This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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बिना पूर्व सूचना के मेहमान आ जाने पर किए जाने वाले अतिरिक्त कार्यों को कहा जाता है(क) अनावश्यक कार्य(ख) थकाने वाला कार्य(ग) आकस्मिक कार्य(घ) वार्षिक कार्य |
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Answer» सही विकल्प है (ग) आकस्मिक कार्य |
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घर पर कार्य करने वाले नौकरों के प्रति कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए? |
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Answer» घर पर कार्य करने वाले नौकरों के प्रति सन्तुलित व्यवहार करना चाहिए, अर्थात् उनके प्रति न तो कठोर व्यवहार किया जाना चाहिए और न ही उन्हें आवश्यकता से अधिक ढील दी जानी चाहिए। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था का क्या महत्त्व है? |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था के महत्त्व को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है ⦁ इससे परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। |
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गृह-कार्य व्यवस्था के प्रमुख उद्देश्य बताइए। |
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Answer» गृह-कार्य व्यवस्था के प्रमुख उद्देश्य हैं-समय, श्रम तथा धन की समुचित बचत करना। |
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टिप्पणी लिखिए-गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक उपकरण। |
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Answer» वर्तमान नगरीय जीवन विभिन्न कारणों से अत्यधिक व्यस्त हो गया है। प्रत्येक शहरी व्यक्ति समय की कमी से परेशान है। इस तथ्य का गम्भीर प्रभाव गृह-कार्य-व्यवस्था पर भी पड़ा है। अब गृह-कार्यों को करने के लिए सीमित समय ही उपलब्ध हो पाता है। इस स्थिति में स्वाभाविक ही था कि गृह-कार्यों को करने के लिए यथासम्भव अधिक-से-अधिक उपकरणों को खोजा जाता। वैज्ञानिक प्रगति ने इस क्षेत्र में विशेष सहायता प्रदान की तथा अनेक ऐसे उपकरण दिए जो गृह-कार्यों को कम समय तथा कम श्रम द्वारा पूरा करने में सहायक होते हैं। घरेलू कार्यों में दो प्रकार के कार्य नियमित रूप से किए जाते हैं। ये कार्य हैं–रसोई एवं पाक-क्रिया सम्बन्धी कार्य तथा घर की सफाई सम्बन्धी कार्य। इन दोनों ही वर्गों के कार्यों को करने के लिए विभिन्न ऐसे उपकरण तैयार किए जा चुके हैं जो समय, श्रम तथा धन की बचत में सहायक होते हैं। इनमें से रसोईघर में उपयोग में आने वाले मुख्य उपकरण हैं-कुकर, विद्युत चालित केतली, टोस्टर, मिक्सर ग्राइण्डर, गैस का चूल्हा, ओवन, फ्रिज आदि। इनके अतिरिक्त घर की सफाई के लिए उपयोगी उपकरण हैं-वैक्यूम क्लीनर, कारपेट स्वीपर, बर्तन धोने की मशीन, कपड़े धोने की मशीन आदि। ये सभी उपकरण गृह-कार्यों को कम समय, कम श्रम तथा कम खर्चे में पूरी कर देते हैं। अतः इन सभी उपकरणों को गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक उपकरण माना जाता है। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक चार मुख्य कारक बताइए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक चार मुख्य कारक हैं ⦁ समस्त गृह-कार्यों का समुचित नियोजन, |
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गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक कारकों का उल्लेख कीजिए।याउत्तम गृह-कार्य-व्यवस्था को लागू करने के लिए किन-किन कारकों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है ? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक कारक (1) उचित योजना का निर्धारण: (2) कार्य-व्यवस्था में परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग: अनाज तथा दालें साफ करना, साग बीनना या सब्जी काटने का कार्य बड़ी-बूढ़ी औरतें बड़े चाव से करती हैं तथा अच्छे ढंग से भी करती हैं। यदि परिवार में कोई वृद्ध पुरुष हो, तो वह निकट के पार्क या बागे में बच्चों को घुमाने ले जा सकते हैं। किशोर बच्चों को घर की वस्तुएँ; जैसे कि कपड़े, किताबें आदि समेटकर यथास्थान रखने का कार्य सौंपा जा सकता है। ये बच्चे ही जूतों को साफ करने, बिस्तर बिछाने तथा झाड़-पोंछ करने का कार्य भी कर सकते हैं। परिवार की कार्य-व्यवस्था को सुचारू एवं सरल बनाने के लिए पति को भी गृह-कार्यों में यथासम्भव सहयोग देना चाहिए। (3) गृह-कार्य करने की सही विधियों का ज्ञान: (4) अच्छे तथा पर्याप्त भौतिक साधन उपलब्ध होना: (5) अनुभव एवं ज्ञान: |
