This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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सुनीता पंड्या सुनीता विलियम्स कैसे बनीं? |
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Answer» माइकल विलियम्स सुनीता पंड्या के खास मित्र और सहपाठी थे। सुनीता उनसे शादी करने के कारण सुनीता पंड्या से सुनीता विलियम्स बनीं। |
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What............. she do in her free time ?(A) Done (B) Have (C) Does (D) Had |
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Answer» What does she do in her free time. |
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कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :(उर्सबाईन, अटलांटिस, कालमाउथ, अंतरिक्षयात्री, मेहसाना, भारतीय)(1) राकेश शर्मा प्रथम भारतीय ........... हैं।(2) सुनीता का .......... होना हमारे लिए गर्व की बात है।(3) झुलासन गाँव गुजरात के ........ जिले में है।(4) दीपकभाई पंड्या मैसाचुसेट्स केकालमाउथ............ में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन थे।(5) सुनीता की माता का नाम ........... था।(6) स्पेसशटल .......... में सुनीता समेत सात अंतरिक्षयात्री थे। |
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Answer» (1) राकेश शर्मा प्रथम भारतीय अंतरिक्षयात्री हैं। (2) सुनीता का भारतीय होना हमारे लिए गर्व की बात है। (3) झुलासन गाँव गुजरात के मेहसाना जिले में है। (4) दीपकभाई पंड्या मैसाचुसेट्स के कालमाउथ में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन थे। (5) सुनीता की माता का नाम उर्सबाईन था। (6) स्पेसशटल अटलांटिस में सुनीता समेत सात अंतरिक्षयात्री थे। |
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भारतीय नारियों को सुनीता से क्या सीख मिलती है? |
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Answer» सुनीता 10 दिसंबर, 2007 को ‘अटलांटिस’ नामक अंतरिक्ष यान से स्पेस स्टेशन पहुंची। |
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नील आर्मस्ट्रोंग ……….. का अंतरिक्षयात्री था।A. अमरीकाB. रशियाC. इंग्लैंडD. फ्रांस |
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Answer» उत्तर : A. अमरीका |
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सुनीता कब और किस यान से स्पेस स्टेशन पहुंची? |
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Answer» सुनीता 10 दिसंबर, 2007 को ‘अटलांटिस’ नामक अंतरिक्ष यान से स्पेस स्टेशन पहुंची। |
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सुनीता विलियम्स के लिए हमें किस बात का गर्व है? |
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Answer» सुनीता भारतीय नागरिक नहीं है, परंतु उसका मूल गुजरात से जुड़ा है। उनके पिता दीपकभाई पंड्या जन्म से गुजराती हैं। उन्होंने अपना आधा जीवन गुजरात में बिताया था। यहाँ वे एक सफल डॉक्टर के रूप में रहे। 1960 में वे हमेशा के लिए अमरीका चले गए। वहाँ उन्होंने युगोस्लाविया की उर्सबाईन बोनी नामक युवती से शादी की। उनकी तीन संतानों में सुनीता सबसे छोटी है। इस प्रकार गुजराती मूल होने के कारण सुनीता भारतीय है। इस तरह सुनीता के भारतीय होने पर हमें गर्व है। |
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करनाल शहर किस प्रांत में है?A. पंजाब मेंB. उत्तर प्रदेश मेंC. हरियाणा मेंD. राजस्थान में |
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Answer» C. हरियाणा में |
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अंतरिक्षयात्रा में किस प्रकार की मुश्किलें आती हैं? |
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Answer» अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन में रहना आसान नहीं है। वहाँ खाने से लेकर नहाने तक की सभी क्रियाओं में मुश्किलें हैं। |
