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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

कृष्ण किसके हो गए हैं?(क) गोपी के(ख) राधा के(ग) बाँसुरी के(घ) मोरपंख के

Answer»

सही विकल्प है (ग) बाँसुरी के

2.

किसके कहने पर गोपी कृष्ण का स्वाँग कर रही हैं?

Answer»

गोपियों के कहने पर गोपी कृष्ण का स्वांग कर रही हैं।

3.

निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण पहचानिए :वंशीधर आज्ञाकारी पुत्र था।हम सरकारी हुकम को नहीं जानते।

Answer»
  1. आज्ञाकारी – गुणवाचक विशेषण
  2. सरकारी – गुणवाचक विशेषण
4.

निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए .मुसलमानों का धर्मगुरुजिसके खंड न किए जा सके पान की गिलोरोअपराधी को पहनाई जानेवाली लोहे की जंजीर कान के पास कही जानेवाली बात हमेशा अन्न बाँटने का नियमईश्वर द्वारा दिया हुआ आदि से अंत तक का हाल व्याज के साथ चुकाने के लिए लिया गया धनशुभ समयजिसे गरज न हो सबसे ऊँचा सबके द्वारा सम्मानित फारसी बोलनेवाला नई वैज्ञानिक खोज पूरे चाँद की रात आज्ञा माननेवालापथ दिखानेवाला अपने आप पर आधार रखना जो बोल न सकता होजिसे कोई चिंता न हो स्वामी या पालक के साथ छल करनेवाला आदर न करना 

Answer»
  • मुसलमानों का धर्मगुरु – पीर
  • जिसके खंड न किए जा सके – अखंड
  • पान की गिलोरो – बीड़ा
  • अपराधी को पहनाई जानेवाली लोहे की जंजीर – हथकड़ी
  • कान के पास कही जानेवाली बात – कानाफूसी
  • हमेशा अन्न बाँटने का नियम – सदावत
  • ईश्वर द्वारा दिया हुआ – ईश्वरप्रदत्त
  • आदि से अंत तक का हाल – वृत्तांत
  • व्याज के साथ चुकाने के लिए लिया गया धन – ऋण
  • शुभ समय – शकुन
  • जिसे गरज न हो – बेगरज
  • सबसे ऊँचा – सर्वोच्च
  • सबके द्वारा सम्मानित – सर्वसम्मानित
  • फारसी बोलनेवाला – फारसीदों
  • नई वैज्ञानिक खोज – आविष्कार
  • पूरे चाँद की रात – पूर्णमासी
  • आज्ञा माननेवाला – आज्ञाचारी
  • पथ दिखानेवाला – पथदर्शक
  • अपने आप पर आधार रखना – आत्मावलंबन
  • जो बोल न सकता हो – गूंगा
  • जिसे कोई चिंता न हो – निश्चित
  • स्वामी या पालक के साथ छल करनेवाला – नमकहराम
  • आदर न करना – निरादर
5.

देश के दरिद्रजनों की हीन अवस्था दूर करने के लिए क्या किया गया है?

Answer»

देश के दरिद्र जनों की हीन अवस्था दूर करने के लिए शासन ने अनेक कायदे-कानून बनाए हैं। इनका यही लक्ष्य है कि कृषि उद्योग, वाणिज्य, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में लोगों की स्थिति को अधिक उन्नत और सुचारु बनाया जाए।

6.

लोगों में महान मूल्यों के बारे में आस्था क्यों हिल गई है?

Answer»

आजकल ईमानदारी और परिश्रम करके जीविका कमानेवाले श्रमजीवी पिस रहे हैं और झूठ तथा फरेब का रोजगार करनेवाले फल-फूल रहे हैं। इसलिए लोगों में महान मूल्यों के बारे में आस्था हिल गई है।

7.

बस कंडक्टर क्या लेकर लौटा था?

Answer»

बस कंडक्टर खाली बस लेकर तथा लेखक के बच्चों के लिए पानी और दूध लेकर लौटा था।

8.

भारतवर्ष किसको धर्म रूप में देखता आ रहा है?

Answer»

भारतवर्ष कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है।

9.

लेखक क्या देखकर हताश हो जाना उचित नहीं मानते?

