This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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घृणा की भावना को रोकना जरूरी क्यों है? |
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Answer» घृणा की भावना को रोकना जरूरी है। घृणा जीवन की समस्त श्रेष्ठ बातों तथा गुणों को नष्ट कर देती है। वह उन्नत जीवन की शत्रु है। घृणा उसको ही हानि पहुँचाती है, जिसके मन में वह उत्पन्न होती है, घृणा करने वाला ही घृणा का शिकार होता है, जिसकी मन में घृणा की भावना का जन्म होता है, उसकी मन की सुख-शान्ति नष्ट हो जाती है तथा दूसरों के प्रति प्रेम, सहानुभूति आदि के भाव उसके मन में पैदा ही नहीं होते। इस तरह, वह मानवता के उच्च स्थान से नीचे गिर जाता है। |
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लेखक के मित्र श्री सिंहल अपनी गाड़ी क्यों बेचना चाहते थे?(क) कर्जा चुकाने के लिए।(ख) मौज-शौक के लिए।(ग) पैसे कमाने के लिए(घ) नया व्यापार आरंभ करने के लिए |
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Answer» (घ) नया व्यापार आरंभ करने के लिए |
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लेखक के लिए कौशल जी की अपराजित वृत्ति का रहस्य क्या था? |
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Answer» कौशल जी की अपराजित वृत्ति का रहस्य यह था कि वह कभी निराश नहीं होते थे तथा नई ऊर्जा के साथ नया काम शुरू कर देते थे। |
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कौशल जी की सफलता का रहस्य क्या है? |
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Answer» कौशल जी कभी निराश नहीं होते थे। एक काम में असफल होने पर वह उत्साहपूर्वक दूसरा काम आरम्भ कर देते थे। उनकी सफलता का रहस्य उनके मन की अपराजित वृत्ति थी । वह कठिनाइयों और असफलता से विचलित होकर निराश नहीं होते थे। इससे उनके मन में एक प्रकार की नई ऊर्जा उत्पन्न होती थी। |
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| 5. |
लेखक की दृष्टि में कौशल जी अद्भुत क्यों थे? |
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Answer» लेखक की दृष्टि में कौशल जी अद्भुत थे, क्योंकि अपने जीवन में अनेक बार असफल होने के बाद भी वह निराश नहीं हुए थे। |
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घृणा किसकी दुश्मन है? |
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Answer» घृणा जीवन की सम्पूर्ण ऊँचाइयों की दुश्मन है। |
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हर नए प्रारम्भ के साथ हमें क्या प्राप्त होता है? |
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Answer» हर नए प्रारम्भ के साथ हमें ताजगी, तेजी तथा स्फुरण प्राप्त होता है। |
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कौशल जी कौन थे? उनका क्या रहस्य था, जो लेखक की समझ में नहीं आता था? |
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Answer» कौशल जी लेखक के एक मित्र थे। उन्होंने अपने जीवन में एक के बाद एक बहुत से काम किए। कुछ वह कोई काम शुरू करते, कुछ दिन उसमें सफलता भी मिलती। असफल होने पर उसको छोड़कर कोई नया काम शुरू कर देते। लेखक ने उनको निराश नहीं देखा। उनमें काम करने की जो अटूट क्षमता थी, उसका रहस्य लेखक की समझ से बाहर था। |
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लेखक किनके व्यक्तित्व का रहस्य न समझ पाता? |
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Answer» लेखक कौशल जी के व्यक्तित्व का रहस्य न समझ पाता। |
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लेखक के मित्र अपनी गाड़ियाँ कितने में बेचने को राजी हो गए? |
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Answer» लेखक के मित्र अपनी गाड़ियाँ छः-छ: हजार रुपये में बेचने को राजी हो गए। |
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“अब आई तुम्हारी समझ में मेरी बात?” लेखक ने अपने मित्र को क्या बात समझाई? |
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Answer» लेखक ने कहा कि हम दूसरों के बारे में तो सोचते हैं, परन्तु अपने बारे में नहीं सोचते, जो पहले सोचे-विचारे फिर कोई काम करें, तो उसको मनुष्य कहते हैं। सोच-समझकर चलने और करने वाला मनुष्य कहलाता है, जो बिना सोचे-विचारे हवा के साथ बह जाय, उसको पशु कहते हैं। बिना सोचे दूसरों की देखा-देखी काम करने वाला पशु कहलाता है। अन्त में, लेखक ने उससे पूछा-अब आई तुम्हारी समझ में मेरी बात? |
