This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-जिनके सिंहनाद से सहमी, धरती रही अभी तक डोल। |
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Answer» वीर शहीदों ने जो सिंह गर्जना की, उससे पृथ्वी भयभीत होकर अभी भी हिल रही है। (वीरों के पराक्रम से शत्रुगण भयभीत हैं।) |
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निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-जला अस्थियाँ बारी-बारी, छिटकायी जिसने चिनगारी।। |
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Answer» देशप्रेम और राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत देशभक्तों के बलिदान का वर्णन किया है। कवि कहता है कि जिन्होंने अपना सब कुछ बलिदान करके क्रांति की भावना जागृत की और नई चेतना फैलाई; कलम आज उनका गुणगान करो, आज उन वीर शहीदों की गौरवगाथा लिखो। |
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“थाली का बैंगन कभी इधर लुढ़कता और कभी उधर।” कथन को स्पष्ट करते हुए तुलसी के अन्तर्द्वन्द्व पर अपने विचार प्रकट कीजिए। |
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Answer» थाली का बैंगन गोल होने के कारण इधर-उधर लुढ़कता रहता है, एक स्थान पर स्थिर नहीं रहता। इसी प्रकार तुलसीदास का मन भी लुढ़कता रहता है। उनके मन में द्वन्द्व चलता रहता है। कभी उनका मुस रत्नावली के मोह में डूब जाता है तो कभी प्रभु की भक्ति की ओर मुड़ जाता है। यह अन्तर्द्वन्द्व सर्वत्र व्याप्त है। जब रत्नावली काशी में तुलसीदास के मठ में आती है और उनके पैरों का स्पर्श करती है तो स्पर्श से तृप्ति होती है और राम बिसर गए। राजा भगत ने जब रत्नावली के जोगिन रूप की प्रशंसा की तो तुलसीदास को अच्छा लगा लेकिन उनका मन बैंगन की तरह तुरन्त लुढ़ककर राम की भक्ति की ओर चला गया। दूध पीकर कुल्ला करने बाहर गये फिर द्वन्द्व हुआ। एक मन कहता था चेत और दूसरा रत्नावली की मनोछवि निहारने में अटका था। दूध पीने के बाद तुलसी लेटे। राम-राम जपना आरम्भ किया पर रत्नावली मन से नहीं हटी। उससे मिलने की इच्छा होने लगी। एक साथ दो विरोधी विचार हृदय में आए। मन ऊहापोह में रहता कभी रत्नावली की ओर जाता कभी झटके के साथ मोह से बाहर निकल करे राम की ओर मुड़ जाती। टोडर, गंगाराम, कैलाश कवि और शिष्यों ने रत्नावली को मठ में रखने का आग्रह किया। तुलसीदास का दुहरा रूप सामने आया वे ऊपर से विरोध करते पर मन कहता रत्नावली को पास रखकर साधना करता तो अच्छा रहता। नत्थू से बात करते समय अन्तर्द्वन्द्व का बड़ा अच्छा उदाहरण देखने को मिलता है। तुलसीदास स्वयं स्वीकार करते हैं कि मेरा मन स्थिर नहीं है। कभी यह योगाभ्यास करता है कभी भोग-विलास में फंस जाता है। कभी कठोर और कभी दयालु बन जाता है। कभी पाखण्डी और कभी ज्ञानी बन जाता है। कभी लालच सताता है तो कभी शत्रु भय सताता है। वे प्रभु से इसे द्वन्द्व को मिटाने की प्रार्थना करते हैं। अन्तर्द्वन्द्व का अर्थ है दो विरोधी विचारों का एक साथ मन में उठना । प्रस्तुत अंश में स्थान-स्थान पर देखने को मिलता है कि तुलसी के मन में एक साथ दो विरोधी विचार आते हैं। मन रत्नावली की ओर जाता है तो प्रभु भक्ति की ओर भी मुड़ जाता है। स्पष्ट है। तुलसीदास का मन थाली के बैंगन की तरह इधर से उधर लुढ़कता रहता है। |
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जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों’ के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी त्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है। |
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Answer» जब आदर्श और व्यवहार में से लोग व्यावहारिकता को प्रमुखता देने लगते हैं और आदर्शों को भूल जाते हैं तब आदर्शों पर व्यावहारिकता हावी होने लगती है। “प्रैक्टिकल आइडियालिस्टक” लोगों के जीवन में स्वार्थ व अपनी लाभ-हानि की भावना उजागर हो जाती है। ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसमें आदर्श एवं व्यवहार का संतुलन होता है लेकिन यदि आज के समाज को ध्यान में रखे तो इस शब्द में व्यावहारिकता को इतना महत्त्व दे दिया जाता है कि उसकी आदर्शवादी विचारधारा अदृश्य होकर केवल व्यावहारिकता के रूप में ही दिखाई देने लगती है। आदर्श व्यवहार के उस स्तर पर जाकर अपनी गुणवत्ता खो देता है और धीरे-धीरे आदर्श मूल व्यवहार के हाथों समाप्त हो जाता है। |