Answer»

लेखक कहते हैं कि आजकल ईमानदारी और परिश्रम के बदले झूठ और फरेब का बाजार गर्म है। ऊपरी दिखाई देनेवाली इस मनुष्यनिर्मित स्थिति से लेखक हताश हो जाना उचित नहीं मानते।

10.

लड़कियाँ हैं, वह घास-फूस की तरह बढ़ती चली जाती हैं । वाक्य समाज में लड़कियों की स्थिति की किस वास्तविकता को प्रकट करता है ?

Answer»

उपर्युक्त कथन समाज में लड़कियों की उपेक्षा को दर्शाता है । जैसे घास-फूस बिना देखभाल के अपने आप ही फलती-फूलती है । इसी प्रकार समाज में लड़कियों की बिना उचित देखभाल के ही फलती-फूलती हैं।

11.

मनुष्य के मन में कौन-कौन से विचार है?

Answer»

मनुष्य के मन में काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि विकार हैं।

12.

तुलसीदास कहाँ जाने के लिए मना करते हैं?

Answer»

तुलसीदास कहते हैं कि जहाँ आदर और स्नेह नहीं मिलता हो वहाँ नहीं जाना चाहिए।

13.

तुलसीदास के अनुसार मनुष्य के जीवन में संतोष-धन का क्या महत्व हैं? 

Answer»

दुनिया में कई प्रकार के धन हैं। जैसे – गोधन, गजधन, वाजिधन और रतनधन आदि। इन सबके रहते हुए भी अथवा इनको प्राप्त करने पर भी मनुष्य को संतुष्टि नहीं होती। तुलसीदास जी कहते हैं कि जब सन्तोष रूपी धन हमें मिल जाता है, तो ये सभी प्रकार के धन धूल के समान हो जाते हैं। अर्थात् ‘सन्तोष’ ही सबसे बड़ा धन है।

14.

इस संसार में किस प्रकार के लोग हैं?

Answer»

इस संसार में भाँति-भाँति के लोग हैं।

15.

ब्याह और प्रीति किसके साथ करनी चाहिए?

Answer»

ब्याह और प्रीति उसी से करनी चाहिए जो लायक हो।

16.

तुलसीदास कुल रीति के पालन करने के सम्बन्ध में क्या कहते हैं?

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि हमें अपने कुल के रीति-रिवाज अथवा कुल की परंपरा का कभी त्याग नहीं करना चाहिए। जो लायक हो उसी से ब्याह कीजिए, जो लायक हो उसी से बैर कीजिए और जो लायक हो, उसी से प्रीति या प्रेम कीजिए।

17.

तुलसीदास के अनुसार जग से लोग किस संख्या की तरह नाता रखना चाहिए?

Answer»

तुलसीदास के अनुसार जग से लोग छत्तीस की तरह नाता रखना चाहिए।

18.

तुलसीदास किसका त्याग न करने के लिए कहते हैं?

Answer»

तुलसीदास अपने कुल की रीति त्याग न करने के लिए कहते हैं।

19.

तुलसीदास के अनुसार कौन से दो बीज हैं?

Answer»

तुलसीदास के अनुसार पाप और पुण्य दो बीज हैं।

20.

दोहे का भावार्थ लिखें:जग ते रह छत्तीस है, राम चरन छ: तीन।तुलसी देखु विचार हिय, है यह मतौ प्रबीन ॥२॥

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य को इस संसार से अर्थात् सांसारिक प्रपंच से छत्तीस (३६) जैसा सम्बन्ध रखना चाहिए और परमात्मा के साथ तिरसठ (६३) का सम्बन्ध रखना चाहिए। इसका अभिप्राय यह है कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को संसार के प्रति उदासीनता दिखानी चाहिए और परमात्मा के प्रति हमेशा प्रेम प्रकट करना चाहिए।

21.

तुलसीदास की रामभक्ति का वर्णन कीजिए। 

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि मुझे तो केवल मेरे इष्ट राम पर भरोसा है, उसी की आशा, उसी का बल है; जैसे स्वाति नक्षत्र में बारिश के पानी की पहली बूंद के लिए चातक पक्षी तरसता रहता है। अर्थात् मेरे राम यदि स्वाति-सलिल हैं, तो मैं चातक हूँ।

22.

“जैसा कर्म वैसा फल” इस बात को तुलसीदास ने कैसे स्पष्ट किया है?

