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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

“कयामत आई है और लपटन साहब की वर्दी पहनकर आई है।” यह कथन किसने, किससे और क्यों कहा?

Answer»

यह कथने लहनासिंह ने वजीरासिंह से कहा। जर्मन ने सूबेदार को धोखा देकर दूर भेज दिया। ताकि वह खन्दक पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर ले। लहनासिंह वजीरासिंह को वास्तविकता से अवगत करना चाहता था और सूबेदार को वापिस बुलाना चाहता था।

2.

सूबेदारनी के चरित्र की दो विशेषताएँ लिखिए।

Answer»

(क) सरल और सहज स्वभाव।
(ख) मातृत्व का भाव और सच्ची पत्नी

3.

सूबेदारनी ने स्वप्न में लहनासिंह से क्या कहा? अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

सूबेदारनी ने स्वप्न में कहा था कि मैंने तुझे पहचान लिया है। एक दिन तैने घोड़े के बिगड़ने पर मेरी रक्षा की थी। मेरा एक ही बेटा है आज वह और पति दोनों लाम पर जा रहे हैं। मेरा दुर्भाग्य है अगर औरतों की पलटन होती तो मैं भी इनके साथ चली जाती। जैसे तैने मेरी रक्षा की थी, उसी प्रकार इनकी भी रक्षा करना। मैं तुझसे इनकी रक्षा की भीख माँगती हूँ। सरकार ने पति को वीरता का खिताब दिया, जमीन दी। आज नमक हलाली का अवसर आया है। इनकी रक्षा करना।

4.

उसने कहा था-कहानी का नायक है-(क) वजीरासिंह(ख) लहनासिंह(ग) हजारासिंह(घ) बोधासिंह।

Answer»

(ख) लहनासिंह

5.

‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के नायक चन्द्रशेखर आजाद का चरित्र-चित्रण कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के नायक आजाद के चरित्र-व्यक्तित्व की उल्लेखनीय विशेषताओं का वर्णन कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के आधार पर नायक के चारित्रिक गुणों (विशेषताओं) का, वर्णन कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद के स्वदेश-प्रेम का वर्णन कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर उत्कट देशप्रेमी तथा दृढनिश्चयी के रूप में। आजाद का चरित्र-चित्रण कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य में ‘सूत्रों का रटना छोड़ो, अब स्वतन्त्रता का पाठ पढ़ो’ का उदघोष करने वाले की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।या“चन्द्रशेखर आजाद उत्कृष्ट देशप्रेमी थे।” इस कथन की पुष्टि ‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के आधार पर कीजिए।

Answer»

डॉक्टर जयशंकर त्रिपाठी द्वारा रचित ‘मातृभूमि के लिए’ नामक खण्डकाव्य राष्ट्रीय भावना के साक्षात् अवतार एक तरुण देशभक्त के बलिदान की गौरव-गाथा है। कवि ने प्रस्तुत काव्य में मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों के शोर्य की झाँकी प्रस्तुत करते हुए अमर बलिदानी चन्द्रशेखर आजाद की जीवनगाथा प्रस्तुत की है। वही प्रस्तुत काव्य के नायक हैं।

उनकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(1) देशभक्त–चन्द्रशेखर आजाद का चरित्र एक महान् देशभक्त का चरित्र था। उनका सारा जीवन भारतमाता की स्वाधीनता के लिए संघर्षों में बीता। छात्र-जीवन में जलियाँवाला बाग के नृशंस हत्याकाण्डे को पढ़कर उनका हृदय तिलमिला उठा था। वे उसी समय प्रतिज्ञों करते हैं

इस जन्मभूमि के लिए प्राण, मैं अपने अर्पित कर दूंगा।
आजाद न होगी जब तक यह, मैं कर्म अकल्पित कर दूंगा।

(2) वीर और साहसी–चन्द्रशेखर ने 15 वर्ष की आयु में अंग्रेजी सरकार द्वारा दण्डस्वरूप 16 बेंतों की मार खाते हुए भी प्रत्येक प्रहार के साथ भारतमाता की जय’ बोलकर अपनी अपूर्व देशभक्ति, साहस और वीरता का परिचय दिया था–”वह वीरों का शिरमौर और वह राष्ट्रभक्त अति बाँका था।” अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से घिरकर एक घण्टे तक अकेले उसका सामना करते रहना, उनकी वीरता और साहस का ही द्योतक है। मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया बयान उनके अतुलनीय साहस को प्रकट करता है। काकोरी स्टेशन के निकट सरकारी खजाने को लूटना उनका एक बड़ा साहसिक कार्य था।

(3) प्रभावशाली व्यक्तित्व–आजाद का बाह्य और आन्तरिक व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली था। चेहरे पर बड़ी-बड़ी मूंछे, रोबीला चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें, सुगठित हृष्ट-पुष्ट शरीर उनके व्यक्तित्व में चार चाँद लगा देते थे। जितना उनका शरीर मजबूत एवं सुगठित था,  उतना ही उनका स्वभाव मधुर था। कवि ने उनके व्यक्तित्व की प्रशंसा निम्नलिखित शब्दों में की है-

‘पर बालक वह अंगार था-आँखों में उग्र उजाला था।”
वह अपने ओजस्वी भाषण से नवयुवकों को प्रभावित कर लेते थे
आजाद चन्द्रशेखर ऐसा, जिस पर हरेक ।
नवयुवक निछावर होकर होता विस्तृत-सा ॥

(4) अद्भुत संगठनकर्ता–चन्द्रशेखर ने भारत को स्वतन्त्र कराने के लिए देश के समस्त क्रान्तिकारियों को एक मंच पर संगठित करने का अद्भुत कार्य किया था

संगठन शक्ति का, पैसे का, वे करते थे।
व्यक्तित्व खींचता था चुम्बक-सा, अमृत-सा ॥

(5) प्रकृति-प्रेमी-आजाद प्रकृति-प्रेमी थे। जब वे संघर्षों से थक जाते थे, विश्राम करने के लिए प्रकृति की गोद में चले जाते थे तथा वहीं अपने भावी कार्यक्रम की योजना बनाते थे

सातोर नदी के इस तट पर, जननी की मुक्ति सोचता है।
शासन की महाशक्ति से वह, लड़ने की युक्ति सोचता है ॥

(6) महान् क्रान्तिकारी-चन्द्रशेखर महान् क्रान्तिकारी देशभक्त थे। अंग्रेजों के दमन-चक्र के विरोध में असहयोग आन्दोलन को शिथिल पड़ता देखकर उन्होंने सशस्त्र क्रान्ति का अवलम्बन लिया। उन्होंने भगतसिंह जैसे अन्य क्रान्तिकारियों के साथ मिलकर क्रान्ति की ज्वाला सर्वत्र भड़का दी

संयुक्त प्रान्त पूर्वी भारत के क्रान्ति दूत,
आजाद क्रान्ति की आग जलाये जाते थे।

उनका सम्पूर्ण जीवन क्रान्ति और संघर्षों में बीता। उनके आह्वान पर देश के नवयुवक प्राण न्योछावर करने को,उद्यत रहते थे। उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अनेक क्रान्तिकारी योजनाएँ बनायीं।

