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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

एक पतली एकसमान छड़ बिंदु `O` पर कीलकित है तथा क्षैतिज तल में एक समान कोणीय चाल `omega` से घूम रही है। `t=0` पर एक छोटा कीड़ा `O` से चलना प्रारम्भ करके `t=T` समय पर छड़ के अन्‍तिम सिरे पर पहुंच कर रूक जाता है। कीड़ा छड़ के सापेक्ष एकसमान चाल `v` से चलता है । निकाय की कोणीय चाल पूरे समय `omega` बनी रहती है। `O` के परितः निकाय पर लगने वाले बल आघूर्ण का मान `(tau)` समय के साथा जिस प्रकार बदलता है उसका सर्वोत्तम वर्णन किस ग्राफ में है? A. B. C. D.

Answer» कोणीय संवेग `J=[(Ml^(2))/3+mx^(2)]omega`
`tau=(dJ)/(dt)=2m omegax.(dx)/(dt)=2m omegavx`
परंतु `x=vt :. tau=2m omegav^(2)t`
विकल्प b
2.

`m` द्रव्यमान का एक छोटा कण `X`अक्ष से `theta` कोण पर प्रारम्भिक वेग `v_(0)` से x-y तल में चित्रानुसार प्रक्षेपित किया गया है। समय `t lt (v_(0)sin theta)/g` पर कण का कोणीय संवेग है: जहां `hati, hatj, hatk, x-, y-` तथा z- अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश है।A. `1/2m g v_(0)t^(2)cos theta hati`B. `-mg v_(0)t^(2)cos theta hatj`C. `m g v_(0)t cos theta hatk`D. `-1/2m g v_(0) t^(2) cos theta hatk`

Answer» `t lt (v_(0)sin theta)/g` का अर्थ है कि महत्तम ऊँचाई पर पहुंचने से पहले।
कोणीय संवेग परिवर्तन की दर `(dJ)/(dt) =tau`
अथवा `vecJ=int_(0)^(t) vec(tau)dt=int_(0)^(t)(vecrxxvecF)dt`
`=int_(0)^(t)(xhati+yhatj)xxmg(-hatj)dt`
`=-int_(0)^(t)mgx dt hatk`
`vecJ=-int_(0)^(t)mg(v_(0)cos theta)t dt hatk`
`=-m v_(0)cos theta (t^(2))/2hatk`
`=-1/2 mg v_(0)t^(2)cos theta hatk`
अतः विकल्प d सही है
3.

गाड़ी के एक पहिये की त्रिज्या 0.4 मीटर है। गाड़ी विरामावस्था से 20 सेकण्ड तक 1.5 `"Radian"// "second"^(2)` के कोणीय त्वरण से त्वरित होती है। इस समयान्तराल में पहिया कितनी दूरी तय कर लेता है तथा इसका रेखीय वेग कितना हो जाता है?

Answer» पहिया प्रारम्भ में विरामावस्था में है `(omega_(0)=0)` `t` समयान्तराल में पहिये का कोणीय विस्थापन
`theta=omega_(0)t+1/2 alpha t^(2)=0+1/2 (1.5 "Radian"// "second"^(2))xx(20 "second")^(2)`
`=300` रेडियन
पहिये की त्रिज्या `=0.4` मीटर है। अतः पहिये का रेखीय विस्थापन
`s=r theta=0.4` मीटर `xx` 300 रेडियन `=120` मीटर।
यह पहिये द्वारा तय की गई दूरी है।
पहिये का `t` समयान्तराल के बाद कोणीय वेग
`omega=omega_(0)+ alpha t=0+(1.5 "radian"// "second"^(2))xx(20 "second")`
`=30` रेडियन/सकेण्ड।
अतः पहिये का रेखीय वेग `v=4 omega=0.4 "metre"xx 30 "radian"// "second"`
`=12 "metre"// "second"`
4.

रेखीय त्वरण तथा कोणीय त्वरण में संबंध का सूत्र लिखिए।

Answer» Correct Answer - `a=r alpha`
5.

एक कण के लिए उसके स्थिति सदिश `vecr` तथा रेखीय संवेग `vecp` किस प्रकार समबन्धित हैं?

Answer» Correct Answer - `vecJ=vecrxxvecp`
6.

दोनों सिरों पर खुला एक पतला खोखला सिलिण्डर जिसका द्रव्यमान `M` है (i)बिना लुढ़के वेग `v` से फिसलता है (ii)बिना फिसले उसी वेग से लुढ़कता है। दोनों दशाओं में इसमें निहित गतिज ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।

Answer» माना कि सिलिण्डर का द्रव्यमान‌ `M` व त्रिज्‍या `R` है फिसलने पर इसके द्रव्यमान –केंद्र का रेखीय वेग `v` है तथा लुढ़कने पर कोणीय वेग `omega` है।
(i) जब सिलिण्डर फिसलता है इसमें केवल स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है। अतः
`K_("trans")=1/2Mv^(2)`
(ii) जब सिलिण्डर लुढ़कता है तो इसमें घूर्णन गतिज ऊर्जा तथा स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा दोनो हैं। अतः कुल गतिज ऊर्जा
`K_("total")=1/2I omega^(2)+1/2Mv^(2)`
जहां `I` सिजलिण्डर का घूर्णन-अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण है।
`:. (K_("trans"))/(K_("total"))=(1/2Mv^(2))/(1/2Iomega^(2)+1/2Mv^(2))`
परंतु `I=MR^(2)` तथा `omega=v//r`
`:. (K_("trans"))/(K_("total"))=(1/2Mv^(2))/(1/2(MR^(2))(v/R)^(2)+1/2Mv^(2))=1/2`
7.