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नियोजित परिवार के सुखी रहने के कारण बताइए। |
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Answer» ⦁ सदस्यों के शारीरिक व मानसिक विकास के अधिक अवसरों की उपलब्धि। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था के मुख्य सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था के सिद्धान्त (1) गृह-कार्य-सुनियोजन: (2) निर्धारित कार्य-योजना का नियन्त्रण: (3) कार्य-मूल्यांकन: (4) कुशलता: |
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अभिरुचि से क्या तात्पर्य है? |
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Answer» किसी कार्य के प्रति रुचि तथा उसे सीखने की क्षमता को सम्मिलित रूप से अभिरुचि कहते हैं। |
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कुछ सार्वजनिक अथवा सामुदायिक सुविधाएँ बताइए। |
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Answer» ⦁ डाकघर एवं बैंक |
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गृह-कार्य-व्यवस्था को कुप्रभावित करने वाले अर्थात् प्रतिकूल कारकों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था को कपभावित करने वाले कारक यह सत्य है कि कुछ कारक गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक होते हैं। परन्तु इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि कुछ कारक ऐसे भी होते हैं जो गृह-कार्य-व्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालते हैं। गृह-कार्य-व्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालने वाले कारकों को, कार्य-व्यवस्था को कुप्रभावित करने वाले कारक कहा जाता है। इस प्रकार के कारकों के प्रबल हो जाने की दशा में गृह-कार्य-व्यवस्था बिगड़ जाती है तथा घरेलू कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाते। कार्य-व्यवस्था को कुप्रभावित करने वाले मुख्य कारकों का संक्षिप्त परिचय निम्नवर्णित हैं (1) सूझ-बूझ की न्यूनता: (2) आवश्यक साधनों का अभाव: (3) पारिवारिक-कलह: प्रत्येक गृहिणी तथा परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों का दायित्व है कि वे गृह-कार्य-व्यवस्था को कुप्रभावित करने वाले कारकों के प्रति सजग रहें तथा इन कारकों को प्रबल न होने दें। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था को कुप्रभावित करने वाले मुख्य कारकों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था को कुप्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं ⦁ सूझ-बूझ की न्यूनता |
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गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक मुख्य उपकरणों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था में सहायक मुख्य उपकरण हैं-कुकर, मिक्सरे-ग्राइण्डर, टोस्टर, ओवन, फ्रिज, वैक्यूम क्लीनर, बर्तन धोने की मशीन तथा कपड़े धोने की मशीन। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था के लक्ष्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य व्यवस्था का लक्ष्य है-परिवार के रहन-सहन के स्तर को उन्नत बनाना। इसके माध्यम से पारिवारिक जीवन को सुखी एवं सरल बनाया जाता है। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था को सुचारू एवं उत्तम बनाने के उपायों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था को सुचारु एवं उत्तम बनाने के उपाय हैं-परिवार के सभी सदस्यों द्वारा गृह-कार्यों में अपनी शक्ति, क्षमता, बुद्धि एवं रुचि के अनुसार कुशलतापूर्वक यथासम्भवं योगदान देना। |