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“मेरा मन विविध ताप से जल रहा है।” कथन के आधार पर तुलसीदास की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए। |
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Answer» नत्थू की बात सुनकर तुलसीदास के मन में अन्तर्द्वन्द्व उत्पन्न हो गया। वे प्रभु से कहने लगे कि मेरा मन स्थिर नहीं है। यह बौरा गया है। कभी योगाभ्यास करता है तो कभी भोग विलास में हँस जाता है। कभी कठोर और दयावान बन जाता है। कभी दीन, मूर्ख, कंगाल और कभी घमण्डी राजा बन जाता है। वह कभी पाखण्डी और कभी ज्ञानी बनता है। कभी धन का लालच सताता है, कभी शत्रुमय बन जाता है। कभी जगत को नारीमय देखने लगता है। यह संसार मेरे मन को विविध प्रकार से सता रहा है। तुलसीदास का मन स्थिर नहीं है। वे अपने मन से दुखी हैं क्योंकि संयम, जप, तप, नियम, धर्म, व्रत आदि करने से भी मन स्थिर नहीं हो रहा है। मन में उठने वाले विविध विचारों के कारण ही तुलसीदास कहते हैं कि मेरा मन विविध तापों से जल रहा है। वे भगवान से अटल भक्ति की कामना करते हैं। |
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“इस प्रसंग को अब यहीं पर समाप्त कर दो नत्थू।” कौन-सा प्रसंग था और तुलसीदास ने उसे समाप्त करने के लिए क्यों कहा? |
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Answer» रत्नावली काशी में आई हैं। इस बात को लेकर लोगों में चर्चा है। नत्थू ने लोगों के विचारों को तुलसीदास को सुनाया। नत्थू ने कहा लोग पूछते हैं कि माताजी क्या अब यहीं रहेंगी। बड़ी हवेली के गोसाई महाराज गिरहस्त हैं। पर उनके बारे में कोई कुछ नहीं कहता। आपके लिए रोक-टोक करते हैं। लोग कहते हैं चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरा पाख है। अब ये भी तपस्या छोड़कर भोग विलास में …। यह प्रसंग नत्थू ने सुनाया। तुलसीदास ने इस प्रसंग को समाप्त करने के लिए कहा। तुलसी को अपनी और रत्नावली की बात अच्छी नहीं लगी। रत्नावली के प्रति उनके मन में आदर था। लोगों की बात सुनकर तुलसीदास को बुरा लगा इसलिए उन्होंने इस प्रसंग को समाप्त करने के लिए कहा। उनके मन में एक अंधड़-सा उठने लगा। |
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“तुलसीदास के मार्ग में रलावली बाधक नहीं बल्कि तपस्विनी भारतीय नारी के समान उनका साथ देती है।” इस कथन के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट कीजिए। |
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Answer» तुलसीदास ने वैराग्य धारण कर लिया है और गृहस्थ जीवन का परित्याग कर दिया है। रत्नावली उनके मार्ग में बाधक नहीं बनती। वह नहीं चाहती कि उसके कारण तुलसीदास की साधना में विघ्न पड़े। इसलिए वह मठ में आकर भी उनसे दूर ही रहती है। तुलसीदास चाहते थे कि एक बार रत्नावली से आमना-सामना हो जाए। वह अपना दुख-दर्द उसे कहे। पर वह बड़ी सतर्कतापूर्वक अपने आपको उनकी नजरों से बचा जाती। वह रसोई में उनके लिए भोजन अवश्य तैयार करती पर कभी सामने नहीं आती। पहली बार जब वह आई थी तब अवश्य आँख से आँख मिली थी। इसके बाद कभी साक्षात्कार नहीं हुआ। पाठ के अन्त में जब दोनों का संवाद होता है तो उस समय तुलसीदास रत्नावली से काशी छोड़ने के लिए कहते हैं। उस समय भी रत्नावली ने हठ नहीं किया और जाने को सहर्ष तैयार हो गई। केवल अन्तिम समय में उनके दर्शन की भीख अवश्य माँगी। इससे स्पष्ट होता है कि रत्नावली तुलसी के मार्ग की बाधक नहीं बल्कि साधक थी। |
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राजा भगत ने कौन-सा षड्यंत्र रचा और क्यों? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» राजा भगत तुलसी और रत्नावली का मेल कराना चाहते थे। इसलिए उन्होंने षड्यंत्र रची। राजा ने सभी को अपने पक्ष में कर लिया। उन्होंने पंडित गंगाराम, टोडर और कैलाश कवि को भी अपने पक्ष में कर लिया। गंगाराम और कैलाश आए, उन्होंने रत्नावली को मठ में रखने के लिए कहा। शिष्यों ने भी उन्हीं का समर्थन किया और कहा कि माताजी परम विदुषी हैं, उनके यहाँ रहने से हमारे अध्ययन में बड़ी सहायता मिलेगी किन्तु तुलसीदास ने किसी की बात नहीं मानी और रत्नावली को मठ में रखने के लिए मना कर दिया। |