(7) अपराजेय सेनानी-आजाद अपराजेय, निर्भीक स्वतन्त्रता-सेनानी थे। वे कुशल  संगठनकर्ता और सेनानायक थे। वे क्रान्तिकारी योजनाओं को बड़ी चतुराई से क्रियान्वित किया करते थे। वे ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के कमाण्डर-इन-चीफ थे। उन्होंने बाल्यावस्था में ही यह सिद्ध कर दिया था। कि बड़ा कष्ट सहकर भी वे कभी नहीं झुकेंगे। |

(8) अमर शहीद-बचपन से ही स्वतन्त्रता की आग को हृदय में बसाये हुए चन्द्रशेखर आजाद ने अंग्रेज सरकार को भयभीत कर दिया था। 27 फरवरी, 1931 ई० को प्रयाग के अल्फ्रेड पार्क में उन्होंने अकेले ही अंग्रेज पुलिस से मुकाबला किया और एक सिपाही का जबड़ा तथा अंग्रेज एस० पी० नॉट बाबर की कलाई को गोली से उड़ा दिया। उन्हें जीवित नहीं पकड़ा जा सका था, अपने रिवाल्वर की अन्तिम गोली से उन्होंने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। कवि ने उसे हृदयस्पर्शी दृश्य का वर्णन इस प्रकार किया है—

गिर पड़ा वीर पर हिम्मत थी, आने की पास नहीं उनकी ।
कहते थे जीवित होगा यह, क्या जाने गोली कब सनकी।

वास्तव में चन्द्रशेखर आजाद की जीवन-गाथा ‘देशभक्ति और बलिदान की गौरव -गाथा’ है। वह महान् देशभक्त, वीर, साहसी, महान् क्रान्तिकारी, अपराजेय सेनानी और स्वतन्त्रता-प्रेमी थे। इस प्रकार आजाद का सारा जीवन मातृभूमि के लिए संघर्ष का जीवन था। उनका चरित्र भारतीय युवकों को राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

6.

Change the following sentences into Indirect Speech :  (i) Krishna said to me, “I want to read a paper.” (ii) Alka said to her sister, “Here, I lived for ten years.” (iii) The boy said to the doctor, “Give me some medicine for fever.” (iv) The boys said, “Let us go for a picnic.” (v) The guard said to the boy, “What are you doing here.”

Answer»

(i) Krishna told me that he wanted to read a paper. 

(ii) Alka told her sister that there she had lived for ten years. 

(iii) The boys requested the doctor to give him some medicine for fever. 

(iv) The boys proposed that they should go for a picnic. 

(v) The guard asked the boy what he was doing there.

7.

घर का पुराना नौकर कौन था? 

Answer»

घर का पुराना नौकर सन्तू था।

8.

लड़की की पढ़ाई कहाँ तक हुई थी? 

Answer»

लड़की की पढ़ाई बी.ए. तक हुई थी।

9.

सन्तू की पीठ पर क्या पड़ी? 

Answer»

सन्तू की पीठ पर चाबुक पड़ी।

10.

बाबूजी के सामने चाँदी की कितनी कटोरियाँ रखी हुई थीं? 

Answer»

बाबूजी के सामने तीन चाँदी की कटोरियाँ रखी हुई थीं।

11.

किसका स्वप्न सचमुच साकार हो उठा? 

Answer»

मंगलसेन का सपना सचमुच साकार हो उठा।

12.

“अमृतसर के बम्बूकार्ट वालों की बोली का मरहम लगायें।” लेखक का आशय स्पष्ट कीजिए।

Answer»

अमृतसर के बम्बूकार्ट वाले भीड़ भरे बाजार में सब्र के साथ मीठी कर्ण प्रिय भाषा में सामने वालों को हटाते हुए निकलते हैं। वे लोगों को हटाते हुए हमेशा ‘जी’ और ‘साहब’ शब्दों का प्रयोग करते हैं। उनकी जीभ महीन मार करती हुई मीठी छुरी की तरह चलती है। जब बार-बार हटाने पर भी लोग नहीं हटते तो उनकी बोली सुनने को मिलती है-हट जा जीणे जोगिए, हट जा करमाँवालिए, हट जा पुत्ताँ प्यारिए। बच जा लम्बी उमाँ वालिए । अमृतसर के गाड़ी वालों की जबान कड़वी थी जिसे सुनकर सभी को बुरा लगता था। पर इनकी वाणी में वह कटुता नहीं थी। केवल स्त्रियों के लिए ही नहीं, पुरुषों के लिए भी यही मिठास भरी थी।

13.

‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य की कथावस्तु (कथानक या सारांश) संक्षेप में लिखिए।या‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की प्रमुख घटनाओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद का जीवन-चरित्र संक्षेप में लिखिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद की राष्ट्रनिष्ठा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।[ संकेत-इस प्रश्न के उत्तर हेतु आजाद के ‘विद्यार्थी जीवन’ की एवं ‘अल्फ्रेड पार्क’ के प्रसंग को संक्षेप में लिखें।

Answer»

तृतीय सर्ग में ‘आजाद के जीवन के अन्तिम समय की क्रियाशीलता और बाधाओं का वर्णन किया गया है। ‘आजाद जब बहुत थक जाते थे, तब वे प्रकृति के बीच जाकर विश्राम करते थे। मध्य प्रदेश की सातार नदी के तट पर हनुमान जी का मन्दिर और पर्वत की  गुफा उनका ऐसा ही विश्राम-स्थल था। वे फाल्गुन के सुहावने दिनों में ऊषाकाल के समय संघर्ष से थककर अपने मित्र रुद्र के साथ बैठकर भावी संघर्ष की योजना बना रहे थे। मित्रों की याद करके बदला लेने के लिए बार-बार उनका चेहरा तमतमा उठता था। उन्होंने अपने मित्र से कहा कि “अंग्रेजों ने भारतमाता के पुत्रों के खून से उसका आँचल रँग दिया है। इस कृत्य के लिए मैं अंग्रेजों को छोड़ नहीं सकता। आर्मी के संगठन को मजबूत करके क्रान्ति का बिगुल बजाते हुए मुझे अपना दायित्व पूरा करना ही होगा।

एक दिन आजाद फूलबाग की सभा में सशस्त्र क्रान्ति के विरुद्ध एक नेता का भाषण सुन रहे थे। वहीं पर खड़े गणेश शंकर विद्यार्थी ने उनके उत्तेजित मन को शान्त किया और कहा-“देख आजाद! नेता की अनजानी बातों को मत सुननी। उन्हें इस बात का भय था कि आजाद कहीं इस सभा को भंग ने कर दें। उनका यह विचार भ्रम-मात्रे ही था; क्योंकि आजाद स्वतन्त्रता की लड़ाई के लिए शासन से अपने आपको सुरक्षित रखना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वे प्रयाग जाकर जवाहरलाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास आदि मित्रों से मिलकर भावी योजना बनाना चाहते थे और उसके बाद उनका अहमदाबाद जाने का विचार था।