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कार्य-व्यवस्था के विभिन्न साधनों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» कार्य-व्यवस्था के निम्नलिखित दो साधन हैं (1) मानवीय अथवा अमूर्त साधन: (i) रुचि: (ii) ज्ञान: (iii) शक्ति: (iv) योग्यता एवं प्रवीणता: (v) समय: (2) अमानवीय अथवा भौतिक साधन (i) धन: (ii) भौतिक वस्तुएँ: (iii) सार्वजनिक गएँ: इस प्रकार हम देखते हैं कि प्रायः मानवीय व भौतिक साधनों का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है तथा इन दोनों प्रकार के साधनों के सन्तुलन, उपलब्धि एवं समायोजन पर ही परिवार एवं समाज की प्रगति निर्भर करती है। उत्तम एवं सुचारू गृह कार्य-व्यवस्था के लिए सभी साधन उपलब्ध होना आवश्यक माना जाता है। |
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गृह की सुव्यवस्था के लिए गृहिणी में किन गुणों का होना आवश्यक है? लिखिए।याएक कुशल गृहिणी अपना घर किस प्रकार सुव्यवस्थित रख सकती है? समझाइए।यागृह की सुव्यवस्था के लिए एक आदर्श गृहिणी में किन-किन गुणों का होना आवश्यक है? विस्तारपूर्वक लिखिए। |
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Answer» गृहिणी गृह-संचालन में मुख्य भूमिका निभाती है। वह पत्नी, माता, गुरु व गृह-स्वामिनी के कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने गृह में समृद्धि, सुख एवं सन्तोष का वातावरण बनाए रखती है। गृह (1) कर्तव्यों का ज्ञान: (2) अनुकूलता: (3) परिश्रमी होना: (4) चरित्रवान होना: (5) कार्य-कुशलता: (6) भोजन की सुव्यवस्था: (7) गृह-परिचर्या: (8) नियोजन का ज्ञान: (9) आय-व्यय का सन्तुलन: (10) परिवार में शान्ति बनाए रखना: (11) सेवकों के प्रति व्यवहार: (12) अतिथि सत्कार: (13) पति के प्रति कर्तव्य: |
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परिवार के सदस्यों की अभिरुचि के अनुसार कार्य सौंपने से क्या लाभ होता है? |
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Answer» परिवार के सदस्यों को अभिरुचि के अनुसार कार्य सौंपने पर सभी कार्य अच्छे ढंग से तथा शीघ्र ही पूरे हो जाते हैं। |
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टिप्पणी लिखिए-परिवार कल्याण तथा गृह-कार्य-व्यवस्था। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारकों में से एक है-परिवार कल्याण। परिवार कल्याण अपने आपमें एक दृष्टिकोण है, जिसके अन्तर्गत परिवार के सर्वांगीण हितों को ध्यान में रखा जाता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों के लिए पर्याप्त तथा सन्तुलित आहार, शिक्षा, चिकित्सा तथा मनोरंजन सम्बन्धी सुविधाएँ उपलब्ध होनी चाहिए। उत्तम आवास तथा स्वास्थ्य में सहायक रहन-सहन की दशाएँ भी परिवार-कल्याण के लिए आवश्यक मानी जाती हैं। परिवार कल्याण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ही परिवार को सीमित रखने का सुझाव दिया जाता है। । परिवार कल्याण के दृष्टिकोण को अपना लेने की स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था को भी उसी के अनुरूप ढालना पड़ता है। परिवार के सभी सदस्यों को परिवार के कल्याण सम्बन्धी कार्यों के प्रति जागरूक होना पड़ता है। बच्चों की उत्तम शिक्षा के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने पड़ते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य के विकास के लिए भी समय एवं धन का व्यय करना पड़ता है। इसके साथ-साथ परिवार के सभी सदस्यों के स्वस्थ मनोरंजन के लिए कुछ अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है तथा समय का सूझ-बुझपूर्वक नियोजन भी करना पड़ता है। वैसे यह सत्य है कि परिवार कल्याण के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए ही गृह-कार्य-व्यवस्था का निर्धारण किया जाना चाहिए। गृह-कार्य-व्यवस्था तो अपने आप में साधन है। इस साधन को अपनाकर जिस लक्ष्य को प्राप्त करना है, वह है- परिवार कल्याण। |