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टोडर ने रत्नावली को मठ में रखने के लिए क्या तर्क दिया और तुलसी ने उसे किस तर्क से काट दिया? |
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Answer» टोडर ने कहा कि बड़े-बड़े सन्तों ने गृहस्थ जीवन व्यतीत किया है। बल्लभाचार्य जी ने घर-गृहस्थी में रहकर अपनी साधना की। वे परिवार में रहते थे फिर भी उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। फिर आपको परिवारिक जीवन व्यतीत करने में क्या आपत्ति है। तुलसीदास ने तर्क देकर इसे काट दिया। उन्होंने कहा कि आज का समय बल्लभाचार्य जी जैसा नहीं है। कबीरदास का समय भी बीत गया। यह घोर कलिकाल है। इस कलिकाल में नैतिकता को इतना ह्रास हो गया कि उसे यदि एक स्तर तक उठाकर नहीं रखा जाएगा तो फिर सारा संसार अनैतिकता की लपेट में आए बिना कदापि न रह पायेगा। इस तर्क से तुलसीदास ने टोडर का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। |
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राजा भगत ने तुलसीदास को सीता-राम की कथा क्यों सुनाई? उनका लक्ष्य क्या था? |
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Answer» राजा का लक्ष्य था कि तुलसीदास रत्नावली को मठ में रहने की आज्ञा प्रदान कर दें और अपने पास ही रखें। राम सीता के बिना कभी सुखी नहीं रह पाए। जब उन्हें रावण हर ले गया, तब राम बड़े बेचैन रहे और जब धोबी के कहने पर उन्हें वाल्मीकि के आश्रम में भेज दिया तब भी श्रीराम सुखी नहीं रह पाये । बायाँ अंग कट जाने पर दायाँ अंग कभी सुखी नहीं रह सकता। इस प्रकार रत्नावली से अलग रहकर तुलसीदास भी सुखी नहीं रह सकते। उनकी साधना, तपस्या कभी पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकती। उन्हें रत्नावली को अपने पास ही रखना चाहिए। |
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शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गांधी जी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» शुद्ध सोना आदर्शों का प्रतीक है और ताँबा व्यावहारिकता का प्रतीक है। गाँधी जी व्यावहारिकता को ऊँचा स्तर देकर आदर्शों के स्तर तक लेकर जाते थे अर्थात् ताँबे में सोना मिलाते थे। वे नीचे से ऊपर उठाने का प्रयास करते थे न कि ऊपर से नीचे गिराने का। इसलिए कई लोगों ने उन्हें प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ भी कहा । वास्तव में वे व्यावहारिकता से परिचित थे, लोगों की भावनाओं को पहचानते थे इसलिए वे अपने विलक्षण आदर्श चला सके और पूरे देश को अपने पीछे चलाने में कामयाब रहे। |
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कवि अपनी लेखनी से किसकी जयं बोलने के लिए कह रहा है? |
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Answer» देश के शहीदों की। |
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“खरा गोस्वामी ही इस पानी पर बिना पैर भिगोए चल सकता है।” तुलसी के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» राजा ने तुलसी से कहा था कि तुम्हारी जिवा में भगवान जी स्वाद लेते हैं। गोसाई दुनिया का हर भोग राजी होकर ग्रहण करते हैं पर अपने स्वाद और सुख को वे भगवान का मानकर ही चलते हैं। तुलसीदास ने राजा के इस कथन के उत्तर में यह बात कही है। इसका आशय यह है कि जो भगवान का सच्चा भक्त है वही अपने स्वाद और सुख को भगवान का मानकर चल सकता है, जिसमें सच्ची भक्ति नहीं है वह अपने स्वाद को और सुख को भगवान में नहीं देख सकता। इसके लिए सच्ची साधना की आवश्यकता है, जिसने अपने आपको प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया है वही अपना स्वाद और सुख भगवान का मानकर चल सकता है। इसके लिए पूर्ण समर्पण की आवश्यकता है, जिसने अपनी इन्द्रियों को जीत लिया है और प्रभुमय हो गया है वही इस आनन्द को ले सकता है। उनके लिए हर वस्तु भगवान की वस्तु है। हर स्वाद भगवान का स्वाद है। |
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तुलसीदास को भोजन में वर्षों पूर्व का स्वाद क्यों मिल रहा था? |
