Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह को गतिशील शब्दचित्र है?

Answer»

‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील चित्र है। कविता में प्रयुक्त उपमानों को देखकर यह बात सुनिश्चित ढंग से कही जा सकती है। भोर के नीले आकाश के लिए ‘राख से लीपा हुआ गीला चौका, ‘केसर से धुली काली सिल’ तथा ‘लाल खड़िया चाक मली हुई स्लेट’ आदि उपमान प्रयुक्त हुए हैं। राख से लिपा चौपा (रसोईघर) तथा ‘काले रंग की सिल (मसाला पीसने का पत्थर)’-ग्रामीण जीवन से लिए गए उपमान हैं। शहरी जीवन में इनका कोई स्थान नहीं है। स्लेट पर चाक से गाँव के बच्चे ही लिखते हैं, शहर के नहीं। चौके का लीपा जाना, सिल पर मसाला पीसा जाना तथा बच्चों द्वारा स्लेट पर लाल खड़िया मला जाना में एक क्रम है। इस कारण भोर का यह चित्र ग्राम जीवन से सम्बन्धित तथा गतिशील है।

2.

“भाषा, विम्ब और लय का सुंदर मेल कविता ‘उषा’ को अत्यन्त आकर्षक बनाता है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

Answer»

उषा कविता में कवि ने अपने विम्बों को पाठकों तक पहुँचाने के लिए सटीक शब्दावली का प्रयोग किया है। नीला शंख, राख-लिपा चौका, लाल केसर से धुली सिल, लाल खड़िया मली स्लेट, नीलजल में झिलमिल गोरी देह, ये सभी शब्द-समूह पाठक के अन्तर्मन परे एक स्पष्ट शब्द-चित्र अंकित करते हैं। कवि ने विम्बों की चुनाव भी हमारे नित्य-जीवन, घरेलू उपकरणों से किया है। इंसके साथ ही अतुकांत होते हुए भी कविता में एक अन्तर्निहित लय का आभास होता है। इस प्रकार कवि ने भाषा, विम्ब और लय को आकर्षक संगम प्रस्तुत किया है।

3.

मानो संसार से अब पापी का …………(A) पाप कट गया ।(B) पुण्य कट गया ।(C) हाथ कट गया |(D) पैर कट गया ।

Answer»

सही विकल्प है (A) पाप कट गया ।

4.

क्या आपको कभी प्रातः कालीन उषा का दृश्य देखने का अवसर मिला है। क्या आपने मन में उस दृश्य को देखकर कोई विम्ब अथवा उपमान जागे हैं? यदि हाँ तो गद्य या पद्य में अपने अनुभव को व्यक्त कीजिए।

Answer»

‘उषा’ के मनमोहक दृश्य को देखने का मुझे अनेक बार अवसर मिला है। एक अनुभव का पद्यमय रूप इस प्रकार है –
क्षितिज के नेपथ्य से
धीरे-धीरे चली आ रही,
प्राची के मंच पर,
उषा–सुंदरी।
पीछे टॅगी है नीली पिछवाई
जो गा उठे भूतल से,
स्वागत में,
विहगों के संगीतकार
और हो गया सबेरा।

5.

प्रातःकालीन आकाश के रंग को व्यक्त करने के लिए कवि ने किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है? लिखिए।

Answer»

कवि ने निरंतर रंग बदलते प्रातः कालीन आकाश के लिए भिन्न-भिन्न और उपयुक्त उपमान चुने हैं। सर्वप्रथम कवि उसके लिए बहुत नीले शंख’ उपमान का प्रयोग करता है। इसके पश्चात् भोर के नभ को गीली राख के रंग वाला बताता है। इसके लिए उसने ‘राख से पुते चौके’ को उपमान बताया है। तीसरा उपमान ‘बहुत काली सिल जरा-से लाल केसर से धुली’, चौथा उपमान आकाश के स्लेटी रंग के लिए है, ‘स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो’ और अंतिम उपमान नीलजल’ चुना है।

6.