फरवरी, सन् 1931 ई० को प्रयाग के अल्फ्रेड पार्क में बैठकर वे कुछ मित्रों से बातें कर रहे थे। उसी समय वहाँ पुलिस की गाड़ी आकर रुकी और पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। आजाद ने क्षणभर में अपने मित्रों को विदा करके अपनी पिस्तौल में गोलियाँ भरीं और पुलिस से मोर्चा लिया। पहली ही गोली मैं उन्होंने एक अफसर का जबड़ा उड़ा दिया। नॉट बाबर नाम के एक अंग्रेज एस०पी० ने वृक्ष की ओट से गोलियाँ दागनी शुरू कर दीं। ‘आजाद’ अकेले ही उससे मोर्चा ले रहे थे। उन्होंने एक घण्टे तक डटकर विशाल पुलिस दल का मुकाबला किया और एक गोली से एस०पी० की कलाई उड़ा दी। वह निरन्तर पुलिस पर गोलियाँ बरसाते रहे, परन्तु जब उस एकाकी वीर के पास अकेली गोली बची, तो उसे उसने अपनी कनपटी पर मारकर वीरगति प्राप्त कर ली। नॉट बाबर को उनके मरने पर सन्देह था,  इसलिए उसने आजाद के तलुवे में गोली मारकर अपना सन्देह दूर किया। आजाद के विस्मयकारी बलिदान से सारा देश स्तब्ध रह गया।

आजाद ने जिस जामुन के पेड़ की ओट लेकर संघर्ष किया था, वह पेड़ भारतीय जनता का पूजास्थल बन गया। अंग्रेज सरकार ने आतंकित होकर उसको भी समूल कटवा दिया।

14.

‘उसने कहा था’ कहानी है –(क) घटना प्रधान(ख) वातावरण प्रधान(ग) चरित्र प्रधान(घ) मनोविज्ञान प्रधान।

Answer»

(ग) चरित्र प्रधान

15.

‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर द्वितीय सर्ग (संघर्ष सर्ग) का सारांश (कथावस्तु | या कथानक) लिखिए।

Answer»

देश में असहयोग आन्दोलन के मन्द पड़ते ही चन्द्रशेखर का झुकाव शस्त्र-क्रान्ति की ओर हो गया। उन्हें स्वतन्त्रता-संग्राम के लिए बमों और पिस्तौलों का निर्माण कराने के लिए धन की आवश्यकता हुई। इसके लिए उन्होंने मोटर ड्राइवरी सीखी और एक मठाधीश के शिष्य बने। इन्होंने सरदार भगतसिंह, अशफाक उल्ला खाँ, रामप्रसाद बिस्मिल, मन्मथनाथ गुप्त, शचीन्द्रनाथ बख्शी आदि के साथ मिलकर एक मजबूत संगठन बनाया। योजना के अनुसार इन सबने 9 अगस्त, 1925 ई० को काकोरी स्टेशन के पास रेलगाड़ी से सरकारी खजाने को लूटने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। इस काण्ड में पकड़े जाने पर रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खाँ को फाँसी हो गयी, शचीन्द्रनाथ बख्शी को आजीवन कारावास और 15 क्रान्तिकारियों को 3 साल की जेल की सजा हुई, परन्तु चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह सरकार की नजर से बच निकले। इन्हें पकड़ने के सारे सरकारी प्रयास विफल हो गये।।

सन् 1928 ई० में साइमन कमीशन भारत में हो रहे स्वाधीनता के झगड़ों की जाँच के लिए आया। इस कमीशन के सारे सदस्य अंग्रेज थे। जहाँ भी यह कमीशन गया, वहीं उसका बहिष्कार और अपमान करके रोष प्रकट किया गया। देशभक्तों ने पुलिस की लाठियाँ खाकर भी विरोध का स्वर तीव्र किया। लखनऊ में पुलिस की लाठियों से पं० जवाहरलाल नेहरू गिर पड़े, पन्त जी ने ऊपर गिरकर जवाहरलाल नेहरू जी को बचा लिया। लाहौर में कमीशन के विरोध में काले झण्डे लिये प्रदर्शन करते समय पंजाब केसरी लाला लाजपत राय पर पुलिस अफसर स्कॉट ने लाठियों का घातक प्रहार किया, जिससे कुछ ही दिनों के बाद  उनका देहान्त हो गया। उनकी मृत्यु का समाचार सुनकर पूरे देश में शोक की लहर व्याप्त हो गयी। इस समय चन्द्रशेखर आजाद पूर्वी भारत में और भगत सिंह पश्चिमी भारत में क्रान्ति की ज्वाला भड़का रहे थे।
क्रान्तिकारियों ने अत्याचारों का बदला लेने के लिए ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक आर्मी’ का गठन किया। फिरोजाबाद के एक सम्मेलन में आजाद’ को आर्मी का कमाण्डर-इन-चीफ बनाया गया। लाहौर में चन्द्रशेखर आजाद ने भगत सिंह और राजगुरु से मिलकर लाला लाजपत राय के हत्यारे पुलिस ऑफिसर स्कॉट को मारने की योजना बनायी। स्कॉट के स्थान पर साण्डर्स मारा गया। इस घटना से ब्रिटिश हुकूमत पर मानो बिजली गिर पड़ी। सरकार अपनी रक्षा के लिए असेम्बली में जनता रक्षा बिल’ लाना चाहती थी, जिसको बिट्ठलभाई पटेल ने मतदान करके पास नहीं होने दिया।

योजना के अनुसार 8 अप्रैल, 1928 ई० को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली में बम गिरा दिया और भारतमाता की जय’ का नारा लगाते हुए अपने आपको गिरफ्तार कराया। सरकार ने पंजाब की घटना का जुर्म भी क्रान्तिकारियों के मत्थे मढ़कर तीन क्रान्तिकारियों को फाँसी की सजा दे दी। अब संगठन का सारा भार ‘आजाद’ के कन्धों पर आ गया। वे सजा पा रहे मित्रों का उद्धार करने एवं शासन से अन्याय का बदला लेने की सोचने लगे। सरकार हर प्रकार से घोर दमन करने पर तुली हुई थी।

16.