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Answer» जिसके प्रति लगाव होता है, मोह होता है उसकी प्रत्येक वस्तु प्रिय लगती है। रत्नावली के प्रति तुलसीदास का आकर्षण था, इस कारण उसके द्वारा बनाई हुई हर वस्तु स्वादिष्ट तो लगनी ही थी। आज का भोजन रत्नावली के हाथ का बना हुआ था। इस कारण उन्हें पूर्व के स्वाद का अनुभव होने लगा। उनके प्रह्लाद घाट जाने पर भोजन का स्वाद भी चला गया। भोजन के समय उन्हें अपनी थाली के हर व्यंजन में रत्नावली के हाथ का स्पर्श अनुभव होता था। वे थाली के सामने बैठकर बार-बार रत्नावली की छवि के साथ अपने मन में बँध जाते थे। इस कारण उन्हें वर्षों पूर्व रत्नावली के हाथ के बने भोजन के स्वाद का अनुभव हो रहा था। |
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जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं? |
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Answer» जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं। |
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चकवा-चकवी के प्रणय के बारे में कवि ने क्या लिखा है? |
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Answer» चकवा-चकवी विचित्र पक्षी हैं। उन्हें चिरकाल से रात्रि के समय एक-दूसरे से अलग रहने का शाप मिला हुआ है। इसलिए ये पूरी रात एक-दूसरे से अलग रहकर विरह में क्रंदन करते रहते हैं। सुबह होते ही शाप का प्रभाव खत्म हो जाता है। इसी के साथ इनके विलाप की भी समाप्ति हो जाती है। कवि भावनाशील प्राणी है। उसे इस पक्षी को मिला यह शाप व्यथित कर देता है। प्रात:काल उनका विरह-कंदन बंद होने पर कवि को भी एक प्रकार की सुख की अनुभूति होती है। |
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हंस झीलों में क्या खोजते हैं? |
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Answer» हंस झीलों में तीखे और मीठे तंतुओं को खोजते हैं। |
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मानसरोवर में कमलों के ऊपर क्या गिरने से चित्र मनमोहक लगता है? |
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Answer» मानसरोवर में कमलों के ऊपर बादलों से गिरते मोती जैसे जलकणों के कारण चित्र मनमोहक लगता है। |
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प्रस्तुत कविता में कवि ने किसका परिवेश प्रस्तुत किया है ? |
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Answer» ‘बादल को घिरते देखा है’ कविता में कवि ने हिमालय के मानसरोवर और पर्वत-शिखरों का परिवेश प्रस्तुत किया है। |
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इस कविता का रचनाकाल क्या है? |
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Answer» ‘बादल को घिरते देखा है’ कविता का रचना-काल पावस ऋतु अर्थात् वर्षाऋतु है। |
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कवि ने कमल को किस रंग का बताया है ? |
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Answer» कवि ने कमल को सुनहरे रंग का बताया है। |
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कविता का सरल अर्थ :छोटी-बड़ी कई ………. घिरते देखा है। |
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Answer» कवि कहते हैं कि हिमालय की पहाड़ियों में कई छोटी-बड़ी झीलें हैं। इन झीलों के समतल क्षेत्रों में हल्के काले और नीले जल में वर्षाऋतु की उमस से व्याकुल होकर आए हंसों को मैंने अपनी तपन मिटाने के लिए तैरते हुए पानी में कमलनाल के तीखे (तीते) और मीठे तंतुओं को खोजते हुए देखा है। मैंने शिखरों पर बादलों को घिरते हुए देखा है। |
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आपके विचार में कुछ समुद्र से और कुछ पहाड़ से’ का क्या मतलब हो सकता है? |
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Answer» कुछ तरल पदार्थ जैसे- दही, खीर, सूप आदि। कुछ ठोस पदार्थ जैसे- गुड़, रोटी आदि। |
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कविता का सरल अर्थ :ऋतु वसंत का ………. घिरते देखा है। |
