This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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एक व्यापारी ने उसके मित्र के पास से ता. 1.06.2016 के दिन वार्षिक 12% ब्याज की दर से रु. 1,00,000 की लोन ली है । इस पर वार्षिक ब्याज प्रति वर्ष तारीख 1 जून के रोज चुकाना है । प्रथम वार्षिक ब्याज तारीख 1.06.2017 के रोज चुकाना है । इस व्यापारी का हिसाब प्रति वर्ष तारीख 31 मार्च के दिन पूरा होता है । इस व्यापारी की बही में ता. 31.3.2017 के दिन पूरा होते वर्ष के लिये इस ब्याज का कोई लेखा किया जायेगा ? अगर हा, तो कितनी राशि का ? किस हिसाबी ख्याल के अनुसार ? |
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Answer» उपरोक्त परिस्थिति में व्यापारी की बही में तारीख 31.3.2017 के दिन पूरा होते वर्ष के लिये ब्याज का लेखा किया जायेगा । तारीख 31.3.2017 के दिन तारीख 31.3.2017 तक चढ़ गये ब्याज का लेखा किया जायेगा । तारीख 31.3.2017 तक संपादित हुआ ब्याज 12 10 रु. 10,000 (1,00,000 × \(\frac{12}{100}\) × \(\frac{10}{12}\) ) होगा जो तारीख 1.06.2016 से तारीख 31.03.2017 तक ऐसे 10 मास के लिये होगा । यह लेखा संपादन के सिद्धांत के आधार पर किया जायेगा । |
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आर्थिक चिट्ठा में स्थायी संपत्ति उसकी लागत किंमत अथवा बाजार किंमत दोनों में से एक किंमत पर दर्शायी जाती है, यह विधान सत्य है या असत्य ? अगर असत्य हो तो उसे सुधारकर फिर से सत्य विधान लिखो और उसके साथ जुड़ा सिद्धांत बताओ । |
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Answer» यह विधान असत्य है । ‘आर्थिक चिट्ठा में स्थायी संपत्ति उसकी घिसाई घटाने के बाद की किंमत से दर्शायी जाती है ।’ यह चालू पेढ़ी के सिद्धांत से जुड़ा है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :आंकड़ों (संख्याओं) की सत्यता बनी रहे तब सकल तलपट में उधार शेष और जमा शेष का योग हमेशा समान रहता है । |
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Answer» संख्याओं की सत्यता बनी रहे तब सकल तलपट में उधार शेष और जमा शेष का योग हमेशा समान होता है कारण कि इसमें द्विअसर का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :स्वतंत्र शाखा खुद का अलग सकल तलपट तैयार करती है । |
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Answer» स्वतंत्र शाखा खुद का अलग सकल तलपट तैयार करती है, कारण कि इसमें धंधाकीय इकाई का ख्याल रहता है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :आर्थिक चिट्ठा में पूँजी को जिम्मेदारी (दायित्व) पक्ष में दर्शाया जाता है । |
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Answer» आर्थिक चिट्ठा में पूँजी को जिम्मेदारी पक्ष में दर्शाया जाता है, कारण कि इसमें धंधाकीय इकाई का ख्याल रहा हुआ है । |
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If twice the age of A is added to B’s age, the sum is 45 and if twice the age of B is added to A’s age, the sum is 30. Then the age of B is ……………… A) 20 B) 5 C) 10 D) 30 |
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Answer» Correct option is (B) 5 Let age of A be x & age of B be y. Then according to first condition, we obtain 2x+y = 45 _______(1) According to second condition, we obtain x + 2y = 30 _______(2) Multiply equation (2) by 2, we get 2x + 4y = 60 _______(3) Subtract equation (1) from equation (3), we obtain (2x + 4y) - (2x + y) = 60 - 45 \(\Rightarrow\) 3y = 15 \(\Rightarrow\) y = \(\frac{15}3\) = 5 Hence, the age of B is 5. Correct option is B) 5 |
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| 7. |
The solution of the equations √3x – √7y = 0 and √8x + √3y = 0 is ………………A) x = 3, y = 7 B) x = 8, y = 3 C) x = 0, y = 1 D) x = 0, y = 0 |
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Answer» Correct option is (D) x = 0, y = 0 Given equations are \(\sqrt3x – \sqrt7y = 0\) _________(1) and \(\sqrt8x + \sqrt3y = 0\) _________(2) Multiply equation (1) by \(\sqrt3\) and equation (2) by \(\sqrt7,\) we get \(3x–\sqrt{21}y = 0\) _________(3) \(\sqrt{56}x+\sqrt{21}y = 0\) _________(4) By adding equations (3) & (4), we obtain \((3x-\sqrt{21}y)+(\sqrt{56}x+\sqrt{21}y)\) = 0+0 \(\Rightarrow\) \(3x+\sqrt{56}x=0\) \(\Rightarrow\) \((3+\sqrt{56})x=0\) \(\Rightarrow\) x = 0 \((\because3+\sqrt{56}\neq0)\) Put x = 0 in equation (3), we get \(\sqrt3\times0-\sqrt7y = 0\) \(\Rightarrow\) \(0-\sqrt7y = 0\) \(\Rightarrow\) \(\sqrt7y = 0\) \(\Rightarrow\) \(y=\frac0{\sqrt7}=0\) Hence, solution of given equations is x = 0, y = 0. Correct option is D) x = 0, y = 0 |