Answer»

तुलसी ‘जैसा कर्म वैसा फल’ को एक दृष्टांत के माध्यम से समझाते हुए कहते हैं- हमारा शरीर एक खेत है और मन किसान है तथा पाप व पुण्य दोनों बीज हैं। इस प्रकार खेत में जिस प्रकार का बीज बोकर खेती होती है, वैसी ही फसल भी प्राप्त होती है। अर्थात् जीवन में जैसा काम करेंगे हमें फल भी उसके अनुरूप मिलेगा।

23.

तुलसीदास ने छत्तीस अंक को लेकर अपना कौन सा मत प्रकट किया है? 

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य को इस संसार अर्थात् सांसारिक मोह माया से 36 का रिश्ता रखना चाहिए। जिस प्रकार छत्तीस में 3 और 6 के अंक एक दूसरे के विपरीत होते हैं उसी तरह हमें भी सांसारिकता चीजों के विपरीत रहना चाहिए।

24.

इस विस्तृत संसार में उनके लिए धैर्य अपना मित्र, बुद्धि अपनी पथप्रदर्शक और आत्मावलंबन ही अपना सहायक था।

Answer»

मुंशी वंशीधर एक ईमानदार और कर्तव्यपरायण व्यक्ति हैं, जो समाज में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को स्थापित करना चाहते हैं । इस बुराई भरे संसार में अपने आप को दूर रखने के लिए वंशीधर अपने धैर्य को ही अपमा मित्र, बुद्धि को अपनी पथप्रदर्शक और आत्मावलंबन को ही अपना सहायक बनाया।

25.

तुलसीदास ने पंडित और मूर्ख की अलग पहचान कैसे बताई है?

Answer»

तुलसी कहते हैं कि जब तक मनुष्य काम (वासना), क्रोध, मद, लोभ से ग्रसित रहता है तब तक वह विद्वान होकर भी मूर्ख के समान है। इसलिए मनुष्य को काम, क्रोध, मद तथा लोभ का शीघ्र ही त्याग कर देना चाहिए।

26.

इसलिए नहीं कि अलोपीदीन ने क्यों यह कर्म किया बल्कि इसलिए कि वह कानून के पंजे में कैसे आए । ऐसा मनुष्य जिसके पास असाध्यय साधन करनेवाला धन और अनन्य वाचालता हो, वह ययों कानून के पंजे में आए । प्रत्येक मनुष्य उनसे सहानुभूति प्रकट करता था । अपने आस-पास अलोपीदीन जैसे व्यक्तियों को देखकर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? उपर्युक्त टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए लिखें ।

Answer»

हमारे देश की मुख्य समस्याओं में से एक समस्या भ्रष्टाचार की है, जिसे अलोपीदीन जैसे धनवान और शक्तिशाली अपने लाभ के लिए अनैतिक और गैरकानूनी रूप से धंधे के लिए फैला रहे हैं । इसका खामियाजा पूरा समाज भुगतता है । इसलिए वंशीधर जैसे ईमानदार प्रमाणिक व्यक्ति की आवश्यकता है । जो ऐसे भ्रष्टाचारी को अपनी हिरासत में ले और कानून के हवाले करे ।’

27.

नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर की मजार है । निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए।

Answer»

इसमें पद से ज्यादा महत्त्व ऊपरी आय (रिश्वत) को दिया गया है । इसी बात को समझाने के लिए वृद्ध मुंशी अपने पुत्र बंशीधर को समझाता है कि ध्यान मजार (पद) पर नहीं चढ़ावे और चादर (रिश्वत) पर रखना।

28.

अब ब्रज में कौन रहेगा?

Answer»

अब व्रज में बाँसुरी ही रहेगी।

29.

दोहे का भावार्थ लिखें:तुलसी संत सुअंब तरु, फूलि फलहिं पर-हेत।इतते ये पाहन हनत, उतते वे फल देत ॥३॥

Answer»

तुलसीदास जी कह रहे हैं कि संत पुरुष उस आम के वृक्ष की भाँति होते हैं। जो आम का वृक्ष दूसरों का उपकार करने के लिए ही फलता-फूलता है। लोग धरती से उसकी ओर पत्थर फेंकते हैं, तो वह आम का फल उन्हें प्रदान करता है। उसी प्रकार संतों का चाहे जितना ही अपमान क्यों न किया जाय, पर वे हम लोगों का उपकार ही करते हैं।

30.