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मुन्नी को कौन-सी बात समझ में नहीं आई ? |
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Answer» मुन्नी की मां संकीर्ण दृष्टि की महिला है। वह बंगाली, साउथ इंडियन, मराठी आदि बच्चों को अपना नहीं मानती। वह मुन्नी को उनके साथ खेलने से मना करती है। ये सब बच्चे मुन्नी के मित्र हैं। इन सब बच्चों में अपनेपन की गहरी भावना है। इसलिए मुन्नी को माँ की बात समझ में नहीं आती। |
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मुन्नी के पिता किसे चमत्कार मानते हैं ? |
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Answer» मुन्नी के माता-पिता ने नन्हे पौधे को उखाड़ने के लिए पूरी ताकत लगा दी, पर पौधा अपनी जगह से टस-से-मस नहीं हुआ। पर मुन्नी जब पौधे को उखाड़कर अपने हाथों में ले लेती है, तो मुन्नी के पिता इसे चमत्कार मानते हैं। |
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एकाकी के पात्र राष्ट्रीय एकता के प्रतीक कैसे बन गए हैं ? |
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Answer» अहमद, गोखले, सुब्बाराव, चौधरी तथा मुन्ना, मुन्नी अलगअलग भाषाएँ बोलनेवाले बच्चे हैं। वे सब मिलकर खेलते हैं। मुन्नी और मुन्ना की मी जब उनसे कहती है कि गोखले मराठी है, सुब्बाराव साउथ इंडियन है और चौधरी बंगाली है और ये अपने नहीं हैं, तो उसके बच्चे उसकी बात नकार देते हैं। सभी बच्चे सामूहिक उद्देश्य के प्रति समर्पित हैं। यह सब राष्ट्रीय एकता का ही प्रतीक है। |
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| 15. |
पौधा किन्होंने लगाया था? |
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Answer» पौधा मुन्ना, मुन्नी, अब्दुल, अहमद, मोनी चौधरी, गोखले और सुब्बाराव ने लगाया था। |
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मोनी चौधरी ने पौधे के बारे में क्या बताया? |
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Answer» मोनी चौधरी ने पौधे के बारे में बताया कि जब वे गाछखेल खेल रहे थे तब वह पौधा जमीन से अपने आप निकल आया था। |
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बच्चों द्वारा गाये गये गीत का भावार्थ लिखिए। |
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Answer» बच्चों के गीत का पौधा हमारी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। वर्षों बाद राष्ट्र को एक सूत्र में जुड़ा देखने का हमारा सपना साकार हुआ है। यह ऐसी डोर है जिससे बंधा रहने में हमें प्रसन्नता होती है। राष्ट्र की एकता हमारे जन-गण का गौरव है। इसी से राष्ट्रप्रेम की चेतना का विकास होता है। |
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पौधा किसका प्रतीक है ? |
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Answer» पौधा हमारी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। |
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कबीर के अनुसार ज्ञान का क्या महत्व है? |
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Answer» कबीरदास ज्ञान का महत्व प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि साधु की कभी जाति नहीं पूछनी चाहिए। यदि पूछना ही है, तो उसके ज्ञान के बारे में चर्चा कर सकते हैं। हमें खरीदनी है तलवार, तो तलवार का मूल्य जानना है, नाकि तलवार को रखने के म्यान का। अतः ज्ञान को महत्व देना चाहिए। |
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जहाँ दया है, वहाँ क्या है? |
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Answer» जहाँ दया है, वहाँ धर्म है। |
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पौधा कब निकल आया ? |
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Answer» पुरुष ने चौधरी नाम के लड़के से पूछा था कि उसके अहाते में पौधा किसने लगाया है, तो लड़के ने जवाब दिया कि वह और उसके दोस्त जब गाछखेल खेल रहे थे, उस समय यह पौधा जमीन से अपने आप निकल आया। |
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सब बच्चे क्या देखकर हँसने लगे ? |
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Answer» पुरुष ने पौधे को जमीन से उखाड़ने की बहुत कोशिश की, पर पौधा नहीं उखड़ा। तब उसने पौधे में रस्सी बाँधी और स्त्रीपुरुष मिलकर रस्सी खींचने लगे। यह देखकर सब बच्चे हंसने लगे। |