उषा का जादू क्यों टूट गया? स्पष्ट कीजिए।

Answer»

उषाकाल के समय आकाश में मनमोहक लालिमा छाई हुई थी। ज्ये-ज्यों सूर्योदय का समय निकट आ रहा था, आकाश का रूप पल-पल में बदल रहा था। लाल से पीला हुआ और फिर सूर्य का उदय होते ही आकाश में श्वेत प्रकाश छा गयी। सूर्य के इस प्रखर प्रकाश में उषाकाल का मन परे जादू करने वाला दृश्य भी अदृश्य हो गया। इस प्रकार उषा का जादू टूट गया।

7.

'उषा’ कविता में प्रयुक्त दो प्रतीकों को छाँटकर बताइए कि कवि ने उनका प्रयोग क्या बताने के लिए किया है?

Answer»

दो प्रतीक निम्नलिखित हैं 

(1)राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है) – इस प्रतीक का प्रयोग कवि ने आकाश का रंग बताने के लिए किया है। भोर के समय का बहुत हल्का-सा प्रकाश नीले आकाश से मिलाकर राख जैसे रंग वाला लग रहा है। प्रकाश की मात्रा बहुत कम होने से वह गीली राख जैसा प्रतीत हो रहा है।

(2) लाल केसर से धुली काली सिल – इस प्रतीक का प्रयोग गहरे नीले आकाश में उषा की लालिमा के दृश्य का बोध कराने के लिए किया गया है। आकाश काली सिल है और लाल केसर से धुला होना, उषा की लाली के लिए प्रयुक्त हुआ है।

8.

“स्लेट पर या लाल खड़िया मल दी हो किसी ने इस पंक्ति द्वारा कवि ने प्रात:काल के किस दृश्य को बिम्ब साकार किया है? स्पष्ट कीजिए।

Answer»

इस पंक्ति द्वारा कवि ने भोर के नीले-काले आकाश में छाई हुई उषा की लालिमा के दृश्य को एक बिलकुल नए विम्ब द्वारा हमारे मने पर साकार किया है।

आकाश काला है और स्लेट भी काली है। आकाश में उषा की लालिमा छाई हुई है और काली स्लेट पर लाल खड़िया या चाक मल दिया गया है। इस प्रकार कवि ने भोर के आकाश के लिए इस नए उपमान की सृष्टि की है। उपमेय और उपमान की समानता से हमें कवि द्वारा देखे गए भोर के दृश्य की प्रत्यक्ष जैसी अनुभूति होती है।

9.

नीले जल में झिलमिलाती गौरवर्ण देह’ का प्रयोग किस दृश्य के लिए किया है?

Answer»

इस विम्ब में नीला जल नीले आकाश का प्रतीक है। आकाश में सूर्योदय से पूर्व का पीला प्रकाश गौरवर्ण देह द्वारा व्यक्त किया गया है। नीले जल में स्नान करती गौरवर्ण सुन्दरी का झिलमिलाता शरीर बताकर इस विम्ब द्वारा सूर्योदय पूर्व के आकाशीय दृश्य को प्रस्तुत कर रहा है।

10.

वंशीधर के इस विस्तृत संसार में संगी साधी कौन थे ?

Answer»

वंशीधर के इस विस्तृत संसार में उनके लिए धैर्य अपना मित्र, बुद्धि अपनी पथप्रदर्शक और आत्मालंबन ही अपना सहायक था।

11.

उषा’ कविता की प्रमुख शिल्पगत विशेषता क्या है?

Answer»

'शमशेर’ एक प्रयोगवादी कवि हैं। उन्हें कविता के शिल्प-कलापक्ष में नए-नए प्रयोग करने में आनन्द आता है। कविता ‘उषा’ में भी कवि ने ‘भोर’ के प्रतिपल बदलते दृश्यों को शब्दों में बाँधने के लिए नए-नए उपमानों का प्रयोग किया है। प्रात:कालीन आकाश को ‘नीला शंख’, ‘राख से लीपा हुआ गीला चौका’, ‘काली सिल पर लाल केसर’, ‘लाल खड़िया चाक से मली स्लेट’ तथा ‘नीले जल में झिलमिलाते गौर वर्ण शरीर’ जैसे नए उपमानों से प्रस्तुत किया है। अत: ‘उषा’ कविता की प्रमुख शिल्पगत विशेषता, उसमें नवीन बिम्ब-योजना है।

12.

