This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थानों के नाम बताइए। |
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Answer» उत्तर प्रदेश में अनेक तीर्थस्थान हैं। उनमें मुख्य तीर्थस्थान हैं – बनारस का मोक्षधाम, बौद्धों का तीर्थस्थान सारनाथ, भगवान कृष्ण और राम की जन्मभूमि क्रमशः मथुरा और अयोध्या, कृष्ण से जुड़े स्थल वृन्दावन और गोवर्धन तथा इलाहाबाद में गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम आदि। |
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पोलैण्ड में जनरल जेलस्काई की सरकार की दो विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» ⦁ पोलैण्ड के लोगों को राजनैतिक अधिकार एवं स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं थी। ⦁ उन्हें सरकार की आलोचना करने का भी अधिकार नहीं था। ⦁ पोलैण्ड में सैनिक तानाशाही थी। शासक का निर्वाचन नहीं होता था। |
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विश्व के उस देश का नाम बताइए जहाँ प्रत्यक्ष लोकतन्त्र विद्यमान हों। |
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Answer» प्रत्यक्ष लोकतन्त्र वाला देश स्विट्जरलैण्ड है। |
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मिली-जुली सरकार किसे कहते हैं? |
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Answer» जब कई राजनीतिक दल मिलकर समझौता करके सरकार का गठन करते हैं तो इस प्रकार गठित सरकार को मिली जुली सरकार कहते हैं। |
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लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो प्रमुख प्रकार बताइए। |
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Answer» लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो प्रमुख प्रकार- ⦁ प्रत्यक्ष लोकतन्त्र और |
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चिली की वर्तमान राष्ट्रपति वेशलेट की सरकार की दो विशेषताएँ लिखिए। |
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Answer» वेशलेट सरकार की है। प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं ⦁ इस सरकार द्वारा देश के सभी नागरिकों को राजनीतिक स्वतंत्रता प्रदान की गयी है। देश ने बहुदलीय जी) सामाजिक विज्ञान कक्षा-IX लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्वीकार किया है। देश के नागरिकों को किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने की स्वतन्त्रता है। ⦁ चिली में शासक का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है। |
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लैंड मोर्टगेज बैंक किसानों को किस तरह से मदद करता है ? |
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Answer» लैंड मोर्टगेज बैंक किसानों को दीर्घकालीन ऋण दिलवाने में मदद करता है । यह ऋण जमीन को गिरवी रखकर दिया जाता है । |
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उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल |
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Answer» उत्तर प्रदेश में पर्यटन की दृष्टि से अनेक धार्मिक, वन्य जीवन से संबंधित तथा ऐतिहासिक आकर्षक स्थान हैं। भगवान कृष्ण और राम की जन्मभूमि क्रमश: मथुरा और अयोध्या, गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम इलाहाबाद, राम के बेटों लव-कुश का जन्मस्थान बिठूर, हिन्दुओं का मोक्ष-स्थल बनारस, बुद्ध से संबंधित स्थल श्रावस्ती और कुयीनगर यहीं हैं। इसके अलावा रायबरेली का समसपुर बर्ड सैंक्चुअरी, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान तथा आगरा, झांसी, लखनऊ, मेरठ, फतेहपुर सीकरी, प्रताबगढ़, बाराबंकी, जौनपुर, महोबा, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा, गोरखपुर आदि ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हैं। |