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Answer» कवि सरोवर के तट के सुनहरे प्रभात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि वसंत का यह सुंदर सवेरा था। मंद-मंद शीतल हवा चल रही थी। बाल-सूर्य की कोमल-कोमल किरणें चारों ओर फैल रही थीं। उनका सुनहरा प्रकाश पर्वत-शिखरों पर पड़ रहा था। इसलिए ये शिखर सुनहरी आभा से चमक रहे थे। ये शिखर अगल-बगल ही थे। सुबह होते ही उन विरह-विवश चकवा-चकवी का क्रंदन बंद हो गया। चकवाचकवी को चिरकाल से रात्रि के समय एक-दूसरे से अलग रहने का शाप मिला हुआ है, इसलिए इन्हें पूरी रात एक-दूसरे से अलग रहकर विरह में बितानी पड़ती है। सुबह होने पर शाप का प्रभाव खत्म हुआ तो इस पक्षी जोड़े का विलाप भी खत्म हो गया। कवि कहते हैं कि फिर मैंने उस महान सरोवर के तट पर शैवालों की हरी मखमली दरी पर चकवा- चकवी का प्रणय कलह छिड़ते देखा था। मैंने पर्वत-शिखरों पर बादल को घिरते हुए देखा है। |
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कवि ने मानसरोवर के श्याम नील सलिल में किसको तैरते देखा है ?(क) मछलियाँ को(ख) हंसों को(ग) बगुलों को(घ) भैंसों को |
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Answer» सही विकल्प है (ख) हंसों को |
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प्रस्तुत कविता किस दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है? |
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Answer» ‘बादल को घिरते देखा है’ कविता प्रकृति के सौंदर्य वर्णन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। |
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तोत्तो-चान ने हेडमास्टर से अपनी फ्रॉक के बारे में क्या-क्या बताया? |
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Answer» तोत्तो-चान ने बताया कि फ्रॉक दुकान से खरीदी हुई थी। फ्रेंाक पर लाल और सलेटी रंग के चेक बने थे। कपड़ा जर्सी का है। कॉलर पर कढे लाल फूल फूहड़ हैं। माँ को कॉलर पसन्द नहीं है। |
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तुलसीदास लोलार्क कुण्ड के मठ में किसकी आरती उतारते हैं?(क) राम(ख) कृष्ण(ग) विष्णु(घ) शंकर। |
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Answer» तुलसीदास लोलार्क कुण्ड के मठ में कृष्ण की आरती उतारते हैं। |
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अनुरूप शब्द लिखिए :1. पहाड : गिरि :: चोटी : ——2. कालानाग : पर्वत :: गंगोत्री : ——–3. कर्नल : खुल्लर :: मेजर : ——4. चाय : गरम :: बर्फ : ——-5. पहले हिमालय पर्वतारोही पुरुष : तेनसिंग नोर्गे :: पहली एवरेस्ट पर्वतारोही महिला : ——– |
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Answer» 1. शिखर 2. ग्लेशियर 3. कुमार नी 4. ठंडी 5. बिछंद्रीपाल |
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स्त्रीलिंग शब्द लिखिए:पुल्लिंग – स्त्रीलिंग1. बाप 2. पुरुष 3. भाई 4. बेटा 5. श्रीमान |
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Answer» 1. बाप – माँ 2. पुरुष – स्त्री 3. भाई – बहन 4. बेटा – बेटी 5. श्रीमान – श्रीमती |
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समानार्थक शब्द लिखिए :उदा : पहाड = गिरि, पर्वत1. चोटी2. सुबह 3. महिला 4. नजदीक |
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Answer» 1. चोटी = शिखर, शिखा 2. सुबह = प्रभात, भोर 3. महिला = स्त्री, नारी 4. नजदीक = समीप, पास |
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अन्य वचन लिखिए :1. चट्टान 2. रस्सी 3. शीशा4. चोटी 5. चादर |
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Answer» 1. चट्टान – चट्टाने 2. रस्सी – रस्सियाँ 3. शीशा – शीशे 4. चोटी – चोटियाँ 5. चादर – चादरे |
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अंग्रेजी में अनुवाद कीजिए :1. बिछंद्री का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था।2. बिछंद्री को रोज पैदल चलकर स्कूल जाना पडता था।3. दक्षिणी शिखर के ऊपर हवा की गति बढ़ गई थी।4. मुझे लगा कि सफलता बहुत नजदीक है।5. मैं एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचनेवाली प्रथम भारतीय महिला थी। |
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Answer» 1. Bichendri was born is a middle class family. 2. Bichendrl was going to school by walk every day. 3. velocity of the wind was high in the southern peak. 4. I felt that success was very near. 5. I was the first Indian woman to reach the peak of everest. |