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समय के सदुपयोग के बारे में कबीर क्या कहते हैं? |
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Answer» समय के सदुपयोग के बारे में कबीरदास कहते हैं कि हमें जो काम कल करना है, उसे आज ही कर लेना चाहिए और जो आज करना है, वह अभी कर लेना चाहिए। क्योंकि कल क्या होगा, किसने जाना? पल भर में प्रलय हो सकता है, फिर कब करोगे? बाद में पछताने से क्या होगा? |
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दया और धर्म के महत्व का वर्णन कीजिए। |
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Answer» दया और धर्म ये दोनों अच्छे गुण या आचरण हैं। जहाँ दया होती है, वहाँ धर्म भी होता है और जहाँ लोभ (लालच) होता है, वहाँ पाप होता है। इसी प्रकार जहाँ क्रोध होता है, वहाँ काल या मृत्यु होती है और जहाँ क्षमा होती है, वहाँ ईश्वर होते हैं। अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए दया और क्षमा को अपनाना चाहिए, लोभ व क्रोध को त्यागना चाहिए। |
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आखिर में औरत क्या करना चाहती है ? |
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Answer» आखिर में औरत उखड़े हुए पौधे को मुन्नी के हाथ से लेकर अपने हाथों से जमीन में गाड़ देना चाहती है। |
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जीवन की नश्वरता के बारे में कबीर के क्या विचार हैं? |
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Answer» जीवन की नश्वरता के बारे में कबीरदास कहते हैं कि यह मनुष्य जीवन क्षण-भंगुर है। इसलिए इसके प्रति अहंकार नहीं करना चाहिए। जो कुम्हार मिट्टी को रौंदता है, उससे मिट्टी कहती है- तू मुझे क्यों रौंदता है? एक दिन वह भी आयेगा, जब तू मर जायेगा, तो इसी मिट्टी में तुम्हें गाड़ दिया जाएगा। तब मैं तुझे रौंदूंगी। अतः मानुष-तन का गर्व नहीं करना चाहिए। |
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List out the input and output devices of a computer? |
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Answer» Input Devices: 1. Keyboard 2. Mouse 3. Scanner 4. Fingerprint Scanner 5. Track Ball 6. Retinal Scanner 7. Light Pen 8. Optical Character Reader 9. Bar Code / QR Code Reader 10. Voice Input Systems 11. Digital Camera 12. Touch Screen 13. Keyer Output Devices: 1. Monitor 2. Plotter 3. Printers |
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औरत अपने बच्चों को ………… लागो के साथ खेलने की राय देती है।(क) अच्छे(ख) अपने(ग) संस्कारी(घ) शिक्षित |
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Answer» औरत अपने बच्चों को अपने लोगों के साथ खेलने की राय देती है। |
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पुरुष पौधे को ………… के जरिए उखाड़ना चाहता है।(क) रस्सी(ख) फावड़ा(ग) कुल्हाडी(घ) हँसिया |
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Answer» पुरुष पौधे को रस्सी के जरिए उखाड़ना चाहता है। |
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बच्चे में संस्कार ………… हो रहे हैं।(क) नदारद(ख) चौपट(ग) गायब(घ) नष्ट |
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Answer» बच्चे में संस्कार चौपट हो रहे हैं। |
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कदम मिलाकर चलन में कौन सी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती है? |
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Answer» कदम मिलाकर चलने में प्रलय की-सी घोर घटाओं में आगे बढ़ना पड़ता है। पाँव के नीचे तेज धूप अंगारों की तरह लगती है। पहाड़ जैसी विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। अपने मान-सम्मान का भेद भूलना पड़ता है। घोर घृणा और पवित्र प्रेम का अंतर विस्मृते करना पड़ता है। अपने अरमानों की कुर्बानी देनी पड़ती है। इस प्रकार कदम मिलाकर चलने में तरह-तरह की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं। |
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दूसरे देशों में लोग स्वच्छता के प्रति कैसे जागरूक हैं? |
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Answer» दूसरे देशों में लोग स्वच्छता को बहुत महत्त्व देते हैं। वे सड़कों पर थूकते नहीं है। कागज के टुकड़े यहाँ-वहाँ न फेंककर कूड़ादान में डालते हैं। सिगरेट के टुकड़े सड़क पर नहीं फेंकते। कुत्तों के मालिक अपने कुत्तों को सड़क गंदी नहीं करने देते। समुद्र-तटों पर लोग खाली नारियल इधर-उधर नहीं डालते। वे अपने रेलवे स्टेशनों को साफ-सुथरा रखते हैं। इस प्रकार दूसरे देशों के लोग स्वच्छता के प्रति बहुत जागरूक हैं। |