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| 8. |
परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :किसी इकाई में उत्कृष्ठ गुणवत्ता संचालन पद्धति हो और उससे इकाई की प्रतिष्ठा (शाख) बढ़ती हो तो भी ऐसी उत्कृष्ठ गुणवत्ता संचालन पद्धति का लेखा हिसाबी बही में नहीं होता । |
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Answer» किसी इकाई में उत्कृष्ठ गुणवत्ता संचालन पद्धति हो और उससे इकाई की प्रतिष्ठा बढ़ती हो तो भी ऐसी उत्कृष्ठ गुणवत्ता संचालन पद्धति का लेखा हिसाबी बही में नहीं होता कारण कि इसमें मौद्रिक माप का ख्याल रहा हुआ है । |
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| 9. |
If the pair of equations a1 x + b1y + c1= 0 and a2 x + b2 y + c2 = 0 has unique solution, then ………………A) a1/a2 = b1/b2B) a1/a2 ≠ b1/b2C) b1/b2 ≠ c1/c2D) b1/b2 = c1/c2 |
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Answer» Correct option is (B) \(\frac{a_1}{a_2} \neq \frac{b_1}{b_2}\) If the pair of equations \( a_1x + b_1y + c_1= 0\) \(and\;a_2x + b_2 y + c_2 = 0\) has unique solution, then \(\frac{a_1}{a_2} \neq \frac{b_1}{b_2}.\) Correct option is B) a1/a2 ≠ b1/b2 |
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| 10. |
परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :ग्राहक के पास से पहले से प्राप्त राशि बिक्री खाते जमा नहीं किया जाता । |
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Answer» ग्राहक के पास से पहले से प्राप्त राशि बिक्री खाते जमा नहीं किया जाता कारण कि इसमें संपादन का सिद्धांत रहा हुआ है । |
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If the perimeter of a rectangular room is 34 and the length of the diagonal is 13, then the dimensions of the room are ………… A) 7, 6 B) 11, 6 C) 12, 5 D) 12, 6 |
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Answer» Correct option is (C) 12, 5 Let length & breadth of the rectangular room are \(l\;and\;b\) respectively. \(\because\) Perimeter of a rectangular room is 34. i.e., \(2(l+b)\) = 34 \(\Rightarrow\) \(l+b=\frac{34}2\) = 17 \(\Rightarrow\) \(l+b=17\) _________(1) \(\because\) Length of the diagonal is 13. \(\therefore\) \(\sqrt{l^2+b^2}=13\) \(\Rightarrow\) \(l^2+b^2=13^2\) \(\Rightarrow\) \(l^2+b^2=169\) _________(2) \(\because\) \((l+b)^2=l^2+b^2+2lb\) \(\Rightarrow\) \(17^2=169+2lb\) (From (1) and (2)) \(\Rightarrow\) \(2lb=17^2-169\) = 289 - 169 \(\Rightarrow\) \(2lb=120\) _________(3) \(\therefore\) \((l-b)^2=l^2+b^2-2lb\) = 169 - 120 (From (3)) = 49 \(=7^2\) \(\Rightarrow\) \(l-b=7\) _________(4) By adding (1) & (4), we get \(2l\) = 17+7 = 24 \(\Rightarrow l=\frac{24}2=12\) \(\therefore\) b = 17+b \(\Rightarrow\) b = 17 - 12 = 5 Hence, the dimensions of the room are \(l=12\) & b = 5. Correct option is C) 12, 5 |
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| 12. |
If 9x + 11y = 51 and 11x + 9y = 49, then x = ………………. A) -1 B) -2 C) 1 D) 2 |
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Answer» Correct option is (D) 2 9x + 11y = 51 _________(1) 11x + 9y = 49 _________(2) Multiplying equation (1) by 11 & equation (2) by 9, we get 99x + 121y = 561 _________(3) 99x + 81y = 441 _________(4) Subtract equation (4) from (3), we get 40y = 120 \(\Rightarrow\) y = \(\frac{120}{40}\) = 3 Then from (1), we get 9x + 33 = 51 \(\Rightarrow\) 9x = 51 - 33 = 18 \(\Rightarrow\) x = \(\frac{18}9\) = 2 Correct option is D) 2 |
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| 13. |
परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :अनिल ने रु. 10 लाख में विमल के पास से एक दुकान खरीदी । अनिल को लगता है कि खूब ही अच्छा सौदा हो गया है । कारण कि यह दुकान मौके की (योग्य जगह) जगह पर आयी हुई है, उसने इस दुकान के लिये 20 लाख भी चुका दिया होता । इसके विपरीत, विमल ऐसा मानता है कि यह दुकान उसके लिये नसीबदार नहीं थी और उसने यह दुकान 5 लाख में भी बेच दी होती । इस भावना के आधार पर, भले यह व्यवहार रु. 10 लाख में हुआ है, परंतु अनिल उसका लेखा खुद की बही में रु. 20 लाख में करना चाहता है और वीमल खुद की बही में रु.5 लाख में लिखना चाहता है, परंतु दोनों के लेखाकार का कहना है कि किसी हिसाबी सिद्धांत के आधार पर इस व्यवहार का लेखा दोनों की बही में रु. 10 लाख से ही होगा; परंतु यह सिद्धांत या प्रणालिका या ख्याल उन्हें याद नहीं है । |