पत्थर पीसने वाले पहियेक की धुरी पर जिसकी त्रिज्या 2 सेमी है एक 600 न्यूटन का नियत स्पर्शरेखीय बल लगाया गया है। इस पर लगने वाले बल –आघूर्ण एवं 8 सेकण्ड पश्चात इसके द्वारा अर्जित कोणीय संवेग की गणना कीजिए। पहिया विराम स्थिति से चलता है।

Answer» धुरी की त्रिज्या `r=2` सेमी `=2xx10^(-2)` मी `t=8` सेकण्ड तथा `F=600` न्यूटन।
बल-आघूर्ण `tau=Fxxr=600xx2xx10^(-2)=12` न्यूटन-मीटर।
`tau=(dJ)/(dt)=(J_(2)-J_(1))/t`
`:. 12=(J_(2)-0)/8`
`J_(2)=96`किग्रा –`m^(2)`/second
8.

`3kg` द्रव्यमान तथा `40cm` त्रिज्या के किसी खोखले सिलिण्डर पर कोई द्रव्यमान की रस्सी लपेटी गई है। यदि रस्सी को 30N बल से खींचा जाए तो सिलिण्डर को कोणीय त्वरण् क्या होगा? रस्सी का रैखिक त्वरण क्या है? यह मानिए कि इस प्रकरण में कोई फिसलन नहीं है।

Answer» खोखले बेलन की उसके सममित अक्ष के परितः जड़त्व- आघूर्ण `I=MR^(2)`
परंतु `M=3` किग्रा `R=40` सेमी `=0.40` मीटर।
अत: `I=3xx(0.40)^(2)=0.48` किग्रा `m^(2)`
अब जब रस्सी को `F` बल लगाकर खींचा जाता है तब बेलन पर लगने वाला बल-आघूर्ण (चूंकि `F` स्पर्श रेखीय है)
`tau=FxxR=30xx0.40=12` न्यूटन-मीटर
अब यदि उत्पन्न कोणीय त्वरण `alpha` हो तो
`tau=I alpha`
अथवा`alpha=(tau)/I=12/0.48=25 "radian"//s^(2)`
फलतः रस्ती्प का रेखीय त्वरण
`a=R alpha=0.40xx25=10m//s^(2)`
9.

दो‌ डिस्कों (चक्रिकायों) के जड़त्व आघूर्ण आपस में बराबर हैं। ये अपनी-अवपी नियमित अक्ष जो इनके समतल के लम्बवत है और चक्रिका के केंद्र से होकर गुजरती है के परितः क्रमश: `omega_(1)` तथा `omega_(2)` कोणीय वेग से घूण्रन कर रही है। इनकों एक दूसरे के सम्मुख इस प्रकार सम्पर्क में लाया जाता कि इनकी घूर्णन अक्ष संपाती हो जाती है। तो इस प्रक्रम में ऊर्जा क्षय के लिए व्यंजक होगा:A. `1/2(omega_(1)+omega_(2))^(2)`B. `1/4I(omega_(1)-omega_(2))^(2)`C. `I(omega_(1)-omega_(2))^(2)`D. `1/2(omega_(1)-omega_(2))^(2)`

Answer» कोणीय संवेग संरक्षण के नियम से
`Iomega_(1)+Iomega_(2)=2Iomega`
`:.omega=(omega_(1)+omega_(2))/2`
प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा
`K_(i)=1/2I omega_(1)^(2)+1/2I omega_(2)^(2)=1/2I(omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2))`
अन्तिम घूर्णन गतिज ऊर्जा
`K_(f)=1/2xx2Iomega^(2)=I((omega_(1)+omega_(2))/2)^(2)`
ऊर्जा क्षय
`K_(i)-K_(f)=1/2I(omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2))-I((omega_(1)+omega_(2))/2)^(2)`
`=1/4I[2omega_(1)^(2)+2omega_(2)^(2)-omega_(1)^(2)-omega_(2)^(2)-2omega_(1)omega_(2)]`
`=1/4[omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2)-2omega_(1)omega_(2)]`
`=I/4(omega_(1)-omega_(2))^(2)`
10.

दो चक्रिकाएं जिनके अपने-अपने अक्षों (चक्रिका के अभिलम्बवत तथा चक्रिका के केंद्र से गुजरने वाले) के परितः जड़त्व आघूर्ण `I_(1)` तथा `I_(2)` हैं और जो `omega_(1)` तथा `omega_(2)` कोणीय चालों से घूर्णन कर रही हैं को उनके घूर्णन अक्ष सम्पाती करके आमने-सामने लाया जाता है। a. इस दो चक्रिका निकाय की कोणीय चाल क्या है? b. यह दर्शाइए कि इस संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा दोनों चक्रिकाओं की आम्भिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है। ऊर्जा में हुइ हानि की आप कैसे व्याख्या करेंगे? `omega_(1)!=omega_(2)` लीजिए।