“शमशेर बहादुर सिंह की कविता ‘उषा’ नवीन विम्बों व उपमानों का जीवंत दस्तावेज है।” स्पष्ट कीजिए।

Answer»

हिन्दी में प्रयोगवादी कविता का युग आया तो कवियों ने परंपरा से चले आ रहे विम्ब-विधन और उपमानों के स्थान पर नए-नए प्रयोग किए। कवि शमशेर को भी प्रयोगधर्मी’ कवि कहा गया है। पाठ्यपुस्तके में संकलित उनकी कविता ‘उषा’ उनके नए प्रयोगों को प्रस्तुत करती है। ‘उषा’ कविता में कवि ने भोर के दृश्य को चित्रित करने के लिए आकाश को नीला शंख, राख से लीपा गया चौका, लाल केसर से धुली काली सिल, लाल खड़िया से मली गई स्लेट तथा नीले जल में हिलती किसी की गोरी देह बताया है। ये सभी विम्ब और उपमान नए प्रयोग हैं।

13.

भोर के समय का आकाश है –(क) काला(ख) नीला(ग) लाल(घ) पीला

Answer»

भोर के समय का आकाश है नीला

14.

शमशेर बहादुर सिंह की ‘उषा’ का प्रकृति वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

Answer»

भोर होने को है। गहरा नीला आकाश एक विशालकाय नीले शंख जैसा लग रहा है। नीले आकाश में भोर का धुंधला प्रकाश ऐसा लगता है जैसे वह राख से लीपा गया चौकी हो, जो अभी गीला है।

अथवा यह आकाश एक विशाल काली सिल है जिसे लाल केसर के जल से धो दिया गया है। या नीले आकाश में उषा की यह लालिमा ऐसी लगती है माने स्लेट पर लाल खड़िया या चाक मल दिया गया हो।

अथवा यह नीले जल में झिलमिलाती किसी रमणी का गोरा शरीर है जो लहरों के जल में हिलता दिखाई दे रहा है।

लो अब सूर्य का उदय हो रहा है। धीरे-धीरे यह मनमोहक भोर का दृश्य अदृश्य होता जा रहा है।

15.

वंशीधर के अनुभवी पिता ने कहा….(क) ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है। इसी से बरकत होती है।(ख) वेतन सरकार देती है और ऊपरी आमदनी धनवान देते हैं।(ग) ऊपरी आमदनी कभी मत लेना।(घ) वेतन के साथ ऊपरी आमदनी भी लेना।

Answer»

सही विकल्प है वंशीधर के अनुभवी पिता ने कहा, ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है। उसी से बरकत होती है।

16.

कवि शमशेर बहादुर सिंह काव्य-रचना के क्षेत्र में किसलिए विख्यात है?

Answer»

‘शमशेर’ ने अपनी रचनाओं में ‘बिम्ब विधान’ या शब्द-चित्रों के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग किए हैं। उनको प्रयोगधर्मी कवि भी कहा जाता है।

17.

उषा कविता में प्रस्तुत किसी घरेलू बिम्ब का उल्लेख कीजिए।

Answer»

एक घरेलू बिम्ब (शब्द-चित्र) है-‘भोर का नभ, राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है)।

18.

आज भोर और उषा के ऐसे दृश्य कहाँ देखने को मिल सकते हैं?

Answer»

ऐसे दृश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ही देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि नगरों के बहुमंजिली भवनों ने ऐसे दृश्यों का दर्शन दुर्लभ बना दिया है।

19.

कवि ने नभ को राख से लीपा हुआ चौका क्यों कहा है?

Answer»

नीले आकाश में भोर के हल्के सफेद प्रकाश के मिल जाने पर राख जैसा रंग दिखाई देने के कारण, कवि ने उसे राख से लीपा चौका बताया है।

20.

प्रातःकालीन आकाश का रंग कवि को कैसा लगा है?

Answer»

प्रात:कालीन आकाश का रंग कवि को बहुत नीले शंख जैसा लगा है।

21.

‘लाल केसर से धुली काली सिल’ में किस दृश्य का चित्रण है?