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गृह-कार्य-व्यवस्था को पारिवारिक आय किस प्रकार प्रभावित करती है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारकों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तथा प्रबल कारक है-पारिवारिक आय। समुचित पारिवारिक आय के अभाव में गृह-कार्य-व्यवस्था सुचारू हो ही नहीं सकती। वास्तव में गृह-कार्य के लिए विभिन्न भौतिक साधन अनिवार्य होते हैं। भौतिक साधनों को अर्जित करने के लिए धन की आवश्यकता होती है तथा धन की प्राप्ति आय के माध्यम से होती है। आये से आशय है-एक निश्चित अवधि में अर्जित वह धनराशि जो आर्थिक प्रयासों के परिणामस्वरूप प्राप्त होती है तथा जिसमें अन्य सुविधाएँ; जैसे-नि:शुल्क मकान, नि:शुल्क चिकित्सा तथा नि:शुल्क शिक्षा आदि भी सम्मिलित रहती हैं। गृह-कार्य-व्यवस्था के लिए आय के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए कहा जा सकता है कि यदि परिवार की आय अपर्याप्त है, तो पर्याप्त सूझ-बूझ, कार्य-कुशलता तथा परिवार के सदस्यों में सहयोग होने पर भी गृह-कार्य-व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल सकती, क्योंकि गृह-कार्यों के लिए आवश्यक भौतिक साधनों को अर्जित करने के लिए पारिवारिक आय अनिवार्य है। उदाहरण के लिए यदि परिवार की आय पर्याप्त है, तो गृह-कार्य-व्यवस्था को उत्तम बनाने के लिए श्रम एवं समय की बचत करने वाले विभिन्न उपकरण खरीदे जा सकते हैं तथा उनके माध्यम से गृह-कार्य सरलतापूर्वक ठीक समय पर पूरे किए जा सकते हैं। इसके विपरीत, यदि परिवार की आय कम है, तो पर्याप्त कार्य-कुशल गृहिणी भी अपने परिवार को अच्छा एवं पौष्टिक आहार तक उपलब्ध नहीं करा सकती, क्योंकि उसके लिए भी पर्याप्त खाद्य-सामग्री चाहिए। उपर्युक्त विवरण के आधार पर कहा जा सकता है कि उत्तम गृह-व्यवस्था के लिए पारिवारिक आय पर्याप्त होनी चाहिए, परन्तु पर्याप्त आय होने पर भी सूझ-बूझ, कार्य-कुशलता, लगन तथा परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सहयोग का भी विशेष महत्त्व होता है। |
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एक गृहिणी को दैनिक जीवन से समय, अर्थ एवं श्रम की बचत के लिए किन उपायों एवं उपकरणों की सहायता लेनी चाहिए? समझाइए।यागृह-संचालन में धन, श्रम और समय की बचत आप किस प्रकार करेंगी?यागृह के संचालन में समय, अर्थ व श्रम की बचत किन-किन उपायों द्वारा की जा सकती है? विस्तारपूर्वक समझाइए। |
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Answer» गृहिणी गृह की संचालिका है। नि:सन्देह उसे गृह के अधिकांश कार्य स्वयं सम्पन्न करने पड़ते हैं, जिससे उसे बहुत श्रम करना पड़ता है। प्रत्येक गृहिणी की शारीरिक शक्ति सीमित होती है। इस स्थिति में यदि कुछ बातों को ध्यान में न रखा जाए तो गृहिणी को गृह- कार्यों से अधिक थकान हो सकती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, जो गृहिणी के समय तथा श्रम को बचाने में सहायक हों। समय व श्रम की बचत के उपाय अर्थ (धन) की बचत के उपाय (1) आय-व्यय में सन्तुलन बनाए रखना: (2) मितव्ययिता के उपाय प्रयोग में लाना: |
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परिवार के सदस्यों की अभिरुचि का गृह कार्य-व्यवस्था से क्या सम्बन्ध है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» परिवार के सदस्यों की अभिरुचियाँ भी गृह-कार्य-व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। अभिरुचि एक व्यक्तिगत गुण या विशेषता होती है। व्यक्ति की किसी कार्य के प्रति रुचि तथा उसे सीखने की क्षमता को सम्मिलित रूप से अभिरुचि कहते हैं। अभिरुचि के लिए कार्य के प्रति रुचि तथा कार्य करने की योग्यता दोनों का ही होना आवश्यक है। उत्तम गृह-कार्य-व्यवस्था को प्राप्त करने के लिए परिवार के सदस्यों की अभिरुचियों को ध्यान में रखना नितान्त आवश्यक होता