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सुनीता का गोताखोरी का अनुभव कहाँ काम आया? |
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Answer» कल्पना चावला भारतीयमूल की पहली महिला अंतरिक्षयात्री थीं। |
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कल्पना चावला कौन थीं? |
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Answer» सुनीता का गोताखोरी का अनुभव स्पेसवॉक के प्रशिक्षण में काम आया। |
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तना किसके कारण मज़बूत बना है? |
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Answer» तना जड़ के कारण मज़बूत बना है। |
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डालियाँ कहाँ से फूटती हैं? |
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Answer» डालियाँ तने से फूटती हैं। |
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‘दिन में गुलमर्ग की शोभा’ का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए। |
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Answer» दिन में गुलमर्ग का हरा-भरा रूप आँखों को मुग्ध कर देता है। धरती से लेकर आकाश तक हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है। हरी घास के बीच तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। वातावरण में नई-नई कोपलें फूट आती हैं। सैलानी घुड़सवारी का आनंद लेते नजर आते हैं। हर क्षण नए अनुभव और रोमांच की सृष्टि होती है। आकाश में बादलों के नन्हे-नन्हे द्वीप तैरते दिखाई देते हैं। पगडंडियाँ भेड़-बकरियों के रेवड़ों से ढक जाती हैं। इस तरह दिन में गुलमर्ग की शोभा देखने लायक होती है। |
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भौरा किस रस को चाव से बखता है? |
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Answer» भौरा कमल-रस को चाव से चखता है। |
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निम्नलिखित विधान ‘सही’ है या ‘गलत’ यह बताइए :जहाज का पंछी उड़कर फिर जहाज पर नहीं आता।करील के फल का रस मधुर होता है।श्रीकृष्ण के शरीर पर धूल लगी हुई है।श्रीकृष्ण अनेक अलंकारों से सुशोभित हैं।श्रीकृष्ण के सौंदर्य की एक झलक से जीवन धन्य हो जाए। |
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Answer» 1. गलत 2. गलत 3. सही 4. सही 5.सही |
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सूर धन्य क्यों हुए ? |
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Answer» सूर धन्य हुए क्योंकि उन्हें श्रीकृष्ण की दुर्लभ छबि के दर्शन हो गए हैं। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :“यहाँ तो डेंटिस्ट मक्खी मारते होंगे।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘यात्रा जापान की’ नामक पाठ से लिया गया है जिसकी लेखिका ममता कालिया हैं। संदर्भ : जापान की सभी लड़कियाँ खाना खाने के बाद हर बार, बिना नागा दाँत साफ़ करती हैं। स्पष्टीकरण : अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने हेतु छः सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल जापान की यात्रा करते हैं। जापानियों के रीति-रिवाज, तथा जापान में हिन्दी प्रचार-प्रसार का वर्णन इस यात्रावृत्तांत में मिलता है। विदेशी भाषा अध्ययन संस्थान के कार्यक्रम के दौरान लेखिका और ऋचा मिश्र बाथरूम जाते हैं। वहाँ उन्हें एक दिलचस्प नजारा देखने को मिलता है। वॉशबेसिन के सामने छात्राओं की लम्बी कतार है। सबने अपने पर्स से टूथब्रश और टूथ पेस्ट निकालकर रखे हैं। बाद में पता चला, सभी लड़कियाँ खाना खाने के बाद हर बार, बिना नागा दाँत साफ़ करती हैं। इसे सुनकर लेखिका ममता कालिया ने इस वाक्य को कहा। |
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बालक कृष्ण के स्वरूप का वर्णन कीजिए। |