उसने कहा था’ कहानी के नायक लहनासिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Answer»

लहनासिंह कहानी का नायक है। उसके चरित्र की कतिपय विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

प्रत्युत्पन्नमति मान – खन्दक में जर्मन अधिकारी को पहचान लेने के बाद लहनासिंह ने निर्णय लेने में तनिक भी देर नहीं लगाई। वजीरासिंह को जगाकर सूबेदार को लौटा लाने के लिए तुरन्त भेज दिया। तनिक-सी देरी सारी खन्दक को उड़ा देती और सबके प्राण ले लेती। उसने मूर्छित जर्मन अफसर की जेबों की तलाशी लेकर सारे कागज भी निकाल लिए।

कर्तव्यनिष्ठ – लहनासिंह की कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की जानी चाहिए। खन्दक में खड़े होकर जहाँ एक ओर वह एक सिपाही के कर्तव्य का निर्वहन कर रहा था वहीं दूसरी ओर बीमार साथी के प्रति भी अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहा था। दो-दो घाव लगने के बाद भी वह अपने कर्तव्य को नहीं भूला । प्रेम के क्षेत्र में भी उसने अपने कर्तव्य का निर्वाह किया। सूबेदारनी को उसने जो वचन दिया था उसे भी उसने पूरी तरह निभाया।

निश्छल-प्रेमी – वह प्रेम के सच्चे अर्थ को समझता था। बचपन में आठ वर्ष की लड़की से दो-तीन बार मिलने पर उसके हृदय में जो प्रेम प्रस्फुटित हुआ था, वह सच्चा प्रेम था। तभी तो सम्भावना के विरुद्ध उत्तर सुनकर उस पर जो प्रभाव पड़ा वह उसके सच्चे प्रेम का उदाहरण है। उसने बचपन के प्रेम को अन्तिम समय तक निभाया। यह सूबेदारनी से किये हुए प्रेम का ही परिणाम था कि उसने बोधासिंह का ध्यान रखा ।।

त्यागी – लहनासिंह के त्याग़ का बहुत अच्छा उदाहरण है-बोधासिंह की रक्षा । खन्दक में ठण्ड होने पर अपना कम्बल, ओवरकोट और जरसी तक बोधासिंह को दे दिया। स्वयं एक कुरते में ही खड़ा रहा। दूसरी ओर उसने अपने प्रेम के लिए अपना जीवन दाँव पर लगा दिया। सूबेदारनी ने जो चाहा था लहनासिंह ने वही किया।

साहसी – वह बहुत साहसी था। जर्मन अफसर ने धोखे से सूबेदार को खन्दक से दूर भेज दिया। खन्दक में केवल आठ-दसे सिपाही रह गये। जर्मन सिपाहियों के आक्रमण करने पर उसने अपना साहस नहीं खोया । यद्यपि उसे दो घाव लग गये थे फिर भी वह खड़ा होकर एक-एक जर्मन को मार रहा था। वह सत्तर जर्मन सिपाहियों का साहस के साथ सामना करता रहा। उसके साहस का एक उदाहरण बचपन में भी मिलता है जब एक लड़की को घोड़े की टाँगों के बीच से निकालकर दूर खड़ा कर दिया था और स्वयं उसमें फँस गया था।

17.

उसने कहा था’ कहानी के शीर्षक पर टिप्पणी कीजिए।

Answer»

शीर्षक कहानी का मूलाधार है। शीर्षक छोटा हो, जिज्ञासात्मक हो, कथानक को अपने में समेटे हुए हो। वही शीर्षक अच्छा माना जाता है। प्रस्तुत कहानी का शीर्षक केवल तीन शब्दों का है पर सबसे बड़ी बात यह है कि यह जिज्ञासात्मक है। अन्त तक पाठक की यह जिज्ञासा रहती है किसने और क्या कहा था। पाठक उस रहस्य को जानने के लिए उत्सुक रहता है। कहानी हाथ से छूटती नहीं है। इससे अच्छा शीर्षक और नहीं हो सकता था। लेखक ने बहुत सोच-समझकर कहानी का यह शीर्षक रखा है।

18.

किसका लिहाज़ करना चाहिए? 

Answer»

खून की रिश्ते का कुछ तो लिहाज़ करना चाहिए।

19.

थाली में चाँदी के कितने चम्मच रखे हुए थे?

Answer»

थाली में तीन छोटे-छोटे चाँदी के चम्मच रखे हुए थे।

20.

किसकी सगाई हो रही थी?

Answer»

वीरजी की सगाई हो रही थी।

21.

वीरजी की सगाई में जाने की बात सुनकर मंगलसेन की प्रतिक्रिया कैसी थी? 

Answer»

मंगलसेन को जब मालूम हुआ कि वह वीरजी की सगाई में बाबूजी के साथ जाएगा वह सोचने लगा – क्यों न हो, आखिर मुझसे बड़ा संबंधी है भी कौन? मुझे नहीं ले जायेंगे तो किसे ले जायेंगे? मैं और बाबूजी ही इस घर के कर्ता-धर्ता हैं और कौन हैं?

22.

उसने कहा था’ कहानी की भाषा-शैली की दृष्टि से समीक्षा कीजिए।

Answer»

भाषा भावों की संवाहक होती है। भाव और कथानक कितना भी अच्छा हो किन्तु भाषा शिथिल हो तो कहानी का कैथानक उभर नहीं पाता । इस कहानी की भाषा सीधी और सरल, किन्तु हृदयस्पर्शी है। भाषा पात्रानुकूल है। जैसा पात्र वैसी ही भाषा । बम्बृकार्ट वालों की भाषा कैसी होती है, उनकी जीभ कैसी चलती है? इसे कहानी के प्रारम्भ में ही देख सकते हैं। उनकी भाषा मरहम लगाती है। जिसमें तीक्ष्णता नहीं कोमलता है। हट जा जीणे जोगिए, करमाँ वालिए आदि। भाषा पात्रानुकूल और समय के अनुसार हैं। वाक्य रचना भी छोटी है। इसी प्रकार लड़के-लड़की की भाषा भी पात्रानुकूल है। लड़के का पूछना ‘तेरी कुड़माई हो गई?’ और लड़की को सहज रूप में ‘धत्’ कहकर भाग जाना में स्वाभाविकता है। ‘धत्’ शब्द उसकी लज्जा व्यक्त करता है। कथोपकथन बड़े छोटे हैं और परिस्थितिजन्य हैं।

कहानी के मध्य की भाषा बिलकुल पात्रानुकूल है। सिपाही शुद्ध शब्द का प्रयोग नहीं कर पाते। इस कारण लेफ्टीनेन्ट को लपटन कहते हैं। उर्दू के शब्दों का प्रयोग करते हैं; जैसे-हुक्म। कभी-कभी अंग्रेजी के शब्द जैसे ‘रिलीफ’ भी बोल देते हैं। हँसी-मजाक में आँचलिक शब्दों का प्रयोग भी कर देते हैं; जैसे–माँदे, पाधा आदि। भाषा में मुहावरों के प्रयोग से बड़ी सरसता आ गई है। मुहावरों का प्रयोग सहज ही हुआ है उन्हें जबरन लाया नहीं गया है। मुहावरे भी पात्रानुकूल और समय के अनुसार हैं। दाँत बज रहे हैं, खेत रहे, पलक न कँपी, आँख मारते-मारते जैसे मुहावरे सहज ही आ गए हैं। इनसे भाषा में सौन्दर्य आ गया है।

कथोपकथनात्मक शैली है। कथोपकथन छोटे हैं और पात्रों के अनुकूल हैं। हमउम्र के बच्चे किस प्रकार की बातें करते हैं। यह लड़के और लड़की की बात से स्पष्ट होता है। ‘तेरी कुड़माई हो गई?’ और ‘धत्’ शब्दों में बड़ी मिठास है। कहीं-कहीं कथोपकथन में। व्यंग्य का पुट भी है। लहनासिंह हजारासिंह से कहता है-“लाड़ी होरां वो भी यहाँ बुला लोगे? या वह दूध पिलाने वाली मेम….।” कैसा व्यंग्य है किन्तु हास्ययुक्त है। कहानी के अन्त में प्रत्येक कथन दर्द से भरा है। वहाँ भी छोटे ही कथोपकथन हैं। इस प्रकार भाषा शैलो की दृष्टि से भी कहानी श्रेष्ठ है।

23.

