनयशील गरीब गज़लगायक अब्दुल जब्बार लेखक और मित्र के लिए उस रात अविस्मरणीय पात्र रहा।

35.

साहिल बेला का रिपोर्ट कार्ड देख रहा था और बेला साहिल का। आज आखिरी बारी वे एक दुसरे की कोई चीज़ को छूकर देख रहे थे। “तुम्हारी आँख में आँसु क्यों आ रहे हैं बेला?” “मुझे क्या पता।” बेला ने डबडबाई आँखों से हँसते हुए कहा। साहिल की आँखें बीरबहूटी की तरह लाल होने लगी थीं और उनमें बारिश की बूंदों-दों सा पानी भर गया था।‘मुझे’ में निहित सर्वनाम कौन-सा हैं? (तुम, वे, मैं)

Answer»

‘मुझे’ में निहित सर्वनाम मैं हैं।

36.

साहिल बेला का रिपोर्ट कार्ड देख रहा था और बेला साहिल का। आज आखिरी बारी वे एक दुसरे की कोई चीज़ को छूकर देख रहे थे। “तुम्हारी आँख में आँसु क्यों आ रहे हैं बेला?” “मुझे क्या पता।” बेला ने डबडबाई आँखों से हँसते हुए कहा। साहिल की आँखें बीरबहूटी की तरह लाल होने लगी थीं और उनमें बारिश की बूंदों-दों सा पानी भर गया था।बेला से बिछुड़ने के कारण साहिल बहुत दुखी है। साहिल अपने विचारों को डायरी में लिखता हैं। साहिल की उस दिन की डायरी लिखें।

Answer»

15.6.2017, गुरुवार

आज पाँचवीं के रिज़ल्ट का दिन था। मैं और बेला हम दोनों पास हो गए। लेकिन मन उदास है। कल से बेला से मिन न पाऊँगा। अगले साल बेला राजकीय कन्या पाठशाला में पढेगी। घरवाले मुझे अजमेर भेज देंगे। घर से दूर, होस्टल में अकेला रहना पडेगा।

आज तक बहुत खुशी के साथ बीता। मैं बेला के साथ बारिश में बीरबहूटियों को खोजकर कितने दिन बिताए। कल से मैं किस के साथ लंगड़े का खेल खेलूँ? बेला को भी बहुत दुख होगा। क्या वह मुझे याद करेगी? मेरा रिपोर्ट कार्ड देखते समय उसकी आँखों में आँसू भर गए। वह अपनी आँखों के आँसू छिपाने की कोशिश की। हम दोनों की दोस्ती उतनी सख्त थी।

37.

बेला का मन बहुत खराब हो गया, माटसाब चाहे मुझे पीट लेते मगर साहिल के सामने नहीं।हीं वह साहिल के सामने खुद को शर्मिदा महसूस कर रही थी क्योंकिक्यों वह जानती थी कि वह साहिल की नज़र में बहुत अच्छी है। जब वह उसके पास आकर बैठी उससे नज़र नहीं मिला पाई।बेला खुद को शर्मिंदा महसूस कर रही थी। क्यों?क्यों क) माटसाब ने बेला के बालों में पंजा फँसाया। ख) साहिल के सामने माटसाब ने बेला के बालों में पंजा फंसाया। ग) बालों में पंजा फँसाने से दर्द हुआ।

Answer»

साहिल के सामने माटसाब ने बेला के बालों में पंजा फँसाया।

38.

बेला का मन बहुत खराब हो गया, माटसाब चाहे मुझे पीट लेते मगर साहिल के सामने नहीं।हीं वह साहिल के सामने खुद को शर्मिदा महसूस कर रही थी क्योंकिक्यों वह जानती थी कि वह साहिल की नज़र में बहुत अच्छी है। जब वह उसके पास आकर बैठी उससे नज़र नहीं मिला पाई।कहानी के अंश के आधार पर सही प्रस्ताव चुनकर लिखें। क) बेला बहुत खुश थी। ख) बेला साहिल से नाराज़ थी। ग) बेला लज्जित थी। घ) बेला को माटसाब का व्यवहार अच्छा लगा।

Answer»

बेला लज्जित थी।

39.