Answer» a. दोनों चक्रिकाओं के सकल प्रारम्भिक कोणीय संवेग
`I_(1) omega_(1)+I_(2)omega_(2)`
चूंकि दोनों चक्रिकाओं को इस प्रकार आमने-सामने से सम्पर्क में लाया गया है कि उनके घूर्णन अक्ष सर्वनिष्ठ हों। अतः निकाय का संयुक्त जड़त्व-आघूर्ण `I_(1)+I_(2)` होगा। अब यदि चक्रिका निकाय का कोणीय वेग `omega` हो तो निकाय का अन्‍तिम कोणीय संवेग
`(I_(1)+I_(2))omega`
चूंकि कोई बाह्य बल-आघूर्ण कार्यरत नहीं है अतः संवेग-संरक्षण सिद्धान्त से
`(I_(1)+I_(2))omega=I_(1) omega_(1)+I_(2)omega_(2)`
अथवा `omega=(I_(1) omega_(1)+I_(2) omega_(2))/(I_(1)+I_(2))`
b. दोनों चक्रिकाओं के प्रारम्भिक घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का योग तथा संयुक्त चक्रिका निकाय की अन्तिम गतिज ऊर्जा
`1/2 (I_(1)+I_(2))omega^(2)=1/2(I_(1)+I_(2))((I_(1)omega_(1)+I_(2)omega_(2))/(I_(1)+I_(2)))^(2)`
`=1/2((I_(1)omega_(1)+I_(2)omega_(2))^(2))/(I_(1)+I_(2))`
`:.` संयुक्त चक्रिका निकाय की प्रारम्भिक व अन्‍तिम घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का अन्तर
`=1/2I_(1)omega_(1)^(2)+1/2I_(1)omega_(2)^(2)-1/2((I_(1)omega_(1)+I_(2)omega_(2))^(2))/(I_(1)+I_(2))`
`=1/2[(I_(1)^(2)omega_(1)^(2)+I_(1)I_(2)omega_(1)^(2)+I_(1)I_(2)omega_(2)^(2)+I_(1)^(2)omega_(2)^(2)-I_(1)^(2)omega_(1)^(2)-I_(1)^(2)omega_(2)^(2)-2I_(1)I_(2)omega_(1)omega_(2))/(I_(1)+I_(2))]`
`=(I_(1)I_(2))/(2(I_(1)+I_(2))(omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2)-2omega_(1)omega_(2))`
`=(I_(1)I_(2))/(2(I_(1)+I_(2)))(omega_(1)-omega_(2))^(2)`.
अब जैसा कि उपरोक्त से स्पष्ट है कि दोनों चक्रिकाओं की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा से संयुक्त निकाय की अन्‍तिम गतिज ऊर्जा का अन्तर धनात्मक हैक्‍ जो यह दर्शाता है कि गतिज ऊर्जा की हानि हुई है। सम्भवतः यह हानि जब चक्रिकाओं को सम्पर्क में लायी गयी, तो घर्षण कक विरूद्ध कार्य करने में हुई होगी, जिसके कारण की चक्रिका निकाय का उभयनिष्ठ कोणीय वेग `omega` हो गाया।
यहां पर यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि यदि घर्षण –आघूर्ण जो कि असंरक्षी है की उपस्थि ति तंत्र के लिए आन्तरिक आघूर्ण की तरह व्यवहार कर रहे हैं जिससे कि निकाय की गतिकी में कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ।
11.

2वृत्ताकार छल्ले का व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण 4.0 ग्राम-`cm^(2)` है। छल्ले के केन्द्र से गुजरने वाली तथा तल के लम्बवत अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात कीजिए।

Answer» Correct Answer - 8.0 ग्राम-`cm^(2)`
12.

ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान `5.30xx10^(-26)kg` है तथा इसके केंद्र से होकर गुजरने वाली और इसके दोनों परमाणुओं को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण `1.94xx10^(46)kgm^(2)` है। मान लीजिए कि गैस के ऐसे अणु की औसत चाल `500m//s` है और इसके घूर्णन की गतिज ऊर्जा स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा की दो तिहाई है। अणु का औसत कोणीय वेग ज्ञात कीजिए।

Answer» माना ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान `M` तथा दो ऑकसीजन परमाणुओं को मिलाने वाली रेखा के मध्य-बिंदु व उसके लम्बवत अक्ष के सापेक्ष निकाय का जड़त्व-आघूर्ण `I` तथा ऑक्सीजन परमाणु का औसत कोणीय वेग `omega` है।
अतः प्रश्नानुसार
घूर्णन की गतिज ऊर्जा `=2/3` स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा
अर्थात `1/2Iomega^(2)=2/3xx1/2 Mv^(2)`
जहां `v` अणुओं की माध्य चाल है।
`:. Omega=(sqrt(2/3xxM/I))xxv`
`=sqrt(2/3xx(5.30xx10^(-26))/(1.94xx10^(-46)))xx500` मी/से
`=(1.35xx10^(10))xx500`
`=6.75xx10^(12)` रेडियन/सेकण्ड
13.