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Answer» बालक श्रीकृष्ण की मूर्ति बड़ी मनोहर है। वे अपने हाथों में मक्खन लिए घुटनों के बल चल रहे हैं। उनके मुंह में मक्खन लगा हुआ है। उनके गाल सुंदर और आँखें चंचल हैं। उनके माथे पर गोरोचन का तिलक लगा हुआ है। उनकी लटें मदमस्त भौंरों जैसी सुंदर लग रही हैं। वे अपने गले में कठुला की माला पहने हुए हैं। इस प्रकार श्रीकृष्ण की छबि अत्यंत मनमोहक है। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :“यहाँ टिकट खाँचे में डाल कर जल्द अंदर घुसो, उस पार जाकर अपनी टिकट उठा लो।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘यात्रा जापान की’ नामक पाठ से लिया गया है जिसकी लेखिका ममता कालिया हैं। संदर्भ : सुरेश ऋतुपर्ण ने यह वाक्य मेट्रो-ट्रेन टिकट निकालते समय प्रतिनिधियों से कहा। स्पष्टीकरण : सुरेश ऋतुपर्ण ने यह वाक्य रेल-टिकट निकलवाते समय प्रतिनिधियों से धैर्य के साथ कहा – यहाँ टिकट खाँचे में डालकर जल्द अन्दर घुसो, उस पार जाकर अपनी टिकट उठा लो। मेट्रो-ट्रेन के टिकट के लिए सावधानी व फुर्ती दोनों की आवश्यकता होती है। |
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सूर ने किन उदाहरणों द्वारा अपनी अनन्य भक्ति भावना प्रकट की है? |
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Answer» सूरदासजी कहते हैं कि मैं श्रीकृष्णरूपी जहाज का पंछी हूँ। मैं उनें छोड़कर और कहीं नहीं जा सकता। श्रीकृष्ण की महिमा भूलकर मैं और किसी देवता का ध्यान नहीं कर सकता। श्रीकृष्ण जैसी गंगा का जल मिलने के बाद मुझे कुएँ का जल पीने की चाह नहीं है। मेरा मन – मधुकर श्रीकृष्ण की भक्ति का अंबुज रस चखने के बाद हैं। उनको छोड़कर मैं बकरी का दूध दुहने क्यों जाकै इस प्रकार सूरदासजी ने विभिन्न उदाहरणों द्वारा अपनी भक्तिभावना प्रकट की है। |
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सूरदास छेरी (बकरी) दुहने की जरूरत क्यों नहीं समझते? |
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Answer» सूरदास अपने प्रभु श्रीकृष्ण को कामधेनु मानते हैं। इसलिए बकरी दुहने की जरूरत नहीं समझते। |
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सूरदास ने किस प्यासे को ‘दुर्मति’ कहा है? |
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Answer» गंगा नदी के जल से शुद्ध और पवित्र अन्य कोई जल नहीं है। जो प्यासा व्यक्ति उसे छोड़कर अपनी प्यास बुझाने के लिए कुआं खुदवाए उसे सूरदासजी ने ‘दुर्मति’ कहा है। |
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निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए :गंगाजल को छोड़कर अपनी प्यास बुझाने कोई कुआँ क्यों खुदवाए?घुटनों के बल चलते श्रीकृष्ण की सुंदरता मोहक लग रही है।सुशोभित श्रीकृष्ण के सौंदर्य को देखना अत्यंत सुखकर लगता है।फिर सौ कल्प तक जीने की कोई आवश्यकता नहीं।भगवान की महिमा संसार में अनूठी है। |
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Answer» 1. प्यास 2. सुंदरता 3. सौंदर्य 4. आवश्यकता 5. महिमा |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :“इनकी हर मंज़िल पर इतनी जगह जानबूझकर छोड़ी गई है जो भूकम्प के धक्के सह सके।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘यात्रा जापान की’ नामक पाठ से लिया गया है जिसकी लेखिका ममता कालिया हैं। संदर्भ : जापान में इतने तूफान और भूचाल आते हैं, इतनी गगनचुम्बी इमारते फिर क्यों बनायी गयीं हैं? इस प्रश्न के उत्तर में सुरेश जी इस वाक्य को कहते हैं। स्पष्टीकरण : ओसाका यूनिवर्सिटी के अंतराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के लिए ममता कालिया ने प्रतिनिधि मंडल के साथ जापान की यात्रा की। जापान में हुई तकनीकी प्रगति, जापानियों की कर्मनिष्ठता का वर्णन इसमें देखने को मिलता है। वे तोक्यो नगर को देखने निकलीं। वे कहती हैं जैसे-जैसे दिन छुपता है, तोक्यो उजागर होता जाता है – गलियों में, बाजारों में, सागर और किनारों में। ममता कालिया सुरेश ऋतुपर्ण से पूछती हैं – जापान में इतने भूचाल और तूफान आते हैं, इतनी गगनचुम्बी इमारतें क्यों बनायी गयी हैं? इस प्रश्न के उत्तर में सुरेश जी कहते हैं – इनकी हर मंजिल पर इतनी जगह जानबूझकर छोड़ी गई है जो भूकम्प के झटके सह सके। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :“यहाँ प्रकृति की तूलिका में सात से अधिक रंग दिखाई दे रहे हैं।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘यात्रा जापान की’ नामक पाठ से लिया गया है जिसकी लेखिका ममता कालिया हैं। ओसाका शहर का वर्णन करते हुए ममता कालिया जी ने इसे कहा। स्पष्टीकरण : जापान की राजधानी तोक्यो का कार्यक्रम समाप्त कर लेखिका का दल बुलेट ट्रेन से ओसाका शहर पहुँचा। ओसाका स्टेशन पर उच्चायोग के प्रतिनिधि वैन लेकर इंतजार कर रहे थे। वैन बहुत क्षिप्र गति से चल रही थी। सड़क की दोनों ओर बड़ी इमारतें थीं। यहाँ अजनबी नामपटों के साथ कुछ ऐसे नामपट भी झलक जाते हैं जिनकी हम भारतीयों को सुनने की, देखने की आदत पड़ गयी है जैसे हिताची, मित्सुबिशि, काकुरा आदि। चमचमाती इमारतों के बाद रंगबिरंगे पेड़ों का सिलसिला शुरू हो जाता है। लेखिका कहती हैं – यहाँ प्रकृति की तूलिका में सात से अधिक रंग दिखाई दे रहे हैं – मोमिजी की पत्तियाँ लाल हैं, कुछ नारंगी और गुलाबी रंग भी मिले हैं, साकुरा के पेड़ सफेद फूलों से ढंके हैं। हरा रंग यहाँ चटक हरा है जैसे पत्तों पर किसी चित्रकार ने एक बार फिर रंग पोत दिया हो। |
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संतों भाई आई ग्याँन की आँधी रे।भ्रम की टाटी सबै उडाँनी, माया रहै न बाँधी।।हिति चित्त की दै यूँनी गिराँनी, मोह बलिंडा तूटा।त्रिस्नों छाँनि परि घर ऊपरि, कुबधि का भाँडाँ फूटा।।जोग जुगति करि संतौं बाँधी, निरचू चुवै व पाँणी।कूड़ कपट काया का निकस्या, हरि की गति जब जाँणी।।आँधी पीछे जो जल चूठा, प्रेम हरि जन भींनौं।कहै कबीर भाँन के प्रगटे उदित भया तम खीनों।।भावार्थ : कबीर ज्ञान का महत्त्व बताते हुए कहते हैं कि हे संतों ! ज्ञान की आँधी आई है। उसके प्रभाव से भ्रम की टाटी उड़ गई है। अब वह माया की रस्सी से बँधा नहीं है। स्वार्थरूपी दोनों खंभे और मोह की बल्लियाँ टूट गई हैं। तृष्णा का छप्पर ऊपर गिर जाने से घर में रहे कुबुद्धि के सभी बर्तन टूट गए हैं। संतों ने योग-साधना के उपाय से एक ऐसा मजबूत छप्पर बनाया है, जिससे थोड़ा भी पानी नहीं टपकता है। संतों ने जब ईश्वर का मर्म जान लिया तो उनके शरीर से समस्त विकार नष्ट हो गए। इस ज्ञान रूपी आँधी के पश्चात् जो प्रभु के प्रेम की वर्षा हुई है उसमें सभी भीग गए हैं। ज्ञान के सूर्योदय से मन का अंधकार नष्ट1. कबीर ने कैसी आँधी आने की बात कही है ?2. शरीर का कूड़ कपट किसे कहा गया है ?3. साधारण आँधी और ज्ञान की आँधी के विषय में कबीर ने क्या कहा है ?4. हरि की गति जान लेने से क्या परिवर्तन आया ?5. ‘कूड कपट काया निकस्या’ में कौन-सा अलंकार है ? |
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Answer» 1. कबीर ने ज्ञान की आँधी आने की बात कही है। 2. शरीर का कूड़ कपट मोह-माया, लालच, छलकपट, कुबुद्धि और सांसारिक विषय-वासनाओं को कहा गया है। 3. साधारण आँधी के आने पर छप्पर गिर जाते हैं, उसमें रखे हुए बर्तन टूट जाते है। ज्ञान की आँधी आने पर मन के स्वार्थ का खंभा तथा मोहमाया का छप्पर गिर जाता है, उसमें रहे विकार, छलकपट, लालच और विषय-वासनाएँ नष्ट हो जाती हैं। 4. हरि की गति जान लेने के पश्चात् प्रभु-भक्ति की प्रेमवर्षा में कवि का मन भीग गया और ज्ञान क उदय होने से मन का अंधकार नष्ट हो गया। 5. ‘कूड कपट काया निकस्या’ में अनुप्रास अलंकार है। |
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श्रीकृष्ण के रूप सौन्दर्य का वर्णन कीजिए। |