उसने कहा था’ कहानी की कथानक निश्छल प्रेम, त्याग और कर्त्तव्यनिष्ठा को केन्द्र में रखकर बुना गया है और मृत्यु शैय्या पर उसका अन्त होता है-इस कथन की युक्तियुक्त विवेचना कीजिए।

Answer»

कहानी का आरम्भ निश्छल प्रेम से होता है। भीड़ भरे बाजार में बारह वर्ष का लड़का और आठ वर्ष की लड़की एक दुकान पर मिलते हैं। दुकानदार व्यस्त है इसलिए दोनों को बात करने का अवसर मिल जाता है। रास्ते में लड़के ने सहज रूप में कुड़माई के बारे में पूछ लिया। एक दिन लड़की ने सम्भावना के विरुद्ध उत्तर देकर लड़के के प्रेम को झटका दे दिया। जिसका लड़के पर गहरा प्रभाव पड़ा। कहानी बड़े सहज रूप से आरम्भ होती है। लड़के-लड़की के मिलन में कोई बनावट नहीं है। इसमें मनोवैज्ञानिकता है। हमउम्र और विपरीत लिंग में ऐसे प्रश्न स्वाभाविक हैं।

कहानी का दूसरा मुख्य बिन्दु त्याग है। कहानी के नायक लहनासिंह के त्याग को कई उदाहरणों से स्पष्ट किया गया है। लहनासिंह ने सूबेदार के पुत्र बोधासिंह के लिए बहुत त्याग किया। बोधासिंह अस्वस्थ है। साथी होने के कारण उसका ध्यान रखना उसका कर्तव्य है। वह सूबेदार का पुत्र है और सूबेदारनी ने उसकी रक्षा की जिम्मेदारी लहनासिंह को दी है। लहनासिंह ने बोधासिंह को सूखे डिब्बों पर सुलाया, अपना कम्बल दिया, ओवरकोट उढ़ाया, जरसी पहनाई और आप एक कुर्ते में ही ठण्ड में खड़ा रहा। यह त्याग कम नहीं है। वह बोधासिंह की रक्षा के लिए खन्दक में ही रुका रहा। घावों को सहते हुए भी उसने बोधा और हजारा को ही भेज दिया परन्तु स्वयं नहीं गया। इससे बढ़कर त्याग का उदाहरण और क्या होगा।

कर्तव्य के क्षेत्र में उसने दो कर्तव्यों का निर्वाह किया। एक प्रेम के क्षेत्र में और दूसरा सैन्य क्षेत्र में । बोधासिंह और हजारासिंह को सुरक्षित वापिस भेज दिया और अपने प्राणों की बाजी लगा दी, यह प्रेम के लिए कर्तव्य का निर्वाह ही तो है। सिपाही के रूप में भी उसने अपने कर्तव्य का निर्वाह किया। जर्मन लपटन से बदला लेना और उसे मौत के घाट उतारना, घायल होकर भी जर्मन सेना का सामना करना लेकिन पीछे न हटना उसकी कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है।

कहानी का अन्त दुखान्त है। इतना त्याग करने के बाद भी उसे क्या मिला? दो सहानुभूति के शब्द भी किसी ने नहीं कहे। एक सूचना मात्र प्रकाशित होकर रह गई। कहानी का कथानक लहनासिंह के इन तीनों गुणों के कारण मार्मिक बन गया है।

24.

“खून का रिश्ता’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।

Answer»

‘खून का रिश्ता’ कहानी में भीष्म साहनी जी ने सगाई की रस्म, रिश्तेदारों की अहमियत, सगाई में सवा रुपये लेना, आतिथ्य-सत्कार आदि घटनाओं का सजीव चित्रण किया है। वर्तमान परिवेश में कहानी अत्यंत प्रासंगिक है। आज के चकाचौंध भरे माहौल में सरल विवाह की महत्ता तथा खून के रिश्तों एवं पारिवारिक रिश्तों को निभाने पर बल देने के उद्देश्य से यह कहानी सफल कहानी है।

25.

‘खून का रिश्ता’ कहानी के कहानीकार कौन हैं?

Answer»

‘खून का रिश्ता’ कहानी के कहानीकार भीष्म साहनी हैं।

26.

खून का रिश्ता कहानी का आशय लिखें।

Answer»

भीष्म साहनी हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में मध्यमवर्गीय परिवारों के सुख-दुःख, राग-द्वेष का यथार्थ चित्रण हुआ है। ‘खून का रिश्ता’ में एक गरीब, असहाय रिश्तेदार के साथ निर्दय व्यवहार किये जाने का चित्रण है। धन-दौलत के सामने रिश्ते का कोई मूल्य नहीं होता। यही कटु सत्य इस कहानी में प्रकट हुआ है।

वीरजी पढ़ा-लिखा, नौकरीपेशा नौजवान है। उसकी सगाई प्रभा नामक एक सुशील, पढ़ीलिखी युवती से होनेवाली थी। वीरजी एक आदर्शवादी व्यक्ति था। वह धन-दौलत का लोभी नहीं था। वह सिद्धान्तों का पक्का था। वह अपने पिता से कहता है कि वे केवल सवा रुपये का शगुन लेकर रिश्ता पक्का करके आवें। लेकिन पिताजी दहेज के रूप में बड़ी रकम लेना चाहते थे। किन्तु अन्त में बेटे की बात से विवश होकर, सवा रुपये का शगुन लेने के लिए तैयार हो गए।

उनके घर में मंगलसेन नामक दूर का रिश्तेदार रहता था। वह एक सेवानिवृत्त फौजी था। वह इसी घर में इनकी दया से रहता था। वह घर का काम-काज करते हुए अपना गुजारा करता था। मंगलसेन की गरीबी और लाचारी ने उसे एक हास्यास्पद व्यक्ति बना दिया था।