नीचे दिए गए प्रत्येक प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढिये तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि इनमें से कौन-सा सत्य है और कौन –सा असत्य है? a. लोटनिक गति करते समय घर्षण बल उसी दिशा में कार्यरत होता है जिस दिशा में पिण्ड का द्रव्यमान-केंद्र गति करता है।b. लोटनिक गति करते समय सम्पर्क बिंदु की तात्ष् णिक चाल शून्य होती है। c. लोटनिक गति करते समय सम्पर्क बिंदु का तात्क्षणिक त्वरण शून्य होता है। d. परिशुद्ध लोटनिक गति के लिए घर्षण के विरूद्ध किया गया कार्य शून्य होता है। e. किसी पूर्णतः घर्षणरहित आनत समतल पर नीचे की ओर गति करते पहिए की गति फिसलन गति (लोटनिक गति नहीं) होगी।

Answer» a. सत्यः जब वस्तु लुढ़कती है तो पृष्ठ के सम्पर्क वाले बिंदुओं का वेग द्रव्यमान केंद्र के वेग की विपरीत दिशा में होता है, चूंकि गति का विरोध करता है अतः घर्षण बल द्रव्यमान केंद्र की गति की दिशा में कार्य करेगा।
b. सत्यः परिशुद्ध लुढ़कन में वस्तु के निम्नतम बिंदु (पृष्ठ के सम्पर्क वाले बिंदु) का वेग शून्य होता है अतः पृष्ठ के सम्पर्क बिंदु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
c. असत्यः लुढ़कने की अवधि में पृष्ठ के सम्पर्क बिंदु के वेग की दिशा बदलती है अतः पृष्ठ के सम्पर्क बिंदु का तात्क्षणिक त्वरण शून्य नहीं होता है।
d. सत्यः परिशुद्ध लु्ढ़कन गति में घर्षण बल शून्य है अतः घर्षण के विरूद्ध कृत कार्य शून्य होता है।
e. सत्यः घर्षण बल के कारण ही लुढ़कन गति के लिए बल-आघूर्ण प्राप्त होता है । पहिया, भार के घटक `(Mg sin theta)` जो आनत समतल के अनुदिश है के कारण ही फिसलन गति प्रारम्भ करेगा।
14.

विरामावस्था में स्थित‌ 50 सेमी त्रिज्या की एक एकसमान वृत्ताकार डिस्क अपने तल के लम्बवत और केंद्र से गुजरने वाली अक्ष के परितः घूमने के लिए स्वतंत्र हैं। डिस्क पर कोई बल आघूर्ण कार्य करता है जो इसमें 2.0 `"radian"//"second"^(2)` का कोणीय त्वरण उत्पन्न करता है 2.0 सेकण्ड पश्चात `m//s^(2)` में इसमें नैट त्वरण लगभग होगा:A. 8B. 7C. 6D. 3

Answer» कोणीय त्वरण `alpha=2`
रेडियन/सेकण्ड पश्चात कोणीय
चाल `omega=alpha t=2xx2.0=4` रेडियन/से
`a_(c)=romega^(2)=0.5xx(4)^(2)=8m//s^(2)`
`a=alpha r=2xx0.5=1 m//s^(2)`
`a=sqrt(a_(c)^(2)+a^(2))=sqrt(8^(2)+1^(2))~=8 m//s^(2)`
15.

`R` त्रिज्या तथा `9M` द्रव्यमान के एकचसमान गोलाकार डिस्क से `R//3` त्रिज्या का एक छोटा गोलाकार डिस्क काट कर‌ निकाल लिया जाता है जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। डिस्क के सतह के लम्बवत एवं उसके केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के सापेक्ष बची हुई डिस्क का जड़त्व आघूर्ण होगा: A. `40/9MR^(2)`B. `10MR^(2)`C. `37/9MR^(2)`D. `4MR^(2)`

Answer» छोटी गोलाकार डिस्क का द्रव्यमान `(9M)/9=M`
` I=(9MR^(2))/2-[(M(R/3)^(2))/2+M((2R)/3)^(2)]`
`=MR^(2)[9/2-1/18-4/9]=4MR^(2)`
16.

एक कार 72 किमी/घण्टा की चाल से दौड़ रही है। इसके पहियों का व्यास 0.50 मीटर है। यदि पहियों को ब्रेक लगाकर 20 चक्करों में रोक दें, तो ब्रेक उत्पन्न कोणीय मन्दन ज्ञात कीजिए।

Answer» कार की चाल `v=72` किमी/घण्टा `=72000/(60xx60)=20` मी/से तथा पहिये की त्रिजया `r=0.25` मीटर।
अतः पहिये की प्रारम्भिक कोणीय चाल
`omega_(0)=v/r=20/0.25=80` रेडियन/सेकण्ड।
20 चक्करों में कोणीय विस्थापन `theta=2pixx20=40pi` रेडियन।
सूत्र `omega^(2)=omega_(0)^(2)+2alpha theta` में `omega_(0)=80` रेडियन/सेकण्ड तथा `theta=40pi` रेडियन रखने पर
`0=(80)^(2)+2alpha (40 pi)`
अथवा `alpha=-((80)^(2))/(80pi)=-25.5 "Radian"//"second"^(2)`
ऋण चिन्ह मंदन इंगित करता है।
17.

a. कोई बच्चा किसी घूर्णिका (घूर्णी मन्च) पर अपनी दोकनों भुजाओं को बाहर की ओर फैलाकर खड़ा है। घूर्णिका को 40rev/min की कोणीय चाल से घूर्णन कराया जाता है। यदि बच्चा अपने हाथों को वापस सिकोड़ कर अपना जड़त्व –आघूर्ण अपने आरम्भिक जड़त्व-आघूर्ण का 2//5 गुना कर लेता है तो इस स्थिति में उसकी कोणीय चाल क्या होगी? यह मानिए कि घूर्णिका की घूर्णन गति घर्षणरहित है। b. यह दर्शाइए कि बच्चे की घूर्णन की नयी गतिज ऊर्जा उसकी आरम्भिक घूर्णन की गतिज ऊर्जा से अधिक है। आप गतिज ऊर्जा में हुई इस वृद्धि की व्याख्या किस प्रकार करेंगें?