है। गृह-कार्यों का विभाजन परिवार के सदस्यों की अभिरुचियों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। परिवार के प्रत्येक सदस्य को गृह-कार्य-व्यवस्था के अन्तर्गत उसकी अभिरुचि के अनुकूल कार्य ही सौंपना चाहिए। अभिरुचि के अनुकूल कार्य सौंपने पर सम्बन्धित कार्य उत्तम एवं शीघ्र हो जाता है तथा साथ-साथ कार्य करने वाला भी प्रसन्न तथा अपने कार्य से सन्तुष्ट रहा करता है। इस स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था उत्तम रहती है तथा परिवार का वातावरण भी अच्छा एवं उत्साहवर्द्धक रहता है। इसके विपरीत, यदि परिवार के सदस्यों को उनकी अभिरुचि के विरुद्ध कार्य सौंप दिए जाएँ तो वे न तो सम्बन्धित कार्य को ही अच्छे ढंग से कर पाते हैं और न ही उन्हें सम्बन्धित कार्य को करने में किसी प्रकार की प्रसन्नता ही होती है। ऐसी स्थिति में गृह-कार्य जैसे-तैसे पूरे तो हो सकते हैं। परन्तु न तो गृह-कार्य-व्यवस्था उत्तम रह सकती है और न ही परिवार के सदस्य प्रसन्न रह सकते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया जाता है कि जहाँ तक हो सके परिवार के प्रत्येक सदस्य को उसकी अभिरुचि के अनुकूल ही गृह-कार्य सौंपने चाहिए। |
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परिवार के सदस्यों की संख्या तथा कार्य-व्यवस्था में क्या सम्बन्ध है? या ”परिवार की सदस्य-संख्या गृह-कार्य-व्यवस्था को प्रभावित करती है।” स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» समस्त गृह-कार्य मुख्य रूप से परिवार के सदस्यों द्वारा ही किए जाते हैं। इसके साथ यह भी सत्य है कि समस्त गृह-कार्य परिवार के सदस्यों के लिए होते हैं अर्थात् परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही समस्त गृह-कार्य किए जाते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि परिवार के सदस्यों की संख्या तथा गृह-कार्य-व्यवस्था के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। यदि किसी परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होती है अर्थात् परिवार का आकार बड़ा होता है, तो निश्चित रूप से उस परिवार के सदस्यों को अधिक गृह-कार्य करने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए-बड़े आकार के परिवार के लिए गृहिणी को अधिक मात्रा में भोजन तैयार करना पड़ता है तथा अधिक वस्त्रों को धोना पड़ता है तथा अन्य कार्य भी अधिक करने पड़ते हैं। इस स्थिति में यदि परिवार के सदस्यों के कार्यों का समुचित विभाजन नहीं होता, तो परिवार के कुछ सदस्यों पर कार्य का अधिक बोझा पड़ जाता है तथा ऐसे में गृह-कार्य-व्यवस्था अस्त-व्यस्त भी हो सकती है। इसके विपरीत, यदि समस्त गृह-कार्यों को परिवार के सभी सदस्यों में उचित ढंग से विभाजित कर लिया जाए, तो समस्त कार्य सरलता से तथा शीघ्र ही सम्पन्न हो सकते हैं। यदि परिवार के सदस्यों की संख्या कम हो तो उस स्थिति में समस्त गृह-कार्य निश्चित रूप से उन्हीं सदस्यों को करने पड़ते हैं। इस स्थिति में विशेष सूझ-बूझ की आवश्यकता होती है। समस्त कार्यों को नियोजित तथा सुव्यवस्थित ढंग से करना पड़ता है। कम सदस्य संख्या वाले परिवार कुछ कार्यों को परिवार के बाहर की संस्थाओं द्वारा भी करवा लेते हैं। उदाहरण के लिए–लाण्ड्री से कपड़े धुलवाना, कुछ डिब्बा बन्द भोज्य सामग्रियाँ इस्तेमाल करना तथा घर की सफाई व्यवस्था के लिए मेहरी रखना आदि। यहाँ यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि कम सदस्य संख्या वाले परिवारों में कोई भी सदस्य सामान्य रूप से कामचोर नहीं होता। इस स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहती है। इसके विपरीत, अधिक सदस्य संख्या वाले परिवारों में कुछ सदस्य कामचोर भी होते हैं। ऐसे में परिवार में तनाव तथा कटुता का वातावरण बना रहता है तथा गृह-कार्य-व्यवस्था भी उत्तम नहीं बन पाती। |
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घर-परिवार के सन्दर्भ में कार्य-व्यवस्था से क्या आशय है? |