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Answer» उपरोक्त परिस्थिति में अनिल और विमल दोनों पक्षकारों के लेखाकार के द्वारा लागत के ख्याल के आधार पर दोनों की बही में रु. 10 लाख से ही लेखा किया जायेगा । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :जैसे ही चोरी हो जाये अर्थात् तुरंत बीमा न लिया गया हो ऐसे यंत्र की चोरी से हुआ नुकसान संबंधी प्रावधान हिसाबी बही में किया जाता है । बाद में भले ही पुलिस द्वारा चोर पकड़ लिया जाये तब यह यंत्र वापस प्राप्त करने की संभावना हो । |
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Answer» जैसे ही चोरी हो जाये अर्थात् तुरंत बीमा न लिया गया हो ऐसे यंत्र की चोरी से हुआ नुकसान संबंधी प्रावधान हिसाबी बही में किया जाता है । बाद में भले ही पुलिस द्वारा चोर पकड़ लिया जाये तब यह यंत्र वापस प्राप्त करने की संभावना हो कारण कि इसमें रूढिचुस्तता या बुद्धिमता का ख्याल रहा हुआ है ।। |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :हिसाबों में देनदार पर बट्टा अनामत का प्रावधान किया जाता है, परंतु लेनदारों पर बट्टा अनामत का प्रावधान नहीं किया जाता । |
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Answer» हिसाबों में देनदार पर बट्टा अनामत का प्रावधान किया जाता है, परंतु लेनदारों पर बट्टा अनामत का प्रावधान नहीं किया जाता कारण कि इसमें दूरदर्शिता या बुद्धिमता का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :घिसाई की पद्धति में परिवर्तन की जानकारी और उसकी असर वित्तीय पत्रकों में दर्शानी चाहिए । |
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Answer» घिसाई की पद्धति में परिवर्तन की जानकारी और उसकी असर वित्तीय पत्रकों में दर्शानी चाहिए कारण कि इसमें संपूर्ण प्रस्तुती (प्रकटीकरण) का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :किसी विपरीत जानकारी के अभाव में व्यवसाय का खूब ही लंबा आयुष्य माना जाता है और इसी वजह से ऐसा आयुष्य अनुकूल हिसाबी समय में बाँटा दिया जाता है जिससे ऐसे प्रत्येक हिसाबी समय के अंत में इकाई का परिणाम और परिस्थिति जानी जा सके । |
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Answer» किसी विपरीत जानकारी के अभाव में व्यवसाय का खूब ही लंबा आयुष्य माना जाता है और इसी वजह से ऐसा आयुष्य अनुकूल हिसाबी समय में बाँट दिया जाता है जिससे ऐसे प्रत्येक हिसाबी समय के अंत में इकाई का परिणाम और परिस्थिति जानी जा सके, कारण कि इसमें हिसाबी समय/अवधि का ख्याल रहा हुआ है । |
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चालू पेढ़ी का ख्याल उदाहरण सहित समझाओ । |
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Answer» चालू पेढ़ी का ख्याल आधारित अमुक उदाहरण निम्न अनुसार है : (i) अग्रीम चुकाया खर्च आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति पक्ष में दर्शाया जाता है कारण कि धंधा लंबे समय तक चलनेवाला है और यह माना जाता है कि अग्रीम चुकाये खर्च का लाभ भविष्य में प्राप्त होगा । (ii) हिसाबी अवधि के अंत में वित्तीय पत्रक तैयार किये जाते है । चालू पेढ़ी के ख्याल के अनुसार व्यवसाय खूब लंबे समय तक चलनेवाला है, ऐसी परिस्थिति में इतने लंबे समय तक व्यवसाय से जुड़े पक्षकार धंधे के परिणाम की राह नहीं देखेंगे । ऐसा मानकर नियत समय के अंतर पर धंधे के लाभ-हानि या संपत्ति-दायित्व की जानकारी प्राप्त होती रहे इसके लिये नियमित हिसाब लिख्खे जाते है । (iii) प्रसारित राजस्व खर्च कितनी बार आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति लेना पक्ष में बताये जाते है । कारण कि यह माना जाता है कि पेढ़ी लंबे समय तक चलनेवाली है और व्यवसाय को उस खर्च का लाभ लंबे समय तक प्राप्त होता रहेगा । (iv) स्थिर संपत्तियाँ आर्थिक चिट्ठे में घिसाई घटाने के बाद की किंमत से बताई जाती है । स्थिर संपत्तियाँ पुनः विक्रय के लिये नहीं परंतु लंबे समय तक उपयोग के लिये खरीदी जाती है, इसलिये चालू पेढ़ी के ख्याल के अनुसार आर्थिक चिट्टे में उसकी बाजार किंमत दर्शाने के बदले उसकी घिसाई घटाने के बाद की किंमत दर्शायी जाती है । (v) अर्धतैयार माल का मूल्यांकन उसके लिये हुए लागत के आधार पर किया जाता है । किसी भी समय व्यवसाय में अर्धतैयार माल पर परंतु चालू पेढ़ी के ख्याल के अनुसार हम यह मानते है कि उत्पादन की प्रक्रिया माल पूर्ण हो जाये तब तक चलेगी जिससे तैयार माल अस्तित्व में आयेगा । इसलिये ऐसे अर्धतैयार माल का मूल्यांकन उसकी प्राप्त होनेवाली किंमत के बदले उसके पीछे किये गये खर्च या लागत के आधार पर किया जाता है । |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :लागत का ख्याल (Cost Concept). |