Answer» a. चूंकि निकाय पर बाह्य बल –आघूर्ण शून्य है अतः निकाय का कोणीय संवेग `J(=Iomega)` नियत है।
`:.I_(1)omega_(1)=I_(2)omega_(2)impliesomega_(2)=(I_(1)omega_(1))/(I_(2))`
परंतु प्रश्नानुसार `I_(2)=2/5I_(1),omega_(1)=40` चक्कर/मिनट
`:.` अन्तिम कोणीय चाल `omega_(2)=(I_(1))/((2/5I_(1)))xx40` चक्कर/मिनट
`=5/2xx40` चक्कर/मिनट `=100` चक्कर/मिनट।
b. घूर्णन गतिज ऊर्जा `K=1/2 I omega^(2)=1/2xxIxx(J^(2))/(I^(2))=(J^(2))/(2I)`
अब चूंकि कोणीय संवेग `J` संरक्षित है अतः घूर्णन गतिज ऊर्जा `K prop 1/I`
`:.(K_(1))/(K_(2))=(I_(2))/(I_(1))=((2//5)I_(1))/(I_(1))` अथवा `K_(2)=5/2K_(1)k=2.5K_(1)`
अतः सिद्ध हुआ कि अन्‍तिम गतिज ऊर्जा प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा से अधिक (लगभग 2.5 गुना) है । गतिज ऊर्जा में यह वृद्धि बच्चे की मांसपेशियों में एकत्रित ऊर्जा के मुक्त होने के कारण हुई है।
18.

समान द्रव्यमान के दो ठोस गोले भिन्न-भिन्न घनत्वों की धातुओं से बनाये गये हैं। कौन-से गोले का व्यास के परितः जड़त्व-आघूर्ण अधिक होगा?

Answer» हल्की धातु के गोले का क्योंकि उसकी त्रिज्या बड़ी होगी।
19.

एक मोटर वाहन किसी सड़क पर 54 किमी/घण्टा की चाल से चल रहा है। इसके पहियों की त्रिज्या 0.45 मीटर है और घूर्णन अक्ष के परितः पहिये का जड़त्व आघूर्ण 3 किेग्रा `m^(2)` है। यदि ब्रेक लगाने के बाद, वाहन को रूकने में 15 सेकण्ड का समय लगता है तो ब्रेक द्वारा पहिये पर लगा औसत बल आघूर्ण का मान होगा:A. 10.86 किग्रा `m^(2) s^(2)`B. 2.86 किग्रा `m^(2) s^(2)`C. 6.66 किग्रा `m^(2) s^(2)`D. 8.58 किग्रा `m^(2) s^(2)`

Answer» मोटर वाहन का वेग `v=54xx5/18=15 m s^(-1)`
पहिये का कोणीय वेग `omega_(0)=v/R=15/0.45=100‌/3` रेडियन/से।
अतः कोणीय त्वरण `alpha=(Delta omega)/t=(omega_(f)-omega_(0))/t=(0-100/3)/15=-100/45 "radian"//"second"^(2)`
बल आघूर्ण `=I alpha=3xx100/45=6.66` kg `m^(2) s^(-2)`
20.

लम्बाई `l` तथा त्रिज्या `R` के एक ठोस बेलन का अपनी ज्यामितीय अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण उतना ही है जितना कि निरक्षीय अक्ष के परितः है। `R` तथा `l` का अनुपात हैA. `1//sqrt(3)`B. `1//2`C. `3`D. `sqrt(3)`

Answer» प्रश्नानुसार `(MR^(2))/2=(MR^(2))/4+(Ml^(2))/12` इससे `R/l=1/(sqrt(3))`
21.

कोई ठोस गोला मुक्त आकाश में अपनी सममिति अक्ष के परितः मुक्त रूप से घूर्णन कर रहा है। इस ‌गोले का द्रव्यमान समान रखते हुए इसकी त्रिज्या में वृद्धि की जाती है। गोले के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक राशि स्थिर रहेगी?A. कोणीय वेगB. कोणीय संवेगC. घूर्णी गतिज ऊर्जाD. जड़त्व आघूर्ण

Answer» `T_("ext")=0` इसलिए `(dJ)/(dt)=0` अर्थात `J=` नियत
अतः कोणीय संवेग स्थिर रहेगा।
22.

समान द्रव्यमान और त्रिज्या के एक खोखले बेलन और एक ठोस गोले पर समान परिमाण के बल –आघूर्ण लगाये गये हैं। बेलन अपनी सामान्य सममित अक्ष के परितः घूम सकता है और गोला अपने केंद्र से गुजरने किसी अक्ष के परितः। एक दिये गये समय के बाद दोनों में कौन अधिक कोणीय चाल प्राप्त कर लेगा?