सुअंब तरू दूसरों के हित के लिए क्या देता है?

Answer»

सुअंब तरू दूसरों के हित के लिए फल देता है।

31.

तुलसीदास के अनुसार संत के स्वभाव का वर्णन कीजिए।

Answer»

तुलसीदास जी के अनुसार संत का स्वभाव फलदार आम के वृक्ष की तरह होना चाहिए। आम का वृक्ष दूसरों की भलाई के लिए ही फलता और फूलता है। मनुष्य आम को पाने के लिए पेड़ को पत्थर मारता है, बदले में पेड़ मनुष्य को फल (आम) देता है। उसी प्रकार संतो को चाहिए कि वे लोक निंदा कि परवाह न कर समाज को सुधारने के कार्य में लगे रहें।

32.

संत का स्वभाव कैसा होता है?

Answer»

संत का स्वभाव आम के पेड़ की तरह होता है।

33.

ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:काम, क्रोध, मद, लोभकी, जौ लौं मन में खान।तौं लौ पंडित मूरखौ, तुलसी एक समान।। 

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘तुलसीदास के दोहे’ नामक संग्रह से लिया गया है। इसके रचयिता तुलसीदास हैं।
संदर्भ : तुलसीदास जी कहते है कि व्यक्ति चाहें जितना बड़ा विद्वान क्यों न हो, जब तक उसके पास अहंकार और लोभ जैसे संस्कार उसमें विद्यमान रहते हैं तब तक वह मूर्ख के समान ही होता है।
स्पष्टीकरण : तुलसीदास कहतें हैं- जब तक हमारे मनरूपी खजाने में काम-क्रोधा आदी अरिषड्वर्ग स्थिर रहते हैं तब तक मूर्ख और पंड़ित एक समान होते हैं। एक साधारण मनुष्य जो उपरोक्त मनोविकारों से बचकर रहता है, वही महान होता है। नहीं तो बड़ा पंडित भी मूर्ख बन जाता है।

34.

पंडित और मूर्ख एक समान कब लगते हैं?

Answer»

काम, क्रोध, मद और लोभ को मन में धारण करने पर पंडित और मूर्ख एक समान लगते हैं।

35.

तुलसीदास ने स्वाभिमान की रक्षा और स्नेह स्वागत के बारे में क्या कहा है?

Answer»

तुलसीदास कहते हैं कि तेजहीन मनुष्य का इस संसार में सदैव ही अपमान होता है। अतः हर एक मनुष्य को अपना तेज अर्थात स्वाभिमान को बचाएं रखना चाहिए। तेजवान व्यक्ति का कोई भी अपमान नहीं कर सकता।

36.

गोपी स्वांग में कृष्ण की किस वस्तु का उपयोग नहीं करेंगी?

Answer»

गोपी स्वांग में कृष्ण की उस मुरली का उपयोग नहीं करेंगी, जिसे कृष्ण अपने होंठों पर रखकर बजाते थे।

37.

तुलसीदास ने बुझी हुई आग का उदाहरण देकर क्या समझाया है?

Answer»

तुलसी बुझी हुई आग का उदाहरण देकर कहते हैं कि आग के बुझ जाने पर, राख को न केवल छूना आसान हो जाता है, बल्कि उसे लोग कुचल भी देते हैं। उसी तरह तेजहीन मनुष्य को भी लोग अपमानित करते हैं। उसे कुचल देते हैं।

38.

तुलसीदास काया और मन की उपमा किससे देते हैं?

Answer»

तुलसीदास काया को खेत और मन को किसान की उपमा देते हैं।

39.

दोहे का भावार्थ लिखें:आवत ही हर्षे नहीं, नैनन नहीं सनेह।तुलसी तहाँ न जाइए, कञ्चन बरसे मेह ॥८॥

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि यदि किसी के घर जाने पर वह प्रसन्न नहीं होता और उसके नेत्रों में स्नेह नहीं झलकता, तो उसके घर में कभी नहीं जाना चाहिए, भले ही वहाँ सोने की वर्षा क्यों न होती हो। अर्थात् कोई व्यक्ति कितना ही बड़ा अमीर क्यों न हो, उसके घर जाने पर अतिथि सत्कार नहीं होता हो, तो वहाँ नहीं जाना चाहिए।

40.