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यदि विश्व के प्रत्येक देश में लोकतन्त्र की स्थापना हो जाए तो विश्व स्वयं लोकतांत्रिक बन जाएगा।क्या यह कथन अध्याय में किए गए विचार से मेल खाता है? |
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Answer» विश्व के अधिकांश देशों में लोकतन्त्र की स्थापना हो चुकी है, लेकिन आज भी अनेक देश तानाशाही, एक दलीय शासन व्यवस्था एवं वंशानुगत् शासन प्रणाली से ग्रस्त हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ सबसे बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना विश्व-शान्ति की स्थापना करने तथा युद्ध को रोकने के लिए की गई है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी महत्त्वपूर्ण फैसले सुरक्षा परिषद् में लिए जाते हैं। सुरक्षा परिषद् के कुल 15 सदस्य हैं जिनमें से 5 बड़े राज्य (संयुक्त-राज्य अमेरिका, रूस, इंग्लैण्ड, चीन तथा फ्रांस) इसके स्थायी सदस्य हैं जिनके पास ‘वीटो करने की शक्ति है। सुरक्षा परिषद् में तब तक कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता जब तक कि यह पाँचों देश उससे सहमत न हों। दूसरे शब्दों में इन पाँचों देशों में से कोई भी एक देश अपनी ‘वीटो’ शक्ति का प्रयोग करके किसी भी निर्णय को रोक सकता है। इस प्रकार सुरक्षा परिषद् के पास ‘वीटो’ (Veto) का अधिकार अलोकतंत्रीय हैं। इसी प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (I.M.F.) विश्व के किसी भी देश को ऋण देने वाली सबसे बड़ी संस्था है। इस संगठन की कार्यप्रणाली भी अलोकतंत्रीय है क्योंकि इसके सभी 173 सदस्य देशों को समान मताधिकार प्राप्त नहीं है। प्रत्येक देश इस कोष में जितने धन का योगदान करता है, उसी अनुपात में उसके वोट का वजन भी तय होता है। इस प्रकार मुद्रा कोष के लगभग आधे वोटों पर केवल 7 देशों (अमेरिका, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, सऊदी अरब, चीन तथा रूस) का अधिकार है। जब सरकारों को पैसे की जरूरत होती है तो उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक उधार देते हैं। उधार देने से पहले ये संस्थाएँ सरकार से अपना हिसाब-किताब दिखाने को कहती हैं और उनकी आर्थिक नीतियों में परिवर्तन का निर्देश देती हैं। |
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भारत में सहकारी भंडार के कोई दो उदाहरण दीजिए । |
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Answer» मुंबई का ‘अपना बाजार’ और अहमदाबाद का ‘अपना बाजार’ यह सहकारी भंडार के उदाहरण हैं । |
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वर्ष 1980 के बाद वैश्विक स्तर पर लोकतन्त्र के विस्तार को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र के विस्तार का अगला पड़ाव वर्ष 1980 के बाद और विशेष रूप से 1991 ई. में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् शुरू हुआ। सन् 1980 में पोलैण्ड (Poland) पर पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी (Polish United Workers Party) का शासन था। यह पार्टी उन साम्यवादी दलों में से एक थी जो तब पूर्वी यूरोप के अनेक देशों पर शासन करते थे। इन देशों में किसी अन्य राजनीतिक दल को राजनीति में भाग लेने की अनुमति नहीं थी। लोग साम्यवादी दल के या शासन के पदाधिकारियों का चुनाव आजाद ढंग से नहीं कर सकते थे। नेताओं, पार्टी या सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल में डाल दिया जाता था। पोलैण्ड की सरकार को एक बड़े साम्यवादी देश, सोवियत संघ का समर्थन हासिल था और वही इस पर नियंत्रण भी करता था। पोलैण्ड के ग्लांस्क शहर स्थित ‘लेनिन जहाज कारखाना’ के मजदूरों ने 14 अगस्त, 1980 ई. को हड़ताल कर दी। उस समय पोलैण्ड