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Answer» सूरदास भगवान श्रीकृष्ण के रूप-सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहते हैं- गोपिकाओं ने यमुना नदी तट पर श्रीकृष्ण को देख लिया। वे मोर मुकुट पहने हुए हैं। कानों में मकराकृत कुण्डल धारण किये हुए हैं। पीले रंग के रेशमी वस्त्र पहने हुए हैं। उनके तन पर चन्दन-लेप है। वे अत्यंत शोभायमान हैं। उनके दर्शन मात्र से गोपिकाएँ तृप्त हुईं। हृदय की तपन बुझ गई। वे सुन्दरियाँ प्रेम-मग्न हो गईं। उनका हृदय भर आया। सूरदास कहते हैं कि प्रभु श्रीकृष्ण अन्तर्यामी हैं और गोपिकाओं के व्रत को पूरा करने के लिए ही पधारे हैं। |
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कविताआ रही रवि की सवारीनव किरण का रथ सजा है,कलि-कुसुम से पथ सजा है,बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाकधारी।आ रही रवि की सवारी।विहग बंदी और चारणगा रहे हैं कीर्ति गायनछोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी।आ रही रवि की सवारी।चाहता, उछलूँ विजय कहपर ठिठकता देखकर यहरात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी।आ रही रवि की सवारी।उपर्युक्त कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :1. सूर्य किस पर सवार होकर आ रहा है ?2. सूर्य के स्वागत में बादल किस तरह खड़े नजर आ रहे हैं ?3. सूर्यरूपी राजा की प्रशंसा में कौन-कौन कीर्तिगीत गा रहे हैं ?4. राह में भिखारी बनकर कौन खड़ा है ?5. ‘रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी’ में कौन-सा अलंकार है ? |
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Answer» 1. सूर्य किरणों के रथ पर सवार होकर आ रहा है ।। 2. सूर्य के स्वागत में बादल रंगीन पोशाक पहनकर खड़े नजर आ रहे हैं । 3. सूर्यरुपी राजा की प्रसंशा में पक्षी रूपी चारण और बंदीगण कीर्तिगीत गा रहे हैं । 4. राह में चन्द्रमा भिखारी बनकर खड़ा है । 5. ‘रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी’ में अनुप्रास अलंकार है । |
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भाव स्पष्ट कीजिए।क. हिति चित्त की है चूंनी गिरानी, मोह बलिंडा तूटा।ख. आँधी पीछे जो जल बूठा, प्रेम हरिजन भींनाँ। |
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Answer» क. यहाँ ज्ञान की आँधी के फलस्वरूप मनुष्य के मन का भ्रम और अज्ञान का पर्दा हट गया, जिससे मनुष्य के स्वार्थरूपी दोनों खंभे टूट गए तथा मोहरूपी बल्ली भी गिर गई। इससे उसका कामनारूपी छप्पर टूटकर बिखर गया। उसके मन की बुराइयाँ नष्ट हो गई और मन स्वच्छ हो गया। ख. ज्ञानरूपी आँधी के बाद भक्तिरूपी ज्ञान की वर्षा से मन प्रेमरूपी जल से भीग गया और भक्त आनंदित हो उठा अर्थात् ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् मन पवित्र हो जाता है। |
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‘प्रेमी मिले न कोय’ – कबीर ऐसा क्यों कहते हैं ? |
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Answer» ‘प्रेमी मिले न कोय’ कबीर ऐसा इसलिए कहते हैं कि संसार में सच्चे प्रभु-भक्त बहुत कम हैं, ज्यादातर लोग भक्ति का आईबर करते हैं। |
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जापान का गुणधर्म क्या है? |
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Answer» शालीनता जापान का गुणधर्म है। |
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निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रुप लिखिए।पखापखी, अनत, जोग, जगति, बैराग, निरपख |
Answer»
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वाक्य शुद्ध कीजिए :1. हम सातवीं मंज़िल में हैं।2. पीने के लिए गरम पानी अवश्य मिलती है।3. छात्रों ने पूरी एकाग्रता से हमें सुनी।4. बाजार का कोई शोर सुनाई नहीं देती।5. होटल में हिन्दी संगीत चल रही है। |
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Answer» 1. हम सातवीं मंजिल पर हैं। 2. पीने के लिए गरम पानी अवश्य मिलता है। 3. छात्रों ने पूरी एकाग्रता से हमें सुना। 4. बाजार का कोई शोर सुनाई नहीं देता। 5. होटल में हिन्दी संगीत चल रहा है। |
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सूरदास अपने आपको क्यों धन्य मानते हैं? |