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हमारे देश की स्वच्छता की जिम्मेदारी किसकी है? |
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Answer» हमारे देश की स्वच्छता की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन अर्थात् ग्रामपंचायतों, नगरपालिकाओं एवं महानगरपालिकाओं की है। |
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जापान के रेलवे स्टेशन और रेल-यात्रा के बारे में लेखिका क्या कहती हैं? |
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Answer» जापान में रेल-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए लेखिका कहती हैं कि जापान में कदम-कदम पर रेलवे स्टेशन हैं। रेलें कई धरातलों पर चलती रहती हैं। प्लेटफार्म पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लाल लकीरें खिंची हैं। हर डिब्बा ऐन उस लकीर के सामने ही पड़ता है। गाड़ी जैसे रुकती है, टिकट खाँचे में डालकर अंदर घुसो, उस पार जाकर अपना टिकट उठा लो। रेल के अंदर बैठने के स्थान कम और खड़े होने के ज्यादा हैं। वृद्धों, स्त्रियों, रोगियों के लिए courtesy seats अर्थात् सौजन्यस्थान आरक्षित हैं। रेल में चढ़ते समय धक्का-मुक्की नहीं होती। शालीनता जापान का गुण धर्म है। रेल में लोग खड़े-खड़े पढ़ते हैं। हर जगह स्वच्छता। यहाँ की सबसे तेज गति से चलनेवाली रेल है – ‘शिन्कान्सेन’ जिसे बुलेट ट्रेन भी कहते हैं। |
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अणु किससे बनते हैं? |
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Answer» अणु परमाणु से बनते हैं। |
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अणु किसे कहते हैं? |
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Answer» किसी वस्तु के छोटे-से छोटे अंश को अणु कहते हैं। |
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ऊर्जा का क्या अर्थ है? |
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Answer» ऊर्जा का अर्थ है कार्य करने की क्षमता। |
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प्रोफेसर माधवन किसका सिफारिश-पत्र लेकर प्रो. रामिश की लैब में मिलने आए थे? |
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Answer» प्रोफेसर माधवन आनंद मेहता का सिफारिश-पत्र लेकर पहली बार प्रो. रामिश की लैब में मिलने आए थे। |
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प्रोफेसर रामिश का ड्रीम प्रोजेक्ट क्या था ?(अ) दवाइयाँ बनाना(ब) कैन्सर का टीका ढूँढना(क) मानव प्रक्षेपण यंत्र बनाना(ड) कृत्रिम मनुष्य बनाना |
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Answer» (क) मानव प्रक्षेपण यंत्र बनाना |
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प्रोफेसर रामिश के अचेत शरीर में चेतना कब आई? |
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Answer» डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने और कुछ अन्य सावधानियाँ बरतने के बाद प्रोफेसर रामिश के अचेत शरीर में चेतना आई। |
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प्रोफेसर रामिश के प्रयोग का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए । |
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Answer» विज्ञान के सिद्धांत के अनुसार किसी वस्तु को उसके मूलतत्त्वों में विभक्त किया जा सकता है और उसे तरंगों के द्वारा किसी अन्य स्थान पर भेजा और उन तत्वों को जोड़कर वापस पाया जा सकता है। प्रोफेसर रामिश के प्रयोग का उद्देश्य इसी सिद्धांत के अनुसार मानवशरीर को तरंगों के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना है। |
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‘एक नई शुरुआत’ के दोनों वैज्ञानिकों के नाम दीजिए । |
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Answer» ‘एक नई शुरुआत’ के दोनों वैज्ञानिकों के नाम हैं – प्रोफेसर रामिश और प्रोफेसर माधवन। |
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जिस यंत्र के द्वारा किसी व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजा जाए, उसे मानव प्रक्षेपण-यंत्र कहते हैं। |