के अधिकांश कारखाने सरकारी नियंत्रण में थे। ‘लेनिन जहाज कारखाना’ भी सरकारी नियंत्रण में था। एक महिला क्रेन चालक को गलत ढंग से नौकरी से निकाला जाना हड़ताल का तात्कालिक कारण था। हड़तालियों की माँग थी कि इस महिला को काम पर वापस लिया जाए। कानून के अनुसार हड़ताल की इजाजत नहीं थी क्योंकि देश में शासक दल से अलग किसी स्वतन्त्र मजदूर संघ की अनुमति नहीं थी। हड़ताल जारी रही और फिर पहले काम से निकाला गया एक इलेक्ट्रिशियन बंदरगाह की दीवार लांघकर अन्दर पहुँचा और हड़ताली कर्मचारियों के संग हो लिया। इस आदमी का नाम था लेक वालेशा और बहुत जल्दी ही, यह हड़ताली कर्मचारियों का नेता बन गया। हड़ताल का समर्थन बढ़ता गया और जल्दी ही यह पूरे शहर में फैल गई। अब मजदूरों ने ज्यादा बड़ी माँगें करनी शुरू कर दीं। उन्होंने स्वतंत्र मजदूर संध बनाने की माँग की। उन्होंने यह भी माँग की कि राजनैतिक बन्दियों को रिहा किया जाए और प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए। आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण सरकार को झुकना पड़ा। लेक वालेशा के नेतृत्व में मजदूरों ने सरकार के साथ 21 सूत्रीय समझौता किया और हड़ताल समाप्त हुई। डांस्क संधि के बाद एक नया मजदूर संगठन ‘सोलिडरनोस्क’ (जिसका अंग्रेजी अर्थ होगा सोलिडेरिटी) बना। किसी भी साम्यवादी देश में पहली बार एक स्वतन्त्र मजदूर संघ का गठन हुआ। एक वर्ष के अन्दर ही सोलिडेरिटी का विस्तार पूरे देश में हो गया और इसकी सदस्य संख्या एक करोड़ के करीब पहुँच गई। सन् 1989 में सरकार को विवश होकर लेक वालेशा के साथ एक और समझौता करना पड़ा जिसके अनुसार स्वतंत्र चुनाव कराने की माँग मान ली गई। सोलिडेरिटी (Solidarity) ने सीनेट की सभी 100 सीटों के लिए चुनाव लड़ा और उसे 99 सीटों पर सफलता मिली। अक्टूबर, 1990 ई. में पोलैण्ड में राष्ट्रपति पद के लिए प्रथम बार चुनाव हुए जिसमें एक से अधिक ‘राजनैतिक दल भाग ले सकते थे। लेक वालेशा को पोलैण्ड का राष्ट्रपति चुन लिया गया और इस प्रकार पोलैण्ड एक लोकतंत्रीय राज्य बन गया। भारत के पड़ोसी देशों में भी अनेक परिवर्तन घटित हुए। वर्ष 1990 में नेपाल और पाकिस्तान दोनों में लोकतंत्र की बहाली हुई। नेपाल के राजा ने अपने विशेषाधिकार एवं शक्तियों को काफी हद तक परित्याग कर दिया और वह संवैधानिक राजा बन गया। किन्तु ये परिवर्तन स्थायी नहीं रहे। पाकिस्तान और नेपाल में पुनः तानाशाही की स्थापना हो गयी। लेकिन इस कालखण्ड में अनेक देशों में लोकतन्त्र की स्थापना हुई। सन् 2002 में विश्व के लगभग 140 देशों में बहुदलीय आधार पर लोकतांत्रिक चुनाव कराए जा रहे थे। लेकिन आज भी विश्व के अनेक देशों में लोगों को अपनी इच्छानुरूप लोकतांत्रिक सरकार चुनने तथा सार्वजनिक रूप से अपने विचार प्रकट करने की स्वतन्त्रता नहीं है। ऐसे देशों में संचार माध्यमों पर या सेंसर होता है या वे सरकार के नियंत्रण में होते हैं। उन्हें वही समाचार छापने या दिखाने होते हैं जिन्हें सरकार प्रदर्शित करना चाहती है। |
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विभिन्न देशों द्वारा वैश्विक स्तर पर किस प्रकार लोकतंत्र को बढ़ावा दिया जा रहा? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» वर्तमान में विश्व के शक्तिशाली देशों ने जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि देश शामिल हैं, ने शेष विश्व में लोकतन्त्र को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया। इन देशों ने न केवल वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा दिया बल्कि उन देशों में भी लोकतंत्र की स्थापना के लिए दखल दिया जहाँ अलोकतांत्रिक शासन व्यवस्था थी ‘इराक’ इस तरह का एक प्रमुख उदाहरण है। । सन् 1932 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से मुक्त इराक एक पश्चिम एशियाई देश है। स्वतंत्रता के तीन दशक बाद इराक में सैन्य अधिकारियों ने इराक की सत्ता पर नियंत्रण कर लिया। 