Answer»

इस पंक्ति में भोर के नीले आकाश में छाए, उषा के लाल शुभ्र प्रकाश का चित्रण है।

22.

प्रातः के नभ को बहुत नीला शंख जैसा बताकर कवि आकाशी दृश्य की क्या विशेषता बताना चाहता है?

Answer»

कवि इस कविता में ग्रामीण क्षेत्र के दूर-दूर तक दर्शनीय आकाश के प्रात:कालीन सौन्दर्य का वर्णन कर रहा है। भोर के समय सूर्योदय से पहले धुंधलके में आकाश गहरा नीला या काला-सा प्रतीत होता है। इस रंग में भोर के हल्के उजास का भी मिश्रण रहता है। अत: इसमें एक बहुत हल्की-सी दमक भी होती है। कवि ने इसी कारण बहुत नीला ‘शंख’ जैसा बताया है। शंख में एक प्राकृतिक दमक देखी जाती है।

23.

‘राख से लीपा हुआ चौका’ कवि ने किसे बताया है?

Answer»

कवि ने राख से लीपा चौका, भोर के समय के आकाश को बताया है।

24.

बहुत काली सिल जरा-से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो।” इस पंक्ति की काव्यगत विशेषताओं का परिचय कराइए।

Answer»

इस पंक्ति में कवि ने एक सर्वथा नए घरेलू बिम्ब द्वारा उषाकालीन आकाश का वर्णन किया है। सामान्य घरों में आज भी मसाला चटनी आदि पीसने के लिए सिल का प्रयोग होता है। पीसने के पश्चात् सिल को धो दिया जाता है। किन्तु प्रतिः के आकाश के गहरे नीले रंग में उसकी लालिमा छिटकी हुई है। कवि ने आकाश को काली सिल और लालिमा को लाल केसर मिश्रित जल माना है। जिससे सिल को धोया गया है। इसके अतिरिक्त भाषा की सरलता और लाक्षणिकता तथा उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग भी इस पंक्ति की विशेषता है।

25.

किनसे सभी घृणा करते हैं?

Answer»

झूठे से हर कोई घृणा करते हैं।

26.

कवि ने लाल केसर कहा है –(क) केसर की क्यारी को(ख) लाल फूलों को(ग) उषा की लालिमा, को(घ) सिल के रंग को

Answer»

(ग) उषा की लालिमा, को

27.

उषा’ कविता में है –(अ) सूर्योदय का वर्णन(ब) सूर्यास्त का वर्णन(स) बादलों का शब्द-चित्र(द) सबेरे की लालिमा का वर्णन

Answer»

(द) सबेरे की लालिमा का वर्णन

28.

बहुत-से लोग नीति और आवश्यकता के बहाने किस की रक्षा करते हैं?

Answer»

बहुत-से लोग नीति और आवश्यकता के बहाने झूठ की रक्षा करते हैं।

29.

लेखक ने किनसे साक्षात्कार लिया है?

Answer»

लेखक ने गंगा मैया से साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिया है।

30.

गंगा मैया से साक्षात्कार लेखक परिचय :

Answer»

हिन्दी साहित्य में ख्याति प्राप्त हास्य रस के कवि एवं लेखक बरसाने लाल चतुर्वेदी जी का जन्म 15 अगस्त 1920 को मथुरा, उत्तरप्रदेश में हुआ। आपने ‘हिन्दी साहित्य में हास्यरस’ पर पीएच.डी. तथा ‘आधुनिक काव्य में व्यंग्य’ पर डी.लिट्. की उपाधि प्राप्त की। आपका व्यंग्य ‘हास्य’ के चटखारे लिए रहता है। आपने काव्य, निबंध एवं कैरिकेचर रूपों को व्यंग्य के लिए अपनाया। आपने लेखन का प्रारंभ हास्य से किया परन्तु अनुभव में वृद्धि के साथ-साथ व्यंग्य की मात्रा अधिक होती गई। डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी के शब्दों में – “बरसाने लाल चतुर्वेदी का व्यंग्य लेखन हँसाता है और विसंगतियों के प्रति सचेत भी करता है।”
आपके उल्लेखनीय योगदान के लिए उ.प्र. सरकार, हिन्दी अकादमी आदि संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया।
प्रसिद्ध रचनाएँ : ‘भोलाराम पंडित की बैठक’, ‘मिस्टर चोखेलाल’, ‘बुरे फंसे’, ‘मिस्टर खोएखोए’, ‘हास्य निबंध संग्रह’ आदि ।

31.