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Answer» यकायक चालू मानव प्रक्षेपण-यंत्र से जुड़े पावर सप्लाई बॉक्स से धुआं उठता हुआ देखकर प्रोफेसर माधवन को पसीना आ गया। |
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प्रोफेसर रामिश ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मानव प्रक्षेपणयंत्र’ का प्रयोग छोड़ देने का निर्णय क्यों किया? |
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Answer» प्रोफेसर रामिश ‘मानव प्रक्षेपण-यंत्र’ की प्रयोग प्रक्रिया के दौरान जिन स्थितियों से गुजरे थे, उन स्थितियों ने उन्हें बेचैन कर १ दिया था। उनका तरंग में परिवर्तित शरीर गंदे नाले और उसके पास की 3 दुनिया में पहुंच गया था, जहां नाले के किनारे बजबजाती मानवीयता १ ने उन्हें हिलाकर रख दिया था। चैम्बर से निकलने पर उन्होंने निश्चय कर लिया कि अभी तो उन्हें देश के लाखों नागरिकों को कुपोषण से बचाने और उनको जीवन की न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध करवाने का काम करना बाकी है। यह काम ‘मानव प्रक्षेपण-यंत्र’ प्रोजेक्ट के प्रयोग से कहीं अधिक जरूरी है। इसलिए प्रोफेसर रामिश ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट का प्रयोग छोड़ देने का निर्णय किया। |
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प्रा. रामिश के साथ प्रा. माधवन की पहली मुलाकात कब और कैसे हुई थी ? |
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Answer» गर्मियों के दिन थे। प्रोफेसर माधवन प्रोफेसर रामिश के जिगरी दोस्त आनंद मेहता का सिफारिशी-पत्र लेकर पहली बार प्रोफेसर रामिश की लैब में उनसे मिलने आए थे। तब प्रोफेसर रामिश अपने कम्प्यूटर पर झुके हुए थे। प्रोफेसर माधवन का परिचय जानने के बाद प्रोफेसर रामिश ने उन्हें सहर्ष अपने साथ काम करने की अनुमति दे दी थी। इस प्रकार प्रोफेसर रामिश के साथ उसी समय प्रोफेसर माधवन की पहली बार मुलाकात हुई थी। |
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माधवन की तंद्रा अचानक क्यों भंग हो गई? |
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Answer» माधवन की तंद्रा अचानक भंग हो गई, क्योंकि पावर सप्लाई बंद हो जाने से मानव प्रक्षेपण-यंत्र से जुड़े पावर सप्लाई बॉक्स से धुआँ उठने लगा था। |
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प्रो. रामिश ने माधवन को अपने साथ काम करने की अनुमति क्यों प्रदान की? |
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Answer» प्रो. रामिश ने माधवन को अपने साथ काम करने की अनुमति प्रदान की, क्योंकि वह उनके जिगरी दोस्त आनंद की सिफारिश लेकर आया था। |
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प्रोफेसर रामिश कौन-सी नई शुरुआत करनेवाले थे? |
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Answer» प्रोफेसर रामिश मानवदेह को विद्युत-तरंगों में रूपांतरित करके उसे नई तकनीक से स्थानांतरित करने की नई शुरुआत करनेवाले थे। |
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‘मानव प्रक्षषण प्रयोग’ से संबंधित जानकारी दीजिए । |
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Answer» ‘मानव प्रक्षेपण प्रयोग’ प्रोफेसर रामिश का महत्त्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट था। यह प्रॉजेक्ट विज्ञान के इस सिद्धांत पर आधारित था कि किसी वस्तु को उसके मूलतत्त्वों में तोड़ा जा सकता है और उन्हें विशेष प्रकार की तरंगों में परिवर्तित कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है। इसी सिद्धांत के आधार पर प्रोफेसर रामिश ने मानवशरीर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने का प्रक्षेपण प्रयोग किया था। |
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लेखक की दृष्टि से मनुष्य को एक स्थान से दूसरे स्थान पर कैसे भेजा जा सकता है ? |
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Answer» विज्ञान के सिद्धांत के अनुसार किसी भी वस्तु को उसके मूलतत्त्वों में तोड़ा और उन मूलतत्त्वों को आपस में जोड़कर उसके मूल स्वरूप में प्राप्त किया जा सकता है। लेखक की दृष्टि से मानवशरीर भी विभिन्न प्रकार के तत्त्वों से मिलकर बना है। इसलिए मानवशरीर को उसके मूलतत्त्वों में विभक्त कर उसे विशेष प्रकार की तरंगों में परिवर्तित करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है और उसे मूल स्वरूप में प्राप्त भी किया जा सकता है। |
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