1968 से इराक में ‘बाथ पार्टी के नेता सद्दाम हुसैन का शासन था। सद्दाम ने 1968 ई. के तख्ता पलट में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिससे बाथ पार्टी सत्ता में आयी थी। 1979 ई. में सत्तारूढ़ होने के बाद सद्दाम हुसैन ने इराक में तानाशाही शासन की स्थापना की तथा अपने विरोधियों का क्रूरतापूर्वक दमन किया। अमेरिका तथा उसके मित्र देशों जिसमें ब्रिटेन, पोलैण्ड, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया आदि ने सम्मिलित रूप से इराक पर आक्रमण करके 2003 में इराक पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। अमेरिका और उसके मित्र देशों का ऐसा विश्वास था कि इराक के पास परमाणु हथियार और जनसंहार के अनेक हथियार थे जिनसे पूरे विश्व की सुरक्षा को खतरा था।अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को अपदस्थ कर वहाँ अपने पसन्द की उदारवादी सरकार बनवा दी किन्तु अभी भी इराक में स्वस्थ लोकतंत्रे पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाया है। |
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| 13. |
रासायनिक समीकरण के कितने भाग होते है ? |
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Answer» रासायनिक समीकरण के दो भाग होते है | 1. अभिकारक – रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ | 2. उत्पाद – अभिक्रिया से उत्पन्न पदार्थ उत्पाद कहलाते है | उदहारण- C + O2 → CO2 (अभिकारक) (उत्पाद) |
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रासायनिक समीकरण किसे कहते हैं ? |
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Answer» जब किसी रासायनिक अभिक्रिया को संकेतों अथवा सूत्रों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है तो इसे रासायनिक समीकरण कहते है | 2H + O → H2O |
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ठाकुर साहब के कितने बेटे थे? |
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Answer» ठाकुर साहब के दो बेटे थे। |
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ठाकुर साहब के बड़े बेटे का नाम क्या था? |
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Answer» ठाकर साहब के बड़े बेटे का नाम श्रीकंठ सिंह था। |
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आनंदी बिगड़ता हुआ काम कैसे बना लेती है? |
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Answer» श्रीकंठ सिंह के छोटे भाई लालबिहारी सिंह के अभद्र व्यवहार से आनंदी क्रोधित हो जाती है। गुस्से में उसने अपने पति से सारी शिकायतें कीं। झगड़ा इतना बढ़ गया कि घर टूटने तक पहुँच गया। तब बिखरते हुए घर को देखकर आनंदी शांत हो जाती है और लालबिहारी को घर छोड़कर जाने से रोक लेती है। इस प्रकार आनंदी बिगड़ते काम को बना लेती है। |
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| 18. |
बेनीमाधव सिंह अपनी आधी से अधिक संपत्ति किसे भेंट के रूप में दे चुके थे? |
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Answer» बेनीमाधव सिंह अपनी आधी से अधिक संपत्ति वकीलों को भेंट कर चुके थे। |
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किसकी आँखें लाल हो गयी थी? |
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Answer» श्रीकंठ की आँखे लाल हो गयी थीं। |
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यौगिक किसे कहते है ? |
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Answer» दो या दो से अधिक परमाणुओं के मेल से बने पदार्थ को यौगिक कहते है, एवं ये हमेशा निश्चित अनुपात में होते है | जैसे – H2 O, H2 SO4, Cu SO4, and AlO3 इत्यादि | |