चार्ली ने जनता में गुदगुदी फैला दी थी। उसके बाद उसने दर्शकों से बातचीत की, नृत्य किया और अपनी माँ सहित कई गायकों की नकल उतारी।अनुकरण करना’ के अर्थ में प्रयुक्त प्रयोग चुनकर लिखें। (नकल उतारना, फैला देना, बातचीत करना)

Answer»

नकल  उतारना।

40.

कविता की प्रासंगिकता पर टिप्पणी लिखें।

Answer»

अकाल और उसके बाद

इस छोटी-सी कविता के चार पंक्तियों में अकाल का विवरण है और चार पंक्तियों उसके बाद का दृश्य। इन चार पंक्तियों में भी “कई दिनों तक” हर पंक्ति के शुरू में बार-बार दुहराया जाता है। इसके बाद बहुत थोड़े-से सरल शब्द बजते हैं जिसमें अकाल की कथा कही गई है। इस अकाल कथा की पहली चार पंक्तियों में मनुष्य कहीं नहीं है। बिंबों में चूल्हा-चक्की है, कानी कुतिया है, चूहे हैं और छिपकलियाँ हैं।

अनाज नहीं है तो चूल्हा और चक्की तो उदास और उतरे हुए मुँह के होंगेहों गेही। कुतिया है वह भी कानी। क्योंकिक्यों गरीब घर की है। संपन्न घर के कुत्ते तो झबरे बालों वाले सुंदर कुत्ते होते हैं। रोटी की आस में चक्की के पास पड़े नहीं रहते। छिपकलियाँ भला क्यों भीतर परेशान हाल गश्त लगा रही है? क्योंकिक्यों वे तो दाल-रोटी खाती नहीं हैं, कीड़े खाती हैं। लेकिन जिस घर में भोजन नहीं है वहाँ तेल क्या होगा! लिहाजा रात को घर में दीया भी नहीं जलता होगा और कीड़े तो रात की रोशनी में आते हैं।

दिन की रोशनी में नहीं आते। ऐसे में छिपकलियाँ भी भूख की मारी हैं। चूहे तो कुत्ते की तरह स्वामीभक्त होते नहीं।हीं शिकस्ता हाल चूहे उस घर में कर क्या रहे हैं? चूंकि अकाल पड़ा है, इसलिए गाँव के किसी घर में अन्न नहीं होगा। वरना चूहे वहाँ चले जाते। खेतों में तो अन्न होने का सवाल ही नहीं उठता! वरना हम जानते हैं कि चूहे खेतों से अन्न चुराकर अपने बिलों में घसीट ले जाते हैं।

बाद की चार पंक्तियों में हर पंक्ति का अंत ‘कई दिनों के बाद’ से होता है। जो भी होता है हर पंक्ति में कई दिनों के बाद’ होता है। घर के भीतर दाने आते हैं। घर भर की आँखें चमक उठती हैं। अभी भोजन बना नहीं है। लेकिन अन्न की आहट ने ही आँखों में रोशनी भर दी है। उम्मीद इसी तरह रोशनी लाती है। फिर धुआँ उठता है छप्पर के ऊपर ! यानि चूल्हा जल गया है। यह धुआँ शुभ संकेत दे रहा है।

और कौए अब अपने पंख खुजला रहे हैं। क्योंकिक्यों इन पंखों से वे बहुत तेज़ी से उठते हैं और किसी भी थाली में झपट्टा मारके अपने हिस्से की रोटी ले उठते हैं। . धुआँ देखकर वे भी उम्मीद से भर उठते हैं। कुत्ते, चूहे, छिपकलियाँ और कौए भी सामाजिक प्राणी हैं। वे बस्तियों में, घर में मनुष्यों के साथ ही रहना चाहते हैं। उजाड़ में नहीं।

41.