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Answer» लागत का ख्याल (Cost Concept): प्रत्येक व्यवहारों का लेखा उसकी वित्तीय या मौद्रिक लागत के आधार पर किया जाता है । अगर लागत है तब उसका लेखा जो भी वित्तीय लागत होगी उसी किंमत से होगी उससे अधिक या कम रकम से लेखा नहीं होगा । प्रत्येक हिसाबों का मूलभूत सिद्धांत यह है कि प्रत्येक व्यवहारों का लेखा उसकी लागत के आधार पर ही होना चाहिए । यह ख्याल अपनी खुद की मनमर्जी के अनुसार व्यवहारों . का लेखा नहीं करने देगा । इस ख्याल का मुख्य उपयोग संपत्ति की खरीदी के व्यवहारों में किया जाता है जहाँ हिसाब की राशि दो पक्षकारों के बीच तय किये गये किंमत के आधार पर होता है । इसके बावजूद कभी-कभार अंदाज का सहारा लेना पड़ता है । जैसे : संपत्ति पर घिसाई गिनने की पद्धति में आयुष्य का अंदाजित समय ही ध्यान में लेना पड़ता है । |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :व्यवहारों की दोहरी असर अथवा द्विअसर का ख्याल (Dual Aspect Concept). |
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Answer» व्यवहारों की दोहरी असर अथवा द्विअसर का ख्याल (Dual Aspect Concept) : द्विलेखा नामा पद्धति के मूलभूत हिसाबी प्रणालिका के रूप में इसे जाना जाता है । इस ख्याल के अनुसार प्रत्येक व्यवहारों की हिसाब में दो असर दी जाती है, (i) लाभ देनेवाला और (ii) लाभ प्राप्त करनेवाला । जैसे : 20,000 रु. का यंत्र रोकड़ से खरीदा । इस व्यवहार में रु. 20,000 का यंत्र आता है और बदले में रु. 20,000 की रोकड़ जाती है । अगर यंत्र की उधार खरीदी की गई हो तब यंत्र प्राप्त होता है और उतनी ही राशि भविष्य में चुकाने की जिम्मेदारी उपस्थित होती है । इस प्रकार ‘प्रत्येक प्राप्त करनेवाला देनेवाला है’ और ‘प्रत्येक देनेवाला प्राप्त करनेवाला है ।’ प्रत्येक व्यवहार की दोहरी असर देने के लिये ‘उधार’ और ‘जमा’ इन शब्दों का उपयोग किया जाता है । हिसाबी पद्धति का यह ढाँचा द्विअसर के ख्याल के आधार पर रचित है । प्रत्येक व्यवहार की कुल उधार असर और जमा असर तथा उसकी खतौनी हमेशा समान ही होती है । नामा पद्धति की रचना के समय दोनों असर दी जाती है उसे द्विनोंधी नामा पद्धति कहते हैं । प्रत्येक इकाई में रहे हुए आर्थिक संसाधन संपत्ति कहलाते है । इस संपत्ति के सामने विविध पक्षकारों द्वारा लगाई गई पूँजी और जिम्मेदारी को शामिल किया जाता है । पूँजी यह व्यवसाय की संपत्ति के सामने का मालिक का दायित्व है । व्यक्तिगत मालिकी में उसे मालिकी की पूँजी, साझेदारी में साझेदारों की पूँजी, कंपनी स्वरूप में उसे मालिकों की पूँजी अथवा अंशधारकों की पूँजी के रुप में जाना जाता है । जिम्मेदारी यह लेनदारों का व्यवसाय की संपत्ति के सामने का एक है । इस प्रकार धंधे की सभी संपत्ति पर लेनदार और मालिकी का हक होने से ऐसे हक की राशि संपत्ति से अधिक नहीं हो सकती । हिसाबी समीकरण में उसे निम्न अनुसार दर्शाया जायेगा : संपत्ति = जिम्मेदारी + पूँजी |
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द्विअसर का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» द्विअसर के ख्याल के उदाहरण निम्न है :
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :अर्धतैयार माल का मूल्यांकन उसकी प्राप्त होनेवाली किंमत के आधार पर नहीं परंतु उसकी लागत के आधार की जाती है । |
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Answer» अर्धतैयार माल का मूल्यांकन उसकी प्राप्त होनेवाली किंमत के आधार पर नहीं परंतु उसकी लागत के आधार पर की जाती है, इसमें चालू पेढ़ी का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :जब माल की उधार खरीदी की जाये तब इस खरीदी का लेखा हिसाबों में होना चाहिए फिर भले ही इस खरीदी के लिये रोकड़ में भुगतान न हुआ हो कारण कि जब माल की खरीदी होती हो तब राशि चुकाने योग्य होती है । |
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Answer» जब माल की उधार खरीदी की जाये तब इस खरीदी का लेखा हिसाबों में होना चाहिए फिर भले ही इस खरीदी के लिये रोकड़ में भुगतान न हुआ हो कारण कि जब माल की खरीदी होती हो तब राशि चुकाने योग्य होती है, इसमें संपादन का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :अगर कोई अन्य प्रावधान न हो तब, कंपनी के लाभ-हानि खाते में कोई भी आय या खर्च जो आय का 1% अथवा रु. 1,00,000 दोनों में से जो अधिक हो उसकी अपेक्षा कम हो उसे अलग बताने की आवश्यकता नहीं है । |
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Answer» अगर कोई अन्य प्रावधान न हो तब, कंपनी के लाभ-हानि खाते में कोई भी आय या खर्च जो आय का 1% अथवा रु. 1,00,000 दोनों में से जो अधिक हो उसकी अपेक्षा कम हो उसे अलग बताने की आवश्यकता नहीं है कारण कि इसमें महत्त्वता का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :स्टोक मूल्यांकन पद्धति में परिवर्तन की जानकारी और उसकी असर वित्तीय पत्रकों में दर्शानी चाहिए । |