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Answer» घर-परिवार के सम्बन्ध में कार्य-व्यवस्था से आशय है-घर तथा परिवार से सम्बन्धित समस्त कार्यों को सुनियोजित ढंग से पूरा करना। |
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परिवार के सदस्यों का व्यवहार गृह-कार्य-व्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित करता है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» गृह-कार्य-व्यवस्था पर प्रभाव डालने वाले कारकों में परिवार के सदस्यों का व्यवहार भी महत्त्वपूर्ण कारक है। वास्तव में, परिवार के सदस्यों के व्यवहार से ही कार्य बनते या बिगड़ते हैं। । परिवार में अनेक सदस्य होते हैं तथा परिवार के सभी सदस्य परिवार की कार्य-व्यवस्था में भाग लेते हैं। परिवार के सभी सदस्यों में पारस्परिक सम्बन्ध होते हैं। परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्ध इनके पारस्परिक व्यवहारों द्वारा निर्धारित होते हैं। यदि परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्ध मधुर, सहयोगात्मक तथा सामंजस्यपूर्ण होते हैं, तो गृह-कार्य-व्यवस्था अच्छी बनी रहती है। इसके विपरीत, यदि परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्ध कटु, तनावपूर्ण तथा असहयोगात्मक हों, तो निश्चित रूप से परिवार की कार्य-व्यवस्था अच्छी नहीं रह सकती। इस प्रकार के पारिवारिक सम्बन्धों की स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था बिगड़ जाती है तथा कोई भी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाता। परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्धों को सौहार्दपूर्ण बनाने के लिए आवश्यक है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य का व्यवहार उत्तम हो। परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए कि किसी अन्य सदस्य की भावनाओं को ठेस पहुँचे। परिवार के सभी सदस्यों का अन्य सदस्यों के प्रति मधुर व्यवहार होना चाहिए। इस प्रकार के मधुर व्यवहार गृह-कार्य-व्यवस्था को उत्तम बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं। परिवार में कुछ वरिष्ठ सदस्यों द्वारा नियन्त्रणकारी व्यवहार भी किया जाना चाहिए। इस प्रकार का नियन्त्रणकारी व्यवहार भी गृह-कार्य-व्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव डालता है। परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त घर के नौकरों के प्रति भी सन्तुलित व्यवहार होना चाहिए अर्थात् नौकरों के प्रति न तो अधिक कठोर व्यवहार होना चाहिए और न अधिक कोमलता का। नौकरों के प्रति सन्तुलित व्यवहार होने पर ही वे गृह-कार्य-व्यवस्था में समुचित तथा कुशलतापूर्वक योगदान प्रदान करते हैं। |
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गृहिणी को पारिवारिक सदस्यों के मध्य कार्य-विभाजन का आधार रखना चाहिए(क) उनकी कार्यक्षमता(ख) उनकी योग्यता(ग) उनकी योग्यता एवं कार्यक्षमता(घ) उनकी स्वयं की इच्छा। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) उनकी योग्यता एवं कार्यक्षमता |
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गृह-कार्य-व्यवस्था से आशय है(क) परिवार के लिए अधिक धन जुटाना(ख) घर की सफाई एवं सजावट की व्यवस्था करना(ग) घर-परिवार के कार्यों को सुचारू रूप से चलाना,(घ) घर के कार्य जैसे-तैसे पूरे कर देना। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) घर-परिवार के कार्यों को सुचारू रूप से चलाना |
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उत्तम कार्य-व्यवस्था के लिए गृहिणी को मिलना चाहिए(क) पुरस्कार(ख) प्रोत्साहन(ग) धन(घ) कुछ नहीं। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) प्रोत्साहन |
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भौतिक साधनों में सर्वश्रेष्ठ साधन है(क) खाद्य पदार्थ(ख) घरेलू उपकरण(ग) वस्त्र(घ) धन |
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Answer» सही विकल्प है (घ) धन |
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