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| 21. |
“लाला बाहर खड़े बहुत रो रहे हैं।” |
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Answer» आनंदी ने अपने पति श्रीकंठ से कहा। |
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| 22. |
“तम्हें मेरी सौगंध, अब एक पग भी आगे न बढ़ाना” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है जिसके कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द जी हैं। |
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| 23. |
“इतनी गरम क्यों होती हो, बात तो कहो।” |
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Answer» श्रीकंठ ने यह वाक्य आनंदी से कहा। |
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“पर तुमने आजकल घर में यह क्या उपद्रव मचा रखा है।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं। संदर्भ : इस वाक्य को श्रीकंठ अपनी पत्नी आनंदी से कहता है। |
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| 25. |
“बहू-बेटियों का यह स्वभाव अच्छा नहीं कि मर्दो के मुँह लगे।” |
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Answer» बेनीमाधव सिंह ने श्रीकंठ से कहा। |
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“उससे जो कुछ भूल हुई, उसे तुम बड़े होकर क्षमा करो” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं। |
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अभी परसों घी आया है, इतनी जल्दी उठ गया? |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं। |
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“मैके के सामने हम लोगों को कुछ समझती ही नहीं।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है जिसके कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द जी हैं। |
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“बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं। बिगड़ता हुआ काम बना लेती हैं।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं। .. |
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“स्त्री गालियाँ सह लेती है, मार भी सह लेती है, पर मैके की निंदा उनसे नहीं सही जाती।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं। संदर्भ : इस वाक्य में लेखक प्रेमचंद आनंदी के बारे में टिप्पणी करते हुए पाठकों को उसके चरित्र का परिचय करा रहे हैं। स्पष्टीकरण : दाल में घी न डालने से तथा घी खत्म हो जाने से लालबिहारी ने गुस्से में भला-बुरा कहा और मायकेवालों के बारे में खरी-खोटी बातें सुनायी। इसी से आनंदी को गुस्सा आ गया। क्योंकि स्त्रियाँ सब कुछ सह सकती है, मार भी खा सकती हैं, पर मायके की निंदा नहीं सह सकती। |
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कोष्टक में दिये गये उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए।(ऐसी, शनिवार, संतान, गौरीपुर, हाथी)इस दरवाजे पर …………. झूमता था।………… में रामलीला के वही जन्मदाता थे।सुंदर ………. को कदाचित् उसके माता-पिता भी अधिक चाहते थे।श्रीकंठ सिंह ………… को घर आया करते थे।बड़े घर की बेटियाँ ………… ही होती हैं। |
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Answer» हाथी गौरीपुर संतान शनिवार ऐसी। |
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अन्य वचन रूप लिखिए। घर, बेटी, भैंस, स्त्री, आँखें, थाली। |
Answer»
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बड़े घर की बेटी कहानी का सारांश लिखें। |