पैन में कुछ स्याही बची थी, उसे साहिल ने ज़मीन पर छिडक दिया। नई स्याही भरवाने केलिए दोनों दुकान पर पहूँचे।एक पैन स्याही भर दो।” साहिल से पहले ही बेलाने दुकानवाले से कहा।“बेटा स्याही की बोतल अभी – अभी खाली हो गई है। अब तो कल ही मिल पाएगी।”“लेकिन इसने तो पैन में जो स्याही थी उसे भी ज़मीन पर छिड़क दिया।” बेला बोली।“बादल को देखकर घड़े को नहीं ढुलाना चाहिए।” दुकानवाले भैया ने कहा और पूछा “कौन-सी में पढते हो?”“पाँचवीं में।” साहिल ने ऐसे बूरे मन से बताया जैसे पाँचवीं पढ़ना पाप हो।“दोनों?” नों दकानवाले भैया ने कहा।“हाँ दोनों, नों और हम दोनों का सैक्शन भी एक ही है – ए। बेला ने ऐसे खुश होकर बताया जैसे यह कोई बहुत बड़ी बात हो।इसके पात्र कौन – कौन हैं?

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साहिल, बेला और दुकानदार ।

42.

इस में किनकी दोस्ती के बारे में कहा गया है?

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साहिल और बेला की।

43.

बीरबहूटी किसकी कहानी है?

Answer»

बीरबहूटी प्रभात की कहानी है?

44.

अपनी किसी दोस्ती की याद पर टिप्पणी लिखें।

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जब मैं प्राथमिक पाठशाला में पढ़ता था तब मेरा एक दोस्त था। नाम था उसका संजू। संजू बहुत अच्छा लड़का था। उसका घर गाँव के दूसरी तरफ़ था। स्कूल आते समय सड़क पर हम मिलते थे। फिर हम साथ -साथ स्कूल चलते थे। कक्षा में साथ-साथ ही बैठते थे। और खाना भी बँटकर खाते थे। उसकी माँ से बनी खाना मुझे बहुत अच्छा लगता था। वह पढ़ाई में मेरी मदद करता था। चौथी तक हम एक साथ रहे। पाँचवीं में आने पर वह दूसरा स्कूल चला गया। अब मैं उसे मिल नहीं पा रहा है। प्राथमिक पाठशाला की हमारी वह दोस्ती मेरे मन में अब भी ताज़ा है।

45.

कहानी की घटनाओं को सूचीबद्ध करें।i. गीली ज़मीन पर बेला और साहिल का बीरबहूटियों को खोजना।ii. पैन में स्याही भरना।iii.iv.

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i. गीली ज़मीन पर बेला और साहिल का बीरबहूटियों को खोजना।

ii. पैन में स्याही भरना।

iii. सुरेंद्रजी माटसाब बेला के बालों पर पंजा फँसाना।

v. दीपावली के छुट्टी के बाद बेला के सिर पर सफ़ेद पट्टी बाँधे देखना।

v. साहिल की पिंडली में कील का चुभना। 

vi.पाँचवीं का रिज़ल्ट आना।

46.

दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद इन पंक्तियों से कवि क्या कहना चाहता है?

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अकाल के बाद के दिनों का चित्रण कवि ने इन पंक्तियों द्वारा किया है। अकाल के बाद घर में दाने आने पर घर के आँगन से ऊपर धुआँ उठता है। मतलब चूल्हा जलने लगा है। यह घर में खाने पकाने की ओर इशारा करता है।

47.

प्रत्येक की तुलना किसके साथ की गई है? लिखें।  i. साहिल की लाल आँखों की तुलना बीरबहूटी से की गई है।  ii. …………  iii. …………  iv. ………

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i. साहिल की लाल आँखों की तुलना बीरबहूटी से की गई है।

ii. चलती बीरबहूटियों की तुलना खून की प्यारी बूंदों से की गई है।

iii. साहिल के आँसुओं की तुलना बारिश की बूंदों से की गई है।

v. साहिल की चोट के रंग की तुलना बीरबहूटी के रंग से की गई है।

48.