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Answer» सूरदास श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं। श्रीकृष्ण के अतिरिक्त वे अन्य किसी का ध्यान नहीं करते। श्रीकृष्ण की मनमोहक छबि सदा उनकी आँखों में बसी रहती है। यह छबि उन्हें अनुपम सुख प्रदान करती है। वे श्रीकृष्ण की इस छबि को दुर्लभ मानते हैं। उन्हें अपने प्रभु की इस अनोखी मूर्ति के दर्शन हुए हैं। इसलिए वे अपने आपको धन्य मानते हैं। |
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‘स्टेशन’ को जापानी भाषा में क्या कहते हैं? |
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Answer» ‘स्टेशन’ को जापानी भाषा में ‘इकी’ कहते हैं। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :“यह किला जापानी संघर्षधर्मिता और जिजीविषा का प्रतीक है।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘यात्रा जापान की’ नामक पाठ से लिया गया है जिसकी लेखिका ममता कालिया हैं। संदर्भ : जापान के ओसाका किले का वर्णन करते हुए लेखिका इसे कहती हैं। स्पष्टीकरण : जापानी में ‘जो’ का अर्थ है किला, ‘जी’ का अर्थ है मंदिर। ओसाका ‘जो’ 1585 ई. में सम्राट तोयोतोमी हिदेयोशी ने बनवाया था। विशाल परिसर में हरियाली और रंगबिरंगे पुष्प पादपों से घिरा यह किला अनेक आख्यानों का पुंज है। कई बार इसके कुछ हिस्सों को पुनर्निर्माण हुआ। किले के चारों ओर गहरी खाई और जलाशय है। किले का प्रवेश-द्वार एक काला विशाल फाटक है और काले पत्थर की प्राचीरें हैं। किले के अंदर मंदिर, संग्रहालय, आदि हैं जो देखने लायक हैं। यहाँ लकड़ी का इतना ज्यादा प्रयोग हुआ है कि कई बार इसमें आग लगने की दुर्घटनाएँ होती रहीं। ओसाका ‘जो’ कई बार बना और नष्ट हुआ। जापानवासियों में अपने सम्राट और अपनी संस्कृति के प्रति अपार श्रद्धा और प्रेम है। यह किला जापानी संघर्षधर्मिता और जिजीविषा का प्रतीक है। |
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विलोम शब्द लिखिए :सुगंध, समर्थ, सौम्य, सुरक्षा।1. सुगंध 2. समर्थ 3. सौम्य 4. सुरक्षा |
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Answer» 1. सुगंध × दुर्गंध 2. समर्थ × असमर्थ 3. सौम्य × वैषम्य 4. सुरक्षा × असुरक्षा |
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गौतम बुद्ध को जापानी भाषा में क्या कहते हैं? |
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Answer» गौतम बुद्ध को जापानी भाषा में दायबुत्सु कहते हैं। |
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एक जमाने में कौन-सा शहर जापान की राजधानी हुआ करता था? |
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Answer» एक जमाने में नारा शहर जापान की राजधानी हुआ करता था। |
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शिन्कान्सेन’ का शाब्दिक अर्थ क्या है? |
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Answer» शिन्कान्सेन’ का शाब्दिक अर्थ है- न्यू ट्रंक लाइन। |
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जापान के होटलों का रिवाज़ क्या है? |
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Answer» जापान के होटलों का रिवाज़ है कि वहाँ सबसे पहले गर्म पानी पीने के लिए दिया जाता है। |
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‘पानी’ के लिए जापानी भाषा में कौन-सा शब्द है? |
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Answer» ‘पानी’ के लिए जापानी भाषा में शब्द है- मिजु। |
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‘ओके’ को जापानी भाषा में क्या कहते हैं? |
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Answer» ‘ओके’ को जापानी भाषा में ‘ऊकी’ कहते हैं। |
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‘स्लम डाग मिलियनेर’ फिल्म किसकी पुस्तक के आधार पर बनी है? |
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Answer» ‘स्लम डाग मिलियनेर’ फिल्म विकास स्वरूप की पुस्तक पर बनी है। |