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Answer» स्टोक मूल्यांकन पद्धति में परिवर्तन की जानकारी और उसकी असर वित्तीय पत्रकों में दर्शानी चाहिए कारण कि इसमें संपूर्ण प्रस्तुती (प्रकटीकरण) का ख्याल रहा हुआ है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :हिसाबी समय के अंत में वित्तीय पत्रक तैयार किये जाते है । |
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Answer» हिसाबी समय के अंत में वित्तीय पत्रक तैयार किये जाते है, इसमें हिसाबी समय या अवधि का ख्याल/अथवा चालू पेढ़ी का ख्याल रहा हुआ है । |
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व्यापार में जब कोई खर्च या आय हुई हो परंतु खाता का नाम याद न आता हो तब उस व्यवहार किस खाते लिखा जाता है ? |
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Answer» व्यापार में जब कोई खर्च या आय हुई हो परंतु खाता का नाम याद न आता हो तब उस व्यवहार को श्री तसलमात खाते लिखा जाता है । |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :घिसाई और स्टोक मूल्यांकन की पद्धति में बारंबार परिवर्तन नहीं करना चाहिए । |
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Answer» घिसाई और स्टोक मूल्यांकन की पद्धति में बारंबार परिवर्तन नहीं करना चाहिए, इसमें एकसूत्रता का ख्याल रहा हुआ है । |
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इन्स्टिट्युट ओफ चार्टर्ड एकाउन्टन्ट्स ओफ इंडिया (ICAI) के द्वारा किन तीन ख्यालों को मूलभूत हिसाबी मान्यताएँ गिनी जाती | |
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Answer» इन्स्टिट्युट ओफ चार्टर्ड एकाउन्टन्टस ओफ इंडिया (ICAI) के द्वारा निम्न तीन ख्यालों को मूलभूत हिसाबी मान्यताएँ गिनी जाती है |
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परिस्थितियाँ किस हिसाबी सिद्धांत, ख्याल या प्रणालिकाओं से जुड़ा है यह बताइए :अग्रीम चुकाया राजस्व खर्च आर्थिक चिट्ठा में संपत्ति के रूप में दर्शाया जाता है । |
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Answer» अग्रीम चुकाया राजस्व खर्च आर्थिक चिट्ठा में संपत्ति के रूप में दर्शाया जाता है, इसमें चालू पेढ़ी का ख्याल रहा हुआ है । |
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बुद्धिमता या बुद्धिचातुर्य या दूरदर्शिता का ख्याल उदाहरण सहित समझाओ । |
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Answer» बुद्धिमता या दूरदर्शिता का ख्याल के उदाहरण निम्न है :
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मौद्रिक माप का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» मौद्रिक माप के ख्याल को समझने के लिये निम्न उदाहरण है :
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :दूरदर्शिता या बुद्धिमता का ख्याल (Predence Concept). |
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Answer» दूरदर्शिता या बुद्धिमता का ख्याल (Predence Concept) : हिसाब लिखते समय तथा वित्तीय पत्रक तैयार करते समय लेखाकार बुद्धिमता या बुद्धिचातुर्य या दूरदर्शिता के ख्याल को ध्यान में . रखता है । वास्तव में व्यवसाय की जो भी परिस्थिति हो उससे अलग लाभ या हानि या संपत्ति की स्थिति दर्शाना वह योग्य नहीं है । जो भी परिस्थिति हो उससे अधिक अच्छी हो या उससे अधिक खराब परिस्थिति नहीं बतानी चाहिए । दूरदर्शिता के ख्याल के आधार पर बुद्धिमता या बुद्धिचातुर्य से जानकारी की प्रस्तुती से परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है । इस वित्तीय पत्रकों का उपयोग करनेवाले को लंबे समय तक उसके हित की रक्षा होती है । इस प्रकार बुद्धिमता का ख्याल अस्तित्व में आता है । इस ख्याल के अनुसार संभवित आय या लाभ को ध्यान में नहीं लिया जाता परंतु संभवित हानि को ध्यान में लिया जाता है । इस सिद्धांत के आधार पर लेखाकार उपज का कम अंदाज और खर्च के दायित्व का अधिक अंदाज दर्शाकर सुरक्षित मार्ग का अनुसरण करता है । अनिश्चितता के सामने काम पूरा करने के लिये यह एक उत्तम मार्ग है और इसके द्वारा लेनदारों के हित का उचित रक्षण भी होता है । इस सिद्धांत की सीमा यह है कि इस सिद्धांत के उपयोग द्वारा जरूरी रकम से अधिक रकम का प्रावधान करके संपत्तियों का मूल्य संभव उतना कम दर्शाया जाये या अधिक खर्च दर्शाकर लाभ कम दर्शाने का दृष्टिकोण अपनाया जाये तब गुप्त अनामत उपस्थित होती है जो कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है । बुद्धिमता के दो अंग निम्न अनुसार प्रस्तुत किये जा सकते है :