वीरजी की सगाई के कार्यक्रम में उसके पिता मंगलसेन को अपने साथ होनेवाले समधी के घर ले जाना चाहते थे। मंगलसेन को अच्छे कपड़े पहनाकर वीरजी के पिता ले जाते हैं। प्रभा के माँ-बाप ने इनकी खूब आव-भगत की। लड़की वालों ने इनका आदर-सत्कार इतना किया कि मंगलसेन हवा में तैरने लगा। उसने लड़की के बारे में ढेर सारे सवाल किए। जब कि वीरजी के पिता चुप थे। लड़की वालों ने तीन चाँदी की कटोरियों में तीन चाँदी के चम्मच तथा सवा रुपये का शगुन दिया। वीरजी के पिता लड़की वालों के व्यवहार से खुश होकर, आनंद के साथ घर लौटे।

घरवाले इन्हीं का इन्तजार कर रहे थे। इनके घर आते ही, लड़की वालों के यहाँ से लाये तोहफे देखने के लिए टूट पड़े। तीन चम्मचवाली चाँदी की कटोरियाँ देखकर खुशी से सब लोग नाच उठे, लेकिन दो ही चम्मच थे। घर के सब लोग मंगलसेन को दोषी ठहराने लगे। मंगल चाचा ने कहा, तीन चम्मच तो देखे थे। लेकिन दो ही चम्मच देखकर उसे भी आश्चर्य हो रहा था। पर बाबूजी ने उसके कोट, कुर्ते की जेबें तलाश करने की आज्ञा दी। ऐसा ही किया गया परन्तु कुछ भी उनके हाथ नहीं लगा। सभी चिंतित थे।

इतने में प्रभा का छोटा भाई आकर चाँदी का एक चम्मच उन्हें देकर उल्टे पाँव चला गया। घरवालों को तसल्ली हुई। लेकिन बेचारे गरीब मंगलसेन पर आरोप लगानेवालों को उनका ध्यान ही नहीं आया।

27.

खून का रिश्ता कहानी का आशय अँग्रेजी में  लिखें।

Answer»

Bhisham Sahni is a noted Hindi story writer. His writings generally depict the life and emotions of middle-class people and their families. In this story, the unfair and merciless treatment of a poor and helpless relative is depicted. This story shows us that in the face of riches or wealth, relationships hold no value. This is the bitter truth that this story presents us with.

Veerji was a well-educated and employed youth. He was about to be engaged to a bright, educated young girl named Prabha. Veerji was a model person. He was not greedy for riches or wealth. He was a man of principles. He told his father to only accept one and a half rupees as a token offering in order to confirm the engagement. The father, however, wanted to take a large amount of money as dowry. Finally, bowing to his son’s wishes, the father agrees to accept only a token amount of one and a half rupees.

There lived, in the house of Veerji, a distant relative by name Mangalsen. He had retired from the armed forces. He lived in that house by the grace of the members of the household. He would do all the household chores and make his living. Mangalsen’s poverty and helplessness had made him an object of ridicule.

Veerji’s father decided to take Mangalsen with him to the girl’s (Prabha) house when he would go to confirm Veerji’s engagement. Mangalsen dressed in good clothes and accompanied Veerji’s father. Prabha’s mother and father were very hospitable to Mangalsen. He asked a lot of questions about Prabha, whereas Veerji’s father was silent. Prabha’s family gave a set of three silver cups and three silver spoons along with one and a half rupees as ‘shagun’ – a gift from the bridegroom’s side as a confirmation of the engagement. Veerji’s father was very pleased with the respect given to them by the bride’s family and returned home happy.

The members of Veerji’s household were awaiting the return of Veerji’s father and Mangalsen. As soon as they returned home, the family members began to go through the gifts sent by Prabha’s family. The family was very happy to see the three silver cups with spoons, but however, there were only two spoons. All the members of the household accused Mangalsen of stealing one of the silver spoons. Mangalsen said that he had also seen three spoons but did not know where one had gone. Even he was surprised to find only two spoons. However, Veerji’s father instructed that Mangalsen’s coat and the pockets of his kurta be searched. This was done, but the spoon was not found. Everyone became worried.

Just then, Prabha’s younger brother arrived and after giving them the silver spoon which they had left behind, returned immediately. Veerji’s family was happy. But none of the people who had accused Mangalsen of stealing the spoon thought how the poor old Mangalsen would have felt.

28.

Write the Summary of 'An Icon of Civil Rights'.

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Martin Luther King (Junior) is one of the most influential and inspiring Afro-American leader. His Nobel Prize acceptance speech is noted for its excellent content and effective expression. He accepts the Nobel Prize on behalf of the Civil Rights Movement in America. He remembers the suffering of blacks in the USA. He praises the Indians for showing the path of non-violence. He believes in the power of truth and love. He is hopeful of bright future for humanity. He has faith in man’s ability to lay a super highway of justice on which all people will cooperatively go ahead and create a world where every body gets food, mind finds education and spirit receives dignity, equality and brotherhood. He says faith gives us courage and confidence to complete the mission of establishing universal brotherhood that has roots in love, truth and peace.

29.

Do you think that this is an emotive speech ? If yes, pick out the expressions that show it is an emotive speech.

Answer»

Yes, it is an emotive speech. Every part, in fact, is an example to prove the point. Yet, here are some striking expressions : 22 million Negroes are engaged in a creative battle ; our children, crying for brotherhood, were answered with fire hoses beleaguered and unrelenting struggle.

30.

What is Martin Luther King’s speech about? List the issues he is talking about.

Answer»

Martin Luther King’s speech is about justice and equality. It is about universal brotherhood. It is about food to every body, education to every mind and dignity and respect for every spirit. It is about truth, love and peace. It is delivered as Nobel Prize acceptance speech.

31.

One way Martin Luther, Ulrich Zwingii and John Calvings were similar is that they all were A) French revolutionary leaders B) Renaissance artists C) Monarchs who opposed the Church D) Reformation leaders

Answer»

D) Reformation leaders

D) Reform Leaders

32.

डाँडे के देवता का स्थान कहाँ था ? उन्हें किन वस्तुओं से सजाया गया था ?

Answer»

डाँडे के सबसे उच्च शिखर पर उनके देवता का स्थान था । उन्हें पत्थरों के ढेर, जानवरों के सींगो और रंगबिरंगे झंडियों से सजाया गया था ।

33.

तिब्बत के डाकू कानून से क्यों नहीं डरते हैं ?

Answer»

तिब्बत में हथियार का कानून न होने के कारण कोई भी बन्दूक या पिस्तौल लेकर चल सकता है । लोगों को लूटने के लिए डाकू हथियार के साथ चलते हैं । डाँडे जैसे निर्जन स्थलों पर गवाही के लिए कोई नहीं मिलता । इसलिए हत्या करने पर भी सबूत या गवाह के अभाव में डाकू बच जाते हैं । इसलिए उन्हें कानून से डर नहीं लगता ।

34.

ऐसे शब्द जो किसी ‘अंचल’ या क्षेत्र विशेष में प्रत्युक्त होते हैं, उन्हें आंचलिक शब्द कहा जाता है ।प्रस्तुत पाठ में से आंचलिक शब्द ढूंढकर लिखिए :

Answer»

पाठ में आए हुए ‘आंचलिक’ शब्द –

फरी-कलिङ्पोङ्, चोडी, छङ्, डाँडा, थोङ्ला, कुची-कुची, लङ्कोर, कंडे, थुक्पा, भरिया, गंडा, तिकी, कन्जुर ।

35.