गंगा मैया से साक्षात्कार पाठ का आशय :

Answer»

प्रस्तुत साक्षात्कार ‘मुसीबत है’ नामक संग्रह से लिया गया है। लेखक ने इसमें गंगा मैया के माध्यम से आज के भ्रष्टाचार, महँगाई और धर्म के नाम पर होनेवाले ढकोसलों पर व्यंग्य किया है। आज की ज्वलंत समस्याओं से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से इस पाठ का चयन किया गया है।

32.

कर्त्तव्य करने से क्या बढ़ता है?

Answer»

कर्त्तव्य करने से चरित्र की शोभा बढ़ती है।

33.

कर्त्तव्य करना किस पर निर्भर है?

Answer»

कर्त्तव्य करना न्याय पर निर्भर है।

34.

कर्त्तव्य करने का आरम्भ पहले कहाँ से शुरू होता है?

Answer»

कर्तव्य करने का आरंभ पहले घर से ही शुरू होता है।

35.

हम लोगों का परम धर्म क्या है?

Answer»

कर्त्तव्य करना हम लोगों का परम धर्म है।

36.

अंग्रेज़ी-जहाज बीच समुद्र में डूबते समय पुरुषों ने कैसे अपना धर्म निभाया?

Answer»

जब अंग्रेजी-जहाज में छेद हो गया और वह डूबने की स्थिति में था, तब उसमें यात्रा करनेवाली स्त्रियों को नावों में बैठाकर बचा लिया गया। पुरुष पोत की छत पर चले गये; फिर भी जहाज डूब गया। इस प्रकार पुरुषों ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना स्त्रियों को बचाने का कर्तव्य-पालन किया। उन्होंने यही अपना धर्म समझा कि अपने प्राण देकर स्त्रियों और बच्चों के प्राण बचाए जाए।

37.

ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘इसी प्रकार जो लोग स्वार्थी होकर अपने कर्तव्य पर ध्यान नहीं देते, वे संसार में लज्जित होते हैं और सब लोग उनसे घृणा करते हैं।’

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं।
संदर्भ : प्रस्तुत वाक्य को लेखक ने स्वार्थी लोगों के स्वभाव के बारे में बताते हुए कहा हैं।
स्पष्टीकरण : लेखक स्वार्थी लोगों के बारे में कह रहे हैं कि जो स्वार्थी लोग अपने कर्तव्यों की ओर ध्यान नहीं देते, वे संसार में लज्जित भी होते हैं और लोग उनसे घृणा भी करते हैं।

38.

निम्नलिखित वाक्यों को सूचनानुसार बदलिए :1.झूठे से सभी घृणा करते हैं। (भविष्यत् काल में बदलिए)2.वह मेरी किताब की चोरी करता है। (भूतकाल में बदलिए)3.हमारा जीवन सदा अनेक कार्यों में व्यस्त रहेगा। (वर्तमान काल में बदलिए)

Answer»

1.झूठे से सभी घृणा करेंगे।

2.उसने मेरी किताब चोरी की।
अथवा वह मेरी किताब चोरी करता था। 
3.हमारा जीवन सदा अनेक कार्यों में व्यस्त रहता है।
39.

किसका व्यापारीकरण हो रहा है?

Answer»

धर्म का व्यापारीकरण हो रहा है।

40.

घर और समाज में मनुष्य का जीवन किन-किन के प्रति कर्तव्यों से भरा पड़ा है?

Answer»

कर्त्तव्य करने का आरंभ पहले घर से ही होता है, क्योंकि यहाँ लड़कों का कर्त्तव्य माता-पिता की ओर और माता-पिता का कर्त्तव्य लड़कों की ओर देख पड़ता है। इसके अतिरिक्त पति-पत्नी, स्वामी-सेवक और स्त्री-पुरुष के परस्पर अनेक कर्तव्य हैं। घर के बाहर हम मित्रों, पड़ोसियों और प्रजाओं के परस्पर कर्तव्यों को देखते हैं। संसार में मनुष्य का जीवन कर्त्तव्यों से भरा पड़ा है।

41.