दोहे का भावार्थ लिखें:काम, क्रोध, मद, लोभकी, जौ लौं मन में खान।तौं लौ पंडित मूरखौ, तुलसी एक समान ॥७॥

Answer»

तुलसीदास जी कहते हैं कि जब तक मनुष्य के मन में काम (वासना), क्रोध, घमंड, लोभ आदि विकार उत्पन्न होते रहते हैं, तब तक वह विद्वान होते हुए भी मूर्ख के समान है। इसलिए मनुष्य को काम, क्रोध, मद तथा लोभ का शीघ्र ही त्याग कर देना चाहिए।

41.

पंडित अलोपीदीन के चरित्र पर प्रकाश डालिए ।

Answer»

पंडित अलोपीदीन जमींदार, धनवान और दातागंज के निवासी हैं । उनके यहाँ अंग्रेज भी शिकार खेलने के लिए आते हैं । लाखों का कारोबार चलता है । ऐसा कोई नहीं है, जो उनका ऋणी न हो, व्यापार भी लंबा-चौड़ा था । बारहों महीने उनका सदाव्रत चलता रहता था । पंडित अलोपीदीन नमक की कालाबाजारी भी करते हैं । अपने धन के बल पर सभी अफसरों को गुलाम बना के रखा है ।

अपने धन के बल पर ही ये कोर्ट में वकीलों की सेना खड़ी कर देते हैं । वकील धन के कारण ही सत्य को झूठ साबित कर देते हैं और न्यायालय से मुक्त हो जाते हैं । कहानी के अंत में पंडित अलोपीदीन मुंशी वंशीधर की ईमानदारी से प्रभावित होकर अपनी निजी संपत्ति का मैनेजर बना देते हैं, जो उनकी ईमानदारी के सम्मान को उजागर कर देता है । परंतु कहानी के माध्यम से देख्खें तो पंडित अलोपीदीन भ्रष्ट, धनी, शोषक और अनैतिक चरित्र ही उभरकर सामने आते है ।

42.

ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:तुलसी संत सुअंब तरु, फूलि फलहिं पर-हेत।इतते ये पाहन हनत, उतते वे फल देत॥ 

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘तुलसीदास के दोहे’ नामक संग्रह से लिया गया है। इसके रचयिता तुलसीदास हैं।
संदर्भ : यहाँ तुलसीदास संत लोगों की विशेषता पर प्रकाश डाल रहे हैं।
स्पष्टीकरण : तुलसीदास कहते हैं कि संत पुरुष उस आम के पेड़ की तरह होते हैं जो हमेशा दूसरों को मीठे फल देता रहता है। बदले में वह कुछ भी नहीं लेता। वह तो दूसरों का उपकार करने के लिए ही फलता-फूलता है। लोग धरती से पत्थर भी फेंकते हैं तो भी वह उन्हें फल ही देता है। संत पुरुष भी ठीक वैसे ही होते है। उनका कितना भी अपमान किया जाए, वे विनम्रता नहीं त्यागते हैं। क्रोध नहीं करते हैं। उनके जीवन का उद्देश्य दूसरों का हित करना ही होता है। एक जगह तुलसी यह भी कहते हैं कि ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ अर्थात् दूसरों की भलाई से बड़ा और कोई धर्म नहीं हो सकता। संत पुरुषों के लिए परहित ही धर्म होता है।
विशेष : अवधी भाषा का प्रयोग। लोक-कल्याण की महत्ता पर प्रकाश डाला गया है।

43.

काव्यांशों की सप्रसंगै व्याख्याएँ।नील जल में या किसी कीगौर झिलमिल देहजैसे हिल रही हो।और ……………….जादू टूटता है इस उषा का अबसूर्योदय हो रहा है।

Answer»

कठिन शब्दार्थ- नील = नीला। गौर = गोरी झिलमिल = रह-रहकर चमकती। देह = शरीर। जाँद = मोहक दृश्य। सूर्योदय = पूर्व दिशा में सूर्य का निकलना।

संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि शमशेर सिंह की कविता ‘उषा’ से लिया गया है। इस अंश में कवि सूर्य के निकलने से पहले नीले पूर्वी आकाश में छा रहे सुनहले प्रकाश के दृश्य का वर्णन कर रहा है।