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Answer» उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने बहुत ही अच्छी कहानियाँ लिखी हैं। ‘बड़े घर की बेटी’ उनकी एक श्रेष्ठ सामाजिक कहानी है। आनंदी एक अमीर घराने से मध्यवर्गीय परिवार की बहू बनकर आती है। वहाँ के हालतों के अनुकूल वह अपने को ढाल लेती है। वह अपने देवर से अपमानित होकर भी घर की इज्जत बचा लेती है। आनंदी के उच्च संस्कार उसे सचमुच ‘बड़े घर की बेटी’ बनाते हैं। आनंदी ताल्लुकेदार भूपसिंह की बेटी थी। वह सुंदर व सुशील थी। वह अपने मायके में बड़े ही लाड़-प्यार से पली थी। आनंदी का विवाह बेनीमाधव सिंह के बड़े बेटे श्रीकंठ से हुआ था। बेनी माधवसिंह एक जमींदार था। उसकी जमीन-जायदाद सब कुछ खत्म हो गई थी। अब वह एक साधारण किसान ही रह गया था। आनंदी का पति श्रीकंठ पढ़ा-लिखा नौजवान था। शहर में काम करता था। उसका परिवार गाँव में था। उसके घर में सुख-सुविधाएँ बहुत कम थीं। फिर भी आनंदी ने अपने-आप को घर के अनुकूल बनाये रखा। वह खुशी से जीवन-यापन करने लगी। श्रीकंठ पढ़ाई के साथ-साथ, संस्कारित और भारतीय संस्कृति का अनुयायी था। संयुक्त परिवार का हिमायती भी था। श्रीकंठ के छोटे भाई का नाम लालबिहारी सिंह था। वह अनपढ़ और उजड्ड था। एक दिन लालबिहारी सिंह ने खाना खाते समय घी माँगा। घी खत्म हो चुका था। अतः आनंदी घी नहीं दे पाई। इस कारण लालबिहारी सिंह ने गुस्से में भाभी को तथा उसके मायके को गालियाँ सुना दीं। आनंदी ने भी वापस कुछ खरी-खोटी सुना दी। तब लालबिहारी सिंह ने गुस्से में आकर आनंदी पर खड़ाऊ फेंक कर मार दिया। इससे आनंदी को बड़ा दुःख हुआ। अब श्रीकंठ शहर से गाँव आया, तो आनंदी ने सारी कहानी उसे सुनाई। श्रीकंठ ने क्रोधित होकर अपने बाप से कहा – इस घर में या तो वह रहेगा, या लालबिहारी। पिता ने पुत्र को समझाया कि घर का बँटवारा न हो। उनका घर गाँव में एक आदर्श था। अगर भाई-भाई के बीच की अनबन की बात गाँव में फैलेगी, तो उनकी बदनामी होगी। लालबिहारी सिंह को अपनी गलती पर पछतावा हुआ। पर उसकी बातें श्रीकंठ को शांत नहीं कर पाईं। वह घर के अलगाव की बात पर अड़े रहे। तब लालबिहारी सिंह ने भाभी के पास जाकर, वह खुद घर से निकल जाने की बात कही। यह सुनकर आनंदी का दिल पिघल गया। आनंदी बड़े घर की बेटी थी। उसके संस्कार अच्छे थे। उसने अपने पति श्रीकंठ को समझाया कि आगे घर में इस प्रकार के झगड़े नहीं होने देंगे। श्रीकंठ ने अपने भाई को गले लगाया। ठाकुर बेनीमाधव सिंह की आँखें भर आईं। गुणवती आनंदी के संस्कारों के कारण टूटता हुआ घर बच गया। सचमुच बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं। |
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अन्य लिंग रूप लिखिए। ठाकुर, पति, बेटा, स्त्री, बुद्धिमान, हाथी, भाई। |
Answer»
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महर्षि पतंजलि के लुप्त महाभाष्य की खोज किसने करायी ? |
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Answer» कश्मीर के राजा जयादित्य ने लुप्त महाभाष्य की खोज कराई। |
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ऋषि याज्ञवल्क्य ने किस ग्रन्थ की रचना की थी? |
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Answer» ऋषि याज्ञवल्क्य ने याज्ञवल्क्य-स्मृति की रचना की थी। |
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महाभाष्य की रचना किसने और कहाँ की थी? |
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Answer» महाभाष्य की रचना महर्षि पतञ्जलि ने काशी में की थी। |
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए- (पूर्ति करके)पाण्ड्य देश के ____ को देवता की तरह पूजते थे।कम्बोडिया में अगस्त्य ने भुदेश्वर नामक _____ बहुत काल तक पूजा की थी।महर्षि पतंजलि पाटलिपुत्र के _____ शुंग के समकालीन थे।न्होंने पाणिनि के _____ की टीका भी लिखी। |
Answer»
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फादर बुल्के अपनी माँ की चिट्ठियाँ किसे दिखाते थे?(क) डॉ. रघुवंश(ख) डॉ. सत्यप्रकाश(ग) फादर पास्कल(घ) लेखक |