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एकसूत्रता का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» एकसूत्रता का ख्याल के उदाहरण निम्न है : (i) अगर किसी भी एक वर्ष के दरम्यान घटती शेष पद्धति से घिसाई गिना गया हो तब बाद के वर्षों में भी उसी पद्धति से घिसाई गिनना चाहिए । घिसाई की पद्धति में प्रत्येक वर्ष एकसूत्रता रखने से हिसाबी पत्रकों का अभ्यास करनेवालों के लिये लाभदायकता का अभ्यास करने में सरलता रहती है और इस प्रकार की तुलना करने के लिये किसी परिवर्तन के समायोजन की आवश्यकता नहीं रहती । (ii) स्टोक के मूल्यांकन की पद्धति प्रतिवर्ष एकसमान रखनी चाहिए। उसमें बारंबार परिवर्तन करना नहीं चाहिए । अर्थात् हिसाबी नीति या पद्धति प्रतिवर्ष एकसमान रहनी चाहिए । एक वर्ष में एक पद्धति से स्टोक का मूल्यांकन और दूसरे वर्ष में दूसरी पद्धति से मूल्यांकन योग्य नहीं है । |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :महत्त्वत्ता का ख्याल (Materiality Concept). |
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Answer» महत्त्वत्ता का ख्याल (Materiality Concept) : यह ख्याल पूर्ण प्रस्तुती के ख्याल के साथ जुड़ा है । सभी महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ वित्तीय पत्रकों में प्रस्तुत करना चाहिए । महत्त्वता का आधार जानकारी के प्रस्तुतीकरण और विश्वसनीयता पर रहा हुआ है । दी गई जानकारी अगर असरदायक हो तब वह जानकारी महत्त्व की कहलायेगी । इस ख्याल के अनुसार यह माना जाता है कि वित्तीय पत्रकों में विवरण तभी लिखा जाना चाहिए जब वह विवरण उपयोग करनेवालों के लिये उपयोगी सिद्ध हो । बिन आवश्यक जानकारी का इसमें समावेश नहीं होना चाहिए सिर्फ आवश्यक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ ही इसमें शामिल की होनी चाहिए । जैसे : स्टेशनरी खर्च में सभी स्टेशनरी पेंसिल, रबड़, सभी वस्तुओं का समावेश हो जाता है । इसलिये ऐसे छोटी-छोटी वस्तुओं का अलग से खाता खोलना बिनमहत्त्वपूर्ण है । ” इसके अलावा कंपनी कानून, 2013 के परिशिष्ट III के लाभ-हानि के पत्रक तैयार करने की सामान्य सूचना में यह बताया गया है । की कंपनी की आय या खर्च की कोई एक रकम की आय 1% अथवा रु. 1,00,000 दोनों में से जो अधिक हो ऐसे आय या खर्च का विवरण अतिरिक्त जानकारी के स्वरूप में प्रस्तुत किया जायेगा । महत्त्वता के ख्याल के अनुसार हिसाबी लेखाकार की अपनी विवेकबुद्धि और निर्णय के आधार पर महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ लिखनी चाहिए, बिनआवश्यक घटनाएँ या जानकारी जो महत्त्वपूर्ण न हो ऐसी जानकारियों का लेखा नहीं करना चाहिए । |
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महत्त्वत्ता का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» महत्त्वता के ख्याल का उदाहरण निम्न है : (i) अगर अन्य कोई प्रावधान न हो तब, कंपनी के लाभ-हानि खाते में कोई भी आय या खर्च जो आवक का 1% अथवा रु. 1,00,000 दोनों में से जो अधिक हो उसकी अपेक्षा कम हो तब उसे अलग बताने की आवश्यकता नहीं रहती । (ii) तारीख 2.3.2015 से तारीख 1.4.2015 के समयावधि का लाईट बिल प्राप्त हुआ है, तथा हिसाबी वर्ष 31.3.15 के दिन पूरा होता है । इस परिस्थिति में 1 दिन का खर्च वर्ष 2015-16 में लिखने के बजाय संपूर्ण लाइट बिल तारीख 31.3.2015 के दिन पूरा होते वर्ष के लाभ-हानि खाते उधार किया जायेगा । (iii) कितनी बार हमारे द्वारा उपयोग में ली जानेवाली नोटबुक में अमुक पन्नों का हमारे द्वारा उपयोग किया जाता हो और अमुक पन्ने खाली छोड़ दिये जाते हो तब नोटबुक यह सैद्धांतिक रूप से व्यवसाय की संपत्ति गिनी जाने से उपयोगी और बिनउपयोगी पन्नों की गणना की जा सकती है । परंतु सामान्य रूप से कोई लेखाकार यह नहीं करता । जब यह नोटबुक खरीदी जाती हो तब उसकी किंमत खर्च के रूप में अपलिखित की जाती है । |
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पूर्ण प्रस्तुती (प्रकटीकरण) या संपूर्ण उल्लेख का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» संपूर्ण प्रस्तुती (प्रकटीकरण) के उदाहरण निम्न है :
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व्यावसायिक (धंधाकीय) इकाई का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» व्यावसायिक इकाई या अलग व्यक्ति के ख्याल के कुछ उदाहरण निम्न है :
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :संपादन का ख्याल (Accrual Concept). |