व्याख्या- कवि कह रहा है कि सूर्योदय से पूर्व के आकाश के दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे नीले जल में किसी (सुंदरी) का गोरा और झिलमिलाता शरीर हिल रहा हो।
सूर्य के उदय होते ही आकाश का यह उषा काल का जादू जैसा मोहक दृश्य अदृश्य हो जाता है। सूर्य के प्रकाश में सारे रंग गायब हो जाते हैं।

विशेष-
(i) कवि ने नीले आकाश का नीला सरोवर और सूर्योदय से पूर्व सूर्य की किरणों से उत्पन्न पीली या सुनहली आभा को, एक गोरी रमणी की जल में झिलमिल करती देह बताया है।
(ii) लग रहा है सूर्योदय के समय भी पीली ज्योति रूपी सुंदरी नीले आकाश रूपी जल में स्नान कर रही है। उसकी झिलमिलाती गोरी देह जल के साथ हिलती प्रतीत हो रही है।
(iii) बिम्ब-विधान अद्भुत और मनमोहक है।
(iv) भाषा सरल है। शब्दों का चयन विषय के अनुरूप है।
(v) वर्णन शैली में कवि की शब्द-चित्र अंकित करने की कुशलता प्रमाणित हो रही है। 

(vi) काव्यांश में ‘नील जल…………………..हिल रही हो’। कथन में उत्प्रेक्षा अलंकार है।

44.

काव्यांशों की सप्रसंगै व्याख्याएँ।बहुत काली सिल जरा से लाल केसर सेकि जैसे धुल गई होस्लेट पर या लाल खड़िया चाकमल दी हो किसी ने

Answer»

कठिन शब्दार्थ- सिल = मसाले, चटनी आदि पीसने के लिए प्रयुक्त होने वाला पत्थर का टुकड़ा। केसर = कश्मीर में पैदा होने वाला लाल-पीले रंग का एक पुष्प। स्लेट = हेलके काले पत्थर की चौकोर पतली प्लेट, जिस पर चाक या खड़िया से लिखा जाता है। खड़िया = सफेद रंग की मिट्टी का टुकड़ा जिससे बोर्ड या स्लेट पर लिखी जाता है। चाक = खड़िया, खड़िया से बनाई गई लिखने की बत्ती।

संदर्भ तथा प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि शमशेर बहादुर सिंह की कविता ‘उषा’ से लिया गया है। कवि अनूठे उपमानों से प्रात:काल के आकाश के शब्द-चित्र प्रस्तुत कर रहा है।

व्याख्या-कवि कहता है गहरे नीले या काले आकाश में उषाकालीन लालिमा ऐसी लग रही है मानो कोई बहुत काली सिल लाल केसर मिले पानी से धो दी गई हो अथवा किसी ने लाल रंग की खड़िया या चाक को स्लेट पर मल दिया हो।

विशेष-
(i) आकाश के लिए ‘काली सिल’ तथा ‘स्लेट’ अनूठे और सटीक उपमान हैं। नीले आकाश में उषा की हल्की लालिमा के दृश्य को अंकित करने के लिए ‘लाल केसर से धुला होना’ तथा स्लेट पर ‘लाल खड़िया मला होना भी जाने-पहचाने घरेलू बिम्ब हैं।
(ii) भाषा सरल है और वर्णन शैली बिम्ब अंकित करने वाली है।
(iii) आकाश में बहुत काली ………………… धुल गई हो’ तथा ‘स्लेट पर ……………किसी ने अंशों में उत्प्रेक्षा तथा संदेह अलंकार भी है।
(iv) काव्यांश में प्रयोगवादी काव्य की झलक है।

45.