थोङ्ला के पहले के आखिरी गाँव पहुँचने पर भिनमंगे के वेश में होने के बावजूद लेखक को ठहरने के लिए उचित स्थान मिला जबकि दूसरी यात्रा के समय भद्रवेश भी उन्हें वैसा स्थान नहीं दिला सका था । क्यों ?

Answer»

थोड्ला के पहले आखिरी गाँव पहुँचने पर भिखमंगे के वेश में होने पर भी उन्हें ठहरने के लिए उचित स्थान इसलिए मिला क्योंकि उनके साथ सुमति थे । सुमति के जान-पहचानवाले लोग वहाँ थे । जबकि दूसरी यात्रा के दौरान लेखक एक भद्रवेश में होने पर भी उनके परिचित का कोई व्यक्ति नहीं था । वह वहाँ के लोगों के लिए अजनबी थे । इसलिए उन्हें किसी से रहने के लिए स्थान नहीं दी थी । परिणामस्वरूप उन्हें निम्न गरीब बस्ती में रहना पड़ा ।

36.

वह नेपाल से तिब्बत जाने का मुख्य रास्ता है । फरी-कलिङ्पोङ् का रास्ता जब नहीं खुला था, तो नेपाल ही नहीं हिंदुस्तान की भी चीजें इसी रास्ते तिब्बत जाया करती थीं । यह व्यापारिक ही नहीं सैनिक रास्ता भी था, इसीलिए जगह-जगह फ़ौजी चौकियाँ और किले बने हुए हैं, जिनमें कभी चीनी पलटन रहा करती थी । आजकल बहुत से फ़ौजी मकान गिर चुके हैं । दुर्ग के किसी भाग में, जहाँ किसानों ने अपना बसेरा बना लिया है, वहाँ पर कुछ आबाद दिखाई पड़ते हैं । ऐसा ही परित्यक्त एक चीनी किला था । हम वहाँ चाय पीने के लिए ठहरे ।1. पहले लोग किस रास्ते से तिब्बत जाते थे ?2. नेपाल से तिब्बत जाने के रास्ते पर जगह-जगह चौकियाँ क्यों बनी थी ?3. लेखक चाय पीने के लिए कहाँ ठहरे ?4. ‘व्यापारिक’ तथा ‘चौकियाँ’ शब्द में से प्रत्यय अलग कीजिए ।

Answer»

1. पहले लोग नेपाल के रास्ते से तिब्बत जाते थे ।

2. नेपाल से जानेवाला यह रास्ता व्यापारिक ही नहीं सैनिक रास्ता भी था । सैनिकों को आराम करने के लिए जगह जगह चौकियाँ
बनी थीं ।

3. लेखक एक परित्यक्त चीनी किले पर चाय पीने के लिए ठहरे थे ।

4. व्यापारिक – इक प्रत्यय
चौकियाँ – इयाँ प्रत्यय

37.

लेखक पाँच वर्ष पूर्व गाँव के गरीब झोपड़े में क्यों रूके थे ?

Answer»

पाँच वर्ष पूर्व लेखक एक भद्र यात्री के रूप में तिब्बत आये थे । उस समय सुमति उनके साथ नहीं थे । कोई अन्य परिचित व्यक्ति उनके साथ नहीं था । वे वहाँ के किसी भी व्यक्ति को नहीं जानते थे । इसलिए पाँच वर्ष पूर्व लेखक को गाँव के गरीब झोपड़े में रुकना पड़ा था ।

38.

तिब्बत में यात्रियों के लिए बहुत सी तकलीफें भी हैं और कुछ आराम की बातें भी । वहाँ जाति-पाँति, छुआछूत का सवाल ही नहीं है और न औरतें परदा ही करती है । बहुत निम्नश्रेणी के भिखमंगों को लोग चोरी के डर से घर के भीतर नहीं आने देते; नहीं तो आप बिलकुल घर के भीतर चले जा सकते हैं । चाहे आप बिलकुल अपरिचित हों, तब भी घर की बहू या सासु को अपनी झोली में से चाय दे सकते हैं । यह आपके लिए उसे पका देगी । मक्खन और सोडा-नमक दे दीजिए, वह चाय चोङी में कूटकर उसे दूधवाली चाय के रंग की बना के मिट्टी के टोटीदार बरतन (खोटी) में रखके आपको दे देगी ।1. लोग निम्न श्रेणी के भिखमंगों को घर में क्यों आने नहीं देते ?2. तिब्बती महिलाओं की सामाजिक स्वतंत्रता पर अपने विचार प्रकट कीजिए ।3. भीतर तथा अपरिचित शब्द का विलोम शब्द लिखिए ।

Answer»

1. तिब्बत के लोग निम्न श्रेणी के भिखमंगों को चोरी के डर से घर में नहीं आने देते ।

2. तिब्बती महिलाएं अपने घरों में बिना परदा के रहती है । वे अपरिचित लोगों से बातचीत कर सकती हैं । यात्रियों द्वारा दी गई सामग्री को वे पका कर दे सकती हैं, बिना किसी भेदभाव के । यानी वे काफी हद तक स्वतंत्र हैं ।

3. भीतर × बाहर
अपरिचित × परिचित

39.

उस समय का तिब्बतीय समाज कैसा था ?

Answer»

उस समय तिब्बतीय समाज में छुआछूत, परदा प्रथा व जाति-पाँति जैसी सामाजिक बुराइयाँ नहीं थी । स्त्रियों को किसी भी अजनबी पुरुष से बात करने की आजादी प्राप्त थी । उस समय भी लोग छड़ पीते थे । समाज में बौद्धधर्म के प्रति अंधविश्वास भी था ।

40.

लेखक के अनुसार तिब्बत जाने का दूसरा कौन-सा रास्ता है ?

Answer»

लेखक के अनुसार फरी-कलिङ्पोङ् तिब्बत जाने का दूसरा रास्ता है ।

41.

सुमति के यजमान और अन्य परिचित लोग लगभग हर गाँव में मिले । इस आधार पर आप सुमति के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का चित्रण कर सकते हैं ?

Answer»

सुमति के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. वे काफी मिलनसार व विनम्र व्यक्ति थे । उनकी इस विशेषता के कारण ही हर जगह उनके जान पहचान के लोग थे ।
  2. वे बौद्ध धर्म के अनुयायी थे । बोधगया से लाये गंडे को अपने परिचितों में बाँटकर उनसे दक्षिणा लिया करते थे ।
  3. लोगों की धार्मिक आस्था का अनुचित लाभ उठाते थे । बोधगया के गंडे खत्म होने पर, किसी भी कपड़े से गंडा बनाकर लोगों में बाँट देते थे ।
  4. वे गुस्सैल भी थे । लेखक के विलम्ब आने पर उनके गुस्से का शिकार होना पड़ा
42.