Answer» माना गोले तथा बेलन के द्रव्यमान `M` व त्रिज्या `R` है तब बेलन का उसके सामान्य सममित अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण `I_(1)=MR^(2)` तथा गोले का उसके व्यास के परितः जड़त्व –आघूर्ण `I_(2)=2/5MR^(2)`
पुनः माना `tau` परिमाण का बल-आघूर्ण बेलन व गोले में क्रमशः `alpha_(1)` व `alpha_(2)` कोणीय त्वरण उत्पन्न करता है तब
`tau=I_(1)alpha_(1)=I_(2) alpha_(2)`
अथवा `(alpha_(1))/(alpha_(2))=(I_(2))/(I_(1))=((2//5)MR^(2))/(MR^(2))=2/5`
अथवा `alpha_(2)=5/2 alpha_(1)`
अतः स्पष्ट है कि गोले में उत्पन्न कोणीय त्वरण परिमाण में अधिक है इस प्रकार गोला अधिक कोणीय वेग आर्जित कर लेगा।
23.

20 kg द्रव्यमान का कोई ठोस सिलिण्डर अपने अक्ष के परितः `100 rads^(-1)` की कोणीय चाल से घूर्णन कर रहा है। सिलिण्डर की त्रिज्या `0.25 m` है। सिलिण्डर के घूर्णन से सम्बद्ध गतिज ऊर्जा क्या है? सिलिण्डर का अपने अक्ष के परितः कोणीय संवेग का परिमाण क्या है?

Answer» `M` द्रव्यमान तथा `R` त्रिज्या के ठोस बेलन का अपने ज्‍यामितीय अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण `I=1/2MR^(2)`
यहां `M=20` किग्रा `R=0.25` मीटर
`:. I=1/2xx20xx(0.25)^(2)=0.625` किगा-`m^(2)`
तथा घूर्णन गतिज ऊर्जा `=1/2 Iomega^(2)`
`=1/2xx(0.625)xx(100)^(2)=3125` जूल।
बेलन का अपनी सममित अक्ष के परितः कोणीय संवेग
`J=I omega=0.625xx100=62.5` किग्रा `m^(2) s^(-1)`
24.

द्रव्यमान `M` तथा त्रिज्या `R` का एक ठोस गोला अपने व्यास के परितः घूर्णन कर रहा है। इसी द्रव्यमान तथा इसी त्रिज्या का एक ठोस बेलन भी अपनी ज्यामितीय अक्ष के परितः घूर्णन कर रहा है। बेलन के घूर्णन की कोणीय चाल गोले से दोगुनी है। इन दोनों की घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का अनुपात होगा:A. `3:1`B. `2:3`C. `1:5`D. `1:4`

Answer» गोले की गतिज ऊर्जा `=1/2(2/5MR^(2))omega^(2)=1/5MR^(2)omega^(2)`
बेलन की गतिज ऊर्जा `=1/2((MR^(2))/2)(2omega)^(2)=MR^(2)omega^(2)`
`:.(KE_("sphere"))/(KE_("cylinder"))=1/5`
25.

बर्फ पर चक्रण करती एक नर्तकी जब अपनी भुजायें मोड़ लेती है तो चक्रण की दर बढ़ जाती है । इसका कारण है:A. `J` (कोणीय संवेग) में वृद्धि तथा `K` (घूर्णन गतिज ऊर्जा) में वृद्धिB. `J` में कमी तथा `K` में वृद्धिC. नियत `J` तथा `K` में वृद्धिD. नियत `J` तथा `K` में कमी।

Answer» भुजायें मोड़ने पर जड़त्व –आघूर्ण `I` घट जाता है। अब `J=Iomega=` नियतांक `K=1/2Iomega^(2)=(J^(2))/(2I) prop 1/I` चूकि `I` घटता है अतः `K` बढ़ता है।
26.

एक दृढ़ ठोस गोला बिना किसी बाह्य बल-आघूर्ण के किसी अक्ष के परितः चक्रण कर रहा है। ताप –परिवर्तन के कारण इसका आयतन 1 प्रतिशत बढ़ जाता है। इसका कोणीय वेगःA. `4//1%` बढ़ जायेगाB. `1%` घट जायेगाC. `2//3%` घट जायेगाD. `1//3%` घट जायेगा

Answer» आयतन `(4/3piR^(3))` में वृद्धि `=1%`
`:.` त्रिज्या `(R)` में वृद्धि `=2/3%`
चूंकि कोणीय संवेग संरक्षित रहता है अतः कोणीय वेग `2/3%` घट जायेगा।
27.

किसी बिंदु `vecr=2hati-6hatj-12hatk` पर एक बल `vecF=alpha hati+3hatj+6hatk` लग रहा है। तो `alpha` के किस मान के लिए मूल बिंदु के परितः कोणीय संवेग संरक्षित रहेगा?A. 2B. 0C. 1D. -1

Answer» कोणीय संवेग `L` संरक्षित रहेगा तब `vec(tau)=0`
`:.vecrxxvecF=0`
`vecrxxvecF=|(hati,hatj,hatk),(2,-6,-12),(alpha,3,6)|`
`-hati(-36+36)-hatj(12+12alpha)+hatk(6+6alpha)=0`
`:. alpha=-1`
28.