काव्यांशों की सप्रसंगै व्याख्याएँ।प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसेभोर का नभ राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है)

Answer»

कठिन शब्दार्थ- भोर = प्रात:काल। चौका = रसोईघर अथवा उसका फर्श । लीपा हुआ = राख के घोल से पोता गया।

संदर्भ तथा प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि शमशेर बहादुर सिंह की कविता ‘उषा’ से उद्धृत है। कवि ने इसमें भोर के समय का एक अनूठा शब्द-चित्र अंकित किया है।

व्याख्या- कवि कहता है कि प्रात: का आकाश एक गहरे नीले रंग जैसा था। भोर होने पर वह प्रकाश के मेल से राख जैसे रंग का हो गया। अब वह राख से लिपे फर्श वाले, किसी रसोईघर के समान लग रहा है। अभी-अभी लिपे जाने के कारण वह गीला है।

विशेष-
(i) कवि ने प्रातः काल के दृश्य को एक घरेलू बिम्ब (शब्द-चित्र) के द्वारा प्रस्तुत किया है।
(ii) प्रातः के आकाश के लिए कवि द्वारा रंगों का चुनाव वास्तविकता के निकट है।
(iii) कवि की उपमाएँ नए प्रयोग हैं।
(iv) आकाश को ‘नीले शंख जैसा’ और ‘राख के लिये चौका’ जैसा बताने में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(v) भाषा सरल और शैली बिम्ब विधायिनी है।

46.

“नील जल में या किसी कीगौर झिलमिल देह,जैसे हिल रही हो।”उपर्युक्त विम्ब द्वारा कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य का चित्रण किया है। क्या इस अंश में प्रयुक्त उपमान आपको उपयुक्त प्रतीत होते हैं?

Answer»

इस शब्द-चित्र द्वारा कवि शमशेर बहादुर सिंह ने प्रात:कालीन आकाश के दृश्य को साकार करना चाहा है। सूर्योदय से पहले आकाश में कुछ समय के लिए पीला प्रकाश उदित होता है। नीले आकाश में झिलमिलाता यह पीला प्रकाश कवि को उपर्युक्त विम्ब की रचना को प्रेरित करता है। कवि द्वारा चुने गए उपमान प्राकृतिक दृश्य के अनुरूप ही है। नीला आकाश, नीला जल है और पीला प्रकाश जल में झिलमिलाती किसी गोरी रमणी की देह है। निरंतर होते दृश्य परिवर्तन को कवि ने हिलती’ शब्द द्वारा व्यक्त किया है। अतः इस विम्ब में प्रयुक्त उपमान दृश्य के अनुरूप और उसमें पूर्णता तथा प्रभाव उत्पन्न करने वाले हैं।

47.

‘उषा’ कविता में आए अलंकारों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

‘उषा’ कविता में उपमा तथा उत्प्रेक्षा अलंकारों का प्रयोग हुआ है।

48.

पण्डित आलोपीदीन को वंशीधर उत्तर देता है – ……(क) पैसे से निपटारा हो जाएगा।(ख) चालीस हजार नहीं, चालीस लाख पर भी असम्भव है।(ग) पचास हजार तक सम्भव है।(घ) ईश्वर के लिए मुझे माफ कर दीजिए।

Answer»

सही विकल्प है पंडित अलोपीदीन को वंशीधर उत्तर देता है, चालीस हजार नहीं; चालीस लाख पर भी असम्भव है।

49.

ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।पाप पुण्य दोउ बीज हैं, बुवै सौ लुनै निदान॥

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘तुलसीदास के दोहे’ नामक संग्रह से लिया गया है। इसके रचयिता तुलसीदास हैं।
संदर्भ : यहाँ तुलसीदास जी कहते हैं कि हम जैसे कर्म करते हैं, हमें वैसा ही फल मिलता है, इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए।
स्पष्टीकरण : कवि कहते हैं कि हमारा शरीर खेत है और हमारा मन किसान है। पाप और पुण्य ये दो प्रकार के बीज हैं। अब हम इनमें से जो बीज बोएँगे, हमें वैसा ही फल मिलेगा।
अतः अच्छा या बुरा फल पाना हमारे ही हाथ में है।

50.

“स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी है किसी ने”, “उषा’ कविता की यह पंक्ति बाल मनोविज्ञान पर प्रकाश डालती है। कैसे?

Answer»

पहले बच्चों को लिखना, गणित के प्रश्न हल करना आदि सिखाने के लिए स्लेट का प्रयोग होता था। लिखे को मिटाकर बच्चे बार-बार स्लेट का प्रयोग कर सकते थे। कभी बच्चे खेल-खेल में भी स्लेट पर मनचाही आकृतियाँ बनाकर खुश हुआ करते थे। कवि द्वारा ‘उषा’ कविता में स्लेट संबंधी उपमान बच्चों के मनोविज्ञान की ओर संकेत करता है।