दूसरे दिन हम घोड़ों पर सवार होकर ऊपर की ओर चले । डाँडे से पहिले एक जगह चाय पी और दोपहर के यक्त डॉडे के ऊपर जा पहुँचे । हम समुद्रतल से 17-18 हजार फीट ऊँचे खड़े थे । हमारी दक्खिन तरफ़ पूरब से पश्चिम की ओर हिमालय के हजारों श्वेत शिखर चले गए थे । भीटे की ओर दिखनेवाले पहाड़ बिलकुल नंगे थे, न वहाँ बरफ़ की सफ़ेदी थी, न किसी तरह की हरियाली । उत्तर की तरफ़ बहुत कम बरफ़ वाली चोटियाँ दिखाई पड़ती थीं । सर्वोच्च स्थान पर डाँडे के देवता का स्थान था, जो पत्थरों के ढेर, जानवरों की सींगों और रंग-बिरंगे कपड़े की झंड़ियों से सजाया गया था । अब हमें बराबर उतराई पर चलना था ।1. भीटे की ओर दिखनेवाले पहाड़ कैसे थे ?2. डाँडे के देवता को किन चीजों से सजाया गया था ?3. ‘हिमालय’ तथा ‘सर्वोच्च’ शब्द का संधि-विग्रह कीजिए ।

Answer»

1. भीटे की ओर दिखनेवाले पहाड़ बिलकुल नंगे थे । न वहाँ बरफ की सफेदी थी न किसी तरह की हरियाली ।

2. डाँडे के देवता को पत्थरों के ढेर, जानवरों की सींगों और रंगबिरंगे कपड़ों की झंड़ियों से सजाया गया था ।

3. हिमालय – हिम + आलय
सर्वोच्च → सर्व + उच्च

43.

मुँह की दुर्गंध से बचने के लिए क्या इस्तेमाल किया जाता है ?(क) माउथ वाश(ख) पान(ग) सुगंधित शरबत(घ) पानी

Answer»

(क) माउथ वाश

44.

हैसियत जताने के लिए लोग कितने हजार की घड़ी लेते हैं ?(क) पचास-साठ हजार से लाख डेढ़ लाख की घड़ी ।(ख) चालीस-पचास हजार से डेढ़ लाख की घड़ी ।(ग) पचास-साठ हजार से 2 लाख की घड़ी ।(घ) एक लाख से डेढ़ लाख की घड़ी ।

Answer»

(क) पचास-साठ हजार से लाख डेढ़ लाख की घड़ी ।

45.

व्यक्तियों की केंद्रिकता से आप क्या समझते है ? पाठ के आधार पर बताइए ।

Answer»

व्यक्तियों की केंद्रिकता का अर्थ है अपने आप तक सीमित होकर रह जाना । पहले के समय में लोग अपने घर, परिवार, समाज में रहनेवाले लोगों के सुख-दुःख में सरीख होते थे, दूसरों के सुख-दुःख को अपना समझते थे । अब व्यक्ति अपने तक सीमित होकर रह गया है । यह केवल अपने सुख-दुाख्न के विषय में सोचता है, अर्थात् व्यक्ति स्यार्थी हो गया है । उसे दूसरों के सुख्न दुख की कोई परवाह नहीं ।

46.

आपके अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार वस्तु की गुणवत्ता होनी चाहिए या उसका विज्ञापन ? तर्क देकर स्पष्ट करें ।

Answer»

हमारे अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार वस्तु की गुणवत्ता होनी चाहिए न कि उसका विज्ञापन । विज्ञापन में दिखाई जानेवाली वस्तुओं का कार्य, त्वरित प्रभाय, सब मिथ्या है । हमें अपने जीवन के लिए जिन वस्तुओं की आवश्यकता हो, उन्हें विज्ञापन देखकर नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता की परख करके ही वस्तुओं को खरीदना हितकारी है।

47.

एक नवीन जीवनशैली के साथ-साथ कौन-सा दर्शन अस्तित्व में आ रहा है ?(क) छायावादी जीवन दर्शन(ख) उपभोक्तावादी जीवन दर्शन(ग) मार्क्सवादी जीवन दर्शन(घ) कल्पनावादी जीवन दर्शन

Answer»

(ख) उपभोक्तावादी जीवन दर्शन

48.

पश्चिम के देश के लोग मरने से पहले किसका प्रबंध पहले से कर सकते हैं ?(क) वसियत का प्रबंध(ख) सम्पत्ति के बँटवारे का प्रबंध(ग) अंतिम संस्कार व अनंत विश्राम का प्रबंध(घ) बैंक बेलेंस का प्रबंध

Answer»

(ग) अंतिम संस्कार व अनंत विश्राम का प्रबंध

49.

संस्कृति की नियंत्रण शक्तियों की आज क्या स्थिति है ?

Answer»

उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारी भारतीय संस्कृति को बहुत प्रभावित किया है । हमारी संस्कृति धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है. जिसके कारण हम दिग्भ्रमित हो रहे हैं । उपभोक्तावादी संस्कृति के फैलावे को नहीं रोका गया तो हमारी संस्कृति की नियंत्रण शक्तियाँ – धर्म, परम्पराएँ, रीति-रीवाज सब नष्ट हो जाएँगे ।

50.

भारत में तो यह स्थिति अभी नहीं आई पर अमरीका और यूरोप के कुछ देशों में आप मरने के पहले ही अपने अंतिम संस्कार और अनंत विश्राम का प्रबंध भी कर सकते हैं – एक कीमत पर । आपकी कब्र के आसपास सदा हरी घास होगी, मनचाहे फूल होंगे । चाहें तो वहाँ फव्वारे होंगे और मंद ध्वनि में निरंतर संगीत भी । कल भारत में भी यह संभव हो सकता है । अमरीका में आज जो हो रहा है, कल वह भारत में भी आ सकता है । प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं । चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हों ।1. अमरीका और यूरोप के देशों में उपभोक्तावाद एक सीमा से आगे बढ़ गया है । कैसे ? समझाइए ।2. लेखक ने भारत के विषय में क्या संभावना जताई है ?3. ‘आपकी कन के आस-पास सदा हरी घास होगी ।’ वाक्य में विशेषण व विशेष्य छाँटिये ।

Answer»

1. अमरीका और यूरोप के देशों में उपभोक्तावाद चरम सीमा पर पहुँच गया है । यहाँ मरने से पहले अपने अंतिम संस्कार और अनंत विश्राम का प्रबंध कर सकते हैं । कब्र के आसपास हरे घास, मनचाहे फूलों का इंतजाम भी करवाया जा सकता है ।

2. लेखक का मानना है कि अमरीका और यूरोप के लोग मरने से पहले ही अंतिम संस्कार और अनंत विश्राम का प्रबंध करवा लेते हैं । भारतीय लोग पश्चिम का अंधानुकरण करते हैं । ये लोग भी उन्हीं की तरह अंतिम संस्कार का प्रबंध पहले से करने लगेंगे ।

3. विशेषण + हरी
विशेष्य → घास ।