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विलोम शब्द लिखिए: 1. आरोहण 2. चढना 3. ठंडा 4. परिश्रम5. सामने |
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Answer» 1. आरोहण × अवरोहण 2. चढना × उतरना 3. ठंडा × गरम 4. परिश्रम × विश्राम 5. सामने × पीछे |
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उदाहरण के अनुसार लिखिए:1. पढ + आई2. चढ + आई 3. कढिन + आई4. ऊँचा + आई 5. बढ + आई |
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Answer» 1. पढ + आई = पढाई 2. चढ + आई = चढाई 3. कढिन + आई = कठिनाई 4. ऊँचा + आई = ऊँचाई 5. बढ + आई = बढाई |
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चीटी के बारे में कवि क्या कहते है ? |
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Answer» कवि ‘सोहनलाल विवेदी’ चींटी के बारे में यह कहते हैं कि वह जब दीवारों पर चढती है तब सौ बार गिरती, फिसलती है । मगर फिर भी वह कोशिश करती रहती है, हार नहीं मानती । मन में अगर विश्वास हो तो कब्बि से कठिण काम आसान हो जाता है ।। |
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गोताखोर के बारे में कवि के विचार क्या है ? |
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Answer» गोताखोर के बारे में कवि के यह विचार है कि गहरे पानी में गोताखोर डुबकी लगाकर मोती को पा सकता है ठिक वैसे ही हमें सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए । मुसीबतों को देखकर भागना नहीं चाहिए । उसका हिम्मत के साथ मुकाबला करना चाहिए । |
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एक वाक्य में उत्तर लिखिए:1. किससे डरकर नौका पार नहीं होती ?2. किनकी हार नहीं होती है ?3. दानी लेकर कौन चलती है ?4. चींटी कहाँ चढती है ?5. किसकी मेहनत बेकार नहीं होती ?6. सागर में डुबकियाँ कौन लगाता है ?7. मोती कहाँ मिलता है ? ।8. किसकी मुटठी खाली नहीं होती ?9. किसको मैदान छोडकर भागना नहीं चाहिए ?10. कुछ किए बिना ही क्या नहीं होती है |
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Answer» 1. लहरों से 2. कोशिश करनेवालों की 3. नन्हीं चींटी दाना 4. दीवारों पर 5. चींटी की 6. गोताखोर 7. सागर में मोती गहरे 8. प्रयास (कोशिश) करनेवालों की 9. संघर्ष करनेवालों को 10. कुछ किए बिना ही जयजयकार नहीं होती |
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दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर ‘परिश्रम’ पर लघु लेख तैयार कीजिए : |
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Answer» जीवन एक संघर्ष है । इस संघर्ष से हार मानकर मनुष्य को भागना नहीं चाहिए । जीवन में आनेवाले हर उतार-चढाव को साहस के साथ पार करना चाहिए । कभी-कभी हमें असफलता का सामना भी करना पड़ता है । उसे चुनौती समझकर उत्साह के साथ स्वीकार कर आगे बढना है। खाली-हाथ बैठकर हताश होने से कुछ हासिल नहीं होगा । कठिनाइयों को भी सहजता से स्वीकार करलेना चाहिए । जब तक हमें सफलता हासिल नहीं होती है तब तक हमें नींद-चैन को छोडकर लगातार मेहनत करनी चाहिए । कोशिश करनेवालों की कभी हर नही होती। |
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असफलता से सफलता की ओर जाने के बारे में कवि क्या कहते है ? |
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Answer» असफलता से सफलता की ओर जानेवाले के बारे में कवि का यह कहना है कि असफलता एक चुनौती है उसे स्वीकार करें । साहस और विश्वास के साथ उसका सामना करें । जब तक सफलता हासिल न हो तब तक कोशिश करनी चाहिए । |
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अनुरुपती:1. मेहनत 2. चढना 3. स्वीकार 4. सिंधु |
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Answer» 1. मेहनत : परिश्रम :: कोशिश : प्रयास 2. चढना : उतरना :: हारना : जीतना 3. स्वीकार : इन्कार :: चैन : बेचैन 4. सिंधु : समुद्र :: हाथ : कर |
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कविता की अंतिम पंक्तियों को कंठस्थ करके लिखिए : |