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Answer» सही विकल्प है (क) डॉ. रघुवंश |
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फादर बुल्के किस देश के रहनेवाले थे?(क) वियेतनाम(ख) नाइजीरिया(ग) बेल्जियम(घ) पेरिस |
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Answer» सही विकल्प है (ग) बैल्जियम |
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फादर बुल्के का निधन कब और कहाँ हुआ?(क) 20 अगस्त, 1982 दिल्ली(ख) 18 अगस्त, 1982 पटना(ग) 18 अगस्त, 1983 इलाहाबाद(घ) 18 अगस्त, 1982 दिल्ली |
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Answer» (घ) 18 अगस्त, 1982 दिल्ली |
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फादर बुल्के की मृत्यु किस रोग से हुई थी?(क) केंसर(ख) जहरबाद(ग) हैजा(घ) मलेरिया |
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Answer» सही विकल्प है (ख) जहरबाद |
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फादर बुल्के की अंतिम यात्रा पर उमड़ती हुई भीड़ पर अपने विचार प्रकट कीजिए। |
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Answer» फादर बुल्के की मृत्यु जहरबाद से हुई थी। उन्होंने सारा जीवन दूसरों को स्नेह और वात्सल्य देने में लुटा दिया। सभी स्नेहीजनों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किया। उनको जाननेवाले या मित्रगण उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानते थे। अत: उनकी अंतिम यात्रा में असंख्य लोग आए। विदेश से आए इस व्यक्ति के प्रति लोगों में इतना लगाव था कि वे अंतिम दर्शन करने चले आए और सबकी आँखों में आसू थे। उनकी अंतिम यात्रा मैं जैनेन्द्र, विजयेन्द्र, स्नातक, अजित कुमार, डॉ. निर्मला, डॉ. सत्यप्रकाश, डॉ. रघुवंश जैसे विज्ञ जन उपस्थित थे। स्वयं फादर बुल्के ने भी नहीं सोचा होगा कि उनकी मृत्यु पर इतने लोग आंसू बहाएंगे। फादर बुल्के की अंतिम यात्रा पर उमड़नेवाली भीड़ उनके अपने स्नेहीजन थे जो उनसे बेहद प्रेम करते थे। वे सभी साहित्य प्रेमी थे। |
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फादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। अथवा फादर कामिल बुल्के के चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» फादर कामिल बुल्के मूल रूप से बेल्जियम के रेम्सचैपल के रहनेवाले थे। उन्होंने इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष की पढ़ाई छोड़कर संन्यासी बनकर भारत आने का निर्णय लिया। फादर बुल्के एक संन्यासी थे, किन्तु, पारम्परिक अर्थों से भिन्न । वे जिससे एक बार रिश्ता बना लेते थे, उसे जिन्दगी भर तोडते नहीं थे। वे अपने हर स्नेहीजनों से मिलने का समय निकाल लेते थे, मौसम चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों। लोगों के घर-परिवार के बारे में, निजी दुःख-तकलीफ के बारे में पूछना उनका स्वभाव था। बड़े से बड़े दुःख में सांत्वना के दो शब्द सुनना, सामनेवाले व्यक्ति को एक नई आशा और रोशनी से भर देता था। वे अक्सर अपनी स्नेहमयी माँ को याद करते थे। उनकी कर्मभूमि भले भारत की धरती थी, वे अपनी जन्मभूमि से बेहद प्यार करते थे। उनके मन में अपने देश के लिए आदर और सम्मान के भाव थे। फादर ने भारत आकर अपना सारा जीवन हिन्दी समाज तथा भारत के विकास में समर्पित कर दिया । उन्होंने भारत के प्रति एक सच्चे देशभक्त तथा हिन्दी भाषा-प्रेमी के रूप में अपना धर्म निभाया। फादर बुल्के वास्तव में अविस्मरणीय व्यक्ति थे। |