कुछ बच्चे एक अक्ष के परितः घूर्णन करती हुईग्‍ मेज के किनारे पर चारों ओर खड़े हैं। यदि बच्चे केंद्र की ओर एकत्रित होते हैं तो मेज की गति पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्यों?

Answer» मेज की गति बढ़ जायेगी(कोणीय संवेकग संरक्षण), जड़त्व आघूर्ण (I) के घटने पर, कोणीय वेग `(omega)`बढ़ता है।
29.

`2sqrt(2)` मीटर त्रिज्या की एक चकती अपनी अक्ष के परितः घूर्णन कर रही है। उसकी घूर्णन (परिभ्रमण) त्रिज्या की गणना कीजिए।

Answer» Correct Answer - 2 मीटर
30.

घूर्णन करते हुए पिण्डों A तथा B के कोणीय संवेग बराबर है। A क जड़त्व आघूर्ण B की अपेक्षा है।A तथा B की घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।

Answer» किसी पिण्ड की घूर्णन गतिज ऊर्जा `K=1/2I omega^(2)` तथा कोणीय संवेग `J=I omega` होता है।
इससे `K=(J^(2))/(2I)`
माना पिण्डों A व B की गतिज ऊर्जायें `K_(A)` व `K_(B)` हैं। प्रत्येक का कोणीय संवेग `J` हैं। तब
`(K_(A))/(K_(B))=(J^(2)//(2I_(A)))/(J^(2)//(2I_(B)))=(I_(B))/(I_(A))=(I_(B))/(I_(B)//2)=2/1` ( दिया है)
`:. K_(A):K_(B)=2:1`
31.

दो घूर्णन करते हुए पिण्ड A तथा B के कोणीय संवेग बराबर है A का जड़त्व आघूर्ण B के जड़त्व-आघूर्ण का दोगुना हैं A तथा B की घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का अनुपात निकालिए।

Answer» कोणीय संवेग समान हैं `I_(A)omega_(A)=I_(B)omega_(B)`
`(I_(A))/(I_(B))=(omega_(B))/(omega_(A))=2` अर्थात `omega_(B)=2omega_(A)`
`(K_(A))/(K_(B))=(1/2I_(A)omega_(A)^(2))/(1/2I_(B)omega_(B)^(2))=2xx1/4=1/2`
32.

यदि कोई पिण्ड घूर्णन कर रहा है तो क्या निश्चित रूप से उस पर कोई बल-आघूर्ण लग रहा है?

Answer» नहीं बल-आघूर्ण केवल कोणीय त्वरण के लिए आवश्यक है।
33.

एक गेद घटती चाल से वृत्ताकार पथ के अनुदिश चलने के लिए प्रतिबन्धि त है। गेंद के लिए सही कथन चुनिएःA. गेंद का त्वरण `veca` वृत्त के केंद्र की ओर दिष्ट है।B. गेंद का केंद्र के परितः कोणीय संवेग `vecJ` संरक्षित रहता हैC. `vecJ` की केवयल दिशा संरक्षित रहती है।D. गेंद घटती त्रिज्या के सर्पिलाकार पथ पर चलती है

Answer» `vecJ=vecrxxmvecv` कोणीय संवेग `vecJ` की दिशा गेंद के चलने के तल के लम्बवत होगी। चूंकि गेंद की चाल बदल रही है `vecJ` की केवल दिशा संरक्षित रहती है।
34.

कणों के एक द्रव्यमान पर लग रहे बाहरी बलों का परिणामी यदि शून्य हो तो किसी जड़त्वीय फ्रेम से यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है।A. द्रव्यमान का रेखीय संवेग समय के साथ नहीं बदलताB. द्रव्यमान की गतिज ऊर्जा समय के साथ नहीं बदलतीC. द्रव्यमान का कोणीय संवेग समय के साथ नहीं बदलताD. द्रव्यमान की स्थितिज ऊर्जाग्‍ समय के साथ नहीं बदलती।

Answer» `Sigma vecF_("ext")=(dvecP)/(dt)` व `Sigma vec(tau)_("ext")=(dvecJ)/(dt)`
यदि बाहरी बलों का परिणामी शून्य है तब `(dvecp)/(dt)=0` अर्थात `vecp` समय के साथ नहीं बदलता। कोणीय संवेग समय के साथ शून्य भी हो सकता अथवा नहीं भी।
गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊॅर्जा में परिवर्तन का संबंध बाह्य तथा आन्तरिक बलों के द्वारा कार्य से है। अतः यदि नैट बाह्य बल शून्य है तो स्थितिज ऊर्जा अथवा गतिज ऊर्जा समय के साथ शून्य हो भी सकती है अथवा नही भी।
35.

(i) एकसमान कोणीय वेग से घूमते हुए एक गोल प्लेटफॅार्म पर परिधि के निकट एक व्यक्‍ति बैठ जाता है। प्लेटफॉर्म की गति में क्या परिवर्तन हो जायेगा? (ii) यदि व्यक्‍ति परिधि से हटकर प्लेटफॉर्म के केंद्र की ओर जाने लगे तब?

Answer» (i)`J=Iomega=` नियतांक, कोणीय वेग घट जायेगा
(ii) पुनः बढ़ने लगेगा।
36.