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Answer» असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो, |
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बिछंद्री ने थैले से कौन-सा चित्र निकाला ? |
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Answer» बिछंद्री ने थैले से दुर्गा माँ का चित्र निकाला। |
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कर्नल ने बधाई देते हुए बिछंद्री से क्या कहा ? |
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Answer» कर्नल ने बधाई देते हुए बिछंद्री से कहा देश को तुम पर गर्व है। |
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बिछंद्री को भारतीय पर्वतारोहण संघ ने कौन-सा पदक देकर सम्मान किया ? |
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Answer» बिछंद्री को भारतीय पर्वतारोहण संघ ने स्वर्णपदक देकर सम्मान किया। |
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एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर बिछंद्री ने क्या किया? |
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Answer» एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर बिछंद्री ने खुद के लिए स्थान सुरक्षित किया। अपने घुटनों के बल बैठी। बर्फ को अपने माथे लगाकर सागरमये का ताज का चुंबन लिया। बाद में हनुमान चालीसा और माँ दुर्गा की पूजा, की। |
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बिछंद्री ने पर्वतारोहण के लिए किन-किन चीजों का उपयोग किया ? |
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Answer» बिछंद्री ने पर्वतारोहण के लिए रस्सी, बर्फ काटने के लिए फावडा, ऑक्सीजन और वॉकी-टॉकी इन चीजों का उपयोग किया। |
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बिछंद्री पाल को कौन-सा गौरव प्राप्त हुआ है ? |
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Answer» बिछंद्री पाल को एवरेस्ट की चोरी पर चढनेवाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त है। |
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बिछंद्री ने पहाड़ पर चढने की तैयारी किस प्रकार की ? |
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Answer» बिकेंद्री ने पहाड़ पर चढने के लिए दो दल बनाए गए। सुबह हल्का नाश्ता करने के बाद साढे पाँच बजे तंबू से निकल पडे। अंग दोरजी के साथ बगैर रस्सी के ही चढाई की। वहाँ जमी हुई बर्फ काटने के लिए फावडे का इस्तेमाल किया। कभी नायलॉन रस्सी के सहारे चढाई की। ऑक्सीजन की आपूर्ति रेगुलेटर पर बढाकर कठिन चढाई आसान बनाई। |
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महिला की साहस गाथा कहानी का सारांश अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» BRAVERY OF WOMEN Summary in English: Bichendri Pal is the first Indian woman to claimb the mount everest. The father Kishan Pal and Mother Hansadeyi Negi belonged to a middle class family. Bichendri Pal got the training of mountaineering from her childhood. In addition to the difficult task of mountaineering the earned from tailoring to support her education financially. She obtained M.A. B.Ed degree in Sanskrit. Claimbing mountains was her passion. The peaks Kalanaga and Road Gero mountains were conquered by her with atmost self confidence. She got inspiration from Tensing Norge, the first man to conquer the mount everest. She claimbed the mount everest on 23rd May 1984 at 2-07 p.m. and was hailed as the first Indian woman to conquer the mount everest. Cornal Khullar praised her as the proud daughter of India and congratulated her for the achievement. For the matchless achievement of claimbing mount Everest, she was awarded Padma Shree and Arjuna Awards by the Government of India. She was also honored by the Indian Mountaineering Association. She proved that women are not lagging behind the men in bravery and adventure. |
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