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फादर कामिल बुल्के की साहित्य-साधना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» फादर कामिल बुल्के इंजीनियरिंग के छात्र थे। उन्होंने तीसरे वर्ष में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी और भारत आ गए। उन्होंने सन्यास लेकर भारत को अपनी कर्मभूमि बनाया । यहाँ आकर उन्होंने दो वर्ष तक ‘जिसेट संघ’ में रहकर धर्माचार की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 9-10 वर्ष दार्जिलिंग में रहकर पढ़ाई की, फिर कोलकाता से बी.ए. और इलाहाबाद से एम.ए, किया । सन् 1950 में उन्होंने अपना शोधप्रबंध ‘रामकथा : उत्पत्ति और विकास’ पूरा किया। उन्होंने मातरलिंक के प्रसिद्ध नाटक ‘ब्लूबर्ड’ का हिन्दी अनुवाद ‘नीलपंछी’ नाम से किया। बाद में उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज में रहकर अपना प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश तैयार किया। उन्होंने बाईबिल का हिन्दी में अनुवाद किया। इस प्रकार फादर कामिल बुल्के का साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। |
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फादर बुल्के की मृत्यु किस रोग से हुई ? लेखक ने उनके रोग पर क्या टिप्पणी की है ? |
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Answer» फादर बुल्के की मृत्यु जहरबाद से हुई थी। लेखक ने फादर के वात्सल्य व अमृतमय जीवन को देखा था इसलिए उन्होंने टिप्पणी की कि लेखक की मृत्यु ऐसे रोग से नहीं होनी चाहिए। |
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‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के द्वारा लेखक क्या संदेश देना चाहते हैं ? |
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Answer» फादर कामिल बुल्के जो विदेश के थे भारत में आकर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके अनुकरणीय चरित्र से परिचय करवाकर लेखक ने मानवीय करुणा, भारतीयता की पहचान, अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम, हिन्दी भाषा के प्रति दायित्व से हमें अवगत करवाया है। वे बताना चाहते हैं कि विदेश से आकर एक व्यक्ति दया, करुणा, ममता का हमें पुन:स्मरण करवाता है, हमारी संस्कृति से हमें अवगत कराता है, हिन्दी भाषा के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाता है। हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित करने के लिए प्रयत्न करता है, और हम भारत के होकर अपनी संस्कृति अपनी पहचान को भूल रहे हैं, पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण करने में लगे हैं और पाश्चात्य संस्कृति में पला-बढ़ा व्यक्ति भारतीय संस्कृति को आत्मसात् कर अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। हम अपने कर्तव्यों से दूर होते जा रहे है। एक विदेशी व्यक्ति हिंदी के गौरव का गीत गाता है और हम भारतीय होकर भी हिन्दी की उपेक्षा करते हैं। लेखक यही संदेश देना चाहते हैं कि हमें अपने देश, अपनी धरती, अपनी मातृभाषा के विकास के लिए सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए । लोगों के साथ आत्मीयता व प्रेम तथा भाईचारे के साथ रहना चाहिए । दूसरों की सहायता करनी चाहिए। |
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अब्दुससमद खां ने सढौरा तथा लोहगढ़ के किलों पर कब विजय प्राप्त की? |
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Answer» अक्तूबर 1713 में। |
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सैय्यद जलालुद्दीन कहां का रहने वाला था? |
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Answer» सैय्यद जलालुद्दीन समाना का रहने वाला था। |
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सढौरा में स्थित पीर बुद्ध शाह की हवेली आजकल किस नाम से जानी जाती है? |
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Answer» सढौरा में स्थित पीर बुद्ध शाह की हवेली आजकल कत्लगढ़ी नाम से जानी जाती है। |
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