किसका व्यापारीकरण हो रहा है? 

Answer»

धर्म का व्यापारीकरण हो रहा है।

42.

प्रदूषण के संबंध में गंगा मैया ने क्या कहा है?

Answer»

प्रदूषण के सम्बन्ध में गंगा मैया कहती हैं कि पूरे देश का वातावरण ही जब प्रदूषित हो गया, तब मैं कैसे बच सकती हूँ। लोगों का मन दूषित हो गया है। स्वार्थी लोगों की संख्या बढ़ रही है। ‘चरित्र का संकट’ चर्चा का विषय बना हुआ है। सेवा करने से चरित्र बनता था। अब तो सब मेवा बटोरने में लग गए हैं। भक्ति, संस्कृति, आचरण के नाम पर जल स्रोतों को शुद्ध रखने की परिकल्पना भारतीय संस्कृति का अंग थी। लेकिन अब सब पैसों के लालच में पड़कर अपना सारा कचरा मुझमें ही डालते हैं इसलिए प्रदूषण बढ़ गय है। जो लोग कहते है कि गंगा में यह शक्ति है कि प्रदूषण अपने आप समाप्त होता जाता है, वे उल्लू के आस्थावान शिष्य है।

43.

पुनः उत्थान की किरणें कब फूटती हैं?

Answer»

पतन की जब पराकाष्ठा हो जाती है, तब पुनः उत्थान की किरणें फूटती हैं।

44.

गंगा मैया ने किसे सर्वशक्तिमान कहा है?

Answer»

गंगा मैया ने प्रकृति को सर्वशक्तिमान कहा है।

45.

ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘बेटा, शब्दकोशों में उसका नाम शेष है, उपदेशकों के प्रयोग में भी आ रहा है।’

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गंगा मैया से साक्षात्कार’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हैं।
संदर्भ : प्रस्तुत वाक्य में लेखक को गंगा मैया चरित्र के संकट के विषय में बताते हुए यह वाक्य कहती हैं।
स्पष्टीकरण : ‘साक्षात्कार’ में लेखक को ‘चरित्र’ के बारे में गंगा मैया कहती है कि चरित्र तो अब केवल शब्दकोशों में बचा है, जिसका उपदेश देने के लिए प्रयोग किया जाता है। मास्टर भी छोटी कक्षाओं में कभी-कभी इस शब्द का प्रयोग करते हैं।

46.

मनुष्य के कुकर्मों पर कौन हँसने लगे हैं?

Answer»

मनुष्य के कुकर्मों पर पशु-पक्षी तक हँसने लगे हैं।

47.

दो दशक पहले अलवर जिले में जो नदियाँ सूख गयीं थीं, उनके नाम क्या थे?

Answer»

दो दशक पहले अलवर की सूख जाने वाली नदियों के नाम- अखरी, रुपारेल, सरसा, भगाणी और जहाज वाली नदी आदि थे।

48.

अक्टूबर 1985 ई० में राजेन्द्र सिंह राजस्थान के अलवर जिले के किशोरी गाँव में किस उद्देश्य से गए थे?

Answer»

राजेन्द्र सिंह किशोरी गाँव के लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से गए थे।

49.

किशोरी और गोपालपुरा गाँव के लोगों ने राजेन्द्र सिंह को जल प्रबन्धन की कौन-सी पुरानी विधियाँ बतायी?

Answer»

छोटे-छोटे बाँध बनाए जाएँ, सूख चुके कुएँ और बावड़ियों को फिर से गहराकर जीवित किया जाए, इसके साथ जोहड़ बनाया जाए तथा नदियों को जिलाया जाए इत्यादि पुरानी विधियाँ बताई।

50.

राजेन्द्र सिंह को मैगसेसे सम्मान क्यों दिया गया?

Answer»

जल संरक्षण के व्यापक प्रबन्ध के लिए राजेन्द्र सिंह को मैगसेसे सम्मान दिया गया।