घटनाओं के आधार पर पटकथा तैयार करें।

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बीरबहूटी:

कस्बे से स्कूल जानेवाले रास्ते के बगल का खेत। सबेरे के नौ बज गए हैं।

(खेतों से भरा इलाका। दूर-दूर तक खेत दिख रहे हैं। लगभग 10-11 साल के दो बच्चे- बेला और साहिल खेत की मिट्टी में कुछ खोज रहे हैं। उनके पीठ पर बस्ता है। 

वेश से लगता है दोनों स्कूल जा रहे हैं।

साहिल : बेला, देखो इस बीरबहूटी का रंग तुम्हारे रिबन जैसा लाल है।

बेला : दिखाओ तो। हाँ ठीक है। (स्कूल से घंटी बजने की आवाज़ आती है)

साहिल : (घबराकर) तुमने कुछ सुना बेला? ।

बेला : हाँ, सुना। पहली घंटी लग गई है। चलो देर हो जाएगी।

साहिल : लेकिन मुझे पेन में स्याही भरवानी, दुकान से।

बेला : तो चलो जल्दी। (खेत की ज़मीन से उठकर दोनों बच्चे स्कूल के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं।)

गाँव की स्टेशनरी की दुकान। सबेरे के दस बज गए हैं। (बेला और साहिल दुकान के सामने खड़े हैं। दुकानदार उनसे कुछ बात कर रहे है।)

दुकानदार : क्या चाहिए?

साहिल : (कलम दिखाकर) इसमें स्याही भर दीजिए।

दुकानदार : (खेद से) अब क्या करूँ। स्याही खतम है। कल ही मिलेगी।

बेला : लेकिन इसने तो पैन में जो स्याही थी उसे ज़मीन पर छिड़क दिया।

दुकानदार : (हँसते हुए) बादल को देखकर घड़े को नहीं ढुलाना चाहिए।

बेला : (घबराकर) अब क्या करेंगे?

साहिल : चलो, कुछ करेंगे। किसी से उधार लेंगे। (दोनों बच्चे स्कूल के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं।)

49.

पैन में कुछ स्याही बची थी, उसे साहिल ने ज़मीन पर छिडक दिया। नई स्याही भरवाने केलिए दोनों दुकान पर पहूँचे।एक पैन स्याही भर दो।” साहिल से पहले ही बेलाने दुकानवाले से कहा।“बेटा स्याही की बोतल अभी – अभी खाली हो गई है। अब तो कल ही मिल पाएगी।”“लेकिन इसने तो पैन में जो स्याही थी उसे भी ज़मीन पर छिड़क दिया।” बेला बोली।“बादल को देखकर घड़े को नहीं ढुलाना चाहिए।” दुकानवाले भैया ने कहा और पूछा “कौन-सी में पढते हो?”“पाँचवीं में।” साहिल ने ऐसे बूरे मन से बताया जैसे पाँचवीं पढ़ना पाप हो।“दोनों?” नों दकानवाले भैया ने कहा।“हाँ दोनों, नों और हम दोनों का सैक्शन भी एक ही है – ए। बेला ने ऐसे खुश होकर बताया जैसे यह कोई बहुत बड़ी बात हो।वाक्य – पिरामिड की पूर्ति करें।

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दोनों दूकान पहूँचे। 

नई स्याही भरने दोनों दूकान पहूँचे।

50.

पाँच साल का चार्ली स्टेज पर अकेला था- उस समय चार्ली ने क्या सोचा होगा?

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चार्ली ने सोचा होगा कि माँ ने क्यों गाना बंद किया? माँ ने क्यों मुझे यहाँ अकेला छोड़ दिया है। इतने अधिक लोगों के सामने क्या करूँ। माँ ने गाने को कहा है, इसलिए मैं गाऊँगा।