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Answer» संपादन का ख्याल (Accrual Concept) :इस ख्याल को उपज-खर्च के संपादन के सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है । इस सिद्धांत के अनुसार यह माना जाता है कि जिस समय के दरम्यान की आवक या खर्च हो उसी समय की आवक या खर्च के रूप में उसे गिनना चाहिए, फिर चाहे उस समय में नकद प्राप्त न हुई हो या चुकायी न गयी हो । इस प्रकार, उपज या खर्च जिस समय से जुड़ी हो उस समय में उसका संपादन हुआ गिना जायेगा । इस ख्याल के अनुसार आय का संपादन हुआ तभी कहलायेगा जब वह आय की कमाई की गई हो या मिलनयोग्य हो । फिर चाहे वह रोकड़ में प्राप्त हुई हो या न हो । आय या खर्च के संपादन की दो अलग-अलग पद्धतियाँ (i) रोकड़ के आधार पर (Cash Basis) और (ii) संपादन के आधार पर (Accrual Basis) में रोकड़ के आधार पर आय तभी लिखी जाती है जब रोकड़ प्राप्त हो गई हो और खर्च तभी लिखा जायेगा जब वह वास्तव में चुकाया गया हो । अमुक प्रकार के व्यवसायी जैसे : डॉक्टर, वकील या चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट रोकड़ पद्धति के अनुसार हिसाब रखते है । जबकि कंपनियों को संपादन पद्धति के अनुसार हिसाब रखना अनिवार्य होता है । जबकि व्यापारी पेढ़ीयाँ संपादन के ख्याल के आधार पर आय या खर्च का लेखा हिसाबों में करती है । |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :एकसूत्रता का ख्याल (Consistency Concept) |
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Answer» एकसूत्रता का ख्याल (Consistency Concept) : एकसूत्रता का ख्याल सूचित करता है कि हिसाब लिखते समय या वित्तीय पत्रकों की प्रस्तुती के समय धंधे में एकसमान हिसाबी नीतियाँ, विधि और पद्धतियों का उपयोग करना चाहिए और प्रति वर्ष एकसमान रहनी चाहिए । अर्थात् एक बार धंधाकीय इकाई ने जो पद्धति हिसाब गिनने के लिये तय की हो वो ही प्रत्येक वर्ष उसी पद्धति से हिसाब की गणना होनी चाहिए । ऐसी एकसूत्रता बनी रहने पर ही हिसाबों के बीच तुलना संभव होती है । अगर यह एकसूत्रता न बनी रहे तो हिसाबों की तुलना नहीं की जा सकती और हिसाब गलत जानकारी दे सकते है । बिना किसी ठोस कारण के हिसाबी पद्धतियों में परिवर्तन नहीं होना चाहिए । जैसे : स्टोक के मूल्यांकन की लागत किंमत या बाजार किंमत दोनों में से जो कम हो उसे ही ध्यान में लेना चाहिए । यहाँ एकसूत्रता के सिद्धांत का भंग नहीं होता । एकसूत्रता का सिद्धांत अलग-अलग समय में एकसूत्रता के संदर्भ में है । इसका मतलब यह नहीं है कि अलग-अलग प्रकार के व्यवहारों में एकसमान ही हिसाबी विधि या पद्धति होनी चाहिए । एकसूत्रता के ख्याल का अमल करने से व्यक्तिगत पूर्वग्रह दूर होते है, कारण कि लेखाकार को प्रतिवर्ष एकसमान नियम, पद्धति या विधि का पालन करना पड़ता है । |
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हिसाब लिखते समय और वित्तीय पत्रक तैयार करने के लिये उपयोग में लिये जानेवाले हिसाबी सिद्धांत अथवा ख्याल अथवा प्रणालिकाएँ अथवा नियमों या मान्यताओं की आवश्यकता समझाओ । |
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Answer» नामा लिखना मात्र व्यवसाय का उद्देश्य नहीं परंतु यह लिखे गये हिसाब सभी समझ सके और व्यवसाय से जुड़े सभी पक्षकार को उपयोगी सिद्ध हो सके इस प्रकार से लिख्ने हुए होने चाहिए । हिसाबों में एकरूपता बनाये रखने के लिये हिसाबी पत्रकों को तैयार करते समय हिसाबी सिद्धांत, प्रणालिकाएँ, मान्यताओं और ख्यालों का उपयोग किया जाता है । अगर ऐसा न किया जाये तो विविध पक्षकार दी गई जानकारी का अपने-अपने हिसाब से अर्थघटन कर अयोग्य निर्णय लेने की संभावनाएँ बढ़ जाती है । इसलिये नामा के द्वारा हिसाबी जानकारियाँ में समानता लाने के लिये और जानकारी देनेवाले और जानकारी प्राप्त करनेवाले दोनों एक ही दिशा में समझ सके इस उद्देश्य से हिसाबी ख्याल, सिद्धांत, प्रणालिकाएँ एवं मान्यताएँ आवश्यक है । निम्न बातें इन सभी जानकारियों को आसानी से स्पष्ट करती है :
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एकत्रित लाभ का वितरण किस प्रकार होता है ? |
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Answer» पेढी में एकत्रित हुए लाभ का वितरण लाभ-हानि के पुराने प्रमाण में किया जाता है । |
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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :चालू पेढ़ी का ख्याल (Going Concern) . |
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Answer» चालू पेढ़ी का ख्याल (Going Concern) : इस ख्याल के अनुसार यह माना जाता है कि जब व्यवसाय प्रारंभ किया जाता है तब यह माना जाता है कि व्यवसाय लंबे समय तक चलेगा । इसे चालू पेढ़ी का ख्याल कहा जाता है । हिसाबी पद्धति का यह एक महत्त्वपूर्ण ख्याल है । व्यवसाय लंबे समय तक चलनेवाला है इस अपेक्षा से लेनदार माल की पूर्ति करता है, सेवा देता है । कर्ज देनेवाली संस्थाएँ अधिक मात्रा में आसानी से कर्ज देती है । इस सिद्धांत के आधार पर स्थिर संपत्ति की घिसाई की गणना में आयुष्य को ध्यान में लिया जाता है । निम्नलिखित परिस्थितियों में चालू पेढ़ी का ख्याल ध्यान में नहीं लिया जायेगा –