`HCl` अणु में दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच पृथकन लगभग `1.27Å(1Å=10^(-10)m)` है। इस अणु के द्रव्यमान केंद्र की लगभग अवस्थिति ज्ञात कीजिए । यह ज्ञात है कि क्लोरीन का परमाणु हाइड्रोजन के परमाणु की तुलना में 35.5 गुना भारी होता है तथा किसी परमाणु का समस्त द्रव्यमान उसके नाभिक पर केंन्‍द्रित होता है।

Answer» चूंकि `HCl` अणु में हाइड्रोजन अणु `H` तथा क्लोरीन अणु `Cl` होते है। अतः `HCl` अणु का द्रव्यमान-केंद्र `H` व `Cl` परमाणुओं या उनके नाभिकों को मिलाने वाली रेखा पर स्थित होगा। माना `HCl` अणु `X`- अक्ष के अनुदिश इस प्रकार रखा है कि हाइड्रोजन परमाणु `H` मूलबिंदु पर स्थित है। अत: `H` परमाणु के सापेक्ष निकाय के द्रव्यमान केंद्र की स्थिति
`x_(cm)=(m_(1)x_(1)+m_(2)x_(2))/(m_(1)+m_(2))`
जहां `m_(1)` व `m_(2)` क्रमश: `H` व `Cl` परमाणुओं के द्रव्यमान तथा `x_(1)` व `x_(2)` उनकी मूलबिंदु से दूरियां है।
प्रश्नानुसार `m_(2)=35.5m_(1)x_(1)=0` व `x_(2)=1.27`एंगस्ट्रॉम
`:.x_(cm)=((m_(1)xx0)+35.5m_(1)xx1.27)/(m_(1)+35.5m_(1))` एंगस्ट्रॉम
`=1.235` एंगस्ट्रॉम।
37.

एक पतले पहिये को जब काफी जोर से लुढ़काया जाता है तो यह काफी देर तक अपने घेरे पर सीधा रहता है। परंतु यदि यह स्थिर हो तो तनिक से विघ्न से गिर जाता है समझाइए।

Answer» जब घेरा लुढ़कता है तो इसका कोणीय संवेग संरक्षित रहता हे। वास्तव में घर्षण के कारण कोणीय वेग में ह्रास होने से संवेग घटता रहता है। परंतु जब तक घेकरे में कोणीय संवेग रहता है तब तक यह नहीं गिरता।
स्थिर खड़ा घेरा अस्थायी संतुलन में होता है अतः तनिक से विघ्न से गिर जाता है।
38.

यदि पृथ्वी की त्रिज्या आधी हो जाए परंतु उसका द्रव्यमान न बदले, तो एक दिन में कितने घण्टे होंगे?

Answer» बाह्य बल –आघूर्ण अनुपस्थित है अतः कोणीय संवेग संरक्षण सिद्धांत से
`I_(1)omega_(1)=I_(2)omega_(2)`
`2/5MR_(1)^(2)((2pi)/(T_(1)))=2/5MR_(2)^(2)((2pi)/(T_(2)))`
`:. T_(2)=T_(1)((R_(2))/(R_(1)))^(2)=24` घण्टे `((R_(1)//2)/(R_(1)))^(2)=6` घण्टे।
39.

तीन पिण्ड A (एक ठोस गोला) B (एक पतली वृत्ताकार चकती) तथा C (एक वृत्ताकार छल्ला) जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान `M` तथा त्रिज्या `R` है समान कोणीय चाल `omega` से अपनी सममितित अक्षों के परितः चक्रण कर रहे हैं। इन्हें विरामावस्था में लाने के लिए किए जाने वाले आवश्यक कार्यों (`W`) के लिए कौन-सा संबंध सही है:A. `W_(C)gtW_(B)gtW_(A)`B. `W_(A)gtW_(C)gtW_(B)`C. `W_(B)gtW_(A)gtW_(C)`D. `W_(A)gtW_(B)gtW_(C)`

Answer» इन्हें विरामावस्था में लाने के लिए
`DeltaW=DeltaKE=1/2 I omega^(2)`
समान `W` के लिए `Delta W propI`
`W_(A):W_(B):W_(C)=2/5MR^(2):1/2MR^(2):MR^(2)`
`4:5:10`
`implies W_(C)gtW_(B)gtW_(A)`
40.

तीन सर्वसम गोलीय कोशों में प्रत्येक कोशों में प्रत्येक का द्रव्यमान `m` तथा त्रिज्या `r` है। इन्हें आरेख में दर्शाये गये अनुसार रखा गया है। `XX’` एक अक्ष है। जो दो गोलीय कोशों को स्पर्श करती है तथा तीसरे के व्यास से होकर गुजरती है। `XX’` अक्ष के परितः इन तीन गोलीय कोशों के निकाय का जड़त्व आघूर्ण होगा: A. `3mr^(2)`B. `16/5mr^(2)`C. `4mr^(2)`D. `11/5mr^(2)`

Answer» `I_(D)=2/3mr^(2)`
`I_(t)=2/3mr^(2)+mr^(2)=5/3mr^(2)`
अत: `I=I_(D)+2I_(T)=2/3mr^(2)+2xx5/3mr^(2)=4m^(4)`
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