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एयर इंडिया की उड़ान कितने मिनट विलम्ब से चली? |
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Answer» एयर इंडिया की उड़ान तीस मिनट विलम्ब से चली। |
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काबा फिरि कासी भया, रामहिं भया रहीम।मोट चून मैदा भया, बैठि कबीरा जीम ।भावार्थ : कबीर चाहते है कि जब तक मुझे ज्ञान नहीं था, तब तक मैं अज्ञानियों की तरह धर्म-जाति आदि के भेद से ग्रसित था। ज्ञान-प्राप्ति के बाद मैं राम-रहीम, हिन्दु-मुसलमान के भेद से ऊपर उठ गया हूँ। अब मेरे लिए काबा और काशी में कोई अंतर नहीं रह गया। मन की बुराइयों के कारण जिसे मोटा आटा समझता था, अब वह मैदा हो गया है, जिसे में आराम से खा रहा हूँ अर्थात् अब उनके मन में किसी प्रकार का भेद नहीं रह गया है।1. ‘काबा फिर कासी भया’ का आशय बताइए।2. ‘रामहिं भया रहीम’ का भाव क्या है ?3. कबीर के मन से धार्मिक भेदभाव मिटने से क्या परिवर्तन हुआ ?4. कबीर ने दोहे के माध्यम से क्या संदेश दिया है ? |
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Answer» 1. ‘काबा फिर कासी भया’ का आशय यह है कि मन में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं रह गया। 2. ‘रामहि भया रहीम’ का भाव यह है कि मेरी धर्माधता मिट गई है। अब मेरे लिए राम-रहीम एक ही हैं। 3. कबीर के मन से धार्मिक भेदभाव मिट जाने के बाद उनकी धर्मांधता समाप्त हो गई। अब उनके लिए राम-रहीम, काबा काशी में कोई अंतर नहीं रह गया। वे बड़ी सहजता के साथ जीवन जी रहे हैं। 4. कबीर का संदेश है कि हमें कट्टर या धर्माध नहीं होना चाहिए। राम-रहीम में कोई भेद नहीं है। |
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पुस्तकालय से बाहर निकलते समय अलार्म क्या जताता है? |
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Answer» पुस्तकालय से बाहर निकलते समय अलार्म यह जता देता है कि आपके पास कोई छुपी हुई पुस्तक नहीं है। |
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मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है ? |
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Answer» मनुष्य ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, काबा, काशी, कैलाश आदि तीर्थों तथा योग, वैराग्य तथा अनेक अन्य धार्मिक क्रियाओं में ढूँढ़ता फिरता है। |
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हस्ती चढ़िए ज्ञान को, सहज दुलीचा डारि।स्वान रूप संसार है, पूँकन दे झख मारि ।भावार्थ : कबीर कहते हैं कि तुम ज्ञानरूपी हाथी पर सहजरूपी कालीन बिछाकर अपने मार्ग पर निश्चित होकर चलते रहो। यह संसार कुत्ते के समान है जो हाथी को चलते देखकर अकारण भौंकता रहता है। कहने का आशय है कि ज्ञान-प्राप्ति में लीन साधक को देखकर संसार के लोग उसकी निंदा करते रहते हैं, परन्तु उसे संसारवालों की निंदा की परवाह नहीं करनी चाहिए।1. संसार को किस तरह बताया गया है ?2. ज्ञान-प्राप्ति के मार्ग में कबीर ने किसे आवश्यक माना है ?3. अंतिम पंक्ति में कबीर क्या कहते हैं ?4. कबीर ने ज्ञान-प्राप्ति का क्या उपाय बताया है ?5. दो तत्सम शब्द ढूँढकर लिखिए। |
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Answer» 1. संसार को कुत्ते के समान बताया गया है, जो अकारण किसी की निंदा करता रहता है। 2. ज्ञान-प्राप्ति के मार्ग में कबीर ने सहजता को आवश्यक माना है। 3. अंतिम पंक्ति में कबीर कहते हैं कि साधक को लोगों की निंदा की परवाह किए बिना ज्ञान-प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। 4. कबीर ज्ञान-प्राप्ति का उपाय बताते हुए कहते हैं कि साधक को ज्ञानरूपी हाथी की सवारी सहजता रूपी कालीन बिछाकर करनी चाहिए। कभी किसी की निंदा की परवाह नहीं करना चाहिए। 5. तत्सम शब्द – (1) हस्ती (2) ज्ञान |
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