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संपादन का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» संपादन का ख्याल के उदाहरण निम्न है : (i) संपादन के सिद्धांत के आधार पर जिस समय का जो खर्च हो उसी समय ध्यान में लेना चाहिए । फरवरी, 2016 के मास का चुकाया किराया भले मार्च, 2016 में चुकाया जाये फिर भी फरवरी, 2016 के मास का ही खर्च गिना जायेगा । (ii) माल के विक्रय के व्यवहार में अगर पहले से रोकड़ प्राप्त हो गई हो परंतु जब तक माल की बिक्री न हो तब तक या जबतक ओर्डर के सामने माल की डिलीवरी न दी गई हो तब तक आवक संपादित नहीं गिनी जाती । अर्थात् जब तक प्राप्त होने योग्य या चुकाने योग्य व्यवहार संपूर्ण न हो जाये तब तक हिसाबों में कोई भी आवक संपादित हुई नहीं कहलायेगी । (iii) जब माल का उधार विक्रय किया जाये तब हिसाबों में आवक संपादित हुई गिनी जाती है, भले ही रोकड़ न मिली हो । यह माना जाता है कि जिस व्यक्ति को उधार माल बेचा गया है वह व्यक्ति करार के अनुसार कानूनी दृष्टि से इस माल के पैसे चुकाने के लिये जिम्मेदार माना जायेगा जिससे भविष्य में उससे राशि प्राप्त हो जायेगी । इस प्रकार, संपादन के ख्याल के अनुसार माल का विक्रय किया जाये तब भले ही रोकड़ मिली हो या न मिली हो परंतु विक्रय की आय प्राप्त हुई है ऐसा मान लिया जाता है । |
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साझेदार की निवृत्ति के समय आर्थिक चिट्ठे में दर्शाये गये लाभ-हानि खाते की उधार बाकी ……………….. के रूप में लिखी जाती है ।(अ) निवृत्त होने वाले साझेदार सहित सबी साझेदारों के पूँजी खाते के उधार पक्ष में पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में(ब) निवृत्त होने वाले साझेदार सहित सभी साझेदारों के पूंजी खाते के जमा पक्ष में पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में(क) सिर्फ निवृत्त होनेवाले साझेदार के पूँजी खाते के जमा पक्ष में(ड) बाकी के साझेदारों के पूंजी खाते के उधार पक्ष में उसके लाभ के प्रमाण में |
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Answer» (अ) निवृत्त होने वाले साझेदार सहित सबी साझेदारों के पूँजी खाते के उधार पक्ष में पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में |
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निवृत्त साझेदार को देने योग्य ख्याति …………………… के रूप में लिखी जाती है ।(अ) सभी साझेदारों के पूँजी खाते के जमा पक्ष में, पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में(ब) सभी साझेदारों के पूंजी खाते के जमा पक्ष में, उसके लाभ के प्रमाण में(क) शेष साझेदारों के पूँजी खाते के उधार पक्ष में, उनके लाभ के प्रमाण में(ड) शेष साझेदारों के पूँजी खाते के उधार पक्ष में, उनके नये लाभ-हानि के प्रमाण में |
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Answer» (क) शेष साझेदारों के पूँजी खाते के उधार पक्ष में, उनके लाभ के प्रमाण में |
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साझेदार की निवृत्ति के समय पेढी के आर्थिक चिठे में दर्शायी गयी ख्याति ………………….. के रूप में लिखा जाता है ।(अ) नये आर्थिक चिठे में दर्शाया जाता है – अगर साझेदार निश्चित करे तब(ब) सभी साझेदारों के पूँजी खाते की उधार पक्ष में पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में(क) सभी साझेदारों के पूँजी खाते के जमा पक्ष में पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में(ड) सिर्फ निवृत्त होनेवाले साझेदार के पूँजी खाते के उधार पक्ष में |
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Answer» (ब) सभी साझेदारों के पूँजी खाते की उधार पक्ष में पुराने लाभ-हानि के प्रमाण में |
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साझेदारी का पुनर्गठन का अर्थ समझाकर पुनर्गठन के संजोग बताइए । |
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Answer» साझेदारी का पुनर्गठन का अर्थ : “साझेदारी का पुनर्गठन अर्थात् अलग अलग कारणों से साझेदारी में होनेवाले परिवर्तन को साझेदारी का पुनर्गठन कहते है।”
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पुनः मूल्यांकन खाते को दूसरे किस नाम से जाना जाता है ? |
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Answer» पुनः मूल्यांकन खाते का दूसरा नाम “लाभ-हानि समायोजन खाता” है । |
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लाभ का प्रमाण अर्थात् क्या ? |
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Answer» निवृत होनेवाले साझेदार का भाग शेष रहनेवाले चालु साझेदार जिस प्रमाण में प्राप्त करे उसका प्रमाण तथा चालु साझेदारी में लाभ-हानि वितरण के प्रमाण में परिवर्तन होने पर किसी साझेदार ने किया त्याग चालु साझेदार जिस प्रमाण में प्राप्त करे उसे लाभ का प्रमाण कहते हैं। |
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